Brief Media
3 subscribers
12 photos
3 files
1 link
Brief Media is a News website
Download Telegram
Adani
Phonepe
Up roadways
Shera IPO
Top selling car
Gautam Adani back
Aaditya thackrey
हमारे भारत में एक कहावत है ..एक जाती ही है जो कभी नहीं जाती..... आजादी से लेकर अब तक हम बाते जाती से ऊपर उठकर समानता लाने की करते रहे हैं.... लेकिन क्या जातीगत समानता आ पाई है....यह आप अपने आस पास के माहौल को देखकर पता लगा सकते हैं... देश में जातीगत जनगणना की मांग फिर से उठने लगी है.....बिहार की नीतीश सरकार ने तो जातीय जनगणना की शुरूआत भी कर दी है...

जल्दी से बिहार के जातीगत जनगणना के बारे में बात कर लेते है.. फिर हम जातीय जनगणना के इतीहास, इसके लाभ और हानी के बारे में बात करेंगे..

बिहार में जातीय जनगणना दो चरणों में होनी है.. जिसका पहला चरण 7 जनवरी से 21 जनवरी 2023 के बीच पूरा हो चुका है..
पहले चरण में राज्य में कुल घरों की संख्या का आकड़ा इकट्ठा किया गया है..

दूसरे चरण की शुरूआत 1 अप्रैल से होगी.. इसमें जिन घरों का आकड़ा जुटाया गया है...उन घरों में रहने वाले लोगों की संख्या, उनकी जाती, उपजती और समाजीक-आर्थीक स्थीती का डाटा कलेक्ट किया जाएगा.. यह प्रक्रिया 30 अप्रैल तक चलेगी.... जनगणना को 31 मई तक पूरा किया जाना है..

अब देश में जातीय जनगणना का क्या इतीहास है इसपर बात करते हैं..

भारत में जातीय जनगणना पहली बार नहीं हो रही है... साल 1931 में अग्रजों ने सबसे पहले जातीय जनगणना कराई थी.... लेकिन 1941 की जनगणना में उन्होंने इस कॉन्सेप्स को बंद कर दिया.. आजादी के बाद 1951 से अब तक केवल एससी-एसटी की ही जातीगत जनगणना होती रही है.....

हालांकी 2011 के जनगणना को केंद्र सरकार ने समाजीक आर्थीक जाती जनगणना के आधार पर किया था...लेकिन यह आकड़ा उस समय की कांग्रेस की केंद्र सरकार ने यह कह कर जारी नहीं किया की इसमें बहुत सारी गलतियां हैं..

जाती की जनसंख्या का कोई डाटा तो है नहीं फिर ये पॉलिटीकल पार्टियां जातियों की संख्या कैसै बताती है.... इसका जवाब है..

1979 में गठीत मंडल कमीशन ने देश में अन्य पिछड़ा वर्ग यानी की ओबीसी की जनसंख्या 52 प्रतिशत होने का अनुमान लगाया था.... मंडल कमीशन की सीफारीश पर इस पर आज ओबीसी को 27 प्रतिशत का आरक्षण प्राप्त है.....

पोलिटीकल पार्टियों का जातीगत आकड़ों का आधार पहला तो यह ही है..... दूसरा पार्टीयां अपने आकलन के हीसाब से किसी.. पार्टिकुलर जाती की... जनसंख्या का दावा भी करती है.... तीसरा नेशनल सैंपल सर्वे के कुछ डाटा को आधार बना कर भी जातीगत जनसंख्या का अनुमान लगाया जाता है...


चलिए जातीगत जनगणना के सकारात्मक पहलूओं के बारे में बात करते हैं...



जातीय जनगणना का सरमर्थन करने वाले बुद्धीजीवियों का पहला तर्क समान प्रतिनिधित्व यानी की Equal Representation का रहा है... एक स्लोगन भी आपने सुना होगा .... जिसकी जीतनी संख्या भारी उतनी उसकी हिस्सेदारी.... जातीगत जनगणना से जातियों की संख्या के आधार पर उनके राजनैतिक, समाजीक और नौकरी पेशो में प्रतिनिधित्व को दूरूस्त किया जा सकेगा.. ऐसा तर्क है...

