Newslaundry Hindi
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हिंदुस्तान टाइम्सहिंदुस्तान टाइम्स ने पहले पन्ने पर शिंदे वाला जैकेट विज्ञापन प्रकाशित किया. इसके बाद अखबार के अंदर उत्तर प्रदेश सरकार का “सेवा संकल्प अभियान” विज्ञापन था, जिसमें योगी आदित्यनाथ की तस्वीर के ऊपर “25 वर्षों की समर्पित जनसेवा” का उल्लेख किया गया था. इसमें वाराणसी में सफाई कर्मचारियों के सम्मान समारोह और वडनगर तक निकाली गई बाइक यात्रा का भी जिक्र था. विज्ञापन के नीचे भाजपा और उसके सहयोगी दलों के नेताओं की पूरी सूची दी गई थी.इस संस्करण में केंद्र सरकार के दो विज्ञापन और दिल्ली सरकार का एक विज्ञापन भी शामिल था. इनमें से किसी को सीधे तौर पर जन्मदिन की शुभकामना के रूप में पेश नहीं किया गया था, लेकिन दोनों केंद्रीय विज्ञापनों और दिल्ली सरकार के विज्ञापन में प्रधानमंत्री मोदी की तस्वीर प्रमुखता से इस्तेमाल की गई थी.द टाइम्स ऑफ इंडियाद टाइम्स ऑफ इंडिया के पाठकों को शिंदे के जन्मदिन वाले विज्ञापन तक पहुंचने से पहले सैमसंग के दो विज्ञापन जैकेट मिले, जो अखबार के पहले पन्ने से पहले थे. अंदर के पन्नों में उत्तर प्रदेश सरकार का वही विज्ञापन फिर दिखाई दिया. इसके अलावा, फिनोलेक्स पाइप्स एंड फिटिंग्स की ओर से कंपनी के “45 साल” पूरे होने के मौके पर शुभकामना संदेश भी प्रकाशित किया गया था.दिलचस्प बात यह रही कि 'द हिंदू' के दिल्ली और चेन्नई, दोनों संस्करणों में प्रधानमंत्री मोदी के जन्मदिन से जुड़े कोई विज्ञापन प्रकाशित नहीं हुए.सरकारा विज्ञापनों पर हमारी कवरेज देखने के लिए यहां क्लिक (https://hindi.newslaundry.com/2026/09/17/month-long-events-to-mark-modis-birthday-gujarat-had-spent-14-crore-on-a-9-day-similar-celebration) करें.विज्ञापन पर खर्च के मामले में मोदी से आगे निकले योगी, यूपी सरकार ने 8 सालों में खर्चे 6812 करोड़ रुपये  (https://hindi.newslaundry.com/2026/08/05/up-cm-yogi-overtakes-pm-narendra-modi-in-ad-spending-up-government-spent-6812-crore-in-eight-years)11 सालों में मोदी सरकार ने विज्ञापन पर खर्च किए 5987 करोड़, जानिए किसे मिले कितने रुपये (https://hindi.newslaundry.com/2026/03/31/modi-government-spent-more-than-5987-crore-on-advertisements-over-11-years)
‘प्राइमटाइम पर मुझे एंटी-नेशनल बताया गया': सुधीर चौधरी पर 5 करोड़ रुपये का मुकदमा करने वाले शेरावत
https://hindi.newslaundry.com/2026/09/18/i-was-labelled-anti-national-on-prime-time-vijay-sherawat-who-filed-a-5-crore-lawsuit-against-sudhir-chaudhary

27 जुलाई को सुधीर चौधरी के प्राइमटाइम शो ‘डिकोड’ में यूपीएससी अभ्यर्थी और छात्र कार्यकर्ता विजय शेरावत को उस शख्स के तौर पर दिखाया गया, जिसने कथित तौर पर संसद को “उखाड़ फेंकने” और भारत को नेपाल बनाने की बात कही थी. लेकिन शेरावत के मुताबिक, इसमें एक बड़ी समस्या थी कि वीडियो में मौजूद व्यक्ति शेरावत नहीं था. दिल्ली हाईकोर्ट में दायर अपने मामले में शेरावत ने कहा है कि ये टिप्पणियां किसी और व्यक्ति ने की थीं. उनका आरोप है कि इसके बावजूद ‘डिकोड’ के प्रसारण में इन टिप्पणियों को उनके नाम से जोड़ते हुए उनकी तस्वीर का इस्तेमाल किया गया. शेरावत का कहना है कि प्रसारण से पहले फुटेज का सत्यापन नहीं किया गया और न ही उनका पक्ष जानने की कोशिश की गई.उन्होंने सुधीर चौधरी और डीडी न्यूज़ समेत अन्य प्रतिवादियों से 5 करोड़ रुपये के हर्जाने की मांग की है. साथ ही, प्रसारण को आगे प्रकाशित और प्रसारित करने पर रोक लगाने की मांग भी की है. अदालत ने चौधरी, डीडी न्यूज़ और अन्य प्रतिवादियों को नोटिस जारी किया है. मामले की अगली सुनवाई 22 सितंबर को सूचीबद्ध है. हालांकि, शेरावत के लिए ‘डिकोड’ का वह एक एपिसोड यहीं खत्म नहीं हुआ. शेरावत ने न्यूज़लॉन्ड्री से बातचीत में कहा, “मैं पूरी तरह बर्बाद हो गया हूं. प्रसारण के बाद क्लिप सोशल मीडिया पर तेजी से फैली और इसके तुरंत बाद मुझे धमकियां मिलने लगीं."वह आगे कहते हैं, “एक एंकर के एक बयान ने पूरी दुनिया के सामने मुझे एंटी-नेशनल घोषित कर दिया.”शेरावत के मुताबिक, इस मामले ने उनका वह समय भी छीन लिया, जिसे वह यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी में लगाना चाहते थे. उनका कहना है कि पिछले कुछ महीनों में परीक्षा की तैयारी के बजाय उन्हें वकीलों से मिलने और अदालत की सुनवाइयों के लिए जाना पड़ा. शेरावत के लिए यह मामला सिर्फ अपना नाम साफ कराने तक सीमित नहीं है. उनका कहना है कि वह इस मामले के जरिए पत्रकारिता में जवाबदेही तय करने के लिए एक मिसाल कायम करना चाहते हैं. विजय शेरावत के साथ पूरा इंटरव्यू देखें. एनएल इंटरव्यू: बिहार एसआईआर, उपराष्ट्रपति के इस्तीफे और ‘एंटी नेशनल पत्रकारों’ पर भाजपा सांसद रामचंद्र जांगड़ा (https://hindi.newslaundry.com/2025/08/27/nl-interviews-bjp-rajyasabha-mp-ram-chander-jangra-on-bihar-sir-dhankar-resignation)प्रोफेसर लक्ष्मण यादव: 14 साल पढ़ाया, 14 मिनट के एक इंटरव्यू में बाहर कर दिया (https://hindi.newslaundry.com/2024/11/25/nl-interviews-professor-laxman-yadav-on-his-book-professor-ki-diary-and-his-journey)
एनएल चर्चा 441: एनडीए में यूसीसी पर मंथन, सेवा संकल्प अभियान और बिहार की बाढ़ 
https://hindi.newslaundry.com/2026/09/19/nl-charcha-episode-441-nda-on-ucc-seva-samkalp-abhiyan-and-bihar-floods

