उदयपुर संभाग में मानसून पूरी तरह सक्रिय है और जलाशयों में पानी की आवक तेजी से जारी है। ऐसे वक्त में जल संसाधन विभाग को बांधों और एनिकटों की मरम्मत की सुध आई है। विभाग ने ऐन बारिश के मौसम में बांधों के जीर्णोद्धार और पानी निकासी से जुड़े तीन बड़े कामों के लिए ई-निविदा (टेंडर) जारी की है।जो काम भीषण गर्मी के दौरान आराम से पूरे किए जा सकते थे, उनके टेंडर अब बारिश के बीच निकाले जा रहे हैं। ऐसे में उफनते जलाशयों के बीच निर्माण व मरम्मत कार्य समय पर पूरा करना विभाग के लिए बड़ी चुनौती रहेगा। तीनों प्रोजेक्ट्स की तय अवधि में वर्षा ऋतु शामिल है। ऐसे में लबालब जलाशयों और तेज बहाव के बीच जीर्णोद्धार का काम कराना तकनीकी रूप से आसान नहीं होगा। बड़ा सवाल यह है कि यदि विभाग यह कसरत गर्मी के महीनों में कर लेता, तो मानसून से पहले काम पूरा हो जाता और जनता को बारिश में इसका सीधा लाभ मिलता।
केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह शनिवार रात 10:30 बजे विशेष विमान से उदयपुर पहुंचे। एयरपोर्ट पर मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने डबोक एयरपोर्ट पर उनका स्वागत किया। एयरपोर्ट पर जनजाति मंत्री बाबूलाल खराड़ी, सहकारिता मंत्री गौतम दक, राजस्व मंत्री हेमंत मीणा, सांसद सीपी जोशी, सांसद डॉ. मन्नालाल रावत और राज्यसभा सांसद चुन्नीलाल गरासिया मौजूद रहे। इसके अलावा विधायक ताराचंद जैन, फूल सिंह मीणा, उदयलाल डांगी, शांता मीणा और प्रताप भील ने भी गृहमंत्री का स्वागत किया। भाजपा शहर जिलाध्यक्ष गजपाल सिंह राठौड़, देहात जिलाध्यक्ष पुष्कर तेली और सलूंबर जिलाध्यक्ष चंद्रशेखर जोशी भी एयरपोर्ट पर मौजूद रहे। एयरपोर्ट से अमित शाह सीधे सुखाड़िया सर्कल स्थित गेस्ट हाउस पहुंचे, जहां वे रात्रि विश्राम करेंगे। वही मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा और कई मंत्री भी सर्किट हाउस में ही रुक रहे हैं।केन्द्रीय मंत्री शाह रविवार सुबह 11 बजे मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के साथ हेलिकॉप्टर से चित्तौड़गढ़ जिले के निम्बाहेड़ा जाएंगे। वहां पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की प्रतिमा का अनावरण करेंगे और जनसभा को संबोधित करेंगे।
उदयपुर में बारिश को लेकर आज मौसम साफ रहने की संभावना है। इसके साथ ही कुछ इलाकों में हल्की बूंदाबांदी हो सकती है। 19 अगस्त से एक बार फिर बारिश की गतिविधियां शुरू हो सकती है। उदयपुर की औसत बारिश की बात करें तो बारिश नहीं होने की वजह से माइनस का आंकड़ा बढ़ता जा रहा था, लेकिन 12 अगस्त को एक दिन हुई तेज बारिश ने इस नंबर को आधा कवर करते हुए 38 प्रतिशत माइनस से घटकर सीधे 18 प्रतिशत आ गया है। उदयपुर जिले में 15 अगस्त 2026 तक 414.3 मिलीमीटर बारिश के मुकाबले 338.6 मिलीमीटर बारिश हुई यानि की 18 प्रतिशत कम बारिश हुई है। उदयपुर में मानसून सीजन (जून-सितंबर) में 653 मिमी यानी 65.3 सेमी बारिश अनुमानित होती है। इससे पहले उदयपुर में 10 अगस्त 2026 तक 233 मिलीमीटर बारिश हो चुकी थी। वैसे उदयपुर की जो नॉर्मल बारिश की रेंज है उसके अनुसार इस तारीख तक यहां पर 378 मिलीमीटर बारिश हो जानी थी। यानि उदयपुर में इस दिन तक 38 मिलीमीटर बारिश कम हुई थी।
