🌹 اسلامی معلومات عامہ 🌹
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یہاں روزانہ اسلامی تاریخ اور بزرگانِ دین و علمائے ربانیین کی تاریخ ولادت و تاریخ وفات اور دینی باتیں (فوٹو،پوسٹ) تاریخ اور مہینے کی مناسبت سے مع کتابوں کی لِنکس بھیجی جاتی ہیں
طالب دعا 🤲
محمد جمال الدین خان قادری رضوی عفی عنہ
🆔 @Muhammad_Jamaluddin_Khan
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*آواز دو انصاف کو، انصاف کہاں ہے؟* وامن میشرام کے جھوٹ کو بے نقاب کرتی تحریر! تحریر: محمد زاہد علی مرکزی کالپی شریف چئیرمین :تحریک علمائے بندیل کھنڈ رکن: روشن مستقبل دہلی آج ہمارے کرم فرما، محب گرامی حضرت مولانا صادق مصباحی صاحب قبلہ (مہراج گنجوی) نے…
किसी और से रहे है!
किया ऎसा कोई मुस्लिम करता है? अगर नहीं तो फिर हम से ही बैर कियों? इसका जवाब तो आप ही दे सकते हैं।

*मुसलामानों को कभी दलितों से फाइदा नहीं पहुंचा*

सच पूछा जाये तो मुस्लिम समाज को दलितों, पिछड़ों से आज तक कोई फाइदा नहीं पहुंचा। जब कि हमने शिक्षा का अधिकार, साथ उठने बैठने से ले कर हर मोड़ पर दलितों शोषितों का साथ दिया है लेकिन अफसोस! कि आप जैसे लोग भी हमे ही दोषी ठहराते हैं। दुनिया में सब से आसान अगर कोई काम है तो वह है मुसलामानों को हर बुरे काम का जिम्मेदार ठहराना। और आप भी ये काम बहुत अच्छे ढंग से कर रहे हैं।

*मूर्ख बनाना बंद करें!*

अगर आप कहें कि हम कोशिश कर रहे हैं, तो हमे ऎसा भी नहीं लगता। आप के अनुसार आप का संगठन समूचे भारत में सक्रिय है और लाखों लोग आप के संगठन से जुड़े हैं। अब दो ही बाते सिद्ध होती हैं कि या तो आप और आपका संगठन मुसलामानों के प्रति सही निष्ठा से काम नहीं करता, या फिर आप का जोर किसी पर नहीं चलता। वर्ना किया बात है कि आप भाषण तो उच्च जाति वालों के विरुद्ध देते हैं लेकिन उसका नतीजा उल्टा निकलता है। जितना आप अपने समाज को बाहर निकालना चाहते हैं वह उतना ही बीजेपी और उसकी विचार धारा से करीब होता जा रहा है।

महाराष्ट्र मे तो आप का अच्छा असर है और आप वहाँ काफी सक्रिय हैं फिर किया कारण रहा कि महाराष्ट्र मे आप बहुजन विकास आघाड़ी को मजलिस के साथ गठबन्धन तोड़ने से नहीं रोक पाए? आप ने कुछ दबाव कियों नहीं बनाया? उत्तर प्रदेश या दूसरे राज्यों मे पूर्व मुख्यमंत्री मायावती या पिछड़े वर्ग के नेताओं से मिल कर उन्हें सही काम करने, या मुस्लिम पार्टियों से गठबन्धन करने को कियों नहीं कहा? राजस्थान मे आप किया कर रहे हैं? किया कारण है कि आप सिर्फ भाषणों तक ही मुसलामानों की बात करते हैं? ज़मीन पर उतर कर मुसलामानों का साथ नहीं देते?

हमे दलित इलाक़ों से वोट कियों नहीं मिलता? लोक सभा मे 84 एससी और 47 एसटी मेंबर आप के हैं। कुल 131 सांसद हैं आपने कितने सांसदों और देश भर में सैकड़ों एससी एसटी विधायकों से मुसलामानों के बारे में विधानसभा और संसद मे आवाज़ उठाने को कहा?
आप वैचारिक बदलाव की बात करते हैं तो अपने समाज के नेताओं से मुसलामानों के हितों की रक्षा करने के लिये आप ने किया कहा या किया किया? अगर आप ने बदलाव की बात की है तो फिर उसका नतीजा उल्टा कियों? किया दो चार विधायक या सांसद भी आप की बात नहीं सुनते? यदि ऎसा है तो पहले आप अपने समाज की ख़बर लीजिये, हमे बाद मे कोसये गा!
पहले आप अपने दलित नेताओं से अपने दलित भाइयों और पिछड़े वर्ग के साथ हो रहे अन्याय पर तो संसद मे जुबान खुलवा लें फिर हमे दोषी सिद्ध करयेगा। आप का भाषण सुन कर मुझे एक मशहूर कहावत याद आगई "उल्टा चोर कोतवाल को बांटे"।
ये कहावत मौजूदा भारत में अगर सब से सटीक किसी पर बैठती है तो उस व्यक्ति का नाम वामन मेश्राम है।

हमहीं को ज़ालिम कहेगी दुनिया, हमारा ही कत्ल ए आम होगा।
हमहीं कुआं खोदते फिरें गे हमहीं पे पानी हराम होगा।

*ज़रा आंख में भार लो पानी*

मशहूर कहावत है" आंख का पानी मर जाना" वामन मेश्राम जी! अगर आप की आँखों का पानी नहीं मरा है तो अभी आजादी से पहले और कुछ बाद के हालात एक बार फिर पढ़ लें। (भारत के बहुत से इलाक़ों मे आज भी दलितों के साथ जानवरों जैसा सुलूक होता है) आप के साथ लोग कैसा व्यावहार करते थे आप को पता ही होगा। लेकिन हमने आप के साथ बराबरी का बर्ताव किया, आप को बराबर बिठाया, साथ खाया और खिलाया, शेर हिंद श्री टीपू सुल्तान ने आप के समाज की महिलाओं की इज्ज़त की हिफाज़त की, राजा महाराजाओं और ज़मीनदारों ने दलित महिलाओं को अपने स्तन ढकने पर टैक्स लगाया था। इस टैक्स से मुक्ति और अपना बदन छुपाने का अधिकार हम ने दिया था।

