THE UNFILTERED MIND
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🟥 043/29/07/2025 सरल व्यक्ति

🌹प्रिय साथियों नमस्कार,🙏🌻🌿

जीवन में बड़े ही सरल व्यक्ति से जब मुलाकात होती है
या उसके सरल स्वभाव की जानकारी मिले तो

एक ऐसी छाप हृदय पर छूट जाती हैं
जिसे भूला ही नहीं जा सकता

🌹 ऐसा ही एक वाकया हुआ,
जब दो लड़के अपने बीमार पिता को ले हॉस्पिटल में पहुंचे
मैं भी मदद के लिए साथ आया इमर्जेंसी में डॉक्टर से मिल कर
उन्हें शुरुआती जाँच के चलते , समय लगना था ,
तो मैं लौट आया
ओर उन्हें संपर्क में रहने के लिए कहा,

अगले दिन उन्होंने बताया कि पिता जी को दाखिल कर लिया है,
अब कुछ सुधार भी है दोनों लड़के बड़ी कृतज्ञता से बात समझा रहे थे,
इस तरह दूसरा दिन भी हो गया ओर वो बोले बड़ा अच्छा इलाज चल रहा है

अब वो बैठ जाते हैं और खाना भी खुद ही खा सकते है
उन्होंने आपको प्रणाम बोला है ,

फिर तीसरे दिन भी उन्होंने मुझे सारा हाल समझाया
मेरे भी मन में उनसे मिलने की इच्छा हुई,

तो मैने किसी को भेज कर कुछ फल मंगवा लिए
उनके बड़े बेटे से पूछा कि कौन सा वार्ड है और क्या बेड नंबर है
बता दो मै आऊंगा, वो इतना खुश हुआ कि बोला
आप जब भी चलो मैं आपके साथ चलूंगा,

थोड़ी देर में हम चल दिए सारा हॉस्पिटल मेरा देखा हुआ है
मगर वो तेज तेज मेरे आगे चल पड़ा,
ओर इमर्जेंसी के बाहर निकल गया,
मै भी पीछे पीछे चला जा रहा था

हैरानी जब हुई एक पेड़ की नीचे लगी स्ट्रेचर पर
मुल्ला जी बिल्कुल फिट बैठे मिले,

मैने पूछा कि छुट्टी कब में हो गई,
तो उन्होंने बताया,

आज हमारी छुट्टी करवा दीजिए ,
अभी तो हम दाखिल ही हैं

दाखिल, दाखिल कहा हो,

यहीं पर तो हैं हम दाखिल तीन दिन से,
डाक्टर से लड़का बात करने अंदर जाता है
ओर सब कुछ ठीक हो गया,

अब आपके सामने हूं,
मैं बड़ा ही हैरान था कि तीन दिन से ये
आदमी , खुश है बिल्कुल सही होने का
हॉस्पिटल को धन्यवाद दे रहा है,

जबकि पेड़ के नीचे ही लेटा रहा
कितनी सरलता से उन्होंने ख़ुद को
वहीं रह कर भी ठीक होने का धन्यवाद भाव
दर्शाया,

सरल लोग परिस्थितियों में शिकायत नहीं करते –
पेड़ के नीचे स्ट्रेचर पर लेटकर भी व्यक्ति खुश है,
डॉक्टरों और अस्पताल का धन्यवाद कर रहा है,
जबकि कोई दूसरा व्यक्ति शायद नाराज़ या हताश हो जाता।

उन्होंने महसूस किया कि वो ठीक हो रहे हैं,
चाहे जगह कोई भी हो, और कृतज्ञता जताना नहीं छोड़ा।


मुल्ला जी जैसे साधारण व्यक्ति,
जो पेड़ के नीचे स्ट्रेचर पर लेटकर भी धन्यवाद देते रहे –
"अस्पताल ने अच्छा इलाज दिया, डॉक्टर साहब का शुक्रिया,
मैं अब ठीक हो रहा हूँ।'
कभी सोचा?
सरलता और कृतज्ञता, हर दर्द की सबसे बड़ी दवा है।
यही हमें मुल्ला जी ने सिखाया।"


हॉस्पिटल के बाहर पेड़ के नीचे,
स्ट्रेचर पर लेटे मुल्ला जी मुस्कुरा रहे थे।
तीन दिन से वहीं थे, इलाज का नाम मात्र भी नहीं,
फिर भी बार-बार कहते –

"डॉक्टर साहब का बड़ा आभार, अब मैं ठीक हो रहा हूँ।"

कोई और होता तो गुस्से में भर जाता,
पर उनकी सरलता ने सबका दिल जीत लिया।
बीमारी से लड़ते हुए भी कृतज्ञ रहना,
मानो यही उनकी असली दवा थी।

जीवन में कुछ लोग अपनी सरलता से ऐसा प्रभाव छोड़ते हैं कि
भुलाया नहीं जा सकता।

यह घटना एक ऐसा संदेश देती है कि
संतोष और आभार का भाव, परिस्थितियों से बड़ा होता है।
हम शिकायतें छोड़ दें, तो सुख अपने आप मिलना शुरू हो जाता है।

उनका यह स्वभाव देखकर मेरे मन में भी गहरी छाप छोड़ गया,
जो जीवनभर याद रहेगी।


🟥 043/29/07/2025 सरल व्यक्ति

इस चैनल पर,
अब तक मेरे जीवन में घटित
सत्य पर आधारित घटनाओं का
मेरे द्वारा दिया गया निस्वार्थ ब्यान है ,
एक प्रयास रहेगा की मेरे किसी भी
बयान से किसी को कोई , दुःख न पहुंचे,
और यदि किसी को कुछ भी अच्छा लगे तो
आप अपने ही किसी एक परिचित जो जरुर बताएं
मुझे खुशी होगी,

