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بری صحبت کا برا نتیجہ
حضرت علامہ محمد بن احمد ذہبی رحمۃ اللہ علیہ فرماتے ہیں:
ایک شخص شرابیوں کی صحبت میں بیٹھتا تھا جب اس کی موت کا وقت قریب آیا تو کسی نے کلمہ شریف کی تلقین کی تو کہنے لگا :
"تم بھی پیو اور مجھے بھی پلاؤ "
معاذاللہ بغیر کلمہ پڑھے مرگیا۔
(کتاب الکبائر، ص103، فیضان سنت، ص425)
بری صحبت واقعی دنیا و آخرت میں نقصان کا باعث ہے اور اچھی صحبت دنیا و آخرت دونوں کے لیے فائدے مند۔
جو لوگ یہ کہتے ہیں کہ ہم تھوڑی یہ برائی کررہے ہیں ہم تو بس ان کے ساتھ بیٹھ رہے ہیں وہ بڑے دھوکے میں ہیں کہ آج نہ سہی مگر ایک دن وہ بھی اس برائی میں ملوث ہوہی جائیں گے جس برائی کے کرنے والوں کے ساتھ وہ بیٹھتے اٹھتے ہیں ۔
انسان کوئلے کی بھٹی کے قریب سے بھی گزرے تو کپڑے خراب ہوہی جاتے ہیں۔ ایسے ہی بری صحبتیں ہیں جو آپ پر اپنا برا رنگ چڑھادیتی ہیں اور آپ کو اندازہ بھی نہیں ہوتا۔
اس لیے انسان اگر دنیا و آخرت کی بھلائی چاہتا ہے تو اچھوں کی مجلس میں بیٹھے اور بری صحبتوں سے پرہیز کریں۔
عبدِ مصطفی
حضرت علامہ محمد بن احمد ذہبی رحمۃ اللہ علیہ فرماتے ہیں:
ایک شخص شرابیوں کی صحبت میں بیٹھتا تھا جب اس کی موت کا وقت قریب آیا تو کسی نے کلمہ شریف کی تلقین کی تو کہنے لگا :
"تم بھی پیو اور مجھے بھی پلاؤ "
معاذاللہ بغیر کلمہ پڑھے مرگیا۔
(کتاب الکبائر، ص103، فیضان سنت، ص425)
بری صحبت واقعی دنیا و آخرت میں نقصان کا باعث ہے اور اچھی صحبت دنیا و آخرت دونوں کے لیے فائدے مند۔
جو لوگ یہ کہتے ہیں کہ ہم تھوڑی یہ برائی کررہے ہیں ہم تو بس ان کے ساتھ بیٹھ رہے ہیں وہ بڑے دھوکے میں ہیں کہ آج نہ سہی مگر ایک دن وہ بھی اس برائی میں ملوث ہوہی جائیں گے جس برائی کے کرنے والوں کے ساتھ وہ بیٹھتے اٹھتے ہیں ۔
انسان کوئلے کی بھٹی کے قریب سے بھی گزرے تو کپڑے خراب ہوہی جاتے ہیں۔ ایسے ہی بری صحبتیں ہیں جو آپ پر اپنا برا رنگ چڑھادیتی ہیں اور آپ کو اندازہ بھی نہیں ہوتا۔
اس لیے انسان اگر دنیا و آخرت کی بھلائی چاہتا ہے تو اچھوں کی مجلس میں بیٹھے اور بری صحبتوں سے پرہیز کریں۔
عبدِ مصطفی
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चार शादी के नुक़्सानात
ऐसा हो सकता है कि किसी काम के आगाज़ में हमें कुछ मनफ़ी अ़सरात (Side Effects) नज़र आयें पर ये भी देखना चाहिये कि आगे उस से फाइदा कितना बड़ा है।
जिहाद को ले लीजिये तो इस में लोगों को क़त्ल किया जाता है, खून बहता है और घर बल्कि इलाक़े बरबाद हो जाते हैं लेकिन यही आगे चल कर अमन का सबब बनता है और फितने खत्म होते हैं।
चार शादी का मामला भी ऐसा ही है।
एक तरह से हम अभी सिर्फ आगाज़ करने की ही बात कर रहे हैं क्योंकि तक़रीबन इसका नामो निशान मिट चुका है और ऐसा ही चलता रहा तो ना जाने क्या होगा।
अब चूँकि हालात ऐसे हैं तो ये अजीब क्या बड़ा अजीब लगेगा पर यही हल (Solution) है शादी ब्याह के सिस्टम को सुधारने का वरना लोगों ने सब कुछ कर के देख लिया कुछ खास फ़र्क़ नहीं पड़ा।
इस में पहले उलमा, हुफ्फाज़, मुबल्लिगीन वग़ैरह अहले इल्म हज़रात को आगे आना होगा ताकि वो दूसरों के लिये मिसाल और नमूना बन सकें।
आगे आने का मतलब खुद भी एक से ज़्यादा शादियाँ कीजिये और अपने बच्चों को भी तरगीब दीजिये।
गुर्बत, अद्ल, हुक़ूक़, मुआशरे वग़ैरह की बात जिस तरह की जाती है तो उस हिसाब से एक निकाह भी करने से बचना चाहिये।
अ़ब्दे मुस्तफ़ा
ऐसा हो सकता है कि किसी काम के आगाज़ में हमें कुछ मनफ़ी अ़सरात (Side Effects) नज़र आयें पर ये भी देखना चाहिये कि आगे उस से फाइदा कितना बड़ा है।
जिहाद को ले लीजिये तो इस में लोगों को क़त्ल किया जाता है, खून बहता है और घर बल्कि इलाक़े बरबाद हो जाते हैं लेकिन यही आगे चल कर अमन का सबब बनता है और फितने खत्म होते हैं।
चार शादी का मामला भी ऐसा ही है।
एक तरह से हम अभी सिर्फ आगाज़ करने की ही बात कर रहे हैं क्योंकि तक़रीबन इसका नामो निशान मिट चुका है और ऐसा ही चलता रहा तो ना जाने क्या होगा।
अब चूँकि हालात ऐसे हैं तो ये अजीब क्या बड़ा अजीब लगेगा पर यही हल (Solution) है शादी ब्याह के सिस्टम को सुधारने का वरना लोगों ने सब कुछ कर के देख लिया कुछ खास फ़र्क़ नहीं पड़ा।
इस में पहले उलमा, हुफ्फाज़, मुबल्लिगीन वग़ैरह अहले इल्म हज़रात को आगे आना होगा ताकि वो दूसरों के लिये मिसाल और नमूना बन सकें।
आगे आने का मतलब खुद भी एक से ज़्यादा शादियाँ कीजिये और अपने बच्चों को भी तरगीब दीजिये।
गुर्बत, अद्ल, हुक़ूक़, मुआशरे वग़ैरह की बात जिस तरह की जाती है तो उस हिसाब से एक निकाह भी करने से बचना चाहिये।
अ़ब्दे मुस्तफ़ा
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4 شادی کے نقصانات
ایسا ہو سکتا ہے کہ کسی کام کے آغاز میں ہمیں کُچھ منفی اثرات (Side Effects) نظر آئیں پر یہ بھی دیکھنا چاہیے کہ آگے اُس سے فائدہ کتنا بڑا ہے۔
جہاد کو لے لیجیے تو اِس میں لوگوں کو قتل کیا جاتا ہے، خون بہتا ہے اور گھر بلکہ علاقے تباہ ہو جاتے ہیں لیکن یہی آگے چل کر امن کا سبب بنتا ہے اور فتنے ختم ہوتے ہیں۔
چار شادی کا معاملہ بھی ایسا ہی ہے۔
ایک طرح سے ہم ابھی آغاز کرنے کی ہی بات کر رہے ہیں کیونکہ تقریباً اس کا نام و نشان مٹ چکا ہے اور ایسا ہی چلتا رہا تو نہ جانے کیا ہوگا۔
اب چوں کہ حالات ایسے ہیں تو یہ عجیب کیا بڑا عجیب لگے گا پر یہی حل (Solution) ہے شادی بیاہ کے سسٹم کو سدھارنے کا ورنہ لوگوں نے سب کچھ کر کے دیکھ لیا کچھ خاص فرق نہیں پڑا۔
اس میں پہلے علما، حفاظ، مبلغین وغیرہ اہلِ علم حضرات کو آگے آنا ہوگا تاکہ وہ دوسروں کے لیے مثال اور نمونہ بن سکیں۔
آگے آنے کا مطلب خود بھی ایک سے زیادہ شادیاں کیجیے اور اپنے بچّوں کو بھی ترغیب دیجیے۔
غربت، عدل، حقوق، معاشرے وغیرہ کی بات جس طرح کی جاتی ہے تو اس حساب سے ایک نکاح بھی کرنے سے بچنا چاہیے۔
