सज्जनगढ़ वन्यजीव अभ्यारण्य की सुरक्षा के लिए खींची गई लाल और गुलाबी रेखाएं (ईको-सेंसिटिव जोन व एक किमी निर्माण निषेध क्षेत्र) अब सिर्फ कागजों पर हैं। यहां एक दशक में अधिकारियों की कथित मिलीभगत व अनदेखी से 100 से अधिक अवैध छोटे-बड़े होटल, रिसॉर्ट, कैफे और व्यावसायिक परिसर बन चुके हैं। एनजीटी और पर्यावरण मंत्रालय की सख्त हिदायतों को दरकिनार कर अरावली की पहाड़ियों खत्म किया जा रहा है। ताज्जुब की बात यह है कि कृषि और नो-कंस्ट्रक्शन लैंड पर बने इन रिसॉर्ट्स को कमर्शियल बिजली-पानी के कनेक्शन भी दे दिए गए। जब भी अदालती दबाव बढ़ता है, उदयपुर विकास प्राधिकरण (यूडीए) केवल सीलिंग या आंशिक तोड़फोड़ का दिखावा करता है। निर्माणकर्ता कानूनी लूपहोल्स और यूडीए की ढीली पैरवी का फायदा उठाकर आसानी से स्टे ऑर्डर ले आते हैं। ऐसे में प्रशासनिक निष्पक्षता और अरावली के ईको-सिस्टम की साख पर सवाल है।
सिटी रेलवे स्टेशन से कलक्टर बंगले तक एलीवेटेड रोड में आ रही सूरजपोल चौराहे की ऐतिहासिक छतरी को पीछे शिफ्ट किया जा रहा है। चौराहे के बीच बने पार्क का दायरा भी कम करने का कार्य चल रहा है। सूरजपोल चौराहे पर एलीवेटेड रोड के पिलर खड़े होने हैं। इसके लिए पार्क की छतरी के विभिन्न हिस्सों को हटाकर पीछे रखा है। वहीं गुरुवार को पार्क का भराव हटाने का कार्य किया। निर्माण एजेंसी पार्क की चौड़ाई कम कर पिलर खड़े करेगी। नगर निगम की ओर से बनाए जा रहे इस एलीवेटेड रोड प्रोजेक्ट के पूरा होने पर सिटी रेलवे स्टेशन आने-जाने वाले यात्रियों के साथ ही शहरवासियों और पर्यटकों को आवागमन में बड़ी सुविधा मिलेगी। 2.75 किमी लंबे इस प्रोजेक्ट में 116 फाउंडेशन (पिलर) बनाए जाने हैं। इनमें से 66 से अधिक फाउंडेशन का कार्य पूरा हो चुका है। सिटी रेलवे स्टेशन से उदियापोल तक एलीवेटेड रोड का ढांचा अब स्पष्ट दिखाई देने लगा है।
एक तरफ राज्य सरकार शहरों में शिविर लगाकर जनता को जमीनों के पट्टे बांटने का दावा कर रही है, वहीं दूसरी तरफ उदयपुर नगर निगम में पट्टों के नाम पर भारी लापरवाही सामने आई है। निगम के ऑनलाइन सिस्टम की पड़ताल में यह कड़वा सच सामने आया है कि साल 2021 से अब तक 3,673 पट्टों की फाइलें अटकी हुई हैं।इनमें से 947 फाइलें आवेदकों के अपूर्ण दस्तावेजों के कारण पेंडिंग हैं, जबकि 2,726 पट्टे खुद नगर निगम ने बिना किसी ठोस कारण के अपने स्तर पर रोक रखे हैं। इसके अलावा 441 आवेदन निरस्त किए जा चुके हैं। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि निगम के ऑनलाइन रिकॉर्ड के अनुसार, 2021 से अब तक मात्र 19 पट्टे ही जारी किए गए हैं। भास्कर की पड़ताल में सिस्टम पर दर्ज रिमार्क ने निगम अधिकारियों की कार्यप्रणाली की पोल खोल दी है।
