Indian constitution..
3.5K subscribers
1 photo
2 files
2 links
Indian constitution
Download Telegram
भारतीय संविधान के अनेक देशी और विदेशी स्त्रोत हैं, लेकिन भारतीय संविधान पर सबसे अधिक प्रभाव भारतीय शासन अधिनियम 1935 का है. भारत के संविधान के निर्माण में निम्न देशों के संविधान से सहायता ली गई है:

(1) संयुक्त राज्य अमेरिका: मौलिक अधिकार, न्यायिक पुनरावलोकन, संविधान की सर्वोच्चता, न्यायपालिका की स्वतंत्रता, निर्वाचित राष्ट्रपति एवं उस पर महाभियोग, उपराष्ट्रपति उच्चतम एवं उच्च न्यायालयों के न्यायाधीशों को हटाने की विधि एवं वित्तीय आपात.

(2) ब्रिटेन: संसदात्मक शासन-प्रणाली, एकल नागरिकता एवं विधि निर्माण प्रक्रिया.

(3) आयरलैंड: नीति निर्देशक सिद्धांत, राष्ट्रपति के निर्वाचक-मंडल की व्यवस्था, राष्ट्रपति द्वारा राज्य सभा में साहित्य, कला, विज्ञान तथा समाज-सेवा इत्यादि के क्षेत्र में ख्यातिप्राप्त व्यक्तियों का मनोनयन, आपातकालीन उपबंध.

(4) ऑस्ट्रेलिया: प्रस्तावना की भाषा, समवर्ती सूची का प्रावधान, केंद्र एवं राज्य के बीच संबंध तथा शक्तियों का विभाजन.

(5) जर्मनी: आपातकाल के प्रवर्तन के दौरान राष्ट्रपति को मौलिक अधिकार संबंधी शक्तियां.

(6) कनाडा: संघात्‍मक विशेषताएं अवशिष्‍ट शक्तियां केंद्र के पास.

(7) दक्षिण अफ्रीका: संविधान संशोधन की प्रक्रिया प्रावधान.

(8) रूस: मौलिक कर्तव्यों का प्रावधान.

(9) जापान: विधि द्वारा स्थापित प्रक्रिया.

नोट: भारतीय संविधान के अनेक देशी और विदेशी स्त्रोत हैं, लेकिन भारतीय संविधान पर सबसे अधिक प्रभाव 'भारतीय शासन अधिनियम: 1935 का है. भारतीय संविधान के 395 अनुच्छेदों में से लगभग 250 अनुच्छेद ऐसे हैं, जो 1935 ई० के अधिनियम से या तो शब्दश: लिए गए हैं या फिर उनमें बहुत थोड़ा परिवर्तन किया गया है।
सँविधान के 21 Fact:

Fact No. 1: संविधान को English में “Constitution ” कहा जाता है.

Fact No. 2: भारत के संविधान को बनाने में डॉ भीमराव अम्बेडकर ने अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी. इसीलिए डॉ अम्बेडकर को संविधान का निर्माता कहा जाता है.

Fact No. 3: संविधान बनाने वाली कमिटी के अध्यक्ष डॉ राजेंद्र प्रसाद को बनाया गया था.

Fact No. 4: भारत का संविधान पूरे विश्व में सबसे लम्बा और बड़ा संविधान है.

Fact No. 5: भारतीय संविधान पूरा हस्त लिखित है इसे श्री श्याम बिहारी रायजादा ने लिखा था.

Fact No. 6: भारतीय संविधान को बहुत ही खूबसूरती से सजाया गया था और इन पन्नों को सजाने का काम शांतिनिकेतन के कलाकारों ने किया था.

Fact No. 7: संविधान की ओरिजनल प्रतियाँ आज भी भारत के संसद में है. जहाँ इसे हीलियम के अंदर डाल कर लाइब्रेरी में रखा हुआ है.

Fact No. 8: भारतीय संविधान को बनने में 2 साल, 11 महीने और 18 दिन का समय लगा.

Fact No. 9: हमारा संविधान 26 नवंबर 1949 को बनकर पूरा तैयार हो गया था लेकिन इसे सरकार ने 26 जनवरी 1950 को लागू करवाया.

Fact No. 10: हमारे देश को विश्व का सबसे बेहतरीन संविधान माना जाता है.

Fact No. 11: भारत के मूल संविधान में 395 अनुच्छेद, 22 भाग और 8 अनुसूचियां शामिल थी. वर्तमान समय में भारतीय संविधान में 465 अनुच्छेद, 12 अनुसूचियां और 22 भाग हैं.

Fact No. 12: जब से हमारा संविधान बना है तब से लेकर अब तक संविधान में सिर्फ 124 संविधान संशोधन हुए है जो हमारे संविधान की मजबूती को दर्शाता है.

Fact No. 13: भारतीय संविधान में पहले संपत्ति का अधिकार एक मौलिक अधिकार था जिसे 44वें संशोधन द्वारा सन 1978 में हटाया गया.

Fact No. 14: भारतीय संविधान का पहला संशोधन सन 1951 में हुआ था.

Fact No. 15: संविधान के अनुसार – हमारे देश का अपना कोई धर्म नहीं है. भारत एक धर्मनिरपेक्ष देश है.

Fact No. 16: भारतीय संविधान में कई चीजे दूसरे देशो से ली गई है जिनमे मुख्यतः – रूस, अमेरिका, आयरलैंड, कनाडा, जापान, अफ्रीका और फ्रांस शामिल है.

Fact No. 17: अबाइड विथ मी गाने को गणतन्त्र दिवस की परेड में बजाया जाता है.

Fact No. 18: हमारा देश संविधान बनने से पहले ब्रिटिश सरकार बनाये गये एक्ट 1935 को मानता था.

Fact No. 19: संविधान के अनुसार – भारत रत्न, पद्म भूषण और कीति चक्र पुरस्कार गणतंत्र दिवस के दिन ही वितरित किये जाते है.

Fact No. 20: संविधान के अनुसार – स्वतंत्रता दिवस पर देश के लिए संबोधन प्रधानमंत्री द्वारा किया जाता है वही गणतंत्र दिवस पर देश के लिए सम्बोधन राष्ट्रपति करता है.

Fact No. 21: भारतीय संविधान द्वारा देश के नागरिको को 6 मौलिक अधिकार दिए गये है.
भारतीय संविधान के विकास का संक्षिप्त इतिहास

1757 ई. की प्लास की लड़ाई और 1764 ई. बक्सर के युद्ध को अंग्रेजों द्वारा जीत लिए जाने के बाद बंगाल पर ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी ने शासन का शिकंजा कसा. इसी शासन को अपने अनुकूल बनाए रखने के लिए अंग्रेजों ने समय-समय पर कई एक्ट पारित किए, जो भारतीय संविधान के विकास की सीढ़ियां बनीं. 

1. 1773 ई. का रेग्‍यूलेटिंग एक्ट: इस एक्ट के अंतर्गत कलकत्ता प्रेसिडेंसी में एक ऐसी सरकार स्थापित की गई, जिसमें गवर्नर जनरल और उसकी परिषद के चार सदस्य थे, जो अपनी सत्ता का उपयोग संयुक्त रूप से करते थे. इसकी मुख्य बातें इस प्रकार हैं - 
(i) कंपनी के शासन पर संसदीय नियंत्रण स्थापित किया गया. 
(ii) बंगाल के गवर्नर को तीनों प्रेसिडेंसियों का जनरल नियुक्त किया गया.
(iii) कलकत्ता में एक सुप्रीम कोर्ट की स्थापना की गई.

2. 1784 ई. का पिट्स इंडिया एक्ट: इस एक्ट के द्वारा दोहरे प्रशासन का प्रारंभ हुआ- 
(i) कोर्ट ऑफ़ डायरेक्टर्स - व्यापारिक मामलों के लिए 
(ii) बोर्ड ऑफ़ कंट्रोलर - राजनीतिक मामलों के लिए.

3. 1793 ई. का चार्टर अधिनियम: इसके द्वारा नियंत्रण बोर्ड के सदस्यों तथा कर्मचारियों के वेतन आदि को भारतीय राजस्व में से देने की व्‍यवस्‍था की गई.

4. 1813 ई. का चार्टर अधिनियम: इसके द्वारा (i)कंपनी के अधिकार-पत्र को 20 सालों के लिए बढ़ा दिया गया. 
(ii) कंपनी के भारत के साथ व्यापर करने के एकाधिकार को छीन लिया गया. लेकिन उसे चीन के साथ व्यापर और पूर्वी देशों के साथ चाय के व्यापार के संबंध में 20 सालों के लिए एकाधिकार प्राप्त रहा.
(iii)कुछ सीमाओं के अधीन सभी ब्रिटिश नागरिकों के लिए भारत के साथ व्यापार खोल दिया गया.

5. 1833 ई. का चार्टर अधिनियम: इसके द्वारा (i)कंपनी के व्यापारिक अधिकार पूर्णतः समाप्त कर दिए गए. 
(ii) अब कंपनी का कार्य ब्रिटिश सरकार की ओर से मात्र भारत का शासन करना रह गया. 
(iii) बंगालग के गवर्नर जरनल को भारत का गवर्नर जनरल कहा जाने लगा. 
(iv) भारतीय कानूनों का वर्गीकरण किया गया तथा इस कार्य के लिए विधि आयोग की नियुक्ति की व्यवस्था की गई.