عبد مصطفی
ایسا ہو سکتا ہے کہ کسی کام کے آغاز میں ہمیں کُچھ منفی اثرات (Side Effects) نظر آئیں پر یہ بھی دیکھنا چاہیے کہ آگے اُس سے فائدہ کتنا بڑا ہے۔
جہاد کو لے لیجیے تو اِس میں لوگوں کو قتل کیا جاتا ہے، خون بہتا ہے اور گھر بلکہ علاقے تباہ ہو جاتے ہیں لیکن یہی آگے چل کر امن کا سبب بنتا ہے اور فتنے ختم ہوتے ہیں۔
چار شادی کا معاملہ بھی ایسا ہی ہے۔
ایک طرح سے ہم ابھی آغاز کرنے کی ہی بات کر رہے ہیں کیونکہ تقریباً اس کا نام و نشان مٹ چکا ہے اور ایسا ہی چلتا رہا تو نہ جانے کیا ہوگا۔
اب چوں کہ حالات ایسے ہیں تو یہ عجیب کیا بڑا عجیب لگے گا پر یہی حل (Solution) ہے شادی بیاہ کے سسٹم کو سدھارنے کا ورنہ لوگوں نے سب کچھ کر کے دیکھ لیا کچھ خاص فرق نہیں پڑا۔
اس میں پہلے علما، حفاظ، مبلغین وغیرہ اہلِ علم حضرات کو آگے آنا ہوگا تاکہ وہ دوسروں کے لیے مثال اور نمونہ بن سکیں۔
آگے آنے کا مطلب خود بھی ایک سے زیادہ شادیاں کیجیے اور اپنے بچّوں کو بھی ترغیب دیجیے۔
غربت، عدل، حقوق، معاشرے وغیرہ کی بات جس طرح کی جاتی ہے تو اس حساب سے ایک نکاح بھی کرنے سے بچنا چاہیے۔
عبد مصطفی
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हज़रत अय्यूब के वाक़िये पर तहक़ीक़ (क़िस्त 1)
हज़रत अय्यूब अ़लैहिस्सलाम अल्लाह के नबी हैं। आप हज़रत इस्हाक़ अ़लैहिस्सलाम की औलाद में से हैं। अल्लाह तआला ने आप को कसरते माल और औलाद से नवाज़ा था। आप पर एक वक़्त ऐसा आया कि अल्लाह पाक ने आप को आज़माइश में डाला और आप की औलाद और माल वग़ैरह आप से दूर हो गये।
अल्लाह की राह में उसके नेक बंदो की आज़माइश होती है और चूँकि अंबिया -ए- किराम ज़्यादा महबूब होते हैं तो उन की आज़माइश आम लोगों के मुक़ाबिल बड़ी होती हैं और फिर उनके दरजात को बे-हिसाब बुलंदी अ़ता की जाती है।
हज़रत अय्यूब अ़लैहिस्सलाम के सब्र की मिसाल दी जाती है। सब्रे अय्यूब का वाक़िया बहुत मशहूर है। अक्सर मुसलमानों को ना सिर्फ ये मालूम है बल्कि वो अपने मुश्किल वक़्त में इसे याद कर के इस से मदद भी लेते है। इस वाक़िये से मुतल्लिक़ कई बातें ऐसी मशहूर हो गई हैं जो दुरुस्त नहीं है। दुरुस्त ना होने के साथ ये बाते अंबिया -ए- किराम की शान के ख़िलाफ़ भी है। वो बातें कुछ इस तरह हैं कि आप के जिस्म में कीड़े पड़ गये थे जिस की वजह से लोग आप से दूर होने लगे और आप को गाँव से बाहर निकाल दिया गया।
एक क़व्वाल ने ये तक कहा कि लोगों ने आप को वहाँ फेंक दिया जहाँ कूड़ा फेंका जाता है।
و لا حول ولا قوۃ الا باللہ العلی العظیم
हम ने इस वाक़िये के बारे में बाज़ उलमा-ए- अहले सुन्नत की तहक़ीक़ को जमा किया है ताकि इन बे-अस्ल बातों का रद्द हो सके और साथ में अस्ल वाक़िये से लोगो को रोशनास कराया जाये।
इस का जानना बहुत ज़रूरी है वरना अंबिया -ए- किराम की तरफ ऐसी बातें मंसूब करना एक मुसलमान के लिए उस के ईमान पर असर अंदाज़ हो सकता है।
जारी..........
अ़ब्दे मुस्तफा
हज़रत अय्यूब अ़लैहिस्सलाम अल्लाह के नबी हैं। आप हज़रत इस्हाक़ अ़लैहिस्सलाम की औलाद में से हैं। अल्लाह तआला ने आप को कसरते माल और औलाद से नवाज़ा था। आप पर एक वक़्त ऐसा आया कि अल्लाह पाक ने आप को आज़माइश में डाला और आप की औलाद और माल वग़ैरह आप से दूर हो गये।
अल्लाह की राह में उसके नेक बंदो की आज़माइश होती है और चूँकि अंबिया -ए- किराम ज़्यादा महबूब होते हैं तो उन की आज़माइश आम लोगों के मुक़ाबिल बड़ी होती हैं और फिर उनके दरजात को बे-हिसाब बुलंदी अ़ता की जाती है।
हज़रत अय्यूब अ़लैहिस्सलाम के सब्र की मिसाल दी जाती है। सब्रे अय्यूब का वाक़िया बहुत मशहूर है। अक्सर मुसलमानों को ना सिर्फ ये मालूम है बल्कि वो अपने मुश्किल वक़्त में इसे याद कर के इस से मदद भी लेते है। इस वाक़िये से मुतल्लिक़ कई बातें ऐसी मशहूर हो गई हैं जो दुरुस्त नहीं है। दुरुस्त ना होने के साथ ये बाते अंबिया -ए- किराम की शान के ख़िलाफ़ भी है। वो बातें कुछ इस तरह हैं कि आप के जिस्म में कीड़े पड़ गये थे जिस की वजह से लोग आप से दूर होने लगे और आप को गाँव से बाहर निकाल दिया गया।
एक क़व्वाल ने ये तक कहा कि लोगों ने आप को वहाँ फेंक दिया जहाँ कूड़ा फेंका जाता है।
و لا حول ولا قوۃ الا باللہ العلی العظیم
हम ने इस वाक़िये के बारे में बाज़ उलमा-ए- अहले सुन्नत की तहक़ीक़ को जमा किया है ताकि इन बे-अस्ल बातों का रद्द हो सके और साथ में अस्ल वाक़िये से लोगो को रोशनास कराया जाये।
इस का जानना बहुत ज़रूरी है वरना अंबिया -ए- किराम की तरफ ऐसी बातें मंसूब करना एक मुसलमान के लिए उस के ईमान पर असर अंदाज़ हो सकता है।
जारी..........
अ़ब्दे मुस्तफा
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حضرت ایوب کے واقعے پر تحقیق (قسط 1)
حضرت ایوب علیہ السلام اللہ کے نبی ہیں۔ آپ حضرت اسحاق علیہ السلام کی اولاد میں سے ہیں۔ اللہ تعالی نے آپ کو کثرت مال اور اولاد سے نوازا تھا۔ آپ پر ایک وقت ایسا آیا کہ اللہ تعالی نے آپ کو آزمائش میں ڈالا اور آپ کی اولاد اور مال وغیرہ آپ سے دور ہو گئے۔
اللہ کی راہ میں اس کے نیک بندوں کی آزمائش ہوتی ہے اور چوں کہ انبیاے کرام زیادہ محبوب ہوتے ہیں تو ان کی آزمائش عام لوگوں کے مقابل بڑی ہوتی ہے اور پھر ان کے درجات کو بے حساب بلندی عطا کی جاتی ہے۔
حضرت ایوب علیہ السلام کے صبر کی مثال دی جاتی ہے۔ صبر ایوب کا واقعہ بہت مشہور ہے۔ اکثر مسلمانوں کو نہ صرف یہ معلوم ہے بلکہ وہ اپنے مشکل وقت میں اسے یاد کر کے اس سے مدد بھی لیتے ہیں۔ اس واقعے سے متعلق کئی باتیں ایسی مشہور ہو گئی ہیں جو درست نہیں ہیں۔ درست نہ ہونے کے ساتھ یہ باتیں انبیاے کرام کے شان کے خلاف بھی ہیں۔ وہ باتیں کچھ اس طرح ہیں کہ آپ کے جسم میں کیڑے پڑ گئے تھے جس کی وجہ سے لوگ آپ سے دور ہونے لگے اور آپ کو گاؤں سے باہر نکال دیا گیا!
