भीषण गर्मी के बीच बिजली निगम के मेंटेनेंस और अघोषित कटौती से बेहाल आमजन के लिए राहत की खबर है। राजस्थान सरकार की विद्युत अवसंरचना योजना के तहत राजसमंद के दरीबा में करीब 46.58 करोड़ लागत से बने 220 केवी जीएसएस को चालू कर दिया गया है। यह नया ग्रिड सब-स्टेशन उदयपुर सहित पूरे दक्षिण राजस्थान के बिजली नेटवर्क को अतिरिक्त मजबूती देगा। वर्तमान में उदयपुर का दिन का पारा 40 डिग्री और रात का 25 डिग्री चल रहा है, जिससे बुनियादी ढांचा हांफ रहा है। शहर में प्रतिदिन 50 लाख यूनिट की खपत हो रही है, जिसके जुलाई तक 60 लाख यूनिट पहुंचने का अनुमान है। इस लोड के कारण शहर के सभी इलाकों में दिन में 5-5 बार हो रही ट्रिपिंग हो रही है। दो माह में दो-दो बार 2 से 6 घंटे के घोषित-अघोषित पावर कट ने लोगों को परेशान कर रखा है। दरीबा जीएसएस के शुरू होने से उदयपुर, मावली और फतहनगर सहित आसपास के क्षेत्रों को सीधे 30 से 40 मेगावाट तक की भार राहत मिलेगी। इससे ग्रिड का विद्युत भार संतुलन बेहतर होगा, बार-बार होने वाले विद्युत व्यवधान थमेंगे और बढ़ती मांग के बावजूद लोड शेडिंग की स्थिति में सुधार होगा।
राजस्थान में पड़ रही प्रचंड गर्मी, कारणों से हवाई ईंधन की पर्यटकों की घटती संख्या और वैश्विक बढ़ती कीमतों के चलते जून से डबोक एयरपोर्ट से कुछ फ्लाइट्स कम होने जा रही हैं। एयरलाइंस कंपनियों ने लागत निकालने और घाटे से बचने के लिए फ्लाइटें घटाने का फैसला किया है। इससे वर्तमान में चल रही कुल 14 फ्लाइट्स में से 2 से 3 कम हो सकती हैं। अभी मुंबई के लिए सबसे ज्यादा 6, दिल्ली के लिए 4, जयपुर के लिए 2, बेंगलुरु और हैदराबाद के लिए 1-1 फ्लाइट रोजाना हैं।
राजस्थान पेट्रोलियम डीलर्स एसोसिएशन ने एक जून से प्रस्तावित प्रदेशव्यापी बेमियादी हड़ताल को 15 दिनों के लिए स्थगित कर दिया है। संगठन ने राज्य सरकार की ओर से मांगों पर सकारात्मक रुख अपनाने और वार्ता की पहल के बाद यह निर्णय लिया है। आरपीडीए अध्यक्ष राजेन्द्र सिंह भाटी ने बताया कि प्रदेशभर के पेट्रोल पंप संचालक लंबे समय से विभिन्न समस्याओं का सामना कर रहे हैं। मांगों के समाधान को लेकर कई बार सरकार को ज्ञापन और पत्र भेजे गए, लेकिन कार्रवाई नहीं होने पर संगठन ने एक जून से हड़ताल की घोषणा की थी। उन्होंने बताया कि हड़ताल की घोषणा के बाद राज्य सरकार ने मामले को गंभीरता से लेते हुए एक जून को जयपुर सचिवालय में मुख्य सचिव की अध्यक्षता में बैठक बुलाने के निर्देश दिए हैं। उपाध्यक्ष प्रकाश गावलेरा, सचिव शशांक कौरानी और कोषाध्यक्ष संदीप भगेरिया ने कहा कि सरकार के सकारात्मक रुख को देखते हुए हड़ताल को 15 दिनों के लिए स्थगित किया गया है।