दलितों को किसी बड़े आदमी के दरवाजे से चप्पल पहन कर निकलने का अधिकार नहीं था, कई जगहों पर तो अपने पीछे झाड़ू लटका कर चलते के उनके पैरों के निशान बाकी ना रहें।
आम तालाबों से पानी पीने तक का अधिकार नहीं था। छुआ छूत का ये हाल था कि जानवरों को इंसानी अधिकार हासिल थे लेकिन दलितों पिछड़ी जातियों को इंसानी अधिकार हासिल नहीं थे।

*मुसलामानो! हर एक पर लटटू होना कब बंद करो गे?*

भाइयो! आपने देखा कि आप के स्टेज पर आप ही को दोषी ठहराया जा रहा है और आप खुश हो रहे हैं। अफ़सोस तो उन लोगों पर है जो अपने आप को विद्वान, बड़ा अक्ल वाला समझते हैं! जब कि उनकी अक्ल का ये हाल है कि अपने ही स्टेज पर हो रही अपनी बुराई को भी नहीं समझ सकते। ऎसे लोग अपने साथ साथ पूरे समाज का मज़ाक बनवाते हैं और पूरे समाज को हीनता का शिकार करते हैं। और इसी हीन भावना से ग्रसित लोगों का शिकार करते हुए उनसे चंदा कर के समाज का लाखों रुपया ऎसे कार्यक्रमों मे फूंक देते हैं जिस मे आप के उत्थान, समाधान से ज्यादा आप के दोष बता कर आप को हताश और ना उम्मीद किया जाता
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*آواز دو انصاف کو، انصاف کہاں ہے؟* وامن میشرام کے جھوٹ کو بے نقاب کرتی تحریر! تحریر: محمد زاہد علی مرکزی کالپی شریف چئیرمین :تحریک علمائے بندیل کھنڈ رکن: روشن مستقبل دہلی آج ہمارے کرم فرما، محب گرامی حضرت مولانا صادق مصباحی صاحب قبلہ (مہراج گنجوی) نے…
है ।

हज़ारों रुपये ले कर अगर कोई हमारी बुराई और हमारा ही दोष सिद्ध करे और अपने आप को दूध का धुला बताये। जब कि हक़ीक़त इसके उलट हो और आप तालियां बजायें तो इस से ज्यादा मूर्खता और किया होगी?
अगर वाकई ये लोग हमारे साथ निष्ठा से काम करें तो बहुत कुछ हो सकता है। लेकिन ये सिर्फ भाषण बाजी करते हैं अगर सच मे काम करते तो बदलाव जरूर दिखता। लेकिन बदलाव नहीं दिखता यानी "दाल मे कुछ काला ज़रूर है।

वामन मेश्राम साहब के वीडियो का लिंक दे रहा हूं आप सुने और खुद ही फैसला करें।

https://youtu.be/bhl3NybkNYM

22 /6/2021

https://www.facebook.com/388280455075812/posts/937971613440024/
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#Ek_Se_Ziyada_Shadi_Or_Bharti_Mazahib

🖊️ Ghulam Mustafa Naimi
Roshan Mustaqbil Dehli

Ise Propogande Ka Asar Kahe Ya Apni Hi Talimaat Se La'talluqi, Ke Is Mulk Ki Aksariyat Un Bato Ko Lekar Islam Or Musalmano Se Nafrat Karne Lagi Hai Jo Unki Apni Tehzeeb Or Sanskirti Ka Ahem Hissa Haiñ. Inhi Ahem Masail Me Tadud e Azwaaj Bhi Shamil Hai. Tadud e Azwaaj Ka Matlab Hota Hai Ek Se Za'id Shadi Karna Jise Hindi Me "बहु-विवाह" Or Angrezi Me "Polygamy" Kehte Haiñ.

Hamare Mulk Ke Chand Shatir Dimago Ne Musalmano Se Nafrat Dilane Ke Liye Islam Ke Tadud E Azwaaj(Biviya) Qanoon Ko Apna Hathyar Banaya. Apni Is Jarihana Muhim Ko Maqbool Banane Ke Liye "Hum Do 2 Humare Pachas 50 " Or "Hum Char 4 Humare Chalis 40" Jaise Taoheen Aamez Or Mazaq Banane Wale Nare Bhi Gadhe.
Apni Is Muhim Me In Logo Ne T.V, Akhbar, Media Or Cinema Ka Sahara Liya Or Bharat Ki Aksariyat Ke Dimag Me Ye Baat Bitha Di Ke Ek Se Ziyada Shadi Karna Samaji Ayb Or Aawaragardi Ka Kaam Hai.

Apne Is Tahereeri Silsile Me Hum Bharati Mazahib Or Tareekh Ke Hawale Se Ye Sabit Karenge Ke Tadud E Azwaaj Bharat Me Maojuda Mazahib O Saqafat Ka Bunyadi Hissa Raha Hai.

🔹 Sanatan Dharm Ke Mutabiq Barhamma (ब्रह्मा) Ne Is Kaynat Ko Paida Kiya Hai. Rishi Wiyas Ke Mutabiq Barhamma Wo Bhagwan Haiñ Jin Ke Char 4 Muh (Face) Haiñ Or Wo Charo Simto Me Dekhte Haiñ. Vedo Ke Mutabiq Barhamma Khud Se Paida Haiñ. Hindu Purano Ke Mutabiq Barhamma Ji Ki Teen 3 Biviya Thi.
1- Savitri, 2- Gayetri, 3- Saraswati.

Saraswati: Puraan Or Mutsay Puraan Ke Mutabiq Saraswati Barhamma Ki Beti Thi. Jis Se Barhamma Ne Shadi Karli Thi. 100 Saal Tak Ye Dono Jangle Me Miya Bivi Ban Kar Rahe Jis Se Unhe Manu (मनु) Nami Beta Paida Hua.
(Shyam Babu Sharma Quora.com)

Hala'ke Baz Log Iski Ye Taweel Karte Haiñ Ke Saraswati Naam Ki Do Aorte Thi Ek Barhamma Ki Bivi Or Dusri Barhamma Ki Beti. Hum'naami Ki Wajah Se Beti Bivi Ke Taor Pr Mash'hoor Ho gai.

Ek Riwayat Ke Mutabiq Barhamma Ki Panch 5 Biviya Thi. Upar Batai Gayi Teen 3 Biviyo Ke Alawa Medha Or Sharadha Naam Ki Do 2 Biviya Or Thi. In Biviyo Se Barhamma Ji Ko Derh 1.5 Darjan Yani 18 Ke Aas Paas Bete Paida Hue.