राजस्थान को हरा-भरा बनाने के लिए चलाए जा रहे हरियालो राजस्थान अभियान को अब स्कूलों से जोड़कर व्यापक रूप देने की तैयारी है। शिक्षा विभाग ने अभियान के प्रभावी रि यान्वयन के लिए पंचायत स्तर पर हर शनिवार सघन अभियान चलाकर वृक्षारोपण महोत्सव आयोजित करने के निर्देश दिए हैं। यानी अब स्कूलों में शनिवार सिर्फपढ़ाई और सहशैक्षणिक गतिविधियों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि हरियाली बढ़ाने का दिन भी बनेगा। शिक्षा विभाग के निर्देशों के अनुसार प्रत्येक विद्यार्थी और स्टाफ सदस्य को आवंटित लक्ष्य के अनुरूप विद्यालय परिसर और ग्राम पंचायत क्षेत्र में पौधरोपण करवाया जाएगा। इसका उद्देश्य सिर्फ पौधे लगाना नहीं, बल्कि लगाए गए पौधों की निगरानी और उनके संरक्षण को भी सुनिश्चित करना है।
अमृत योजना 2.0 के तहत सीवरेज लाइन बिछाने के नाम पर खोदी गई सड़कों की उदयपुर विकास प्राधिकरण (यूडीए) और नगर निगम को मानसून के बीच याद आई है। सालभर तक शहरवासियों को गड्डों में हिचकोले खिलाने के बाद अब दोनों विभाग बारिश के बीच 8.03 करोड़ रुपए खर्च कर 18.08 किमी सड़कों की मरम्मत करवाने जा रहे हैं। तकनीकी रूप से गीली सतह पर डामर की पकड़ टिकना नामुमकिन है, फिर भी नगर निगम ने वर्क ऑर्डर जारी कर दिया है और यूडीए 18 अगस्त तक करने जा रहा है। ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि बारिश में डामर बह गया तो जिम्मेदार कौन होगा ? ठेकेदार पर रिकवरी होगी या फिर सरकारी खजाने से दोबारा जनता का पैसा फूंका जाएगा?
15 अगस्त और वीकेंड एक साथ आने से लेकसिटी में पर्यटन का जबरदस्त बूम देखने को मिला। शनिवार को स्वतंत्रता दिवस के साथ छुट्टी का फायदा उठाने के लिए बड़ी संख्या में पर्यटक उदयपुर पहुंचे। शहर के प्रमुख पर्यटन स्थलों पर सुबह से ही पर्यटकों की भीड़ जुटने लगी। दोपहर बाद पर्यटन स्थलों और हिल एरिया की ओर जाने वाली सड़कों पर वाहनों का दबाव बढ़ गया। कई जगह जाम के हालात बने और पर्यटकों को कुछ दूरी तय करने में भी काफी समय लगा। सज्जनगढ़ किला, फतहसागर झील, सहेलियों की बाड़ी, गुलाब बाग, बायोलॉजिकल पार्क, बागोर की हवेली और रायता हिल्स सहित प्रमुख पर्यटन स्थलों पर दिनभर पर्यटकों की आवाजाही बनी रही। बारिश के मौसम में पहाड़ियों और झीलों का बदला स्वरूप पर्यटकों को खासा आकर्षित कर रहा है। शहर के आसपास के हिल एरिया में हरियाली देखने और मानसून का आनंद लेने के लिए भी बड़ी संख्या में लोग पहुंचे।