ایک قوال نے یہ تک کہا کہ لوگوں نے آپ کو وہاں پھینک دیا جہاں کوڑا پھینکا جاتا ہے۔
ولا حول ولا قوۃ الا باللہ العلی العظیم
ہم نے اس واقعے کے بارے میں بعض علماے اہل سنت کی تحقیقات کو جمع کیا ہے تاکہ ان بے اصل باتوں کا رد ہو سکے اور ساتھ میں اصل واقعے سے لوگوں کو روشناس کرایا جائے۔
اس کا جاننا بہت ضروری ہے ورنہ انبیاے کرام کی طرف ایسی باتیں منسوب کرنا ایک مسلمان کے لیے اس کے ایمان پر اثر انداز ہو سکتا ہے۔
جاری...
عبد مصطفی
حضرت ایوب علیہ السلام اللہ کے نبی ہیں۔ آپ حضرت اسحاق علیہ السلام کی اولاد میں سے ہیں۔ اللہ تعالی نے آپ کو کثرت مال اور اولاد سے نوازا تھا۔ آپ پر ایک وقت ایسا آیا کہ اللہ تعالی نے آپ کو آزمائش میں ڈالا اور آپ کی اولاد اور مال وغیرہ آپ سے دور ہو گئے۔
اللہ کی راہ میں اس کے نیک بندوں کی آزمائش ہوتی ہے اور چوں کہ انبیاے کرام زیادہ محبوب ہوتے ہیں تو ان کی آزمائش عام لوگوں کے مقابل بڑی ہوتی ہے اور پھر ان کے درجات کو بے حساب بلندی عطا کی جاتی ہے۔
حضرت ایوب علیہ السلام کے صبر کی مثال دی جاتی ہے۔ صبر ایوب کا واقعہ بہت مشہور ہے۔ اکثر مسلمانوں کو نہ صرف یہ معلوم ہے بلکہ وہ اپنے مشکل وقت میں اسے یاد کر کے اس سے مدد بھی لیتے ہیں۔ اس واقعے سے متعلق کئی باتیں ایسی مشہور ہو گئی ہیں جو درست نہیں ہیں۔ درست نہ ہونے کے ساتھ یہ باتیں انبیاے کرام کے شان کے خلاف بھی ہیں۔ وہ باتیں کچھ اس طرح ہیں کہ آپ کے جسم میں کیڑے پڑ گئے تھے جس کی وجہ سے لوگ آپ سے دور ہونے لگے اور آپ کو گاؤں سے باہر نکال دیا گیا!
ایک قوال نے یہ تک کہا کہ لوگوں نے آپ کو وہاں پھینک دیا جہاں کوڑا پھینکا جاتا ہے۔
ولا حول ولا قوۃ الا باللہ العلی العظیم
ہم نے اس واقعے کے بارے میں بعض علماے اہل سنت کی تحقیقات کو جمع کیا ہے تاکہ ان بے اصل باتوں کا رد ہو سکے اور ساتھ میں اصل واقعے سے لوگوں کو روشناس کرایا جائے۔
اس کا جاننا بہت ضروری ہے ورنہ انبیاے کرام کی طرف ایسی باتیں منسوب کرنا ایک مسلمان کے لیے اس کے ایمان پر اثر انداز ہو سکتا ہے۔
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عبد مصطفی
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100 साल की सहाबिया को धमकी
ज़ालिम हज्जाज बिन यूसुफ ने हज़रते अ़ब्दुल्लाह बिन ज़ुबैर को शहीद किया और उनकी लाश को सूली पर लटका दिया। फिर उनकी वालिदा हज़रते अस्मा बिन्ते अबू बकर सिद्दीक़ को बुलावा भेजा तो आप रदिअल्लाहु त'आला अ़न्हा ने साफ इंकार कर दिया।
उसने दोबारा पैगाम भेजा कि मेरे पास चली आओ वरना किसी ऐसे शख्स को भेजूँगा जो तुम्हारे बाल पकड़ कर घसीट कर ले आयेगा।
हज़रते अस्मा ने इंकार कर दिया और कहा कि कह दो कि अब मुझे कोई सर के बालों से ही घसीट कर ले जायेगा!
हज्जाज को खुद हज़रते अस्मा के पास आना पड़ा और उस वक़्त हज़रते अस्मा की उम्र तक़रीबन 100 साल थी पर कोई दांत ना गिरा था और ना अ़क्लो दनिश में कोई कमी थी।
हज्जाज ने कहा तूने देखा मैंने कैसे (तेरे बेटे) अल्लाह के दुश्मन (म'आज़ अल्लाह) को क़त्ल किया तो हज़रते अस्मा ने फ़रमाया कि तूने उसकी दुनिया खराब की और उसने तेरी आखिरत बर्बाद कर दी!
फिर आपने बे खौफ़ हज्जाज को जवाब देते हुये कहा कि हुज़ूर ﷺ से हमने एक कज़्ज़ाब और एक ज़ालिम के बारे में सुना था, कज़्ज़ाब तो हमने देख लिया (जिसने नबी होने का झूठा दावा किया) और वो ज़ालिम तू ही हो सकता है!
इसके बाद हज्जाज को बिना जवाब दिये वहाँ से जाना पड़ा और कहता भी क्या कि सामने एक ऐसी बहादुर खातून मौजूद थी जिन्होंने कई जंगे देखी और लड़ी थी।
(انظر: صحیح مسلم، کتاب فضائل صحابہ، باب ذکر کذاب... الخ، ح6373)
ये वो औरतें थी जिन की नस्लें बहादुर पैदा होती थी।
ज़ालिम बादशाह के सामने भी हक़ कहने से नहीं डरती थी।
आज जो औरतें अपने ही दीन के खिलाफ़ बोलती हुई नज़र आती है, उन्हें अपनी क़िस्मत पर रोना चाहिये कि इन ख़वातीन से फ़ैज़ ना ले सकी।
अल्लाह त'आला मुस्लिम खवातीन को ऐसा जज़्बा अ़ता फरमाये और हमारी नस्लों को मुजाहिदीन की सफ़ में खड़ा होने की तौफ़ीक़ अ़ता फरमाये जो इस्लाम, मुसलमान और मज़लूमों के दिफ़ा के लिये अपनी जान क़ुरबान कर दें।
अ़ब्दे मुस्तफ़ा
ज़ालिम हज्जाज बिन यूसुफ ने हज़रते अ़ब्दुल्लाह बिन ज़ुबैर को शहीद किया और उनकी लाश को सूली पर लटका दिया। फिर उनकी वालिदा हज़रते अस्मा बिन्ते अबू बकर सिद्दीक़ को बुलावा भेजा तो आप रदिअल्लाहु त'आला अ़न्हा ने साफ इंकार कर दिया।
उसने दोबारा पैगाम भेजा कि मेरे पास चली आओ वरना किसी ऐसे शख्स को भेजूँगा जो तुम्हारे बाल पकड़ कर घसीट कर ले आयेगा।
हज़रते अस्मा ने इंकार कर दिया और कहा कि कह दो कि अब मुझे कोई सर के बालों से ही घसीट कर ले जायेगा!
हज्जाज को खुद हज़रते अस्मा के पास आना पड़ा और उस वक़्त हज़रते अस्मा की उम्र तक़रीबन 100 साल थी पर कोई दांत ना गिरा था और ना अ़क्लो दनिश में कोई कमी थी।
हज्जाज ने कहा तूने देखा मैंने कैसे (तेरे बेटे) अल्लाह के दुश्मन (म'आज़ अल्लाह) को क़त्ल किया तो हज़रते अस्मा ने फ़रमाया कि तूने उसकी दुनिया खराब की और उसने तेरी आखिरत बर्बाद कर दी!
फिर आपने बे खौफ़ हज्जाज को जवाब देते हुये कहा कि हुज़ूर ﷺ से हमने एक कज़्ज़ाब और एक ज़ालिम के बारे में सुना था, कज़्ज़ाब तो हमने देख लिया (जिसने नबी होने का झूठा दावा किया) और वो ज़ालिम तू ही हो सकता है!
