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یہاں روزانہ اسلامی تاریخ اور بزرگانِ دین و علمائے ربانیین کی تاریخ ولادت و تاریخ وفات اور دینی باتیں (فوٹو،پوسٹ) تاریخ اور مہینے کی مناسبت سے مع کتابوں کی لِنکس بھیجی جاتی ہیں
طالب دعا 🤲
محمد جمال الدین خان قادری رضوی عفی عنہ
🆔 @Muhammad_Jamaluddin_Khan
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Forwarded from Muḥammad Qāsim al-Qādirī al-Azʾharī (Qāsim Saifī)
स़िद्-दीक़ का पहला नंबर

कूफ़ा के मिम्बर पर खड़े होकर मौला ह़ैदरे कर्रार (कर्रमल्लाहु तआ़ला वज्हहुल् करीम) ने तफ़्ज़ीलिय्यत की जड़ों को ही काट डाला, और एलान कर दिया:

"ألا، إن خير هذه الأمة بعد نبيها، أبو بكر، ثم عمر"،

"ख़बरदार, नबी के बाद, इस उम्मत में सबसे अफ़्ज़ल, अबू बक्र हैं, फिर उ़मर हैं."

📙मुस्नदे अह़मद, ह़दीस न. 833 से 837 तक, जिल्द न. 2, पेज न. 201, पब्लिकेशन: मुअस्ससतुर् रिसालह (बेरूत), पहला एडीशन, 1421 हि./2001 ई.

📙तारीख़े दिमश्क़ (इब्ने अ़साकिर), ह़र्फ़ुल् ऐ़न, जिल्द न. 44, पेज न. 203, पब्लिकेशन: दारुल् फ़िक्र (बेरूत), 1415 हि./1995 ई.

'स़ह़ीह़ बुख़ारी' में है कि ह़ैदरे कर्रार मौला अ़ली (कर्रमल्लाहु तआ़ला वज्हहुल् करीम) के बेटे हज़रत मुह़म्मद इब्ने ह़नफ़िय्यह (रद़ियल्लाहु अ़न्हु) रिवायत करते हैं:

"'قُلْتُ لِأَبِي أَيُّ النَّاسِ خَيْرٌ بَعْدَ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ؟' قَالَ: 'أَبُو بَكْرٍ'، قُلْتُ: 'ثُمَّ مَنْ؟' قَالَ: 'ثُمَّ عُمَرُ'،
وَخَشِيتُ أَنْ يَقُولَ عُثْمَانُ، قُلْتُ: 'ثُمَّ أَنْتَ؟' قَالَ: 'مَا أَنَا إِلَّا رَجُلٌ مِنَ المُسْلِمِينَ'"،

"मैंने अपने वालिद (ह़ज़रत अ़ली) से पूछा कि: 'आक़ा (ﷺ 💚) के बाद लोगों में सबसे अफ़्ज़ल कौन है?'

तो ह़ज़रत अ़ली ने जवाब दिया: 'अबू बक्र',
मैंने पूछा: 'फिर कौन?'
तो ह़ज़रत अ़ली ने जवाब दिया: 'उ़मर',
फिर मुझे ख़ौफ़ हुआ कि (अगर मैं अब पूछूँगा कि: 'फिर कौन', तो आप कहीं) ह़ज़रत उ़स्मान का नाम न ले दें, (इसलिए) मैंने (डायरेक्ट) पूछा: 'फिर आप हैं न?'

तो ह़ज़रत अ़ली ने (तवाज़ुअ़न्) जवाब दिया: 'मैं तो सिर्फ़ मुसलमानों में से ही एक आदमी हूं'."

📙स़ह़ीह़ बुख़ारी, ह़दीस न. 3671, जिल्द न. 5, पेज न. 7, पब्लिकेशन: दारु त़ौक़िन् नजाह (बेरूत), फ़र्स्ट एडीशन, 1422 हि.

इमाम अबू बक्र बैहक़ी (d. 458 हि.), अपनी किताब: 'अल्-इअ़्तिक़ाद वल् हिदायह' में, और इमाम इब्ने अ़साकिर (d. 571 हि.) अपनी किताब: 'तारीख़े दिमश्क़' में रिवायत करते हैं कि मौला अ़ली (रद़ियल्लाहु अ़न्हु) ने बस़रा में मिंबर पर ख़ुत़बा देते हुए इर्शाद फ़रमाया:

"أَلَا، لَا يُفَضِّلْنِي أَحَدٌ عَلَى أَبِي بَكْرٍ وَعُمَرَ. لَا أُوتِیَ بِأَحَدٍ فَضَّلَنِي عَلَيْهِمَا إِلَّا جَلَدْتُهُ حَدَّ الْمُفْتَرِي"،

"ख़बरदार, कोई भी, अबू बक्र और उ़मर पर, मुझे फ़ज़ीलत नहीं देगा. मेरे पास जो भी शख़्स ऐसा लाया गया, जो मुझे इन दोनों से अफ़्ज़ल मानता है, उसे मैं 80 कोड़ों की सज़ा दूँगा."

📙अल्-इअ़्तिक़ाद वल् हिदायह, पेज नं. 358, पब्लिकेशन: दारुल् आफ़ाक़ (बेरूत), पहला एडीशन, 1401 हि.
📙तारीख़े दिमश्क़ (इब्ने अ़साकिर), ह़र्फ़ुल् ऐ़न, ह़दीस नं. 3398, जिल्द न. 30, पेज न. 383, पब्लिकेशन: दारुल् फ़िक्र (बेरूत), 1415 हि./1995 ई.
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मुह़म्मद क़ासिमुल् क़ादिरी अल्-अज़्हरी
04/02/21 ई.
Forwarded from Muḥammad Qāsim al-Qādirī al-Azʾharī (Qāsim Saifī)
हमेशा छोटे बनकर रहो

मख़्लूक़ में सबसे बड़े, मुख़्तारे कायनात, सुल्त़ानुल् अम्बिया, आक़ा (ﷺ 💚) ने इरशाद फ़रमाया:

"مَنْ تَوَاضَعَ لِلَّهِ رَفَعَهُ اللهُ، فَهُوَ فِي نَفْسِهِ صَغِيرٌ، وَفِي أَعْيُنِ النَّاسِ عَظِيمٌ؛ وَمَنْ تَكَبَّرَ وَضَعَهُ اللهُ، فَهُوَ فِي أَعْيُنِ النَّاسِ صَغِيرٌ، وَفِي نَفْسِهِ كَبِيرٌ، حَتَّى لَهُوَ أَهْوَنُ عَلَيْهِمْ مِنْ كَلْبٍ أَوْ خِنْزِيرٍ"،

"जिसने अल्लाह के लिए तवाज़ुअ़ (छोटा बनने की आदत) इख़्तियार की, अल्लाह ने उसे बुलंद कर दिया. तो वो ख़ुद में तो छोटा होता है, मगर लोगों की नज़र में अ़ज़्मत वाला होता है; और जिसने घमंड किया, तो अल्लाह ने उसे नीचा दिखा दिया. तो वो लोगों की नज़र में नीच होता है, और ख़ुद में अपने आप को बड़ा समझता है; यहां तक कि लोगों पर, वो कुत्ते और सूअर से भी ज़्यादा गया-गुज़रा हुआ होता है."

