Trishul Trident
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हिंदी में आप्तवचन समझदारी बढ़ाने के लिए।
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In last 24 hours 167457 persons have recovered. 👏
2898257 persons vaccinated. 👏👏
1639357 samples tested. 👏👏👏

Oxygen production reaches phenomenal 7K MT.👍👍👏👏
👍India is fighting back. 👍

We Will.

#IndiaFightsCorona

Let's be positive
Forwarded from Ashok Shandilya
VERY IMPORTANT

Latest updated Covid management protocol by AIIMS.
Explain this to Covid patients so they can decide abt treatment & hospitalisation.
Forwarded from Ashok Shandilya
Its an important info.....If you are not getting Remdesivir, Dont panic...use Dexamethasone.
एक नर्स लंदन में ऑपरेशन से दो घंटे पहले मरीज़ के कमरे में घुसकर कमरे में रखे गुलदस्ते को संवारने और ठीक करने लगी।

ऐसे ही जब वो अपने पूरे लगन के साथ काम में लगी थी, तभी अचानक मरीज़ से पूछा "सर आपका ऑपरेशन कौन सा डॉक्टर कर रहा है?"

नर्स को देखे बिना मरीज़ ने अच्छे लहजे में कहा "डॉ. जबसन।"

नर्स ने डॉक्टर का नाम सुना और आश्चर्य से अपना काम छोड़ते हुए मरीज़ के पास पहुँची और पूछा "सर, क्या डॉ. जबसन ने वास्तव में आपके ऑपरेशन को स्वीकार किया हैं?

मरीज़ ने कहा "हाँ, मेरा ऑपरेशन वही कर रहे है।"

नर्स ने कहा "बड़ी अजीब बात है, विश्वास नहीं होता"

परेशान होते हुए मरीज़ ने पूछा "लेकिन इसमें ऐसी क्या अजीब बात है?"

नर्स ने कहा "वास्तव में इस डॉक्टर ने अब तक हजारों ऑपरेशन किए हैं उसके ऑपरेशन में सफलता का अनुपात 100 प्रतिशत है । इनकी तीव्र व्यस्तता की वजह से इन्हें समय निकालना बहुत मुश्किल होता है। मैं हैरान हूँ आपका ऑपरेशन करने के लिए उन्हें फुर्सत कैसे मिली?

मरीज़ ने नर्स से कहा "ये मेरी अच्छी किस्मत है कि डॉ जबसन को फुरसत मिली और वह मेरा ऑपरेशन कर रहे हैं ।

नर्स ने एक बार बार कहा "यकीन मानिए, मेरा हैरत अभी भी बरकरार है कि दुनिया का सबसे अच्छा डॉक्टर आपका ऑपरेशन कर रहा है!!"

इस बातचीत के बाद मरीज को ऑपरेशन थिएटर में पहुंचा दिया गया, मरीज़ का सफल ऑपरेशन हुआ और अब मरीज़ हँस कर अपनी जिंदगी जी रहा है।

मरीज़ के कमरे में आई महिला कोई साधारण नर्स नहीं थी, बल्कि उसी अस्पताल की मनोवैज्ञानिक महिला डॉक्टर थी, जिसका काम मरीजों को मानसिक और मनोवैज्ञानिक रूप से संचालित करना था, जिसके कारण उसे संतुष्ट करना था जिस पर मरीज़ शक भी नहीं कर सकता था। और इस बार इस महिला डॉक्टर ने अपना काम मरीज़ के कमरे में गुलदस्ता सजाते हुवे कर दिया था और बहुत खूबसूरती से मरीज़ के दिल और दिमाग में बिठा दिया था कि जो डॉक्टर इसका ऑपरेशन करेगा वो दुनिया का मशहूर और सबसे सफल डॉक्टर है जिसका हर ऑपरेशन सफल ऑपरेशन है और इन सब के साथ मरीज़ खुद सकारात्मक तरीके से सुधार की तरफ लौट आया।

