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Bihar Naman GS (An Institute for UPSC and BPSC), Patna✌️
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ये भारत सिंह है. कानपुर से है. दिल्ली में लंबे समय तक हमारे Flatmate रहे हैं. काफी धनी व्यक्तित्व है इनका. इनके संघर्ष को मैंने लगभग 3 साल से ज्यादा मैंने व्यक्तीगत रूप से देखा है. इन्होंने BPSC समेत कुल 8 PCS के Mains और 3 बार UPSC का Mains दिया है. Finally 2024 UPPSC में इनका फाइनल चयन हो गया है जिसका Result 30 March 2026 को जारी किया गया था.
इनकी यात्रा का Video Bihar Naman GS के Official Youtube Channel पर आज दिनांक 20.04.2026 को 8 pm अपलोड हो जाएगा. आपलोग यह वीडियो जरूर देखिएगा. जीवन में कुछ जरूर परिवर्तन होगा इसके बाद.
Santosh Kashyap
Bihar Naman GS
Patna
इनकी यात्रा का Video Bihar Naman GS के Official Youtube Channel पर आज दिनांक 20.04.2026 को 8 pm अपलोड हो जाएगा. आपलोग यह वीडियो जरूर देखिएगा. जीवन में कुछ जरूर परिवर्तन होगा इसके बाद.
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UPPSC 2024 Topper, Rank 26 🔥 Bharat Singh | Naib Tehsildar | Full Strategy & Journey #uppsc
इस वीडियो में हम बात कर रहे हैं UPPSC 2024 के Rank 26 Topper Bharat Singh की पूरी journey के बारे में — कैसे उन्होंने तैयारी शुरू की, किन challenges का सामना किया, और कैसे उन्होंने Naib Tehsildar*का सपना पूरा किया।
🎯 अगर आप भी UPPSC / BPCS / UPPSC की तैयारी…
🎯 अगर आप भी UPPSC / BPCS / UPPSC की तैयारी…
देख रहा है विनोद, ई बिहार नमन वाला केतना हार्ड Question Set करता है, अपने 72nd BPSC PT FLT में. देखो तो - -
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प्रश्न 1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. अनुच्छेद 74(1) के पश्चात राष्ट्रपति मंत्रिपरिषद की सलाह से पूर्णतः बंधा है, तथा पुनर्विचार के बाद दी गई सलाह को अस्वीकार करने का कोई संवैधानिक विकल्प शेष नहीं रहता।
2. अनुच्छेद 75(2) में वर्णित “राष्ट्रपति की प्रसन्नता” वास्तव में प्रधानमंत्री की राजनीतिक इच्छा पर निर्भर मानी जाती है।
3. अनुच्छेद 78 के अंतर्गत राष्ट्रपति को यह अधिकार है कि वह किसी भी मंत्रिपरिषद के निर्णय को अनिवार्य रूप से पुनर्विचार हेतु प्रस्तुत करने का निर्देश दे सकता है।
4. मंत्रिपरिषद की सामूहिक उत्तरदायित्व की अवधारणा का अर्थ यह भी है कि लोकसभा द्वारा अविश्वास प्रस्ताव पारित होने पर केवल प्रधानमंत्री को ही इस्तीफा देना होता है, अन्य मंत्रियों को नहीं।
5. राष्ट्रपति, यदि स्पष्ट बहुमत के अभाव में प्रधानमंत्री की नियुक्ति करता है, तो उस स्थिति में उसका विवेक न्यायिक समीक्षा से पूर्णतः परे माना जाता है।
कूट :
(A) केवल 1, 2 और 3
(B) केवल 1 और 2
(C) केवल 2, 3 और 5
(D) केवल 1, 2, 3 और 5
#bpsc #aedo #72ndbpsc #73rdbpsc
1. अनुच्छेद 74(1) के पश्चात राष्ट्रपति मंत्रिपरिषद की सलाह से पूर्णतः बंधा है, तथा पुनर्विचार के बाद दी गई सलाह को अस्वीकार करने का कोई संवैधानिक विकल्प शेष नहीं रहता।
2. अनुच्छेद 75(2) में वर्णित “राष्ट्रपति की प्रसन्नता” वास्तव में प्रधानमंत्री की राजनीतिक इच्छा पर निर्भर मानी जाती है।
3. अनुच्छेद 78 के अंतर्गत राष्ट्रपति को यह अधिकार है कि वह किसी भी मंत्रिपरिषद के निर्णय को अनिवार्य रूप से पुनर्विचार हेतु प्रस्तुत करने का निर्देश दे सकता है।
4. मंत्रिपरिषद की सामूहिक उत्तरदायित्व की अवधारणा का अर्थ यह भी है कि लोकसभा द्वारा अविश्वास प्रस्ताव पारित होने पर केवल प्रधानमंत्री को ही इस्तीफा देना होता है, अन्य मंत्रियों को नहीं।