📙शुअ़बुल् ईमान (लिल् बैहक़िय्यि), ह़दीस न. 7790, जिल्द न. 10, पेज न. 455, पब्लिकेशन: मक्-तबतुर् रुश्द (रियाद़), फ़र्स्ट एडीशन, 1423 हि./2003 ई.
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मुह़म्मद क़ासिमुल् क़ादिरी अल्-अज़्हरी
27/01/21 ई.
Forwarded from Muḥammad Qāsim al-Qādirī al-Azʾharī (Qāsim Saifī)
वक़्त पर शादी कर लेना बहुत ज़रूरी है, प्यारे आक़ा (ﷺ 💚) ने इरशाद फ़रमाया:

"مِسْكِينٌ مِسْكِينٌ رَجُلٌ لَيْسَتْ لَهُ امْرَأَةٌ، قِيلَ: 'يَا رَسُولَ اللهِ! وَإِنْ كَانَ غَنِيًّا ذَا مَالٍ؟' قَالَ: 'وَإِنْ كَانَ غَنِيًّا مِنَ الْمَالِ'، قَالَ: 'وَمِسْكِينَةٌ مِسْكِينَةٌ امْرَأَةٌ لَيْسَ لَهَا زَوْجٌ'، قِيلَ: 'يَا رَسُولَ اللهِ! وَإِنْ كَانَتْ غَنِيَّةً أَوْ مُكْثِرَةً مِنَ الْمَالِ؟' قَالَ: 'وَإِنْ كَانَتْ'."

"मिस्कीन है, मिस्कीन है वो मर्द, जिसकी बीवी न हो; अर्ज़ की गयी: 'ऐ अल्लाह के रसूल! अगरचे (वो मर्द) माल वाला अमीर (rich) हो?'
फ़रमाया: 'हाँ, अगरचे माल वाला अमीर (rich) हो.'

(फिर आक़ा ﷺ 💚 ने) फ़रमाया: 'मिस्कीना है, मिस्कीना है वो औरत, जिसका शौहर न हो.'
अर्ज़ की गयी: 'ऐ अल्लाह के रसूल! चाहें वो (औरत) अमीर (rich) हो, या ज़्यादा माल वाली हो?'
फ़रमाया: 'हाँ (चाहें माल वाली) हो'."

📙शुअ़बुल् ईमान (लिल् बैहक़िय्यि, d. 458 हि.), ह़दीस नं. 5097, जिल्द नं. 7, सफ़ा नं. 338, पब्लिकेशन: मक्-तबतुर् रुश्द (रियाद), फ़र्स्ट एडीशन, 1423 हि./2003 ई.
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मुह़म्मद क़ासिमुल् क़ादिरी अल्-अज़्हरी
07/10/20 ई.
Forwarded from Muḥammad Qāsim al-Qādirī al-Azʾharī (Qāsim Saifī)
मिअ़्राजुन्-नबी

आज चांद की 26 तारीख़ है, और मग़रिब बाद 27 लग जाएगी. 27 रजब (ब-इख़्तिलाफ़े रिवायात) वो मुबारक रात है जिसमें अल्लाह (ﷻ) ने अपने प्यारे नबी (ﷺ 💚) को रात के एक बहुत ही छोटे हिस्से में, आसमानों, अ़र्श और फिर ला-मकां (no place) की सैर कराई. जिसका ज़िक्र क़ुरआन में कुछ इस तरह हुआ:

क़ुरआन 17:1 —

"سُبْحَانَ الَّذِي أَسْرٰى بِعَبْدِهِ لَيْلًا مِّنَ الْمَسْجِدِ الْحَرَامِ إِلَى الْمَسْجِدِ الْأَقْصَى الَّذِي بَارَكْنَا حَوْلَهُ لِنُرِيَهُ مِنْ آيَاتِنَا ۚ إِنَّهُ هُوَ السَّمِيعُ الْبَصِيرُ"،

"पाकी है उसे, जो अपने बंदे को रातों रात ले गया, मस्जिदे ह़राम से मस्जिदे अक़्स़ा तक, जिसके गिर्दागिर्द हमनें बरकत रखी, कि हम उसे अपनी अ़ज़ीम निशानियाँ दिखाएं; बेशक, वो सुनता देखता है."
[कंज़ुल् ईमान]

क़ुरआन 53:1 —

"وَالنَّجْمِ إِذَا هَوٰى"،

"उस प्यारे, चमकते तारे, मुह़म्मद की क़सम!
जब ये मिअ़राज से उतरे."
[कंज़ुल् ईमान]

इस सफ़र के तीन दर्जे हैं, और तीनों का हुक्म अलग अलग है:

1. इस्-रा: मस्जिदे ह़राम से मस्जिदे अक़्स़ा तक, इसका इंकार करने वाला 'काफ़िर' है;

2. मिअ़राज: मस्जिदे अक़्स़ा से अ़र्श तक, इसका इंकार करने वाला 'गुमराह' है;

3. इअ़राज/उ़रूज: अ़र्श से ला-मकां तक, इसका इंकार करने वाला 'ख़ात़ी (ग़लत़ी पर)' है.

वक़्त की छोटी मिक़्दार जो अब तक साइंस ने दर्याफ़्त की है, उसकी कुछ झलक देखें:

(1) पिको सैकंड
= एक सैकंड का दस खरबवां हिस्सा
= 10¯¹²
= 1/1000 000 000 000
= 0.000 000 000 001 सैकंड

एक सैकंड के सामने पिको सैकंड की वही हैसियत है जो तक़रीबन 31,689 सालों के सामने एक सैकंड की होती है;

(2) नैनो सैकंड
= एक सैकंड का एक अरबवां हिस्सा
= 10⁻⁹
= 1⁄1 000 000 000
= 1000 पिको सैकंड
= 1⁄1000 माइक्रो सैकंड

जाहिल मुल्ह़िदीन (Atheists) और कुफ़्फ़ार को, वक़्त की ये छोटी छोटी इकाइयों पर तो अंधा यक़ीन है, कि इन छोटे-छोटे लम्हों में भी कायनात में बहुत सारी तब्दीलियां हो जाती हैं;
मगर अल्लाह (ﷻ) की क़ुदरत से कोई जिस्म पूरी कायनात में चंद लम्हों में सैर कर ले, तो ये इन्हें क़ुबूल नहीं.
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मुह़म्मद क़ासिमुल् क़ादिरी अल्-अज़्हरी
11/03/21 ई.
Forwarded from Muḥammad Qāsim al-Qādirī al-Azʾharī (Qāsim Saifī)
एक बीमारी जो आ़म हो चुकी है

आजकल एक ऐसा माहौल क्रिएट हो गया है कि मुसलमान अपने ऊपर आने वाली 'समावी परेशानियों (Natural Disasters)' को भी, ग़ैरों की साज़िश बताने में देर नहीं लगाता. इसे हर जगह फ़्रीमेसन, इल्यूमिनाती, हार्प वग़ैरह ही दिखाई देता है;

ये बात ठीक है कि दुश्मनों की साज़िशों का इंकार नहीं किया जा सकता, मगर अपनी बद-आ़मालियों के सबब आने वाले अ़ज़ाब का भी इंकार नहीं किया जा सकता;

अल्लाह (ﷻ) ने क़ुरआन 29:2-4 में इर्शाद फ़रमाया:

"اَحَسِبَ النَّاسُ اَنْ یُّتْرَكُوْۤا اَنْ یَّقُوْلُوْۤا اٰمَنَّا وَ هُمْ لَا یُفْتَنُوْنَ وَ لَقَدْ فَتَنَّا الَّذِیْنَ مِنْ قَبْلِهِمْ فَلَیَعْلَمَنَّ اللّٰهُ الَّذِیْنَ صَدَقُوْا وَ لَیَعْلَمَنَّ الْكٰذِبِیْنَ اَمْ حَسِبَ الَّذِیْنَ یَعْمَلُوْنَ السَّیِّاٰتِ اَنْ یَّسْبِقُوْنَاؕ-سَآءَ مَا یَحْكُمُوْنَ"،