इसमें दूसरा तर्क है...दबे कुछले..वंछित कम्यूनिटी को उनकी संख्या की आधार पर सरकारी योजनाएं बना कर लाभ पहूंचाया जा सकेगा...इस तरह यह लोग भी अन्य विकासशील या विकसीत लोगों की दायरे में शामिल किए जा सकेंगे..

तीसरा तर्क यह दिया जाता है.. की... जातीगत जनगणना की मदद से केंद्र और राज्य सरकारे सटीक पॉलीसीज बना सकेंगी.... इस तरह से किसी जाती या आर्थिक समाजीक समूह को क्या जरूरत है इसकी पहचान कर पाना बेहद ही आसान हो जाएगा....

चौथा.... न्यायिक सपोर्ट... हॉल ही में हमने यूपी नगरी निकाय चुनाव में आरक्षण के मसले को देखा है.... जातीगत आकड़ा न होने की वजह से हाई कोर्ट ने बिना ओबीसी आरक्षण के चुनाव कराने का आदेश दे दिया था.. मामला अभी सुप्रीम कोर्ट में है और चुनाव टल गया है....


चलिए अब इसके नकारात्मक पहलुओं पर बात करते हैं...

जातीय जनगणना के क्रीटीक कहते हैं की... इससे देश में जातीय ढ़ांचा को और बढ़ावा मिलेगा.. जिसे हम खत्म करने का प्रयास कर रहे है..

-- दूसरा...जाती आधारित रिजर्वेशन में संख्या बल के आधार पर आरक्षण तय करने में दिक्कते आएंगी ...आरक्षण का आकड़ा 50 प्रतिशत से अधिक पहूंच जाएगा... जो की सुप्रीम कोर्ट के 50 प्रतिशत से अधिक आरक्षण न देने के फैसले के खिलाफ होगा..

--- जाती जनगणना से समाजीक असमानता और जातीयों के बीच में तकरान बढ़ेगा.. जिसे अगले कई वर्षों में भी खत्म नहीं किया जा सकेगा... भाईचारे में भी कमी आएगी..
---सबसे बड़ा तर्क है कि भारत में जाती आधारीत पार्टियां अनेकों हैं...जातीगत जनगणना के बाद सभी जातीयों में कुछ नेता बन जाएंगे जो जातीवाद और बाद मे परिवारद में बदल जाएंगे....मेहनत और सेवा के माध्यम से जननेता या फिर सेवक यानी की सर्विस मैन बनने की चाहत रखने वाले हर जाती वर्ग के युवाओं को जाती विशेष की राजनीती का सामना करना पडेगा.... इसतरह से देश में और प्रदेश में पॉलीटीकल स्टेबलीटी का खतरा रहेगा... किसी भी देश के विकास के लिए पॉलिटीकल स्टैबिलीटी का होना सबसे जरूरी है...

आप जातीगत जनगणना के बारे में क्या सोचते हैं इसके बारे में कमेंट में जरूर बताइए..
सूरत के जिला कोर्ट से... "मोदी सरनेम" अपराधिक मानहानी के मामले में Convict hone के बाद राहुल गांधी की संसद की सदस्तयता भी चली गई है... कोर्ट ने उन्हें 2 साल की सजा भी सुनाई है... फिलहाल.. राहुल लोवर कोर्ट के फैसले को उच्च आदालत में चैलेंज करने के लिए 30 दिनों के बेल पर हैं..... अब लोगों के मन में तमाम तरह के सवाल है....

क्या मामला था जिसके कारण कोर्ट ने उन्हें सजा सुना दी....अब राहुल गांधी के पास क्या विकल्प है... किस नियम के तहत राहुल की सदस्यता रद्द की गई है....आप सब मीडिया में पढ़ सुन रहे होंगे की अब राहुल 8 साल तक चुनाव नहीं लड़ पाएंगे... राहुल गांधी ने कौन सा अध्यादेश फाड़ा था...और राहुल के अलावा और किन नेताओं को अपनी विधान सभा और लोक सभा की सदस्यता गवानी पड़ी है...इन सभी बातों का जवाब इस विडियों में जानेंगे...तो चलिए शुरू करते हैं...

सबसे पहले आखिर राहुल की कीस मामले में जेल हुई..