सज्जनगढ़ ईको-सेंसिटिव जोन और एक किलोमीटर के नो-कंस्ट्रक्शन जोन में अरावली की पहाड़ियों को काटकर खड़े किए गए अवैध निर्माणों पर उदयपुर विकास प्राधिकरण (यूडीए) की कार्रवाई केवल कागजी आंकड़ों तक सिमट कर रह गई है। हाईकोर्ट में 94 अवैध निर्माण चिह्नित करने और 25 को सीज करने की जानकारी देने वाले यूडीए ने इस कड़वे सच पर पर्दा डाल दिया कि सीज किए गए 25 में से 20 अवैध निर्माण पिछले दरवाजे से कैसे सीज-मुक्त हो चुके हैं। यूडीए की ढीली पैरवी से कोर्ट से स्टे लाने और प्राधिकरण में महज पेनल्टी जमा कराकर कंपाउंडिंग कराने का यह पूरा खेल अरावली के ईको-सिस्टम को लील रहा है।
केंद्र सरकार ने उदयपुर को सौगात देते हुए सिटी इन्वेस्टमेंट्स टू इनोवेट, इंटीग्रेट एंड सस्टेन 2.0 मिशन के तहत ठोस कचरा प्रबंधन मॉडल के लिए ग्रांट मंजूर की है। इसके तहत उदयपुर को 73.30 करोड़ रुपए मिलेंगे। खास यह है कि मकसद केवल कचरा उठाने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि तकनीक के जरिए कचरे का वैज्ञानिक निस्तारण, दोबारा उपयोग, ग्रीन एनर्जी उत्पादन और सफाई व्यवस्था को मॉडल के रूप में बनाना है। मिशन के तहत शहर में कचरा संग्रहण से लेकर उसके निस्तारण तक पूरी व्यवस्था को आधुनिक बनाना होगा। इसके लिए ट्रांसफर स्टेशन, मटेरियल रिकवरी फैसिलिटी, रिफ्यूज डिराइव्ड फ्यूल प्लांट, कंपोस्टिंग, बायो-सीएनजी उत्पादन, आइओटी आधारित निगरानी और जनभागीदारी पर जोर रहेगा। फंडिंग तभी मिलेगी, जब काम पूरा होगा। अगले सप्ताह स्टेट लेवल टेक्नीकल कमेटी की बैठक होगी। पहले केवल घोषणा ही गई थी, लेकिन मामला अटका हुआ था। मंत्रालय ने जनजागरूकता अभियान, नगर निगम कर्मियों का प्रशिक्षण, स्वयं सहायता समूहों और आरडब्ल्यूए की भागीदारी, पर्यटन क्षेत्रों और झीलों के लिए विशेष स्वच्छता पर भी विशेष फोकस करने के लिए कहा है। इसके लिए अलग से फंड है।
बरसात को लेकर बैचेनी बढ़ती जा रही है। जहां पहले दो दौर कमजोर रहे, वहीं तीसरे दौर से बड़ी उम्मीदें है। लेकिन, हवाओं ने बादलों का रुख मोड़ दिया तो उदयपुर में बरसात नहीं हो पा रही है। ऐसे में मानसून का तीसरा दौर दमदार होने के पूर्वानुमान पर पानी फिर रहा है। अब अगस्त के पहले सप्ताह में बरसात होने की उम्मीद जताई जा रही है। मौसम विभाग ने संभाग के लिए लगातार चेतावनी जारी की जा रही है, जिसमें मेघ गर्जना के साथ तेज बरसात होना बताया जा रहा था, पर स्थिति ये रही कि मामूली बूंदाबांदी में ही दो-तीन दिन बीत गए। शुक्रवार को तो दिन की शुरुआत ही धूप से हुई थी। दिन में बादलों की मौजूदगी भी कम हो गई और तल्ख धूप आहत करने लगी। बिना बारिश के उमस ऐसी हो गई कि दिन में ही बेचैनी होने लगी। ऐसे में बारिश की आस बढ़ गई है। दिन का पारा में एक डिग्री गिरा, पर रात के पारे में 1.3 डिग्री की बढ़त हो गई। शुक्रवार को अधिकतम पारा 33.2 डिग्री और न्यूनतम 26.3 रहा। एक दिन पहले अधिकतम 34.2 और न्यूनतम 25 डिग्री रहा था।