"क्या लोग इस घमंड में हैं कि इतनी बात पर छोड़ दिए जाएंगे, कि कहें: 'हम ईमान लाए', और उनकी आज़माइश न होगी!?
और बेशक हमने इनसे अगलों को जांचा, तो ज़रूर अल्लाह सच्चों को देखेगा, और ज़रूर झूठों को देखेगा;
या ये समझे हुए हैं वो, जो बुरे काम करते हैं कि हम से कहीं निकल जाएंगे!? क्या ही बुरा हुक्म लगाते हैं!"
[कंज़ुल् ईमान]

मुसीबत आए, तो दुश्मनों की चाल नज़र आती है, और अपनी बद-अ़मली का कोई हाथ उसमें दिखाई नहीं देता;
मगर निअ़्मतों के आने पर, हर दिमाग़ यही सोचता है कि मेरी फ़ुलां प्लानिंग से, मेरा फ़ुलां काम बन गया. तब, ऐसे लोगों के मुत़ाबिक़, न दुश्मनों का हाथ होता है, और न ही अल्लाह (ﷻ) का करमे ख़ास़;

अल्लाह (ﷻ) ने क़ुरआन 100:6 में इर्शाद फ़रमाया:

"إِنَّ الْإِنسَانَ لِرَبِّهِ لَكَنُودٌ"،

"बेशक!
आदमी अपने रब का बड़ा नाशुक्रा है."
[कंज़ुल् ईमान]

इमाम त़बरी व इब्ने कसीर ने इस आयत में मज़्कूर लफ़्ज़े 'कनूद' का मतलब ये बयान किया है कि:

"هو الكفور الذي يعد المصائب، وينسى نعم ربه"،

"('कनूद' उस) नाशुक्रे शख़्स को कहते हैं जो मुसीबतों को तो गिन-गिनकर रखता है, मगर अपने रब की निअ़्मतों को भुला देता है."

ह़क़ तो ये था कि मुसीबतों में अपने आ़माल का जायज़ा लिया जाता, और इ़बरत हासिल की जाती. इंसान जो मेहनत, एक समावी मुसीबत को, दुश्मनों की साज़िश साबित करने में कर रहा है; काश! इतनी तह़क़ीक़, अपने आ़माल का जायज़ा लेने में करता. 💔
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मुह़म्मद क़ासिमुल् क़ादिरी अल्-अज़्हरी
08/02/21 ई.
Forwarded from Muḥammad Qāsim al-Qādirī al-Azʾharī (Qāsim Saifī)
ज़लज़ला: एक अ़ज़ाब

अल्लाह (ﷻ) ने क़ुरआन 6:65 में इर्शाद फ़रमाया:

"قُلْ هُوَ الْقَادِرُ عَلٰۤى اَنْ یَّبْعَثَ عَلَیْكُمْ عَذَابًا مِّنْ فَوْقِكُمْ اَوْ مِنْ تَحْتِ اَرْجُلِكُمْ اَوْ یَلْبِسَكُمْ شِیَعًا وَّ یُذِیْقَ بَعْضَكُمْ بَاْسَ بَعْضٍؕ اُنْظُرْ كَیْفَ نُصَرِّفُ الْاٰیٰتِ لَعَلَّهُمْ یَفْقَهُوْنَ"،

"तुम फ़रमाओ: 'वो क़ादिर है, कि तुम पर अ़ज़ाब भेजे, तुम्हारे ऊपर से, या तुम्हारे पांव के तले से;
या तुम्हें भिड़ा दे, मुख़्तलिफ़ गिरोह करके;
और एक को, दूसरे की सख़्ती चखाये',
देखो, हम क्यूंकर तरह-तरह से आयतें बयान करते हैं, कि कहीं इनको समझ सको."
[कंज़ुल् ईमान]

आक़ा (ﷺ ❤️) ने इर्शाद फ़रमाया:

"لَا تَقُومُ السَّاعَةُ حَتَّى يُقْبَضَ الْعِلْمُ، وَتَكْثُرَ الزَّلَازِلُ، وَيَتَقَارَبَ الزَّمَانُ، وَتَظْهَرَ الْفِتَنُ، وَيَكْثُرَ الْهَرْجُ، وَهُوَ الْقَتْلُ الْقَتْلُ، حَتَّى يَكْثُرَ فِيكُمُ الْمَالُ فَيَفِيضَ"،

"क़ियामत नहीं आएगी, यहां तक कि:
इ़ल्म उठा लिया जाएगा;
और बहुत ज़लज़ले आयेंगे;
और वक़्त सिमट जाएगा;
और फ़ितने ज़ाहिर होंगे;
और 'हर्ज' ज़्यादा होगा, और वो क़त्ल है क़त्ल;
यहां तक कि तुम्हारे दरमियान, दौलत बहुत ज़्यादा बढ़ जाएगी."

📙स़ह़ीह़ बुख़ारी, ह़दीस नं. 1036, जिल्द नं. 2, पेज नं. 33, पब्लिकेशन: दारु त़ौक़िन् नजाह (बेरूत), पहला एडीशन, 1422 ई.

सय्यिदुना अनस (रद़ियल्लाहु अ़न्हु) से रिवायत है कि सय्यिदा आ़इशा (रद़ियल्लाहु अ़न्हा) ने फ़रमाया:

"'إِنَّ الْمَرْأَةَ إِذَا خَلَعْتَ ثِيَابَهَا فِي غَيْرِ بَيْتِ زَوْجِهَا هَتَكَتْ مَا بَيْنَهَا وَبَيْنَ اللَّهِ عَزَّ وَجَلَّ مِنْ حِجَابٍ، وَإِنْ تَطَيَّبَتْ لِغَيْرِ زَوْجِهَا كَانَ عَلَيْهَا نَارًا وَشَنَارًا، فَإِذَا اسْتَحَلُّوا الزِّنَا وَشَرِبُوا الْخُمُورَ بَعْدَ هَذَا وَضَرَبُوا الْمَعَازِفَ، غَارَ اللَّهُ فِي سَمَائِهِ، فَقَالَ لِلْأَرْضِ: 'تَزَلْزَلِي بِهِمْ'، فَإِنْ تَابُوا وَنَزَعُوا وَإِلَّا هَدَمَهَا عَلَيْهِمْ'"،

"'अगर एक (शादीशुदा) औरत, अपने शौहर के घर के अलावा किसी दूसरी जगह (बदकारी के लिए) अपने कपड़े उतारे, तो उसने अपने और अल्लाह के दरमियान रहने वाले पर्दे को चाक कर दिया;
और अगर कोई औरत, अपने शौहर के अलावा किसी दूसरे के लिए खुशबू लगाए, तो उसपर आग और शर्मिंदगी है;
और जब लोग ज़िना को ह़लाल कर लें, और इसके बाद शराबें पीने लगें, और ढोल-बाजे बजाने लगें, तो अल्लाह अपने आसमान में क़हर फ़रमाता है, और ज़मीन को हुक्म देता है: 'उनपर ज़लज़ला लेकर आ.'
अगर वो लोग तौबा कर लें, तो ठीक है. वर्ना अल्लाह, ज़मीन को उन पर ढहा देगा."

📙अल्-मुस्तदरक (लिल् ह़ाकिम), ह़दीस नं. 8575, जिल्द नं. 4, पेज नं. 561, पब्लिकेशन: दारुल् कुतुबिल् इ़ल्मिय्यह (बेरूत), पहला एडीशन, 1411 हि./1990 ई.

