राजस्थान में आज 21 जिलों में तेज बारिश का अलर्ट है। अलवर, कोटपूतली-बहरोड़ में गुरुवार सुबह से बरसात हो रही है। जगह-जगह पानी भरने से लोगों को परेशानी हो रही है। वहीं, 7 अगस्त से उदयपुर, कोटा और भरतपुर संभाग के क्षेत्रों में भारी बारिश की आशंका है। विभाग के अनुसार राज्य में 10 अगस्त तक मानसून सक्रिय रहेगा।बुधवार (5 अगस्त) को भरतपुर संभाग के अलावा जयपुर संभाग के जिलों में भी 3 इंच तक पानी बरसा। वहीं, हनुमानगढ़ और श्रीगंगानगर जिलों के कुछ इलाकों में भी हल्की से मध्यम बारिश हुई।पिछले 24 घंटों के दौरान प्रदेश में सबसे ज्यादा बरसात अलवर के गोविंदगढ़ में 72 एमएम (मिलीमीटर) दर्ज की गई। कोटा में अच्छी बरसात के लिए 4 साल बाद गढ़े भैरूजी को निकालने और पूजा की परंपरा निभाई गई।राजस्थान में इस सीजन में अब तक सामान्य से 17 फीसदी कम बारिश हुई है। राज्य के 245 बांध अब भी खाली हैं।
आरएनटी मेडिकल कॉलेज और एमबी अस्पताल परिसर में आने वाले मरीजों, बुजुर्गों और उनके परिजनों के लिए राहत की खबर है। अब विशाल अस्पताल परिसर में एक विभाग से दूसरे विभाग तक जाने के लिए पैदल नहीं भटकना पड़ेगा। कॉलेज प्रशासन ने स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत परिसर में सशुल्क ई-रिक्शा सेवा शुरू करने और हाईटेक सुरक्षा व्यवस्था लागू करने का फैसला लिया है।
झीलों की नगरी उदयपुर में जल निकायों के संरक्षण और विकास के बड़े-बड़े दावों की पोल खुलती नजर आ रही है। झील संरक्षण की सबसे महत्वपूर्ण जिला स्तरीय समिति में पिछले छह वर्षों से जमीनी स्तर पर काम करने वाले किसी भी विशेषज्ञ या सामाजिक कार्यकर्ता को सदस्य नहीं बनाया गया है। आलम यह है कि झीलों की सेहत से जुड़े तमाम फैसले अब सिर्फ सरकारी दफ्तरों की चारदीवारी तक सीमित होकर रह गए हैं। कानून में प्रावधान, फिर भी अनदेखी राजस्थान झील संरक्षण एवं विकास अधिनियम-2015 की धारा-25 के अनुसार, जिला स्तरीय समिति में राज्य सरकार को पर्यावरण, जल विज्ञान और झील संरक्षण क्षेत्र के दो विशेषज्ञ सदस्यों को 3 वर्ष के कार्यकाल के लिए नामित करना होता है। इसका मकसद योजनाओं में विषय-विशेषज्ञों की व्यावहारिक राय शामिल करना था। हालांकि, अधिनियम लागू होने के बाद से अब तक केवल एक बार ही सामाजिक कार्यकर्ता तेज शंकर पालीवाल को सदस्य बनाया गया। उनके बाद से यह पद खाली पड़ा है। स्वतंत्र विशेषज्ञों की जगह पूर्व अधिकारियों को तरजीह समिति की निष्पक्षता पर भी गंभीर सवाल उठ रहे हैं।