एनएल चर्चा के इस अंक में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह द्वारा 2029 तक सभी 21 एनडीए शासित राज्यों में समान नागरिक संहिता लागू करने के ऐलान, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 76वें जन्मदिन और सार्वजनिक जीवन में 25 साल पूरे होने पर भाजपा द्वारा शुरू किए गए 'सेवा संकल्प अभियान' और बिहार में आई बाढ़ पर विस्तार से बात हुई.इसके अलावा दो हजार रुपये से अधिक के यूपीआई लेनदेन पर मर्चेंट चार्ज लागू करने के एनपीसीआई के फैसले, पश्चिम बंगाल में अरबी भाषा में अभिवादन करने पर आईपीएस अधिकारी बुशरा बानो के तबादले, बिहार के 15 जिलों में बाढ़ से 49 लाख से अधिक लोगों के प्रभावित होने, एएमयू के छात्रों द्वारा फ़िलिस्तीन समर्थन के नारों पर भड़काऊ कवरेज के लिए ज़ी न्यूज़ पर एनबीडीएसए द्वारा 2 लाख रुपये का जुर्माना लगाए जाने, दिशा सालियान मौत मामले में सीबीआई एफआईआर के बाद आदित्य ठाकरे के बयान, पश्चिम बंगाल सरकार द्वारा 252 मदरसों को बंद करने के आदेश, ग्लोबल जेंडर गैप इंडेक्स 2026 में भारत के 131वें स्थान पर रहने, चुनाव आयोग की कवायद विशेष गहन पुनरीक्षण के तीसरे चरण में बड़े पैमाने पर नाम हटाए जाने, अरब सागर में पाकिस्तानी नौसेना के जहाज की भारतीय युद्धपोत से टक्कर और एशिया कप जीतने के बाद भारतीय महिला क्रिकेट टीम द्वारा एसीसी अध्यक्ष मोहसिन नकवी से ट्रॉफी लेने से इनकार करने जैसी ख़बरें भी हफ्ते की प्रमुख सुर्खियों में शामिल रहीं.इस हफ्ते चर्चा में बतौर मेहमान वरिष्ठ पत्रकार, राजनीतिक विश्लेषक, इंडियन एक्सप्रेस की कंट्रीब्यूटिंग एडिटर और 'हाउ प्राइम मिनिस्टर्स डिसाइड' की लेखिका नीरजा चौधरी शामिल हुईं. वहीं न्यूज़लॉन्ड्री टीम से वरिष्ठ पत्रकार हृदयेश जोशी, रमन किरपाल और बसंत कुमार शामिल हुए. चर्चा का संचालन प्रबंध संपादक अतुल चौरसिया ने किया.चर्चा की शुरुआत करते हुए अतुल कहते हैं, “कल एक बेहद गंदा दृश्य दिखा. पटना में गंगा के एक तट पर बाढ़ आई हुई है, लोगों के घर डूबे हैं और दूसरी पीएम नरेंद्र मोदी के जन्मदिवस पर भाजपा सरकारों की तरफ से लाखों दिए जलाए गए. बाढ़ की बात करें तो यह तब है जब मानसून में 14 प्रतिशत कमी है लेकिन उसके बावजूद यह स्थिति है.”इस विषय पर हृदयेश कहते हैं, “बाढ़ का होना और मानसून का कम होना, यह दोनों चीज़ें एक साथ हो सकती हैं, यह एक भौगोलिक स्थिति है और बिहार देश का दूसरा सबसे ज़्यादा आपदा प्रवण राज्य है.”सुनिए पूरी चर्चा - टाइमकोड्स:00:00 - इंट्रो और ज़रूरी सूचना 4:22 - सुर्खियां 16:45 - बिहार में बाढ़  24:24 - समान नागरिक संहिता 54:54 - सब्सक्राइबर्स के पत्र 01:04:44 - पीएम नरेंद्र मोदी का जन्मदिन 01:24:15 - सलाह और सुझावनोट: चर्चा में अपने पत्र भेजने के लिए यहां (https://www.newslaundry.com/podcast-letters) क्लिक करें.पत्रकारों की राय-क्या देखा, पढ़ा और सुना जाएहृदयेश जोशी लेख - बीजेपी'ज़ स्टेट-बाय-स्टेट पुश फॉर यूसीसी रेज़ेस ए की क्वेश्चन: इज़ इट 'यूनिफॉर्म' कोड?  (https://www.hindustantimes.com/ht-explainers/bjp-state-by-state-push-for-ucc-raises-key-question-uniform-civil-code-amit-shah-nda-101789618642596.html)किताब - पिल फ्री (https://www.penguin.co.in/book/pill-free/) रमन किरपाल डाक्यूमेंट्री - लायन  (https://www.hotstar.com/in/shows/lion/1271660571)बसंत कुमार फिल्म - घमासान  (https://www.zee5.com/movies/details/ghamasaan/0-0-1z51026733)रिपोर्ट - जिस सीट पर केजरीवाल मामूली अंतर से हारे, वहां 2025 चुनाव से पहले जुड़े 40 फीसदी नाम एसआईआर के ड्राफ्ट में गायब (https://hindi.newslaundry.com/2026/09/16/arvind-kejriwal-constituency-new-delhi-40-percent-names-added-before-2025-election-missing-from-sir-draft)रिपोर्ट - प्रसार भारती का कमाल, जूते में बंट रही दाल (https://hindi.newslaundry.com/2026/09/15/prasar-bharti-ott-waves-launched-post-facto-approval-of-raises-questions-about-work)अतुल चौरसिया सीरीज़ - (https://www.newslaundry.com/2026/09/10/anatomy-of-a-conspiracy-how-up-cops-turned-a-wage-protest-into-a-national-security-case)फौदा (https://www.netflix.com/watch/80113577?source=35)सीजन 5 फिल्म मिर्ज़ापुर क़तई न देखें चर्चा में पिछले सप्ताह देखने, पढ़ने और सुनने के लिए किसने क्या सुझाव दिए, उसके लिए यहां (https://docs.google.com/spreadsheets/d/1VCmV6yr5t1LHE77Xp5-cYhWrQSkhW3A8nix310MvRQU/edit?gid=831325801#gid=831325801) क्लिक करें. ट्रांसक्रिप्शन: तस्नीम
फातिमा प्रोडक्शन : हसन बिलाल संपादन: हसन बिलालएनएल चर्चा 440: ब्रिक्स के मंच पर वैश्विक नेता, मणिपुरी संगीतकार चांगथम विक्रम की हत्या और दिल्ली में दर्दनाक पीजी हादसा (https://hindi.newslaundry.com/2026/09/12/nl-charcha-episode-440-global-leaders-on-the-brics-platform-the-killing-of-manipuri-musician-changtham-vikram-and-a-tragic-pg-incident-in-delhi)एनएल चर्चा 439: दिल्ली मतदाता सूची में भारी कटौती, 7.8% जीडीपी की हकीकत और सुभाष चंद्रा की क़र्ज़माफ़ी (https://hindi.newslaundry.com/2026/09/05/nl-charcha-episode-439-massive-reduction-in-delhis-voter-list-the-reality-of-78-gdp-and-subhash-chandras-debt-waiver)
फिलहाल जेल में ही रहेंगे रवि नायर, गुजरात हाईकोर्ट ने अडाणी को जवाब का वक्त दिया
https://hindi.newslaundry.com/2026/09/21/ravi-nair-to-remain-in-jail-for-now-gujarat-high-court-grants-adani-time-to-file-a-response

पत्रकार रवि नायर को एक बार फिर कोई राहत नहीं मिली और वह फिलहाल जेल में ही रहेंगे. गुजरात हाईकोर्ट ने सोमवार को उनकी गिरफ्तारी चुनौती देने वाली याचिका पर अडाणी एंटरप्राइजेज को जवाब दाखिल करने का समय दे दिया. हालांकि, कोर्ट ने साफ कहा कि अडाणी एंटरप्राइजेज को यह आखिरी मौका है और इसके बाद आगे कोई स्थगन नहीं मिलेगा. अब मामले की अगली सुनवाई 23 सितंबर को होगी. मालूम हो कि रवि एक स्वतंत्र पत्रकार हैं. उन्होंने अडाणी-हिंडनबर्ग विवाद, कॉर्पोरेट एकाधिकार और कथित गलत कामों पर लगातार रिपोर्टिंग की है.लाइव लॉ की रिपोर्ट (https://www.livelaw.in/high-court/gujarat-high-court/gujarat-high-court-journalist-ravi-nair-plea-arrest-for-missing-defamation-case-hearing-550979) के मुताबिक, जस्टिस एम के ठक्कर की अदालत में अडाणी की ओर से पेश वकील ने कुछ कानूनी और तथ्यात्मक पहलू रिकॉर्ड पर लाने के लिए समय मांगा. नायर के वकील अभिक चिमनी ने इसका विरोध किया और अंतरिम राहत की मांग की. उन्होंने कहा कि मामला अपील स्तर पर है और एक निजी शिकायतकर्ता को बार-बार स्थगन नहीं मिलना चाहिए. साथ ही उन्होंने दलील दी कि उनके मुवक्किल (नायर) को एक दिन भी जेल में नहीं बिताना चाहिए. इस बीच अदालत ने नोटिस जारी होने के बाद शिकायतकर्ता को अपना पक्ष रखने का मौका देना उचित माना, लेकिन साथ ही कहा कि वह मामले में आगे कोई स्थगन नहीं होगा. मालूम हो कि रवि नायर को 17 सितंबर को गांधीनगर सत्र न्यायालय ने गैर-जमानती वारंट रद्द करने की अर्जी खारिज करने के बाद न्यायिक हिरासत में भेज दिया था. इससे पहले 3 सितंबर को अदालत ने उनके जानबूझकर पेश न होने की बात कही थी. केरल के रहने वाले नायर की दलील है कि सुनवाई में पेशी के लिए लंबा सफर और खर्च उठाना पड़ता है.बताते चलें कि ये मामला मामला अडाणी एंटरप्राइजेज की 2021 की शिकायत से जुड़ा है. कंपनी का आरोप था कि नायर ने एक्स पर पोस्ट और अडाणी वॉच वेबसाइट पर लेखों के जरिए झूठे और मानहानिकारक बयान फैलाए, जिससे समूह की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचा. जिसके बाद बीते 10 फरवरी 2026 को ज्यूडिशियल मैजिस्ट्रेट (फर्स्ट क्लास) ने उन्हें मानहानि का दोषी ठहराते हुए एक साल की साधारण कैद और 5,000 रुपये जुर्माना की सजा (https://hindi.newslaundry.com/2026/02/11/why-journalist-ravi-nair-jailed-over-adani-tweet) सुनाई थी. हालांकि, सत्र न्यायालय ने 9 मार्च को उनकी सजा निलंबित कर जमानत दे दी थी, बशर्ते वे अदालत में नियमित पेश होते रहें. अब वही शर्त पूरी न होने का मुद्दा हाईकोर्ट तक पहुंच गया है.नायर ने अपनी याचिका में सितंबर के दोनों आदेश रद्द करने और मार्च वाली जमानत बहाल करने की मांग है. अदालत ने राज्य सरकार और अडाणी दोनों को नोटिस जारी किया है.  अडाणी पर ऐसा क्या ट्वीट किया कि पत्रकार रवि नायर को हो गई जेल (https://hindi.newslaundry.com/2026/02/11/why-journalist-ravi-nair-jailed-over-adani-tweet)नियम बदला, अडाणी छाए: 20 हजार करोड़ की एफसीआई की साइलो योजना में अडाणी समूह का वर्चस्व? (https://hindi.newslaundry.com/2026/05/29/rules-changed-adani-dominates-adani-groups-hegemony-in-the-20-thousand-crore-fci-silo-scheme)
https://hindi.newslaundry.com/2026/09/22/jamui-viral-video-girls-victims-father-says-arrest-isnt-enough-police-should-do-an-encounter