- 2019 में कर्नाटक के कोलार में राहुल गांधी ने एक चुनावी सभा में कहा था की....नीरव मोदी...ललीत मोदी... नरेंद्र मोदी....इस सभी चोरों के नाम मोदी क्यों है... इसके बाद गुजरात के पुर्व मंत्री और बिजेपी बिधायक...पूर्णेश मोदी.. ने सुरत में राहुल गांधी के खिलाफ.... मोदी...जाती या उपनाम के... खिलाफ...अपमानजनक टिप्पड़ी के लिए Criminal Defamation का केस किया था... मामले में सुरत District Court ने 20 मार्च को सुरनवाई पूरी करने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया था....और 22 मार्च को अपना फैसला सुनाया...जिसमें कोर्ट ने राहुल गांधी को मानहानी का दोषी बताते हुए 2 साल की सजा सुनाई....


दूसरा सवाल है...राहुल की संसदीय सदस्यता क्यों चली गई....

-
👍1
सूरत के जिला कोर्ट से... "मोदी सरनेम" अपराधिक मानहानी के मामले में Convict hone के बाद राहुल गांधी की संसद की सदस्तयता भी चली गई है... कोर्ट ने उन्हें 2 साल की सजा भी सुनाई है... फिलहाल.. राहुल लोवर कोर्ट के फैसले को उच्च आदालत में चैलेंज करने के लिए 30 दिनों के बेल पर हैं..... अब लोगों के मन में तमाम तरह के सवाल है....

क्या मामला था जिसके कारण कोर्ट ने उन्हें सजा सुना दी....अब राहुल गांधी के पास क्या विकल्प है... किस नियम के तहत राहुल की सदस्यता रद्द की गई है....आप सब मीडिया में पढ़ सुन रहे होंगे की अब राहुल 8 साल तक चुनाव नहीं लड़ पाएंगे... राहुल गांधी ने कौन सा अध्यादेश फाड़ा था...और राहुल के अलावा और किन नेताओं को अपनी विधान सभा और लोक सभा की सदस्यता गवानी पड़ी है...इन सभी बातों का जवाब इस विडियों में जानेंगे...तो चलिए शुरू करते हैं...

सबसे पहले आखिर राहुल की कीस मामले में जेल हुई..

- 2019 में कर्नाटक के कोलार में राहुल गांधी ने एक चुनावी सभा में कहा था की....नीरव मोदी...ललीत मोदी... नरेंद्र मोदी....इस सभी चोरों के नाम मोदी क्यों है... इसके बाद गुजरात के पुर्व मंत्री और बिजेपी बिधायक...पूर्णेश मोदी.. ने सुरत में राहुल गांधी के खिलाफ.... मोदी...जाती या उपनाम के... खिलाफ...अपमानजनक टिप्पड़ी के लिए Criminal Defamation का केस किया था... मामले में सुरत District Court ने 20 मार्च को सुरनवाई पूरी करने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया था....और 22 मार्च को अपना फैसला सुनाया...जिसमें कोर्ट ने राहुल गांधी को मानहानी का दोषी बताते हुए 2 साल की सजा सुनाई....


दूसरा सवाल है...राहुल की संसदीय सदस्यता क्यों चली गई....

people Representative Acct 1951 के धारा 8(3) के तहत अगर कोई भी विधायक या सासंद किसी भी अपराध में दोषी पाया जाता है और उसे 2 साल या इससे अधिक साल की सजा होती है तो उसकी लोकसभा या विधानसभा की सदस्यता खत्म हो जाती है....

राहुल गांधी को सुरत कोर्ट ने मोदी सरनेम को डिफेम करने का दोषी पाया और 2 साल की सजा दी... जिसके कारण राहुल गांधी की सदस्यता चली गई...

हालांकी कोर्ट ने तुरंत ही राहुल को उपरी आदालत में फैसले को चुनौती देने के लिए 30 दिन की बेल दे दी.....


रास्ता क्या है राहुल गांधी के पास

- हायर कोर्ट फैसले पर रोक लगा दे या रद्द कर दे.....
- तो सदस्यता वापस मिल सकती है..

अब बाते चल रही थी की राहुल 8 साल तक चुनाव नहीं लड़ पाएंगे.. इसमें क्या सच्चाई है..