दिनभर दफ्तरी फाइलों में सिमटे रहने वाले शिक्षा विभाग के अधिकारियों की नींद उड़ने वाली है। खाली कक्षाओं, शांत पड़े खेल मैदानों और रात के सन्नाटे में अब शिक्षकों और अफसरों की गाड़ियां सरकारी स्कूलों के बाहर रुकेंगी। माध्यमिक शिक्षा निदेशक के नए फरमान के मुताबिक, उदयपुर जिले के शीर्ष अधिकारियों से लेकर ब्लॉक व पंचायत स्तर के अफसरों को हर महीने कम से कम 4-4 सरकारी स्कूलों में रात गुजारनी होगी। यह नाइट स्टे शाम 6 बजे से अगली सुबह 6 बजे तक पूरे 12 घंटे का रहेगा। अधिकारी रात को सिर्फ हाजिरी लगाकर न खिसक सकें, इसके लिए राज शाला संबलन एप में खास इंतजाम किया गया है। एप में नाइट विश्राम का विकल्प शाम 6 बजे खुलेगा और ठीक 12 घंटे पूरे होने के बाद ही सबमिट बटन एक्टिव होगा। यानी वक्त से पहले घर लौटने की सोच पर एप ने डिजिटल ताला लगा दिया है। लक्ष्य पूरा न करने या लापरवाही बरतने वाले अफसरों पर सीधी अनुशासनात्मक कार्रवाई होगी।
नगर निगम की महत्वाकांक्षी गोवर्धनसागर वाटर स्पोर्ट्स परियोजना दो महीने की देरी के बाद अब शुरू होने जा रही है। मई में संचालन शुरू करने का लक्ष्य तय किया था, पर उपकरणों की आपूर्ति में विलंब के कारण परियोजना समय पर शुरू नहीं हो सकी। अब फर्म ने 15 अगस्त से सभी गतिविधियां शुरू करने का दावा किया है। दूधतलाई में वाटर स्पोर्ट्स की सफलता के बाद गोवर्धनसागर उदयपुर का दूसरा वाटर एडवेंचर डेस्टिनेशन बनेगा, जहां पर्यटकों और शहरवासियों को गोवर्धन सागर में दूधतलाई की तरह ही होंगे वाटर स्पोर्ट्स व शिकारा। नौकायन के साथ कई रोमांचक वाटर स्पोर्ट्स का आनंद मिलेगा।
बारिश के मौसम में मच्छर से होने वाली बीमारियों का खतरा हर साल बढ़ता है। तीन वर्षों के आंकड़े संक्रमण के बदलते पैटर्न को दर्शा रहे है। डेंगू में उदयपुर शहर लगातार सबसे बड़ा प्रभावित क्षेत्र बना हुआ है। मलेरिया में संक्रमण का केंद्र हर साल बदल रहा है। कभी यह गिर्वा और कोटड़ा तो कभी गोगुंदा और खेरवाड़ा में ज्यादा असर नजर आया। डेंगू फैलाने वाला एडीज मच्छर साफ पानी में पनपता है। शहरी क्षेत्रों में इसकी रोकथाम चुनौती रहती है। शहर में निर्माण कार्य, छतों पर रखे कंटेनर, कूलर, टंकियां और बारिश के बाद जमा पानी मच्छरों के प्रजनन का कारण बन रहे हैं। 2024 में शहर में डेंगू के सर्वाधिक 682 मरीज सामने आए। फिर गिर्वा में 184 और बड़गांव में 143 मरीज दर्ज हुए। 2025 में डेंगू के मामलों में कमी जरूर आई, पर शहर 127 मरीजों के साथ सबसे आगे रहा। 2026 में भी अब तक शहर में सबसे ज्यादा मरीज दर्ज हुए।