इसके बाद हज्जाज को बिना जवाब दिये वहाँ से जाना पड़ा और कहता भी क्या कि सामने एक ऐसी बहादुर खातून मौजूद थी जिन्होंने कई जंगे देखी और लड़ी थी।
(انظر: صحیح مسلم، کتاب فضائل صحابہ، باب ذکر کذاب... الخ، ح6373)
ये वो औरतें थी जिन की नस्लें बहादुर पैदा होती थी।
ज़ालिम बादशाह के सामने भी हक़ कहने से नहीं डरती थी।
आज जो औरतें अपने ही दीन के खिलाफ़ बोलती हुई नज़र आती है, उन्हें अपनी क़िस्मत पर रोना चाहिये कि इन ख़वातीन से फ़ैज़ ना ले सकी।
अल्लाह त'आला मुस्लिम खवातीन को ऐसा जज़्बा अ़ता फरमाये और हमारी नस्लों को मुजाहिदीन की सफ़ में खड़ा होने की तौफ़ीक़ अ़ता फरमाये जो इस्लाम, मुसलमान और मज़लूमों के दिफ़ा के लिये अपनी जान क़ुरबान कर दें।
अ़ब्दे मुस्तफ़ा
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100 سال کی صحابیہ کو دھمکی
ظالم حجاج بن یوسف نے حضرت عبداللہ بن زبیر کو شہید کیا اور ان کی لاش کو سولی پر لٹکا دیا پھر ان کی والدہ حضرت اسما بنت ابو بکر صدیق کو بلاوا بھیجا تو آپ رضی اللہ عنھا نے صاف انکار کر دیا۔
اُس نے دوبارہ پیغام بھیجا کہ میرے پاس چلی آؤ ورنہ کسی ایسے شخص کو بھیجوں گا جو تمھارے بال پکڑ کر گھسیٹ کر لے آئے گا۔
حضرت اسما نے انکار کر دیا اور کہا، کَہ دو کہ اب مجھے کوئی سر کے بالوں سے ہی گھسیٹ کر لے جائے گا!
حجاج کو خود حضرت اسما کے پاس آنا پڑا اور اس وقت حضرت اسما کی عمر تقریباً 100 سال تھی پر کوئی دانت نہ گرا تھا اور نہ عقل و دانش میں کوئی کمی تھی۔
حجاج نے کہا تو نے دیکھا میں نے کیسے (تیرے بیٹے) اللہ کے دشمن (معاذ اللہ) کو قتل کیا تو حضرت اسما نے فرمایا کہ تو نے اُس کی دنیا خراب کی اور اُس نے تیری آخرت برباد کر دی!
پھر آپ نے بے خوف حجاج کو جواب دیتے ہوئے کہا کہ حضور صلی اللہ علیہ وسلم سے ہم نے ایک کذاب اور ایک ظالم کے بارے میں سنا تھا، کذاب تو ہم نے دیکھ کیا (جس نے نبی ہونے کا جھوٹا دعوی کیا) اور وہ ظالم تو ہی ہو سکتا ہے!
اُس کے بعد حجاج کو بغیر جواب دیے وہاں سے جانا پڑا اور کہتا بھی کیا کہ سامنے ایسی بہادر خاتون موجود تھی جنھوں نے کئی جنگیں دیکھی اور لڑیں تھی۔
(انظر : صحیح المسلم، کتاب فضائل صحابہ، باب ذکرِ کذاب... الخ، حدیث: ۶۳۷۳)
یہ وہ عورتیں تھیں جن کی نسلیں بہادر پیدا ہوتی تھی۔
ظالم بادشاہ کے سامنے بھی حق کہنے سے ڈرتی نہیں تھیں۔
آج جو عورتیں اپنے ہی دین کے خلاف بولتی ہوئی نظر آتی ہیں، انھیں اپنی قسمت پر رونا چاہیے کہ ان خواتین سے فیض نہ لے سکیں۔
اللہ تعالی مسلم خواتین کو ایسا جذبہ عطا فرمائے اور ہماری نسلوں کو مجاہدین کی صف میں کھڑا ہونے کی توفیق عطا فرمائے جو اسلام، مسلمان اور مظلوموں کے دفاع کے لیے اپنی جان قربان کر دیں۔
عبد مصطفی
ظالم حجاج بن یوسف نے حضرت عبداللہ بن زبیر کو شہید کیا اور ان کی لاش کو سولی پر لٹکا دیا پھر ان کی والدہ حضرت اسما بنت ابو بکر صدیق کو بلاوا بھیجا تو آپ رضی اللہ عنھا نے صاف انکار کر دیا۔
اُس نے دوبارہ پیغام بھیجا کہ میرے پاس چلی آؤ ورنہ کسی ایسے شخص کو بھیجوں گا جو تمھارے بال پکڑ کر گھسیٹ کر لے آئے گا۔
حضرت اسما نے انکار کر دیا اور کہا، کَہ دو کہ اب مجھے کوئی سر کے بالوں سے ہی گھسیٹ کر لے جائے گا!
حجاج کو خود حضرت اسما کے پاس آنا پڑا اور اس وقت حضرت اسما کی عمر تقریباً 100 سال تھی پر کوئی دانت نہ گرا تھا اور نہ عقل و دانش میں کوئی کمی تھی۔
حجاج نے کہا تو نے دیکھا میں نے کیسے (تیرے بیٹے) اللہ کے دشمن (معاذ اللہ) کو قتل کیا تو حضرت اسما نے فرمایا کہ تو نے اُس کی دنیا خراب کی اور اُس نے تیری آخرت برباد کر دی!
پھر آپ نے بے خوف حجاج کو جواب دیتے ہوئے کہا کہ حضور صلی اللہ علیہ وسلم سے ہم نے ایک کذاب اور ایک ظالم کے بارے میں سنا تھا، کذاب تو ہم نے دیکھ کیا (جس نے نبی ہونے کا جھوٹا دعوی کیا) اور وہ ظالم تو ہی ہو سکتا ہے!
اُس کے بعد حجاج کو بغیر جواب دیے وہاں سے جانا پڑا اور کہتا بھی کیا کہ سامنے ایسی بہادر خاتون موجود تھی جنھوں نے کئی جنگیں دیکھی اور لڑیں تھی۔
(انظر : صحیح المسلم، کتاب فضائل صحابہ، باب ذکرِ کذاب... الخ، حدیث: ۶۳۷۳)
یہ وہ عورتیں تھیں جن کی نسلیں بہادر پیدا ہوتی تھی۔
ظالم بادشاہ کے سامنے بھی حق کہنے سے ڈرتی نہیں تھیں۔
آج جو عورتیں اپنے ہی دین کے خلاف بولتی ہوئی نظر آتی ہیں، انھیں اپنی قسمت پر رونا چاہیے کہ ان خواتین سے فیض نہ لے سکیں۔
اللہ تعالی مسلم خواتین کو ایسا جذبہ عطا فرمائے اور ہماری نسلوں کو مجاہدین کی صف میں کھڑا ہونے کی توفیق عطا فرمائے جو اسلام، مسلمان اور مظلوموں کے دفاع کے لیے اپنی جان قربان کر دیں۔
عبد مصطفی
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रिश्ता जोड़ दें या फिर तोड़ दें?
इरशादे बारी त'आला है :
وَ یَقْطَعُوْنَ مَاۤ اَمَرَ اللّٰهُ بِهٖۤ اَنْ یُّوْصَلَ وَ یُفْسِدُوْنَ فِی الْاَرْضِۙ اُولٰٓىٕكَ لَهُمُ اللَّعْنَةُ وَ لَهُمْ سُوْٓءُ الدَّارِ (الرعد:25)
"और जिसे जोड़ने का अल्लाह ने हुक़्म फ़रमाया है उसे काटते हैं और ज़मीन में फ़साद फैलाते हैं उनके लिए लानत ही है और उनके लिए बुरा घर है"
रसूलुल्लाह ﷺ ने फ़रमाया :
जिस गुनाह की सज़ा दुनिया में भी जल्द ही दे दी जाये और उसके लिए आखिरत में भी अज़ाब रहे वो बगावत और क़तअ़ रहमी से बढ़ कर नहीं (यानी ये गुनाह यहाँ और आखिरत दोनों में अज़ाब का सामान है)
( ترمذی، کتاب صفۃ القیامۃ، ۴/ ۲۲۹، الحدیث: ۲۵۱۹)
यानी कि ऐसे कितने लोग हैं जो रिश्तो में दरार पैदा करने की कोशिश करते हैं और कुछ ऐसे हैं जो आपसी रिश्तेदारों में ऐसे मशवरे पेश करते रहते हैं जिनसे एक अच्छा काम बनते बनते रुक जाता है वो इस बात का थोड़ा भी ख्याल नहीं करते कि उनके मशवरे इस्लाह के नाम पर रिश्ते जोड़ने का नहीं तोड़ने का काम कर रहे हैं
दूसरे वो है जो उनकी बातों को पत्थर की लकीर समझ कर रिश्तों को जोड़ने वाले अ़मल से दूरी इख्तियार कर लेते हैं।
हकीम उल उम्मत हज़रत अ़ल्लामा मुफ्ती अहमद यार खान नईमी रहमतुल्लाह अ़लैह एक हदीस के तहत फ़रमाते हैं कि मुसलमानों से अच्छा गुमान रखना उन पर बदगुमानी ना करना ये भी अच्छी इबादत में से एक इबादत है।
(مرآۃ المناجیح، ٦٢١/٦)
एक मर्तबा हज़रत अबू हुरैरा रदिअल्लाहु तआला अ़न्हु अहादीस मुबारक बयान कर रहे थे तो फ़रमाया :
वो शख्स जो रिश्तेदारी तोड़ने वाला हो वो हमारी महफिल से उठ जाये!