“मुझे खुशी तभी होगी जब मेरी बेटी को इंसाफ मिलेगा. मैं चाहता हूं कि पुलिस उन्हें एनकाउंटर में मार दे. सिर्फ गिरफ्तारी काफी नहीं है.” ये दीपक कुमार की वो तमन्ना है जो गुस्से में लिपटी है, जिसमें उनकी बेटी के लिए न्याय की गुहार है. दरअसल, दसवीं कक्षा में पढ़ने वाली उनकी बेटी के साथ 19 सितंबर को बिहार के जमुई जिले में कुछ युवकों ने कथित तौर पर छेड़छाड़ और मारपीट की.मामले के एक मुख्य आरोपी नंदन यादव को 22 सितंबर को पुलिस ने पैर में गोली मारकर गिरफ्तार कर लिया. इसके साथ ही मामले में गिरफ्तार आरोपियों की संख्या छह हो गई है. द टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट (https://timesofindia.indiatimes.com/city/patna/bihar-class-10-girl-molestation-case-main-accused-nandan-yadav-injured-in-police-encounter-in-jamui/articleshow/134405351.cms) मुताबिक, गिरफ्तार आरोपियों में तीन बालिग और तीन नाबालिग हैं.गौरतलब है कि घटना के वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद मामला सामने आया. वीडियो में लड़की और उसके एक पुरुष मित्र को करीब एक घंटे तक कुछ लोगों से घिरा, पीछा और परेशान किया जाता हुआ देखा जा सकता है. वीडियो वायरल होने के बाद पुलिस ने मामले का संज्ञान लिया और जांच शुरू की.जमुई लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत तारापुर विधानसभा सीट आती है, जिसका प्रतिनिधित्व बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी करते हैं. घटना को लेकर विपक्षी नेताओं ने इलाके की कानून-व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं.जमुई पुलिस ने यह भी बताया है कि उसने ऐसे 120 यूआरएल की पहचान की है, जहां घटना का वीडियो मौजूद है. पुलिस का कहना है कि वीडियो के प्रसार को रोकने के लिए कार्रवाई की जा रही है.19 सितंबर को क्या हुआ?जानकारी के मुताबिक, 19 सितंबर की शाम करीब पांच बजे दसवीं कक्षा की छात्रा ट्यूशन पढ़ने के लिए घर से निकली थी. उसे उम्मीद थी कि शाम की पढ़ाई के बाद वह घर लौट आएगी. हालांकि, छात्रा के पिता की मानें तो ट्यूशन के दौरान ब्रेक में वह अपने एक पुरुष मित्र के साथ आइसक्रीम खाने बाहर गई थी. इसी दौरान दो बाइक पर सवार कुछ युवकों ने कथित तौर पर उसे परेशान करना और उसके साथ अभद्र व्यवहार करना शुरू कर दिया.दीपक कुमार ने न्यूज़लॉन्ड्री को बताया, “इस घटना के बाद मेरी बेटी काफी परेशान है. घटना के अगले दिन उसने हमें इसके बारे में बताया, जब वीडियो इंटरनेट पर वायरल होने लगा.”कथित तौर पर दोनों छात्रों को युवकों के समूह ने रोक लिया और करीब एक घंटे तक घेरकर परेशान किया. दोनों वहां से निकलने की कोशिश करते रहे. आरोप है कि नंदन यादव ने लड़की का पीछा किया, उसे पीछे से पकड़ लिया और बाद में अपनी गोद में उठा लिया. उसके पुरुष मित्र ने बीच में आकर लड़की को छुड़ाया, जिसके बाद दोनों पक्षों के बीच हाथापाई हुई. इसके बावजूद आरोपी दोनों को वहां से जाने से रोकने की कोशिश करते रहे.घटना के वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आने के बाद जमुई पुलिस ने मामले का संज्ञान लिया और जांच शुरू की.जमुई के पुलिस अधीक्षक विश्वजीत दयाल के मुताबिक, 25 वर्षीय नंदन यादव फिलहाल पुलिस हिरासत में है और उससे पूछताछ के बाद मामले में और लोगों की पहचान हो सकती है. दयाल ने कहा, “नंदन से पूछताछ के बाद और लोगों की पहचान की जाएगी.”फिलहाल, आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 74 (महिला की गरिमा भंग करने के इरादे से हमला या आपराधिक बल का इस्तेमाल), धारा 76 (महिला को निर्वस्त्र करने के इरादे से हमला या आपराधिक बल का इस्तेमाल) और धारा 3(5) (साझा मंशा) के साथ-साथ पोक्सो एक्ट की धारा 8 और 12 के तहत मामला दर्ज किया गया है. ये धाराएं बच्चे के खिलाफ यौन हमला और यौन उत्पीड़न से संबंधित हैं.पुलिस नंदन यादव की पृष्ठभूमि और उसके आपराधिक रिकॉर्ड की भी जांच कर रही है. एसपी दयाल के मुताबिक, अभी तक ऐसा कोई सबूत नहीं मिला है कि वह आदतन अपराधी है. हालांकि, दूसरे थानों में उसके रिकॉर्ड की जांच की जा रही है.पुलिस अधीक्षक महोदय, जमुई की अपील....

वायरल वीडियो को शेयर अथवा प्रसारित करना कानूनी अपराध ।
पुलिस का सहयोग करें।#jamuipolice (https://x.com/hashtag/jamuipolice?src=hash&ref_src=twsrc%5Etfw) #biharpolice (https://x.com/hashtag/biharpolice?src=hash&ref_src=twsrc%5Etfw)#haityaarham (https://x.com/hashtag/haityaarham?src=hash&ref_src=twsrc%5Etfw) pic.twitter.com/4c1YDZ3wLo (https://t.co/4c1YDZ3wLo)— JAMUI POLICE (@JamuiPolice) September 21, 2026 (https://x.com/JamuiPolice/status/2102080112451826078?ref_src=twsrc%5Etfw)
वीडियो वाले 120 यूआरएल की पहचानएसपी दयाल ने बताया कि पुलिस ने घटना का वीडियो मौजूद होने वाले 120 यूआरएल की पहचान की है. उनके मुताबिक, वीडियो में लड़की की पहचान उजागर होने की आशंका है. साइबर पुलिस उन प्रोफाइल्स के खिलाफ कार्रवाई कर रही है, जिन्होंने वीडियो साझा या प्रसारित किया. मामले में कुछ लोगों को हिरासत में लिए जाने की भी बात पुलिस ने कही है.जमुई पुलिस ने एक बयान (https://x.com/JamuiPolice/status/2102080112451826078?s=20) में कहा कि वीडियो का छोटा-सा हिस्सा भी साझा करने से पीड़िता की निजता और मानसिक स्वास्थ्य पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है. पुलिस ने कहा कि पीड़िता की पहचान की रक्षा करना सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है.पुलिस ने चेतावनी दी कि नाबालिग की पहचान उजागर करना या इस तरह की सामग्री का प्रसार करना भारतीय न्याय संहिता, आईटी एक्ट, जुवेनाइल जस्टिस एक्ट और पॉक्सो एक्ट के तहत संज्ञेय अपराध है और इसके लिए सख्त सजा का प्रावधान है.पुलिस ने लोगों से अपील की, “कृपया संवेदनशीलता बरतें. वीडियो को आगे न भेजें.” पुलिस ने यह भी कहा कि नागरिकों की सुरक्षा के लिए जमुई पुलिस सहायता के लिए उपलब्ध है.‘हम चाहते हैं कि उचित कार्रवाई हो’ वहीं, दीपक कुमार ने कहा, “दो बाइक पर कुछ लोग आए और मेरी बेटी को परेशान करने लगे और उसके साथ अभद्र व्यवहार किया. मुझे लगता है कि उन लड़कों को यह पसंद नहीं आया कि एक लड़की शाम के समय एक लड़के के साथ थी.”उन्होंने बताया कि उनकी बेटी दसवीं कक्षा में पढ़ती है और आरोपी लड़के परिवार के परिचित नहीं थे, हालांकि वे जमुई के ही रहने वाले हैं.कुमार ने दावा किया कि जमुई में पहले भी इस तरह की दो घटनाएं हो चुकी हैं. एसपी दयाल ने इनमें से एक मामले की पुष्टि करते हुए कहा कि पुलिस उस मामले में चार्जशीट दाखिल कर चुकी है और मामला अदालत में विचाराधीन है.कुमार ने बताया कि घटना के बाद स्कूल ने परिवार का सहयोग किया है और अभी तक उनकी बेटी को किसी तरह से निशाना नहीं बनाया गया है.उन्होंने कहा, “स्कूल हमारा सहयोग कर रहा है और अभी तक मेरी बेटी को निशाना नहीं बनाया गया है. पुलिस ने भी हमारा सहयोग किया है, लेकिन हम चाहते हैं कि जिन लड़कों ने मेरी बेटी के साथ यह किया, उनके खिलाफ उचित कार्रवाई हो.”मूल रूप से अंग्रेजी में प्रकाशित ख़बर को पढ़ने के लिए यहां क्लिक (https://www.newslaundry.com/2026/09/22/found-out-after-video-went-viral-father-of-jamui-assault-survivor-says-arrest-is-not-enough) करें.‘वंदे मातरम्’ सिर्फ एक गीत नहीं है. इसमें एक ऐसे भारत की तस्वीर है- जहां खेत हैं, नदियां हैं, हरियाली है और एक मातृभूमि का सपना है. लेकिन आज जब हम उसी भारत के बीच खड़े होकर देखते हैं, तो सवाल उठता है- क्या वह तस्वीर अब भी वैसी ही है? हमारा नया प्रोजेक्ट इसी सवाल का जवाब तलाशने की कोशिश है. हम उन जगहों तक जा रहे हैं, जिनका ज़िक्र ‘वंदे मातरम्’ में है, और देख रहे हैं कि वक्त के साथ वहां का भारत कितना बदला है. यह एक गीत को समझने से ज्यादा, उस देश को समझने की कोशिश है जिसे हम अपना घर कहते हैं. ऐसी पड़तालें सिर्फ पत्रकारों के भरोसे नहीं चलतीं. इन्हें उन पाठकों के सहयोग की जरूरत होती है जो मानते हैं कि देश को समझने के लिए उसकी जमीन तक जाना जरूरी है. अगर आप चाहते हैं कि ऐसी स्वतंत्र पत्रकारिता जारी रहे, तो इस प्रोजेक्ट में हमारा साथ दें. सब्सक्राइब करें. (https://www.newslaundry.com/project-vande-mataram)इंडिया गेट से गिरफ्तार अक्षय की तस्वीर वायरल, साथी बोले- ‘छात्र है, कोई माओवादी नहीं’ (https://hindi.newslaundry.com/2025/11/25/detention-of-akshay-kumar-photo-viral-friend-says-student-not-a-maoist)नाबालिग बस गैंगरेप: दिल्ली और नोएडा पुलिस आमने-सामने, 27 दिनों तक क्यों छिपाई घटना  (https://hindi.newslaundry.com/2026/09/10/delhi-noida-police-at-odds-after-minors-gang-rape-on-bus-in-ncr-and-a-tail-of-27-days-suppression)किताबों की उम्र में चाकू-कट्टे: दिल्ली के 'नाबालिग गैंग्स' की कहानी (https://hindi.newslaundry.com/2026/08/26/knives-guns-and-aura-farming-at-an-age-for-books-the-story-of-delhis-juvenile-gangs)
बुराड़ी में एसआईआर का असर, 1 लाख 67 हजार लोगों के नाम वोटर लिस्ट से बाहर 
https://hindi.newslaundry.com/2026/09/23/167-lakh-people-removed-from-the-voter-list-after-sir-exercise-in-burari-delhi