6. 1853 ई. का चार्टर अधिनियम: इस अधिनियम के द्वारा सेवाओं में नामजदगी का सिद्धांत समाप्त कर कंपनी के महत्वपूर्ण पदों को प्रतियोगी परीक्षाओं के आधार पर भरने की व्यवस्था की गई.

7. 1858 ई. का चार्टर अधिनियम: (i) भारत का शासन कंपनी से लेकर ब्रिटिश क्राउन के हाथों सौंपा गया. 
(ii) भारत में मंत्री-पद की व्यवस्था की गई. 
(iii)15 सदस्यों की भारत-परिषद का सृजन हुआ. 
(iv)भारतीय मामलों पर ब्रिटिश संसद का सीधा नियंत्रण स्थापित किया गया.

8. 1861 ई. का भारत शासन अधिनियम: गवर्नर जनरल की कार्यकारिणी परिषद का विस्तार किया गया, 
(ii) विभागीय प्रणाली का प्रारंभ हुआ, 
(iii) गवर्नर जनरल को पहली बार अध्यादेश जारी करने की शक्ति प्रदान की गई. 
(iv) गवर्नर जरनल को बंगाल, उत्तर-पश्चिमी सीमा प्रांत और पंजाब में विधान परिषद स्थापित करने की शक्ति प्रदान की गई.

9. 1892 ई. का भारत शासन अधिनियम: (i)अप्रत्यक्ष चुनाव-प्रणाली की शुरुआत हुई, 
(ii) इसके द्वारा राजस्व एवं व्यय अथवा बजट पर बहस करने तथा कार्यकारिणी से प्रश्न पूछने की शक्ति दी गई.

10. 1909 ई० का भारत शासन अधिनियम [मार्ले -मिंटो सुधार] - 
(i) पहली बार मुस्लिम समुदाय के लिए पृथक प्रतिनिधित्व का उपबंध किया गया. 
(ii) भारतीयों को भारत सचिव एवं गवर्नर जनरल की कार्यकारिणी परिषदों में नियुक्ति की गई. 
(iii) केंद्रीय और प्रांतीय विधान-परिषदों को पहली बार बजट पर वाद-विवाद करने, सार्वजनिक हित के विषयों पर प्रस्ताव पेश करने, पूरक प्रश्न पूछने और मत देने का अधिकार मिला. 
(iv) प्रांतीय विधान परिषदों की संख्या में वृद्धि की गई।
11. 1919 ई० का भारत शासन अधिनियम [मांटेग्यू चेम्सफोर्ड सुधार] - 
(i) केंद्र में द्विसदनात्मक विधायिका की स्थापना की गई- प्रथम राज्य परिषद तथा दूसरी केंद्रीय विधान सभा. राज्य परिषद के सदस्यों की संख्या 60 थी; जिसमें 34 निर्वाचित होते थे और उनका कार्यकाल 5 वर्षों का होता था. केंद्रीय विधान सभा के सदस्यों की संख्या 145 थी, जिनमें 104 निवार्चित तथा 41 मनोनीत होते थे. इनका कार्यकाल 3 वर्षों का था. दोनों सदनों के अधिकार समान थे. इनमें सिर्फ एक अंतर था कि बजट पर स्वीकृति प्रदान करने का अधिकार निचले सदन को था.

(ii) प्रांतो में द्वैध शासन प्रणाली का प्रवर्तन किया गया. इस योजना के अनुसार प्रांतीय विषयों को दो उपवर्गों में विभाजित किया गया- आरक्षित तथा हस्तांतरित. आरक्षित विषय थे - वित्त, भूमिकर, अकाल सहायता, न्याय, पुलिस, पेंशन, आपराधिक जातियां, छापाखाना, समाचार पत्र, सिंचाई, जलमार्ग, खान, कारखाना, बिजली, गैस, व्यालर, श्रमिक कल्याण, औघोगिक विवाद, मोटरगाड़ियां, छोटे बंदरगाह और सार्वजनिक सेवाएं आदि.

हस्तांतरित विषय -
(i) शिक्षा, पुस्तकालय, संग्रहालय, स्थानीय स्वायत्त शासन, चिकित्सा सहायता. 
(ii) सार्वजनिक निर्माण विभाग, आबकारी, उघोग, तौल तथा माप, सार्वजनिक मनोरंजन पर नियंत्रण, धार्मिक तथा अग्रहार दान आदि. 
(iii) आरक्षित विषय का प्रशासन गवर्नर अपनी कार्यकारी परिषद के माध्यम से करता था; जबकि हस्तांतरित विषय का प्रशासन प्रांतीय विधान मंडल के प्रति उत्तरदायी भारतीय मंत्रियों के द्वारा किया जाता था.
(iv) द्वैध शासन प्रणाली को 1935 ई० के एक्ट के द्वारा समाप्त कर दिया गया. 
(v) भारत सचिव को अधिकार दिया गया कि वह भारत में महालेखा परीक्षक की नियुक्ति कर सकता है. 
(vi) इस अधिनियम ने भारत में एक लोक सेवा आयोग के गठन का प्रावधान किया. 

12. 1935 ई० का भारत शासन अधिनियम: 1935 ई० के अधिनियम में 451 धाराएं और 15 परिशिष्‍ट थे. इस अधिनियम की मुख्य विशेषताएं इस प्रकार हैं:
(i) अखिल भारतीय संघ: यह संघ 11 ब्रिटिश प्रांतो, 6 चीफ कमिश्नर के क्षेत्रों और उन देशी रियासतों से मिलकर बनना था, जो स्वेच्छा से संघ में सम्मलित हों. प्रांतों के लिए संघ में सम्मिलित होना अनिवार्य था, किंतु देशी रियासतों के लिय यह एच्छिक था. देशी रियासतें संघ में सम्मिलित नहीं हुईं और प्रस्तावित संघ की स्थापना संबंधी घोषणा-पत्र जारी करने का अवसर ही नहीं आया. 
(ii) प्रांतीय स्वायत्ता: इस अधिनियम के द्वारा प्रांतो में द्वैध शासन व्यवस्था का अंत कर उन्हें एक स्‍वतंत्र और स्वशासित संवैधानिक आधार प्रदान किया गया. 
(iii) केंद्र में द्वैध शासन की स्थापना: कुछ संघीय विषयों [सुरक्षा, वैदेशिक संबंध, धार्मिक मामलें] को गवर्नर जनरल के हाथों में सुरक्षित रखा गया. अन्य संघीय विषयों की व्यवस्था के लिए गवर्नर- जनरल को सहायता एवं परामर्श देने हेतु मंत्रिमंडल की व्यवस्था की गई, जो मंत्रिमंडल व्यवस्थापिका के प्रति उत्तरदायी था. 
(iv) संघीय न्‍यायालय की व्यवस्था: इसका अधिकार क्षेत्र प्रांतों तथा रियासतों तक विस्तृत था. इस न्यायलय में एक मुख्य न्यायाधीश तथा दो अन्य न्यायाधीशों की व्यवस्था की गई. न्यायालय से संबंधित अंतिम शक्ति प्रिवी काउंसिल [लंदन] को प्राप्त थी. 
(v) ब्रिटिश संसद की सर्वोच्चता: इस अधिनियम में किसी भी प्रकार के परिवर्तन का अधिकार ब्रिटिश संसद के पास था. प्रांतीय विधान मंडल और संघीय व्यवस्थापिका: इसमें किसी प्रकार का परिवर्तन नहीं कर सकते थे. 
(vi) भारत परिषद का अंत : इस अधिनियम के द्वारा भारत परिषद का अंत कर दिया गया.
(vii) सांप्रदायिक निर्वाचन पद्धति का विस्तार: संघीय तथा प्रांतीय व्यवस्थापिकाओं में विभिन्न सम्प्रदायों को प्रतिनिधित्व देने के लिए सांप्रदायिक निर्वाचन पद्धति को जारी रखा गया और उसका विस्तार आंग्ल भारतीयों - भारतीय ईसाइयों, यूरोपियनों और हरिजनों के लिए भी किया गया. 
(viii) इस अधिनियम में प्रस्तावना का अभाव था. 
(xi) इसके द्वारा बर्मा को भारत से अलग कर दिया गया, अदन को इंग्लैंड के औपनिवेशिक कार्यालय के अधीन कर दिया गया और बरार को मध्य प्रांत में शामिल कर लिया गया.
13. 1947 ई० का भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम: ब्रिटिश संसद में 4 जुलाई, 1947 ई० को भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम प्रस्तावित किया गया, जो 18 जुलाई, 1947 ई० को स्वीकृत हो गया. इस अधिनियम में 20 धाराएं थीं. अधिनियम के प्रमुख प्रावधान निम्न हैं -
(i) दो अधिराज्यों की स्थापना: 15 अगस्त, 1947 ई० को भारत एवं पाकिस्तान नामक दो अधिराज्य बना दिए जाएंगें, और उनको ब्रिटिश सरकार सत्ता सौंप देगी. सत्ता का उत्तरदायित्व दोनों अधिराज्यों की संविधान सभा को सौंपा जाएगा. 
(ii) भारत एवं पाकिस्तान दोनों अधिराज्यों में एक-एक गवर्नर जनरल होंगे, जिनकी नियुक्ति उनके मंत्रिमंडल की सलाह से की जाएगी. 
(iii) संविधान सभा का विधान मंडल के रूप में कार्य करना- जब तक संविधान सभाएं संविधान का निर्माण नई कर लेतीं, तब तक वह विधान मंडल के रूप में कार्य करती रहेंगीं. 
(iv) भारत-मंत्री के पद समाप्त कर दिए जाएंगें. 
(v) 1935 ई० के भारतीय शासन अधिनियम द्वारा शासन जब तक संविधान सभा द्वारा नया संविधान बनाकर तैयार नहीं किया जाता है; तब तक उस समय 1935 ई० के भारतीय शासन अधिनियम द्वारा ही शासन होगा. 
(vi) देशी रियासतों पर ब्रिटेन की सर्वोपरिता का अंत कर दिया गया. उनको भारत या पाकिस्तान किसी भी अधिराज्य में सम्मलित होने और अपने भावी संबंधो का निश्चय करने की स्वतंत्रता प्रदान की गई.
26 नवंबर, 1949 और 26 जनवरी, 1950। भारत के संविधान के इतिहास की ये दो अहम तारीखें हैं। 26 नवंबर, 1949 को हमारा संविधान अंगीकार किया गया तो 26 जनवरी, 1950 को इसे लागू किया गया। संविधान को जिस तारीख को अंगीकार किया गया यानी 26 नवंबर, उस दिन को संविधान दिवस के तौर पर मनाया जाता है और 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस।
संविधान के बारे में-
अंग्रेजों ने भारत को स्वतंत्रता देने पर गंभीरता से विचार करना शुरू कर दिया था। अंग्रेजों ने भारतीय संविधान का प्रारूप तैयार करने के लिए व संविधान सभा स्थापित करने की संभावना पर चर्चा करने के लिए, ब्रिटिश सरकार और विभिन्न भारतीय राज्यों के प्रतिनिधियों से एक साथ मिलने  योजना के कारण, भारत में एक कैबिनेट मिशन भेजा गया था। यहाँ पर भारत के संविधान के बारे में कुछ कम ज्ञात तथ्य दिए गए हैं।