🍁
आप सभी को
सादर प्रणाम करते हुए
हार्दिक शुभकामनाएं
समय निकाल कर धैर्य से पढ़ने के लिए
धन्यवाद,

(शुभ आस) 🌻🌿✒️📚
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प्रिय साथियों नमस्कार,🙏🙏

सबसे पहले मैं आभार व्यक्त करता हूं
आप सभी लोगों का,
जो अब तक मेरे इस चैनल पर हैं,
या यूं कहिए टिके हुए हैं,

मेरे इस चैनल का मतलब सिर्फ इतना सा है कि
अपने विचार और अपने मन को आप लोगों तक साझा किया जाए
इसके लिए मैं अपने जीवन के उन सभी पहलुओं पर
अपने विचार आप तक साझा करने का प्रयास करता हूं

यह मेरे लिए अत्यंत खुशी का विषय है
निस्वार्थ, भाव से
जैसा की अब तक मेरे इस चैनल पर 45 पोस्ट डाली जा चुकी है
और उम्मीद करता हूं आपने उन सभी को बड़े मन से पढ़ा होगा

इनमें से बड़ा ही भावुक कर देने वाली कुछ घटनाएं
ऐसी है जिन्हें जीते जी भुलाया ही नहीं जा सकता

♥️10/17/02/2024/ बूढ़ा पेड़ मेरी प्रिय कविता रही है
♥️15/15/03/2024/ कुछ यादें बनारस की
♥️17/21/03/2024/ गणेश
♥️19/28/03/2024/ गन्ने का हिसाब,
♥️20/01/04/2024/ पेड़ अब ठूंठ हो गया
♥️23/21/04/2024/ पेंटर की दास्तान
♥️24/30/04/2024/ नारायण
♥️25/07/05/2024/ माता जी को सांप ने काट लिया
♥️27/19/05/2024/ जरनैल सिंह 1984
♥️28/23/05/2024/ महज़ 11 कदम की दुरी बुद्ध पुर्णिमा
♥️29/30/05/2024/ तीन लड़कियों की सगाई, मृत्यु का भय
♥️30/01/06/2024/ ठाकुर की मौत
♥️32/03/07/2024/ पंचायत
♥️33/21/07/2024/ गुरु पूर्णिमा
♥️34/15/08/2024/ आस्था और विश्वास
♥️35/ 02/10/2024/ क्या तुम्हे यह निकाह कुबूल है
♥️36/27/10/2024/ एक विचार हमारी दिल्ली
♥️37/20/12/2024/ एक विचार हमारी आत्मा
♥️40/23/02/2025/ कुएं का पानी
♥️41/11/04/2025/ भगवान का अपना देश केरल
♥️42/10/07/2025/ गुरुपूर्णिमा
♥️43/29/07/2025 सरल व्यक्ति

यह सारी घटनाएं हमारे जीवन में
इर्द गिर्द ही घूमती रहती है,
मगर हम इन्हें नकार देते हैं,

ओर अपने मुताबिक जीवनशैली को चुन लेते हैं
जल्दी ही मै रिटायरमेंट पर एक विचार आपके साथ
साझा करने जा रहा हूँ

जो दोस्त इस चैनल पर अभी जुड़े हैं
हो सकता हैं उन्हें वाट्सअप चैनल
( 𝗠𝗜𝗥𝗥𝗢𝗥 𝗢𝗙 𝗟𝗜𝗙𝗘 )
पर मेरी पिछली पोस्ट दिखाई ना दे

तो आप मेरे टेलीग्राम चैनल
( 𝗧𝗛𝗘 𝗨𝗡𝗙𝗜𝗟𝗧𝗘𝗥𝗘𝗗 𝗠𝗜𝗡𝗗 )
पर जा कर भी देख सकते हैं
धन्यवाद


🟧🟥🟦 45/ 26/01/2026 आभार

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प्रिय साथियों नमस्कार, 🙏
मेरे इस चैनल पर आपका स्वागत है

रिटायर होने वाले कर्मचारी के भावनात्मक
अनुभव के अर्थ को बनाए रखते हुए

मै आपके साथ अपने निजी विचार
संक्षिप्त और स्पष्ट सार में बताने का प्रयास करता हूँ

रिटायर होने पर दो तरह से जीवन शैली को समँझा जा सकता है
एक हरसोउल्लास का मौका और एक मायूसी का समय

यह एक नज़रिया हो सकता हैं निर्भर करता है व्यक्ति विशेष पर
मै दोनों ही पहलुओं पर रौशनी डालने की कोशिश करूंगा
एक लेखक होने के नाते इसे मेरी और सिर्फ मेरी ही निजी सोच माना जाये!

