‌‌समता मार्ग
53 subscribers
1 photo
172 links
Download Telegram
गांधी मार्गी *कुमार प्रशांत* लिखते हैं : "चुनाव लोकतंत्र की आत्मा नहीं, उसका एक अंशमात्र है। यहां तो चुनाव को ही लोकतंत्र बना दिया गया है जिसमें अपने प्रधान को आगे रख कर सारी पैदल सेना उतारी जाती है।"

https://samtamarg.in/2022/12/16/parties-winning-elections-democracy-losing/
वरिष्ठ पत्रकार *अनिल सिन्हा* लिखते हैं : "यह नफरत को सालोंसाल जिंदा रखने और किसी भी तरह चुनाव जीतने का माडल है। अलबत्ता हिमाचल प्रदेश में यह माडल काम नहीं कर पाया जबकि गुजरात वाले सारे मुद्दे तथा मोदी ब्रांड वहां भी मौजूद थे। यही उपचुनावों में हुआ।"

https://samtamarg.in/2022/12/17/gujarats-electoral-model-has-been-rejected-by-the-rest-of-the-country/
*राजकुमार राकेश* का कथा साहित्य हो, या आलोचनाकर्म, उन्होंने अपने लेखन में भूमंडलीकरण के प्रभावों को प्रमुखता से दर्ज किया है। आधार प्रकाशन ने उन्हें 'प्रथम आधार सम्मान' देने की घोषणा की है। पढ़िए उनसे *शशांक कुमार* की बातचीत।

https://samtamarg.in/2022/12/18/the-dawn-will-come-when-the-supremacy-of-capital-will-lose-its-colour/
आध्यात्मिक साधक एवं 'महात्मा के महात्मा' पुस्तक के लेखक *सुज्ञान मोदी* लिखते हैं : "मत-संप्रदाय के रूप में हम धर्म का कुछ भी नाम रखें, असल धर्म तो गांधीजी की दृष्टि में और सभी संतों की दृष्टि में दया, क्षमा, सत्य, प्रेम और करुणा को जीवन व्यवहार में आत्मसात करना ही है।"

https://samtamarg.in/2022/12/19/gandhiji-and-sanatana-dharma/
*नंदकिशोर आचार्य* लिखते हैं : "आर्थिक विकास की सही दिशा में हमें न केवल उत्पादन और वितरण के फलों को सबतक समानस्तर पर पहुँचाना होगा बल्कि उसकी प्रक्रिया में प्रकृति और भावी मानवता के प्रति भी एक उत्तरदायित्व का बोध विकसित करना होगा।"

https://samtamarg.in/2022/12/22/right-direction-of-economic-development/
"जहाँ भी आर्थिक समानता के आंदोलन होता है वहां सांप्रदायिकता की भावना कम होती है। विडंबना यह है कि समाजवादी और साम्यवादी समूह भी आर्थिक समानता के विचारों को फैलाने का आंदोलन नहीं कर रहे हैं।" पढ़िए स्व *किशन पटनायक* का लेख।

https://samtamarg.in/2022/12/23/what-is-secular/
"क्या डा. लोहिया की कार्यशैली’ के कारण समाजवादी आंदोलन कभी ‘कांग्रेस हटाओ’ और कभी ‘भाजपा हटाओ’ तक ही सीमित रह गया? कुछ और नहीं किया?" इसका जवाब जानने के लिए पढ़िए *प्रो आनंद कुमार* का यह लेख।

https://samtamarg.in/2022/12/24/lohia-discussion-points/
वरिष्ठ पत्रकार और समाजकर्मी *श्रीनिवास* लिखते हैं : "केंद्र सरकार का रुख बता रहा है कि ऐसे मामलों के कारण भी सुप्रीम कोर्ट और सरकार के बीच टकराव होता रहेगा। सुप्रीम कोर्ट के सामने अपनी स्वतंत्रता और स्वायत्तता बचाये रखने की कठिन चुनौती है।"

https://samtamarg.in/2022/12/26/alarm-bells-on-independence-of-judiciary/
"लोहिया के समाजवादी दर्शन में अपने समय की वास्तविक चुनौतियों को समझने और देश तथा दुनिया की विविध समस्याओं का समाधान खोजने की बेचैनी और सामर्थ्य, दोनों दिखाई पड़ते हैं।" पढ़िए *लोहिया* के समाजवाद के बारे में स्व *राजकिशोर* के विचार।