मानसून के लिए सबसे अहम माने जाने वाले अगस्त की पहली तारीख को शहर में एक घंटा तेज बरसात हुई। संभवतया इस सीजन में शनिवार दोपहर में ही तेज बरसात हुई। अपराह्न करीब 3 बजे से एक घंटे तक तेज बौछारों से उदयपुर में 10 मिमी तक बरसात दर्ज की गई। शनिवार सुबह तक मदार और देवास में करीब 1-1 इंच बारिश हुई। पिछले दिनों में उमस और गर्मी की तुलना में ज्यादा शनिवार सुबह से आसमान बादलों से अटा रहा। सुबह से दोपहर तक बूंदाबांदी हुई और दोपहर बाद तेज बारिश। इसके बाद भी रुक रुककर करीब एक घंटे तक बारिश जारी रही। आर्द्रता 91 प्रतिशत से बढ़कर 98 प्रतिशत हो गई। मौसम विभाग के मुताबिक रविवार को तेज बरिश की संभावना जताई है, इसके बाद का अलर्ट जारी नहीं किया है।
उदयपुर में रविवार को दिनभर मौसम का मिजाज बदलता रहा। आसमान में घने बादलों की आवाजाही के बीच शहर के कई हिस्सों में हल्की बूंदाबांदी और फुहारों का दौर चला। तेज धूप से राहत रही, हालांकि उमस का असर बना रहा। रविवार को शहर का अधिकतम तापमान 30.2 डिग्री और न्यूनतम 24.6 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। मौसम विशेषज्ञ डॉ. आर. एस. देवड़ा के अनुसार टर्फ लाइन फिलहाल राजस्थान में अपनी सामान्य स्थिति से दक्षिण की ओर है, जो धीरे-धीरे उत्तर की ओर खिसक रही है। वहीं, पश्चिमी राजस्थान के ऊपर कम दबाव (अवदाब) का क्षेत्र सक्रिय है। इसके असर से अगले दो दिनों तक उदयपुर में बादल छाए रहने के साथ हल्की खंड वर्षा (स्पॉट रेन) की संभावना है। तापमान में विशेष बदलाव नहीं होगा।
राज्य प्रदूषण नियंत्रण मंडल ने प्रदेश में उद्योगों के पर्यावरणीय वर्गीकरण की नई व्यवस्था लागू कर दी है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) की गाइडलाइन के तहत 31 जुलाई को जारी यह व्यवस्था तत्काल प्रभाव से लागू हो गई है। इसके साथ ही पूर्व में जारी श्रेणीकरण से जुड़े सभी आदेश, सर्कुलर और गाइडलाइन निरस्त कर दिए गए हैं। जनवरी 2026 में लागू कार्यप्रणाली की समीक्षा में सामने आया था कि कई औद्योगिक क्षेत्र वर्गीकरण से छूट गए थे। अब इन लेफ्ट आउट सेक्टरों को शामिल कर नई समेकित सूची जारी की गई है, ताकि पूरे प्रदेश में नियमों का समान रूप से क्रियान्वयन हो सके।
रेड कैटेगरी (144 सेक्टर-सबसे ज्यादा निगरानी) -
एल्युमिनियम रिफाइनरी, कैप्टिव सीमेंट प्लांट, बड़े केमिकल-खाद कारखाने, कॉपर स्मेल्टर, पेट्रोकेमिकल्स, तेल रिफाइनरियां, फार्मास्यूटिकल्स, 500 से अधिक पशुओं वाले डेयरी फार्म, 5 टन/घंटे से बड़े कोयला बॉयलर और 501 से अधिक बेड वाले बड़े अस्पताल।
रेड कैटेगरी (144 सेक्टर-सबसे ज्यादा निगरानी) -
एल्युमिनियम रिफाइनरी, कैप्टिव सीमेंट प्लांट, बड़े केमिकल-खाद कारखाने, कॉपर स्मेल्टर, पेट्रोकेमिकल्स, तेल रिफाइनरियां, फार्मास्यूटिकल्स, 500 से अधिक पशुओं वाले डेयरी फार्म, 5 टन/घंटे से बड़े कोयला बॉयलर और 501 से अधिक बेड वाले बड़े अस्पताल।