1946: संविधान सभा का गठन कैबिनेट मिशन योजना के तहत किया गया था। डॉ राजेंद्र प्रसाद इसके स्थायी अध्यक्ष और डॉ. बी. आर. अम्बेडकर को प्रारूप समिति का अध्यक्ष नियुक्त किया गया था। प्रारूप रिपोर्ट तैयार करने के लिए 13 समितियों की स्थापना की गई थी, जिनका गठन संविधान पूरा होने के बाद किया गया था।

संविधान सभा में 389 सदस्य थे, जिसमें प्रारंभिक विश्लेषित विवरण में – प्रांत के 292 प्रतिनिधि, देशी रियासतों के 93 प्रतिनिधि, मुख्य आयुक्त क्षेत्रों के 3 प्रतिनिधि तथा बलूचिस्तान का 1 प्रतिनिधि शामिल था। बाद में मुस्लिम लीग की संख्या कम होने के कारण 299 प्रतिनिधि रह गए थे।

जनवरी 1948: भारतीय संविधान का पहला प्रारूप विचार-विमर्श के लिए प्रस्तुत किया गया था।

4 नवंबर 1948: 32 दिनों तक विचार-विमर्श जारी रहा था। इस अवधि के दौरान, 7635 संशोधन प्रस्तावित किए गए थे और उनमें से 2473 पर विस्तारपूर्वक चर्चा की गई थी। संविधान निर्माण की प्रक्रिया में कुल 2 वर्ष, 11 महीने और 18 दिन लगे थे।

24 जनवरी 1950: संविधान सभा के 284 सदस्यों द्वारा भारत के संविधान पर हस्ताक्षर किए गए थे, जिनमें 15 महिलाएं भी शामिल थीं।
26 जनवरी 1950: इस दिन भारत का संविधान लागू हुआ था।

भारत के मूल संविधान को हिंदी और अंग्रेजी में प्रेम बिहारी नारायण रायजादा द्वारा लिखा गया था। संविधान के प्रत्येक पृष्ठ को जटिल लेख और इटैलिक धारा प्रवाह में लिखा गया था। पश्चिम बंगाल के शांतिनिकेतन के कलाकारों ने प्रत्येक पृष्ठ के प्रस्तुतीकरण पर भी कार्य किया था। इसकी अंग्रेजी और हिंदी की मूल प्रतियाँ भारतीय संसद पुस्तकालय में, हीलियम से डिजाइन किए गए विशेष पात्र में संरक्षित हैं।

भारत का संविधान दुनिया का सबसे दीर्घ और सबसे विस्तृत संविधान है और इसमें 25 भाग, 448 अनुच्छेद और 12 अनुसूचियाँ हैं तथा मूल संविधान में 395 अनुच्छेद और 9 अनुसूचियाँ सम्मिलित हैं।

भारत के संविधान को संस्कृति, धर्म और भूगोलिक की दृष्टिकोण से सबसे अच्छा लिखित संविधान माना जाता है।
लोकसभा_में_पास_हुआ_मोटर_वाहन_संशोधन_विधेयक_2019

लोकसभा ने 23 जुलाई 2019 को मोटर वाहन (संशोधन) विधेयक-2019 को मंजूरी दे दी. इस विधेयक में सड़क सुरक्षा को लेकर बहुत सख्त नियम लागू किए गए हैं. विधेयक में ड्राइविंग के दौरान छोटी सी गलती पर भी भारी जुर्माना लगेगा.

इस विधेयक के तहत अब बिना लाइसेंस गाड़ी चलाना, किशोर नाबालिगों द्वारा वाहन चलाना, वाहन खतरनाक ढंग से चलाना, शराब पीकर गाड़ी चलाना, गाड़ी निर्धारित सीमा से तेज चलाना और अधिक माल लादकर गाड़ी चलाने जैसे नियमों के उल्लंघन पर कड़ा सजा का प्रावधान किया गया है।

केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने इस विधेयक की आवश्यकता पर ज़ोर देते हुए संसद में कहे कि विधेयक के माध्यम से राज्यों के हक़ में कोई दखल देने का मन नहीं है, इसके प्रावधानों को लागू करना राज्यों के मन पर निर्भर है. केंद्र की पूरी कोशिश राज्यों से सहयोग करने, परिवहन व्यवस्था में बदलाव लाने तथा दुर्घटनाओं को कम करने की है.

मोटर वाहन (संशोधन)
विधेयक के मुख्य बिंदु
:

• मोटर वाहन संशोधन विधेयक-2019 के अनुसार, तेज़ गति से गाड़ी चलाने पर जुर्माना 500 रुपये से बढ़ाकर 5000 रुपये कर दिया गया है.

• सीट बेल्ट और हेलमेट न पहनने पर जुर्माना 100 रुपये से बढ़ाकर 1000 रुपये कर दिया गया है.

• मोबाइल फ़ोन पर बात करते हुए गाड़ी चलाने पर जुर्माना 1000 रु से बढ़ाकर 5000 रु कर दिया गया है.

• शराब पीकर गाड़ी चलाने पर जुर्माना 2000 रुपए से बढ़ाकर 10 हज़ार रुपए कर दिया गया है.

• गाड़ी बिना लाइसेंस के चलाने पर जुर्माना 500 रु से बढ़ाकर 5000 रुपए कर दिया गया है.

• गाड़ी बिना इंश्योरेंस के चलाने पर जुर्माना 1000 रु से बढ़ाकर 2000 रु कर दिया गया है.

• विधेयक के तहत सड़क दुर्घटना में यदि किसी की भी मौत होती है तो न्यूनतम मुआवज़ा 25 हज़ार से बढ़ाकर अब दो लाख रुपए होगा.

• सड़क दुर्घटना में किसी को गंभीर रूप से घायल करने पर न्यूनतम मुआवज़ा 12,500 से बढ़कर अब 50,000 होगा.

• यदि नाबालिग गाड़ी चलाते हुए पकड़ा जाता है तो उसके माता-पिता और गाड़ी के मालिक को दोषी माना जाएगा. इस विधेयक के तहत गाड़ी का रजिस्ट्रेशन रद्द कर दिया जाएगा. यदि नाबालिग ड्राइवर की गाड़ी से किसी की मौत हो जाती है तो उसके माता-पिता को सज़ा होगी.

• इस विधेयक के तहत अब ड्राइविंग लाइसेंस बनाने या वाहन का रजिस्ट्रेशन करवाने के लिए आधार कार्ड ज़रूरी होगा.

एक रिपोर्ट के अनुसार, भारत में प्रत्येक दिन औसतन 400 लोगों की मौत सड़क हादसे में होती है. हादसों में 50 प्रतिशत मरने वालों की उम्र 14 से 35 साल के बीच होती है. बहुत से लोगों की मौत सड़क हादसे में तेज़ रफ़्तार की वजह से होते हैं.
Join us @indianconstitution
❀--❦-----------☆◕‿◕☆-----------❦--❀
💁‍♂जानें आर्टिकल 370 के हटने से जम्मू और कश्मीर में क्या-क्या बदल जायेगा?

💁‍♂आर्टिकल 370 का संक्षिप्त इतिहास

भारत को आजादी मिलने के बाद 20 अक्टूबर, 1947 को पाकिस्तान समर्थित ‘आजाद कश्मीर सेना’ ने पाकिस्तानी सेना के साथ मिलकर कश्मीर पर आक्रमण कर दिया और काफी हिस्सा हथिया लिया था. इस हिस्से को आज पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (POK) कहा जाता है.