वन विभाग इस साल मानसून सीजन में ग्रामीणों की आय और वन उपज को बढ़ावा देने के लिए जिले में महुआ और सीताफल के पौधे लगाएगा। इसमें वन मंडल उदयपुर, वन मंडल उत्तर और वन्यजीव डिवीजन की रेंजों में हर साइट पर सीताफल व महुआ के पौधे ज्यादा लगाए जाएंगे। डीएफओ मुकेश सैनी ने बताया कि मॉडल के तहत हर साइट पर 10 हजार पौधे लगाए जाएंगे। इसमें सीताफल और महुआ के 500-500 पौधे लगाने का लक्ष्य है। पहले इन साइटों पर करीब 100 पौधे लगाए जाते थे। इसमें स्थानीय लोगों को जोड़ा जाएगा, जिससे एग्रो फॉरेस्ट्री को भी फायदा मिलेगा। गांव-गांव में ये पौधे लगने से ग्रामीणों की आय भी बढ़ेगी। विभाग की ओर से इस साल मानसून में जिले में 5 लाख पौधे लगाने का लक्ष्य है। इसमें 1.25 लाख पौधे सीताफल और 1.25 लाख पौधे महुआ के तैयार किए जा रहे हैं। इन ढाई लाख पौधों में से 1.40 लाख पौधों का जिले में वितरण किया जाएगा। ये दोनों पौधे स्थानीय प्रजाति के होने से आसानी से उगेंगे। इनका व्यावसायिक उपयोग होने से इनकी देखरेख पर भी ध्यान रखा जाएगा।
राजस्थान स्टेट माइंस एंड मिनरल्स लिमिटेड (आरएसएमएमएल) का दक्षिण भारत के चाय, कॉफी और रबर बागानों में पहचान बना चुका उत्पाद राज फॉस (Raj Phos) आज सरकारी उपेक्षा और कुप्रबंधन का शिकार है। उदयपुर की झामरकोटड़ा खदान से निकलने वाले कम गुणवत्ता वाले सिलिका-आधारित रॉक फॉस्फेट का मूल्य-संवर्द्धन कर तैयार किया जाने वाला यह उर्वरक अब अपनी स्थापित क्षमता के महज 10 से 15 प्रतिशत पर चल रहा है। हालात यह है कि संयंत्र एकमात्र ठेकेदार आरके धाबाई की वित्तीय समस्याओं और कुप्रबंधन की भेंट चढ़ चुका है। खदान परिसर में करोड़ों रुपए मूल्य की जमीन और बिजली उपलब्ध होने के बावजूद उत्पादन लगातार घटता गया।वर्ष 2011-12 में 2 लाख 10 हजार मीट्रिक टन से अधिक की रिकॉर्ड बिक्री करने वाला राज फॉस आज केरल, कर्नाटक, तमिलनाडु और उत्तर-पूर्व के अपने पारंपरिक बाजारों से लगभग गायब होने की स्थिति में पहुंच गया है। इसकी सबसे बड़ी वजह पिछले छह वर्षों की प्रशासनिक शिथिलता रही है। उत्पादन में गिरावट और सिकुड़ते बाजार पर किसी स्तर पर प्रभावी हस्तक्षेप नहीं किया गया।
अमेरिका-ईरान युद्ध के बाद से लगातार लिक्विड पेट्रोलियम गैस (LPG) की कीमतों में इजाफा हो रहा है। पेट्रोलियम कंपनियों ने रविवार रात एलपीजी गैस की कीमतों का रिव्यू करने के बाद एक बार फिर कॉमर्शियल गैस सिलेंडर की कीमतों में बढ़ोतरी की है। कंपनियों ने 19 किलोग्राम वाले कॉमर्शियल सिलेंडर पर 42 रुपए की बढ़ोतरी की है। हालांकि घरेलु और दूसरे अन्य कैटेगिरी के सिलेंडर के दाम स्थिर रखे है। राजस्थान एलपीजी डिस्ट्रीब्यूटर्स एसोसिएशन के प्रदेशाध्यक्ष दीपक गहलोत ने बताया- कंपनियों ने कॉमर्शियल गैस सिलेंडर के दाम बढ़ाए हैं, जिसकी नई रेट लिस्ट जारी की है। नई रेट लिस्ट के मुताबिक, राजस्थान में आज से 19 किलोग्राम वाले कॉमर्शियल गैस सिलेंडर पर 3099 रुपए के बजाए अब 3141 रुपए में मिलेगा। घरेलू उपयोग के सिलेंडर की कीमतों में कंपनियों ने कोई बढ़ोतरी नहीं की है। इनकी कीमतों बाजार में आज भी घरेलू उपयोग का 14.2 किलोग्राम वाला सिलेंडर 916.50 रुपए में ही मिलेगा। इस साल में कॉमर्शियल सिलेंडर पर कंपनियों ने अब तक 6 बार से ज्यादा बार कीमतों में बढ़ोतरी की है।