जी-20 शेरपा बैठक की सफल मेजबानी के बाद एक बार फिर झीलों की नगरी उदयपुर वैश्चिक मंच के लिए तैयार है। सूत्रों के अनुसार 8 अगस्त को ब्रिक्स देशों से जुड़ी एक महत्वपूर्ण एजेंडा बैठक उदयपुर में प्रस्तावित है। हालांकि प्रशासनिक स्तर पर अभी तक इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं की की गई है, लेकिन शहर के एक प्रमुख पांच सितारा होटल में बुकिंग, सुरक्षा और आतिथ्य से जुड़ी तैयारियां शुरू होने से इस आयोजन की चर्चा तेज हो गई है। जानकारी के अनुसार, विभिन्न देशों के प्रतिनिधिमंडलों का आगमन 7 अगस्त से शुरू होगा। पारंपरिक राजस्थानी संस्कृति, लोक कलाकारों और मेवाड़ी आतिथ्य के साथ मेहमानों का स्वागत करने की तैयारियां की जा रही है। मुख्य बैठक 8 अगस्त को प्रस्तावित है, जबकि है, जबकि 9 अगस्त को प्रतिनिधिमंडल के लौटने का कार्यक्रम बताया जा रहा है। पहले टली बैठक, अब तैयारियां तेजः यहबैठक पहले भी प्रस्तावित थी, लेकिन वैश्विक परिस्थितियों और अंतरराष्ट्रीय संकट के कारण इसे स्थगित कर दिया गया था। अब इसकी तैयारियां शुरू होने के बाद आयोजन की संभावना प्रबल मानी जा रही है।
स्कॉटलैंड के ग्लास्गो में रविवार रात कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 का समापन हो गया। इन खेलों में भारत ने 13 स्वर्ण समेत कुल 39 पदक जीते। इस दौरान भारत की महिला खिलाड़ियों ने अपना दबदबा कायम किया और स्वर्ण पदक जीतने के मामले में पुरुषों से आगे रहीं। इन खेलों में भारत के खाते में आए कुल 13 स्वर्ण पदकों में से आठ महिला खिलाड़ियों ने जीते हैं, जबकि शेष पांच स्वर्ण पदक पुरुषों ने हासिल किए। सबसे खास बात यह है कि भारत की बेटियों ने ये स्वर्ण पदक वेटलिफ्टिंग, मुक्केबाजी और जूडो जैसे पावर गेम में जीते हैं। भारतीय मुक्केबाजी दल में सात महिला खिलाड़ी शामिल थीं और उनमें से छह ने यहां पदक जीते हैं। महिला मुक्केबाजों का यह कॉमनवेल्थ गेम्स के किसी एक संस्करण में रेकॉर्ड प्रदर्शन है। भारत के लिए साक्षी चौधरी, प्रीति पवार, जैस्मीन लंबोरिया, प्रिया घंघास और अरुंधति चौधरी ने स्वर्ण पदक जीते, जबकि लवलीना बारगोहेन ने रजत पदक हासिल किया। भारतीयों ने मुक्केबाजी में 7 स्वर्ग और तीन रामेत कुल स्वर्ग और तीन रामेत कुल 10 पदक अपने नाम किए।