ज़लज़ला, क़ियामत की एक बड़ी निशानी है. हमारे बुज़ुर्गों ने इस टॉपिक पर भी कई किताबें लिखी हैं कि दुनिया में कब-कब, और कहाँ-कहाँ ज़लज़ले आए. इन किताबों में से कुछ अहम किताबें ये हैं:

1. इमाम अबुल् फ़रज इब्ने जौज़ी (d. 597 हि.) की किताब: 'अल्-मुद्हिश' के बाब नं. 4 की, फ़स़्ल नं. 9 में, सन् 20 हि. से लेकर 552 हि. तक के ज़लज़लों का बयान है. इस किताब का दूसरा एडीशन: 'दारुल् क़लम (दमिश्क)' से दो जिल्दों में, 1435 हि./2014 ई. में पब्लिश हुआ;

2. इमाम जलालुद्-दीन सुयूत़ी (d. 911 हि.) ने अपनी किताब: 'कश्फ़ुस़् स़ल्स़लह अ़न् वस़्फ़िज़् ज़लज़लह' भी, ज़लज़लों के बयान में लिखी. इस किताब में 20 हि. से लेकर 910 हि. तक के ज़लज़लों का ज़िक्र है. ये 'आ़लमुल् कुतुब (बेरूत)' से 1987 ई. में पब्लिश हुई. फिर इनके शागिर्द, शम्सुद्-दीन दाऊदी (d. 945 हि.) ने इसपर इज़ाफ़ा करके, 940 हि. तक के ज़लज़लों को शुमार कराया.
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मुह़म्मद क़ासिमुल् क़ादिरी अल्-अज़्हरी
07/02/23 ई.
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Forwarded from 🌍دیوان لوح وقلم🌎 (Tarique Anwer)
مبسملا وحامدا ومصلیا ومسلما

سچ جاننے کے لیے محنت کی ضرورت

(1)الجزیرہ ٹی وی کا اعتراف ہے کہ حالیہ اسرائیل فلسطین جنگ کی مدت میں سب سے زیادہ جھوٹی خبریں بھارت کے گودی میڈیا نے پھیلایا ہے۔آج فلسطین میں جنگ بندی ہو چکی ہے اور غزہ کے مختلف علاقوں سے یہودی فوج اپنے جنگی ٹینکوں کے ساتھ اسرائیل واپس جا رہی ہے،لیکن بھارت کے گودی میڈیا ابھی بھی یہی خبر نشر کر رہا ہے کہ غزہ پٹی میں جنگ جاری ہے۔در اصل گودی میڈیا جھوٹی خبریں پھیلا کر اپنے جیجا مسٹر نتن یاہو کے سر پر فتح کا تاج رکھنا چاہتا ہے،لیکن حزب اللہ ودیگر عرب ملیشیا نے یہودیوں کا جینا حرام کر رکھا ہے۔

امریکہ کو یہ خوف ستا رہا ہے کہ اگر جنگ بندی نہ ہوئی تو امریکہ کو عرب دنیا سے اسی طرح ذلیل وخوار کر بھاگنا پڑے گا جیسے وہ افغانستان سے بھاگا تھا،لہذا امریکہ جنگ بندی کے لئے حکمت عملی اپنا رہا ہے۔

(2) اسرائیل نے حالیہ جنگ میں عام فلسطینی شہریوں کو ہلاک کیا،تاکہ فلسطینی عوام حماس کے خلاف ہو جائیں،لیکن ایسا نہ ہو سکا،بلکہ اسرائیلی منشا کے برخلاف بہت سے فلسطینی حماس میں شریک ہونے لگے۔

دوسری جانب حماس وحزب اللہ کے خوف سے بہت سے اسرائیلی فوجی اپنی فوج سے بھاگ گئے۔انہیں چاروں طرف موت نظر آنے لگی تھی۔غزہ پٹی میں اسرائیلی فوجیوں نے حماس کا مقابلہ بہت کم کیا،وہ عام شہریوں کو ہلاک کرتے رہے اور اسپتالوں،اسکولوں،مسجدوں، رہائشی مکانوں اور بے گھر فلسطینیوں کے کیمپوں پر حملہ کرتے رہے اور اسرائیلی جنگی جہاز عوامی مقامات پر بمباری کرتا رہا۔

حالیہ جنگ میں اسرائیل کا بھی بہت نقصان ہوا ہے۔اس کے بہت سے فوجی مارے گئے۔ٹینک اور جہاز تباہ ہوئے۔اسرائیل کے بہت سے علاقے تباہ ہوئے۔بمباری میں عام شہری بھی ہلاک ہوئے۔اسرائیل نے حماس سے مقابلہ ہی نہیں کیا۔اسرائیل عام شہریوں پر حملہ کرتا رہا،لہذا دنیا کے اکثر ممالک اسرائیل کے خلاف ہو گئے اور دنیا بھر میں اسرائیل کے خلاف مظاہرے ہوئے۔

حماس نے گوریلا جنگ کا طریقہ اختیار کیا اور بہت سے اسرائیلی فوجیوں کو ہلاک کیا،اس کے فوجی ٹینکوں اور فوجی ہیلی کاپٹرس کو تباہ کیا۔اسرائیلی شہروں پر راکٹ اور میزائیل سے حملے کرتا رہا۔

اسرائیل نے بمباری کر کے شمالی غزہ کو تباہ کر دیا تھا۔ہزاروں عام شہریوں کو ہلاک کر چکا تھا۔اس کے بعد اسرائیلی علاقوں سے متصل جنوبی غزہ میں بھی جہازوں سے پرچیاں گرا چکا تھا کہ یہ علاقے خالی کرو،ورنہ بمباری ہو گی۔اس کے بعد اسرائیل نے کچھ بمباری بھی کی۔یہ دیکھ کر حزب اللہ نے کہا کہ ہم آ رہے ہیں۔اس کے بعد حزب اللہ نے لبنان سے اسرائیلی علاقوں پر میزائیل وراکٹ داغنے شروع کئے اور اسرائیل کے فوجی اڈوں اور فوجی تنصیبات کو تہس نہس کرنا شروع کر دیا۔اسی درمیان یمن کے ملیشیا نے ایک بحری جہاز پر قبضہ کر لیا۔مختلف علاقوں میں امریکہ کے فوجی ٹھکانوں پر عرب ملیشیا نے حملہ شروع کر دیا۔یہ سب کچھ دیکھ کر جنوبی غزہ پر بمباری کی رفتار سست پڑ گئی،ورنہ اسرائیل جنوبی غزہ میں بھی شمالی غزہ کی طرح بمباری کرتا۔

یہ سب کچھ دیکھ کر امریکی اشارہ پر عرب ممالک چین و روس ودیگر ممالک گئے اور جنگ بندی کی باتیں ہونے لگیں،ورنہ سعودیہ میں تو فلسطین کے لئے دعا مانگنا بھی جرم تھا۔اگر عرب ممالک اسرائیل سے تعلقات توڑ لیتے تو اسرائیل اس قدر ظلم وستم سے باز رہتا۔اسرائیل تو دیکھ رہا ہےکہ ہم فلسطینی مسلمانوں کو ہلاک بھی کرتے ہیں اور عرب ممالک ہمارے ساتھ دوستی بھی نبھاتے ہیں۔یہ سب کچھ دیکھ کر اسرائیل جری ہو چکا ہے،لیکن عرب ملیشیا(غیر سرکاری فوجی گروپس)نے اسرائیل وامریکہ کو پیچھے ہٹنے پر مجبور کر دیا۔