🔹 Aarya Dharam Ke Bhagwan Vishnu (विष्णु) Ki Ek Hi Bivi Lakshmi Thi Magar Vishnu Darjano Apsarao Ko Bivi Ki Tarah Rakhte The. Un Sabhi Se Inke Sao 100 Se Ziyada Bete Paida Hue The.

🔹 Vishnu Ke Avtar Shri Krishna To Tadud E Azwaaj Ke Muamle Me Apni Misal Nahi Rakhte. Mahabharat Ke Mutabiq Unki Solah Hazar Ek So Aath 16108 Biviya Thi. Jin Me Sabse Paheli Bivi Rukmini Thi. Baqi Solah Hazar Ek So Saat 16107 Ladkiya Bhumasur Nami Shakhs Ne Apne Qile Me Qaed (क़ैद) Kar Rakhi Thi. Uska Irada Tha Ke Mazeed Kuchh Ladkiya Ikattha Ki Jaay Or Jab Unki Tadad Bees Hazar 20000 Ho jay To Un se Shadi Ki Jaay. Magar Ye Ladkiya Qaed Me Nihayat Pareshan Thi Inki Aah O pukar Sun Kar Krishna Ne Bhumasur Ko Maar Dala. Jab Ye Ladkiya Apne Ghar Pahunchi To Inke Ahle Khana (Ghar Walo) Ne Ladkiyo Ke Kirdar Pr Shak Kiya Or Unhe Apnane Se Inkar Kar Diya. krishna Ko Pata Laga To Unho ne In Doshizao Se Shadi Kar li.
(Mahabharat:Adhiyay 52/Safha1626)

Sumit Kumar Naami Mazmoon Nigar Aaj Tak Ke News App Pr 20 August 2019 Ko Shaay Ek Story Me Likhte:
" Puraano Ke Mutabiq Krishna Ke Ek Lakh Iksath Hazar Assi 1,610,80 Bete Or Solah Hazar Ek Sao Aath 16,108 Betiya Thi. Is Tarah Krishna Bharat Ke Sabse Bade Khandan Ke Mukhya Bane. Unhone Apne Khangi Zindagi Ka Har Haq Ada Kiya."

🔹 Sanatan Dharm Ke Bhagwan Shiva Bhi Kai Biviyo Ke Shohar The. Dharam Shastro Ke Mutabiq In Ki Char 4 Biviya Thi:
1- Sati, 2- Parvati, 3- Kali, 4- Uma Devi.
Iske Alawa Ek Or Bivi Ganga Ka Naam Bhi Bayan Kiya Jata Hai.

Puraano Ke Mutabiq Shiv Ke Saat 7 Bete The:
1- Kartikey, 2- Ganesh, 3- Sukesh, 4- Bhum, 5- Aiyyapa, 6- Jalandhar, 7- Andhak

Is Ke Alawa Shiv Ki Panch 5 Betiya Bhi Thi. In Ladkiyo Ke Naam Haiñ:
1- Jaya, 2- Vish'har, 3- Shamil Bari, 4- Dev, 5- Dotli Tha. Is Tarah Shiv Bhi Char 4 Biviyo Ke Shohar Or Ek Darjan Bachcho Ke Baap The.

https://m.facebook.com/story.php?story_fbid=126136242965376&id=100067070037092
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Forwarded from Gulam Mustafa Razvi
*لادینی افکار اور تاج العلماء مارہروی کے نقوشِ بصیرت*
"تاج العلماء جامع مسجد مالیگاؤں‘‘ کے افتتاحی پروگرام 24؍جون کی مناسبت سے اصلاحی تجزیہ
https://www.facebook.com/107640804524449/posts/223487486273113/
غلام مصطفیٰ رضوی
[نوری مشن، مالیگاؤں]

شہر میں اپنی نوعیت کی عظیم الشان نو تعمیر مسجد ’’تاج العلماء جامع مسجد‘‘ (دریگاؤں) کی افتتاحی بزم 24؍جون بروز جمعرات سجے گی۔ جس میں حضور محدث کبیر علامہ ضیاء المصطفیٰ قادری، حضرت سید عبدالقادر جیلانی میاں، مفتی ابویوسف قادری، مولانا اختر حسین قادری، مولانا وقار احمد عزیزی اور دیگر علماے کرام کی کہکشاں سنی جمعیۃ العلماء نے آراستہ کی ہے۔’’تاج العلماء جامع مسجد ‘‘ جس ذات سے منسوب ہے؛ یعنی تاج العلماء مولانا سید اولاد رسول محمد میاں مارہروی؛آپ عظیم شیخ طریقت، مصلح، قائد، رہبر ، مدبر و مفکرتھے۔خانقاہ برکاتیہ مارہرہ شریف کی روحانی برکتوں اور نسبتوں کے امین تھے۔ مالیگاؤں سے آپ کے رشتہ و تعلق کی کڑیاں تقریباً ایک صدی سے منسلک ہیں۔ 1923ء میں جب دارالعلوم حنفیہ سنیہ قائم ہوا۔ اس کے بانیان میں تاج العلماء کا نامِ نامی سنہرے حروف سے رقم ہے۔ آپ کے نام سے دریگاؤں (مالیگاؤں) میں جامعہ حنفیہ سنیہ سے متصل تاج العلماء جامع مسجد کا قیام اپنے اسلاف کی یادیں تازہ کرنے سے عبارت ہے۔ اللہ تعالیٰ! سنی جمعیۃ العلماء کی اِس سعی کو قبول فرمائے۔ اس ساعتِ سعید کی نسبت سے ہم یہاں تاج العلماء کے افکار پر مختصراً تجزیہ پیش کرتے ہیں۔
تاج العلماء مولانا سید اولاد رسول مارہروی (۱۳۰۹ھ۔۱۳۷۵ھ) کے عہد میں یہود و نصاریٰ کے برپا کردہ طوفانِ بد تمیزی نے فکروں کو پراگندہ اور اذہان کو گدلا کر کے رکھ دیا تھا۔ جس کے زیر اثر اخلاقی اقدار تنزل پذیر تھیں۔ جیسا کہ آج حالات اس سے زیادہ ہی پیچیدہ ہیں، تاج العلماء نے اپنے فکر و قلم، وعظ و ارشاد اور خانقاہی پیغام کے ذریعے اصلاح کی کوششیں کیں۔ اس سلسلے میں راقم کے پیش نظر تاج العلماء کی ایک جاندار تحریر ہے؛ جس میں اصلاحِ فکر و نظر کے کئی ایک ایسے گوشے ذکر کیے ہیں جن پر عمل کے ذریعے صالح اسلامی معاشرہ کی تشکیل کی جا سکتی ہے۔ لامذہبی کے سیلاب پر بند باندھا جا سکتا ہے۔
خانقاہِ برکاتیہ کے گلِ سر سبد تاج العلماء فکرِ صالح کے مالک تھے۔ ان کی دینی بصیرت مستقبل شناس تھی۔ احیاے فکر و نظر کے لیے آپ نے جو سعی و کاوش فرمائی و ممتاز ہے۔ خانقاہِ برکاتیہ ویسے بھی ہند کی نمایاں اور مرکزی خانقاہ رہی ہے؛ اس سے جو بھی صدا بلند ہوئی اس کی بازِ گشت پورے برِصغیر میں صاف سنی گئی۔ بایں وجہ تاج العلماء کی اصلاحی خدمات کے اثرات دور تک پہنچے۔آپ کی فکر و بصیرت سے چند گوشے یہاں ذکر کیے جاتے ہیں:

*فکری تنزل:*
باطل کے مکرو فریب میں یہ بات شامل تھی کہ اگر مسلمانوں کو زوال کی راہ پر گامزن کرنا ہے تو ان میں فکری بے راہ روی اور شہوانی لذت سے رغبت پیدا کر دی جائے۔ اسی غرض سے مغربی کلچر کو مسلم معاشرے میں رائج کیا گیا تاج العلماء لکھتے ہیں: ’’یورپ کے عیش پرستوں کو دیکھ کر ملک کے نوجوانوں کی رال ٹپکنے لگی، اور وہ دیکھتے ہیں کہ مذہب شہوانی جذبات کو دباتا اور نفسانی امنگوں کا گلا گھونٹتا ہے، شہوت انگیزی کے تمام دواعی و اسباب کی بندش کرتا ہے، مذہب کے اثر و اقتدار کی حالت میں نفس پرستی و شہوت رانی کے مواقع ہاتھ نہیں آتے۔‘‘ (پاسبان الہ آباد، جون ۱۹۶۳ء ص۱۹)
مذہب سے دوری و بیزاری کا سبب غیر اخلاقی محرکات کی تسکین ہے اور یہی عوامل ہیں جن میں مبتلا ہو کر نسل نو تباہ ہو رہی ہے۔

*منفی تربیت کے اثرات:*
تاج العلما اس پہلو سے لکھتے ہیں: ’’جب اس (بے حیائی و فحاشی کی) آب و ہوا میں پرورش پائی ہو اور جس انسان کا ماحول اس قدر تاریک رہا ہو، اس کو مذہب کی شکل کیوں بھیانک نظر نہ آئے اور وہ پابندیوں کے تصور اوراپنی فاسد اُمیدوں کے خون ہو جانے کے اندیشے سے خائف و مضطرب نہ ہو۔‘‘ (مرجع سابق)

*احیاے دین اور ہماری غفلت:*
’’احیاے ملت اور حمایتِ دین مسلمانوں کے لیے تمام ضروریات میں سب سے اعلیٰ ضرورت ہے؛ اس کا احساس و ادراک کریں۔ اور علما کی معاش کی طرف سے غفلت نہ برتیں مگر بجائے اس کے ان پر یہ الزام لگانا کہ وہ بیکار ہیں دین کو بیکار سمجھنا ہے۔‘‘ (مرجع سابق ص۲۰)
علما کی توہین آج عام سی بات ہے؛ جس کا یہ اثر ہے کہ علما کو حقیر جانا جاتا ہے حالاں کہ زندگی کے ہر شعبے میں علما کی ضرورت ہے، علما کی توہین میں مبتلاافراد کو اپنی منفی روش تبدیل کر نی چاہیے۔

*میڈیا کا منفی رُخ:*
جدت پسندی کے شکار اخبارات اسلامی اصولوں کی بجائے مغربی اصولِ صحافت کو محورِ نگاہ بنا بیٹھے، تاج العلماء فرماتے ہیں: ’’اخبار نویسوں نے اسلام کے ساتھ کیا کیا بغض نکالے ہیں، ان تمام افعال کو جو اسلام کو مٹانے والے تھے، اصلاحات کہہ کر عوام کے عقیدوں کو خراب کیا گیا… یہ اصلاح ہے کہ اسلامی زندگی کو ترک کر دیاجائے اور مذہب کی حمایت کو ظلم بتایا جائے؟ … ان
Forwarded from Gulam Mustafa Razvi
کی خامہ فرسائی، دماغ سوزی اور اخبار سیاہ کرنے کا صرف یہی مقصد ہے کہ ہمارے ملک کے جذبۂ مذہبیت کو ضعیف کیا جائے۔‘‘ (مرجع سابق ص۲۱)
میڈیا کے حوالے سے یہودی دستاویز میں بھی ہے کہ وہ میڈیا پر اسی لیے اجارہ داری قائم کرنا چاہتے ہیں کہ مذہبی (اسلامی) افکار کے مقابل منفی فکر کو رواج دے سکیں۔اس رُخ سے موجودہ میڈیا کا معاملہ سامنے ہے کہ اسلام کی حقیقی تصویر پیش کرنے کے بجائے منفی تصویر گڑھ رہا ہے،معاصر میڈیا عموماً دیانت و صداقت سے عاری و خالی ہو کر رہ گیا ہے۔ یہ ایک المیہ ہے۔ جس کے بعض احوال کی نشان دہی تاج العلماء نے نصف صدی قبل کر دی تھی۔

*علما کی ذمہ داری:*
’’اپنے زاویے سے نکلیے، خلوتوں سے باہر آئیے! اسلام کی حمایت کا وقت ہے، اہلِ باطل کے بطلان کے پردے فاش کیجیے، بد دین فریبیوں کی فریب کاریوں کا افشاے راز کر کے مسلمانوں کی دینی و مذہبی حمایت و حفاظت کیجیے، وہ پرچے وہ رسالے وہ اخبار وہ تحریر جو اسلام کی مخالفت میں بھرے ہوتے ہیں جن میں بے دینی کی ترویج کی جاتی ہے، ان کو دیکھنے سے مسلمانوں کو روکنے کی کوشش کیجیے، بے دینی پھیلانے والے جلسے جو ملک میں منعقد کیے جاتے ہیں؛ ان سے مسلمانوں کو آگاہ کیجیے اور ان کے شر سے بچنے کے لیے مسلمانوں کو مشورہ دیجیے کہ ان میں شرکت نہ کریں۔‘‘ (مرجع سابق ص۲۱) ع
نکل کر خانقاہوں سے ادا کر رسمِ شبیری