जिले में सड़क संपर्क को बड़ा फैसला किया है। वर्ष 2026-27 के बजट के तहत जिले में 79.58 करोड़ की लागत से 151 सड़क निर्माण एवं सुदृढ़ीकरण कार्यों को मंजूरी दी गई है। इन कार्यों के जरिये जिले में 247.94 किमी लंबे सड़क नेटवर्क का निर्माण होगा। जिले की सातों विधानसभा क्षेत्रों को इस योजना में शामिल किया गया है, जिससे ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों की कनेक्टिविटी बढ़ेगी। उपमुख्यमंत्री एवं सार्वजनिक निर्माण विभाग मंत्री दिया कुमारी ने कहा कि सरकार का लक्ष्य प्रत्येक गांव, कस्बे और शहर को बेहतर सड़क सुविधाओं से जोड़ना है। 68 मिसिंग लिंक और 83 सड़कें होंगी दुरुस्त स्वीकृत कार्यों में 68 मिसिंग लिंक सड़कें शामिल हैं, जिनके बनने से वर्षों से अधूरे पड़े संपर्क पूरे होंगे। वहीं 83 नॉन-पैचेबल सड़कों का पुनर्निर्माण किया जाएगा। सार्वजनिक निर्माण विभाग के अधिकारियों के अनुसार इन परियोजनाओं से न केवल ग्रामीण क्षेत्रों की पहुंच बेहतर होगी, बल्कि किसानों को मंडियों तक पहुंचने, विद्यार्थियों को स्कूल-कॉलेज जाने, मरीजों को अस्पताल पहुंचने और पर्यटन स्थलों तक आवाजाही में भी सुविधा मिलेगी।
जिले में मानसून की रफ्तार अभी भी सामान्य से पीछे है। अब तक जिले में 206.18 मिमी बारिश दर्ज की गई है, जबकि इस अवधि में सामान्य बारिश 360.63 मिमी होनी थी। इस तरह जिले में वर्षा 42.83 प्रतिशत कम रही है और इसे डेफिसिट श्रेणी में रखा गया है। पिछले वर्ष इसी अवधि तक 378.35 मिमी बारिश हुई थी। हालांकि कई प्रमुख बांधों-झीलों में जलभराव की स्थिति सुधरी है। उदयसागर झील 74.05%, फतहसागर 71.65%, स्वरूप सागर 65.67%, साबरमती 66.76%, माही वाकल (मानसी वाकल) 54.32% तथा वल्लभनगर बांध 53.39% क्षमता तक भर चुके हैं। वहीं, सागवाड़ा की पाल बांध क्षमता के साथ 100% भर गया है। लेकिन, कुछ की स्थिति कमजोर बनी हुई है। बागोलिया बांध केवल 2.93%, आकोदड़ा 7.60%, खरताणा 3.07%, भट्ट 7.37%, सालेरा 2.81% और फीला 6.55% क्षमता तक ही भर पाए हैं। बता दें कि जिले में कुल 36 बांध-झीलें हैं। इनमें 4.25 एमक्यूएम से अधिक क्षमता वाले (मध्यम एवं बड़े बांध) 15 और 4.25 एमक्यूएम से कम क्षमता वाले (लघु बांध) 21 बांध हैं।
अंबावगढ़ में हिल पॉलिसी की धज्जियां उड़ाते हुए पहाड़ी काटने के मामले में नगर निगम की लापरवाही अब साफ नजर आ रही है। दो माह पहले शहर के अंबावगढ़ में कटनी शुरू हुई पहाड़ी को नगर निगम भी नहीं बचा पाया। निगम की अनदेखी के चलते दो प्लॉट मालिकों ने आधी से ज्यादा पहाड़ी को काट दिया है। खास बात यह है कि दैनिक भास्कर ने गत 15 जून को अवैध रूप से पहाड़ी कटने का खुलासा किया था। तब निगम ने कार्रवाई के नाम पर सिर्फ पोकलेन मशीन की चाबी जब्त की थी। उसे भी छोड़ दिया गया। लेकिन, इसके बाद न एफआईआर दर्ज कराई, न जुर्माना लगाया और न ही भवन निर्माण की स्वीकृति निरस्त की। नतीजा यह हुआ कि दो माह में पहाड़ी का बड़ा हिस्सा काट दिया गया। अब वहां मकान निर्माण की तैयारी है। ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि यह निगम की अनदेखी है या मिलीभगत ?
