🌹 اسلامی معلومات عامہ 🌹
01-04-1444 ᴴ | 28-10-2022 ᴱ ▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬
01-04-1444 ᴴ | 28-10-2022 ᴱ
▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬
▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬
❤1
Forwarded from 🌹 اسلامی معلومات عامہ 🌹 (محمد جمال الدين خان قادری)
This media is not supported in your browser
VIEW IN TELEGRAM
❤1
🌹 اسلامی معلومات عامہ 🌹
01-04-1444 ᴴ | 28-10-2022 ᴱ ▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬
01-04-1444 ᴴ | 28-10-2022 ᴱ
▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬
▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬
❤1
Forwarded from 🌹 اسلامی معلومات عامہ 🌹 (محمد جمال الدين خان قادری)
This media is not supported in your browser
VIEW IN TELEGRAM
❤1
Forwarded from Abde Mustafa Organisation
क्या गौसे आज़म खेल में बच्चे ज़िन्दा करते थे?
एक रिवायत तक़रीरों में बयान की जाती है कि हुज़ूर गौसे आज़म रदिअल्लाहु त'आला अन्हु अपने बचपन में जब बच्चों के साथ खेलते तो यूँ करते कि बच्चों को ज़मीन पर लिटा दिया करते फिर उन्हें मुर्दा बतला कर लफ़्ज़े "क़ुम बि इज़्निल्लाह" (यानी अल्लाह के हुक्म से खड़ा हो जा) कह कर ज़िन्दा कर दिया करते थे।
इन्हीं दिनों एक औरत के बच्चे का इंतिक़ाल हो गया तो उसे किसी ने कहा कि इसे बग़दाद ले जाओ वहाँ अब्दुल क़ादिर नामी एक बच्चा है जो ठोकर मार कर मुर्दों को ज़िंदा कर दिया करता है।
वो बग़दाद आयी और अपने बच्चे को ज़िंदा बच्चों की सफ़ में लिटा दिया तो हुज़ूर गौसे आज़म ने "क़ुम बि इज़्निल्लाह" कह कर ठोकर मारी तो सारे बच्चे खड़े हो गये पर वो खड़ा ना हुआ। ये देखकर गौसे आज़म ने उसे "क़ुम बि इज़्निल्लाह" (यानी मेरे हुक्म से खड़ा हो) कहा तो वो ज़िन्दा हो गया।
बाज़ लोग इस वाकिये की निस्बत शम्स तबरेज़ की तरफ़ करते हैं।
इस रिवायत के बारे में हुज़ूर ताजुश्शरिया, अल्लामा मुफ़्ती अख़्तर रज़ा अलैहिर्रहमा लिखते हैं कि वाकिये की निस्बत गौसे पाक की तरफ हो या शम्स तबरेज़ की जानिब, (जिस ने बयान किया उस) इमाम पर सुबूत देना बहर हाल लाज़िम, अगर सुबूत दे तो खैर वरना बे तौबा बे रुजू (जब तक तौबा व रुजू ना करे) उसे इमाम बनाना गुनाह।
वल्लाहु आलम
(فتاوی تاج الشریعہ، جلد 4، صفحہ 106)
अब्दे मुस्तफ़ा ऑफ़िशियल
एक रिवायत तक़रीरों में बयान की जाती है कि हुज़ूर गौसे आज़म रदिअल्लाहु त'आला अन्हु अपने बचपन में जब बच्चों के साथ खेलते तो यूँ करते कि बच्चों को ज़मीन पर लिटा दिया करते फिर उन्हें मुर्दा बतला कर लफ़्ज़े "क़ुम बि इज़्निल्लाह" (यानी अल्लाह के हुक्म से खड़ा हो जा) कह कर ज़िन्दा कर दिया करते थे।
इन्हीं दिनों एक औरत के बच्चे का इंतिक़ाल हो गया तो उसे किसी ने कहा कि इसे बग़दाद ले जाओ वहाँ अब्दुल क़ादिर नामी एक बच्चा है जो ठोकर मार कर मुर्दों को ज़िंदा कर दिया करता है।
वो बग़दाद आयी और अपने बच्चे को ज़िंदा बच्चों की सफ़ में लिटा दिया तो हुज़ूर गौसे आज़म ने "क़ुम बि इज़्निल्लाह" कह कर ठोकर मारी तो सारे बच्चे खड़े हो गये पर वो खड़ा ना हुआ। ये देखकर गौसे आज़म ने उसे "क़ुम बि इज़्निल्लाह" (यानी मेरे हुक्म से खड़ा हो) कहा तो वो ज़िन्दा हो गया।
बाज़ लोग इस वाकिये की निस्बत शम्स तबरेज़ की तरफ़ करते हैं।
इस रिवायत के बारे में हुज़ूर ताजुश्शरिया, अल्लामा मुफ़्ती अख़्तर रज़ा अलैहिर्रहमा लिखते हैं कि वाकिये की निस्बत गौसे पाक की तरफ हो या शम्स तबरेज़ की जानिब, (जिस ने बयान किया उस) इमाम पर सुबूत देना बहर हाल लाज़िम, अगर सुबूत दे तो खैर वरना बे तौबा बे रुजू (जब तक तौबा व रुजू ना करे) उसे इमाम बनाना गुनाह।
वल्लाहु आलम
(فتاوی تاج الشریعہ، جلد 4، صفحہ 106)
अब्दे मुस्तफ़ा ऑफ़िशियल
❤1