हर साल सावन के पहले ही सोमवार को गुलाबबाग में लगने वाला पारंपरिक सखिया मेला विवादों में घिर गया। निगम ने शेरवाली फाटक पर ताला जड़कर व्यापारियों और वाहनों की एंट्री रोक दी। गेट पर होमगार्ड तैनात कर दिए और अंदर नहीं जाने दिया। समोर बाग रोड पर दुकानें लगाने की हिदायत से गुस्साए व्यापारियों ने हंगामा खड़ा कर दिया। भाजपा और कांग्रेस पदाधिकारी भी आ पहुंचे। कांग्रेसजनों ने भी निगम के फैसले का विरोध किया। आयुक्त से बात कर एतराज जताया। व्यापारियों के गंदगी नहीं फैलाने और जनप्रतिनिधियों की दखल के बाद निगम को फैसला बदलना पड़ा और गेट खोल दिए गए। सावन के सभी सोमवार को गुलाबबाग में यह मेला लगता आया है। इस साल यह 3, 10, 17 और 24 अगस्त को लगाया जा रहा है। मेले में छोटे व्यापारी खाद्य पदार्थों, खिलौनों समेत अन्य दुकानें लगाते है। गंदगी भी फैलती है। ऐसे में निगम ने दुकानें लगाने और वाहनों के प्रवेश के पर रोक लगा दी। सुबह 9 बजे निगम सीआई मांगीलाल डांगी होमगार्ड जाब्ते के साथ गुलाबबाग पहुंचे और शेर वाली फाटक पर ताला जड़ दिया। व्यापारियों को अंदर दुकानें लगाने से रोक दिया। इस पर दुकानदारों और निगम प्रशासन के बीच तीखी बहस हो गई।
युवाओं के लिए अच्छी खबर है। प्रतियोगी परीक्षाओं की बेहतर तैयारी के लिए स्वायत्त शासन विभाग की अंबेडकर ई-लाइब्रेरी योजना के तहत उदयपुर नगर निगम क्षेत्र में 2 ई-पब्लिक लाइब्रेरी आवंटित की गई हैं। पुस्तकालयाध्यक्ष राव भगवत सिंह ने बताया कि उदयपुर संभाग के 7 जिलों (उदयपुर, सलूम्बर, राजसमंद, चित्तौड़गढ़, डूंगरपुर, बांसवाड़ा और प्रतापगढ़) के कुल 23 नगरीय निकायों को शामिल किया गया है। राज्य स्तर पर एससी के विद्यार्थियों और युवाओं को आधुनिक अध्ययन वातावरण उपलब्ध कराने के लिए 193 नगरीय निकायों में 200 ई-लाइब्रेरी बनाई जा रही हैं। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा 31 अगस्त को इनका लोकार्पण करेंगे।
आखिरकार वही हुआ, जो भास्कर ने बताया था। गत 28 जुलाई को ही खबर प्रकाशित कर बता दिया था कि 15 अगस्त से पहले ई-बसें उदयपुर पहुंचेंगी। सोमवार को 9 ई-बसें उदयपुर पहुंच गई। इन्हें तीतरड़ी स्थित ई-बस डिपो पर खड़ा किया गया है। शनिवार से सोमवार तक के बीच 3-3 बसें यहां पहुंची हैं। 4 दिनों में 11 बसें और 10 से 12 दिनों में बकाया 30 बसें भी उदयपुर पहुंच जाएंगी। अभी आई 9 बसें 12 मीटर की हैं। इसमें 60 यात्री सफर कर सकते हैं। जल्द इन बसों का ट्रायल शुरू किया जाएगा। फिर निकाय चुनाव की आचार संहिता लगने से पहले इनका संचालन भी शुरू कर दिया जाएगा। इसके लिए निगम ने 21 रूट भी तय कर लिए हैं।
सांसद डॉ. मन्नालाल रावत ने सोमवार को लोकसभा में उदयपुर के जनजातीय क्षेत्र के सामाजिक, आर्थिक एवं औद्योगिक विकास के लिए नए रेल मार्गों का सर्वे करवाने का आग्रह किया है। ऐसे चार रेल मार्ग आदिवासी अंचल से जुड़े हुए हैं, जिनमें से 3 का सीधा जुड़ाव उदयपुर से संभव है। सांसद रावत ने कहा कि उदयपुर लोकसभा क्षेत्र में रेल सुविधाओं का विस्तार हुआ है। यह क्षेत्र दक्षिण राजस्थान का जनजाति बहुल और दुर्गम पहाड़ी क्षेत्र होने से अधिकांश भाग आज भी रेल संपर्क से कटा है, जिससे आवागमन, शिक्षा, स्वास्थ्य, पर्यटन, व्यापार तथा औद्योगिक विकास प्रभावित होता है। सांसद ने विकसित भारत-2047 के दृष्टिकोण के अनुरूप उपर्युक्त सभी प्रस्तावित रेल मार्गों के सर्वे को प्राथमिकता प्रदान करने का आग्रह किया, जिससे जनजातीय क्षेत्र के समग्र सामाजिक, आर्थिक एवं औद्योगिक विकास को नई गति मिल सके।
