"दुनिया समझ रही है कि चमक गया हूँ मैं,
पर दिल ही जानता है कितना थक गया हूँ मैं।
आसान लग रहा है सफ़र देखने में, पर
दीवानगी की आख़िरी हद तक गया हूँ मैं।
पर दिल ही जानता है कितना थक गया हूँ मैं।
आसान लग रहा है सफ़र देखने में, पर
दीवानगी की आख़िरी हद तक गया हूँ मैं।
सोचने वालों की दुनिया,
दुनिया वालों की सोच से अलग होती हैं।
दुनिया वालों की सोच से अलग होती हैं।