शहर के व्यावसायिक प्रतिष्ठानों से पिछले 6 माह से बंद डोर-टू-डोर कचरा संग्रहण अब फिर शुरू होने जा रहा है। 10 अगस्त से 2 हजार व्यावसायिक प्रतिष्ठानों से नियमित कचरा उठाया जाएगा। इसके लिए निगम ने सेनटेन लाइफ एजेंसी को ठेका दिया है। खास बात यह है कि कचरा संग्रहण से निगम को पिछली बार से तीन गुना ज्यादा राजस्व मिलेगा। निगम को अब तक मासिक 7 लाख आय होती थी, जो अब बढ़कर 15 से 20 लाख हो जाएगी। इसकी वजह यह है कि एजेंसी निगम को शुल्क का आधा हिस्सा देगी। हालांकि, इसका असर प्रतिष्ठानों पर नहीं होगा, क्योंकि शुल्क पहले से तय दरों के अनुसार ही ही वसूला जाएगा।
कभी वर्षा जल से लबालब भरने वाला रूपसागर तालाब आज अपनी पहचान खोता जा रहा है। तालाब का प्राकृतिक कैचमेंट एरिया धीरे-धीरे भूमाफिया की भेंट चढ़ गया। प्रशासनिक ढिलाई के कारण कैचमेंट पर कॉलोनियां बस गई, तालाब पेटे तक में निर्माण हो गए, लेकिन समय पर न तो सीमांकन हुआ और न ही अतिक्रमण हटाए गए। नतीजा यह है कि अब रूपसागर में बारिश का पानी कम और सीवरेज ज्यादा पहुंच रहा है। हालात इतने बिगड़ चुके हैं कि बरसात नहीं होने के बावजूद तालाब लगातार भरा हुआ है, क्योंकि इसमें दिन-रात गंदा पानी गिर रहा है। तालाब में जमा सीवरेज अब सड़ने लगा है। पानी से उठ रही दुर्गंध ने आसपास रहने वाले लोगों का जीना मुश्किल कर दिया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए तो आने वाले वर्षों में रूपसागर की पहचान एक ऐतिहासिक जलाशय नहीं, बल्कि शहर के सबसे बड़े गंदे सीवरेज कुंड के रूप में रह जाएगी।
मेडिकल काउंसलिंग कमेटी (एमसीसी) द्वारा नीट यूजी-2026 के तहत ऑल इंडिया 15% कोटा एमबीबीएस और बीडीएस काउंसलिंग के प्रथम चरण की रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया बुधवार, 5 अगस्त से प्रारंभ कर दी गई है। प्राथमिक चरण में देशभर के 11.21 लाख क्वालिफाइड अभ्यर्थियों की नजर 450 मेडिकल संस्थानों की 63,159 सरकारी एमबीबीएस सीटों पर रहेगी।एमसीसी ने अभ्यर्थियों की सुविधा के लिए 56 पेजों की विस्तृत काउंसलिंग गाइड भी जारी की है। इस गाइड में ऑथेंटिकेशन, एप्लीकेशन फॉर्म, क्वालिफिकेशन विवरण, डॉक्यूमेंट अपलोड और फाइनल सबमिट सहित 7 प्रमुख चरणों को फ्लो-चार्ट व स्क्रीनशॉट के माध्यम से दर्शाया गया है। रजिस्ट्रेशन एवं फीस भुगतान 12 अगस्त तक होगा, जबकि चॉइस फिलिंग 6 से 13 अगस्त के मध्य की जा सकेगी। सीट आवंटन का परिणाम 17 अगस्त को जारी होगा और चयनित विद्यार्थियों को 18 से 22 अगस्त 2026 तक आवंटित कॉलेजों में रिपोर्टिंग व ज्वॉइनिंग करनी होगी।
452 एमसीएफटी भर भराव क्षमता वाली पिछोला झील में 70 नावों और 41 जेटियों का संचालन झील संरक्षण की दृष्टि से उचित नहीं है। नावों और जेटियों की संख्या नियंत्रित करने के साथ सड़क मार्ग से जुड़ी होटलों को नाव संचालन की अनुमति नहीं की ही नाव संचालन की स्वीकृति दी जानी चाहिए। झील संरक्षण एवं विकास समिति की ओर से मांगे सुझावों के तहत झील विकास प्राधिकरण के पूर्व सदस्य तेजशंकर पालीवाल ने ये सुझाव दिए। उन्होंने कहा कि पिछोला झील में ठेकेदार