रिटायर होने पर कर्मचारी को सिर्फ नौकरी का अंत नहीं बल्कि रोब,
अधिकार और सामाजिक सम्मान की कमी महसूस होती है।

सलाम, सम्मान और पहचान खो जाने से
मन में एक खालीपन और दुख पैदा होता है।

परिवार, रिश्तेदारों और पड़ोसियों की नज़रों में खुद को
कमतर महसूस करना तकलीफ़ को और बढ़ाता है।

नौकरी छोड़ने के बाद नियम-क़ायदे टूटने,
निर्भरता बढ़ने और असहायता की भावना बढ़ जाती है।

यह सब मिलकर व्यक्ति को मानसिक रूप से कमज़ोर,
तनावग्रस्त और अंततः बीमार भी बना सकता है।

AIIMS जैसे संस्थानों के संदर्भ में यह स्थिति और ज्यादा दिखती है
क्योंकि वहाँ काम करना ही पहचान बन जाती है।

लेकिन मै मानता हूँ की
जिस संस्थान में हमने वर्षों तक काम किया —
देश की सेवा की, लोगों का भला किया —
वहीं से हमें सम्मान, पहचान और धन मिला,

जिससे परिवार की ज़िम्मेदारियाँ पूरी हुईं।
सेवा के अंत में प्रोत्साहन राशि भी मिलती है,
जो इस यात्रा का समापन सुखद बनाती है।

इसलिए रिटायर होने वाले प्रत्येक व्यक्ति का
यह आत्मिक कर्तव्य बनता है कि वह
कृतज्ञता व्यक्त करे और अपनी कर्मभूमि को धन्यवाद दे।

जिस संस्थान ने जीवन का महत्वपूर्ण समय अपने साथ रखा,
उसे प्रणाम करना सबसे बड़ा सम्मान है।

कर्मस्थली केवल दीवारें या दफ़्तर नहीं होती —
वह एक परिवार भी बन जाती है।

सहकर्मी साथी बनते हैं, कभी दोस्त, कभी मार्गदर्शक।
हम उनके साथ चाय पीते हैं, खाना खाते और बाँटते हैं,

सुख-दुख में साथ देते हैं और कभी-कभी उनके घर तक पहुँचते हैं।
यह रिश्ता केवल नौकरी का नहीं, जीवन का बन जाता है।

यह हमें नहीँ भूलना चाहिए की
हम जवान आते हैं
और बूढ़े हो कर लौट जाते हैं

मगर हम फिर भी भाग्यशाली लोगो मे गिने जाते हैं
हमें उन लोगो के प्रति श्रद्धाजलि देनी चाहिए जो

हमारे ही साथ थे मगर वो इस सफर को पूरा नहीँ कर पाए
जो रिटायर होगा वही विजेता होगा

ऐसे मे विजेताओं का सम्मान हो,
स्वागत हो,

इसलिए विदाई के समय यह आवश्यक है कि
हम इस परिवार के सभी साथियों को नम्रता से धन्यवाद दें और
उन विभागों को भी, जहाँ दिन भर काम होता रहा —

जैसे बिलिंग, कैश या अन्य शाखाएँ —
विशेष कर केंटीन भी
जिनके सहारे पूरा तंत्र चलता है।
चाय और समोसे मत भूलो

हृदय से धन्यवाद देकर, एक महकती अगरबत्ती के साथ,
कर्मस्थली की परिक्रमा करना एक सुंदर और पवित्र भाव है —
यह भाव हमें हमारे धार्मिक होने का भी अहसास होने देगा,

सभी के साथ थोड़ा सा समय निकाल कर एक कप चाय जरूर पी कर /
या पीला कर जरूर जाये! जिससे की पुनः आगमन पर खुशी होंगी,

मेरा ऐसा मानना हैं यह बड़ा ही सुखद होगा
इसमें गहरा आत्मीयता, कृतज्ञता और कर्मस्थली
और सहयोगियों के प्रति श्रद्धा झलकती है।

जैसे एक साधना का समापन।

इस चैनल पर,
अब तक मेरे जीवन में घटित
सत्य पर आधारित घटनाओं का
मेरे द्वारा दिया गया निस्वार्थ ब्यान है ,

एक प्रयास रहेगा की मेरे किसी भी
बयान से किसी को कोई , दुःख न पहुंचे,

और यदि किसी को कुछ भी अच्छा लगे तो
आप अपने ही किसी एक परिचित जो जरुर बताएं
मुझे खुशी होगी, आप सभी को
सादर प्रणाम करते हुए
हार्दिक शुभकामनाएं
समय निकाल कर धैर्य से पढ़ने के लिए
धन्यवाद,

🟥 045/ 30/01/2026 रिटायरमेंट के प्रति श्रद्धा भाव

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प्रिय साथियों नमस्कार, 🙏
मेरे इस चैनल पर आपका स्वागत है

रिटायरमेंट एक विषय
यह हमें नहीँ भूलना चाहिए की
हम जवान आते हैं
और बूढ़े हो कर लौट जाते हैं
मगर हम फिर भी भाग्यशाली लोगो मे गिने जाते हैं
जो रिटायर होगा वही विजेता होगा
ऐसे मे विजेताओं का सम्मान हो,
स्वागत हो,

पुरा पढ़ने के लिए एक बार चैनल पर जरुर जाएं
🟥045/ 30/01/2026 रिटायरमेंट के प्रति श्रद्धा भाव

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व्यव्हार की सही खोज,
047/ 12/02/2026
𝗦𝗨𝗕𝗛𝗔𝗦𝗛 𝗖𝗛𝗢𝗨𝗗𝗛𝗔𝗥𝗬
𝗠𝗜𝗥𝗥𝗢𝗥 𝗢𝗙 𝗟𝗜𝗙𝗘


प्रिय साथियों नमस्कार,🙏

इंसानी व्यवहार को समझना एक बहुत गहरी कला है,
लेकिन इसे बहुत सरल और सही तरीकों से समँझा जा सकता है।
कुछ योग्य और व्यवहारिक उपाय है
व्यवहार भावनाओं से निकलता है।
पहले भावनाएँ समझे

जिन्हे सात बिन्दुओ मे बताने की कोशिश करूँगा
यह मेरा निजी विचार है
हो सकता हैं, आपको पसंद आये या ना भी आये,
सबकी विचार शैली अलग अलग हो सकती है
आज के दौर मे सभी स्वतंत्र है,