आज ज्ञान ने सिद्ध कर दिया कि रोगी जितनी दृढ़ता से रोग को नियंत्रित करने का वादा करता है उतनी ही दृढ़ता से रोग पर जीत दर्ज कर सकता है , कोई भी व्यक्ति संकल्प ले तो हर समस्या को नियंत्रित कर सकता हैं।

′ कोरोना′′ को भी…
Forwarded from Gopal Mishra
H-SV_08_Pranayam_Se_Aadhi-Vyadhi_Nivaran.pdf
2.9 MB
H-SV_08_Pranayam_Se_Aadhi-Vyadhi_Nivaran.pdf
Forwarded from Ashok Shandilya
प्राणायाम से आधी-व्याधि का निवारण👆👆
1000 साल की गुलामी :-

हम भारतीयों मे भूलने का रोग बहुत पुराना है। इसी भूलने के कारण, हम 1000 साल गुलाम रहे।

परंतु दुनिया नहीं भूलती है।

चित्र 24 अप्रैल 1915 के तुर्की ( आटोमन साम्राज्य) के मुस्लिमों द्वारा आर्मे-निया के 10 लाख इसाइयों के नरसंहार से संबन्धित है।

तुर्की वैसे ही आज तक भी इस नरसंहार को नकारता है, जैसे भारतीय मुस्लिम और झामपंथी औरंगजेब के नरसंहार को नकारते हैं।

अमेरिका के राष्ट्रपति ने तुर्की के राष्ट्र-पति को चेतावनी दी, और इस नरसंहार को स्वीकार करने के लिए बोला।

2016 मे जर्मन संसद ने एक प्रस्ताव पारित किया है, जिस में पहले विश्व युद्ध के दौरान तुर्की के ओटो-मान साम्राज्य द्वारा अर्मे-नियाई लोगों की हत्या को नरसंहार घोषित किया गया है।

तुर्की ने इसे जर्मनी की ऐतिहासिक ग़लती बताया है, और बर्लिन से अपने राजदूत को वापस बुला लिया है।

2015 मे जब पोप ने इसे 20वीं सदी का प्रथम नर-संहार बताया तो, तुर्की ने पोप का विरोध किया।

कुछ साल पहले यात्रा पर अर्मेनिया गए फ्रांस के राष्ट्रपति सारकोजी ने तुर्की से कहा कि, हत्याओं को नरसंहार के तौर पर स्वीकारे।

उन्होंने कहा, "अगर तुर्की ऐसा नहीं करता है, तो फ्रांस एक कदम आगे बढ़ कर अपने कानूनों में बदलाव कर सकता है, और नरसंहार को नकारने को गैरकानूनी बना सकता है."

औरंगजेब आज भी कितने भारतीय मुस्लिमों का हीरो है।

गुरु तेगबहादुर, भाई सति दास, भाई मति दास भाई दयाला जी को औरंगजेब ने कैसे भयानक तरीके से मारा, वह किसी से छुपा नहीं है।

इतना ही नहीं, जब गुरु जी का सिर भाई जैता जी आनन्दपुर ले जा रहे थे, तब भी औरंगजेब की फौज ने उन का पीछा किया।

तब हरियाणा के एक जाट ( दादा कुशाल सिंह दहिया) ने अपना सिर कटवा कर, औरंगजेब से सैनिको से गुरु जी का सिर बचवाया।

गुरु गोबिन्द सिंह के बच्चों को दीवार मे चुनने मे औरंगजेब की सहमति को सभी जानते हैं।

औरंगजेब ने किसानों पर अनेक प्रकार के कर लगा रखे थे।

हिन्दुओं को इस्लाम अपनाने के लिए विवश किया जा रहा था। ऐसे में तिलपत गढ़ी में जन्मे गोकुल सिंह ने आवाज बुलंद की।

उन्होंने मुगल शासक को किसी भी प्रकार की माल-गुजारी देने से मना कर दिया।

तिलमिलाए औरंगजेब के आदेश पर मुगल फौज ने तिलपत गढ़ी पर हमला कर दिया।

10 मई 1666 को तिलपत की लड़ाई में, वीर गोकुला जाट ने औरंगजेब को हरा दिया।

इस के बाद पाँच माह तक भयंकर युद्ध होते रहे।

मुगलों में गोकुल सिंह का वीरता और युद्ध संचालन का आतंक बैठ गया। अंत में सितंबर मास में, अत्यन्त निराश हो कर, शफ शिकन खाँ ने गोकुल-सिंह के पास संधि-प्रस्ताव भेजा।