व निजी होटलों की करीब 70 नावें और 41 जेटियां है। झील की क्षमता को देखते हुए इनकी संख्या सीमित की जानी चाहिए। पालीवाल ने सुझाव दिया कि दूध तलाई पर नगर निगम की दो जेटियों से भी नावों का संचालन किया जाए। नावों के संचालन के लिए मार्ग निर्धारित हो तथा चप्पू वाली नावों को प्रोत्साहित किया जाए। उन्होंने कहा कि सौर ऊर्जा और बैटरी से चलने वाली प्रदूषण एवं शोर रहित नावों को बढ़ावा दें, हाई स्पीड बोट का उपयोग आपातकाल में ही किया जाए।
लेकसिटी में शुक्रवार को दिनभर मौसम सुहाना बना रहा। आसमान में दिनभर बादलों का डेरा रहा और चलने वाली ठंडी हवाओं ने लोगों को गर्मी व उमस से काफी राहत दिलाई। हालांकि बादल छाए रहने के बावजूद बारिश न होने से शहरवासियों के चेहरों पर खुशी कुछ सीमित ही नजर आई। शुक्रवार को अधिकतम तापमान 30.9 डिग्री और न्यूनतम 23.3 डिग्री दर्ज किया गया।
झीलों की नगरी में मानसून की बेरुखी लगातार जारी है। शहर में शनिवार का पूरा दिन सूखा बीत गया। हालांकि दिन भर आसमान में बादलों की आवाजाही बनी रही, लेकिन एक बूंद भी नहीं बरसी। दिन का अधिकतम तापमान 32.2 डिग्री और रात का 24.1 डिग्री दर्ज किया गया। उमस और गर्मी से शहरवासी दिनभर बेहाल नजर आए। मौसम विशेषज्ञ डॉ. आरएस देवड़ा के अनुसार, उत्तर-पूर्वी राजस्थान में अगले दो से तीन दिनों तक वर्षा का दौर जारी रहने की संभावना है। हालांकि, मेवाड़ समेत दक्षिणी राजस्थान और हाड़ौती क्षेत्र में आगामी 5 दिनों के दौरान केवल खंड वर्षा (रिमझिम या छिटपुट बारिश) ही देखने को मिल सकती है।
राजस्थान राज्य पथ परिवहन निगम (आरएसआरटीसी) वित्तीय वर्ष 2026-27 में अपने बेड़े का कायाकल्प करने जा रहा है। आम यात्रियों के सफर को अधिक सुरक्षित, आधुनिक और आरामदायक बनाने के लिए निगम 200 नई बीएस-6 सुपर एक्सप्रेस ब्लू लाइन बसें सड़कों पर उतारने की तैयारी में है। बसों की बॉडी तैयार (फैब्रिकेशन) करने के लिए निगम ने करीब 34 करोड़ रुपए का ई-टेंडर जारी किया है। नई बसें पूरी तरह रैटल-प्रूफ, डस्ट-प्रूफ और लीक-प्रूफ होंगी। यानी सफर के दौरान शोर नहीं होगा, धूल अंदर नहीं आएगी और बारिश में छत से पानी टपकने की समस्या पूरी तरह खत्म होगी। महिलाओं और आम यात्रियों की सुरक्षा के लिए हर बस में 5 मेगापिक्सल के दो सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएंगे। इनमें 1 टीबी स्टोरेज वाला एमएनवीआर सिस्टम होगा, जो 15 दिनों तक का वीडियो रिकॉर्ड सुरक्षित रखेगा।
झीलों की नगरी में देशी-विदेशी पर्यटकों को प्रमुख पर्यटन स्थलों के साथ शहर की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, इतिहास, वास्तुकला और पारंपरिक जीवनशैली को करीब से जानने का अवसर मिलेगा। नगर निगम नए कलेवर में हैरिटेज वॉक फिर शुरू कर रहा है। इसका शुभारंभ रविवार को जगदीश मंदिर के पास नगर निगम हैरिटेज हाउस (पूर्व पुस्तकालय भवन) से सुबह 11 बजे किया जाएगा। शुभारंभउदयपुर सांसद मन्नालाल रावत, शहर विधायक ताराचंद जैन, ग्रामीण विधायक फूलसिंह मीणा, संभागीय आयुक्त एवं नगर निगम प्रशासक प्रज्ञा केवलरमानी तथा नगर निगम आयुक्त अभिषेक खन्ना करेंगे।