एक नौजवान उठकर अपनी फूफी के यहाँ गया और कई साल पुराना झगड़ा खत्म किया और फूफी को राजी कर लिया।
(الزواجر، قطع الرحم، ١٥٣/٢)
रिश्तेदारी एक बहुत प्यारा अहसास है जिसे महसूस करने की ज़रूरत है ज़रा-ज़रा सी बातों पर रिश्ते की डोर तोड़ देना दुरुस्त नहीं है इससे जहां इत्तिहाद पर फ़र्क़ पड़ता है वहीं कई दिल भी टूटते हैं जो कि बहुत बुरी बात है।
रिश्ते कीजिये, रिश्तेदारों से अच्छी तरह पेश आयें और यही दीने इस्लाम का मिजाज़ भी है किसी को अहसासे कमतरी का शिकार ना होने दीजिये और जोड़ने का काम कीजिये, ना कि तोड़ने का।
इस दुनिया में अकेले तो किसी ने रहना नहीं फिर क्यों हम तोड़ने का काम करें आज हम ऐसा करेंगे तो कल ज़रूर हमें इसका जवाब और हिसाब देना होगा।
अल्लाह त'आला हमें रिश्तो की अहमिय्यत को समझने और रिश्ते जोड़ने की तौफीक़ दे।
अल्लाह हम मुसलमानों को एक जिस्म की तरह मुत्तहिद बनाये। रब्बे क़दीर अपने नबी उनकी अज़्वाज और सहाबा -ए- किराम के दरमियान क़ाइम होने वाली प्यारी रिश्तेदारी के सदक़े हमें जोड़ने वालों की सफ़ में रखें और तोड़ने के गुनाह से बचाये।
दुख्तर ए मिल्लत (रुक्न अ़ब्दे मुस्तफ़ा ऑफ़िशियल)
इरशादे बारी त'आला है :
وَ یَقْطَعُوْنَ مَاۤ اَمَرَ اللّٰهُ بِهٖۤ اَنْ یُّوْصَلَ وَ یُفْسِدُوْنَ فِی الْاَرْضِۙ اُولٰٓىٕكَ لَهُمُ اللَّعْنَةُ وَ لَهُمْ سُوْٓءُ الدَّارِ (الرعد:25)
"और जिसे जोड़ने का अल्लाह ने हुक़्म फ़रमाया है उसे काटते हैं और ज़मीन में फ़साद फैलाते हैं उनके लिए लानत ही है और उनके लिए बुरा घर है"
रसूलुल्लाह ﷺ ने फ़रमाया :
जिस गुनाह की सज़ा दुनिया में भी जल्द ही दे दी जाये और उसके लिए आखिरत में भी अज़ाब रहे वो बगावत और क़तअ़ रहमी से बढ़ कर नहीं (यानी ये गुनाह यहाँ और आखिरत दोनों में अज़ाब का सामान है)
( ترمذی، کتاب صفۃ القیامۃ، ۴/ ۲۲۹، الحدیث: ۲۵۱۹)
यानी कि ऐसे कितने लोग हैं जो रिश्तो में दरार पैदा करने की कोशिश करते हैं और कुछ ऐसे हैं जो आपसी रिश्तेदारों में ऐसे मशवरे पेश करते रहते हैं जिनसे एक अच्छा काम बनते बनते रुक जाता है वो इस बात का थोड़ा भी ख्याल नहीं करते कि उनके मशवरे इस्लाह के नाम पर रिश्ते जोड़ने का नहीं तोड़ने का काम कर रहे हैं
दूसरे वो है जो उनकी बातों को पत्थर की लकीर समझ कर रिश्तों को जोड़ने वाले अ़मल से दूरी इख्तियार कर लेते हैं।
हकीम उल उम्मत हज़रत अ़ल्लामा मुफ्ती अहमद यार खान नईमी रहमतुल्लाह अ़लैह एक हदीस के तहत फ़रमाते हैं कि मुसलमानों से अच्छा गुमान रखना उन पर बदगुमानी ना करना ये भी अच्छी इबादत में से एक इबादत है।
(مرآۃ المناجیح، ٦٢١/٦)
एक मर्तबा हज़रत अबू हुरैरा रदिअल्लाहु तआला अ़न्हु अहादीस मुबारक बयान कर रहे थे तो फ़रमाया :
वो शख्स जो रिश्तेदारी तोड़ने वाला हो वो हमारी महफिल से उठ जाये!
एक नौजवान उठकर अपनी फूफी के यहाँ गया और कई साल पुराना झगड़ा खत्म किया और फूफी को राजी कर लिया।
(الزواجر، قطع الرحم، ١٥٣/٢)
रिश्तेदारी एक बहुत प्यारा अहसास है जिसे महसूस करने की ज़रूरत है ज़रा-ज़रा सी बातों पर रिश्ते की डोर तोड़ देना दुरुस्त नहीं है इससे जहां इत्तिहाद पर फ़र्क़ पड़ता है वहीं कई दिल भी टूटते हैं जो कि बहुत बुरी बात है।
रिश्ते कीजिये, रिश्तेदारों से अच्छी तरह पेश आयें और यही दीने इस्लाम का मिजाज़ भी है किसी को अहसासे कमतरी का शिकार ना होने दीजिये और जोड़ने का काम कीजिये, ना कि तोड़ने का।
इस दुनिया में अकेले तो किसी ने रहना नहीं फिर क्यों हम तोड़ने का काम करें आज हम ऐसा करेंगे तो कल ज़रूर हमें इसका जवाब और हिसाब देना होगा।
अल्लाह त'आला हमें रिश्तो की अहमिय्यत को समझने और रिश्ते जोड़ने की तौफीक़ दे।
अल्लाह हम मुसलमानों को एक जिस्म की तरह मुत्तहिद बनाये। रब्बे क़दीर अपने नबी उनकी अज़्वाज और सहाबा -ए- किराम के दरमियान क़ाइम होने वाली प्यारी रिश्तेदारी के सदक़े हमें जोड़ने वालों की सफ़ में रखें और तोड़ने के गुनाह से बचाये।
दुख्तर ए मिल्लत (रुक्न अ़ब्दे मुस्तफ़ा ऑफ़िशियल)
Forwarded from Abde Mustafa Organisation
رشتہ جوڑ دیں یا پھر توڑ دیں؟
ارشادِ باری تعالی ہے:
وَ یَقْطَعُوْنَ مَاۤ اَمَرَ اللّٰهُ بِهٖۤ اَنْ یُّوْصَلَ وَ یُفْسِدُوْنَ فِی الْاَرْضِۙ اُولٰٓىٕكَ لَهُمُ اللَّعْنَةُ وَ لَهُمْ سُوْٓءُ الدَّارِ (الرعد:25)
"اور جسے جوڑنے کا اللہ نے حکم فرمایا ہے اسے کاٹتے ہیں اور زمین میں فساد پھیلاتے ہیں ان کے لیے لعنت ہی ہے اور اُن کے لیے برا گھر ہے"
رسول اللہ ﷺ نے فرمایا :
جس گناہ کی سزا دنیا میں بھی جلد ہی دے دی جائے اور اس کے لیے آخرت میں بھی عذاب رہے وہ بغاوت اور قَطع رَحمی سے بڑھ کر نہیں۔ (یعنی یہ گناہ یہاں اور آخرت دونوں میں عذاب کا سامان ہے)
( ترمذی، کتاب صفۃ القیامۃ، ۴/ ۲۲۹، الحدیث: ۲۵۱۹)
یعنی کہ ایسے کتنے لوگ ہیں جو رشتوں میں درار پیدا کرنے کی کوشش کرتے ہیں اور کچھ ایسے ہیں جو آپسی رشتے داروں میں ایسے مشورے پیش کرتے رہتے ہیں جن سے ایک اچھا کام بنتے بنتے رک جاتا ہے۔ وہ اس بات کا تھوڑا بھی خیال نہیں کرتے کہ ان کے مشورے اصلاح کے نام پر رشتے جوڑنے کا نہیں توڑنے کا کام کر رہے ہیں۔
دوسرے وہ ہیں جو ان کی باتوں کو پتھر کی لکیر سمجھ کر رشتوں کو جوڑنے والے عمل سے دوری اختیار کر لیتے ہیں۔
حکیم الاُمت حضرت علامہ مفتی احمد یار خان نعیمی رحمہ اللہ تعالی ایک حدیث کے تحت فرماتے ہیں کہ مسلمانوں سے اچھا گمان کرنا اُن پر بدگمانی نہ کرنا یہ بھی اچھی عبادات میں سے ایک عبادت ہے۔
(مرآۃ المناجیح، ٦٢١/٦)
ایک مرتبہ حضرت ابو ہریرہ رضی اللہ تعالی عنہُ احادیث مبارکہ بیان کر رہے تھے تو فرمایا :
وہ شخص جو رشتے داری توڑنے والا ہو وہ ہماری محفل سے اُٹھ جائے!