*مسلمانوں کی ذمہ داری:*
’’اسلام کی حمایت جیسی علما پر فرض ہے (عام) مسلمانوں پر بھی فرض ہے۔ مسلمانوں کو چاہیے کہ وہ اپنی اولاد کو ایسی صحبتوں سے بچانے کی زبردست کوشش کریں جو بے قیدی سکھاتی اور بے دین بناتی ہے۔ اس بات کی بھی کوشش کریں کہ محزبِ اخلاق اور بے دینی اور بد مذہبی کی تحریرات ان کے مطالعہ میں نہ آئیں۔ اسلامی تعلیم کے صحیفہ ہائے سے دماغ سادہ اور خالی نہ ہوں۔ مذہب کی قدر اور محبت سے انھیں واقف اور با خبر کیا جائے۔‘‘(مرجع سابق)

مشائخ مارہرہ مطہرہ نے جو خدمات انجام دی ہیں؛ ان سے تاریخ ہند کے صفحات جگمگا رہے ہیں۔ تاجدار مارہرہ تاج العلماء نے اپنے اصلاحی اور تعلیمی مشن کے توسط سے فکرِ اعلیٰ حضرت کو عام کیا اور تاباں ماضی کے خانقاہی دور کی یادیں تازہ کر دیں۔
***
ترسیل: نوری مشن/اعلیٰ حضرت ریسرچ سینٹر/رضا لائبریری مالیگاؤں
٢٣ جون ٢٠٢١ء
noorimission92@gmail.com
+91 9325028586
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Forwarded from Gulam Mustafa Razvi
*مَدارِ ایمان*
_بقلم:_
پروفیسر ڈاکٹر محمد مسعود احمد نقشبندی

ہاں، حضور انور صلی اللہ علیہ وسلم کا دربار بڑے ادب کا دربار ہے… ایمان کا مدار ہی آپ کی تعظیم و تکریم پر ہے…صحابہ نے کبھی آپ کی موجودگی میں آپ سے پیٹھ نہ پھیری…ان کا رُخ تو نماز میں بھی آپ ہی کی طرف رہتا تھا، انہوں نے آپ کے پیچھے نماز پڑھی… ان کی شان تو یہ ہے کہ جب کوئی قبلہ رُخ نماز میں مشغول ہو اور وہ آواز دیں تو قبلہ سے پیٹھ پھیر کر آپ کی آواز پر لبیک کہنا فرض ہے… اس حقیقت پر قرآن گواہ ہے… کیا اللہ اور اس کے رسول صلی اللہ علیہ وسلم اس بات کو پسند کریں گے کہ اس کے چاہنے والے حضور انور صلی اللہ علیہ وسلم سے پیٹھ پھیر کر کھڑے ہوجائیں؟ ہر گز نہیں… یقیناً یہ عمل اللہ و رسول کی ایذا کا باعث ہو گا اور اللہ و رسول کو ایذا دینا کوئی معمولی بات نہیں… بہت بڑی بات ہے… ان کی سرکار تو عالی ہے… کسی بادشاہ کے دربار میں، بادشاہ سے پیٹھ پھیر کر کوئی نماز بھی پڑھنے لگے تو یقیناً اس کو آدابِ شاہی کے خلاف سمجھا جائے گا… نماز پڑھنے والے کو دربار سے ہٹا دیا جائے گا، ہر گز اجازت نہ دی جائے گی کہ وہ بادشاہ کے سامنے پیٹھ پھیر کر نماز پڑھتا ہے… جب دُنیوی بادشاہوں کے دربار کا یہ عالم ہے تو اس دربار کا کیا عالم ہوگا جہاں خود احکم الحاکمین متوجہ ہونے کا حکم دے رہا ہے… صدیوں ہمارے اسلاف و اکابر کا یہی عمل رہا، ائمہ اربعہ بھی اس پر متفق ہیں کہ جب روضہ شریف کے سامنے دُعا کرنے والا دُعا کے لیے ہاتھ اُٹھائے تو چہرہ سرکار کی طرف رہے… اللہ تعالیٰ نے مسلمانوں کو سچوں کے ساتھ رہنے کی ہدایت فرمائی ہے…

یٰٓاَیُّھَاالَّذِیْنَ اٰمَنُوااتَّقُوااللّٰہَ وَکُوْنُوْا مَعَ الصّٰدِقِیْنَ (سورۂ توبہ:۱۱۹)…
'’اے ایمان والو! اللہ سے ڈرتے رہو اور سچوں کے ساتھ رہو‘‘

کہ سچے گمراہ نہیں ہو سکتے… اسی میں سعادت ہے کہ قرآن و حدیث کی پیروی کریں اور صالحین کے راستے پر چلتے رہیں۔

[قبلہ، مطبوعہ نوری مشن مالیگاؤں ۲۰۲۰ء، ص۲۰۔۲۱]
ترسیل: نوری مشن/اعلیٰ حضرت ریسرچ سینٹر/ رضا لائبریری مالیگاؤں
***

https://m.facebook.com/107640804524449/posts/222292239725971/
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Forwarded from Gulam Mustafa Razvi
*نامِ نامیﷺ بہارِ زندگی*
نوری مشن کی تازہ اشاعت کی پاکیزہ تمہید... بقلم پروفیسر ڈاکٹر محمد مسعود احمد نقشبندی

غلام مصطفیٰ رضوی
نوری مِشن مالیگاؤں

ذکرِ رسولﷺ کی خوشبو سے گلشنِ حیات معطر ہے... لاریب! ذکرِ پاک کی برکت سے اُفق کا جمال ہے... سحر کی نمود ہے... صبح کی رونقیں ہیں... آفتاب کی تمکنت ہے... ماہتاب کی کرنیں ہیں... شب کی روحانیت ہے... بزم پُرنور ہے... حریمِ کائنات میں قندیلِ طیبہ سے آرائش ہے... بات جب تاجدارِ ختم نبوت ﷺ کی ہو؛ تو پروفیسر ڈاکٹر محمد مسعود احمد نقشبندی کا رہوارِ فکر بھی جھوم کر چلتا ہے... اسلوب کی دل کشی... فکر کی رعنائی... محبت کی جلوہ سامانی... اور وادیِ عشق کی جادہ پیمائی مشاہدہ ہوتی ہے... نُوری مِشَن مالیگاؤں کی تازہ اشاعت اِسی رُخ سے منصۂ شہود پر ہوگی... آج کی بزم میں نئی اشاعت کی تمہید مطالعہ کیجئے... ان شاء اللہ! ایمان کا غنچہ تروتازہ ہوگا... کلیاں کھل اُٹھیں گی...