https://samtamarg.in/2022/12/27/lohias-own-socialism/
सीएए-एनआरसी के लिए फिर से सरकार की सक्रियता के संकेत हैं। इसपर तीस्ता सीतलवाड़ लिखती हैं : "यह सब इसलिए किया जा रहा है ताकि सत्तामें बैठेलोग सांप्रदायिक ध्रुवीकरण करके सत्तामें बने रहें, और सरकारी संसाधनों को चुपचाप पूंजीपतियोंके हवाले कर सकें।"

https://samtamarg.in/2022/12/29/one-law-one-weapon-against-the-constitution/
Photo from rajendrarajan234
2022 में हिंदीके साहित्यिक लेखनपर नजर डालते हुए *विमल कुमार* लिखते हैं : "बीता साल पुरानी पीढ़ी से अधिक नई पीढ़ी का साल रहा, युवा लेखिकाओं ने हर विधामें नई कृतियां देकर हिंदी साहित्यको समृद्ध किया और उसकी संवेदना का विस्तार किया।

https://samtamarg.in/2023/01/01/2022-will-be-memorable-for-the-new-creativity-of-women-writers/
अर्थशास्त्री *प्रो अरुण कुमार* लिखते हैं : "सरकार ने मान लिया है देश में 81 करोड़लोग गरीब हैं। गरीबोंकी इतनी बड़ी तादाद क्यों है, जबकि सरकार तेज आर्थिकवृद्धि का दावा करती है? या तो आर्थिकवृद्धि काफी कम है, या यह वृद्धि संगठितक्षेत्र तक ही सिमटी हुई है।"

https://samtamarg.in/2023/01/02/new-free-grain-scheme-will-increase-poverty/
सुप्रसिद्ध पत्रकार *पी साईनाथ* लिखते हैं : "अच्छी पत्रकारिता का काम है समाजके भीतर संवाद की स्थिति पैदा करना, देशमें बहसें उठाना और प्रतिपक्षको जन्म देना। यहएक लोकसेवा है। सेवाको जब आप धन में तौलते हैं तो हमें इसकी कीमत चुकानी पड़ती है।"

https://samtamarg.in/2023/01/03/where-is-our-media/
आधुनिकता के प्रभावों की चर्चा करते हुए सच्चिदानंद सिन्हा लिखते हैं : “आदमी का समुदाय तो अतीत की चीज बन ही चुका है। महानगरों में हमपेशा और इक्के-दुक्के मित्रों की मंडली के बाहर किसी समुदाय के बनने की संभावना ही नहीं होती। नगरों की भारी भीड़ के बीच अधिकतर लोग नितांत अकेले होते हैं।”

https://samtamarg.in/2023/01/04/modernity-losing-life/
लोकसभा सीटोंके परिसीमन की मॉंग को राष्ट्रीय एकता व संघवाद केलिए खतरनाक बताते हुए *योगेन्द्र यादव* लिखते हैं : "अगर आबादीके आधार पर सीटोंके पुनर्वितरण की मांग पर बल दिया जाता है तो संदेश ये जाएगा कि उत्तर भारतीय और हिन्दीबहुल प्रांतों का दबदबा बढ़ाया जा रहा है।"

https://samtamarg.in/2023/06/13/if-you-care-about-national-unity-then-dont-create-north-south-conflict-on-the-pretext-of-delimitation/
“ये सारी फिल्में संभवतः 2024 के लोकसभा चुनाव से पहले रिलीज होंगी। ‘द केरला स्टोरी’ की सफलता को देखते हुए, उन्हें भरपूर श्रोता मिलने की संभावना है- और वे फिल्में भाजपा के चुनाव प्रचार को और भी नफरती बनाएँगी।” पढ़िए प्रख्यात पत्रकार *राणा अय्यूब* का लेख।