शहर में शनिवार रात आए तूफान ने अजमेर विद्युत वितरण निगम के दावों की पोल फिर खोल दी। मेंटेनेंस के नाम पर रोज शहर के कई इलाकों में घंटों बिजली कटौती के बावजूद पूरा सिस्टम बेपटरी हो रहा। दर्जनों कॉलोनियां न सिर्फ रात भर अंधेरे और उमस में परेशान रहीं, बल्कि रविवार को भी घंटों बिजली बंद रही। ब्लैकआउट की अवधि कहीं 8 तो कहीं 18 घंटे तक रही। इस महा-कटौती ने जनता के रूटीन को पूरी तरह तहस-नहस कर दिया। भीषण गर्मी के बीच लोग न तो रात को चैन से सो पाए और न ही संडे को आराम कर सके। डिस्कॉम की इस घोर लापरवाही ने शहरवासियों को दोहरी मार दी है। रात भर बिजली गुल रहने के कारण सुबह होते-होते अधिकांश परिवारों की छत पर रखी पानी की टंकियां पूरी तरह खाली हो गईं। बिजली नहीं होने के कारण लोग ट्यूबवेल की मोटर तक नहीं चला पाए। संडे के दिन घरों में न तो नहाने-धोने का पानी बचा और न ही रोजमर्रा के कामों के लिए। जनता बूंद बूंद पानी के लिए तरसती नजर आई।
जरा सोचिए, जिस सरकारी अस्पताल में आप अपनी जिंदगी बचाने जाते हैं, वहीं से आपको सीधे जानलेवा खुराक दी जा रही हो तो क्या करेंगे? यह कोई काल्पनिक डर नहीं, बल्कि संभाग के सबसे बड़े एमबी अस्पताल और सुपरस्पेशलिटी हॉस्पिटल (एसएसएच) की खौफनाक हकीकत है। एक तरफ राज्य सरकार जीवन रक्षक दवाओं की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए रोज कड़े निर्देश जारी कर रही है। वहीं उदयपुर के इन दोनों शीर्ष चिकित्सालयों में सरकारी उदासीनता और संवेदनहीनता मरीजों की जान से खिलवाड़ कर रही है। भास्कर ने हालात परखे। सामने आया कि करोड़ों रुपए की निशुल्क दवाइयों को कबाड़, टॉयलेट के रिसाव और गंदगी के ढेर में लावारिस छोड़ दिया गया है। आरएनटी मेडिकल कॉलेज से संबद्ध इन दोनों अस्पतालों के मुख्य स्टोर से ही रोजाना हजारों बेबस मरीजों को दवाइयां बांटी जा रही हैं। हाल ही कोटा में नकली व अमानक दवाओं के कारण हुई प्रसूताओं की मौतों से भी उदयपुर के जिम्मेदारों ने कोई सबक नहीं लिया है। हालात इतने बदतर हैं कि अगर तुरंत कदम नहीं उठाए गए तो उदयपुर में बड़ी अनहोनी की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।