"ذکر مصطفیٰﷺ کہاں نہیں؟… کوئی جگہ نہیں،جہاں نہیں… اللہ اللہ!… ان کے کرم سے موجودات نے لباسِ وجود پہنا… ان کا چرچا آسمانوں میں… ان کا چرچا زمینوں میں… ان کا چرچا سمندروں میں… انبیا و رسل، فلک و ملک، جن و انس سب ان کی آمد آمد کے منتظر… ان کا نامِ نامی، بہارِ زندگی…ان کا وجودِ گرامی، شبابِ زندگی… ان کی راتیں، مغفرت کی برسات… ان کے دن، رحمت کی پھوار… ان کا تبسم، طلوعِ فجر… ان کا غم، غروبِ سحر… ان کی عنایت، دلوں کی ٹھنڈک… ان کا کرم، روحوں کی فرحت…ان کا دیدار، آنکھوں کی روشنی… ان کا کردار، انسانوں کی معراج… ذکرِ مصطفیٰ ﷺ بڑی سعادت ہے… وہ دل، دل نہیں جو ان کے لیے نہ سلگے… وہ آنکھ، آنکھ نہیں جو ان کی یاد میں نہ برسے… وہ سینہ، سینہ نہیں جو ان کی محبت میں نہ پھکے… وہ زباں، زباں نہیں جو ان کی مدح و ثنا میں نہ کھلے… ہاں! رگوں میں خون دوڑ رہا ہے… دل میں جذبات اُمنڈ رہے ہیں… دماغ میں خیالات پھوٹ رہے ہیں… زباں پر الفاظ مچل رہے ہیں… جسم میں ہلچل مچی ہے… پھر کیوں نہ اس جانِ جاں کا ذکر کریں!… ہاں! رب العالمین خود ان کا ذکر فرمارہا ہے… اللہ اللہ! وہ ذکر کی کن بلندیوں پر فائز ہیں… اس سے بڑھ کر بلندی اور کیا ہوگی کہ نامِ نامی رب کریم کے حضور اس طرح سرفراز ہوا کہ ہر سرفرازی، اس سرفرازی کے قدم چومنے لگی… ہمارا کیا منہ؟ ہماری کیا اوقات، ہماری کیا بساط جو ان کا ذکر کریں… عقل نہیں جو ان کی بلندیوں کو پاسکے… دماغ نہیں جو اس جوامع الکلم کی بات سمجھ سکے… آنکھ نہیں جو ان کے جلوؤں کو دیکھ سکے… کیا کریں اور کیا نہ کریں؟… دل بے قرار ہے… آنکھیں اشکبار ہیں… اللہ اللہ! مگر وہ تو غریب نواز ہیں، ہاں!؎

اک ننگ غم عشق بھی ہے منتظر دید
صدقے ترے اے صورت سلطان مدینہ"

عنقریب کتاب طبع ہوگی... بزمِ مطالعہ منور ہوگی... لفظ لفظ خوشبو؛ حرف حرف مُشکبو... اور بالیدگیِ فکر کا سامان ہوگا... زبان پر درودوں کے نغمے ہوں گے... ان شاء اللہ!
***
٢٢ جون ٢٠٢١ء
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Forwarded from کریم اللہ رضوی استاذ دار العلوم مخدومیہ جوگیشوری ممبئی
✰کریم اللہ رضوی استاذ دار العلوم مخدومیہ جوگیشوری ممبئی✰:
السلام علیکم
حضرت کدو کھانا سنت ہے یہ کہاں سے ثابت ہے دلیل کے ساتھ جواب عنایت فرمائیں ؟
المستفتی : ولی حسین
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وعلیکم السلام و رحمة اللہ و برکاتہ
جواب : کدو جسے لوکی بھی کہا جاتا ہے ایک معروف سبزی ہے جس کا کھانا سنت ہے جس کو رسول اللہ صلی اللہ علیہ وسلم نے نے بہت پسند فرمایا ہے حدیث شریف میں ہے کہ " عَنْ أَنَسٍ رضي الله عنه قَالَ: دَخَلْتُ مَعَ النَّبِيِّ صلى الله عليه وآله وسلم عَلٰی غُـلَامٍ لَہٗ خَیَّاطٍ، فَقَدَّمَ إِلَیْہِ قَصْعَۃً فِیْہَا ثَرِیْدٌ، قَالَ: وَأَقْبَلَ عَلٰی عَمَلِہٖ، قَالَ: فَجَعَلَ النَّبِيُّ صلى الله عليه وآله وسلم یَتَتَبَّعُ الدُّبَّاءَ، قَالَ: فَجَعَلْتُ أَتَتَبَّعُہٗ فَأَضَعُہٗ بَیْنَ یَدَیْہِ، قَالَ: فَمَا زِلْتُ بَعْدُ أُحِبُّ الدُّبَّاءَ۔ مُتَّفَقٌ عَلَیْه " اھ یعنی حضرت انس رضی اللہ عنہ بیان کرتے ہیں کہ میں حضورنبی اکرم صلی اللہ علیہ وآلہ وسلم کے ہمراہ آپ صلی اللہ علیہ وآلہ وسلم کے ایک خادم کے پاس گیا جو درزی کا کام کرتا تھا۔ پس اُس نے آپ صلی اللہ علیہ وآلہ وسلم کی خدمت میں ثرید کا ایک پیالہ پیش کیا۔حضرت انس کا بیان ہے کہ پھر وہ اپنے کام میں مشغول ہو گیا، حضرت انس رضی اللہ عنہ بیان کرتے ہیں کہ حضورنبی اکرم صلی اللہ علیہ وآلہ وسلم اُس میں کدو کے ٹکڑے تلاش فرما رہے تھے۔ اُن کا بیان ہے کہ میں بھی تلاش کر کے آپ صلی اللہ علیہ وآلہ وسلم کے سامنے رکھنے لگا اور اُس کے بعد میں نے ہمیشہ کدو کو پسند کیا۔'' یہ حدیث متفق علیہ ہے " اھ ( أخرجہ البخاري في الصحیح ، کتاب الأطعمۃ ، باب الثرید ، 5 / 2067 ، الرقم : 5104 ، وأبو داود في السنن، کتاب الأطعمۃ ، باب في أکل الدباء ، 3 / 350 ، الرقم : 3782 )