आज के दौर में मामूली सिरदर्द हो या जोड़ों का दर्द, आम इंसान तुरंत पेनकिलर या एंटीबायोटिक लेने का आदी हो चुका है। लेकिन, एलोपैथिक दवाइयों के इस तात्कालिक प्रभाव और दवाइयों की आदत (पिल डिपेंडेंसी) के बीच अब एक बड़ा सामाजिक बदलाव भी देखने को मिल रहा है।बार-बार होने वाली बीमारियों और एलोपैथी के साइड इफेक्ट्स से परेशान मरीज अब रोग को जड़ से खत्म करने के लिए आयुर्वेद की शरण में जा रहे हैं। चरक जयंती पर उदयपुर जिले के सरकारी आयुर्वेद चिकित्सालयों के चौंकाने वाले आंकड़े इसी रुझान पर मुहर लगा रहे हैं। साइटिका, सर्वाइकल, माइग्रेन, मोटापा, आर्थराइटिस, डिप्रेशन और लाइफस्टाइल से जुड़ी बीमारियों में एलोपैथिक गोलियां केवल लक्षणों को दबाती हैं, बीमारी को खत्म नहीं करतीं। इसके विपरीत, महर्षि चरक द्वारा रचित चरक संहिता के सिद्धांत शरीर का शोधन कर रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने पर जोर देते हैं। यही कारण है कि मरीज जिंदगी भर गोलियां खाने के बजाय पंचकर्म जैसी प्राकृतिक शोधन प्रक्रियाओं को चुन रहे हैं।
शहर में सोमवार को दिनभर बादलों का डेरा रहा। अपराह्न करीब तीन बजे कई इलाकों में छिटपुट बारिश दर्ज की गई। हालांकि यह कहीं भी ज्यादा नहीं टिकी। कहीं 10 तो कहीं 20 मिनट बूंदाबांदी के बाद धूप खिल गई और उमस सताने लगी। इस बीच अधिकतम तापमान 29.9 डिग्री और न्यूनतम तापमान 24 डिग्री दर्ज किया गया।मौसम विशेषज्ञ डॉ. आरएस देवड़ा के अनुसार उदयपुर और आसपास के क्षेत्रों में 20 अगस्त के करीब एक बार फिर से अच्छी वर्षा की गतिविधियां देखने को मिल सकती हैं।
प्रदेश के सरकारी स्कूलों को अब बिजली की किल्लत और भारी-भरकम बिलों से जल्द ही मुक्ति मिलने वाली है। शिक्षा विभाग ने स्कूलों में सौर ऊर्जा संयंत्र (सोलर प्लेट्स) लगाने की तैयारी कर ली है।जल्द ही प्रत्येक जिले में इसकी शुरुआत की जाएगी। योजना के पहले चरण में शहरी क्षेत्रों के सीनियर सेकेंडरी और बड़े स्कूलों को शामिल किया जाएगा। इसके बाद अन्य स्कूलों को आगे के चरणों में शामिल करेंगे।
शहर में पहुंची 18 इलेक्ट्रिक सिटी बसें मंगलवार से सड़कों पर दौड़ेंगी। मुख्यमंत्री मंगलवार शाम 4 बजे जयपुर से पीएम-ई-बस सेवा उद्घाटन कर वर्चुअल झंडी दिखाएंगे। उदयपुर समेत प्रदेश के पांच शहरों में इलेक्ट्रिक बस सेवा की शुरुआत होगी। जयपुर सिटी ट्रांसपोर्ट सर्विसेज लिमिटेड की ओर से 17 अगस्त को जारी आदेश में उदयपुर, जोधपुर, कोटा, अजमेर और अलवर के नगर निगम आयुक्तों एवं प्रशासकों को अपने-अपने शहरों और डिपो में उद्घाटन कार्यक्रम की आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। इससे उदयपुर के डिपो में खड़ी ई-बस के सड़क पर दौड़ेगी। धोल की पाटी डिपो में खड़ी 18 बसें, टेस्टिंग पूरीः उदयपुर में पीएम-ईबस सेवा के तहत पहुंची 18 इलेक्ट्रिक बसें धोल की पाटी डिपो में हैं। बसों के संचालन के लिए चालक और कंडक्टर की नियुक्ति की जा चुकी है। तकनीकी और संचालन संबंधी टेस्टिंग भी हो चुकी है। शुरुआती चरण में शहर के 10 प्रमुख रूटों और महत्वपूर्ण सार्वजनिक स्थानों तक चलाने की योजना है।