(3)یہودیوں کا خیال ہے کہ ہر فلسطینی حماس کے ساتھ ہے،لہذا ہر فلسطینی قتل وہلاکت کا مستحق ہے۔اگر یہ نظریہ درست ہے تو ہر یہودی اسرائیل کے ساتھ ہے،لہذا ہر یہودی بھی قتل کا مستحق ہونا چاہیے،خواہ وہ فوجی ہو یا عام شہری۔

جب دو ملکوں میں جنگ ہوتی ہے تو ہر ملک کے عوام اپنے ملک کے ساتھ ہوتے ہیں،لیکن اس کی وجہ سے عام شہریوں پر بمباری نہیں کی جاتی ہے،نہ ہی عام شہریوں کو ہلاک کیا جاتا ہے۔

(4)اگر جنگ بندی کی مدت میں اقوام متحدہ اور عرب ممالک نے مستقل جنگ بندی کی کوشش کی تو ممکن ہے کہ مستقل جنگ بندی ہو جائے،ورنہ انجام انتہائی دردناک ہو گا۔دونوں طرف بے تحاشہ ہلاکت ہو گی۔اسرائیل کے اندرونی حالات بھی خراب ہیں۔ممکن ہے کہ نتن یاہو کو اپنے عہدہ سے مستعفی ہونا پڑے۔

طارق انور مصباحی

جاری کردہ:24:نومبر 2023
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مبسملا وحامدا ومصلیا ومسلما

چنگیز و ہلاکو اور بائیڈن و نتن یاہو

(1)چنگیز خاں جب کسی علاقے پر قبضہ کر لیتا تو وہاں کے عام شہریوں کو بھی ہلاک کر دیتا تھا۔اسی طرح چنگیز خاں کا پوتا ہلاکو اور اس کے خاندان کے دیگر لوگ بھی عام شہریوں کو قتل کر دیتے تھے۔

امریکہ نے بھی جنگ عظیم دوم(1939-1945)سے آج تک بے شمار عام شہریوں کو قتل وہلاک کیا ہے،حالاں کہ جنگ صرف فوجیوں سے لڑی جاتی ہے۔اسرائیل کی یہودی حکومت بھی اپنے قیام 1948 سے آج تک بے شمار فلسطینی عوام کو قتل وہلاک کیا ہے۔

حالیہ فلسطین واسرائیل جنگ کے دوران بھی یہودی حکومت صرف عام فلسطینی شہریوں پر جنگی جہازوں سے بمباری کر رہی ہے اور عوام کو ہلاک کیا جا رہا ہے۔ان مہلوکین میں کثیر تعداد بچوں اور عورتوں کی ہے۔اسی طرح یہودی فوج غزہ پٹی اور ویسٹ بینک میں عام فلسطینی شہریوں کو قتل کر رہی ہے اور انہیں گرفتار کر رہی ہے۔

حماس کے مجاہدین سرنگوں میں رہتے ہیں۔وہ یہودی فوج پر حملے کرتے ہیں اور اپنے سرنگوں میں واپس چلے جاتے ہیں۔اسرائیلی فوجی سرنگوں میں داخل ہونے کی ہمت نہیں کرتے ہیں۔سرنگوں کو تباہ کرنے اور سرنگوں میں پانی ڈالنے کا منصوبہ بھی ناکام ہو چکا ہے،یعنی مجاہدین محفوظ ہیں۔اس سے بالکل واضح ہو جاتا ہے کہ اسرائیل غزہ پٹی پر قبضہ نہیں کر سکتا ہے۔یہودی حکومت صرف عام شہریوں کو ہلاک کرنے کے لئے جنگ جاری رکھنا چاہتی ہے،تاکہ ہلاکت کی کثرت دیکھ کر لوگ غزہ پٹی چھوڑ کر دوسرے ممالک کی طرف ہجرت کر جائیں اور یہودی حکومت غزہ پٹی پر قبضہ کر لے۔

(2)اپنے مومن بھائیوں،بہنوں اور بچوں کی ہلاکت دیکھ کر بہت ذہنی کلفت اور شدید قلبی اذیت محسوس ہوتی ہے۔ہمارا تحریری کام بھی دو ماہ سے بند ہو چکا ہے۔یہ ہلاکت وبربادی اور قتل وغارت گری کب بند ہو گی،اس کا بظاہر کچھ اندازہ نہیں۔مسلم ممالک بالکل خاموش ہیں۔وہ کسی مضبوط اقدام سے قاصر ہیں،بلکہ بہت سے مسلم ممالک نے اس قدر ظلم وستم کے باوجود یہودی حکومت سے اپنے تعلقات بھی منقطع نہ کئے۔یہ لوگ حد درجہ بے غیرت اور بے حیا ہیں،بلکہ جب فلسطین میں مسلمانوں کا قتل عام ہو رہا تھا،اس وقت سعودی عرب میں رقص و سرود کا پروگرام ہو رہا تھا۔

فلسطین کے شہر بیت اللحم میں حضرت عیسیٰ علیہ الصلوۃ والسلام کی پیدائش ہوئی تھی۔25:دسمبر کو نصاری حضرت عیسی علیہ الصلوۃ والسلام کا ہوم پیدائش(کرسمس ڈے) بہت دھوم دھام سے مناتے ہیں،لیکن بیت اللحم کے پادریوں اور عیسائیوں نے اس سال بیت اللحم میں کرسمس ڈے نہیں منایا اور بیت اللحم کے پادری نے اپنے خطاب میں یہ بھی کہا کہ فلسطین میں اس قدر ظلم وستم ہو رہا ہے اور دنیا بھر کے چرچ(نصرانیوں کی عبادت گاہ)خاموش ہے،یعنی مسیحی چرچ کو اس ظلم وستم کے خلاف آواز اٹھانی چاہئے۔

عیسائیوں کے سب سے بڑے پیشوا،ویٹیکن کے پوپ فرانسس نے بدھ کے دن کہا کہ فلسطین میں جو کچھ ہو رہا ہے،وہ جنگ نہیں،بلکہ دہشت گردی ہے اور پوپ فرانسس نے کرسمس ڈے کے خطاب میں بھی اس جنگ پر سخت تنقید کی۔ہمارے بھارت میں بھی مسلمانوں کے بڑے اجلاس ہوتے ہیں،لیکن لوگ اسرائیلی مظالم کی مذمت بھی نہیں کرتے۔جمہوری دنیا میں اہل جہاں کی رائے کا بہت اعتبار ہوتا ہے۔اسی رائے اور ووٹ کے سبب ہی جمہوری ممالک میں حکومت بنتی اور بگڑتی ہے۔رائے عامہ موثر کردار ادا کرتی ہے۔

سات اکتوبر کے بعد یہ جنگ شروع ہوئی ہے۔تب سے اسرائیل عام فلسطینی شہریوں پر بمباری کر رہا ہے اور اسی وقت سے دنیا کے بیشتر ممالک خاص کر مغربی ممالک میں اسرائیلی مظالم کے خلاف احتجاج ومظاہرے ہو رہے ہیں۔مظاہرین میں ہر مذہب اور ہر طبقہ کے لوگ شرکت کرتے ہیں۔دیگر مذاہب کے لوگ محض انسانیت کے نام پر یہودی مظالم کی مخالفت کر رہے ہیں۔قوم مسلم انسانی اوصاف اور مومنانہ صفات سے عاری ہوتی جا رہی ہے۔جب خود ان پر یا ان کے بچوں پر کوئی مصیبت آتی ہے،تب یہ لوگ بیدار ہوتے ہیں۔یہ حیوانی صفات ہیں۔جب بلی چوہے پر حملہ کرتی ہے تو چوہا اپنی جان بچانے کے لئے بھاگتا ہے۔اسی طرح مرغی کے بچوں پر کوا جھپٹتا ہے تو مرغی کوے پر حملہ آور ہوتی ہے۔الغرض محض اپنی اور اپنے بچوں کی فکر کرنا حیوانی صفات میں سے ہے۔انسانی اوصاف کا دائرہ وسیع تر ہے،مومنانہ اوصاف اس سے بھی بلند تر ہیں۔تمام مومنین جسم واحد کی طرح ہیں۔کسی مومن پر کوئی آفت آئے تو دوسرے مومن کے اندر اس کا درد محسوس ہونا چاہیے۔