ایک نوجوان اُٹھ کر اپنی پھوپی کے ہاں گیا کئی سال پرانا جھگڑا ختم کیا اور پھوپی کو راضی کرلیا۔
(الزواجر، قطع الرحم، ١٥٣/٢)
رشتے داری ایک بہت پیارا احساس ہے جسے محسوس کرنے کی ضرورت ہے۔ ذرا ذرا سی باتوں پر رشتے کی ڈور توڑ دینا درست نہیں ہے۔ اس سے جہاں اتحاد پر فرق پڑتا ہے وہیں کئی دل بھی ٹوٹتے ہیں جو کہ بہت بری بات ہے۔ رشتے کیجیے، رشتہ داروں سے اچھی طرح پیش آئیے اور یہی دین اسلام کا مزاج بھی ہے۔
کسی کو احساس کمتری کا شکار نہ ہونے دیجیے اور جوڑنے کا کام کیجیے نہ کہ توڑنے کا۔ اس دنیا میں اکیلے تو کسی نے رہنا نہیں پھر کیوں ہم توڑنے کا کام کریں؟ آج ہم ایسا کریں گے تو کل ضرور ہمیں اس کا جواب اور حساب دینا ہوگا۔
اللہ تعالی ہمیں رشتوں کی اہمیت کو سمجھنے اور رشتے جوڑنے کی توفیق دے۔ اللہ ہم مسلمانوں کو ایک جسم کی طرح متحد بنائے۔ رب قدیر اپنے نبی، ان کی ازواج اور صحابۂ کرام کے درمیان قائم ہونے والے پیارے رشتوں کے صدقے ہمیں جوڑنے والوں کی صف میں رکھے اور توڑنے کے گناہ سے بچائے۔
دختر ملت
(رکن عبد مصطفی آفیشل)
ارشادِ باری تعالی ہے:
وَ یَقْطَعُوْنَ مَاۤ اَمَرَ اللّٰهُ بِهٖۤ اَنْ یُّوْصَلَ وَ یُفْسِدُوْنَ فِی الْاَرْضِۙ اُولٰٓىٕكَ لَهُمُ اللَّعْنَةُ وَ لَهُمْ سُوْٓءُ الدَّارِ (الرعد:25)
"اور جسے جوڑنے کا اللہ نے حکم فرمایا ہے اسے کاٹتے ہیں اور زمین میں فساد پھیلاتے ہیں ان کے لیے لعنت ہی ہے اور اُن کے لیے برا گھر ہے"
رسول اللہ ﷺ نے فرمایا :
جس گناہ کی سزا دنیا میں بھی جلد ہی دے دی جائے اور اس کے لیے آخرت میں بھی عذاب رہے وہ بغاوت اور قَطع رَحمی سے بڑھ کر نہیں۔ (یعنی یہ گناہ یہاں اور آخرت دونوں میں عذاب کا سامان ہے)
( ترمذی، کتاب صفۃ القیامۃ، ۴/ ۲۲۹، الحدیث: ۲۵۱۹)
یعنی کہ ایسے کتنے لوگ ہیں جو رشتوں میں درار پیدا کرنے کی کوشش کرتے ہیں اور کچھ ایسے ہیں جو آپسی رشتے داروں میں ایسے مشورے پیش کرتے رہتے ہیں جن سے ایک اچھا کام بنتے بنتے رک جاتا ہے۔ وہ اس بات کا تھوڑا بھی خیال نہیں کرتے کہ ان کے مشورے اصلاح کے نام پر رشتے جوڑنے کا نہیں توڑنے کا کام کر رہے ہیں۔
دوسرے وہ ہیں جو ان کی باتوں کو پتھر کی لکیر سمجھ کر رشتوں کو جوڑنے والے عمل سے دوری اختیار کر لیتے ہیں۔
حکیم الاُمت حضرت علامہ مفتی احمد یار خان نعیمی رحمہ اللہ تعالی ایک حدیث کے تحت فرماتے ہیں کہ مسلمانوں سے اچھا گمان کرنا اُن پر بدگمانی نہ کرنا یہ بھی اچھی عبادات میں سے ایک عبادت ہے۔
(مرآۃ المناجیح، ٦٢١/٦)
ایک مرتبہ حضرت ابو ہریرہ رضی اللہ تعالی عنہُ احادیث مبارکہ بیان کر رہے تھے تو فرمایا :
وہ شخص جو رشتے داری توڑنے والا ہو وہ ہماری محفل سے اُٹھ جائے!
ایک نوجوان اُٹھ کر اپنی پھوپی کے ہاں گیا کئی سال پرانا جھگڑا ختم کیا اور پھوپی کو راضی کرلیا۔
(الزواجر، قطع الرحم، ١٥٣/٢)
رشتے داری ایک بہت پیارا احساس ہے جسے محسوس کرنے کی ضرورت ہے۔ ذرا ذرا سی باتوں پر رشتے کی ڈور توڑ دینا درست نہیں ہے۔ اس سے جہاں اتحاد پر فرق پڑتا ہے وہیں کئی دل بھی ٹوٹتے ہیں جو کہ بہت بری بات ہے۔ رشتے کیجیے، رشتہ داروں سے اچھی طرح پیش آئیے اور یہی دین اسلام کا مزاج بھی ہے۔
کسی کو احساس کمتری کا شکار نہ ہونے دیجیے اور جوڑنے کا کام کیجیے نہ کہ توڑنے کا۔ اس دنیا میں اکیلے تو کسی نے رہنا نہیں پھر کیوں ہم توڑنے کا کام کریں؟ آج ہم ایسا کریں گے تو کل ضرور ہمیں اس کا جواب اور حساب دینا ہوگا۔
اللہ تعالی ہمیں رشتوں کی اہمیت کو سمجھنے اور رشتے جوڑنے کی توفیق دے۔ اللہ ہم مسلمانوں کو ایک جسم کی طرح متحد بنائے۔ رب قدیر اپنے نبی، ان کی ازواج اور صحابۂ کرام کے درمیان قائم ہونے والے پیارے رشتوں کے صدقے ہمیں جوڑنے والوں کی صف میں رکھے اور توڑنے کے گناہ سے بچائے۔
دختر ملت
(رکن عبد مصطفی آفیشل)
Forwarded from 🌹 اسلامی معلومات عامہ 🌹 (محمد جمال الدين خان قادری)
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Abde Mustafa Organisation
हज़रत अय्यूब के वाक़िये पर तहक़ीक़ (क़िस्त 1) हज़रत अय्यूब अ़लैहिस्सलाम अल्लाह के नबी हैं। आप हज़रत इस्हाक़ अ़लैहिस्सलाम की औलाद में से हैं। अल्लाह तआला ने आप को कसरते माल और औलाद से नवाज़ा था। आप पर एक वक़्त ऐसा आया कि अल्लाह पाक ने आप को आज़माइश में डाला और आप…
हज़रते अय्यूब अ़लैहिस्सलाम के वाक़िये पर तहक़ीक़ (पार्ट 2)
खलीफा ए हुजूर मुफ्ती -ए- आज़मे हिन्द, शारेह बुखारी, अ़ल्लामा मुफ्ती शरीफुल हक़ अमजदी रहीमहुल्लाहु तआला लिखते हैं कि ये सहीह है और क़ुरआन से साबित है कि हज़रते अय्यूब अ़लैहिस्सलाम को बतौरे आज़माइश बीमारी मे मुब्तिला किया गया और वो बीमारी क्या थी तो बहुत से मुफ़स्सिरीन ने लिखा है कि आप के जिस्म पर फोड़े निकल आये थे जिस में कीड़े पड़ गये थे।
जिस सवाल के जवाब में आपने ये तहरीर फ़रमाया है उस में साईल ने एक रिवायत का ज़िक्र किया था जो कुछ इस तरह बयान की जाती है कि हज़रत अय्यूब अ़लैहिस्सलाम के जिस्म से एक कीड़ा पानी में गिरा और वो झींगा मछ्ली बन गया।
आप लिखते हैं कि ये रिवायत मेरी नज़र से नहीं गुजरी और जिसने बयान की है उस पर लाज़िम है कि हवाला पेश करे और अगर वो खुद घढ़ कर बयान करता है तो उस पर तौबा फ़र्ज़ है (फिर आप लिखते हैं कि) ये भी हक़ है कि अम्बिया -ए- किराम ऐसी बीमारी से मुनज़्ज़ा हैं जिस से घिन आये।
(فتاوی شارح بخاری، ج1، ص512)
एक और सवाल किया गया जिस में जिस्म पर कीड़े पड़ जाने की बात थी तो आप लिखते हैं कि ये वाक़िया तफ़सीर की कुतुब में मौजूद है और ये बतौरे आज़माइश था लिहाज़ा इस पर कोई ऐतराज़ नहीं।
(ایضاً، 553)
जारी है.......