واللہ اعلم بالصواب
کریم اللہ رضوی
خادم التدریس دار العلوم مخدومیہ اوشیورہ برج جوگیشوری ممبئی موبائل نمبر 7666456313
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حضرت فاطمہ رضی اللہ تعالٰی عنہا کی روح مبارکہ کیا اللہ تبارک و تعالٰی نے خود نکالی؟

سوال نمبر 449

السلام علیکم و رحمۃ اللہ و برکاتہ

کیا فرماتے ہیں علمائے دین و مفتیان کرام مسئلہ ذیل کے بارے میں کہ حضرت فاطمہ رضی اللہ عنہا کی روح، اللہ تعالٰی نے اپنے دست قدرت سے نکالی یا حضرت عزرائیل علیہ السلام نے؟

حوالے کے ساتھ جواب عنایت فرمائیں مہربانی ہوگی 

المستفتی: محمد وقاص عطاری فیصل آباد پاکستان

وعلیکم السلام و رحمة اللہ و برکاتہ 

جواب:
اللہ رب العزت کا خود بعض خواص بندوں کی روح کا قبض فرمانا حدیث شریف سے ثابت ہے چنانچہ شہدائے بحر کے بارے میں سرکار علیہ السلام نے فرمایا " عن ابى امامة يقول سمعت رسول الله صلى الله تعالى عليه وسلم أن الله عز و جل وكل ملك الموت بقبض الارواح الا  شهيد البحر فانه يتولى قبض أرواحهم " اھ  یعنی حضرت ابو امامہ فرماتے ہیں کہ میں نے رسول اللہ صلی اللہ علیہ وسلم کو فرماتے ہوئے سنا کہ اللہ تعالٰی نے ملک الموت کو روح قبض کرنے کے لئے مقرر فرمایا ہے مگر دریا کی شہیدوں کی روح اللہ تعالٰی خود قبض فرماتا ہے " اھ ( ابن ماجہ ص 199) انہیں خواص میں حضرت فاطمہ زہرا رضی اللہ تعالٰی عنہا بھی ہیں جن کی روح اللہ تعالی نے قبض فرمائی ہے جیسا کہ تفسیر روح البیان میں ہے کہ " ان فاطمة الزهراء رضى الله تعالى عنها لما نزل عليها ملك الموت لم ترض بقبضه فقبض الله روحها " اھ یعنی جب خدا نے ملک الموت کو حضرت فاطمہ زہرا رضی اللہ تعالٰی عنہا کی روح قبض کرنے کے لئے بھیجا تو آپ راضی نہ ہوئیں تو اللہ عز وجل نے حضرت فاطمہ کی روح خود قبض فرمائی " اھ ( ج 8 ص 114 ) 

واللہ اعلم بالصواب 
کریم اللہ رضوی 

خادم التدریس دارالعلوم مخدومیہ اوشیورہ برج جوگیشوری ممبئی
 موبائل نمبر  7666456313

http://www.masaileshariya.com/2019/09/Post449.html?m=1
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بعض واعظین بیان کردیتے ہیں کہ ملک الموت سے حضرت فاطمہ رضی اللہ عنھا کی طویل گفتگو ہوئی کہ ملک الموت نے آنے کی اجازت مانگی جناب فاطمہ رضی اللہ عنھا نے انکار کیا،پھر بہت دراز گفتگو ہوئی حضور صلی اللہ علیہ وسلم نے پوچھا فاطمہ کیا ہے آپ نے واقعہ بیان کیا،فرمایا یہ تیرے گھر کا ادب ہے جو وہ اجازت مانگ رہے ہیں،یہ ملک الموت ہیں کسی سے اجازت نہیں مانگا کرتے،یہ سب غلط ہے حضور اس وقت نہ تو فاطمہ زہرا کے گھر میں تھے نہ فاطمہ زہرا وہاں موجود تھیں اس روایت کا کہیں ثبوت نہیں۔

https://www.dawateislami.net/bookslibrary/1090/page/292
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فیس بک پر لکھی گئی تحریریں اگر اللہ کی رضا کے لیے نہ‌ ہوئیں تو ان کی عمر وہی دو چار دن ہوگی ، جن میں لوگ لائک ، کمینٹ اور واہ واہ کردیں گے ۔

لیکن۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔

اگر اللہ کے لیے ہوئیں تو پھر ان کی عمر لکھنے والے سے بھی طویل ہوجائے گی ، اور یہ ہمیشہ کے لیے معزز فرشتوں کے نوشتوں میں محفوظ ہوجائیں گی ۔ ؎

جس کا عمل ہے بے غرض ، اُس کی جزا کچھ اور ہے
حور و خیام سے گزر ، بادہ و جام سے گزر

تیرا امام بے حضور ، تیری نماز بے سرور
ایسی نماز سے گزر ، ایسے امام سے گزر !


✍️لقمان شاہد
24-6-2021 ء

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#سیلف_ڈفینس_ایک_قانونی_حق

غلام مصطفےٰ نعیمی
روشن مستقبل دہلی

انسانی جان کا تحفظ دنیا کے تمام ممالک میں انسان کا بنیادی حق مانا گیا ہے۔ہمارے وطن میں بھی انسانی جان کو قانونی تحفظ فراہم کیا گیا ہے تاکہ سماج دشمن عناصر کی تخریب کاریوں سے معاشرہ محفوظ رہ سکے۔اور ایک عام انسان بھی بے خوف وخطر زندگی گزار سکے۔اسے Right to self Defense "اپنے دفاع کا حق" کہا جاتا ہے۔