इस परिस्थिति में महाराजा हरि सिंह ने जम्मू&कश्मीर की रक्षा के लिए उस समय कश्मीर के प्रधानमंत्री शेख़ अब्दुल्ला की सहमति से जवाहर लाल नेहरु के साथ मिलकर 26 अक्टूबर 1947 को भारत के साथ जम्मू & कश्मीर के अस्थायी विलय की घोषणा कर दी और "Instruments of Accession of Jammu & Kashmir to India" पर अपने हस्ताक्षर कर दिये थे. इस नये समझौते के तहत जम्मू & कश्मीर ने भारत के साथ सिर्फ तीन विषयों: रक्षा, विदेशी मामले और संचार को भारत के हवाले कर दिया था.

समझौते पर हस्ताक्षर करने के बाद भारत सरकार ने वादा किया कि “'इस राज्य के लोग अपने स्वयं की संविधान सभा के माध्यम से राज्य के आंतरिक संविधान का निर्माण करेंगे और जब तक राज्य की संविधान सभा शासन व्यवस्था और अधिकार क्षेत्र की सीमा का निर्धारण नहीं कर लेती हैं तब तक भारत का संविधान केवल राज्य के बारे में एक अंतरिम व्यवस्था प्रदान कर सकता है.

संविधान सभा के अध्यक्ष _डॉ. भीमराव आंबेडकर कश्मीर को विशेष राज्य का दर्जा देने के पक्ष में नहीं थे._ मगर पंडित नेहरू के कहने पर गोपाल स्वामी आयंगर ने अनुच्छेद 370 का प्रस्ताव संविधान सभा में प्रस्तुत किया था और यह 17 नवंबर 1952 से लागू है.

आर्टिकल 370 के हटने से निम्न परिवर्तन होंगे;

1. आर्टिकल 370 के अनुसार रक्षा, विदेशी मामले और संचार को छोड़कर बाकी सभी कानून को लागू करने के लिए केंद्र सरकार को राज्य सरकार से मंजूरी लेनी पड़ती है लेकिन आर्टिकल 370 के हटते ही कोई भी कानून राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद लागू हो जायेगा.

2. आर्टिकल 370 के कारण जम्मू & कश्मीर का अपना संविधान है और इसका प्रशासन इसी के अनुसार चलाया जाता है ना कि भारत के संविधान के अनुसार.
यदि आर्टिकल 370 को हटा दिया जाता है तो कश्मीर का प्रशासन भी भारत के संविधान के अनुसार चलेगा.

3. जम्मू & कश्मीर के पास 2 झन्डे हैं. एक कश्मीर का अपना राष्ट्रीय झंडा है और भारत का तिरंगा झंडा भी यहाँ का राष्ट्रीय ध्वज है.
यदि आर्टिकल 370 को हटा दिया जाता है तो कश्मीर का झंडा ख़त्म हो जायेगा.

4. देश के दूसरे राज्यों के नागरिक इस राज्य में किसी भी तरीके की संपत्ति नहीं खरीद सकते हैं. अर्थात इस राज्य में संपत्ति का मूलभूत अधिकार अभी भी लागू है लेकिन _आर्टिकल 370 के हटने के साथ ही अन्य भारतीय लोगों को कश्मीर में जमीन और अन्य संपत्तियां खरीदने की अनुमति मिल जाएगी और रहने/बसने का अधिकार भी मिल जायेगा.

5. कश्मीर के लोगों को 2 प्रकार की नागरिकता मिली हुई है; जो कि ख़त्म हो जाएगी और सबको केवल भारत का नागरिक माना जायेगा.

6. अभी यदि कोई कश्मीरी महिला किसी भारतीय से शादी कर लेती है तो उसकी कश्मीरी नागरिकता ख़त्म हो जाती है लेकिन आर्टिकल 370 के हटने के बाद ऐसा नहीं होगा क्योंकि दोनों ही भारत के नागरिक हो जायेंगे.

7. यदि कोई पाकिस्तानी लड़का किसी कश्मीरी लड़की से शादी कर लेता है तो उसको भारतीय नागरिकता भी मिल जाती है लेकिन आर्टिकल 370 के हटते ही कोई भी पाकिस्तानी शादी करके मान्यता प्राप्त नहीं कर पायेगा.

8. भारतीय संविधान के भाग 4 (राज्य के नीति निर्देशक तत्व) और भाग 4 A (मूल कर्तव्य) इस राज्य पर लागू नहीं होते हैं. अर्थात
आर्टिकल 370 के हटते ही कश्मीर के लोगों को भारत के संविधान में लिखे गये मूल कर्तव्यों को मानना अनिवार्य हो जायेगा और उनको महिलाओं की अस्मिता, गायों की रक्षा करनी पड़ेगी.

9. जम्मू एंड कश्मीर में भारत के राष्ट्रीय प्रतीकों (राष्ट्रगान, राष्ट्रीय ध्वज इत्यादि) का अपमान करना अपराध की श्रेणी में आ जायेगा.

10. जम्मू कश्मीर में आर्थिक आपातकाल (अनुच्छेद 360) लगाया जा सकेगा.

11. सम्पूर्ण भारत में राष्ट्रीय आपातकाल लगते ही यह पूरे कश्मीर में भी लागू हो जायेगा. राष्ट्रपति के विशेष आदेश की जरूरत नहीं पड़ेगी.

12. सूचना का अधिकार और शिक्षा का अधिकार जैसे कानून कश्मीर में भी लागू होने लगेंगे.
13. राज्य सरकार की नौकरियों में अन्य राज्यों के लोग भी सेलेक्ट हो सकेंगे.

क्या 370 को हटाना संभव है?

भाजपा नेता सुब्रमण्यम स्वामी कहते हैं कि अनुच्छेद 370 हटाने के लिए संसद में कानून बनाने की जरूरत नहीं है. राष्ट्रपति एक अधिसूचना जारी कर इस धारा को खत्म कर सकते हैं.
अप्रैल 2018 में सुप्रीम कोर्ट ने अनुच्छेद 370 को लेकर कहा था कि सालों से बने रहने के चलते अब यह धारा एक स्थायी प्रावधान बन चुकी है, जिससे इसको खत्म करना असंभव हो गया है. हालाँकि अब सुप्रीम कोर्ट इस मुद्दे पर सुनवाई के लिए तैयार है.

सुप्रीम कोर्ट जिस याचिका पर सुनवाई करेगा, उसमें तर्क दिया गया है कि यह धारा संविधान के भाग 21 के तहत एक प्रावधान है. इसके शीर्षक में ही अस्थायी प्रावधान होना लिखा था. यह स्थायी नहीं है.
ज्ञातव्य है कि जम्मू और कश्मीर उच्च न्यायालय भी आर्टिकल 370 को स्थायी मान चुका है.

ध्यान रहे कि भारतीय संविधान के अनेक कानून जम्मू-कश्मीर में लागू हो गए हैं और अब संविधान के *अनुच्छेद-356 के तहत कश्मीर में 6 महीने राज्यपाल शासन के बाद राष्ट्रपति शासन भी लगाया जा सकता है.* सीएजी, चुनाव आयोग समेत कई संवैधानिक संस्थाओं का जम्मू-कश्मीर में बराबर का अधिकार है.

अनुच्छेद 370 हटाने की अड़चनें क्या हैं?

नेशनल कॉन्फ्रेंस नेता उमर अब्दुल्ला और महबूबा मुफ्ती का मानना है कि अनुच्छेद 370 ने ही जम्मू-कश्मीर और शेष भारत को जोड़ रखा है. यह दोनों के बीच एकमात्र संवैधानिक कड़ी है.
इस बात की भी संभावना है कि आर्टिकल 370 के हटते ही अलगाववादी जनमत संग्रह के मुद्दे को तूल देंगे और जम्मू-कश्मीर विवाद के अंतरराष्ट्रीयकरण का प्रयास करेंगे जिससे भारत सरकार के ऊपर इंटरनेशनल प्रेशर बढेगा.

असल में यदि राजनीतिक इच्छा शक्ति हो तो इस मुद्दे का समाधान निकाला जा सकता है लेकिन वर्तमान सरकार के साथ अन्य सरकारें भी इस मुद्दे को लटकाकर अपने राजनीतिक हितों को साधना चाहती हैं.

जम्मू & कश्मीर में आतंक की मुख्य वजह वहां के कुछ अलगाववादी नेताओं के स्वार्थी हित हैं. ये अलगाववादी नेता पाकिस्तान के इशारों पर जम्मू & कश्मीर के गरीब लड़कों को भडकाते हैं और आतंक का रास्ता चुनने को मजबूर करते हैं हालाँकि ये नेता अपने लड़कों को विदेशों में पढ़ाते हैं.