उस ने कहा कि माफी मांग लें। गोकुल सिंह ने कहा कि मैंने कोई अपराध नहीं किया है, इससिए माफी क्यों मागूं।

इस से औरंगजेब तिल-मिला गया।

वह 28 नवम्बर, 1669 को दिल्ली से मथुरा आ गया। युद्ध की तैयारिया शुरू हो गईं। दिसम्बर, 1669 के अंतिम सप्ताह में तिलपत से 20 मील दूर सिहोर में दूसरा युद्ध हुआ।

मुगलों के पास तोपखाना थी। तीन दिन तक युद्ध हुआ। मुगलों की तोपों ने सब कुछ नष्ट कर दिया।

गोकुल सिंह, उन के चाचा उदय सिंह और अन्य वीरों को बंदी बना लिया गया।
आगरा किले में, औरंगजेब ने वीर गोकुला जाट ते सामने शर्त रखी कि, जान की सलामती चाहते हो तो इस्लाम स्वीकार कर लो।

गोकुल सिंह ने वीरता-पूर्वक इनकार कर दिया।

फिर एक जवनरी, 1670 को गोकुल सिंह, उन के चाचा उदय सिंह और अन्य को बंदी बनाकर कोतवाली के चबूतरे पर लाया गया।

गोकुल सिंह को जंजीरों में जकड़ा हुआ था। उन के शरीर का एक-एक अंग काटा गया।

हजारों की भीड़ के सामने यह कुकृत्य किया गया, ताकि लोग डरें।

इस के बाद भी उन्होंने दासता स्वीकार नहीं की, इस्लाम स्वीकार नहीं किया। उदय सिंह की तो खाल खिंचवा ली गयी, लेकिन धर्म नहीं छोड़ा।

गोकुल सिंह इतने शक्ति-शाली थे कि, जब कोई अंग कुल्हाड़ी से काटा जाता तो, रक्त के फव्वारे छूटते थे।

जनता में हा, हा, कार मचा हुआ था, लेकिन किसी में विरोध की हिम्मत नहीं थी। आगरा में गोकुलसिंह का सिर गिरा, उधर मथुरा में केशवरायजी का मन्दिर।

जहां वीर गोकुला जाट बलिदान हुए, उसी स्थान का नाम फव्वारा है।
🔴 समस्त संसार के मूर्धन्यों, शक्तिवानों, और विचारवानों की आशंका एक ही है कि विनाश होने जा रहा है, परन्तु हमारा अकेले का मत है कि उल्टे को उलट कर सीधा किया जाएगा। जो लोग महाविनाश में संलग्न हैं, वे उलट जाएगे या उनको उलट देने वाले नए पैदा हो जाएगें।

-पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य
वाड्गमय
२८ ,पृष्ठ - १२९
🔴 हम आपके माता भी हैं और पिता भी, भले ही रिश्ते में न हों। लेकिन जब आपने हमको अपना माना है तो हम भी आपको अपना मानेंगे।
-पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य
🤔 13 वीं शताब्दी के कवि संत ज्ञानदेव ने मोक्ष पाटम नामक एक बच्चों का खेल बनाया। अंग्रेजों ने बाद में इसे सांप और सीढ़ी का नाम दिया और मूल मोक्ष पाटम के बजाय पूरे ज्ञान को पतला कर दिया।

मूल एक सौ वर्ग गेम बोर्ड में, 12 वां वर्ग विश्वास था, 51 वां वर्ग विश्वसनीयता था, 57 वां वर्ग उदारता, 76 वां वर्ग ज्ञान था, और 78 वां वर्ग तप था। ये वे वर्ग थे जहाँ सीढ़ी पाई जाती थी और कोई भी तेज़ी से आगे बढ़ सकता था।