निकाय चुनाव की आचार संहिता से पहले पुलिस महकमे में बड़ा बदलाव हुआ है। गृह विभाग ने 57 अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (एएसपी) और महानिदेशक ने 24 उपअधीक्षक (डीएसपी) को प्रदेश में इधर-उधर कर दिया। साथ ही जिले में पुलिस अधीक्षक ने 6 पुलिस निरीक्षक (सीआई) और एक उपनिरीक्षक (एसआई) के तबादले कर दिए। गत 18 जून को डीएसपी से पदोन्नत होकर एएसपी बने अब्दुल रहमान को जिले में जीआरपी से त्वरित अनुसंधान सैल में लगाया है। दूसरी ओर डीएसपी में बांसवाड़ा के कुशलगढ़ से महिपाल सिंह को जीआरपी उदयपुर में और बांसवाड़ा से ही गोपाल लाल को पीटीएस मोरवानिया में भेजा है। एसपी ने पिछले साल अक्टूबर से खाली डीएसटी प्रभारी के पद पर सीआई भरत योगी को लगाया है। अभी वह सुखेर थाने में हैं। सुखेर में किसी और सीआई को नहीं लगाया है। वहां तैनात एसआई अमर सिंह को थानाधिकारी का चार्ज दिया है। सीआई हुकम सिंह को कानोड़ से अंबामाता थाने में लगाया है। गत 29 जुलाई को अंबामाता में तैनात सीआई दलपत सिंह का हार्ट अटैक से निधन हो गया था। तब से सीआई का पद खाली था।
मानसून की बारिश से उदयपुर की प्रमुख झीलों में पानी की स्थिति बेहतर हुई है, लेकिन जिले के छोटे और मझले बांध अब भी खाली हैं। 20 अगस्त की जल संसाधन 13 विभाग की रिपोर्ट के अनुसार उदयसागर में 21 फीट 4 इंच पानी है और यह 79.47% भर चुका है। फतहसागर 72.38% और पिछोला 70% भरा है। वहीं कोटड़ा क्षेत्र का साबरमती बांध पूरा भर चुका है और 15 अगस्त से ओवरफ्लो चल रहा है। मानसी वाकल में 54% और आकोदड़ा में महज 8% पानी है। सीसारमा नदी में 50.43 क्यूसेक और नांदेश्वर चैनल में 25 क्यूसेक आवक बनी हुई है। इससे पिछोला झील में लगातार आवक जारी है। जिससे झील का जलस्तर धीरे-धीरे बढ़ रहा है।
उदयपुर जिला प्रशासन ने नगर निकाय और पंचायती राज चुनाव-2026 को स्वतंत्र, निष्पक्ष और शांतिपूर्ण ढंग से संफन कराने का दावा किया है। इसके लिए गुरुवार को जिला निर्वाचन अधिकारी गौरव अग्रवाल ने चुनाव से जुड़े सभी प्रकोष्ठों के प्रभारियों, सह-प्रभारियों और रिटर्निंग अधिकारियों की बैठक ली। जिला निर्वाचन अधिकारी ने निर्देश दिए कि राज्य निर्वाचन आयोग की समय-सारिणी और दिशा-निर्देशों का अक्षरशः पालन करते हुए सभी अधिकारी आपसी समन्वय से काम करें। बैठक में मतदान केंद्रों की व्यवस्थाओं, ईवीएम-वीवीपैट के रखरखाव, स्ट्रांग रूम की सुरक्षा, परिवहन, प्रशिक्षण और मतगणना केंद्रों की तैयारियों का जायजा लिया गया। शांतिपूर्ण मतदान सुनिश्चित करने के लिए जिला मजिस्ट्रेट गौरव अग्रवाल ने जिला स्तर पर एक विशेष स्क्रीनिंग कमेटी का गठन किया है। चुनाव प्रक्रिया के दौरान शिकायतों के त्वरित निस्तारण और सूचनाओं के संकलन के लिए जिला कलेक्ट्रेट के कमरा नंबर 219 (कॉन्फ्रेंस हॉल) में 24 घंटे चालू रहने वाला नियंत्रण कक्ष स्थापित कर दिया गया है। क्रिटिकल बूथों पर पैनी नजर रहेगी और 100 मीटर के दायरे में मोबाइल बैन रहेंगे।