अब समय की जरूरत यह है कि कश्मीर के लोग इन अलगाववादी नेताओं के स्वार्थी हितों को समझें और इस प्रदेश में मौजूद पर्यटन की संभावनाओ को बढ़ावा देकर इस प्रदेश को सही मायने में भारत का स्विट्ज़रलैंड बनायें.
┄┅════❁❁════┅​​​​​​​​​​​
एक रिट अथवा याचिका का अर्थ है –आदेश, यानि वह कुछ भी जिसे एक अधिकार के तहत जारी किया जाता है वह याचिका है, और इसे रिट के रूप में जाना जाता है। अनुच्छेद 32 और अनुच्छेद 226 के तहत भारतीय संविधान के तीसरे भाग में प्रदत्त मौलिक अधिकारों को लागू करने के लिए भारत का संविधान उच्चतम न्यायालय और उच्च न्यायालयों को अधिकार प्रदान करता है।

याचिकायें (रिट) के पांच प्रकार की होती हैं –

बन्दी प्रत्यक्षीकरण,
परमादेश,
उत्प्रेषण,
निषेधाज्ञा
अधिकार पृच्छा,
पांच प्रकार की याचिकाओं (रिट) का वर्णन निम्नवत् है:

1- बन्दी प्रत्यक्षीकरण (Habeas Corpus)

हेबियस कॉर्पस (बंदी प्रत्यक्षीकरण) एक लैटिन शब्द है जिसका अर्थ है कि "आपके पास शरीर होना चाहिए"। रिट एक अदालत के समक्ष एक ऐसे आदमी को पेश करने के लिए जारी की जाती है जिसे हिरासत में या जेल में रखा गया है और हिरासत में लेने के 24 घंटे के भीतर उसे मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश नहीं किया गया है और यदि यह पाया जाता है कि हिरासत में अवैध तरीके से रखा गया है तो कोर्ट ऐसे व्यक्ति को रिहा करा देती है। रिट का उद्देश्य अपराधी को दंडित करने का नहीं होता लेकिन अवैध तरीके से हिरासत में लिए गये व्यक्ति को रिहा कराना होता है।

हालांकि, अनुच्छेद 21 (जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का संरक्षण) को आपातकाल की घोषणा के दौरान भी निलंबित नहीं किया जा सकता है। इसलिए, बंदी प्रत्यक्षीकरण एक व्यक्ति की व्यक्तिगत स्वतंत्रता की रक्षा करने के लिए एक बहुत ही मूल्यवान रिट बन जाती है। सुप्रीम कोर्ट केवल मौलिक अधिकारों के उल्लंघन के मामले में ही राज्य के खिलाफ बंदी प्रत्यक्षीकरण की रिट जारी कर सकता है जबकि उच्च न्यायालय अवैध रूप से या मनमाने ढंग से हिरासत में लिए गये किसी भी आम नागिरक के खिलाफ भी यह जारी कर सकता है। बंदी प्रत्यक्षीकरण की रिट हिरासत में लिया गये व्यक्ति द्वारा स्वंय या उसकी ओर से कोई भी व्यक्ति दायर कर सकता है।

सुनील बत्रा II बनाम दिल्ली प्रशासन का मामला: सुप्रीम कोर्ट के एक न्यायाधीश को एक अपराधी द्वारा एक पत्र लिखा गया था जिसे एक रिट को याचिका के रूप में लिया गया था। न्यायालय ने इस रिट को राज्य की दंडात्मक सुविधाओं की उपेक्षा के लिए नियोजित किया था। यह रिट तब जारी की गयी थी जब जेल के साथियों को कानूनी सहायता प्रदान करने और उनका साक्षात्कार करने के लिए कानून के छात्रों पर प्रतिबंध लगाया गया था।

2- परमादेश (Mandamus)

Mandamus (परमादेश) एक लैटिन शब्द है जिसका अर्थ है "हमारा आदेश है।" यह कानूनी रूप से कार्य करने और गैर कानूनी कार्य के अंजाम से बचने के लिए, एक आदेश के रूप में एक न्यायिक उपाय है। जहां A के पास कानूनी अधिकार होते हैं जो B पर कुछ कानूनी बाध्यताएं डालता है, B को अपने कानूनी कर्तव्यों का पालने करने के लिए A परमादेश रिट की मांग कर सकता है। इस रिट को जारी करने का आदेश उच्चतम न्यायालय या उच्च न्यायालय द्वारा तब किया जाता है जब सरकार, अदालत, निगम या अधिकरण या लोक प्राधिकरण सार्वजनिक या वैधानिक कर्तव्य तो करते हैं लेकिन उन्हें निभा पाने में विफल रहते हैं।

सुप्रीम कोर्ट एक व्यक्ति के मौलिक अधिकार को लागू करने के लिए एक परमादेश तब जारी कर सकता है जब कुछ सरकारी आदेशों या अधिनियमों पर इसका उल्लंघन करने का आरोप लगाये जाते हैं। एक अधिकारी को अपने संवैधानिक और कानूनी शक्तियों का प्रयोग करने के लिए, कर्तव्यों का पालन नहीं करने पर संविधान द्वारा किसी भी व्यक्ति के लिए निर्धारित कर्तव्यों के निर्वहन करने हेतु मजबूर करने के लिए, अपनी अधिकारिता का प्रयोग करने के लिए और सरकार को किसी भी अंसवैधानिक कानून लागू नहीं करने के सरकारी आदेश की न्यायिक मजबूरी के लिए उच्च न्यायालय सीधे अथवा प्रत्यत्क्ष तरीके से रिट जारी कर सकते हैं।

भारत सरकार बनाम उन्नी कृष्णन मामले में यह कहा गया कि सहायता और संबद्धता के सवाल की परवाह किए बगैर एक निजी चिकित्सा/ इंजीनियरिंग कॉलेज अदालत की रिट क्षेत्राधिकार के भीतर आता है।

3- उत्प्रेषण (Certiorari)

Certiorari (उत्प्रेषण) एक लैटिन शब्द है जिसका अर्थ 'सूचित करने के लिए' है। 'उत्प्रेषण' को एक न्यायिक आदेश के रूप में परिभाषित किया जा सकता है जो आचरण से संबंधित होता है और कानूनी कार्यवाही में उपयोग किया जाता है। इसे निगम जैसे संवैधानिक और सांविधिक निकायों, कंपनियों और सहकारी समितियों जैसे निकायों और सहकारी समितियों तथा निजी निकायों तथा व्यक्तियों के खिलाफ जारी अदालत द्वारा प्रमाणित और कानून के अनुसार किसी भी कार्रवाई के रिकार्ड की आवश्यकता होती है।

ऐसे विभिन्न प्रकार के आधार हैं जिसके आधार पर उत्प्रेषण की रिट जारी की जाती है:

1) अधिकार क्षेत्र का अभाव

2) न्याय क्षेत्र का दुरूपयोग

3) अधिकार क्षेत्र का दुरुपयोग

4) समान न्याय के सिद्धांतों का उल्लंघन।

सैय्यद याकूब बनाम राधाकृष्णन मामले में, यह
कहा गया कि उत्प्रेषक्ष की रिट जारी करना उच्च न्यायालय के अधिकार क्षेत्र का एक पर्यवेक्षी क्षेत्राधिकार है और इस पर अदालती कार्यवाही एक अपीलीय अदालत के रूप में कार्य करने की पात्र नहीं है। कानून की एक त्रुटि जो स्पष्ट रूप से द्स्तावेजों में अंकित है को तो रिट द्वारा सुधारा जा सकता है लेकिन तथ्य की त्रुटि को सहीं नहीं किया जा सकता है। हालांकि, यदि एक तथ्य का निष्कर्ष 'कोई सबूत नहीं है' पर आधारित है तो इसे कानून की एक त्रुटि के रूप मे माना जाएगा जिसे उत्प्रेषण द्वारा ठीक किया जा सकता है।

4- निषेधाज्ञा (Prohibition)

निषेधाज्ञा का अर्थ है "मना करना या बंद करना" और आम बोलचाल में इसे 'स्टे आर्डर' के रूप में जाना जाता है। जब कोई निचली अदालत या एक अर्ध न्यायिक निकाय एक विशेष मामले में अपने अधिकार क्षेत्र में प्रद्त्त अधिकारों को अतिक्रमित कर किसी भी मुक़दमें की सुनवाई करती है तो सुप्रीम कोर्ट या अन्य कोई भी उच्च न्यायालय द्वारा रिट जारी की जाती है। भारत में, निषेधाज्ञा को मनमाने प्रशासनिक कार्यों से व्यक्ति की रक्षा के लिए जारी किया जाता है।

5- अधिकार पृच्छा (Quo warranto)