इस बार जून के माह मौसम में गर्मी और बारिश दोनों का मिलाजुला असर देखने को मिलेगा। मौसम विभाग के अनुसार जून के पहले पखवाड़े में जहां तापमान 40 डिग्री से कम बना रहेगा, वहीं दूसरी ओर हल्की-फुल्की बारिश भी होती रहेगी। आखिरी सप्ताह में आंधी चलने व ओले गिरने के आसार बनेंगे। हालांकि, पखवाड़े के दूसरे हिस्से यानी दूसरे सप्ताह के बाद तापमान में 2 से 3 डिग्री की बढ़ोतरी दर्ज की जाएगी, जिससे गर्मी के तेवर तीखे होंगे। इसके बाद तीसरे सप्ताह में तापमान फिर से नियंत्रित होकर 37 डिग्री तक जाएगा, लेकिन इस दौरान विभिन्न क्षेत्रों में खंडवर्षा का दौर बना रहेगा। चौथे सप्ताह में हवा में अधिक नमी होने से उमस वाली गर्मी लोगों को परेशान करेगी। मौसम विशेषज्ञ डॉ. आरएस देवड़ा ने बताया कि लेकसिटी में आने वाले चार दिनों तक बादल छाने, तेज गति से हवा चलने और खंडवर्षा की संभावना है।
उदयपुर देश-दुनिया के नक्शे पर राजस्थान का सबसे बड़ा इंटरनेशनल टूरिस्ट डेस्टिनेशन है, जो हर साल सरकार की तिजोरी में अरबों रुपए का राजस्व जमा करता है। लेकिन, जब बात बुनियादी बिजली तंत्र की आती है, तो डिस्कॉम और सरकारों का उदयपुर शहर के साथ सौतेला व्यवहार साफ दिखाई देता है। लगातार अघोषित बिजली कटौती से परेशान शहर की जनता आज सीधे प्रशासन से सवाल पूछ रही है कि जो बिजली तंत्र राजधानी जयपुर में मौसम-प्रूफ और मजबूत है, वह उदयपुर में इतना लाचार व बेबस क्यों है?अजमेर विद्युत वितरण निगम (एवीवीएनएल) के आंकड़े बताते हैं कि बढ़ती गर्मी के कारण उदयपुर शहर का लोड सर्दियों की तुलना में 200% से अधिक उछलकर 50 से 60 लाख यूनिट प्रतिदिन पहुंच गया है। इस असहनीय दबाव से पुराने फीडर और ट्रांसफार्मर सुलग रहे हैं, जिससे रोजाना आने वाले फाल्ट्स का आंकड़ा 200 के पार पहुंच चुका है। हाल ही में आई आंधी ने दावों की पोल खोल दी। इस दौरान रात को 2000 से ज्यादा शिकायतें डंप हो गईं। अव्यवस्था का अालम यह रहा कि बिजली बहाली में 8-24 घंटे का समय लगा। यही हाल हर तेज आंधी के समय होता है।
शहर में सोमवार देर शाम आंधी-बारिश के बाद मंगलवार को भी बादलों की आवाजाही रही। चुभन वाली गर्मी से राहत रही, लेकिन उमस ने बेचैन किया। दिन के पारे में 4 और रात के पारे में 5.7 डिग्री की बड़ी गिरावट देखी गई। मौसम विभाग के अनुसार अधिकतम तापमान 35.0 और न्यूनतम 20.7 डिग्री दर्ज किया गया। मौसम विशेषज्ञ डॉ. आरएस देवड़ा के अनुसार इस समय मध्य राजस्थान से लेकर पश्चिम बंगाल तक एक निम्न वायु दाब की रेखा (ट्रफ लाइन) बनी हुई है। इसके प्रभाव से क्षेत्र में हवाओं की गति काफी तेज रहेगी। इसके साथ ही उत्तर-पश्चिमी भारत में एक और नया पश्चिमी विक्षोभसक्रिय हो गया है। अरब सागर से आ रही नमी के कारण मेवाड़ सहित प्रदेश के कई हिस्सों में खंड वर्षा और ओलावृष्टि की संभावना है।