طارق انور مصباحی

جاری کردہ:26:دسمبر 2023
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مبسملا وحامدا ومصلیا ومسلما

یہودی انسان نما شیطان

(1)قرآن مقدس میں قوم یہود کے جو حالات بیان کئے گئے ہیں،ان سے واضح ہے کہ قوم یہود انسانی شکل وصورت میں چلتے پھرتے شیطان ہیں۔

مسلسل تاریخی حقائق سے واضح ہے کہ جو نصاری یہود سے متاثر ہیں،وہ بھی انسانی زمرہ سے خارج ہی ہیں۔ایسے لوگوں کو انسان کہنا انسانیت کی توہین ہے۔

(2)عرب ممالک فلسطین کے عربی مسلمانوں پر ہونے والے مظالم پر خاموش ہیں اور اسرائیل سے سیاسی وتجارتی تعلقات توڑنے پر آمادہ نہیں تو جب برصیغر یا دنیا کے دیگر علاقوں کے مسلمانوں پر کوئی ظلم وستم ڈھائے تو بھی یہ عرب ممالک خاموش رہیں گے۔او آئی سی ہاتھی کے دکھاوے کے دانت کی طرح ہے۔

حدیث نبوی میں یہود ونصاری کو جزیرۂ عرب سے نکالنے کا حکم دیا گیا ہے اور عرب ممالک یہود ونصاری کو اپنے یہاں بساتے ہیں اور بہت سے عرب ممالک نے اپنے یہاں امریکہ کو فوجی اڈہ بنانے کی اجازت دی ہے،جب کہ ساری دنیا کو معلوم ہے کہ امریکہ نصرانیوں کا ملک ہے اور امریکہ مسلمانوں کا بدترین دشمن ہے۔

(3)57:مسلم ممالک میں بعض سنی ممالک ہوں گے اور بہت سے شیعہ اور وہابی ممالک ہیں۔ابھی ایران کی قیادت میں شیعہ ممالک اور شیعہ جہادی تنظیمیں میدان میں ہیں۔وہابی ممالک کو عالمی اصطلاح میں سنی ممالک کہا جاتا ہے۔یہ بات روز روشن کی طرح واضح ہے کہ مسلمانوں کے درمیان اختلاف وانتشار اور سلطنت عثمانیہ ترکیہ کو تباہ وبرباد کرنے کے لئے برطانیہ نے وہابی مذہب کی تشکیل کی تھی اور اس کام کے لئے ابن عبد الوہاب نجدی اور ابن سعود کو منتخب کیا گیا تھا۔پہلی جنگ عظیم کے وقت ان عرب وہابیہ کی غداری کے سبب سلطنت عثمانیہ ترکیہ ختم ہو گئی اور خطہ عرب کو مغربی ممالک نے اسلام کے غداروں کے درمیان تقسیم کر دیا۔اب ان غداروں کے بچوں اور ان کے وارثین سے لوگ امت مسلمہ کی بھلائی کی امید رکھتے ہیں تو یہ امید رکھنے والوں کی غلطی ہے۔

طارق انور مصباحی

جاری کردہ:06:جنوری 2024
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مبسملا وحامدا ومصلیا ومسلما

میدان جنگ میں سنی وشیعہ متحد رہیں

(1) غیروں کے مقابلے میں میدان جنگ میں اسلام کے نام پر اہل بدعت سے عملی اتفاق جائز ہے،کیوں کہ اغیار ہمیں مسلمان سمجھ کر ہم پر حملہ آور ہوتے ہیں۔اغیار کی نظر میں ہر کلمہ گو یکساں ہے۔اسلاف کرام کی کتابوں میں ایسے مواقع پر اہل بدعت سے اتحاد کی اجازت دی گئی ہے۔

(2)ہلال وصلیب کی جنگ عہد رسالت سے شروع ہوئی اور انجام کار یہود ونصاری نے عظیم اسلامی سلطنت یعنی سلطنت عثمانیہ ترکیہ کو نیست ونابود کر دیا۔مغربی ممالک اور امریکہ صلیب کے علم بردار اور مسلمانوں کے دشمن ہیں۔یہ دشمنی ہرگز ختم نہیں ہو گی جیسا کہ قرآن مقدس میں ارشاد فرمایا گیا کہ یہود ونصاری اسی وقت آپ سے خوش ہوں گے جب آپ اسلام چھوڑ کر یہودی ونصرانی ہو جائیں۔

حضرت امام مہدی رضی اللہ تعالیٰ عنہ کے زمانے میں بھی نصرانیوں سے جنگ ہو گی۔نصرانیوں کو شکست ہو گی اور اسی عہد میں حضرت عیسیٰ علیہ الصلوۃ والسلام کا نزول ہو گا۔اس عہد میں صرف اسلام قبول کیا جائے گا۔جو یہود ونصاری اسلام قبول نہ کریں گے،وہ قتل کئے جائیں گے،ہعنی ہلال وصلیب کی جنگ جو عہد رسالت سے شروع ہوئی ہے،وہ حضرت عیسی علیہ الصلوۃ والسلام کے عہد میں ختم ہو گی جب یہود ونصاری ختم ہو جائیں گے۔

عہد حاضر میں جو مسلم ممالک امریکہ اور مغربی ممالک کی غلامی میں مبتلا ہیں،وہ قرآن مقدس کی تعلیمات سے روگردانی کرنے والے ہیں۔سیاسی تعلق الگ ہے اور کسی کی غلامی کرنا الگ ہے۔جدید ایران یعنی شاہی حکومت ختم ہونے کے بعد جب سے ایران میں جمہوریت قائم ہوئی ہے،تب سے ایران امریکہ واسرائیل کا مخالف رہا ہے۔اس نے کبھی امریکہ کی غلامی نہیں کی ہے۔

واضح رہے کہ ایران ایک شیعہ ملک ہے اور شیعوں پر شریعت جو حکم وارد فرماتی ہے،وہ صحیح ہے،لیکن یہ بتایا جائے کہ اصطلاح شریعت کے اعتبار سے کون سے ملک کے حکمران سنی ہیں؟عالمی اصطلاح میں غیر شیعہ کو سنی کہا جاتا ہے،اسی عالمی اصطلاح کے اعتبار سے سعودی عرب وغیرہ کو سنی مانا جاتا ہے،حالاں کہ یہ لوگ وہابی ہیں اور شریعت کی اصطلاح میں اہل سنت وجماعت سے خارج ہیں،لیکن غیروں کے بالمقابل جنگی حالات میں تمام کلمہ گو طبقات کا متحد ہو کرغیروں سے مقابلہ کرنا جائز وصحیح ہے۔

57:مسلم ممالک میں کس ملک کے حکم راں سنی ہیں،یہ تحقیق طلب امر ہے۔ہاں،ہر ملک کے عوام میں سنی صحیح العقیدہ ضرور موجود ہیں۔انڈونیشیا،ملیشیا،مصر،ترکی،ملک شام وفلسطین،انڈیا،پاکستان،بنگلہ دیش ودیگر ممالک میں سنی موجود ہیں،بلکہ ایران میں بھی سنی آباد ہیں۔