✍ अ़ब्दे मुस्तफ़ा
खलीफा ए हुजूर मुफ्ती -ए- आज़मे हिन्द, शारेह बुखारी, अ़ल्लामा मुफ्ती शरीफुल हक़ अमजदी रहीमहुल्लाहु तआला लिखते हैं कि ये सहीह है और क़ुरआन से साबित है कि हज़रते अय्यूब अ़लैहिस्सलाम को बतौरे आज़माइश बीमारी मे मुब्तिला किया गया और वो बीमारी क्या थी तो बहुत से मुफ़स्सिरीन ने लिखा है कि आप के जिस्म पर फोड़े निकल आये थे जिस में कीड़े पड़ गये थे।
जिस सवाल के जवाब में आपने ये तहरीर फ़रमाया है उस में साईल ने एक रिवायत का ज़िक्र किया था जो कुछ इस तरह बयान की जाती है कि हज़रत अय्यूब अ़लैहिस्सलाम के जिस्म से एक कीड़ा पानी में गिरा और वो झींगा मछ्ली बन गया।
आप लिखते हैं कि ये रिवायत मेरी नज़र से नहीं गुजरी और जिसने बयान की है उस पर लाज़िम है कि हवाला पेश करे और अगर वो खुद घढ़ कर बयान करता है तो उस पर तौबा फ़र्ज़ है (फिर आप लिखते हैं कि) ये भी हक़ है कि अम्बिया -ए- किराम ऐसी बीमारी से मुनज़्ज़ा हैं जिस से घिन आये।
(فتاوی شارح بخاری، ج1، ص512)
एक और सवाल किया गया जिस में जिस्म पर कीड़े पड़ जाने की बात थी तो आप लिखते हैं कि ये वाक़िया तफ़सीर की कुतुब में मौजूद है और ये बतौरे आज़माइश था लिहाज़ा इस पर कोई ऐतराज़ नहीं।
(ایضاً، 553)
जारी है.......
✍ अ़ब्दे मुस्तफ़ा
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حضرتِ ایوب علیہ السلام کے واقعے پر تحقیق (پارٹ 2)
خلیفۂ حضور مفتی اعظم ہند، شارح بخاری علامہ مفتی شریف الحق امجدی علیہ الرحمہ لکھتے ہیں کہ یہ صحیح ہے اور قرآن سے ثابت ہے کہ حضرت ایوب علیہ السلام کو بطور آزمائش بیماری میں مبتلا کیا گیا اور وہ بیماری کیا تھی تو بہت سے مفسرین نے لکھا ہے کہ آپ کے جسم پر پھوڑے نکل آئے تھے جس میں کیڑے پڑ گئے تھے!
جس سوال کے جواب میں آپ نے یہ تحریر فرمایا ہے اس میں سائل نے ایک روایت کا ذکر کیا تھا جو کچھ اس طرح بیان کی جاتی ہے کہ حضرت ایوب علیہ السلام کے جسم سے ایک کیڑا پانی میں گرا اور وہ جھینگا مچھلی بن گیا!
آپ لکھتے ہیں کہ یہ روایت میری نظر سے نہیں گزری اور جس نے بیان کی ہے اس پر لازم ہے کہ حوالہ پیش کرے اور اگر وہ خود گھڑ کر بیان کرتا ہے تو اس پر توبہ فرض ہے (پھر آپ لکھتے ہیں کہ) یہ بھی حق ہے کہ انبیاے کرام ایسی بیماری سے منزّہ ہیں جس سے گھن آئے!
(فتاویٰ شارح بخاری، ج1، ص512)
ایک اور سوال کیا گیا جس میں جسم پر کیڑے پڑ جانے کی بات تھی تو آپ لکھتے ہیں کہ یہ واقعہ تفسیر کی کتب میں موجود ہے اور یہ بطور آزمائش تھا لہٰذا اس پر کوئی اعتراض نہیں!
(ایضاً، ص553)
جاری ہے...
عبد مصطفیٰ
خلیفۂ حضور مفتی اعظم ہند، شارح بخاری علامہ مفتی شریف الحق امجدی علیہ الرحمہ لکھتے ہیں کہ یہ صحیح ہے اور قرآن سے ثابت ہے کہ حضرت ایوب علیہ السلام کو بطور آزمائش بیماری میں مبتلا کیا گیا اور وہ بیماری کیا تھی تو بہت سے مفسرین نے لکھا ہے کہ آپ کے جسم پر پھوڑے نکل آئے تھے جس میں کیڑے پڑ گئے تھے!
جس سوال کے جواب میں آپ نے یہ تحریر فرمایا ہے اس میں سائل نے ایک روایت کا ذکر کیا تھا جو کچھ اس طرح بیان کی جاتی ہے کہ حضرت ایوب علیہ السلام کے جسم سے ایک کیڑا پانی میں گرا اور وہ جھینگا مچھلی بن گیا!
آپ لکھتے ہیں کہ یہ روایت میری نظر سے نہیں گزری اور جس نے بیان کی ہے اس پر لازم ہے کہ حوالہ پیش کرے اور اگر وہ خود گھڑ کر بیان کرتا ہے تو اس پر توبہ فرض ہے (پھر آپ لکھتے ہیں کہ) یہ بھی حق ہے کہ انبیاے کرام ایسی بیماری سے منزّہ ہیں جس سے گھن آئے!
(فتاویٰ شارح بخاری، ج1، ص512)
ایک اور سوال کیا گیا جس میں جسم پر کیڑے پڑ جانے کی بات تھی تو آپ لکھتے ہیں کہ یہ واقعہ تفسیر کی کتب میں موجود ہے اور یہ بطور آزمائش تھا لہٰذا اس پر کوئی اعتراض نہیں!
(ایضاً، ص553)
جاری ہے...
عبد مصطفیٰ
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जिया करता है क्या यूँ ही मरने वाला?
हमारे पक्के और मज़बूत घरों को देखिये....,
हमारे कपड़ों पर नज़र डालिये....,
हमारा खाना पीना मुलाहिज़ा कीजिये....,
और हमारी ख्वाहिशों की एक फेहरिस्त बनाइये फिर बस एक सवाल को सामने रखिये कि :
जिया करता है क्या यूँ ही मरने वाला?
हमारे हालात देख कर ऐसा लगता है कि हमें मरना ही नहीं है।
हम सफ़र में हैं पर ये भूल गये हैं कि हम मुसाफिर हैं।
हम तो रास्ते को ही मंज़िल समझ बैठे हैं!
जिया करता है क्या यूँ ही मरने वाला?
तुझे हुस्ने ज़ाहिर ने धोके में डाला।
और ये सच जल्द से जल्द जान लिजिये कि :
जगह जी लगाने की दुनिया नहीं है।
ये इबरत की जा है तमाशा नहीं है।
एक पल है कि आप साँसें ले रहे हैं,
बस अगले पल में ये क़िस्सा खत्म हो सकता है।
सब कुछ खत्म और सारी ख्वाहिशें साथ में दफ्न हो जायेंगी और फिर पछ्ताने के अलावा कोई चारा ना होगा।
जहाँ में है इबरत के हर सू नमूने
मगर तुझ को अंधा किया रंगो बू ने
कभी गौर से भी ये देखा है तूने?
जो आबाद थे वो महल अब हैं सूने!
जगह जी लगाने की दुनिया नहीं है....
अ़ब्दे मुस्तफ़ा
हमारे पक्के और मज़बूत घरों को देखिये....,
हमारे कपड़ों पर नज़र डालिये....,
हमारा खाना पीना मुलाहिज़ा कीजिये....,
और हमारी ख्वाहिशों की एक फेहरिस्त बनाइये फिर बस एक सवाल को सामने रखिये कि :
जिया करता है क्या यूँ ही मरने वाला?