प्रदेश में रविवार को मानसून सक्रिय रहा। कई जिलों में हल्की से मध्यम बारिश दर्ज हुई। सबसे अधिक बारिश चूरू और करौली में 11.5 मिमी दर्ज की गई। राजधानी जयपुर में भी दोपहर तक रिमझिम बारिश का दौर चला। बारिश का यह दौर आगे भी जारी रहेगा। पिछले कुछ दिनों से लगातार सक्रिय रहे मानसून के कारण अब कई जिलों में बारिश का आंकड़ा सामान्य से ऊपर पहुंच गया है। रविवार को 12 जिले ऐसे रहे जिनमें 1 जून से 9 अगस्त तक की अवधि में होने वाली सामान्य बारिश से अधिक बारिश दर्ज हो चुकी है। राजधानी जयपुर अभी सामान्य बारिश से 20 प्रतिशत पीछे है। मौसम विभाग के अनुसार अभी आने वाले दिनों में बारिश का यह दौर जारी रहेगा। विभाग ने 37 जिलों में अगले 3 दिन बारिश का यलो अलर्ट जारी किया है। बारां, बूंदी, चित्तौड़गढ़, झालावाड़ करौली, कोटा और सवाई माधोपुर में तेज बारिश होने के आसार हैं।
नवरत्न कॉम्प्लेक्स क्षेत्र में सीवरेज की वर्षों पुरानी समस्या अब दूर होने की उम्मीद जगी है। उदयपुर विकास प्राधिकरण ने भुवाणा स्थित नवरत्न कॉम्प्लेक्स क्षेत्र में सीवरेज नेटवर्क विकसित करने के लिए 96.67 करोड़ रुपए की प्रशासनिक एवं वित्तीय स्वीकृति जारी की है। योजना के तहत करीब 45.45 किलोमीटर लंबा सीवरेज नेटवर्क बिछाया जाएगा और आवासीय व व्यावसायिक परिसरों को जोड़ने के लिए 7000 हाउस कनेक्शन किए जाएंगे। सीवरेज नेटवर्क तैयार होने के बाद इसके 10 वर्ष तक संचालन एवं संधारण की जिम्मेदारी भी इसी परियोजना में शामिल की गई है। वर्तमान में क्षेत्र में सीवरेज व्यवस्था नहीं होने से भवनों और कॉम्प्लेक्स से निकलने वाला गंदा पानी खाली भूखंडों व खातेदारी भूमि में फैल रहा है।
स्मार्ट सिटी में पर्यटकों की बढ़ती आवाजाही जहां पर्यटन कारोबार के लिए अच्छी खबर है, वहीं अंदरूनी शहर के बाशिंदों के लिए वीकेंड अब जाम और अव्यवस्था का पर्याय बनता जा रहा है। शुक्रवार शाम से रविवार शाम तक चांदपोल, ब्रह्मपोल, अम्बापोल, जाड़ा गणेशजी चौक, जगदीश चौक और गणगौर घाट के आसपास यातायात दबाव इतना बढ़ जाता है कि सामान्य आवाजाही तक मुश्किल हो जाती है। स्थिति बिगड़ने पर मेडिकल इमरजेंसी या किसी गंभीर स्थिति में मरीज को अस्पताल पहुंचाना भी चुनौती बन सकता है। पूर्व में पुलिस की यातायात योजना में अंदरूनी शहर को जाम से राहत दिलाने के लिए ब्रह्मपोल, नागा नगरी और अमराई में वन-वे व्यवस्था लागू करने की बात सामने आई थी। इसके तहत सुबह 10 से रात 8 बजे तक चारपहिया वाहनों के लिए एकतरफा यातायात चलाने की योजना थी। लेकिन, वर्तमान स्थिति में योजना के क्रियान्वयन पर सवाल खड़े हो रहे हैं। वीकेंड पर पर्यटकों का दबाव बढ़ने से समस्या कई गुना बढ़ जाती है।