चुनाव आयोग ने दिल्ली में जारी विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के बाद ड्राफ्ट वोटर लिस्ट जारी की. जिसमें करीब 47 लाख लोगों के नाम हटा दिए गए हैं. इनमें से बुराड़ी विधानसभा क्षेत्र में करीब 1 लाख 67 हजार लोगों के नाम शामिल हैं. बुराड़ी दिल्ली के उत्तरी हिस्से में आता है. यहां कई उद्योग हैं और बड़ी संख्या में प्रवासी मजदूर काम यहां करते हैं. इनमें कई लोग ऐसे हैं जो पहले भी उसी पते पर वोट देते रहे हैं लेकिन इस बार ड्राफ्ट लिस्ट में उनका नाम नहीं है.  ड्राफ्ट सूची में नाम ना आने से लोग परेशान हैं. कुछ लोगों को चिंता है कि अगर उनका नाम वोटर लिस्ट में नहीं होगा तो उन्हें सरकारी योजनाओं का लाभ लेने में भी दिक्कत हो सकती है. इसी परेशानी के बीच कई लोग अपना नाम ठीक करवाने के लिए चुनाव आयोग के अधिकारियों के पास दफ्तर में लंबी कतारों में खड़े नजर आए. एसआईआर की प्रक्रिया ने न सिर्फ आम लोगों बल्कि बूथ लेवल अधिकारियों को भी परेशान किया है. खासकर बुराड़ी जैसे इलाके में जहां बड़ी संख्या में प्रवासी मजदूर रहते हैं और काम की वजह से एक जगह से दूसरी जगह शिफ्ट होते रहते हैं. देखिए हमारी ये खास रिपोर्ट.जिस सीट पर केजरीवाल मामूली अंतर से हारे, वहां 2025 चुनाव से पहले जुड़े 40 फीसदी नाम एसआईआर के ड्राफ्ट में गायब (https://hindi.newslaundry.com/2026/09/16/arvind-kejriwal-constituency-new-delhi-40-percent-names-added-before-2025-election-missing-from-sir-draft)एसआईआर का पहला ड्राफ्ट, 40% का पत्ता साफ: तुगलकाबाद, ओखला, आरके पुरम, जंगपुरा और बदरपुर सर्वाधिक प्रभावित (https://hindi.newslaundry.com/2026/09/01/election-comission-release-first-draft-released-after-sir-every-third-voter-in-delhi-left-off-the-list)
वंदे मातरम् पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के बीच एसजी ने किसे कह दिया ‘नक्सली’ 
https://hindi.newslaundry.com/2026/09/23/sg-on-naxalite-idea-in-supreme-court-on-tm-krishna-petition

वंदे मातरम् के सभी छंद गाए जाने को लेकर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता और पूर्व जस्टिस मुरलीधर के बीच तीखी बहस हुई. सुनवाई के दौरान ‘नक्सली’ शब्द के इस्तेमाल पर जस्टिस मुरलीधर ने कड़ी आपत्ति जताई. कोर्ट ने दोनों पक्षों को संवैधानिक मुद्दे तक सीमित रहने को कहा और कहा कि राष्ट्रीय गीत के स्वरूप का फैसला लोकतांत्रिक राज्य का विषय है. कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि धार्मिक आधार पर राष्ट्रीय गीत न गाने वाले व्यक्ति के खिलाफ आपराधिक कार्रवाई नहीं होनी चाहिए. इस वीडियो में जानिए वंदे मातरम् विवाद पर सुप्रीम कोर्ट में क्या हुआ और बहस के दौरान ‘नक्सली’ शब्द को लेकर विवाद क्यों हुआ. ग्राउंड रिपोर्ट: सुक्का, देवा, बुधरी, लकमा और आंदा जो बताते हैं कि सुकमा में नक्सली नहीं निर्दोष आदिवासी मारे गए (https://hindi.newslaundry.com/2018/08/20/sukma-encounter-innocent-tribals-killed-ground-report)जेएनयू: ‘मैंने कहा कि मीडिया से हूं, पुलिस वालों ने पीटना शुरू कर दिया’ (https://hindi.newslaundry.com/2020/01/06/jnu-journalist-attacked-abvp-delhi-police-ians-aaj-tak)‘वोट चोर-गद्दी छोड़’ से लेकर ‘वंदे मातरम तक’ : संसद का तूफानी मानसून सत्र खत्म (https://hindi.newslaundry.com/2025/08/23/sansad-watch-episode-the-monsoon-session-of-parliament-ended-amidst-vote-thieves-leaving-the-throne-and-vande-mataram)सावधान! खड़े हो जाइए, भाजपा प्रवक्ता वंदे मातरम गा रहे हैं (https://hindi.newslaundry.com/2017/10/30/bjp-spokie-sings-vande-mataram-or-something-that-sounds-like-it)
गुजरात हाईकोर्ट ने ठुकराई पत्रकार रवि नायर की अंतरिम जमानत याचिका
https://hindi.newslaundry.com/2026/09/23/gujarat-high-court-rejects-journalist-ravi-nairs-interim-bail-plea