शहर में हाईकोर्ट बेंच की 45 साल से लंबित मांग एक बार फिर मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के सामने उठी। रविवार को प्रवास के दौरान मुख्यमंत्री से मुलाकात कर हाईकोर्ट बेंच संघर्ष समिति और बार एसोसिएशन ने मुद्दा उठाया। मुख्यमंत्री ने भी मांग पर सकारात्मक रुख दिखाते हुए जल्द प्रगति सुनिश्चित करने का भरोसा दिलाया। बार अध्यक्ष जितेंद्र जैन ने बताया कि देर शाम प्रतिनिधिमंडल आरसीए में मुख्यमंत्री से मिला। बलीचा में कोर्ट की नए भवन के लिए बजट पास करने, कोर्ट परिसर में पार्किंग, टॉयलेट और अन्य मूलभूत सुविधाओं की कमी का मुद्दा भी उठाया। सीएम ने कलेक्टर को जल्द जरूरी व्यवस्थाओं के निर्देश दिए। संघर्ष समिति महासचिव रामकृपा शर्मा, कोषाध्यक्ष मनीष शर्मा, सत्येंद्र पाल सिंह छाबड़ा, महासचिव लोकेश गुर्जर, उपाध्यक्ष महेंद्र मेनारिया, सचिव आशीष कुमार कोठारी और धर्मेंद्र सोनी मौजूद थे।
उदयपुर से पश्चिम बंगाल और कोलकाता की तरफ यात्रा करने वाले रेल यात्रियों के लिए राहत भरी खबर है। दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे ने ट्रेन संख्या 20971/20972 (उदयपुर सिटी - शालीमार - उदयपुर सिटी) की साप्ताहिक सेवा को अब द्वि-साप्ताहिक (हफ्ते में 2 दिन) करने का प्रस्ताव रेलवे बोर्ड को भेजा है। प्रस्ताव को मंजूरी मिलने से उदयपुर से कोलकाता मार्ग पर सफर करने वाले यात्रियों को सोमवार को एक अतिरिक्त ट्रेन सेवा का विकल्प मिलेगा। यह अतिरिक्त सेवा सोमवार को उदयपुर सिटी से रवाना होगी, जबकि वापसी में शालीमार से शुरू होकर सोमवार शाम लगभग 19:50 बजे उदयपुर पहुंचेगी।
शहर में मंगलवार को दिनभर बादलों की आवाजाही रही, लेकिन बारिश नहीं हुई। सूरज और बादलों की लुकछिपी चलती रही। कई बार घने बादल छाए, लेकिन तेज हवा इन्हें बहा ले गई। बारिश नहीं होने से दिनभर तपिश के साथ उमस का असर बना रहा। अधिकतम तापमान 30.3 और न्यूनतम 25.0 डिग्री दर्ज किया गया। मौसम विशेषज्ञ डॉ. आरएस देवड़ा के अनुसार अभी दक्षिण-पूर्वी राजस्थान के ऊपर एक कम दबाव (लो प्रेशर) का क्षेत्र सक्रिय है, जबकि पूर्वी भारत में भारी बारिश के आसार हैं। इसके प्रभाव से अगले 4-5 दिन उत्तर-पूर्वी राजस्थान में रुक-रुक कर खंड वर्षा की स्थिति बनी रहेगी। इस दरमियान उदयपुर में बादल छाए रहेंगे, तापमान स्थिर रहेगा। शहर के कुछ हिस्सों में हल्की खंड वर्षा हो सकती है।