जिसके इश्क़ में शहर दीवाना हुआ करता था,
आज उसे रोने को एक कंधा भी नसीब नहीं… 💔
आज उसे रोने को एक कंधा भी नसीब नहीं… 💔
किस्तों में मरता रहा हूँ मैं,
ज़िंदा भी हूँ… ये कैसा फ़साना है।
हर ज़ख़्म ने चुप रहना सिखा दिया,
अब दर्द ही मेरा आशियाना है।
ज़िंदा भी हूँ… ये कैसा फ़साना है।
हर ज़ख़्म ने चुप रहना सिखा दिया,
अब दर्द ही मेरा आशियाना है।
मुझे तुझसे नहीं, तेरी कमी से इश्क़ है,
तू नहीं है तो भी तेरा ही असर रहता है।
तू नहीं है तो भी तेरा ही असर रहता है।
जिसने प्रेम को धर्म का रूप दिया,
हर युग में त्याग का स्वरूप दिया।
सीता हेतु जिसने जग से युद्ध किया,
राम ने पति को भी आदर्श रूप दिया।
दर्पण
हर युग में त्याग का स्वरूप दिया।
सीता हेतु जिसने जग से युद्ध किया,
राम ने पति को भी आदर्श रूप दिया।
दर्पण
❝हमारी आंखों पर भरोसा कीजिए जनाब,
गवाही तो अदालतें मांगा करती हैं।❜❜
गवाही तो अदालतें मांगा करती हैं।❜❜
तेरी यादों का कोई हिसाब नहीं होता,
हर लम्हा बस तेरा ही ख्वाब होता।
सांसों में घुला है तेरा ही नाम,
इश्क़ ऐसा हो तो फिर जनाब होता।
दर्पण
हर लम्हा बस तेरा ही ख्वाब होता।
सांसों में घुला है तेरा ही नाम,
इश्क़ ऐसा हो तो फिर जनाब होता।
दर्पण
❝कितने मजबूर हैं हम प्यार के हाथों,
न तुझे पाने की औकात, न तुझे खोने का हौसला।❜❜
न तुझे पाने की औकात, न तुझे खोने का हौसला।❜❜
❝हमनें कब माँगा है तुमसे अपनी वफ़ाओ का सिला,
बस दर्द देते रहा करों मुहब्बत बढती जाऐगी।❜❜
╭─💞 लेखक ~ ✍️ अज्ञात
╨───,,,,,,,,───────,,,,,,,─ 💖481
बस दर्द देते रहा करों मुहब्बत बढती जाऐगी।❜❜
╭─💞 लेखक ~ ✍️ अज्ञात
╨───,,,,,,,,───────,,,,,,,─ 💖481
❝बड़ी ही खूबसूरत शाम थी वो तेरे साथ की,
अब तक खुशबू नहीं गई मेरी कलाई से तेरे हाथ की।❜❜
अब तक खुशबू नहीं गई मेरी कलाई से तेरे हाथ की।❜❜
हमने चाहा भी तो इल्ज़ाम उठा कर चाहा,
वो ये समझे कि मोहब्बत नहीं करेगा कोई।
तेरे जाने से जो ख़ाली हुई दुनिया मेरी,
अब उसे फिर से इमारत नहीं करेगा कोई।
भैरव
वो ये समझे कि मोहब्बत नहीं करेगा कोई।
तेरे जाने से जो ख़ाली हुई दुनिया मेरी,
अब उसे फिर से इमारत नहीं करेगा कोई।
भैरव
❝मैं खुद हैरान हूं की तुझसे इतनी मोहब्बत क्यूं है मुझे,
जब भी प्यार शब्द आता है चेहरा तेरा ही याद आता है।❜❜
जब भी प्यार शब्द आता है चेहरा तेरा ही याद आता है।❜❜
आसाँ नहीं थी तर्क-ए-मोहब्बत की दास्ताँ
दो आंसुओं ने आख़िरी पैग़ाम लिख दिया
हम को किसी के हुस्न ने शाएर बना दिया
होंटों का नाम ले न सके जाम लिख दिया
दो आंसुओं ने आख़िरी पैग़ाम लिख दिया
हम को किसी के हुस्न ने शाएर बना दिया
होंटों का नाम ले न सके जाम लिख दिया
तीसरी आँख का जलवा जो देख ले कोई,
वो ही सच-झूठ के परदे उछालते हैं।
वो ही सच-झूठ के परदे उछालते हैं।
इन दीवारों ने मेरी तड़प को करीब से देखा है,
मुझे खुद से लड़ते और हारते देखा है,
ये रास्ता जानता है कि क्यों रुकी हूँ मैं यहाँ,
इसने मुझे किसी की राह तकते हुए बिखरते देखा है
मुझे खुद से लड़ते और हारते देखा है,
ये रास्ता जानता है कि क्यों रुकी हूँ मैं यहाँ,
इसने मुझे किसी की राह तकते हुए बिखरते देखा है
जैसे ही कुछ शांत सा होता है,
शाम तारों को बिखेर रही होती है,
हवा बिना बताए बह रही होती है।
आस-पास सब अपनी हद में होता है,
जितनी जगह चाहिए होती है,
उतनी में ही हम बैठे होते हैं।
शून्य के इर्द-गिर्द ही पहुँचे होते हैं,
तभी—
एक टूटता तारा गुज़रता है।
कुछ माँगने वाला नहीं होता,
कुछ माँगा था कभी—
बस उसे याद दिलाने वाला।
तारा बाँध ले जाता है ख्वाहिशें,
और छोड़ जाता है
पुराने धागे…
शाम तारों को बिखेर रही होती है,
हवा बिना बताए बह रही होती है।
आस-पास सब अपनी हद में होता है,
जितनी जगह चाहिए होती है,
उतनी में ही हम बैठे होते हैं।
शून्य के इर्द-गिर्द ही पहुँचे होते हैं,
तभी—
एक टूटता तारा गुज़रता है।
कुछ माँगने वाला नहीं होता,
कुछ माँगा था कभी—
बस उसे याद दिलाने वाला।
तारा बाँध ले जाता है ख्वाहिशें,
और छोड़ जाता है
पुराने धागे…
टुकड़े पड़े थे राह में किसी महबूब की तस्वीर के,
लगता है कोई दीवाना आज समझदार हो गया.!!!
लगता है कोई दीवाना आज समझदार हो गया.!!!
दिल के हर कोने में दिक्कत होती हैं
कुछ पा कर खोने में दिक्कत होती हैं
तुम तो रोज़ ही ख़्वाबों में आ जाती हों
मुझको फ़िर सोने में दिक्कत होती हैं
कुछ पा कर खोने में दिक्कत होती हैं
तुम तो रोज़ ही ख़्वाबों में आ जाती हों
मुझको फ़िर सोने में दिक्कत होती हैं
टूट जाता है इसलिए शायद वो सपना है
रूठ कर जो वापस आता है वो ही अपना है..
💛💛💛
रूठ कर जो वापस आता है वो ही अपना है..
💛💛💛
राधा रानी के जमाने से चलता आ रहा है
अगर प्रेम सच्चा हो तो बिछड़ना तय है....!
अगर प्रेम सच्चा हो तो बिछड़ना तय है....!