Quo warranto एक लैटिन शब्द है जिसका अर्थ है "किस वारंट द्वारा"। जब न्यायालय को लगता है कि कोई व्यक्ति ऐसे पद पर नियुक्त हो गया है जिसका वह हकदार नहीं है तब न्यायालय इस (अधिकार पृच्छा) को जारी कर सकता है और व्यक्ति को उस पद पर कार्य करने से रोक देता है। संविधान द्वारा निर्मित कार्यालयों के खिलाफ इसे जारी किया जा सकता है जैसे- एडवोकेट जनरल, विधान सभा के अध्यक्ष, नगर निगम अधिनियम के तहत वाले अधिकारी, एक स्थानीय सरकारी बोर्ड के सदस्य, विश्वविद्यालय के अधिकारी और शिक्षक। लेकिन इसे निजी स्कूलों की प्रंबंध समिति के खिलाफ जारी नहीं किया जाता है क्योंकि उनकी नियुक्ति किसी प्राधिकरण के तहत नहीं होती है।
1. भारत में कुल कितने उच्च न्यायालय हैं
उत्तर. 25
2. भारत के किस उच्च न्यायालय में न्यायाधीशों की संख्या सबसे कम है
उत्तर. सिक्किम उच्च न्यायालय
3. भारत के किस न्यायालय में न्यायाधीशों की संख्या सबसे अधिक है
उत्तर. इलाहाबाद उच्च न्यायालय
4. भारत का सबसे बड़ा उच्च न्यायालय कौन-सा है
उत्तर. इलाहाबाद उच्च न्यायालय
5. पटना उच्च न्यायालय की स्थापना कब हुई
उत्तर. 1916 ई.
6. मध्य प्रदेश का उच्च न्यायालय कहाँ स्थित है
उत्तर. जबलपुर
7. उच्च न्यायालय के क्षेत्राधिकार को हटाने या बढ़ाने का अधिकार किसको है
उत्तर. भारतीय संसद को
8. उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों की नियुक्ति कौन करता है
उत्तर. राष्ट्रपति
9. उच्च न्यायालय का न्यायाधीश कितनी आयु तक अपने पद पर रह सकता है
उत्तर. 62 वर्ष की आयु तक
10. उच्च न्यायालय में प्रथम महिला मुख्य न्यायाधीश कौन थीं
उत्तर. श्रीमती लीला सेठ
11. किसी न्यायाधीश को एक न्यायालय से दूसरे न्यायालय में भेजने का अधिकार किसको है
उत्तर. राष्ट्रपति को
12. भारत का चलित न्यायालय किसका मानसंपुज है
उत्तर. डॉ. ए.पी.जे. कलाम आजाद
13. किस उच्च न्यायालय में सबसे अधिक स्थाई/अस्थाई खंडपीठ है
उत्तर. गुवाहटी उच्च न्यायालय में
14. केरल का उच्च न्यायालय कहाँ स्थित है
उत्तर. एर्नाकुलम
15. उच्च न्यायालय के न्यायाधीश को उसके पद व गोपनीयता की शपथ कौन दिलाता है
उत्तर. राज्यपाल
16. संविधान के किस अनुच्छेद के अंतर्गत उच्च न्यायालय द्वारा दिया गया निर्देश परिवर्तित किया जा सकता है
उत्तर. अनुच्छेद-226
17. ओड़िशा राज्य का उच्च न्यायालय कहाँ स्थित है
उत्तर. कटक
18. किसी राज्य के उच्च न्यायालय के न्यायधीशों के वेतन एवं भत्ते का संबंध किससे होता है
उत्तर. संबंधित राज्य की लोकलेखा निधि से
19. केंद्रशासित प्रदेश दिल्ली का उच्च न्यायालय कहाँ स्थित है
उत्तर. दिल्ली में
20. संविधान का संरक्षक व व्याख्याकार कौन है?
उत्तर. उच्चतम न्यायालय
21. संविधान के किस भाग में संघीय न्यायपालिका का उल्लेख है
उत्तर. भाग-V
22. किस अधिनियम के अंतर्गत उच्चतम न्यायालय की स्थापना हुई
उत्तर. रेग्युलेटिंग एक्ट 1773
23. संविधान में मूल रूप से मुख्य न्यायाधीश के अतिरिक्त कितने न्यायाधीशों की व्यवस्था उच्चतम न्यायालय में की गई थी
उत्तर. 7
24. उच्चतम न्यायालय में न्यायाधीशों की संख्या में वृद्धि करने का अधिकार किसको है
उत्तर. संसद को
25. वर्तमान में उच्चतम न्यायालय में मुख्य न्यायाधीश सहित न्यायाधीशों की कुल संख्या कितनी है
उत्तर. 31
26. उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश की नियुक्ति कौन करता है
उत्तर. राष्ट्रपति
27. उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीशों की सेवानिवृत्ति की आयु क्या है
उत्तर. 65 वर्ष की आयु तक
28. उच्चतम न्यायालय का गठन एवं उसकी शक्तियाँ व न्यायाधीशों को हटाने की विधि किस देश के संविधान से ली गई है
उत्तर. अमेरिका
29. जनहित याचिका कहाँ दायर की जा सकती है
उत्तर. उच्चतम न्यायालय में
30. किस अनुच्छेद में उच्चतम न्यायालय को परामर्शदाती बनाया गया है
उत्तर. अनुच्छेद-143
भारत के किस मुख्य न्यायाधीश ने राष्ट्रपति के रूप में कार्य किया है ?
उत्तर - न्यायमूर्ति एम. हिदायतुल्ला
31 . सर्वोच्च न्यायालय में न्यायिक काम-काज के लिए किस भाषा का प्रयोग किया जाता है ?
उत्तर - हिन्दी व अंग्रेजी
32. भारत में न्यायपालिका कैसी है ?
उत्तर - स्वतंत्र
33. भारत में न्यायापालिका का स्वरूप कैसी है ?
उत्तर - एकीकृत
34. भारत में राष्ट्रपति एवं उपराष्ट्रपति के निर्वाचन में विवाद के मामलों को किसको प्रस्तुत किया जाता है ?
उत्तर - भारत का उच्चतम न्यायालय को
35. राष्ट्रपति कानूनी मामलों में किससे परामर्श लेता है ?
उत्तर - उच्चतम न्यायालय से
36. किस अनुच्छेद के अन्तर्गत उच्चतम न्यायालय को परामर्शदात्री बनाया गया है ?
उत्तर - अनुच्छेद 143
37. किसे न्यायिक पुनर्विलोकन का अधिकार प्राप्त हैं ?
उत्तर - उच्चतम न्यायालय को
38. केन्द्र और राज्यों के विवादों का समाधान करना सर्वोच्च न्यायालय का कौन-सा क्षेत्राधिकार है ?
उत्तर - प्रारम्भिक
39. जनहित याचिका दायर की जा सकती है ?
उत्तर - उच्च न्यायालय एवं उच्चतम न्यायालय दोनों में
40. उच्चतम न्यायालय कौन-सा प्रलेख जारी नही कर सकता है ?
उत्तर - निषेधाजा
41. उच्चतम न्यायालय द्वारा परमादेश किसे जारी किया जाता है ?
उत्तर - किसी अधिकारी को सरकारी आदेश निभाने के लिए
42. किस न्यायालय द्वारा लाभ का पद परिभाषित हुआ है ?
उत्तर - उच्चतम न्यायालय द्वारा
43. भारतीय संविधान का कौन-सा अनुच्छेद संवैधानिक विवाद में उच्चतम न्यायालय के अपीलीय क्षेत्राधिकार से सम्बन्धित है ?
उत्तर - अनुच्छेद 134ए को मिलाकर अनुच्छेद 132 को पढ़ना
44. उच्चतम न्यायालय ने संविधान की आधारभूत संरचना की घोषणा किस मामले में की थी ?
उत्तर - केशवनंदा भारती के ममाले मे
भारतीय संविधान (indian constitution) यानी विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र का धर्मग्रंथ के बारे में 10 महत्वपूर्ण बातें...
भारत राज्यों का संघ : भारत राज्‍यों का एक संघ है। य‍ह संसदीय प्रणाली की सरकार वाला एक स्‍वतंत्र प्रभुसत्ता सम्‍पन्‍न समाजवादी लोकतंत्रात्‍मक गणराज्‍य है। यह गणराज्‍य भारत के संविधान के अनुसार शासित है, जिसे संविधान सभा द्वारा 26 नवम्‍बर 1949 को ग्रहण किया गया तथा जो 26 जनवरी 1950 को लागू हुआ।

सबसे बड़ा संविधान : विश्व में भारत का संविधान सबसे बड़ा लिखित संविधान है। संविधान लागू होने के समय इसमें 395 अनुच्छेद, 8 अनुसूचियां और 22 भाग थे, जो वर्तमान में बढ़कर 448 अनुच्छेद, 12 अनुसूचियां और 25 भाग हो गए हैं। साथ ही इसमें पांच परिशिष्ठ भी जोड़ दिए गए हैं, जो कि प्रारंभ में नहीं थे।  

संविधान का मसौदा : 29 अगस्त 1947 को भारत के संविधान का मसौदा तैयार करने वाली समिति की स्थापना हुई, जिसमें अध्यक्ष के रूप में डॉ. भीमराव अंबेडकर की नियुक्ति हुई। इसीलिए डॉ. अंबेडकर को संविधान निर्माता भी कहा जाता है। 

संविधान सभा के सदस्य : संविधान सभा के 284 सदस्यों ने 24 जनवरी 1950 को दस्तावेज पर हस्ताक्षर किए, जिनमें 15 महिलाएं भी शामिल थीं। इसके पश्चात 26 जनवरी को भारत का संविधान अस्तित्व में आया। इसे पारित करने में 2 वर्ष, 11 महीने और 18 दिन का समय लगा। 

संविधान की प्रस्तावना : भारतीय संविधान की प्रस्तावना अमेरिकी संविधान से प्रभावित तथा विश्व में सर्वश्रेष्ठ मानी जाती है। प्रस्तावना के माध्यम से भारतीय संविधान का सार, अपेक्षाएं, उद्देश्य उसका लक्ष्य तथा दर्शन प्रकट होता है। प्रस्तावना यह घोषणा करती है कि संविधान अपनी शक्ति सीधे जनता से प्राप्त करता है इसी कारण यह 'हम भारत के लोग' इस वाक्य से प्रारम्भ होती है।