गुजरात हाईकोर्ट ने अडाणी समूह की ओर से दायर आपराधिक मानहानि मामले में पत्रकार रवि नायर की अंतरिम रिहाई की याचिका ठुकरा कर दी है. बार एंड बेंच (https://www.barandbench.com/news/gujarat-high-court-rejects-journalist-ravi-nairs-plea-for-interim-release-in-adani-defamation-case) ने इसकी जानकारी दी है.कोर्ट ने इससे पहले अडाणी एंटरप्राइजेज को नायर की हिरासत को चुनौती देने वाली याचिका पर जवाब दाखिल करने के लिए अतिरिक्त समय दिया था. मामले की सुनवाई तब 23 सितंबर तक टाल दी गई थी. बुधवार को जस्टिस एमके ठक्कर ने नायर की याचिका पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया. कोर्ट ने कहा कि वह अगले बुधवार को आदेश सुनाएगा.अडाणीवॉच डॉट ओआरजी के लिए लिखने वाले नायर को गांधीनगर की न्यायिक मजिस्ट्रेट (प्रथम श्रेणी) की अदालत ने फरवरी में मानहानि का दोषी ठहराया था. मामला अडाणी समूह के खिलाफ भ्रष्टाचार, क्रोनी कैपिटलिज्म और सरकारी एजेंसियों के दुरुपयोग के आरोपों से जुड़े उनके ट्वीट्स और लेखों का था. अदालत ने उन्हें एक साल की साधारण कैद और 5 हजार रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई थी.इसके बाद सेशंस कोर्ट ने उनकी अपील लंबित रहने तक सजा पर रोक लगा दी थी और उन्हें जमानत पर रिहा कर दिया था. हालांकि, इसके लिए उन्हें नियमित रूप से अदालत में पेश होने और अपना पासपोर्ट जमा कराने जैसी शर्तों का पालन करना था.बार एंड बेंच की रिपोर्ट (https://www.barandbench.com/news/litigation/gujarat-high-court-gives-adani-more-time-to-respond-to-journalist-ravi-nairs-plea-against-custody) के मुताबिक, पिछले हफ्ते गैर-जमानती वारंट जारी होने के बाद नायर को दोबारा हिरासत में ले लिया गया. वहीं, इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक (https://indianexpress.com/article/legal-news/journalist-ravi-nair-gujarat-high-court-adani-defamation-case-10887355/), 3 सितंबर के सेशंस कोर्ट के आदेश में पहले कहा गया था कि नायर लापता हैं और जानबूझकर गिरफ्तारी से बच रहे हैं. इसके बाद 17 सितंबर के आदेश में अदालत ने वारंट रद्द करने की उनकी मांग खारिज कर दी और उन्हें जेल भेजने का निर्देश दिया. इसके बाद नायर ने रिहाई के लिए हाईकोर्ट का रुख किया.बीते सोमवार को जस्टिस एमके ठक्कर की अदालत में हुई सुनवाई के दौरान अडाणी एंटरप्राइजेज की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता मितेश अमीन ने मामले में “कुछ कानूनी और तथ्यात्मक पहलुओं” को रिकॉर्ड पर रखने के लिए थोड़े समय की मांग की. इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक, नायर के वकील अधिवक्ता अभिक चिमनी ने इसका विरोध किया और अंतरिम राहत की मांग की.चिमनी ने दलील दी कि मामला पहले ही अपील के चरण में है और सुप्रीम कोर्ट का एक फैसला उनके मुवक्किल के पक्ष में है. बार एंड बेंच (https://www.barandbench.com/news/litigation/gujarat-high-court-gives-adani-more-time-to-respond-to-journalist-ravi-nairs-plea-against-custody) के मुताबिक, उन्होंने अदालत में कहा, “मुझे जेल में एक दिन भी क्यों बिताना चाहिए?”इस दौरान कोर्ट ने अडाणी एंटरप्राइजेज को अतिरिक्त समय तो दिया, लेकिन स्पष्ट किया कि मामले में आगे कोई और देरी नहीं होने दी जाएगी.मालूम हो कि अडाणी एंटरप्राइजेज ने सितंबर, 2021 में नायर के खिलाफ मानहानि का मामला दायर किया था. कंपनी का आरोप था कि अक्टूबर 2020 से जुलाई 2021 के बीच नायर की ओर से अडाणी समूह के बारे में किए गए ट्वीट्स से निवेशकों और नियामकों के बीच समूह की प्रतिष्ठा को गलत तरीके से नुकसान पहुंचा.नायर का कहना है कि उनके पोस्ट सार्वजनिक रूप से उपलब्ध सूचनाओं पर आधारित थे और उन्हें जनहित में की गई पत्रकारिता के तौर पर देखा जाना चाहिए. ‘वंदे मातरम्’ सिर्फ एक गीत नहीं है. इसमें एक ऐसे भारत की तस्वीर है- जहां खेत हैं, नदियां हैं, हरियाली है और एक मातृभूमि का सपना है. लेकिन आज जब हम उसी भारत के बीच खड़े होकर देखते हैं, तो सवाल उठता है- क्या वह तस्वीर अब भी वैसी ही है? हमारा नया प्रोजेक्ट इसी सवाल का जवाब तलाशने की कोशिश है. हम उन जगहों तक जा रहे हैं, जिनका ज़िक्र ‘वंदे मातरम्’ में है, और देख रहे हैं कि वक्त के साथ वहां का भारत कितना बदला है. यह एक गीत को समझने से ज्यादा, उस देश को समझने की कोशिश है जिसे हम अपना घर कहते हैं. ऐसी पड़तालें सिर्फ पत्रकारों के भरोसे नहीं चलतीं. इन्हें उन पाठकों के सहयोग की जरूरत होती है जो मानते हैं कि देश को समझने के लिए उसकी जमीन तक जाना जरूरी है. अगर आप चाहते हैं कि ऐसी स्वतंत्र पत्रकारिता जारी रहे, तो इस प्रोजेक्ट में
हमारा साथ दें. सब्सक्राइब करें. (https://www.newslaundry.com/project-vande-mataram)फिलहाल जेल में ही रहेंगे रवि नायर, गुजरात हाईकोर्ट ने अडाणी को जवाब का वक्त दिया (https://hindi.newslaundry.com/2026/09/21/ravi-nair-to-remain-in-jail-for-now-gujarat-high-court-grants-adani-time-to-file-a-response)अडाणी पर ऐसा क्या ट्वीट किया कि पत्रकार रवि नायर को हो गई जेल (https://hindi.newslaundry.com/2026/02/11/why-journalist-ravi-nair-jailed-over-adani-tweet)
रवि नायर की हिरासत पर डिजिपब का बयान: ‘ताकतवर संस्थानों से सवाल की कीमत जेल नहीं’
https://hindi.newslaundry.com/2026/09/24/digipub-on-ravi-nairs-detention-says-questioning-powerful-institutions-should-not-come-at-the-cost-of-imprisonment

डिजिटल न्यूज पब्लिशर्स का संगठन डिजिपब न्यूज़ इंडिया फाउंडेशन ने अडाणी ग्रुप की ओर से दायर आपराधिक मानहानि मामले में पत्रकार रवि नायर की लगातार हिरासत पर चिंता जताई है. 23 सितंबर को जारी एक बयान (https://x.com/DigipubIndia/status/2102768988627587480) में मीडिया संगठनों के इस निकाय ने कहा कि यह मामला सिर्फ एक पत्रकार तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे कहीं व्यापक सवाल खड़े होते हैं.डिजिपब ने नायर की लगातार हिरासत को “बेहद चिंताजनक” बताया. संगठन के मुताबिक, यह कार्रवाई अडानी ग्रुप से जुड़ी उनकी रिपोर्टिंग और सोशल मीडिया पोस्ट के चलते हुई है.अडाणी ने अपनी आपत्ति को एक बुनियादी सवाल के तौर पर रखा- “अगर अपील अभी लंबित है, तो उस अपील के अंतिम नतीजे से पहले किसी पत्रकार को जेल में क्यों रखा जाना चाहिए?”बयान में यह भी कहा गया कि जिस कॉरपोरेट संस्था ने आपराधिक कार्रवाई शुरू की है, उसका नियंत्रण एक बड़े समाचार संगठन पर भी है, जहां पत्रकार इसी पेशे में काम करते हैं. हालांकि, डिजिपब ने उस समाचार संगठन का नाम नहीं लिया.DIGIPUB stands in solidarity with journalist Ravi Nair and raises serious concerns over his continued detention.
A journalist should not have to face imprisonment simply for reporting on and questioning powerful interests.

Read our full statement below. pic.twitter.com/Cy2STyq2T6 (https://t.co/Cy2STyq2T6)— DIGIPUB News India Foundation (@DigipubIndia) September 23, 2026 (https://x.com/DigipubIndia/status/2102768988627587480?ref_src=twsrc%5Etfw)


संगठन ने कहा कि यह मामला सिर्फ रवि नायर तक सीमित नहीं है. डिजिपब के मुताबिक, “यह उस संदेश के बारे में है जो ऐसा मामला उन सभी स्वतंत्र पत्रकारों तक पहुंचा सकता है, जो ताकतवर कॉरपोरेट हितों की जांच करते हैं या उन पर सवाल उठाते हैं.”डिजिपब ने यह भी चेतावनी दी कि अगर इस तरह के मुकदमे आम होते गए, तो ताकतवर संस्थाओं की जांच करने वाला कोई भी पत्रकार इसी तरह की कार्रवाई का सामना कर सकता है. संगठन ने कहा, “अगर ताकतवर संस्थानों को जवाबदेह ठहराने की कीमत जेल जाना हो, तो प्रेस की आजादी कायम नहीं रह सकती.”बुधवार को गुजरात हाई कोर्ट ने अडानी ग्रुप की ओर से दायर आपराधिक मानहानि मामले में पत्रकार रवि नायर की अंतरिम रिहाई की याचिका खारिज कर दी. बार एंड बेंच (https://www.barandbench.com/news/gujarat-high-court-rejects-journalist-ravi-nairs-plea-for-interim-release-in-adani-defamation-case) के मुताबिक, नायर को इस साल की शुरुआत में दोषी ठहराया गया था और अपील लंबित रहने के दौरान उन्हें जमानत पर रिहा किया गया था. 17 सितंबर को उनके खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी होने के बाद उन्हें दोबारा हिरासत में ले लिया गया. रिपोर्ट के मुताबिक, यह वारंट अपीलीय अदालत के समक्ष पेश नहीं होने के चलते जारी किया गया था.23 सितंबर को जस्टिस एमके ठक्कर ने नायर की उस याचिका पर फैसला सुरक्षित रख लिया, जिसमें उन्होंने सेशंस कोर्ट की ओर से जारी वारंट को चुनौती दी थी. बार एंड बेंच के मुताबिक, हाईकोर्ट 30 सितंबर को इस मामले में अपना आदेश सुनाएगा.अडाणी एंटरप्राइजेज ने सितंबर 2021 में नायर के खिलाफ मानहानि का मामला दर्ज कराया था. कंपनी का आरोप था कि अक्टूबर 2020 से जुलाई 2021 के बीच नायर की ओर से किए गए ट्वीट्स में अडानी ग्रुप के बारे में ऐसी गलत बातें कही गईं, जिससे निवेशकों और नियामकों के बीच उसकी प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचा.नायर का कहना है कि उनके सोशल मीडिया पोस्ट सार्वजनिक रूप से उपलब्ध सूचनाओं पर आधारित निष्पक्ष और जनहित की पत्रकारिता का हिस्सा थे.वंदे मातरम्’ सिर्फ एक गीत नहीं है. इसमें एक ऐसे भारत की तस्वीर है- जहां खेत हैं, नदियां हैं, हरियाली है और एक मातृभूमि का सपना है. लेकिन आज जब हम उसी भारत के बीच खड़े होकर देखते हैं, तो सवाल उठता है- क्या वह तस्वीर अब भी वैसी ही है? हमारा नया प्रोजेक्ट इसी सवाल का जवाब तलाशने की कोशिश है. हम उन जगहों तक जा रहे हैं, जिनका ज़िक्र ‘वंदे मातरम्’ में है, और देख रहे हैं कि वक्त के साथ वहां का भारत कितना बदला है. यह एक गीत को समझने से ज्यादा, उस देश को समझने की कोशिश है जिसे हम अपना घर कहते हैं. ऐसी पड़तालें सिर्फ पत्रकारों के भरोसे नहीं चलतीं. इन्हें उन पाठकों के सहयोग की जरूरत होती है जो मानते हैं कि देश को समझने के लिए उसकी जमीन तक जाना जरूरी है. अगर आप चाहते हैं
कि ऐसी स्वतंत्र पत्रकारिता जारी रहे, तो इस प्रोजेक्ट में हमारा साथ दें. सब्सक्राइब करें. (https://www.newslaundry.com/project-vande-mataram)डिजिपब और एडिटर्स गिल्ड ने निजी डाटा नियमों पर जताई चिंता, जनहित में सुधार की मांग (https://hindi.newslaundry.com/2025/11/19/digipub-and-editors-guild-of-india-statement-on-dpdpr)पत्रकार अभिसार शर्मा के खिलाफ राजद्रोह के आरोप में एफआईआर दर्ज, डिजिपब ने की निंदा (https://hindi.newslaundry.com/2025/08/21/fir-against-journalist-abhisar-sharma-in-assam-by-guwahati-police)
अमिश देवगन की नेटवर्क 18 से विदाई, टाइम्स नाउ में जाने की अटकलें 
https://hindi.newslaundry.com/2026/09/24/amish-devgan-quits-from-network-18-may-join-times-network-soon