تعزیرات ہند کی دفعات 96 تا 106 میں حق دفاع (رائٹ ٹو سیلف ڈفینس) پر بحث کی گئی ہے۔جس میں کل گیارہ دفعات شامل ہیں۔ان دفعات کے تحت ان اسباب وعوامل کا ذکر کیا گیا ہے جن کی موجودگی میں کسی بھی شخص کو اپنے دفاع کا حق حاصل ہوتا ہے۔حملہ روکنے اور اپنے دفاع کے لیے ضروری طاقت کے استعمال کی اجازت ہے۔اگر اس طاقت کے استعمال کے نتیجے میں مد مقابل کا جانی یا مالی نقصان ہوتا ہے تو یہ دفاع کرنے والے کے حق میں "جرم" نہیں مانا جائے گا، کیوں سیلف ڈفینس کے تحت یہ اس کا قانونی حق ہے۔

سیلف ڈفینس کی قانونی تشریح

سیلف ڈفینس قانونی حق ہونے کے ساتھ ساتھ ہر شخص کا بنیادی حق (Fundamental right) بھی ہے۔سپریم کورٹ نے کئی فیصلوں میں اس پر زور دیا ہے کہ رائٹ ٹو سیلف ڈفینس انسان کا بنیادی حق ہے۔
قانون حق دفاع کے ساتھ کچھ ہدایات بھی ذہن نشیں رہیں:
1-یہ قانون ہر شخص کو اپنی، بیوی بچوں، اپنی جائداد اور دوسروں کی جان وجائداد کی حفاظت کا حق دیتا ہے، جب کہ حملے کے وقت دفاع کے علاوہ کوئی اور صورت موجود نہ ہو۔

2-سیلف ڈفینس کا حق انتقام لینے یا کسی کو نقصان پہنچانے کے لئے نہیں ہے، اس کا مطلب صرف اپنا دفاع ہے بالفاظ دیگر "حق دفاع ڈھال ہے تلوار نہیں۔"

3-یہ حق اسی وقت تک حاصل ہے جب تک خطرے کی شدید خدشات ہوں، خطرہ سامنے ہو یا حملہ ہونے والا ہو۔اگر خطرہ ٹل جاتا ہے تو یہ حق ختم ہوجاتا ہے۔

سیلف ڈفینس کی اہم دفعات کی قانونی تشریح ملاحظہ فرمائیں:
🔹 دفعہ 96: اس کے تحت اپنے دفاع کے لیے کیا گیا کوئی بھی کام جرم کے دائرے میں نہیں آتا۔

🔹دفعہ 97: اس کے تحت ہر فرد کو کسی ایسے جرم سے خود کو یا کسی اور کو بچانے کا حق حاصل ہے جو جسم کو نقصان پہنچاتا ہو۔نیز اس دفعہ کے تحت چوری، ڈکیتی، نقصان رسانی ، مجرمانہ طور پر جائیداد میں دخل اندازی یا ان جرائم کی کوششوں سے جائیداد کے دفاع کا حق بھی حاصل ہے۔جائیداد اپنی ہو یا کسی اور کی، منقولہ ہو یا غیر منقولہ۔مثلاً آپ نے رات کے وقت دیکھا کہ کچھ لوگ آپ کی دکان یا مکان کا تالہ توڑنے کی کوشش کررہے ہیں، بھلے تالہ نہیں کھلا، نہ ہی وہ لوگ دکان میں داخل ہوئے ہیں مگر تب بھی آپ کو اپنی دکان/مکان کی حفاظت کے لیے ان پر حملہ کرنے کی اجازت ہے۔ آپ کا یہ عمل "حق دفاع" مانا جائے گا اور جرم کے زمرے میں نہیں آئے گا۔

🔹دفعہ 98: کے تحت دماغی طور پر کمزور، مخبوط الحواس، پاگل شخص کے خلاف بھی دفاع کا حاصل رہے گا چاہے ان کا عمل جرم کے زمرے میں آتا ہو یا نہ آتا ہو، مثلاً کسی شخص نے پاگل پن کے زیر اثر دوسرے پر قاتلانہ حملہ کیا، تو دوسرے شخص کو دفاع کا بھر پور حق حاصل رہے گا۔اسی طرح غلط فہمی، حملہ آور کا کم عمر ہونا، حملہ آور کا نشہ میں ہونا وغیرہ مقابل کے حق دفاع کو ختم نہیں کرتا۔

🔹دفعہ 99: کے تحت ان امور کو بیان کیا ہے جن میں حق دفاع حاصل نہیں ہوگا۔جب تک مناسب وجوہات سے اس کا یقین نہ ہوجائے کہ جان کا خطرہ یا شدید زخمی ہوجانے کا اندیشہ ہے۔مثلاً سرکاری ملازمین(پولیس، انکم ٹیکس فوج وغیرہ) کے خلاف حق دفاع حاصل نہیں جب کہ وہ اپنی ڈیوٹی کر رہے ہوں۔

🔹 دفعہ 100: یہ دفعہ حق دفاع میں سب سے اہم ہے، اس کے تحت ان اسباب و وجوہات کا تذکرہ ہے جن کی بنا پر کوئی بھی شخص اپنا حق دفاع استعمال کرتے ہوئے حملہ آور کی جان بھی لے سکتا ہے یا اس کو شدید نقصان پہنچا سکتا ہے۔ اس دفعہ کے مطابق سات جرائم ایسے ہیں جن کے خلاف اپنی جان کے دفاع کا انتہائی حق حاصل ہوگا، وہ سات جرائم حسب ذیل ہیں:
1- ایسا حملہ جس کی شدت سے ظاہر ہو کہ اگر اس کا دفاع نہ کیا گیا تو خود کی جان جاسکتی ہے۔

2- حملہ ایسا ہو جس کا دفاع نہ کیا جائے تو خود کے شدید زخمی ہونے کا قوی اندیشہ ہو۔

3- زنا بالجبر کی نیت سے حملہ کرنے والے کا دفاع۔

4- غیر فطری شہوت کی نیت سے کیے جانے والے حملے کا دفاع۔

5- اغوا کرنے کی نیت سے کیے جانے والے حملے کا دفاع۔

6- حبس بے جا میں رکھنے کی نیت سے کئے جانے والے حملے کا دفاع۔بشرطیکہ اسباب و عوامل سے ظاہر ہو کہ دفاع کیے بغیر خارجی مدد کا کوئی راستہ نہیں ہے۔
7- تیزاب کے حملے سے بچنے کا دفاع۔اس صورت حال میں حملہ آور کی جان لی جاسکتی ہے، بشرطیکہ صورت حال ایسی ہو کہ بغیر دفاعی حملہ کیے خود کی جان نہیں بچائی جاسکتی۔