राखी के त्योहार से पहले घर की रसोई का बजट एक बार फिर बिगड़ने लगा है। राखी पर मिठाई और पकवान बनाने की तैयारी के बीच शक्कर के भाव में अचानक तेजी ने घरों का हिसाब बढ़ा दिया है। तीन माह पहले 45 रुपए किलो बिकने वाली शक्कर अब थोक बाजार में 64 रुपए और खुदरा बाजार में 68 रुपए किलो तक पहुंच गई। इसके साथ खाद्य तेल, दाल और चावल के दाम भी बढ़ने से त्योहार से पहले परिवारों पर अतिरिक्त खर्च का बोझ बढ़ गया। व्यापारियों के अनुसार पिछले एक माह में शक्कर के भाव में लगातार उतार-चढ़ाव के बाद तेजी बनी है। उत्पादन कम होना, अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतें बढ़ना और गन्ने से बनने वाले इथेनॉल की ओर उत्पादन का हिस्सा जाने को तेजी की प्रमुख वजह माना जा रहा है।
उदयपुर संसदीय क्षेत्र के रेल यात्रियों और व्यापारियों को बड़ी सौगात मिली है। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने गाड़ी संख्या 20971/20972 उदयपुर सिटी-शालिमार-उदयपुर सिटी सुपरफास्ट एक्सप्रेस के फेरों में बढ़ोतरी को हरी झंडी दे दी है। अब यह हफ्ते में एक दिन के स्थान पर दो दिन चलेगी। रेल मंत्री ने सांसद डॉ. मन्नालाल रावत को पत्र भेजकर इस फैसले की आधिकारिक जानकारी दी है। पत्र में बताया गया है कि जनसुविधाओं के विस्तार, बेहतर कनेक्टिविटी और यात्रियों की बढ़ती मांग को ध्यान में रखते हुए ट्रेन के फेरे बढ़ाने का निर्णय लिया गया है।
रक्षाबंधन पर बहनों को राखियां समय पर भाइयों तक पहुंचाने के लिए डाक विभाग ने विशेष व्यवस्था की है। उदयपुर मंडल के सभी डाकघरों में रविवार, 23 अगस्त को राखी मेल की बुकिंग के लिए विशेष काउंटर खुले रहेंगे। आमजन रविवार को भी राखी के लिफाफे और पार्सल स्पीड पोस्ट से बुक करा सकेंगे। प्रवर डाक अधीक्षक ने नागरिकों से इस सुविधा का अधिकाधिक लाभउठाने की अपील की है, ताकि राखियां और शुभकामनाएं समय पर प्रियजनों तक पहुंचाई जा सकें।
शहर की सड़कों पर ई-बसों का संचालन शुरू होने के साथ ही इनके सुचारू संचालन में सड़क की चौड़ाई और बेतरतीब पार्किंग चुनौती बन रही है। पुरानी डीजल बसों की तुलना में ई-बसे करीब एक से डेढ़ फीट चौड़ी हैं। ऐसे में कई स्थानों पर इनके गुजरने के दौरान पीछे वाहनों की कतार लग रही है। सड़क किनारे अतिक्रमण, ठेले और बेतरतीब पार्किंग के कारण सड़क का उपयोगी दायरा और कम हो रहा है। ऐसे में इनके संचालन को लेकर परेशानी और बढ़ सकती है। अभी 9 मीटर वाली 33 बसों में सिर्फ 12 बसें रूट पर चल रहीं। आने वाले समय में 12 मीटर लंबाई वाली पांच ई-बसें भी आने है, जिसे संभवतयाः एयरपोर्ट रोड पर चलाया जाएगा। राजस्थान पत्रिका की टीम ने शुक्रवार को एकलिंगपुरा से रामपुरा तक संचालित ई-बस में सफर किया। इस दौरान सामने आया कि बस की अधिक चौड़ाई के कारण चालक को कई जगह काफी सावधानी से बस चलानी पड़ती है।