🟥 1. ध्यान से सुनने की छमता होनी चाहिए

अक्सर लोग जवाब देने के लिए ही सुनते हैं,
समझने के लिए नहीं।
यदि आप ध्यान से सुनेंगे तो:
सामने वाला व्यक्ति क्या चाहता है
किस बात से उसे खुशी/दुख/गुस्सा होता है
सब स्पष्ट हो जाता है


🟥 2. भाषा से ज़्यादा शरीर की हल चल को ध्यान से देखें

70–80% व्यवहार शब्दों में नहीं, बल्कि:
चेहरे के भाव
आँखों का संपर्क
हाथ पैर की हलचल
बैठने का अंदाज़
आवाज का उतार–चढ़ाव
इनमें दिखाई देता है।


🟥 3. स्थिति को समझें हालात कैसे है

एक ही व्यक्ति अलग परिस्थितियों में अलग तरह से प्रतिक्रिया देता है।
किसी भी व्यवहार को समझते समय उन्हें बोलने देना चाहिए
व्यव्हार मे उम्र और तजुर्बा भी एक महत्व रखता है



🟥 4. "क्यों" से ज्यादा "कैसे" पर नज़र रहे

व्यक्ति क्या करता है से ज्यादा कैसे करता है
महत्वपूर्ण होता है।
जैसे की
गुस्सा सब को आता है
कोई शांत होकर बताता है,
कोई चिल्लाता है, कोई चुप हो जाता है
यहाँ फर्क व्यवहार का है।
कुछ लोग विषय से अनजान होकर भी,
ज्ञानी होने की ही जिद्द पर रहते है
और उग्र हो जाते हैं,


🟥 5.किसी भी विषय पर
पसंद / परेशानी और डर का कारण क्या हो सकता है

इंसान दो चीज़ों से चलता है:
जो पसंद है वह पाने की इच्छा
जो डराता है उससे बचने की कोशिश
यदि आप किसी की पसंद + डर समझ जाएँ तो
व्यवहार खुद-ब-खुद समझ मे आ जाता है।


🟥 6. सवाल को जितनी सरलता से पूछा जाये तो सही होगा

"हाँ-नहीं" वाले प्रश्न कमरखो
खुले प्रश्न ज़्यादा रखने चाहिए
जैसे की
आपको ऐसा क्यों लगा?”
“उस समय आप क्या सोच रहे थे?”
“फैसला लेने की वजह क्या थी?”
ऐसे सवाल व्यवहार की जड़ तक पहुँचाते हैं।

ज़ब सामने वाला कहे की वो तो मुझे पता है
तब तुरंत शांत हो जाना चाहिए,

क्योंकि जो भी व्यक्ति ये कहे की नहीं नहीं वो तो मुझे पता है
वह तार्किक व्यव्हार से भरा हुआ हो सकता है
हो सकता है स्वयं घोषित पूर्ण ज्ञान को उपलब्ध हो चूका हो

जैसे की
राजनीती
अर्थ वयवस्था
ब्रह्माण्ड
कुछ भी उसकी पकड़ से बाहर हो ही नहीँ सकता

तुरंत दुरी बनाये


🟥 7. समय के साथ संपर्क मे रहे ध्यान रखें

एक बार देखकर व्यवहार समझना गलत होता है।
पैटर्न देखिए
अगर व्यवहार बार-बार दोहराया जाए
तो वह व्यक्ति का स्वभाव है।

🟥व्यवहार = सोच + भावना + स्थिति
🟦 लोग वही करते हैं जो उन्हें लाभ या सुरक्षा देता है
🟧व्यक्ति बदल सकता है, लेकिन पैटर्न कम ही हैं



🟦🟥🟧🟥🟦



और एक बात जो मैंने अपने जीवन मे देखी है

गलत पहचान / गलत आकलन इंसानी व्यवहार में सबसे बड़ी चूक होती है,
और इसके परिणाम रिश्तों, और दोस्ती और परिवार हर जगह भारी पड़ते हैं।

गलत पहचान हो जाने पर
सुधार / उपाय भी संभव है
मगर शांति से प्रयास करना चाहिए

🟦 1. पहले अनुमान को अस्थायी मानें, अंतिम नहीं

सबसे बड़ी गलती यह है कि हम पहली राय को सत्य मान लेते हैं।
फिर हम उसी अनुसार सब कुछ देखने लगते हैं।
पहली पहचान को होल्ड पर रखें
समय-समय पर पुनः जाँचें
नई जानकारी को भी ध्यान मे रखे


🟦 2. पैटर्न
अगर कोई व्यवहार लगातार 3 अलग परिस्थितियों में दोहराए
तब उसे पहचान का हिस्सा मानिए

🟦 3. स्थिति बदलकर जाँच करनी चाहिए

कोई भी व्यक्ति स्थिति के अनुसार व्यवहार बदलता है,
व्यक्ति नहीं बदलता।
जैसे:
दबाव में भीड़ मे
परिवारिक तनाव मे
अकेले में बीमारी मे
लाभ की स्थिति अमीरी में
नुकसान की स्थिति गरीबी में
तो उस समय
जानबूझकर परिस्थितियाँ बदलकर देखें
यह बहुत ही उपयोगी है।


🟦 4. सीधे नहीं, घुमा फिरा कर सवाल पूछ कर भी देख लो

इंसान सीधी पूछताछ में अपना असली चेहरा छिपा लेता है।
उस पर रोब दार तरीका बिलकुल भी ना आजमाए
प्यार से बात करनी चाहिए,