संविधान की विशेषता : भारत के संविधान की विशेषता यह है कि वह संघात्मक भी है और एकात्मक भी। भारत के संविधान में संघात्मक संविधान की सभी उपर्युक्त विशेषताएं विद्यमान हैं।
दूसरी विशेषता यह है कि आपातकाल में भारतीय संविधान में एकात्मक संविधानों के अनुरूप केंद्र को अधिक शक्तिशाली बनाने के लिए प्रावधान निहित हैं।
तीसरी विशेषता यह है कि केवल एक नागरिकता का ही समावेश किया गया है तथा एक ही संविधान केंद्र तथा राज्य दोनों ही सरकारों के कार्य संचालन के लिए व्यवस्थाएं प्रदान करता है। इसके अलावा संविधान में कुछ अच्छी चीजें विश्व के दूसरे संविधानों से भी संकलित की गई हैं।

संसदीय स्वरूप : संविधान में सरकार के संसदीय स्‍वरूप की व्‍यवस्‍था की गई है जिसकी संरचना कतिपय एकात्‍मक विशिष्‍टताओं सहित संघीय हो। केन्‍द्रीय कार्यपालिका का संवैधानिक प्रमुख राष्‍ट्रपति है। भारत के संविधान की धारा 79 के अनुसार, केन्‍द्रीय संसद की परिषद में राष्‍ट्रपति तथा दो सदन है जिन्‍हें राज्‍यों की परिषद (राज्‍य सभा) तथा लोगों का सदन (लोक सभा) के नाम से जाना जाता है।
संविधान की धारा 74 (1) में यह व्‍यवस्‍था की गई है कि राष्‍ट्रपति की सहायता करने तथा उसे सलाह देने के लिए एक मंत्री परिषद होगी जिसका प्रमुख प्रधानमंत्री होगा, राष्‍ट्रपति सलाह के अनुसार अपने कार्यों का निष्‍पादन करेगा। इस प्रकार वास्‍तविक कार्यकारी शक्ति मंत्रिपरिषद में निहित है जिसका प्रमुख प्रधानमंत्री है।

संविधान के प्रमुख तीन बिन्दु :
भारत का संविधान तीन प्रमुख बिंदुओं पर आधारित है।
पहला राजनीतिक सिद्धांत, जिसके अनुसार भारत एक लोकतांत्रिक देश होगा। यह सार्वभौम, धर्मनिरपेक्ष्य राज्य होगा।
दूसरा भारत की सरकारी संस्थाओं के मध्य किस प्रकार का संबंध होगा। वे एक दूसरे के साथ किस प्रकार कार्य करेंगे। सरकारी संस्थाओं के क्या अधिकार होंगे, क्या कर्तव्य होंगे और किस प्रकार की प्रक्रिया संस्थाओं पर लागू होगी।
तीसरा, भारतीय नागरिकों को कौन कौन से मौलिक अधिकार प्राप्त होंगे तथा नागरिकों के क्या कर्तव्य होंगे। इसके अलावा राज्य के नीति निर्देशक तत्व क्या होंगे।

संविधान संशोधन : संविधान सभा के मतानुसार देश चहुंमुखी विकास लिए समय-समय पर उपयुक्त प्रावधानों की आवश्यकता पड़ सकती है, जिसके लिए संविधान संशोधन की तीन विभिन्न प्रक्रियाएं दी गई हैं। संविधान में पहला संशोधन 18 जून 1951 को किया गया था, जबकि अब तक 126 संशोधन विधेयक पारित तथा संविधान में 101 संशोधन किए जा चुके हैं। 