शहर की सड़कों पर ई-बसों का संचालन शुरू होने के साथ ही इनके सुचारू संचालन में सड़क की चौड़ाई और बेतरतीब पार्किंग चुनौती बन रही है। पुरानी डीजल बसों की तुलना में ई-बसे करीब एक से डेढ़ फीट चौड़ी हैं। ऐसे में कई स्थानों पर इनके गुजरने के दौरान पीछे वाहनों की कतार लग रही है। सड़क किनारे अतिक्रमण, ठेले और बेतरतीब पार्किंग के कारण सड़क का उपयोगी दायरा और कम हो रहा है। ऐसे में इनके संचालन को लेकर परेशानी और बढ़ सकती है। अभी 9 मीटर वाली 33 बसों में सिर्फ 12 बसें रूट पर चल रहीं। आने वाले समय में 12 मीटर लंबाई वाली पांच ई-बसें भी आने है, जिसे संभवतयाः एयरपोर्ट रोड पर चलाया जाएगा। राजस्थान पत्रिका की टीम ने शुक्रवार को एकलिंगपुरा से रामपुरा तक संचालित ई-बस में सफर किया। इस दौरान सामने आया कि बस की अधिक चौड़ाई के कारण चालक को कई जगह काफी सावधानी से बस चलानी पड़ती है।
राजस्थान विधानसभा में सरकारी स्कूलों की बुनियादी सुविधाओं को लेकर सरकार के जवाब ने चौंकाने वाली तस्वीर पेश की है। नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली के सवाल पर सरकार ने बताया कि प्रदेश के 611 राजकीय विद्यालय भवन विहीन हैं। इसके अलावा 2,047 सरकारी स्कूलों में बच्चों के लिए शौचालय की सुविधा नहीं है, जबकि 1,049 स्कूलों में पेयजल की सुविधा उपलब्ध नहीं होने की जानकारी दी गई है. राजस्थान में कुल 64,484 राजकीय विद्यालय हैं। सरकार ने इन कमियों को दूर करने के लिए स्कूलों की मरम्मत और जीर्णोद्धार पर 550 करोड़ रुपए तथा भवन विहीन और जर्जर स्कूलों के निर्माण के लिए 450 करोड़ रुपए का प्रावधान करने की जानकारी दी है।
लेकसिटी में मानसून की बेरुखी जारी है। बारिश का तीसरा दौर भी सुस्त पड़ चुका है, जिससे जिले में अब तक औसतन 25 फीसदी कम बरसात दर्ज हुई है। शनिवार को दिनभर मौसम अपने मिजाज बदलता रहा। सुबह बादल छाए रहे, दोपहर में तीखी धूप खिली और शाम चार बजे के बाद घने बादलों के साथ ठंडी हवाएं चलीं। शहर से लेकर जिले भर में कहीं भी बारिश दर्ज नहीं की गई। डबोक स्थित मौसम केंद्र के अनुसार अधिकतम तापमान 32.1 और न्यूनतम 22.6 डिग्री दर्ज किया गया। बीता पूरा सप्ताह बादलों की आवाजाही के नाम रहा, लेकिन झमाझम बारिश की आस पूरी नहीं हो सकी। मौसम विशेषज्ञ डॉ. आरएस देवड़ा ने बताया कि मानसून की ट्रफ लाइन की स्थिति कमजोर होने से तीसरा दौर भी बेअसर साबित हुआ है। आने वाले पूरे सप्ताह भी मौसम शुष्क ही बना रहने के आसार हैं। बादलों का आना-जाना लगा रहेगा और स्थानीय प्रभाव से कहीं-कहीं बूंदाबांदी हो सकती है। आगामी दिनों में भारी या तेज बारिश का स्पैल बनने की संभावना काफी कम है।
वन विभाग में इन दिनों कामकाज का अजीब असंतुलन दिख रहा है। जंगल और वन्यजीवों की सुरक्षा का जिम्मा संभालने वाले फील्ड कर्मचारियों को अब अभयारण्यों (सेंचुरी) की ड्यूटी रास नहीं आ रही है। सेंचुरी में 24 घंटे की मुस्तैदी और दुर्गम हालात के कारण ये कर्मचारी प्रादेशिक वन मंडलों (टेरिटोरियल) में तैनाती को तरजीह दे रहे हैं, जहां शाम 6 बजे तक काम निपटाकर घर लौटने की सहूलियत रहती है। नतीजतन एक तरफ सेंचुरियों में स्टाफ का भारी संकट खड़ा हो गया है। जैसे फुलवारी की नाल के 9 नाकों पर महज 1 फॉरेस्टर और सज्जनगढ़ बायो पार्क में 10 के बजाय सिर्फ 2 - केयरटेकर तैनात हैं। दूसरी तरफ दोनों वन मंडलों के मुख्यालयों में 4 रेंजर व आधा दर्जन से अधिक फील्ड कर्मचारी गश्त छोड़ बाबूगिरी कर रहे हैं।