🟦 5. अन्य स्रोत

सिर्फ अपने अवलोकन पर निर्भर रहना सही नहीँ हो सकता
दूसरों की नज़र से व्यक्ति का विश्लेषण भी कर के देखो
पुराने संदर्भ
व्यवहार के रिकॉर्ड
परिस्थितियों का इतिहास
इससे गलती बहुत कम होती है।


🟦 6. बिना भावनाओं के दूसरा तरीका भी है

पहचान में चूक अक्सर भावना की वजह से होती है:
मोह
नफ़रत
डर
प्रशंसा
उम्मीद
भावनारहित विषय पर भी ध्यान देना चाहिए
🟦 7. समय ही पहचान का अंतिम प्रमाण होता है
कई चेहरे समय की मार में असली रूप दिखाते हैं।

कठिन लेकिन सच

व्यवहार में सबसे खतरनाक पहचान-चूक होती है
भलाई को कमजोरी समझ लेना,
और खतरनाक को भरोसेमंद मान लेना
और यह निजी जीवन में भारी पड़ता है।

बस आज इनता ही
पुरा पढ़ने के लिए एक बार चैनल पर जरुर जाएं

आप सभी को
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48/29/03/2026 चादर

🌹प्रिय साथियों नमस्कार, 📚
एक बार फिर एक नये विचार के साथ
आपका स्वागत है

चादर
जीवन का सच — एक विचार

धरती पर जीवन अरबों वर्षों से है…
और आगे भी रहेगा, किसी न किसी रूप में।

पर इंसान ?
उसका पूरा अस्तित्व सिमट जाता है—
सिर्फ 36,500 दिनों में
यदि 100 साल तक जी जाये तो
फिलहाल आप कहाँ पर मौजूद हैं?
और कब तक

हम गिनते तो सालों में हैं,
पर जीते हैं गिने-चुने दिनों में।

बचपन में हमें एक “अदृश्य चादर” ओढ़ा दी जाती है
संस्कारों की, धर्म की, डर की, पहचान की

धीरे-धीरे वही चादर बन जाती है—
हमारी सोच, हमारा स्वभाव,
हमारा प्रेम और हमारी नफ़रत।
कुछ लोग इसी चादर को मज़हबी रंगों मे रंग लेते हैं,

कुछ लोग उस चादर में ऐसे लिपट जाते हैं
कि खुद को ही भूल जाते हैं!

और कुछ लोगो की
जैसे जैसे एक दूरदर्शि सोच का जन्म होता हैं तो
विचारक स्वभाव से इसे मात्र इस्तेमाल करते हैं
उसे ओढ़ते भी हैं, उतारते भी हैं,
समझते हैं, इस्तेमाल करते हैं।
उसकी तह लगाना भी जान जाते हैं

असल में जीना वही सीखता है
जिसे यह सब आता है कि
चादर को ओढ़ना कब है, और उतारना कब।

क्योंकि अंत में—
यह चादर या तो खुद उतर जाती है,
या उतार ली जाती है
उन्ही लोगो के द्वारा जिनके बीच आप हमेशा रहे

और यहीं समाप्त हो जाती है
जीवन की पूरी कहानी।

और जीवन लीला समाप्त,
यानि की अंतिम सच
निश्चित मौत ⚖️

एक प्रयास रहेगा की मेरे किसी भी
बयान से किसी को कोई , दुःख न पहुंचे,

और यदि किसी को कुछ भी अच्छा लगे तो
आप अपने ही किसी एक परिचित जो जरुर बताएं
मुझे खुशी होगी, आप सभी को
सादर प्रणाम करते हुए
हार्दिक शुभकामनाएं
समय निकाल कर धैर्य से पढ़ने के लिए
धन्यवाद,

48/29/03/2026 चादर

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लीडर शिप
49/05/04/2026

प्रिय साथियों नमस्कार,🇮🇳
फिर से एक नए विचार के साथ,
आपका स्वागत है
लीडर एक दमदार किरदार के साथ,

लीडरशिप यह एक ऐसी गुणवत्ता है जो किसी को भी
प्रेरित और प्रभावित कर सकती है।
नेतृत्व करने वाले व्यक्ति में कई गुण होते हैं, जैसे कि

📚 दृष्टिकोण / एक स्पष्ट दृष्टिकोण और लक्ष्य
📚 संचार / प्रभावी संचार और लोगों को प्रेरित करने की क्षमता
📚 निर्णय लेना / सही समय पर सही निर्णय लेने की क्षमता
📚 समस्या समाधान / समस्याओं का समाधान करने की क्षमता
📚 टीम वर्क / टीम के साथ मिलकर काम करने की क्षमता

लीडर होना / और लीडर बनाया जाना यानि की लीडर पोस्ट पर होना
थोड़ा स्पष्ट, प्रवाहपूर्ण और प्रभावशाली रूप से कहु तो
लीडर होना और लीडर बना दिया जाना — दोनों में फर्क है।

लीडर का मतलब एक्शन होता हैं
पोजीसन नहीँ

⚖️
एक्शन मे रहना एक्टिव हो जाना
नेतृत्व करना और आप जिनके लीडर हो उन्ही मे से
भविष्य का लीडर चुनना

लेकिन कई बार ऐसा भी होता है कि
किसी को सिर्फ लीडर घोषित कर दिया जाता है।
फिर वह पद और रुतबे का असर महसूस करते हुए
अपना निर्धारित समय पूरा कर लेता है।