धर्मनिरपेक्षता : समाजवादी और धर्मनिरपेक्ष शब्द संविधान के 1976 में हुए 42वें संशोधन द्वारा प्रस्तावना में जोड़े गए। इससे पहले धर्मनिरपेक्ष के स्थान पर पंथनिरपेक्ष शब्द था। यह अपने सभी नागरिकों को जाति, रंग, नस्ल, लिंग, धर्म या भाषा के आधार पर कोई भेदभाव किए बिना सभी को बराबरी का दर्जा और अवसर देता है।
1.  किस अनुच्छेद के द्वारा 6 से 14 वर्ष तक के बच्चों के लिए शिक्षा का अधिकार मूल अधिकार माना गया है?
उत्तर. अनुच्छेद 21 A
2.  भारत का नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक किसके द्वारा नियुक्त किया जाता है?
उत्तर. राष्ट्रपति
3. संविधान में मूल कर्तव्यों को शामिल करने की प्रेरणा किस देश के संविधान से ली गई है?
उत्तर. रूस
4.  भारतीय सेनाओं का सर्वोच्च सेनापति कौन होता है?
उत्तर. राष्ट्रपति
5.  भारत में राष्ट्रपति किस अनुच्छेद के अंतर्गत देश में राष्ट्रीय आपातकाल की घोषणा करता है?
उत्तर. अनुच्छेद 356
6. पहले वित्त आयोग का गठन 1991 में किया गया इसके अध्यक्ष कौन थे?
उत्तर. के.सी. नियोगी
7.  किस उच्च न्यायालय में सर्वाधिक संख्या में न्यायाधीश कार्यरत है?
उत्तर. इलाहाबाद
8.  राष्ट्रपति पद के चुनाव के लिए कौन सी विधि अपनाई जाती है?
उत्तर. अनुपातिक प्रतिनिधित्व,एकल संक्रमणीय, अप्रत्यक्ष मतदान,
9.भारत के प्रथम राष्ट्रपति थे?
उत्तर. डॉ. राजेंद्र प्रसाद
10. राष्ट्रपति के कार्यकाल की अवधि कितनी होती है?
उत्तर. 5 वर्ष
11. संविधान में मूल कर्तव्यों की कुल संख्या कितनी है?
उत्तर. प्रारंभ में मूल कर्तव्यों की संख्या 10 थी। इसके बाद 86 वें संविधान संशोधन 2002 के तहत एक और मूल कर्तव्य जोड़ा गया और अब मूल कर्तव्यों की कुल संख्या 11 ( 10+1 ) है। 
12. भारतीय संविधान किस दिन से लागू हुआ?
उत्तर. 26 जनवरी 1950 ई.
13.  जम्मू कश्मीर राज्य को किस अनुच्छेद के अंतर्गत विशेष राज्य का दर्जा प्राप्त है?
उत्तर. अनुच्छेद 370
14.  लोक कल्याणकारी राज्य की अवधारणा किसमें निहित है?
उत्तर. राज्य की नीति के निदेशक तत्व
15.  उत्तम न्यायालय के न्यायाधीशों का कार्यकाल कितना होता है?
उत्तर. उनकी 65 वर्ष की आयु पूरी होने तक
16. राष्ट्रपति राष्ट्रीय आपातकाल की उद्घोषणा किन स्थितियों में कर सकता है?
उत्तर. युद्ध, बाह्य आक्रमण, सशस्त्र विद्रोह,
17. नीति आयोग का पदेन अध्यक्ष कौन होता है?
उत्तर. प्रधानमंत्री
18. संघ राज्य क्षेत्रों का प्रशासन कौन चलाता है?
उत्तर. राष्ट्रपति द्वारा नियुक्त प्रशासक
19. सरकारिया आयोग का संबंध किससे है?
उत्तर. केंद्र राज्य संबंधों से
20. पंचायतों के चुनाव हेतु निर्णय लेने का अधिकार किसे प्राप्त है?
उत्तर. चुनाव आयोग को
21. किसी विधेयक को धन विधेयक के रूप में कौन प्रमाणित करता है?
उत्तर. लोकसभा अध्यक्ष
22. संविधान का अनुच्छेद 40 राज्य को क्या निर्देश देता है?.
उत्तर. ग्राम पंचायतों का संगठन करें
23. सर्वोच्च न्यायालय के प्रमुख मुख्य न्यायाधीश कौन थे?
उत्तर. हीरालाल जे.कानिया
24. राज्यसभा की अधिकतम सदस्य संख्या है?
उत्तर. 250
25. संविधान के किस अनुच्छेद के आधार पर देश में वित्तीय आपात की घोषणा की जा सकती है?
उत्तर. अनुच्छेद 360
26. राष्ट्रपति के निर्वाचक मंडल में शामिल है?
उत्तर. संसद के दोनों सदनों के निर्वाचित सदस्यों तथा राज्यों की विधानसभाओ के निर्वाचित सदस्य
27. भाषा के आधार पर गठित भारत का पहला राज्य कौन सा है?
उत्तर. आंध्र प्रदेश
28. विधानसभा के वर्ष में कम से कम कितने अधिवेशन होने अनिवार्य है?
उत्तर. 2
29.  73 वां संवैधानिक संशोधन संबंधित है?
उत्तर. पंचायती राज से
30. लोकसभा और राज्यसभा के दो अधिवेशनों के बीच अधिकतम कितने समय का अंतर होना चाहिए?
उत्तर. छ माह
31. संविधान में मूल कर्तव्यों को किस समिति के अनुशंसा के आधार पर शामिल किया गया है?
उत्तर. स्वर्ण सिंह समिति
32. भारतीय संविधान के अनुसार संघ की कार्यपालिका शक्ति किसमें निहित है?
उत्तर. राष्ट्रपति
33. राष्ट्रपति द्वारा लोकसभा तथा राज्यसभा में मनोनीत किए जाने वाले सदस्यों की संख्या क्रमशः है?
उत्तर. 2 व 12
34. संविधान सभा के अस्थाई अध्यक्ष के रूप में किसे नियुक्त किया गया था?
उत्तर. डॉ. सच्चिदानंद सिन्हा
35. राष्ट्रपति पर महाभियोग का आरोप संसद के किस सदन द्वारा लगाया जा सकता है?
उत्तर. संसद के किसी सदन द्वारा
36. संसद द्वारा अनुमोदित के बाद किसी राज्य में राष्ट्रपति शासन एक बार में कितने समय तक के लिए लागू किया जा सकता है?
उत्तर. छ माह
37. राष्ट्रपति राज्यसभा में कितने सदस्यों को मनोनीत कर सकता है?
उत्तर. 12
38. उच्च न्यायालय की अधिकारिता क्षेत्रों पर है?
उत्तर. गुवाहाटी
39. किस राज्य में विधानसभा सदस्यों की संख्या सर्वाधिक है?
उत्तर. उत्तर प्रदेश
40. बलवंत राय मेहता समिति का गठन किससे किया गया था?
उत्तर. पंचायती राज व्यवस्था से
41. भारत गणतंत्र कब बना ?
उत्तर. 26 जनवरी 1950 ई.
42. उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों के कार्यकाल की सीमा कितनी है?
उत्तर. अपनी उम्र के 62 वर्ष पूरे होने तक
43. संविधान के किस अनुच्छेद के आधार पर राज्य में संवैधानिक तंत्र की विफलता पर राष्ट्रपति शासन लगाया जा सकता है?
उत्तर. अनुच्छेद 356
44. संविधान सभा ने अंतिम रूप से संविधान को कब पारित कर दिया?
उत्तर. 26 जनवरी 1950 ई.
45. संपत्ति के अधिकार को किस संविधान संशोधन के द्वारा हटा दिया गया था?
उत्तर.44वे.
46. स्वतंत्र भारत में प्रथम निर्वाचन आयुक्त कौन थे?
उत्तर. सुकुमार सेन
47.राज्य का मंत्रिमंडल सामूहिक रूप से किसके प्रति उत्तरदाई होता है?
उत्तर. विधानसभा
48. वर्तमान में भारत में कुल कितने राज्यों में विधान परिषदें विद्यमान है?
उत्तर.7
49. भारत में सर्वप्रथम 2 अक्टूबर 1949 को पंचायती राज व्यवस्था का शुभारंभ किया गया यह कहां से शुरू हुआ?
उत्तर. नागौर, राजस्थान
50. भारतीय संघ की शक्ति किसमें निहित है?
उत्तर. राष्ट्रपति
51. उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश की नियुक्ति कौन करता है?.
उत्तर. राष्ट्रपति
52. भारतीय संविधान के किस भाग को उसकी आत्मा की संज्ञा दी गई है?
उत्तर. प्रस्तावना
53. प्रारूप समिति के अध्यक्ष कौन थे?.
उत्तर. डॉ बाबा साहब भीमराव अंबेडकर
54. भारत के सर्वोच्च न्यायालय में न्यायाधीशों की कुल संख्या कितनी है?
उत्तर.31
55. भारत में अब तक कितनी बार राष्ट्रीय आपातकाल की घोषणा की जा चुकी है?
उत्तर. तीन बार
56. संविधान सभा की प्रथम बैठक कब हुई थी?
उत्तर. 9 दिसंबर 1946 ई.
57. भारत का उच्चतम न्यायालय कहां स्थित है?
उत्तर. नई दिल्ली
58. दल बदल से संबंधित कानून का उल्लेख किस अनुसूची में है?
उत्तर. दसवीं
59. सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश की नियुक्ति कौन करता है?
उत्तर. राष्ट्रपति
60. मंत्रिपरिषद सामूहिक रूप से किसके प्रति उत्तरदाई है?
उत्तर. लोकसभा
61. विधान के अनुसार विधान सभा के सदस्यों की अधिकतम संख्या कितनी होनी चाहिए?
उत्तर. 500
62. भारतीय नागरिकों के मूल अधिकारों की संख्या कितनी है?
उत्तर. छ
63. संविधान के किस अनुच्छेद के द्वारा राष्ट्रपति को सर्वोच्च न्यायालय में परामर्श मांगने का अधिकार प्राप्त है?
उत्तर. अनुच्छेद 143
64. राज्य में राष्ट्रपति शासन लगाने की स्थिति में कितने दिनों के अंदर उसकी संसद से स्वीकृति आवश्यक है?
उत्तर. 60 दिन
65. संविधान सभा के स्थाई अध्यक्ष थे?
उत्तर. डॉ. राजेंद्र प्रसाद
66. प्रधानमंत्री की नियुक्ति कौन करता है?
उत्तर. राष्ट्रपति
67. संसद द्वारा देश में सूचना पाने का अधिकार संबंधी विधेयक कब पारित किया गया?
उत्तर. जून, 2005
68. स्वतंत्र भारत के पहले भारतीय गवर्नर जनरल कौन थे?
उत्तर. चक्रवर्ती राजगोपालाचारी
69. भारत में प्रथम योजना आयोग का गठन कब किया गया था?
उत्तर. 15 मार्च 1950 ई.
70. वर्तमान में भारत में उच्च न्यायालयों की कुल संख्या कितनी है?
उत्तर.24
71. संविधान सभा ने राष्ट्रीय गान को कब स्वीकार किया?.
उत्तर. 24 जनवरी 1950 ई.
72. मूल अधिकारों का रक्षक किसे कहा जाता है?
उत्तर. सर्वोच्च न्यायालय, उच्च न्यायालय
73. वित्त आयोग के गठन का प्रावधान किस अनुच्छेद में है?
उत्तर. अनुच्छेद 280
74. स्वतंत्र भारत के प्रथम प्रधानमंत्री कौन थे?
उत्तर. प.जवाहरलाल नेहरू
75. राज्य की कार्यपालिका का प्रमुख कौन होता है?
उत्तर. राज्यपाल 
76. संविधान द्वारा कितनी भाषाओं को मान्यता प्रदान दी गई है?
उत्तर. 22
77. यदि प्रधानमंत्री या कोई अन्य मंत्री सदन का सदस्य नहीं है तो उसे पद पर बने रहने के लिए कितने दिनों के अंदर संसद का सदस्य बनाना आवश्यक है?.
उत्तर. छ माह
78. भारतीय संसद के ऊपरी सदन को कहा जाता है?
उत्तर. राज्यसभा
79. उपराष्ट्र
पति के निर्वाचन मंडल में शामिल होते हैं?
उत्तर. राज्यसभा और लोकसभा के सदस्य
80. राज्यों में राष्ट्रपति शासन की अधिकतम अवधि कितनी होती है?
उत्तर. 3 वर्ष
हम भारत के लोगों को "भारत का संविधान" पर गर्व करना चाहिए
1) संविधान हमें भारत में कहीं भी रहने-बैठने और रोजगार करने की छूट देता है। (अनुच्छेद-19)
2) संविधान हमें कोई भी धर्म लेने और प्रचार करने की छूट देता है। (अनुच्छेद- 25)
3) संविधान हमें समता का अधिकार देता है। (अनुच्छेद-14)
4) संविधान धर्म, मूलवंश, जाति, लिंग, जन्म स्थान के आधार पर विभेद का प्रतिषेध करता है। (अनुच्छेद-15)
5) संविधान छुआछूत को गैरकानूनी
करार देता है। (अनुच्छेद-17)
6) संविधान हमें अपना विचार अभिव्यक्ति करने की छूट देता है। (अनुच्छेद-19)
7) संविधान 6 से14वर्ष के सभी बच्चों को मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा प्राप्त करने का अधिकार देता है। (अनुच्छेद 21क)
8) संविधान मानव तस्करी बधुआ मजदूरी पर रोक लगाता है। (अनुच्छेद - 23)
9) संविधान हमें बाल मजदूरी पर रोक लगाता है। (अनुच्छेद - 24)
10) संविधान हमें पुरुष और महिला को एक समान जीविका का अधिकार देता है। (अनुच्छेद-39)
11) संविधान हमें पंचायत राज कायम कर ग्रामीण जनता को सत्ता में भागीदार बनाता है। (अनुच्छेद-40)
संविधान हमें काम का अधिकार देता है। (अनुच्छेद - 41)
12)संविधान हमें SC, ST, NT, OBC, DNT और पिछड़े वर्गों को शैक्षणिक- आर्थिक विकास को बढ़ावा देता है। (अनुच्छेद- 46)
13) संविधान के अनुसार सभी को समान न्याय और विधिक सहायता का अधिकार देता है। (अनुच्छेद - 39क)
14) संविधान मजदूरों को सम्मानजनक मजदूरी देता है। (अनुच्छेद - 43)
संविधान मजदूरों को प्रबंधन में भागेदारी देता है।
15) संविधान के अनुसार कृषि,पशुपान की उन्नति करना और उन्हें बचाना सरकार का कर्तव्य है। (अनुच्छेद 48)
16) ऐतिहासिक इमारतों की सुरक्षा करना सरकार का दायित्व है। (अनुच्छेद - 39क)
17) संविधान के अनुसार सामाजिक और शैक्षणिक रूप से पिछड़े वर्गों के हितों के लिए कानून बनाना सरकार की जिम्मेदारी है। (अनुच्छेद - 340)
18) कृषि, सिंचाई, पशुधन, मत्स्य पालन, लघु उद्योग, ग्रामीण उद्योग, सड़क,पुल, ग्रामीण विद्युतीकरण,
गरीबोत्थान, अनोपचारिक शिक्षा, बाजार, अस्पताल, जनवितरण प्रणाली आदि को प्रोत्साहन करना सरकार की जिम्मेदारी है। (अनुच्छेद - 243छ)