एंकर और पत्रकार अमिश देवगन ने नेटवर्क 18 से अलग होने का ऐलान किया है. उन्होंने गुरुवार को न्यूज़ 18 इंडिया के प्राइम-टाइम शो आर-पार में इसकी घोषणा की. अमिश ने शो के दौरान कहा, “आज मैं आपसे व्यक्तिगत तौर पर बात करना चाहता हूं… दर्शक के तौर पर आपके प्यार और सम्मान के बिना मैं यहां तक नहीं पहुंच पाता. आज नेटवर्क 18, टीवी18 और न्यूज़18 में मेरा आखिरी दिन है. अब आप मुझे आर-पार को एंकर करते हुए नहीं देखेंगे.”अमिश ने कहा कि इन 10 सालों में आर-पार सिर्फ उनका शो नहीं रहा, बल्कि “देश की आवाज” बन गया. उन्होंने कहा, “न्यूज़ 18 इंडिया में मेरी पारी आज खत्म हो गई है, लेकिन मेरी पत्रकारिता की यात्रा जारी रहेगी. नए प्लेटफॉर्म और नए अंदाज में मैं आपसे जल्द मिलूंगा.”अमिश न्यूज़ 18 के उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान चैनलों के मैनेजिंग एडिटर रह चुके हैं. वह आर-पार कार्यक्रम के चेहरे के तौर पर खास तौर पर पहचाने जाते हैं. यह डिबेट शो उन्हें टीवी न्यूज़ के ध्रुवीकृत बहस वाले कार्यक्रमों के चर्चित चेहरों में ले आया.अमिश के नेटवर्क 18 छोड़ने की वजह अभी स्पष्ट नहीं है. हालांकि, ऐसी अटकलें हैं कि वह टाइम्स नाऊ नवभारत से जुड़ सकते हैं. इन अटकलों को ज्यादा बल तब मिला जब नेटवर्क में मैनेजिंग एडिटर शमशेर सिंह ने उनके वीडियो को कोट करते हुए लिखा- 'बधाई. जल्द मिलते हैं.'Big Congratulations @AMISHDEVGAN (https://x.com/AMISHDEVGAN?ref_src=twsrc%5Etfw) जल्द मिलते हैं। https://t.co/Whx58Uc7W9— SHAMSHER SINGH (@ShamsherSLive) September 24, 2026 (https://x.com/ShamsherSLive/status/2102989856783867997?ref_src=twsrc%5Etfw)


न्यूज़लॉन्ड्री ने जब अमिश से उनके नेटवर्क 18 से बाहर होने और इस चर्चा के बारे में प्रतिक्रिया मांगी, तो उन्होंने टिप्पणी करने से इनकार कर दिया.नेटवर्क 18 में अमिश का कार्यकाल कई विवादों से भी जुड़ा रहा है.2020 में सूफी संत ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती को लेकर ऑन-एयर की गई उनकी टिप्पणी पर उनके खिलाफ कई पुलिस शिकायतें दर्ज हुई थीं. इसके बाद अमिश ने माफी मांगी थी. सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें गिरफ्तारी से राहत दी थी, हालांकि मामलों की कार्यवाही जारी रखने की अनुमति दी थी.2024 में कांग्रेस ने राम मंदिर पर अमिश के एक ‘मोनोलॉग’ को लेकर उनके खिलाफ कार्रवाई की मांग करते हुए चुनाव आयोग को पत्र लिखा था.वंदे मातरम्’ सिर्फ एक गीत नहीं है. इसमें एक ऐसे भारत की तस्वीर है- जहां खेत हैं, नदियां हैं, हरियाली है और एक मातृभूमि का सपना है. लेकिन आज जब हम उसी भारत के बीच खड़े होकर देखते हैं, तो सवाल उठता है- क्या वह तस्वीर अब भी वैसी ही है? हमारा नया प्रोजेक्ट इसी सवाल का जवाब तलाशने की कोशिश है. हम उन जगहों तक जा रहे हैं, जिनका ज़िक्र ‘वंदे मातरम्’ में है, और देख रहे हैं कि वक्त के साथ वहां का भारत कितना बदला है. यह एक गीत को समझने से ज्यादा, उस देश को समझने की कोशिश है जिसे हम अपना घर कहते हैं. ऐसी पड़तालें सिर्फ पत्रकारों के भरोसे नहीं चलतीं. इन्हें उन पाठकों के सहयोग की जरूरत होती है जो मानते हैं कि देश को समझने के लिए उसकी जमीन तक जाना जरूरी है. अगर आप चाहते हैं कि ऐसी स्वतंत्र पत्रकारिता जारी रहे, तो इस प्रोजेक्ट में हमारा साथ दें. सब्सक्राइब करें. (https://www.newslaundry.com/project-vande-mataram)कांग्रेस ने चुनाव आयोग को पत्र लिखकर पत्रकार अमिश देवगन के खिलाफ की कार्रवाई की मांग (https://hindi.newslaundry.com/2024/04/22/congress-writes-to-election-commission-seeking-action-against-amish-devgan-over-ram-temple-monologue)इंद्रजीत घोरपड़े: जिनके चलते अमन चोपड़ा और अमीश देवगन के शो पर लगा जुर्माना, पड़ी डांट (https://hindi.newslaundry.com/2024/03/12/indrajeet-ghorpade-on-whom-comaplaint-nbdsa-acted-against-aaj-tak-news-18-and-others)
मिमिक्री वीडियो को लेकर मुंबई में एफआईआर, नोएडा के दंपत्ति ने डर में घर छोड़ा 
https://hindi.newslaundry.com/2026/09/24/fir-filed-in-mumbai-over-mimicry-video-noida-couple-leaves-home-out-of-fear