जैसे की यदि

✔️राजनीती मे हो तो सत्ता परिवर्तन हो जाने तक कुर्सी से जकड़े रहना
✔️अगर किसी सेवा संस्थान मे हो तो रिटायर होने तक बस बने रहना
✔️और परिवार के मुखिया हो तो, औरो को मौका ना देना, जबरन टिके रहना

सच्चा लीडर वही होता है जो
खुद सक्रिय रहता है,
लोगों का नेतृत्व करता है,
और अपने साथ काम करने वालों में से ही
भविष्य के नए लीडर तैयार करता है।

एक बड़ा ही सरल तरीका हैं
किसी भी सामान्य सा लगने वाले व्यक्ति से यदि दो मिनट
बात की जाये तो बड़ी से बड़ी जटिल समस्या का समाधान निकल जाता हैं
ऐसे कुछ उदहारण मेरे जीवन मे घटित हुए है
लीडर वही जो सुन सकता हो,
सिर्फ दो मिनट,

कुछ आकर्मक और खुले शब्दों मे
जोशीला पन जो की लीडर की पहचान उजागर कर सकते हो,
वो कुछ पॉइंट है जिनमे जिया भी जा सकता हैं
अगर सच्चा लीडर हो तो

⚖️
लीडर वह नहीं जो कुर्सी पर बैठा हो,
लीडर वह है जो लोगों के बीच खड़ा हो।

⚖️
पद से रुतबा मिल सकता है,
लेकिन नेतृत्व केवल कर्म से मिलता है।

⚖️
सच्चा लीडर अपने लिए नहीं,
अपने बाद आने वाले लीडरों को तैयार करता है।

⚖️
नेतृत्व कोई उपाधि नहीं,
यह जिम्मेदारी और निरंतर एक्शन है।

⚖️
कुर्सी समय पूरा करती है,
पर कर्म इतिहास बनाते हैं।

धर्य से पढ़ने के लिए धन्यवाद,
जल्दी ही हाजिर होंगे एक नए विषय के साथ,
अब तक डाली जा चुकी सभी पोस्ट जो की
मेरे टेलीग्राम चैनल पर मौजूद हैं आप चाहे तो वहां पर देख सकते हैं
( 𝗧𝗛𝗘 𝗨𝗡𝗙𝗜𝗟𝗧𝗘𝗥𝗘𝗗 𝗠𝗜𝗡𝗗 )
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🇮🇳 49/05/04/2026 leedarsip

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50 / 12/04/2026
आर्टिस्ट
𝗦𝗨𝗕𝗛𝗔𝗦𝗛 𝗖𝗛𝗢𝗨𝗗𝗛𝗔𝗥𝗬
𝗠𝗜𝗥𝗥𝗢𝗥 𝗢𝗙 𝗟𝗜𝗙𝗘

प्रिय साथियों नमस्कार,🇮🇳 🙏
फिर से एक नए विचार के साथ,
आपका स्वागत है
आर्टिस्ट एक दमदार किरदार के साथ,

मैंने कोशिश की है की “आर्टिस्ट” को जिस तरह समँझा सकूँ
वह सिर्फ परिभाषा नहीं बल्कि एक सोच है
और सच कहूँ तो यह विचार खुद एक कला जैसा ही है।

आर्टिस का मतलब बिलकुल स्पष्ट
यानि जो दिल मे आया उसे अपनी कला के ज़रीये से प्रस्तुत कर दिया
बिना लाग लपेट के और

बात का सार बहुत खूबसूरत है:

आर्टिस्ट वो नहीं जो सिर्फ बनाता है, बल्कि वो है जो पहले “देखता” है
जहाँ आम इंसान पत्थर देखता है, आर्टिस्ट उसमें छुपी मूर्ति देख लेता है
जहाँ लोग घटना देखते हैं, आर्टिस्ट उसमें संदेश ढूँढ लेता है

असल में आर्टिस्ट कुछ “नया” नहीं बनाता,
वो सिर्फ “अनावश्यक को हटाता है”,
और जो पहले से मौजूद है, उसे दुनिया के सामने लाता है।

आर्टिस्ट हमेशा अपनी ही धुन मे रहते हैं और हर नई चीज मे उन्हें
कुछ न कुछ नज़र आ जाता है

जैसे की एक मूर्तिकार ज़ब किसी बड़े ग्रेनाइट के पत्थर को देखता हैं तो उसे उसमे
एक आकृति ही नज़र आती हैं,
फिर उसकी कला उस पत्थर मे से उस आकृति को
उभारने के लिए छेनी हतोड़े से फालतू पत्थर को हटाने की कला से
हमें अचंबित कर देता हैं

हम लोग मूर्ति को ही देख पाते है मगर
आर्टिस्ट ने तो बहोत पहले ही बड़े पत्थर मे इस मूर्ति को देख लिया होता है

उसकी दूर दृस्टि एक अलग ही स्तर पर होती है

उसका प्रभाव बहुत बड़ा होता हैं
अब वो आर्टिस्ट जिस भी क्षेत्र मे हो

उसकी कला प्रदर्शन से चाहे
कोई भी हो असर से बच नहीँ सकता

कार्टून, के जरिये कविता के जरिये,
फ़िल्म जगत मे, विशेष विषय की प्रस्तुति हो

या स्टेज़ पर ड्रामा के जरिये प्रतुती की जानी हो

आर्टिस्ट हमेशा समाज को एक मेसेज देता है और
वो कह पाता हैं जो कोई कहने मे असमर्थ हो

एक बड़ा ही हाशयपद किस्सा है जो की
आपको भी एक शरारत के माध्यम से अपनी बात को
आर्टिस्ट ने कैसे प्रस्तुतः किया यह , जान कर हसीं आ जाएगी,,