निर्माण से बचाने के लिए सुप्रीम कोर्ट की गठित न उच्च स्तरीय समिति की उदयपुर बैठक का कड़वा ग सच यही है कि जब तक माइनिंग और रियल एस्टेट की के लिए अरावली की एक समान परिभाषा लागू नहीं के होगी, तब तक 97 फीसदी अरावली का संरक्षण वी महज कागजी दावा रहेगा। बैठक में 100 मीटर के वाली नई परिभाषा और संरक्षण के दावों पर मंथन गे तो हुआ, लेकिन जमीनी हकीकत ऐसी बैठकों से व्थ बिल्कुल उलट है। नीतिगत विसंगति का सीधा बई फायदा रियल एस्टेट माफिया उठा रहा है। शहरों री (यूडीएच) में कड़े हिल बायलॉज लागू होने के डर के से बिल्डरों ने ग्रामीण इलाकों का रुख कर लिया है। अरावली की सुरक्षा के नाम पर तय की जा रही 100 मीटर की ऊंचाई वाली परिभाषा खुद अरावली त के लिए सबसे बड़ा खतरा बन गई है। इस परिभाषा के तहत केवल 100 मीटर से ऊंचे शिखरों को संरक्षण के दायरे में लाया जा रहा है, जिससे उससे जुड़ी छोटी पहाड़ियां कानूनी सुरक्षा से बाहर हो जाती हैं। माइनिंग और रियल एस्टेट कारोबारी इसी तकनीकी खामी का फायदा उठाकर छोटी पहाड़ियों को पूरी तरह नेस्तनाबूद कर रहे हैं।
करीब आधा सावन बीत चुका और रंगत पर है। शहर की झीलें, धुंध में लिपटी अरावली की पहाड़ियां और चारों ओर फैली हरियाली देशभर के पर्यटकों को खींच ला रही है। ऐसे में अगस्त पर्यटन उद्योग के लिए वरदान से कम साबित नहीं हो रहा है।अब स्वतंत्रता दिवस (2 दिन की छुट्टी) और रक्षाबंधन (3 दिन लगातार छुट्टियां) के रूप में बैक-टू-बैक लंबे वीकेंड्स मिल रहे हैं। इस वजह से शहर के प्रमुख होटलों और रिसॉर्ट्स में अभी से 70 प्रतिशत तक एडवांस बुकिंग दर्ज की जा चुकी है, जिसके इस सप्ताह के अंत तक शत-प्रतिशत होने के पूरे आसार हैं।
सिटी रेलवे स्टेशन को वर्ल्ड क्लास बनाने की योजना फिलहाल ठप है। पुनर्विकास का काम पिछले 2 महीनों से बंद पड़ा है। मौके पर एक भी मजदूर काम नहीं कर रहा। स्टेशन परिसर की सुरक्षा के लिए केवल सुरक्षा गार्ड तैनात हैं। लिफ्ट और एस्केलेटर के करोड़ों रुपए के कलपुर्जे व अन्य निर्माण सामग्री ढंककर रखी हुई है। काम रुकने से यात्रियों की परेशानी भी बढ़ गई है। लिफ्ट और एस्केलेटर बंद होने से रोजाना हजारों यात्रियों को लंबा पैदल सफर करना पड़ रहा है। एक प्लेटफॉर्म से दूसरे पर जाने में वरिष्ठ नागरिक, बुजुर्ग और दिव्यांग यात्रियों को सबसे ज्यादा परेशानी हो रही है। प्लेटफॉर्म पर तेज धूप और बारिश से बचाव के लिए पर्याप्त पैसेंजर शेड भी नहीं हैं। सर्कुलेटिंग एरिया में निर्माण के चलते पार्किंग व्यवस्था भी चरमरा गई है। सभी प्लेटफॉर्म पर अधूरे पिलर के बेस से लोहे के सरिये बाहर निकले हैं। इनसे यात्रियों को गंभीर चोट लगने का खतरा है। विशेष अवसर या त्योहार पर अचानक बढ़ने वाली भीड़ के लिए पर्याप्त प्रतीक्षालय भी उपलब्ध नहीं हैं। चर्चा है कि काम करने वाली एजेंसी ने काम छोड़ दिया है।
शिक्षा विभाग द्वारा सत्र 2025-26 और सत्र 2026-27 के शाला दर्पण आंकड़ों के विश्लेषण में उदयपुर जिले के सरकारी स्कूलों के लिए अच्छी खबर सामने आई है। नए पुनर्गठित जिले के 16 ब्लॉकों का कुल नामांकन 3,46,626 से बढ़कर 3,56,518 हो गया है। यानी एक वर्ष में जिले में 9,892 नए विद्यार्थियों (+2.85%) का इजाफा दर्ज किया गया है। दिलचस्प यह है कि इस वर्ष कुल वृद्धि में लड़कों की संख्या का योगदान लड़कियों से अधिक रहा है। जहां छात्रों के नामांकन में 5,464 (+3.18%) की बढ़ोतरी हुई है, वहीं छात्राओं के नामांकन में 4,428 (+2.53%) की वृद्धि हुई है।