सोशल मीडिया पर मिमिक्री वीडियो बनाने वाले नोएडा के कंटेंट क्रिएटर साहिल मनीष रोकडे के घर 15 सितंबर को अचानक से मुंबई पुलिस पहुंची, उनका फोन और लैपटॉप जब्त किया और अपने साथ नोएडा पुलिस थाने ले गई. साहिल का आरोप है कि उन्हें पूरी रात लॉकअप में रखा गया. ये पूरा मामला एक ऐसे वीडियो से जुड़ा है, जिसे शिकायतकर्ता ने विनायक दामोदर सावरकर का अपमान बताया है. बताते चलें कि साहिल और उनकी पत्नी जानवी ‘क्यूं एंड क्या’ नाम से इंस्टाग्राम अकाउंट चलाते हैं. उनके 33 हजार से ज्यादा फॉलोअर्स हैं और वे मुख्य रूप से मिमिक्री वीडियो पोस्ट करते हैं.2 सितंबर 2026 को मुंबई के शिवाजी पार्क थाने में विक्रांत शरद आचरेकर की शिकायत पर दोनों के खिलाफ एफआईआर दर्ज हुई. शिकायत के मुताबिक, एक इंस्टाग्राम रील में एक युवक सावरकर जैसा पहनावा किए हुए दिखाई देता है और काले जूते चाटता हुआ नजर आता है. शिकायतकर्ता का आरोप है कि वीडियो के जरिए महापुरुषों का अपमान किया गया और इससे सामाजिक सौहार्द बिगड़ने की आशंका है. इसके बाद पुलिस ने आईटी एक्ट की धारा 67 और बीएनएस की धाराओं 196(1)(b), 353(2) और 356 के तहत मामला दर्ज कर लिया. 15 सितंबर को मुंबई पुलिस की चार सदस्यीय टीम नोएडा स्थित साहिल के घर पहुंची. साहिल के मुताबिक, पुलिस ने उन्हें एक नोटिस दिया और इसके बाद नोएडा सेक्टर-39 पुलिस स्टेशन ले गई. उनका आरोप है कि पुलिस ने उनसे जबरन नोटिस पर हस्ताक्षर करवाए और उनके आईफोन और लैपटॉप के पासवर्ड भी लिए.साहिल का कहना है कि उन्हें दिनभर थाने में बैठाए रखने के बाद रात करीब 12 बजे लॉकअप में बंद कर दिया गया. अगले दिन सुबह उन्हें सूरजपुर कोर्ट ले जाया गया, जिसके बाद उन्हें रिहा कर दिया गया. हालांकि, उनका फोन और लैपटॉप अब भी मुंबई पुलिस के पास हैं.साहिल कहते हैं कि उन्हें एफआईआर के बारे में मुंबई पुलिस के नोएडा पहुंचने के बाद ही पता चला. उनके मुताबिक, इससे पहले उन्हें जांच में शामिल होने के लिए कोई नोटिस या सूचना नहीं दी गई थी. वे कहते हैं, “अचानक से घर पर पुलिस आ गई. यह सब देखकर हम खुद हैरान थे.”साहिल के मुताबिक, 14 सितंबर को उन्हें मेटा की ओर से एक ई-मेल मिला था और इसके अगले दिन मुंबई पुलिस उनके घर पहुंच गई.उनकी पत्नी जानवी का कहना है कि पुलिस उन पर मुंबई के शिवाजी पार्क थाने में आने का दबाव बना रही है. वह कहती हैं कि दोनों इस कार्रवाई से डरे हुए हैं. जानवी का दावा है कि जिस वीडियो को लेकर मामला दर्ज हुआ है, उसे सावरकर को ध्यान में रखकर नहीं बनाया गया था. वह कहती हैं, “वीडियो में कहीं सावरकर का नाम या जिक्र नहीं है. यह एक नॉर्मल वीडियो था. हम जमानत के लिए कोशश कर रहे हैं.”एफआईआर से जुड़े वीडियो को हमने देखा. इसमें साहिल गोल टोपी और काला कोट पहनकर डांस करते नजर आते हैं. बैकग्राउंड में एक गाना बज रहा है, जिसमें माफीनामा, देश बांटने और अंग्रेजों के बूट जैसे संदर्भ हैं. वीडियो में एक जूता भी दिखाया जाता है और उनकी पत्नी ‘सॉरी’ लिखा हुआ एक पेपर दिखाती हैं.साहिल का कहना है कि उन्होंने फिलहाल अपना घर छोड़ दिया है. उनके मुताबिक, उन्हें डर है कि पुलिस दोबारा उनके घर आ सकती है. फोन जब्त होने की वजह से उनके बैंक अकाउंट्स से जुड़ी दिक्कतें भी आ रही हैं.इस मामले की जांच कर रहे मुंबई पुलिस के निरीक्षक (इंस्पेक्टर) राजू रामचंद्र थुबल भी जांच के सिलसिले में नोएडा आए थे. हमने उनसे संपर्क किया, लेकिन उन्होंने मामले पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया.वहीं, इस मामले में शिकायतकर्ता विक्रांत शरद आचरेकर के साथ ही संपर्क करने की काफी कोशिश की. शिकायत में दिया गया उनका नंबर 'सेवा में नहीं है' बताया जा रहा है. वंदे मातरम् सिर्फ एक गीत नहीं है. इसमें एक ऐसे भारत की तस्वीर है- जहां खेत हैं, नदियां हैं, हरियाली है और एक मातृभूमि का सपना है. लेकिन आज जब हम उसी भारत के बीच खड़े होकर देखते हैं, तो सवाल उठता है- क्या वह तस्वीर अब भी वैसी ही है? हमारा नया प्रोजेक्ट इसी सवाल का जवाब तलाशने की कोशिश है. हम उन जगहों तक जा रहे हैं, जिनका ज़िक्र ‘वंदे मातरम्’ में है, और देख रहे हैं कि वक्त के साथ वहां का भारत कितना बदला है. यह एक गीत को समझने से ज्यादा, उस देश को समझने की कोशिश है जिसे हम अपना घर कहते हैं. ऐसी पड़तालें सिर्फ पत्रकारों के भरोसे नहीं चलतीं. इन्हें उन पाठकों के सहयोग की जरूरत होती है जो मानते हैं कि देश को समझने के लिए उसकी जमीन तक जाना जरूरी है. अगर आप चाहते हैं कि ऐसी स्वतंत्र पत्रकारिता जारी रहे, तो इस
प्रोजेक्ट में हमारा साथ दें. सब्सक्राइब करें. (https://www.newslaundry.com/project-vande-mataram)कुणाल कामरा मामला: बॉम्बे हाईकोर्ट ने मुंबई पुलिस से कहा- तमिलनाडु जाइए, गिरफ्तार मत कीजिए (https://hindi.newslaundry.com/2025/04/25/bombay-high-court-tells-mumbai-police-to-not-arrest-kamra-says-go-tamlindau-if-you-want-statement)‘बुली बाई’ की मुख्य आरोपी युवती को मुंबई पुलिस ने किया गिरफ्तार (https://hindi.newslaundry.com/2022/01/04/the-main-accused-girl-of-bully-bai-arrested-by-mumbai-police)
‘ऑफिस के मतभेद’: चुनाव आयोग विवाद पर टीवी मीडिया का ‘डैमेज कंट्रोल’
https://hindi.newslaundry.com/2026/09/24/office-rifts-tv-medias-damage-control-over-investigation-report-on-election-commission-dissents