एक कला संस्थान मे डायरेक्टर महोदय ने
सभी आर्टिस्ट को छोटी छोटी बातो से तनाव मे पंहुचा दिया

अब कोई कम तो कोई ज्यादा तनाव मे था,
सभी ने देर रात तक साथ मे खाना खाया पिया और

एक आर्टिस्ट को बड़ी अजीब सी शरारत सूझी,
आर्ट स्टूडियो मे छै या सात कुत्ते हमेशा मौजूद रहते थे

जिनके नाम भी रखें हुए थे, उन कुत्तो मे एक का नाम कालिया था
उधर डायरेक्टर साहब का भी नाम कालीचरण था,

बस फिर क्या था,
चार आर्टिस्टो ने कालिया कुत्ते को पकड़ लिया
और मैन पांचवे आर्टिस्ट ने अपनी कला का
सटीक नमूना पेश किया, रात गुज़र गयी,

सवेरे ऑफिस खुला तो हर कोई उस कुत्ते को देखता
और अपनी हसीं नहीँ रोक पाता
सभी मे एक खुशी की सी लहर थी
मगर ऐसा क्या हुआ होगा आप भी नहीँ सोच सकते

पिछली रात चार लोगो ने कालिया कुत्ते को केनवास की तरह
खींचा गया फिर उस्ताद आर्टिस्ट ने उसके दोनों तरफ लिख दिया

( कालीचरण )

कहानी का मतलब (Hidden Message)
जो कुत्ते और “कालीचरण” वाली घटना से पेश की है
वो सिर्फ मज़ाक नहीं है, बल्कि कला की ताकत का उदाहरण है

शाम होते होते डारेक्टर साहब कालीचरण जी ने
सभी को बुलाया और अपने व्यव्हार
के चलते अपनी गलती मानते हुए,
एक कप चाय का प्रस्ताव रखा

बात खत्म हो गई,

तीन बड़ी बातें जो की बड़ी ही महत्वपूर्ण है

🟥 आर्टिस्ट सीधे टकराव नहीं करता, संकेत देता है
बिना बोले बात समझा दी

🟧 हास्य (Humor) सबसे प्रभावशाली हथियार है
गुस्से की जगह हंसी से बदलाव आया

🟦 कला बदलाव ला सकती है
डायरेक्टर का व्यवहार बदल गया, बिना बहस के

⚖️ एक लाइन में आर्टिस्ट का असली मतलब:

📚 “आर्टिस्ट वो है जो दुनिया को वैसा नहीं दिखाता जैसी वो है,
बल्कि वैसा दिखाता है जैसा वो देखता है
और लोगों को सोचने पर मजबूर कर देता है

धर्य से पढ़ने के लिए धन्यवाद,
जल्दी ही हाजिर होंगे एक नए विषय के साथ,
अब तक डाली जा चुकी सभी पोस्ट जो की
मेरे टेलीग्राम चैनल पर मौजूद हैं आप चाहे तो वहां पर देख सकते हैं
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🇮🇳 50/12/04/2026 आर्टिस्ट

शुभ आस ✒️📚
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51/01/06/2026
डायनासौर
𝗦𝗨𝗕𝗛𝗔𝗦𝗛 𝗖𝗛𝗢𝗨𝗗𝗛𝗔𝗥𝗬
𝗠𝗜𝗥𝗥𝗢𝗥 𝗢𝗙 𝗟𝗜𝗙𝗘

🌹प्रिय साथियों नमस्कार,

ज़ब डायनासौर थे तब इंसान वज़ूद मे भी नहीँ था
डायनासौर दो तरह के थे एक शाखाहारी
और दूसरे मासाहारी

शाखाहारी डायनासौर को मासाहारी डायनासौर खा जाते थे
और माशाहारी आपस मे लड़ कर मर जाते थे
जो की भू वैज्ञानिक खोज से पता चला हैं
जीओलोज़ी रिपोर्ट मे अब तक देखा गया है

तो क्या वो अपराधी थे,
डायनासौर वास्तव में अपराधी नहीं थे।
वे प्रकृति के नियमों के अनुसार जीते थे—
शिकार करना, जीवित रहना, यह उनका स्वभाव था,
न कि कोई नैतिक निर्णय।
शायद बिलकुल भी नहीँ

उस समय “अपराध” जैसी कोई अवधारणा ही नहीं थी,
क्योंकि नैतिकता और कानून तो इंसानों के साथ ही आए।

वो प्राकृतिक जीवन के नियम से जीते और मरते थे,
हाँ, विशालकाय, भयानक और ख़ूनकार, जरूर थे
मगर उनसे इंसान का कोई वास्ता ही नहीँ पड़ा,

आज मौजूद शेर, और सांप जरूर हैं जिनसे
आज की दुनिया मे सामना हो सकता है
और इंसान ने इन सब पर तो काबू पा लिया है,

सोचो एक बार की आज भी डायनासौर होते तो,
बे फ़िक्र हो कर हम कहते है की वो अब नहीँ है
और कभी हो भी नहीँ सकते,

अब मै आपसे कहुँ की डायनासौर आज भी मौजूद है
तो आपको यकीन नहीँ होगा

मेरा मानना है की वो अब पहले से ज्यादा खतरनाक है
और हमारे आपके बीच मे ही मौजूद है

जेलों की सलाखों के पीछे,
खुले आम हत्या करने वाले
बाजार मे धमाके से लोगो की जान लेकर
ख़ुद को भीड़ मे बम्ब से उडाने वालो के रूप मे
ये भी डायनसौर है