https://samtamarg.in/2023/06/24/bjp-made-cinema-a-political-weapon/
[30/06, 11:55 am] Rajendra Rajan Ji: “आश्चर्य की बात है कि किसी संगठित समूह के पास यह सोच नहीं है कि समान नागरिक कानून का एक प्रारूप होना चाहिए। संभवतः संघ परिवार के पास भी नहीं है। लेकिन होना तो चाहिए धर्मनिरपेक्षता के खेमे में। पढ़िए *स्व. किशन पटनायक* की जयंती पर उनका यह लेख।”

https://samtamarg.in/2023/06/30/uniform-civil-code-and-secularist/
[30/06, 11:55 am] Rajendra Rajan Ji: "अब हम विचारहीनता के युग में जी रहे हैं, जब वैचारिक बहस उत्तरोत्तर कम होती जा रही है। यह भी एक बड़ी चुनौती है, जिसका मुकाबला करने में किशन पटनायक हमारे मददगार हैं।" पढ़िए किशन जी के बारे में उनके साथी रहे *स्व. सुनील* का लेख।

https://samtamarg.in/2023/06/30/mainstream-bender/
[30/06, 11:55 am] Rajendra Rajan Ji: सलमान खान को जान से मारनेकी धमकीसे फिक्रमंद *प्रोफेसर राजकुमार जैन* लिखते हैं : "सलीम खान तथा बेटे सलमान खान ने एक अनाथबच्ची को जिस तरहसे अपनाकर अपनी सगीबच्ची की तरह अपना अंग बनाया, इसकारण मैं उनकी बेपनाह अदब और मोहब्बत करताहूं। मैं नहीं चाहता कि इस नेकदिल इंसानको कोई खतरा पैदा हो।

https://samtamarg.in/2023/06/30/for-the-safety-of-film-actor-salman-khan/
[30/06, 11:55 am] Rajendra Rajan Ji: वाराणसी जिला प्रशासन और उत्तर रेलवे प्रशासन द्वारा सर्व सेवा संघ के भवनों को 30 जून को गिराए जाने के आदेश पर ऑल इंडिया पीपुल्स फ्रंट ने कड़ा विरोध जताया है।

https://samtamarg.in/2023/06/30/administration-should-withdraw-the-proceedings-of-demolition-of-buildings-of-sarva-seva-sangh/
[30/06, 11:55 am] Rajendra Rajan Ji: शुक्रवार 29 जून को बीएचयू के लंका गेट पर, सर्व सेवा संघ को ध्वस्त करने के नोटिस खिलाफ, बीएचयू के छात्र-छात्राओं ने प्रदर्शन किया।

https://samtamarg.in/2023/06/30/students-protest-at-bhu-gate-against-notice-to-demolish-sarva-seva-sangh/
[30/06, 11:55 am] Rajendra Rajan Ji: राइट्स एंड रिस्क एनालिसिस ग्रुप के मुताबिक, साल 2022 में पूरे भारत में 7 महिला पत्रकारों सहित कुल 194 पत्रकारों को निशाना बनाया गया। निशाना बनाए गए पत्रकारों की सबसे अधिक संख्या जम्मू और कश्मीर से है।

https://samtamarg.in/2023/06/30/jammu-and-kashmir-tops-in-violence-against-journalists-rrag-report/
[30/06, 11:55 am] Rajendra Rajan Ji: उत्तराखंड महिला मंच का मानना है कि प्रदेश में भू कानून बनाया जाय। सांप्रदायिक तनाव बढ़ाने के लिए जो भी लोग जिम्मेदार हैं उनके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए और अल्पसंख्यकों की सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए जाएं।

https://samtamarg.in/2023/06/30/uttarakhand-mahila-manch-team-took-stock-of-how-communal-tension-spread-in-purola/
[30/06, 11:55 am] Rajendra Rajan Ji: राजस्थान में 'बेरोजगार वंचित विद्यार्थी मित्र', रोजगार की माँग को लेकर एक बार फिर आंदोलनरत हैं। राजधानी जयपुर में सैकड़ों 'विद्यार्थी मित्रों' ने शहीद स्मारक पर एक सभा का आयोजन किया।

https://samtamarg.in/2023/06/30/meeting-of-unemployed-deprived-student-friends-in-jaipur-demand-to-include-in-contract-service-rule/


Join telegram for daily update

https://t.me/+U1orXO-5P8s0Nzc1