🌹 اسلامی معلومات عامہ 🌹
21-10-1443 ᴴ | 23-05-2022 ᴱ ▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬
22-10-1443 ᴴ | 24-05-2022 ᴱ
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Forwarded from Abde Mustafa Organisation
जो क़ौम शादी के खाने के लिये इतनी परेशान है...
अल्लामा ख़ादिम हुसैन रज़वी रहीमहुल्लाहु त'आला फरमाते थे के शादी के मौक़े पर जब लोग रोटी खाने लगते हैं, जब वो हालत मैं देखता हूँ (के लोग उसकी तरफ लपकते हैं) तो सोचता हूँ के ये निज़ामे मुस्तफ़ा ﷺ लायेंगे?
जंगे यरमूक में हज़रते इकरिमा रदीअल्लाहो त'आला अन्हो बेहोश पड़े थे, उन्होंने कहा पानी चाहिये, साथ बेटा भी बेहोश पड़ा था, हज़रते इकरिमा कहने लगे बेटा पानी दे, हज़रते अम्र बिन इकरिमा ने पानी दिया वहां चाचा बोल पड़े भतीजे मैं भी प्यासा हूँ वो भी बेहोश हो कर गिर पड़े, उन्होंने उन्हें पानी दिया फिर एक और सहाबी ने आवाज़ लगाइ... सात सहाबा तक पानी पहुंचा, किसी एक ने भी ना पिया, सब शहीद हो गये!
हम जिन को मानते हैं वो तो ऐसे थे के जाते जाते भी दुसरो को कहा तुम पानी पियो (लेकिन आज शादियो में) जब रोटी खुलती है तो महसूस होता है के रोटी हमने कभी देखी ही नहीं है, मुसलमान की तो ये शान ही नहीं है, मुसलमान के सामने तो सोना भी पड़ा हो तो वो उसकी तरफ देखेगा भी नहीं।
हज़रते नोमान बिन मुक़रीन यज़्दगिर्द (ईरान के बादशाह) के दरबार में गये तो उनका बिछा हुआ रेशम तलवार से काट दिया, सोने की कुर्सी पर बैठे तो जब देखा सोने की है तो खड़े हो गए, वो सब हंस पड़े, यज़्दगिर्द भी और उसके मुशीर भी, कहने लगे आपने कभी सोना नहीं देखा? हमने तो आपके ऐज़ाज़ के लिये सोने की कुर्सी बिछाइ है।
हज़रते नोमान फटी हुइ पगड़ी, फटे हुए कपड़े, तलवार को दंदाने पड़े हुए थे लेकिन आप ने सुपर पावर बादशाह के सामने बैठ कर फरमाया के मैं इसलिये नहीं उठा के मैंने सोना नहीं देखा बल्कि हमारे हुज़ूर ﷺ ने सोने के इस्तेमाल से मना फ़रमाया है, इसलिये खड़ा हो गया हूँ, बाक़ी रह गइ सोने की बात तो हमारे आक़ा व मौला ﷺ ने सोना और मिट्टी हमारी आँखों में बराबर कर दिया है।
(वाक़ियात -ए- सीरतुन नबी, अल्लामा ख़ादिम हुसैन रज़वी)
अल्लामा ख़ादिम हुसैन रज़वी चुंकि पाकिस्तान के हैं तो उन्होंने शादियों में रोटी के बारे में ऐसा लिखा है, हमारे हिंदुस्तान में ऐसा गोश्त के टुकड़ो, पापड़, ज़र्दा और मिठाइ वगैरा को ले कर होता है के मुसलमान एक दूसरे पर टूट पड़ते हैं और ना मिलने पर शिकायतो के पुल बाँध देते हैं, अब जो क़ौम शादी में खाने के लिये इतनी परेशान हो तो उनसे निज़ामे मुस्तफ़ा क़ाइम करने की उम्मीद भला कैसे की जा सकती है.
अ़ब्दे मुस्तफ़ा ऑफिशियल
अल्लामा ख़ादिम हुसैन रज़वी रहीमहुल्लाहु त'आला फरमाते थे के शादी के मौक़े पर जब लोग रोटी खाने लगते हैं, जब वो हालत मैं देखता हूँ (के लोग उसकी तरफ लपकते हैं) तो सोचता हूँ के ये निज़ामे मुस्तफ़ा ﷺ लायेंगे?
जंगे यरमूक में हज़रते इकरिमा रदीअल्लाहो त'आला अन्हो बेहोश पड़े थे, उन्होंने कहा पानी चाहिये, साथ बेटा भी बेहोश पड़ा था, हज़रते इकरिमा कहने लगे बेटा पानी दे, हज़रते अम्र बिन इकरिमा ने पानी दिया वहां चाचा बोल पड़े भतीजे मैं भी प्यासा हूँ वो भी बेहोश हो कर गिर पड़े, उन्होंने उन्हें पानी दिया फिर एक और सहाबी ने आवाज़ लगाइ... सात सहाबा तक पानी पहुंचा, किसी एक ने भी ना पिया, सब शहीद हो गये!
हम जिन को मानते हैं वो तो ऐसे थे के जाते जाते भी दुसरो को कहा तुम पानी पियो (लेकिन आज शादियो में) जब रोटी खुलती है तो महसूस होता है के रोटी हमने कभी देखी ही नहीं है, मुसलमान की तो ये शान ही नहीं है, मुसलमान के सामने तो सोना भी पड़ा हो तो वो उसकी तरफ देखेगा भी नहीं।
हज़रते नोमान बिन मुक़रीन यज़्दगिर्द (ईरान के बादशाह) के दरबार में गये तो उनका बिछा हुआ रेशम तलवार से काट दिया, सोने की कुर्सी पर बैठे तो जब देखा सोने की है तो खड़े हो गए, वो सब हंस पड़े, यज़्दगिर्द भी और उसके मुशीर भी, कहने लगे आपने कभी सोना नहीं देखा? हमने तो आपके ऐज़ाज़ के लिये सोने की कुर्सी बिछाइ है।
हज़रते नोमान फटी हुइ पगड़ी, फटे हुए कपड़े, तलवार को दंदाने पड़े हुए थे लेकिन आप ने सुपर पावर बादशाह के सामने बैठ कर फरमाया के मैं इसलिये नहीं उठा के मैंने सोना नहीं देखा बल्कि हमारे हुज़ूर ﷺ ने सोने के इस्तेमाल से मना फ़रमाया है, इसलिये खड़ा हो गया हूँ, बाक़ी रह गइ सोने की बात तो हमारे आक़ा व मौला ﷺ ने सोना और मिट्टी हमारी आँखों में बराबर कर दिया है।
(वाक़ियात -ए- सीरतुन नबी, अल्लामा ख़ादिम हुसैन रज़वी)
अल्लामा ख़ादिम हुसैन रज़वी चुंकि पाकिस्तान के हैं तो उन्होंने शादियों में रोटी के बारे में ऐसा लिखा है, हमारे हिंदुस्तान में ऐसा गोश्त के टुकड़ो, पापड़, ज़र्दा और मिठाइ वगैरा को ले कर होता है के मुसलमान एक दूसरे पर टूट पड़ते हैं और ना मिलने पर शिकायतो के पुल बाँध देते हैं, अब जो क़ौम शादी में खाने के लिये इतनी परेशान हो तो उनसे निज़ामे मुस्तफ़ा क़ाइम करने की उम्मीद भला कैसे की जा सकती है.
अ़ब्दे मुस्तफ़ा ऑफिशियल
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