41 वां वर्ग अवज्ञा के लिए था, घमंड के लिए 44 वां वर्ग, अशिष्टता के लिए 49 वाँ वर्ग, चोरी के लिए 52 वाँ वर्ग, झूठ बोलने के लिए 58 वाँ वर्ग, नशे के लिए 62 वाँ वर्ग, ऋण के लिए 69 वाँ वर्ग, क्रोध के लिए 84 वाँ वर्ग लालच के लिए 92 वाँ वर्ग, अभिमान के लिए 95 वाँ वर्ग, हत्या के लिए 73 वाँ वर्ग और वासना के लिए 99 वाँ वर्ग।

ये वे वर्ग थे जहाँ साँप के मुँह खुलने का इंतज़ार किया जाता था। 100 वें वर्ग ने निर्वाण या मोक्ष का प्रतिनिधित्व किया।
Corona Antibody Prevalence...

भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) द्वारा 14 जून से छह जुलाई के बीच किए गए एक सीरो सर्वे (Sero Survey) के निष्कर्षों के अनुसार, 11 राज्यों में किये गये सर्वेक्षण में कम से कम दो-तिहाई आबादी में कोरोना वायरस एंटीबॉडी (Coronavirus Antibodies) विकसित पाई गई. मध्य प्रदेश 79 प्रतिशत ‘सीरोप्रीवैलेंस’ के साथ सूची में सबसे ऊपर है जबकि केरल 44.4 प्रतिशत के साथ सबसे नीचे है. असम में ‘सीरोप्रीवैलेंस’ 50.3 प्रतिशत और महाराष्ट्र में 58 प्रतिशत है.

भारत के 70 जिलों में आईसीएमआर द्वारा किए गए राष्ट्रीय सीरो सर्वे के चौथे दौर के निष्कर्षों को केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने बुधवार को साझा किया. सर्वेक्षित जनसंख्या में ‘सीरोप्रीवैलेंस’ राजस्थान में 76.2 प्रतिशत, बिहार में 75.9 प्रतिशत, गुजरात में 75.3 प्रतिशत, छत्तीसगढ़ में 74.6 प्रतिशत, उत्तराखंड में 73.1 प्रतिशत, उत्तर प्रदेश में 71 प्रतिशत, आंध्र प्रदेश में 70.2 प्रतिशत, कर्नाटक में 69.8 प्रतिशत, तमिलनाडु में 69.2 प्रतिशत और ओडिशा में 68.1 प्रतिशत पाई गई.
वेब सीरीज में बनी फिल्मों के गुप्त संदेश आखिर क्या है जो हमारे युवा एवं बालकों के मन को भ्रमित करने, अपनी संस्कृति को घृणा की दृष्टि से देखने के लिए तैया हुए हैं!

नेटफ्लिक्स पर आई जी फ़िल्म देखा,इस फ़िल्म में एक माइनर बच्ची का बलात्कार हुआ है।

बलात्कारी कौन?
हिन्दू!
माथे पर गहरा लाल टीका।

उसके कॉलर ट्यून में गायत्री मंत्र बज रहा है।

उसके घर पर लगातार शिव जी का मंत्र बज रहा है।

एक कसाई उस बच्ची की दादी को बलात्कारी से बदला लेने में मदद करता है।

मुसलमान ईमान वाले होते हैं!हिन्दू सहज ही ....

मैंने दिल्ली क्राइम वेब सीरीज भी देखी! जो निर्भया बलात्कार पर आधारित है। असल घटना में माइनर मुसलमान ने जघन्य अपराध किया, रॉड वाली घटना आपको याद होगी, लेकिन इस वेब सीरीज़ में सारा अपराध राम सिंह के किरदार पर डाल दिया गया।

कौन करता है इनकी फंडिंग!!

पाताल लोक वेब सीरीज में जो हथौड़ी किरदार है - वह शिव जी का ध्यान करता है, शिव जी के ध्यान से व्यक्ति हथौड़ी जैसा अपराधी बनता है। (यही निहितार्थ है)

आगे इसी में एक मुसलमान व्यक्ति का ट्रैन में कारसेवकों द्वारा लॉन्चिंग कर दिया जाता है जबकि वह मासूम है।

म से मासूम और म से मुसरमान, हाय, हाय!