واضح رہے کہ داعش،القاعدہ اور اس قسم کی جہادی تنظیمیں وہابیوں کی ہیں۔محض عالمی اصطلاح میں ان کو سنی کہا جاتا ہے۔وہابی ملیشیا کو امریکہ نے ہی وجود دیا اور پھر اس کو دہشت گرد جماعت بتا کر مسلمانوں کو دنیا بھر میں بدنام کیا اور پھر موقع بموقع ان جماعتوں سے کام بھی لیا۔حالیہ فلسطین واسرائیل جنگ کے موقع پر جب ایران کے زیر اثر شیعہ ملیشیا(حزب اللہ،انصار اللہ وغیرہ)میدان میں اتریں تو امریکہ واسرائیل نے داعش کے ممبروں کو جگایا اور ایران وشام میں داعش سے حملے کروایا۔

(3) اسرائیل کوئی ملک نہیں تھا،بلکہ سلطنت عثمانیہ ترکیہ کو تباہ کرنے کے بعد برطانیہ نے فلسطین میں یہودیوں کے لئے ایک ملک بنا دیا۔یہ ملک دراصل امریکہ ومغربی ممالک کا فوجی اڈہ ہے۔اس کے ذریعہ نصاری مشرق وسطی کو اپنے کنٹرول میں رکھتے ہیں،اسی لئے ہر مصیبت کے وقت امریکہ ومغربی ممالک اسرائیل کی مدد کرتے ہیں اور عرب ممالک امریکہ کی غلامی میں ملوث ہیں،لہذا وہ بھی اسرائیل کی مدد کرتے ہیں اور اسرائیل سے اچھے تعلقات رکھنا چاہتے ہیں۔اگر مسلم ممالک اسرائیل سے سیاسی وتجارتی تعلقات ختم کر لیں تو اسرائیل کمزور ہو جائے گا،لیکن جو مسلم ممالک اسرائیل سے تعلقات ختم نہیں کر پا رہے ہیں،وہ اسرائیل پر حملہ کیسے کر سکیں گے۔

طارق انور مصباحی

جاری کردہ:19:جنوری 2024
Forwarded from 🌍دیوان لوح وقلم🌎 (Tarique Anwer)
مبسملا وحامدا ومصلیا ومسلما

رام مندر بن چکا۔رام بھگت بنانا باقی ہے

(1)آج رام مندر کا افتتاح ہے۔اس کے بعد بھارتی مسلمانوں کو رام بھگت بنا کر کفر وارتداد کی طرف دھکیلنے کی سرتوڑ کوشش ہو گی،بلکہ ایک طویل مدت سے خفیہ طور پر یہ کوشش جاری ہے۔اب اعلانیہ طور پر مسلمانوں کو رام بھگتی کی ترغیب دی جائے گی۔

ہندو لیڈروں کو معلوم ہے کہ رام بھگتی کے سبب مسلمانوں کا ایمان خراب ہو گا اور دنیا کی ہر قوم خصوصا یہود و ہنود ہمیشہ مسلمانوں کے ایمان کو غارت کرنے کی سازش میں مبتلا رہے ہیں۔

(2)علمائے اسلام ان تمام سازشوں کو ناکام بنانے کی کوشش کریں جن سے رام بھگتی کو فروغ ملے۔

اگر خدا نخواستہ لوک سبھا الیکشن:2024 میں بھاجپا جیت جاتی ہے تو مسلمانوں کے ایمان وعقیدہ کو کمزور کرنے اور انہیں کفر وارتداد میں مبتلا کرنے کی ہر ممکن کوشش کی جائے گی۔اہل دنیا کو معلوم ہے کہ مسلمانوں کا ایمان کمزور کر دیا جائے تو یہ لوگ ہمارے غلام بنیں رہیں گے۔ڈاکٹر اقبال نے اسی مفہوم کو اپنے درج ذیل شعر میں بیان کیا ہے۔

وہ فاقہ کش کہ موت سے ڈرتا نہیں ذرا

روح محمدی اس کے بدن سے نکال دو

(3)کفار ومشرکین کی سازشوں کو کامیاب بنانے کے لئے بہت سے اصحاب جبہ ودستار بھی منظر عام پر آتے ہیں۔ایسے بدکرداد اور خوش گفتار ایمان کے لٹیروں سے بچتے رہیں۔ان ایمان کے ڈاکوؤں میں سے کچھ لوگ غیروں کے آلہ کار ہوتے ہیں اور کچھ لوگ اپنی کج فکری کے سبب مسلمانوں کا دین وایمان تباہ وبرباد کر دیتے ہیں،لہذا ہر قسم کے گمراہ گروں سے دور بھاگیں۔

طارق انور مصباحی

جاری کردہ:22:جنوری 2024/بروز:دوشنبہ
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مبسملا وحامدا ومصلیا ومسلما

جنگ بندی نہیں ہو گی،جنگ لڑنی ہو گی

(1) اسرائیل کے قریبا سوا سو یہودی حماس کی قید میں ہیں۔ان قیدیوں کے اہل خانہ اسرائیل میں مسلسل احتجاج کر رہے ہیں اور اسرائیلی حکومت سے مطالبہ کر رہے ہیں کہ جنگ بندی کر کے اسرائیلی حکومت ہمارے قیدیوں کو واپس لائے۔

اسرائیلی حکومت چاہتی ہے کہ چند دنوں کی جنگ بندی ہو جائے اور حماس یہودی قیدیوں کو چھوڑ دے۔اس کے بعد یہودی حکومت حماس کے خاتمے کی بات کہہ کر فلسطین کے عام مسلمانوں کا قتل عام کرتا رہے جیسے ابھی وہ قریبا چار ماہ سے فلسطینی مسلمانوں کا قتل عام کر رہا ہے۔

(2) اسرائیلی حکومت کے قتل عام میں امریکہ،برطانیہ اور دیگر مغربی ممالک شریک ہیں۔یہود ونصاری تعلیم یافتہ ہوتے ہیں،لیکن یہ تعلیم یافتہ لوگ بے قصور انسانوں کے قتل عام میں شریک ہیں۔اس کا مطلب یہ ہوا کہ تعلیم شیطانوں کو انسان نہیں بنا سکتی۔ہاں،تعلیم انسانوں کو ضرور مہذب انسان بنا سکتی ہے۔جیسے سنار لوہے کو سونا نہیں بنا سکتا ہے،لیکن وہ سونے سے خوبصورت زیورات ضرور بنا سکتا ہے۔

حماس مستقل جنگ بندی کا مطالبہ کر رہا ہے،لیکن یہودی حکومت فلسطینی شہریوں کے قتل عام سے دست بردار ہونے کو راضی نہیں اور مغربی ممالک کے اژدہے اور ناگ وناگن بھی مسلمانوں کو ڈسنے کے لئے بے تاب ہیں،لہذا جنگ بندی کی صورت نظر نہیں آتی ہے۔

غزہ پٹی کے مٹھی بھر مجاہدین نے اسرائیل ،امریکہ،برطانیہ،جرمنی،فرانس ودیگر سپر پاور ممالک کے فوجیوں کو غزہ کے ریگستان میں دفن کر دیا ہے اور یمن کے انصار اللہ نے ہر ایک سپر پاور کو لال ساگر میں ڈبو دیا ہے۔امریکہبومغربی ممالک مسلسل لبنان کے حزب اللہ سے منت سماجت کر رہے ہیں کہ وہ جنگ نہ چھیڑے۔جب ان جیالوں نے ذرا سی قوت دکھائی تو تمام سپر پاور ان کے سامنے سرنگوں اور ڈھیر ہو گئے۔اے کاش! مسلم ممالک متحد ہو جاتے تو دنیا کا نقشہ ہی بدل جاتا۔