सच्चाई यह है कि अगर कोर्ट राहुल की सजा पर रोक नहीं लगाता है तो.. राहुल को सजा के बाद 6 साल तक कोई भी चुनाव लड़ने की इजाजत नहीं होगी....


अब क्या राहुल पहले सांसद या विधायक हैं जिन्हें किसी मामले में दोषी पाए जाने के बाद...अपनी सदस्यता गवाइं है....नहीं भाई.... लिस्ट लंबी है.... चलिए आपको बताते हैं.....

लालु प्रसाद यादव

राजद सुप्रीमो को सितंबर 2013 में चारा घोटाला मामले में दोषी ठहराए जाने के बाद लोकसभा से अयोग्य घोषित कर दिया गया था। वह बिहार के सारण से सांसद थे।

जे जयललिता:

AIADMK सुप्रीमो जे जयललिता को आय से अधिक संपत्ति के मामले में चार साल की जेल की सजा के बाद सितंबर 2014 में तमिलनाडु विधानसभा से अयोग्य घोषित कर दिया गया था। अपनी अयोग्यता के समय वह तमिलनाडु की मुख्यमंत्री थीं और उन्हें पद से इस्तीफा देना पड़ा था।

पी पी मोहम्मद फैजल: हत्या के प्रयास के मामले में जनवरी 2023 में 10 साल की जेल की सजा सुनाए जाने के बाद राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के लक्षद्वीप के सांसद पीपी मोहम्मद फैसल स्वत: अयोग्य हो गए। हालांकि, बाद में केरल उच्च न्यायालय ने उनकी सजा और सजा को निलंबित कर दिया था।

आजम खान: समाजवादी पार्टी के नेता आजम खान को अक्टूबर 2022 में उत्तर प्रदेश विधानसभा से अयोग्य घोषित कर दिया गया था, क्योंकि एक अदालत ने उन्हें 2019 के अभद्र भाषा मामले में तीन साल की जेल की सजा सुनाई थी। उन्होंने विधानसभा में रामपुर सदर का प्रतिनिधित्व किया।

-भाजपा विधायक विक्रम सिंह सैनी को 2013 के मुजफ्फरनगर दंगों के एक मामले में दो साल की कैद की सजा सुनाए जाने के बाद अक्टूबर 2022 से उत्तर प्रदेश विधानसभा से अयोग्य घोषित कर दिया गया था। सैनी मुजफ्फरनगर के खतौली से विधायक थे।

Congress MLA Pradeep Chaudhary, BJP MLA Kuldeep Singh Sengar, Abdullah Azam Khan
सूरत जिला अदालत से “मोदी उपनाम” के आपराधिक मानहानि के मामला में दोषी पावल गईला के बाद राहुल गांधी के संसद के सदस्यता खतम हो गईल बा। अदालत उनका के 2 साल के जेल के सजा भी सुनवले बा....राहुल अबे निचली अदालत के फैसला के हायर कोर्ट में चुनैती देवे के खातीर 30 दिन के बेल पर बान... अब लोग के तमाम तरह के सवाल बा....

कवन बात रहे जवना के वजह से कोर्ट उनुका के सजा सुनवलस....अब राहुल गांधी के लगे कवन विकल्प बा...कवना नियम के तहत राहुल के सदस्यता रद्द हो गईल बा... आप सब मीडिया में पढ़त सुनत होखब कि अब राहुल 8 साल तक चुनाव ना लड़ी पईहे.. .. राहुल के अलावा अउरी कौन नेता लोग विधानसभा चाहे लोकभा के अयोग्य धोषित भईल बान.....एह सब बात के जवाब ये वीडियो में मिल जाई...त चली शुरू करल जाव ...

सबसे पहिले त राहुल के कवना मामला में सजा दिहल गईल?

- 2019... में कर्नाटक के कोलार में राहुल गांधी एगो चुनावी सभा में कहले रहले कि....नीरव मोदी...ललित मोदी...नरेंद्र मोदी....एह सब चोर के नाम मोदी काहे बा...एकरा बाद गुजरात के पूर्व मंत्री अवुरी भाजपा विधायक...पूर्णेश मोदी..सूरत में राहुल गांधी के खिलाफ...मोदी जाति यानी उपनाम.. के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणी करे के आरोप में आपराधिक मानहानि के मामला दर्ज करवले रहले...... 20 मार्च के सुनवाई पूरा कईला के बाद फैसला कोर्ट फैसला सुरक्षित रख लेले रहे ....और 22 मार्च के आपन फैसला देले रहे...जवना में राहुल गांधी मानहानि के दोषी पावल गइल रहनन और उनके 2 साल के सजा भी सुनावल गइल रहे....