सेक्रेड गेम्स में भी सनातन शिक्षा में विश्व को समाप्त करने का भाव है इस तरह मुद्दे को रखा जाता है।

असुर वेब सीरीज़ में हत्यारा गीता,पुराण और सनातन शास्त्रों का ज्ञाता है।
जाहीर है -हिन्दू शास्त्रों का ज्ञान कितना खतरनाक है जो जघन्य अपराधी बनाता है।जबकि शांतिदूतों का ग्रंथ ईमान पर बन्दे को घसीट कर ले आता है।

कर लो जितना प्रयास करना है ,कर लो,सुना है दीया जब चरम पर जलता है तब शीघ्र ही बुझने वाला होता है।
🔴 बहुत ही सुंदर प्रसंग

शबरी बोली- "हे…राम..! यदि रावण का अंत नहीं करना होता तो राम तुम यहाँ कहाँ से आते ?" राम गंभीर हुए । कहा, "भ्रम में न पड़ो माता ! राम क्या रावण का वध करने आया है? बिल्कुल नहीं... अरे रावण का वध तो लक्ष्मण अपने पैर से वाण चला भी कर सकता है । राम हजारों कोस चल कर इस गहन वन में आया है तो केवल तुमसे मिलने आया है माँ, ताकि हजारों वर्षों बाद जब कोई पाखण्डी भारत के अस्तित्व पर प्रश्न खड़ा करे तो इतिहास चिल्ला कर उत्तर दे कि इस राष्ट्र को क्षत्रिय राम और उसकी भीलनी माँ ने मिल कर गढ़ा था । जब कोई कपटी भारत की परम्पराओं पर उँगली उठाये तो तो काल उसका गला पकड़ कर कहे कि नहीं ! यह एकमात्र ऐसी सभ्यता है जहाँ एक राजपुत्र वन में प्रतीक्षा करती एक दरिद्र वनवासिनी से भेंट करने के लिए चौदह वर्ष का वनवास स्वीकार करता है। राम वन में बस इसलिए आया है ताकि जब युगों का इतिहास लिखा जाय तो उसमें अंकित हो कि सत्ता जब पैदल चल कर समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुँचे तभी वह #रामराज्य है। राम वन में इसलिए आया है ताकि भविष्य स्मरण रखे कि प्रतिक्षाएँ अवश्य पूरी होती हैं ।

सबरी एकटक राम को निहारती रही । राम ने फिर कहा- "राम की वन यात्रा रावण युद्ध के लिए नहीं है माता ! राम की यात्रा प्रारंभ हुई है भविष्य के लिए आदर्श की स्थापना के लिए । राम आया है ताकि भारत को बता सके कि अन्याय का अंत करना ही धर्म है l राम आया है ताकि युगों को सीख दे सके कि विदेश में बैठे शत्रु की समाप्ति के लिए आवश्यक है कि पहले देश में बैठी उसकी समर्थक सूर्पणखाओं की नाक काटी जाय, और खर-दूषणो का घमंड तोड़ा जाय । और राम आया है ताकि युगों को बता सके कि रावणों से युद्ध केवल राम की शक्ति से नहीं बल्कि वन में बैठी सबरी के आशीर्वाद से जीते जाते हैं ।"
सबरी की आँखों में जल भर आया था। उसने बात बदलकर कहा- कन्द खाओगे राम?
राम मुस्कुराए, "बिना खाये जाऊंगा भी नहीं माते..."
सबरी अपनी कुटिया से झपोली में कन्द ले कर आई और राम के समक्ष रख दिया। राम और लक्ष्मण खाने लगे तो कहा- मीठे हैं न प्रभु?
यहाँ आ कर मीठे और खट्टे का भेद भूल गया हूँ माँ ! बस इतना समझ रहा हूँ कि यही अमृत है...

सबरी मुस्कुराईं, बोली...
"सचमुच तुम मर्यादा पुरुषोत्तम हो राम...!
गुरुदेव ने ठीक कहा था..."
Forwarded from मंजू चटर्जी
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