(2)دنیا کا ہر ظالم اپنے کو مظلوم ثابت کرنے کے لئے طرح طرح کے ہتھکنڈے اپناتا ہے،اسی طرح یہود ونصاری اور کفار ومشرکین اپنے کو مظلوم بتاتے ہیں،حالاں کہ دنیا بھر میں ان لوگوں سے بڑے دہشت گرد پائے نہیں جاتے۔

اسرائیلی یہودی ایک صدی سے فلسطینی مسلمانوں پر ظلم ڈھا رہے ہیں۔اج تک کئی لاکھ فلسطینی مسلمانوں کو قتل کیا جا چکا ہے۔07:اکتوبر کو حماس کا حملہ بھی فلسطینی مسلمانوں پر ہونے والے مظالم کا بدلہ تھا،لیکن اس حملہ کو ابتدائی حملہ بتایا گیا اور اسرائیلی یہودیوں کو مظلوم بتانے کا پروپیگنڈہ کیا گیااور ساری دنیا میں جھوٹ پھیلایا گیا۔

(3)غزہ پٹی کے مسلمان بھوک سے ثڑپ رہے ہیں۔مصر کی سرحد پر بے شمار امدادی ٹرک کھڑے ہیں۔اقوام متحدہ کی سیکیورٹی کونسل میں قرار داد پاس ہو چکی ہے کہ غزہ پٹی میں انسانی ضرورتوں کے سامان پہنچائے جائیں۔

مصر میں اتنی ہمت بھی نہیں کہ وہ غزہ پٹی کے امدادی ٹرک کو غزہ پٹی تک پہنچا سکے۔

دوسری جانب سعودی عرب،متحدہ عرب امارات اور جارڈن خورد ونوش اور انسانی ضرورتوں کے سامان خشکی کے راستے اسرائیل تک پہنچا رہے ہیں،کیوں کہ بحر احمر میں انصار اللہ نے اسرائیلی جہازوں کے لئے پابندی لگا رکھی ہے۔

اپنوں نے ہمیں لوٹا ہے غیروں میں کہاں دم تھا

میری کشتی وہاں ڈوبی جہاں پانی بہت کم تھا

طارق انور مصباحی

جاری کردہ:25:جنوری 2024
Forwarded from 🌍دیوان لوح وقلم🌎 (Tarique Anwer)
مبسملا وحامدا ومصلیا ومسلما

معبودانِ کفار کو برا بھلا نہ کہیں

(1)اللہ تعالی نے قرآن مقدس میں ارشاد فرمایا ہے کہ مومنین کفار ومشرکین کے معبودانِ باطل کو سب وشتم نہ کریں،ورنہ وہ اللہ تعالی کی بے ادبی کریں گے۔

ارشاد الہی ہے:( وَلَا تَسُبُّوا الَّذِينَ يَدْعُونَ مِنْ دُونِ اللَّهِ فَيَسُبُّوا اللَّهَ عَدْوًا بِغَيْرِ عِلْمٍ)

(2)معبودانِ کفار کو برا بھی نہیں کہنا ہے اور معبودانِ کفار کی تعظیم وتکریم بھی نہیں کرنی ہے,بلکہ لا تعلق رہنا ہے۔

معبودان کفار میں حیثیات کا اعتبار نہیں کہ بادشاہ ہونے کی حیثیت سے تعظیم حرام ہے اور معبود ہونے کی حیثیت سے تعظیم کفر ہے۔اس حیثیت کا اعتبار کفار میں ہے اور معبودانِ کفار کی تعظیم وتکریم کسی بھی حیثیت سے کی جائے،وہ کفر ہی ہے۔

تفصیلی مباحث ہمارے رسائل (1)معبودانِ کفار اور شرعی احکام(2)رام بھگتی اور متصوفین و وہابیہ(3)ہندو دھرم اور پیغمبر واوتار میں ہیں۔

(3)اہل سنت وجماعت معبودانِ کفار سے ہمیشہ لا تعلق رہے ہیں،یعنی معبودانِ کفار کی نہ مذمت وبرائی کرتے ہیں اور نہ مدحت وتوصیف کرتے ہیں۔برادران اہل سنت اسی روش پر قائم رہیں۔

(4)اعظمی صاحب نے کتھائی مجلس میں جو کچھ کہا تھا،اس سے توبہ کی تحریر چند ماہ قبل منظر عام پر آ چکی ہے،
لہذا اعظمی صاحب کے عمل کو دلیل نہ بنایا جائے۔امت مسلمہ اپنا ایمان تباہ وبرباد نہ کرے۔

طارق انور مصباحی

جاری کردہ:02:فروری 2024
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Forwarded from 🌍دیوان لوح وقلم🌎 (Tarique Anwer)
مبسملا وحامدا ومصلیا ومسلما

تحریر و تقریر میں احتیاط کی ضرورت

(1)ملک میں بھاجپائی حکومت ہونے کے سبب اسلام مخالف قوتوں کو اضافی طاقت فراہم ہو گئی ہے،لہذا تحریر و تقریر میں احتیاط برتی جائے،لیکن یہ احتیاط بزدلی کی حد تک نہ جائے،بلکہ حکمت عملی کے ساتھ اپنی باتیں پیش کریں۔مداہنت وچاپلوسی سے اجتناب کریں اور معبودانِ ہنود کی مدح سرائی اور ان کی جے پکارنے سے پرہیز کریں۔ہنومان چالیسہ اور رام کتھا کی مجلسوں میں شرکت نہ کریں۔جو امور کفار کے مذہبی شعار ہیں،ان کو اختیار کرنا کفر ہے۔

(2)حضرت مفتی سلمان ازہری صاحب حفظہ اللہ تعالی کی گرفتاری افسوسناک ہے۔ان کی باتوں کا تعلق کسی خاص قوم سے نہیں تھا،لیکن غلط پروپیگنڈہ کیا گیا،حالاں کہ اسی ملک میں اہل تعصب مسلمانوں کے قتل عام کا اعلانیہ نعرہ لگاتے ہیں اور کوئی سزا نہیں ہوتی ہے۔

(3)جب بفضل الہی فلسطینی مجاہدین فتح یاب ہو جائیں گے تو ان شاء اللہ تعالی ساری دنیا کا ماحول بدل جائے گا اور دنیا بھر کے مظلومین فاتح ہو جائیں گے۔

(4)امریکہ اور یورپ کی جانب سے فلسطین میں جنگ بندی کی باتیں محض اس لئے ہو رہی ہیں کہ مزید کچھ وقت مل جائے اور اس مدت میں غزہ پٹی کے مسلمان بھوک پیاس سے مرنے لگیں اور فلسطینی مجاہدین مجبور ہو کر ہتھیار ڈال دیں،لیکن شاید ایسا نہیں ہو سکے گا،بلکہ یہودیوں پر سخت آفت آنے کا خطرہ ہے اور اسرائیل ختم نہ بھی ہو سکے تو ایک شکست خوردہ دشمن کی صورت میں باقی رہے اور دنیا بھر کی ذلتیں یہودیوں پر ڈال دی جائیں:واللہ تعالیٰ اعلم بالصواب والیہ المرجع والمآب

طارق انور مصباحی

جاری کردہ:06:فروری 2024
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Forwarded from 🌹 اسلامی معلومات عامہ 🌹 (محمد جمال الدين خان قادری)
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🌹 اسلامی معلومات عامہ 🌹
27-07-1445 ᴴ | 08-02-2024 ᴱ ▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬
28-07-1445 ᴴ | 09-02-2024 ᴱ
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