शक्तिनगर का बॉटलनेक खुलने के बाद शहरवासियों को ट्रैफिक जाम से बड़ी राहत तो मिली है, लेकिन मेवाड़ मोटर्स गली का बॉटलनेक आज भी पूरे ट्रैफिक सिस्टम के गले की फांस बना हुआ है। सूरजपोल और उदियापोल को जोड़ने वाले इस मुख्य मार्ग के बीच एक मकान बरसों से बाधा बना खड़ा है।साल 2020 में तैयार शहर के मास्टर ट्रैफिक प्लान में इस बॉटलनेक को हटाना तय हुआ था। फिर 2024 में नगर निगम ने बकायदा इस मकान के अधिग्रहण और मुआवजे का फैसला भी ले लिया, लेकिन नतीजा आज भी शून्य है। मकान मालिक और किरायेदार के बीच कोर्ट में चल रहे संपत्ति विवाद का बहाना बनाकर नगर निगम अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ रहा है।
आरएनटी मेडिकल कॉलेज की चिकित्सा व्यवस्थाओं से ऐसा सच सामने आया है जो चौंकाने वाला ही नहीं, बल्कि डराने वाला भी है। संभाग समेत पड़ोसी राज्यों के लाखों मरीजों की बड़ी उम्मीद कहे जाने वाले इस कॉलेज और इसके एमबी अस्पताल में रक्त विकारों (ब्लड डिसऑर्डर्स) के गंभीर मरीजों के इलाज के लिए हेमेटोलॉजिस्ट (रक्त रोग विशेषज्ञ) का एक भी पद स्वीकृत नहीं है। ये हालात इसलिए भी चिंताजनक हैं, क्योंकि अकेले आरएनटी मेडिकल कॉलेज में ही थैलेसीमिया, हिमोफिलिया और सिकल सेल एनीमिया के 1,850 से अधिक मरीज पंजीकृत हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में बिना पंजीकरण वाले मरीजों को जोड़ लें तो यह संख्या हजारों में पहुंचती है। विशेषज्ञ डॉक्टर नहीं होने से इन मरीजों को मामूली जटिलताओं और बोन मैरो ट्रांसप्लांट जैसी बड़ी सर्जरी के लिए जयपुर के चक्कर काटने पड़ रहे हैं। जब सामान्य फिजिशियन को मरीज की सीबीसी रिपोर्ट में लाल-सफेद रक्त कोशिकाओं या प्लेटलेट्स की संख्या में गंभीर गड़बड़ी दिखती है या शरीर पर नीले निशान पड़ते हैं, तब मरीज को हेमेटोलॉजिस्ट के पास भेजा जाता है। मगर उदयपुर में पद खाली होना तो दूर, स्वीकृत तक नहीं है।
लेकसिटी में मौसम का मिजाज तेजी से बदल रहा है। बुधवार को दिनभर सूरज के तीखे तेवर और बादलों की आवाजाही रही। शाम करीब 4 बजे आसमान घने काले बादलों से घिर गया और कई इलाकों में तेज तो कहीं मध्यम दर्जे की खंड वर्षा शुरू हो गई। बारिश के बावजूद तापमान में भारी उछाल दर्ज किया गया है। दिन का पारा बीते 24 घंटे में 2.8 डिग्री बढ़कर 37.8 डिग्री सेल्सियस हो गया। न्यूनतम भी करीब 5.1 डिग्री की छलांग लगाकर 25.6 डिग्री पर जा पहुंचा।
शहर में भीषण गर्मी के बीच बार-बार अघोषित बिजली कटौती और अधिकारियों द्वारा फोन नहीं उठाने को लेकर शहर विधायक ताराचंद जैन ने कड़ा रुख अपनाया है। बुधवार को पटेल सर्किल स्थित एवीवीएनएल कार्यालय में उनकी अध्यक्षता में भाजपा नेताओं, जनप्रतिनिधियों और विद्युत विभाग के अधिकारियों की बैठक हुई। दैनिक भास्कर की खबर के बाद इस बैठक में विधायक जैन ने कहा कि शहर में लटकते तारों से समस्या हो रही है। अंडरग्राउंड लाइन इसका समाधान है। इसके लिए स्थान चिह्नित कर 15 दिन में