दूसरा सवाल बा... राहुल के संसदीय सदस्यता काहे खतम हो गईल....

जनप्रतिनिधि अधिनियम 1951 के धारा 8(3) के तहत अगर कवनो विधायक या सांसद अपराध के दोषी पावल जानन और उनके 2 साल या ओसे अधिक के सजा सुना दिहल बा... ता उनकर लोकसभा या विधानसभा के सदस्यता खतम हो जाला..

राहुल गांधी के सूरत कोर्ट से मोदी उपनाम के बदनाम करे के दोषी पावल गईल अवुरी 2 साल के सजा सुनावल गईल... जवना के चलते राहुल गांधी के लोकसभा से सदस्यता खतम हो गईल...




राहुल गांधी के पास का रास्ता बा..

- हाईकोर्ट के फैसला पर रोक लगावे के चाहीं भा रद्द करे के चाहीं.....
तब रउरा आपन सदस्यता वापस पा सकेनी.



अब बात चलत रहे कि राहुल 8 साल ले चुनाव ना लड़ पइहें.. एहमें का सच्चाई बा.. साच त ई बा कि अगर कोर्ट राहुल के सजा पर रोक ना लगाई. त . राहुल सजा कटला के बाद 6 साल तक कवनो चुनाव ना लड़ पइह....मतलब राहुल आठ साल तक चुनाव ना लड़ पईहे...अगर सजा जारी रही त..


अब.....चलीं बात कइल जाव कि...का......राहुल पहिला सांसद चाहे विधायक हउवें जे कवनो ना कवनो मामला में दोषी पावल गइला का बाद आपन सदस्यता गँवा दिहले बाड़न....ना भाई.... लिस्ट लमहर बा.... हम बतावत बानी.....

लालू प्रसाद यादव

राजद सुप्रीमो के चारा घोटाला के मामला में दोषी पावल गईला के बाद सितंबर 2013 में लोकसभा से अयोग्य करार दिहल गईल रहे। उ बिहार के सारण से सांसद रहले।

जयललिता :

एआईएडीएमके के सुप्रीमो जयललिता के सितंबर 2014 में असमान संपत्ति के मामला में चार साल के जेल के सजा होखला के बाद तमिलनाडु विधान सभा से अयोग्य क दिहल गईल रहे। अयोग्य होखे के समय उ तमिलनाडु के मुख्यमंत्री रहली.. उनके पद से इस्तीफा देवे के पड़ल।

पी पी मोहम्मद फैजल :

जनवरी 2023 में हत्या के कोशिश के मामला में 10 साल के जेल के सजा मिलला के बाद राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी से लक्षद्वीप के संसद पीपी मोहम्मद फैसल के सदस्यता खतम हो गइल रहे। हालांकि बाद में केरल हाईकोर्ट उनके सजा प रोक लगा देलस... जवना के बाद उनक सदस्यता वापस मिल गईल रहे....

आजम खान

समाजवादी पार्टी के नेता आजम खान के अक्टूबर 2022 में उत्तर प्रदेश विधान सभा से अयोग्य करार दिहल गइल रहे.... साल 2019 में हेट स्पीच के मामला में कोर्ट उनका के तीन साल के जेल के सजा सुनवले रहे... उ रामपुर सदर सीट से विधायक रहले..

भाजपा विधायक विक्रम सिंह सैनी के 2013 के मुजफ्फरनगर दंगा के मामला में 2 साल के जेल के सजा काटला के बाद अक्टूबर 2022 से उत्तर प्रदेश विधान सभा से अयोग्य करार दिहल गईल रहे...सैनी मुजफ्फरनगर के खटौली से विधायक रहले।

कांग्रेस विधायक प्रदीप चौधरी, भाजपा विधायक कुलदीप सिंह सेंगर, अब्दुल्ला आजम खान के सदस्यता कोर्ट से दोषी ठहरावे के बाद चल गइल रहे...