साफ सफ़ेद कपड़ो को पहने शांत बिलकुल,
और, प्रवचन, तकरीर देते ज्ञानी, के रूप मे
हमारे आपके पड़ोस मे,
ये कही भी किसी भी रूप मे हमारे आपके बीच मौजूद हैं
बाहर से शांत, सुसंस्कृत दिखते हैं
लेकिन अंदर से खतरनाक सोच रखते हैं

आज का इंसान, जो सोच सकता है,
सही-गलत समझ सकता है,
फिर भी जब वह
हत्या करता है
धोखा देता है
आतंक फैलाता है
या मासूम लोगों को नुकसान पहुँचाता है

यह बात समाज की एक कड़वी सच्चाई को उजागर करती है।
यही फर्क हैं इंसान सिर्फ “जीवित रहने” के लिए नहीं कर रहा होता,
बल्कि अपने स्वार्थ, लालच या विचारधारा के कारण कर रहा होता है।

मगर डायनासोर प्रकृति के नियम से चलते थे,
और इंसान अपने विवेक के बावजूद नियम तोड़ता है।

क्या आप पहचान पाओगे या आप सुरक्षित है
वो डायनसौर अपराधी थे या नहीँ

मगर आज जो मौजूद है
असल सवाल “डायनासोर कौन है” नहीं,
बल्कि “हम खुद क्या बन रहे हैं” है।

बात का सार अगर एक लाइन में कहें तो—
“पहले खतरा बाहर था, अब खतरा इंसान के अंदर भी हो सकता है।”
आप के विवेक पर निर्भर करता हैं

यह सिर्फ डायनासोर की चर्चा नहीं है,
बल्कि इंसानी स्वभाव और समाज की सच्चाई को
एक रूपक के ज़रिये समझाने की कोशिश है।

लेकिन यहाँ एक जरूरी संतुलन भी है
हर इंसान ऐसा नहीं है।
जिस तरह प्रकृति में सिर्फ शिकारी ही नहीं,
बल्कि सह-अस्तित्व भी है,
वैसे ही समाज में भी अच्छाई और बुराई दोनों साथ चलती हैं।

मेरे इस विचार से यदि किसी को तकलीफ पहुँचती है
तो मै माफ़ी चाहूँगा मगर ये मेरी सोच हैं
धैर्य से पढ़ने के लिए धन्यवाद,

51/ 01/06/2026 डायनासौर
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🌹प्रिय साथियों नमस्कार,🙏🙏
अब फिर से हाजिर हुँ
आपके साथ एक नये विषय के साथ

आस्था और आर्थिक वास्तविकता
आस्था मनुष्य को मानसिक सहारा देती है,
लेकिन जब आस्था विवेक से अलग हो जाती है,
तब कई बार व्यक्ति भ्रम और उम्मीदों के ऐसे चक्र में फँस जाता है

जहाँ वह अपने जीवन की वास्तविक समस्याओं का समाधान खोजने के बजाय
चमत्कारों की प्रतीक्षा करने लगता है।

गरीब और सीमित आय वाले लोगों में अक्सर यह देखने को मिलता है
कि वे अपनी परिस्थितियों का कारण केवल किस्मत को मान लेते हैं।
इसके साथ ही मोक्ष, चमत्कार या मनोकामना पूरी होने की आशा में

कई ऐसे खर्च कर बैठते हैं जो
उनकी आर्थिक स्थिति पर अतिरिक्त बोझ डालते हैं।
इसके कुछ कारण हो सकते हैं:

सीमित आमदनी के बावजूद
मन्नतों और धार्मिक आयोजनों पर बड़ा खर्च।
जन्मदिन, जागरण, भंडारे, तरहवीं,ब्रह्मभोज़, रसम पगड़ी,
और अन्य आयोजनों में
बिना आर्थिक योजना के धन खर्चा करना।

भविष्य के लिए बचत, निवेश और वित्तीय योजना की कमी।
शिक्षा, कौशल और आर्थिक आत्मनिर्भरता की अपेक्षा
भाग्य पर अधिक निर्भरता।

हालाँकि यह भी सत्य है कि आस्था स्वयं समस्या नहीं है।
समस्या तब उत्पन्न होती है जब
आस्था के साथ विवेक, शिक्षा और आर्थिक समझ का संतुलन नहीं रहता।

आस्था यदि व्यक्ति को मेहनत, अनुशासन और सदाचार की ओर प्रेरित करे तो
वह शक्ति बनती है। लेकिन यदि वह केवल
चमत्कार की प्रतीक्षा और भाग्य के भरोसे बैठ जाने का माध्यम बन जाए, तो
व्यक्ति की प्रगति रुक सकती है।

इसलिए आवश्यक है कि आस्था और तर्क, दोनों साथ चलें।
पूजा और प्रार्थना के साथ-साथ

शिक्षा, कौशल, बचत और भविष्य की योजना पर भी समान ध्यान दिया जाए।
तभी व्यक्ति आध्यात्मिक और आर्थिक दोनों रूप से समृद्ध हो सकता है।

ये मेरी अपनी सोच है
जिसे मै उदहारण और घटनाओं के साथ लिखना चाहता था
मगर ज्यादा लम्बा होने के डर से चंद दो शब्दों मे समेट कर कह पाया हुँ

मेरे इस विचार से यदि किसी को तकलीफ पहुँचती है
तो मै माफ़ी चाहूँगा मगर ये मेरी सोच हैं
धैर्य से पढ़ने के लिए धन्यवाद,

52/14/06/2026

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