🌹 اسلامی معلومات عامہ 🌹
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गौस पाक ने कहा कि "मै अल्लाह" एक रिवायत
कहा जाता है कि एक बार गौसे आज़म रदिअल्लाहु त'आला अन्हु ज़िक्र कर रहे थे और उन के मुरीदीन भी शामिल थे। गौसे पाक रदिअल्लाहो त'आला अन्हु बिल्कुल मुस्तगरिक़ हो गये और जुबाने पाक से कहने लगे "मै अल्लाह, मै अल्लाह" ज़िक्र के बाद लोगो ने पूछा हज़रत आप "मै अल्लाह" कह रहे थे तो आप ने फ़रमाया कि अगर अब मै आइंदा ऐसा करूँ तो आप लोग मुझे क़त्ल कर दें, दोबारा ज़िक्र हुआ तो फिर आप ने वही अल्फाज़ कहे तो लोगो ने तलवार उठा कर मारना शुरु किया तो उल्टा उन लोगो के सर में वार लग रहा था। थोडी देर के बाद गौसे पाक रदिअल्लाहु त'आला अन्हु होश में आये देखते हैं कि सब जगह खून ही खून है, किसी का हाथ कटा है तो किसी का पैर कटा है तो किसी का बदन लहूलुहान है तो गौसे पाक रदिअल्लाहु त'आला अन्हु ने दुआ की और सब सहीहो सालिम हो गये।
इस वाक़िये के मुतल्लिक़ हुज़ूर ताजुश्शरिया, अल्लामा मुफ्ती अख्तर रज़ा खान अलैहिर्रहमा लिखते हैं कि ये वाक़िया मेरी नज़र से ना गुज़रा और इस की निस्बत सरकार गौसे पाक की तरफ सवाब से दूर मालूम होती है।
(यानी इस की निस्बत हुज़ूर गौसे पाक की तरफ अच्छी नही)
واللہ تعالی اعالم
(فتاوی تاج الشریعہ، ج3، ص230)
ऐसे वाक़ियात बयान करने वालों को चाहिये कि मुअतबर हवाले भी पेश करें जो कि मुक़र्रिरीन के पास होता नही।
और इस तरह के वाक़ियात अगर किसी मुअतबर किताब में भी मिल जाये तो इस तरह बयान करना मुनासिब नहीं बल्कि तशरीह और तौज़ीह के साथ बयान किया जाये वरना ये ग़ैरों को एतिराज़ करने का एक मौक़ा देने जैसा है।
अब्दे मुस्तफ़ा ऑफ़िशियल
कहा जाता है कि एक बार गौसे आज़म रदिअल्लाहु त'आला अन्हु ज़िक्र कर रहे थे और उन के मुरीदीन भी शामिल थे। गौसे पाक रदिअल्लाहो त'आला अन्हु बिल्कुल मुस्तगरिक़ हो गये और जुबाने पाक से कहने लगे "मै अल्लाह, मै अल्लाह" ज़िक्र के बाद लोगो ने पूछा हज़रत आप "मै अल्लाह" कह रहे थे तो आप ने फ़रमाया कि अगर अब मै आइंदा ऐसा करूँ तो आप लोग मुझे क़त्ल कर दें, दोबारा ज़िक्र हुआ तो फिर आप ने वही अल्फाज़ कहे तो लोगो ने तलवार उठा कर मारना शुरु किया तो उल्टा उन लोगो के सर में वार लग रहा था। थोडी देर के बाद गौसे पाक रदिअल्लाहु त'आला अन्हु होश में आये देखते हैं कि सब जगह खून ही खून है, किसी का हाथ कटा है तो किसी का पैर कटा है तो किसी का बदन लहूलुहान है तो गौसे पाक रदिअल्लाहु त'आला अन्हु ने दुआ की और सब सहीहो सालिम हो गये।
इस वाक़िये के मुतल्लिक़ हुज़ूर ताजुश्शरिया, अल्लामा मुफ्ती अख्तर रज़ा खान अलैहिर्रहमा लिखते हैं कि ये वाक़िया मेरी नज़र से ना गुज़रा और इस की निस्बत सरकार गौसे पाक की तरफ सवाब से दूर मालूम होती है।
(यानी इस की निस्बत हुज़ूर गौसे पाक की तरफ अच्छी नही)
واللہ تعالی اعالم
(فتاوی تاج الشریعہ، ج3، ص230)
ऐसे वाक़ियात बयान करने वालों को चाहिये कि मुअतबर हवाले भी पेश करें जो कि मुक़र्रिरीन के पास होता नही।
और इस तरह के वाक़ियात अगर किसी मुअतबर किताब में भी मिल जाये तो इस तरह बयान करना मुनासिब नहीं बल्कि तशरीह और तौज़ीह के साथ बयान किया जाये वरना ये ग़ैरों को एतिराज़ करने का एक मौक़ा देने जैसा है।
अब्दे मुस्तफ़ा ऑफ़िशियल
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