5. राष्ट्रपति, यदि स्पष्ट बहुमत के अभाव में प्रधानमंत्री की नियुक्ति करता है, तो उस स्थिति में उसका विवेक न्यायिक समीक्षा से पूर्णतः परे माना जाता है।
कूट :
(A) केवल 1, 2 और 3
(B) केवल 1 और 2
(C) केवल 2, 3 और 5
(D) केवल 1, 2, 3 और 5
#bpsc #aedo #72ndbpsc #73rdbpsc
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देखिए, हम जो 72वीं BPSC PT के लिए FLT (Full Length Test) आयोजित कर रहे हैं, उसमें प्रश्नों का स्तर ठीक उसी प्रकार रखा गया है जैसा वास्तविक परीक्षा अर्थात 72 वीं BPSC PT में अपेक्षित होगा*।
इन प्रश्नों के निर्माण में सिविल सेवा परीक्षा के पैटर्न का गहन और दीर्घ अनुभव रखने वाले तीन अनुभवी कंटेंट राइटर्स की टीम कार्य कर रही है। इसके साथ ही, प्रश्नों को और अधिक तार्किक, संतुलित तथा परीक्षा-उपयोगी बनाने के लिए हम आधुनिक AI तकनीक का भी प्रभावी उपयोग कर रहे है।
Bihar Naman GS
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इन प्रश्नों के निर्माण में सिविल सेवा परीक्षा के पैटर्न का गहन और दीर्घ अनुभव रखने वाले तीन अनुभवी कंटेंट राइटर्स की टीम कार्य कर रही है। इसके साथ ही, प्रश्नों को और अधिक तार्किक, संतुलित तथा परीक्षा-उपयोगी बनाने के लिए हम आधुनिक AI तकनीक का भी प्रभावी उपयोग कर रहे है।
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मेरा यह Article पिछले साल Educational News अखबार में छपा था. उस समय यह बड़ा ही ज्वलंत मुद्दा था. संसद और सुप्रीम कोर्ट में तना - तनी थी. मैंने अपने ज्ञान के स्तर से इसे संवैधानिकता के आधार पर समझाने का प्रयास किया है इस Article में. आपलोग इसे जरूर पढ़िए, नया सीखेंगे कुछ.
Santosh Kashyap
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1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. 42वें संशोधन के पश्चात राष्ट्रपति के लिए मंत्रिपरिषद की सलाह को पुनर्विचार हेतु लौटाने का भी कोई संवैधानिक प्रावधान शेष नहीं रहा।
2. राष्ट्रपति की “वास्तविक शक्ति” का निर्धारण संवैधानिक प्रावधानों से अधिक राजनीतिक वैधता (political legitimacy) और परिस्थितियों से होता है।
3. यदि किसी दल को स्पष्ट बहुमत प्राप्त न हो, तो राष्ट्रपति का विवेक पूर्णतः निरंकुश हो जाता है।
4. संविधान के ढाँचे में रहते हुए राष्ट्रपति सीमित अवधि तक व्यावहारिक प्रभाव (practical leverage) बना सकता है, परन्तु यह अनंतकाल तक नहीं चल सकता।
5. संसद की उपेक्षा कर तथा सैन्य बल के सहारे शासन बनाए रखना भारतीय राजनीतिक परंपरा और व्यवहारिक राजनीति के विरुद्ध है।
6. राष्ट्रपति की भूमिका न केवल प्रधानमंत्री के व्यक्तित्व, बल्कि दलगत प्रतिस्पर्धा और संस्थागत परिपक्वता (institutional maturity) से भी प्रभावित होती है।
सही उत्तर चुनिए:
(A) केवल 2, 4, 5 और 6
(B) केवल 1, 2, 3 और 6
(C) केवल 2, 3, 4 और 5
(D) केवल 1, 3, 5 और 6
1. 42वें संशोधन के पश्चात राष्ट्रपति के लिए मंत्रिपरिषद की सलाह को पुनर्विचार हेतु लौटाने का भी कोई संवैधानिक प्रावधान शेष नहीं रहा।
2. राष्ट्रपति की “वास्तविक शक्ति” का निर्धारण संवैधानिक प्रावधानों से अधिक राजनीतिक वैधता (political legitimacy) और परिस्थितियों से होता है।
3. यदि किसी दल को स्पष्ट बहुमत प्राप्त न हो, तो राष्ट्रपति का विवेक पूर्णतः निरंकुश हो जाता है।
4. संविधान के ढाँचे में रहते हुए राष्ट्रपति सीमित अवधि तक व्यावहारिक प्रभाव (practical leverage) बना सकता है, परन्तु यह अनंतकाल तक नहीं चल सकता।
5. संसद की उपेक्षा कर तथा सैन्य बल के सहारे शासन बनाए रखना भारतीय राजनीतिक परंपरा और व्यवहारिक राजनीति के विरुद्ध है।