हमारे हालात देख कर ऐसा लगता है कि हमें मरना ही नहीं है।
हम सफ़र में हैं पर ये भूल गये हैं कि हम मुसाफिर हैं।
हम तो रास्ते को ही मंज़िल समझ बैठे हैं!
जिया करता है क्या यूँ ही मरने वाला?
तुझे हुस्ने ज़ाहिर ने धोके में डाला।
और ये सच जल्द से जल्द जान लिजिये कि :
जगह जी लगाने की दुनिया नहीं है।
ये इबरत की जा है तमाशा नहीं है।
एक पल है कि आप साँसें ले रहे हैं,
बस अगले पल में ये क़िस्सा खत्म हो सकता है।
सब कुछ खत्म और सारी ख्वाहिशें साथ में दफ्न हो जायेंगी और फिर पछ्ताने के अलावा कोई चारा ना होगा।
जहाँ में है इबरत के हर सू नमूने
मगर तुझ को अंधा किया रंगो बू ने
कभी गौर से भी ये देखा है तूने?
जो आबाद थे वो महल अब हैं सूने!
जगह जी लगाने की दुनिया नहीं है....
अ़ब्दे मुस्तफ़ा
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جِیا کرتا ہے کیا یوں ہی مرنے والا؟
ہمارے پکے اور مضبوط گھروں کو دیکھیے.....
ہمارے کپڑوں پر نظر ڈالیے....
ہمارا کھانا پینا ملاحظہ کیجیے....
اور ہماری خواہشوں کی ایک فہرست بنائیے، پھر بس ایک سوال کو سامنے رکھیے کہ :
جیا کرتا ہے کیا یوں ہی مرنے والا؟
ہمارے حالات دیکھ کر ایسا لگتا ہے کہ ہمیں مرنا ہی نہیں ہے!
ہم سفر میں ہیں پر یہ بھول گئے کہ ہم مسافر ہیں!
ہم تو راستے کو ہی منزل سمجھ بیٹھے!
جیا کرتا ہے کیا یوں ہی مرنے والا؟
تجھے حُسنِ ظاہر نے دھوکے میں ڈالا!
اور یہ سچ جلد سے جلد جان لیجیے کہ:
جگہ جی لگانے کی دنیا نہیں ہے
یہ عبرت کی جا ہے تماشہ نہیں ہے
ایک پل ہے کہ آپ سانسیں لے رہے ہیں بس اگلے پل میں یہ قصہ ختم ہو سکتا ہے۔
سب کچھ ختم، ساری خواہشیں ساتھ میں دفن ہو جائیں گی اور پھر پچھتانے کے علاوہ کوئی چارہ نہ ہوگا۔
جہاں میں ہے عبرت کے ہر سو نمونے
مگر تجھ کو اندھا کیا رنگ و بو نے
کبھی غور سے بھی یہ دیکھا ہے تو نے؟
جو آباد تھے وہ محل اب ہیں سُونے!
جگہ جی لگانے کی دنیا نہیں ہے...
عبد مصطفی
ہمارے پکے اور مضبوط گھروں کو دیکھیے.....
ہمارے کپڑوں پر نظر ڈالیے....
ہمارا کھانا پینا ملاحظہ کیجیے....
اور ہماری خواہشوں کی ایک فہرست بنائیے، پھر بس ایک سوال کو سامنے رکھیے کہ :
جیا کرتا ہے کیا یوں ہی مرنے والا؟
ہمارے حالات دیکھ کر ایسا لگتا ہے کہ ہمیں مرنا ہی نہیں ہے!
ہم سفر میں ہیں پر یہ بھول گئے کہ ہم مسافر ہیں!
ہم تو راستے کو ہی منزل سمجھ بیٹھے!
جیا کرتا ہے کیا یوں ہی مرنے والا؟
تجھے حُسنِ ظاہر نے دھوکے میں ڈالا!
اور یہ سچ جلد سے جلد جان لیجیے کہ:
جگہ جی لگانے کی دنیا نہیں ہے
یہ عبرت کی جا ہے تماشہ نہیں ہے
ایک پل ہے کہ آپ سانسیں لے رہے ہیں بس اگلے پل میں یہ قصہ ختم ہو سکتا ہے۔
سب کچھ ختم، ساری خواہشیں ساتھ میں دفن ہو جائیں گی اور پھر پچھتانے کے علاوہ کوئی چارہ نہ ہوگا۔
جہاں میں ہے عبرت کے ہر سو نمونے
مگر تجھ کو اندھا کیا رنگ و بو نے
کبھی غور سے بھی یہ دیکھا ہے تو نے؟
جو آباد تھے وہ محل اب ہیں سُونے!
جگہ جی لگانے کی دنیا نہیں ہے...
عبد مصطفی
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उर्दू शायरी का जनाज़ा
उर्दू बड़ी प्यारी ज़बान है और जब इस ज़बान में शायरी हो तो फिर क्या बात है।
अशआर तो कई ज़बानों में मिलेंगे पर उर्दू अशआर की बात ही जुदा है।
अफ़सोस की बात ये है कि कुछ लोगों ने इस प्यारी ज़बान की प्यारी शायरी का जनाज़ा निकालने में कोई कसर नहीं छोड़ी!
अब ज़रा ये शेर देखें :
ऐ दीन के गद्दार बुलाऊँ क्या रज़ा को
कर देंगे तड़ी पार बुलाऊँ क्या रज़ा को
फिर ये भी :
तुम लोग यज़ीदी हो बताते हो हुसैनी
चल जायेगी तलवार बुलाऊँ क्या अ़ली को
ये उर्दू शायरी का जनाज़ा ही है। ये शायरी कम और तफ़रीह का सामान ज़्यादा मालूम होता है। एक ये शेर देखें :
हश्मती उन को तेवर दिखा दीजिये
कान पे रख के घोड़ा दबा दीजिये
ऐसी शायरी करने वालों को शायरे हिन्दुस्तान तो पाकिस्तान और उस्ताज़ुश शुअ़रा और ना जाने क्या-क्या कह दिया जाता है।
शायरी ऐसी हो जिस में फ़िक्र व शऊर हो। ऐसे अलफाज़ होने चाहिये कि सुनने और पढ़ने वाला शायर के गहरे अहसासात में खो जाये।
आप आला हज़रत, बिरादरे आला हज़रत और ताजुश्शरिया रहीमहुमुल्लाहु त'आला और भी कई हस्तियाँ हैं कि उनके लिखे गये उर्दू अशआर को पढ़ें फिर आप खुद गौर करें कि आज उर्दू शायरी हो रही है या उस का जनाज़ा निकाला जा रहा है।
अ़ब्दे मुस्तफ़ा
उर्दू बड़ी प्यारी ज़बान है और जब इस ज़बान में शायरी हो तो फिर क्या बात है।
अशआर तो कई ज़बानों में मिलेंगे पर उर्दू अशआर की बात ही जुदा है।
अफ़सोस की बात ये है कि कुछ लोगों ने इस प्यारी ज़बान की प्यारी शायरी का जनाज़ा निकालने में कोई कसर नहीं छोड़ी!
अब ज़रा ये शेर देखें :
ऐ दीन के गद्दार बुलाऊँ क्या रज़ा को
कर देंगे तड़ी पार बुलाऊँ क्या रज़ा को
फिर ये भी :
तुम लोग यज़ीदी हो बताते हो हुसैनी
चल जायेगी तलवार बुलाऊँ क्या अ़ली को
ये उर्दू शायरी का जनाज़ा ही है। ये शायरी कम और तफ़रीह का सामान ज़्यादा मालूम होता है। एक ये शेर देखें :
हश्मती उन को तेवर दिखा दीजिये
कान पे रख के घोड़ा दबा दीजिये
ऐसी शायरी करने वालों को शायरे हिन्दुस्तान तो पाकिस्तान और उस्ताज़ुश शुअ़रा और ना जाने क्या-क्या कह दिया जाता है।
शायरी ऐसी हो जिस में फ़िक्र व शऊर हो। ऐसे अलफाज़ होने चाहिये कि सुनने और पढ़ने वाला शायर के गहरे अहसासात में खो जाये।
आप आला हज़रत, बिरादरे आला हज़रत और ताजुश्शरिया रहीमहुमुल्लाहु त'आला और भी कई हस्तियाँ हैं कि उनके लिखे गये उर्दू अशआर को पढ़ें फिर आप खुद गौर करें कि आज उर्दू शायरी हो रही है या उस का जनाज़ा निकाला जा रहा है।
अ़ब्दे मुस्तफ़ा