बीते दिन इंडियन एक्सप्रेस ने चुनाव आयोग के भीतर मतभेदों को लेकर एक रिपोर्ट प्रकाशित (https://indianexpress.com/article/express-exclusive/election-commission-sir-14-objections-gyanesh-kumar-sukhbir-singh-sandhu-vivek-joshi-10889737/?ref=breaking_hp) की. इसके बाद प्राइम टाइम न्यूज में इस रिपोर्ट को लेकर अलग-अलग तरह की प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं. कुछ एंकर्स ने चुनाव आयोग के स्पष्टीकरण को प्रमुखता दी, जिसमें कहा गया कि किसी भी फैसले से पहले चर्चा और असहमति की प्रक्रिया होती है और आयोग के फैसले सर्वसहमति से लिए गए हैं. वहीं, कुछ ने इसे विपक्ष के लिए बैठे-बिठाए नरेंद्र मोदी पर हमले का एक और मौका करार दिया. आठ हिंदी और अंग्रेजी न्यूज एंकरों के कार्यक्रमों की समीक्षा के दौरान हमने पाया कि करीब चार ने इसी तर्क को आगे बढ़ाया. उन्होंने कहा कि रिपोर्ट में जिस मतभेद की बात की गई है, वह असामान्य नहीं है और इसे राजनीतिक मुद्दा बनाया जा रहा है. वहीं एनडीटीवी की पद्मजा जोशी और इंडिया टीवी के रजत शर्मा ने आयोग से उन सवालों के जवाब मांगे, जो उसके स्पष्टीकरण से साफ नहीं हुए थे. दोनों ने खास तौर पर उस सिस्टम तक पहुंच सीमित किए जाने पर सवाल उठाया, जिसका इस्तेमाल मतदाता सूची तैयार करने में होता है.आलोचना को विपक्ष की राजनीति से जोड़नान्यूज़ 18 के राहुल शिवशंकर ने अपने कार्यक्रम (https://youtu.be/t_tBjQWAHlU?si=NESfOqbcKj8dayMO) की शुरुआत इस बात से की कि चुनाव आयोग हमेशा से मोदी सरकार के आलोचकों के निशाने पर रहता है और आयोग पर अक्सर बिना पर्याप्त सबूत के आरोप लगाए जाते हैं.उन्होंने इंडियन एक्सप्रेस का नाम नहीं लिया और उसे सिर्फ एक 'मुख्यधारा का अखबार' कहा. शिवशंकर ने कहा कि आयोग के भीतर असहमति इस बात का संकेत है कि मुख्य चुनाव आयुक्त कोई तानाशाह नहीं हैं. उनके मुताबिक, अगर आयोग से कोई गलती होती है तो उस पर सवाल उठाना जवाबदेही का हिस्सा है.न्यूज़ 18 इंडिया (https://youtu.be/_sIWnu5tCVI?t=593) के अमिश देवगन देवगन ने भाजपा के इस तर्क का जिक्र किया कि असहमति 'स्वस्थ लोकतंत्र की पहचान' है. उन्होंने अपने और सहकर्मियों के बीच होने वाले मतभेद का उदाहरण दिया.कांग्रेस नेता गुरदीप सप्पल से बातचीत के दौरान उन्होंने पूछा कि आयोग के भीतर मतभेद को इतना बड़ा मुद्दा क्यों बनाया जा रहा है. इसके बाद उन्होंने खुद ही इसका जवाब देते हुए कहा कि ऐसा इसलिए किया जा रहा है क्योंकि यह विपक्ष के राजनीतिक एजेंडे के अनुकूल है.टाइम्स नाउ नवभारत (https://www.youtube.com/watch?v=EsJBCt_PtoE) के सुशांत सिन्हा ने रिपोर्ट को विपक्ष की ओर से नरेंद्र मोदी को घेरने के लिए बनाए गए 'नए एजेंडे' के तौर पर पेश किया. उन्होंने कहा कि चुनावी हार के लिए विपक्ष पहले ईवीएम हैकिंग और वोट चोरी जैसे आरोप लगाता रहा है और अब चुनाव आयोग एवं मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को निशाना बनाया जा रहा है.इसके बाद सिन्हा ने इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट में सामने आई 14 आपत्तियों पर बात की. उन्होंने पूछा कि इन आपत्तियों का मतदाता सूची पर आखिर क्या असर पड़ा.28 अक्टूबर 2025 की पहली आपत्ति का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि इसमें आयोग के नाम से बिना मंजूरी जारी किए गए पत्रों और आदेशों पर सवाल उठाया गया था. सिन्हा ने कहा कि उन्हें इसमें कुछ असामान्य नजर नहीं आता.अन्य चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू की उस शिकायत पर कि उन्हें नए आईटी नियमों और पोर्टल के बारे में मीडिया से जानकारी मिली, सिन्हा ने इसे 'आंतरिक मामला' बताया. वहीं, विवेक जोशी की अधिकारियों के विदेश दौरे को लेकर आपत्ति पर उन्होंने सवाल किया कि इस असहमति को प्रकाशित करने का क्या मतलब है और इसका एसआईआर पर क्या असर है. सिन्हा ने इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट पर भी सवाल उठाया. उन्होंने कहा कि रिपोर्ट में हर आपत्ति के बाद क्या हुआ, यह स्पष्ट नहीं किया गया. हालांकि, उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि रिपोर्ट में आयोग और दोनों चुनाव आयुक्तों से यह पूछा गया था कि आपत्तियों के बाद कोई कार्रवाई हुई या नहीं, लेकिन इस पर जवाब नहीं मिला.उन्होंने यह भी कहा कि चार लोगों के एक कार्यालय में अगर एक व्यक्ति दूसरे से सवाल करता है तो हर सवाल को 'असहमति' के तौर पर पेश करने से मतभेदों की संख्या बड़ी दिखाई देने लगती है.उनके मुताबिक, इन 14 आपत्तियों का सार आयोग के 'कामकाज के माहौल' और संभावित 'आंतरिक राजनीति' से जुड़े सवालों तक सीमित है. उन्होंने कहा कि अलग-अलग लोगों की अलग-अलग राय हो
सकती है और आयोग में तीन चुनाव आयुक्त इसलिए हैं ताकि उनके बीच चर्चा और असहमति हो सके.तीन अलग-अलग चैनलों के एंकरों ने आयोग के मतभेदों को समझाने के लिए लगभग एक ही तरह का उदाहरण दिया- ऑफिस के कामकाज का. अमिश देवगन देवगन ने सहकर्मियों के बीच होने वाले मतभेदों की बात की तो सुशांत सिन्हा ने कार्यालय में काम करने वाले लोगों का उदाहरण दिया और नविका कुमार ने दो पत्रकारों के किसी खबर को कवर करने को लेकर अलग राय रखने का उदाहरण दिया.‘बात को बढ़ा-चढ़ाकर देखा जा रहा है?’टाइम्स नाउ नवभारत (https://youtu.be/2NAtqrCJFzc?t=746) पर रुबिका लियाकत ने 14 आपत्तियों को 'पूरी तस्वीर का सिर्फ आधा हिस्सा' बताया. उन्होंने कहा कि पिछले कुछ महीनों में आयोग ने करीब 40 फैसले लिए और सभी फैसले सर्वसहमति से हुए.उन्होंने यह सवाल भी उठाया कि रिपोर्ट में यह स्पष्ट नहीं किया गया कि ऐसा कौन-सा फैसला था, जिसे किसी एक व्यक्ति ने लिया और बाकी दो आयुक्त उससे असहमत थे. उनका तर्क था कि अगर दो आयुक्त किसी फैसले के खिलाफ होते तो वह फैसला लागू ही नहीं हो सकता था.टाइम्स ना (https://youtu.be/7lIxYurZuhU?si=TWfCSDgjXRdn-JvX)उ पर नविका कुमार ने पूछा किया कि क्या आयोग के भीतर असहमति 'वोट चोरी' के आरोप को साबित करती है या राजनीतिक आरोप सबूतों से आगे निकल गए हैं.उन्होंने यह भी कहा कि एसआईआर की ड्राफ्ट मतदाता सूची से बाहर किए गए 13 करोड़ नामों का मतलब यह नहीं है कि ये सभी नाम अंतिम रूप से हटा दिए गए हैं. उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के उस फैसले का भी जिक्र किया जिसमें आयोग के एसआईआर कराने के अधिकार को बरकरार रखा गया था.नविका कुमार ने पूछा कि क्या सामान्य चर्चा और बहस के बाद सहमति बनने की प्रक्रिया को 'तिल का ताड़' बनाया जा रहा है. हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि दोनों चुनाव आयुक्तों ने अभी तक सार्वजनिक रूप से अपनी बात नहीं रखी है.बाद के एक कार्यक्रम में उन्होंने भाजपा के प्रवक्ता से यह सवाल भी पूछा कि रिपोर्ट सामने आने के बाद आयोग ने प्रेस कॉन्फ्रेंस क्यों नहीं की और आयोग की बैठक चार महीने से क्यों नहीं हुई.आयोग और ज्ञानेश कुमार से सवालएनडीटीवी (https://www.youtube.com/watch?v=n8arkKkvASI) पर पद्मजा जोशी ने चुनाव आयोग के सर्वसम्मति वाले दावे पर सवाल उठाया. उन्होंने पूछा कि जब कम से कम दो चुनाव आयुक्तों ने रिकॉर्ड पर अपनी असहमति दर्ज कराई है तो फैसलों को सर्वसम्मति से लिया गया कैसे कहा जा सकता है.उन्होंने मतदाता सूची तैयार करने के लिए इस्तेमाल होने वाले सॉफ्टवेयर पर सवाल उठाए. उन्होंने पूछा कि क्या इसकी पहुंच को केंद्रीकृत किया गया है और चुनावी रजिस्ट्रेशन अधिकारियों की इस सिस्टम तक पहुंच सीमित क्यों की गई.उन्होंने यह सवाल भी उठाया कि क्या ऐसी परिस्थितियों में मतदाता सूची तैयार करने की प्रक्रिया पर भरोसा किया जा सकता है.इंडिया टीवी (https://www.youtube.com/watch?v=wpcvyPCXKMM) पर रजत शर्मा ने ज्ञानेश कुमार पर सीधे सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग के जवाब यह स्पष्ट नहीं करते कि आयोग के डाटा का नियंत्रण कुछ अधिकारियों को देने से पहले ज्ञानेश कुमार ने किससे सलाह ली थी, मतदाता सूची वाले सिस्टम की पहुंच सीमित क्यों की गई और फॉर्म 6 में बदलावों पर किससे सलाह ली गई.आयोग के फैसलों को सामूहिक रूप से लिए जाने के दावे पर उन्होंने सवाल किया कि अगर फैसले वास्तव में मिलकर लिए गए थे तो दूसरे चुनाव आयुक्तों ने उनके खिलाफ शिकायत क्यों की.उन्होंने इस पर भी सवाल उठाया कि क्या यह चिंता की बात नहीं है कि आयोग के दूसरे आयुक्तों को आयोग की गतिविधियों के बारे में मीडिया के जरिए जानकारी मिली.हालांकि, रजत शर्मा के कार्यक्रम की शुरुआत भी इस टिप्पणी से हुई कि विपक्षी नेताओं को इस रिपोर्ट के जरिए सरकार और चुनाव आयोग को घेरने का एक नया मुद्दा मिल गया है.इसी तरह एबीपी न्यूज़ (https://www.youtube.com/watch?si=FJknK_PbrPc0qWIH&v=CeOFf3kYbOU&feature=youtu.be) पर चित्रा त्रिपाठी ने माना कि चुनाव आयोग में असहमति का इतिहास रहा है. उन्होंने 2019 में चुनाव आयुक्त अशोक लवासा की असहमति का उदाहरण दिया, जिसके बाद संबंधित फैसले बहुमत के आधार पर लिए गए थे.उन्होंने कहा कि मतभेद होना एक बात है, लेकिन बिना सर्वसम्मति या बहुमत के फैसलों को लागू करना अलग बात है. उनके मुताबिक, हालिया रिपोर्ट सिर्फ चुनाव आयोग की निष्पक्षता और पारदर्शिता पर सवाल नहीं उठाती, बल्कि एसआईआर के तहत 13 करोड़ नामों को हटाने की प्रक्रिया पर भी सवाल खड़े करती है.इस तरह प्राइम टाइम पर ज्यादातर मुख्यधारा के टीवी चैनलों ने इस मुद्दे को चुनाव आयोग के भीतर कार्यस्थल पर होने वाली सामान्य असहमति के संदर्भ में देखा. जबकि यह रिपोर्ट इशारा करती है कि ये मामला सिर्फ असहमति
का नहीं बल्कि मनमाने फैसले लेने और संवैधानिक प्रक्रियाओं की अनदेखी करने का भी है. मूल रूप से अंग्रेजी में प्रकाशित इस लेख को पढ़ने के लिए यहां क्लिक (https://www.newslaundry.com/2026/09/24/just-colleagues-disagreeing-how-the-election-commission-rift-played-out-on-tv-news) करें.वंदे मातरम् सिर्फ एक गीत नहीं है. इसमें एक ऐसे भारत की तस्वीर है- जहां खेत हैं, नदियां हैं, हरियाली है और एक मातृभूमि का सपना है. लेकिन आज जब हम उसी भारत के बीच खड़े होकर देखते हैं, तो सवाल उठता है- क्या वह तस्वीर अब भी वैसी ही है? हमारा नया प्रोजेक्ट इसी सवाल का जवाब तलाशने की कोशिश है. हम उन जगहों तक जा रहे हैं, जिनका ज़िक्र ‘वंदे मातरम्’ में है, और देख रहे हैं कि वक्त के साथ वहां का भारत कितना बदला है. यह एक गीत को समझने से ज्यादा, उस देश को समझने की कोशिश है जिसे हम अपना घर कहते हैं. ऐसी पड़तालें सिर्फ पत्रकारों के भरोसे नहीं चलतीं. इन्हें उन पाठकों के सहयोग की जरूरत होती है जो मानते हैं कि देश को समझने के लिए उसकी जमीन तक जाना जरूरी है. अगर आप चाहते हैं कि ऐसी स्वतंत्र पत्रकारिता जारी रहे, तो इस प्रोजेक्ट में हमारा साथ दें. सब्सक्राइब करें. (https://www.newslaundry.com/project-vande-mataram)टीवी शो में पैंट नहीं पहनने को मानहानि का मामला बना कर हाईकोर्ट पहुंचे गौरव भाटिया (https://hindi.newslaundry.com/2025/09/23/gaurav-bhatia-moves-delhi-high-court-for-defamation-petition)यूपी की अदालत ने दिया टीवी एंकर अंजना ओम कश्यप पर मामला दर्ज करने का आदेश (https://hindi.newslaundry.com/2025/09/08/up-court-order-to-file-fir-against-anjana-om-kashyap-for-show-on-india-pak-partition)