6. राष्ट्रपति की भूमिका न केवल प्रधानमंत्री के व्यक्तित्व, बल्कि दलगत प्रतिस्पर्धा और संस्थागत परिपक्वता (institutional maturity) से भी प्रभावित होती है।
सही उत्तर चुनिए:
(A) केवल 2, 4, 5 और 6
(B) केवल 1, 2, 3 और 6
(C) केवल 2, 3, 4 और 5
(D) केवल 1, 3, 5 और 6
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Forwarded from Bihar Naman GS (An Institute for UPSC and BPSC), Patna✌️
72 वीं और 73 वीं BPSC के Sincere छात्र / छात्राएं इस क्लास से जुड़ सकते हैं
1. निम्नलिखित कथनों का आलोचनात्मक परीक्षण कीजिए—
1. बिहार में चीनी उद्योग की उत्पत्ति औपनिवेशिक पूंजी के प्रभाव में हुई, परन्तु इसका क्षेत्रीय संकेंद्रण पूर्णतः प्राकृतिक कारकों द्वारा निर्धारित रहा है, न कि नीतिगत हस्तक्षेपों द्वारा।
2. 1903 ई. में बेतिया में स्थापित चीनी मिल को भारत का प्रथम “व्यावसायिक रूप से सफल” चीनी उद्योग कहा जा सकता है, क्योंकि इससे पूर्व के प्रयास या तो प्रयोगात्मक थे अथवा संस्थागत समर्थन के अभाव में स्थायित्व प्राप्त नहीं कर सके।
3. बिहार के चीनी उद्योग का वर्तमान भौगोलिक वितरण ऐतिहासिक पथ-निर्भरता (path dependency) को दर्शाता है, जहां प्रारंभिक स्थापना वाले क्षेत्रों में ही बाद में औद्योगिक सघनता विकसित हुई।
4. 1990 के दशक के पश्चात् चीनी मिलों के पतन को केवल आर्थिक अक्षमता से नहीं समझा जा सकता, बल्कि इसमें नीतिगत उदारीकरण, सहकारी संरचना की विफलता एवं कृषि-औद्योगिक असंतुलन की भी भूमिका रही।
5. गन्ना उत्पादन की स्थिरता को केवल अनुकूल जलवायु से जोड़ना भ्रामक है, क्योंकि यह “कृषक बाध्यता” (farmer compulsion) और बाजार-निर्भरता का भी परिणाम है।
6. उत्तर बिहार में गन्ना उत्पादन का प्रभुत्व इस तथ्य को भी रेखांकित करता है कि सिंचाई परियोजनाएँ (जैसे गंडक) केवल पूरक कारक हैं, न कि निर्धारक कारक।
कूट :
(A) केवल 2, 3, 4 और 5 सही हैं
(B) केवल 1, 2, 3, 4 और 6 सही हैं
(C) केवल 2, 3, 4, 5 और 6 सही हैं
(D) केवल 1, 3, 5 और 6 सही हैं
#bpsc #72ndbpsc #biharnaman #mcq #upsc #Objective
1. बिहार में चीनी उद्योग की उत्पत्ति औपनिवेशिक पूंजी के प्रभाव में हुई, परन्तु इसका क्षेत्रीय संकेंद्रण पूर्णतः प्राकृतिक कारकों द्वारा निर्धारित रहा है, न कि नीतिगत हस्तक्षेपों द्वारा।
2. 1903 ई. में बेतिया में स्थापित चीनी मिल को भारत का प्रथम “व्यावसायिक रूप से सफल” चीनी उद्योग कहा जा सकता है, क्योंकि इससे पूर्व के प्रयास या तो प्रयोगात्मक थे अथवा संस्थागत समर्थन के अभाव में स्थायित्व प्राप्त नहीं कर सके।
3. बिहार के चीनी उद्योग का वर्तमान भौगोलिक वितरण ऐतिहासिक पथ-निर्भरता (path dependency) को दर्शाता है, जहां प्रारंभिक स्थापना वाले क्षेत्रों में ही बाद में औद्योगिक सघनता विकसित हुई।
4. 1990 के दशक के पश्चात् चीनी मिलों के पतन को केवल आर्थिक अक्षमता से नहीं समझा जा सकता, बल्कि इसमें नीतिगत उदारीकरण, सहकारी संरचना की विफलता एवं कृषि-औद्योगिक असंतुलन की भी भूमिका रही।
5. गन्ना उत्पादन की स्थिरता को केवल अनुकूल जलवायु से जोड़ना भ्रामक है, क्योंकि यह “कृषक बाध्यता” (farmer compulsion) और बाजार-निर्भरता का भी परिणाम है।
6. उत्तर बिहार में गन्ना उत्पादन का प्रभुत्व इस तथ्य को भी रेखांकित करता है कि सिंचाई परियोजनाएँ (जैसे गंडक) केवल पूरक कारक हैं, न कि निर्धारक कारक।
कूट :
(A) केवल 2, 3, 4 और 5 सही हैं
(B) केवल 1, 2, 3, 4 और 6 सही हैं
(C) केवल 2, 3, 4, 5 और 6 सही हैं
(D) केवल 1, 3, 5 और 6 सही हैं
#bpsc #72ndbpsc #biharnaman #mcq #upsc #Objective
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