सर्वे कार्य की रिपोर्ट दें। भाजपा नेताओं ने कहा कि रखरखाव के नाम पर दिनभर कटौती के बाद भी हल्की बारिश या हवा चलते ही घंटों लाइट गुल हो जाती है। सबसे बड़ी समस्या यह है कि रात को लाइट बंद होने पर अधिकारियों के फोन या तो बंद आते हैं या वे उठाते ही नहीं हैं, जिससे जनता को जवाब देना मुश्किल हो रहा है। विधायक जैन ने कहा कि तकनीकी कारणों से बिजली जा सकती है, लेकिन फोन उठाकर उपभोक्ताओं को संतुष्टिपूर्वक जवाब देना अनिवार्य है। अधीक्षण अभियंता केआर मीणा ने उन्होंने आश्वस्त किया कि 15 जून तक शहर की अधिकांश विद्युत समस्याओं का निस्तारण कर दिया जाएगा।
उदयपुर विकास प्राधिकरण (यूडीए) की जमीनों पर कोई भी कब्जा कर लेता है और उसे खबर तक नहीं होती। बहुत कम होता है जब यूडीए खुद ऐसे अवैध कब्जों पर बिना शिकायत कार्रवाई करता हो। यही वजह है कि भूमाफिया सरकारी जमीनों पर लगातार कब्जा कर निर्माण कर रहे हैं। ताजा मामला प्रतापनगर-सुखेर बायपास रोड पर यूडीए की बेशकीमती जमीन से जुड़ा है। यहां बजरी व्यापारी यूडीए की 250 करोड़ की आबादी भूमि पर कब्जा कर खुलेआम व्यवसाय कर रहे हैं। यह सिलसिला 4-5 सालों से चल रहा है। बड़ा सवाल यह है कि यहां यूडीए को नजर नहीं आया या इसमें किसी की मिलीभगत है? प्रतापनगर-सुखेर बायपास पर प्रतापनगर चौराहे से मात्र एक किमी दूर खसरा नंबर 231 और 1156/231 पर करीब 23 लाख वर्गफीट की दो जमीनें है। सरकारी रिकॉर्ड में दोनों जमीनों यूडीए के नाम दर्ज हैं। यूडीए ने यह जमीनें संस्था और प्लानिंग के लिए आरक्षित रखी है। इनकी कीमत करीब 450 करोड़ रुपए है। दोनों जमीनें मेनरोड पर हैं। इनमें से 13 लाख वर्गफीट यानी 250 करोड़ की जमीन पर बजरी व्यापारियों ने कब्जा जमाया हुआ है। रोजाना करीब 30-40 ट्रक-ट्रोले यहां बजरी लाते हैं।
राजस्थान राज्य पथ परिवहन निगम (रोडवेज) अपने बेड़े को मजबूत करने के लिए 26 नई डीजल बीएस-6 फुली बिल्ट 2 बाय 2 एसी डीलक्स बसें खरीदेगा। इसके लिए निगम ने ओपन कॉम्पिटिटिव ई-निविदा जारी की है। इस खरीद पर करीब 19.80 करोड़ रुपए खर्च किए जाएंगे। नई बसों के शामिल होने से लंबी दूरी के यात्रियों को अधिक आरामदायक और बेहतर यात्रा सुविधा मिलेगी। रोडवेज प्रशासन के अनुसार निविदा में केवल वही मूल वाहन निर्माता कंपनियां भाग ले सकेंगी, जिनके पास सीएमवीआर के तहत अधिकृत टेस्टिंग एजेंसियों से चेसिस का नवीनतम टाइप अप्रूवल तथा एआईएस-052/एआईएस-153 मानकों के अनुरूप बस बॉडी टाइप अप्रूवल प्रमाणपत्र हो। साथ ही पिछले पांच वर्षों में विभिन्न राज्य परिवहन उपक्रमों को कम से कम 100 डीजल फुली बिल्ट बसों की आपूर्ति का अनुभव भी जरूरी होगा।
शहर में गर्मी का असर बना हुआ है। बुधवार को अधिकतम तापमान 38.5 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 27.2 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। 3 जून की तुलना में दिन का तापमान 0.7 डिग्री और रात का तापमान 1.6 डिग्री बढ़ गया है। तेज धूप और गर्म हवाओं के कारण दिनभर लोगों को गर्मी का सामना करना पड़ा। दोपहर के समय सड़कों पर आवाजाही कम नजर आई और लोग छांव व ठंडी जगहों की तलाश करते दिखे। हालांकि शाम करीब चार बजे आसमान में बादल छा गए, जिससे मौसम की तल्खी कुछ कम हुई और लोगों को हल्की राहत मिली। मौसम विभाग के अनुसार फिलहाल बारिश की गतिविधियां नहीं होने से गर्मी का असर बना हुआ है। आने वाले दिनों में तापमान में विशेष राहत के संकेत नहीं हैं।
विश्व पर्यावरण दिवस शुक्रवार को मनाया जाएगा, लेकिन प्रदेश के सबसे अधिक वन क्षेत्र वाले उदयपुर जिले में जंगलों पर बढ़ता दबाव चिंता का विषय बन रहा है। वनाधिकार कानून के तहत जिले में लगातार व्यक्तिगत और सामुदायिक वनाधिकार पट्टे दिए जा रहे हैं, जिससे बड़े भू-भाग का उपयोग वन क्षेत्र से अलग हो रहा है।जिले में व्यक्तिगत वनाधिकार के 21 हजार से अधिक दावों में से 12 हजार दावे सही पाए गए। इसके तहत 8,962.77 हेक्टेयर यानी करीब 89 वर्ग किमी भूमि के पट्टे जारी किए गए हैं। प्रदेश के 18 जिलों में उदयपुर में सबसे अधिक व्यक्तिगत वनाधिकार पट्टे दिए गए हैं। सामुदायिक वनाधिकार के 824 दावों में से 545 स्वीकृत हुए हैं। इनके तहत गांवों को 83,751 हेक्टेयर यानी 837.51 वर्ग किमी वन भूमि दी गई है। प्रदेश में सामुदायिक वनाधिकार के तहत दी गई 1,01,493 हेक्टेयर भूमि में से 82 प्रतिशत हिस्सा अकेले उदयपुर जिले का है। जिले में अभी 2700 वर्ग किमी क्षेत्र वन भूमि में है।
विश्व पर्यावरण दिवस पर शुक्रवार से सज्जनगढ़ सेंचुरी में प्लास्टिक फ्री जोन का पायलट प्रोजेक्ट शुरू किया जाएगा। इसके तहत सेंचुरी और बायो पार्क क्षेत्र में पर्यटक प्लास्टिक की पानी की बोतलें लेकर प्रवेश नहीं कर सकेंगे। वन विभाग ने प्लास्टिक बोतलों के विकल्प के रूप में कांच की बोतलों में पानी उपलब्ध कराएगा। इसके लिए एक स्टार्टअप कंपनी की सहायता ली गई है। सेंचुरी की पार्किंग और किले पर स्थित रेस्टोरेंट में पर्यटकों को कांच की बोतलों में पानी उपलब्ध कराया जाएगा। एक बोतल की कीमत 50 रुपए निर्धारित की गई है, जिसमें बोतल वापस जमा कराने पर 40 रुपए लौटाए जाएंगे।उल्लंघन पर एक हजार रुपए तक की पेनल्टी। वन विभाग ने शुरुआत में पर्यटकों को जागरूक करने की रणनीति बनाई है। इसके बाद नियमों को सख्ती से लागू किया जाएगा। इसके उल्लंघन पर एक हजार रुपए तक की पेनल्टी लगाई जाएगी। डीएफओ यादवेंद्र सिंह चुंडावत ने बताया कि पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देने और सेंचुरी क्षेत्र को प्लास्टिक कचरे से मुक्त रखने के उद्देश्य से यह पहल शुरू की जा रही है।