UdaipurBlog
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राजस्थान क्रिकेट संघ में करीब ढाई साल से चल रही ऊहापोह की स्थिति से बुधवार को पर्दा उठ जाएगा। हाईकोर्ट ने 27 दिन पहले राजस्थान सरकार के एसीएस (होम) भास्कर ए. सावत को आरसीए का प्रशासक लगाया था। उन्हें जिम्मेदारी दी गई थी कि 29 जुलाई तक आरसीए के चुनाव कार्यक्रम की रूपरेखा तैयार कर हाईकोर्ट में पेश करें। अब वो समय आ गया है। संभवतः आरसीए की पिक्चर का पर्दा बुधवार को उठ जाएगा और संभवतः अगस्त के अंतिम सप्ताह या सितंबर के पहले सप्ताह में राजस्थान क्रिकेट संघ के चुनाव का रास्ता साफ हो जाएगा।
अंतरराष्ट्रीय बाघ दिवस बुधवार को है। एक तरफ पूरी दुनिया वन्यजीवों के संरक्षण पर मंथन कर रही है, वहीं मेवाड़ और मारवाड़ की सीमा पर कुंभलगढ़ वन्यजीव अभयारण्य अपना खोया गौरव पाने के मुहाने पर खड़ा है। करीब तीन दशक से जारी मुहिम अब निर्णायक दौर में है। नेशनल टाइगर कंजर्वेशन अथॉरिटी (एनटीसीए) की तकनीकी और वैधानिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद अब केवल राज्य सरकार के गजट नोटिफिकेशन का इंतजार है।अंतिम मुहर लगते ही कुंभलगढ़ देश का 59वां और राजस्थान का छठा टाइगर रिजर्व बन जाएगा। साथ ही, यह भारत के सबसे पश्चिमी छोर पर स्थित पहला टाइगर रिजर्व भी कहलाएगा। राजसमंद, उदयपुर और पाली जिलों की अरावली पर्वतमालाओं में फैले इस अभयारण्य को टाइगर रिजर्व का दर्जा मिलने से न केवल जैव-विविधता का संरक्षण होगा, बल्कि पूरे मेवाड़ क्षेत्र में इको-टूरिज्म, रोजगार और बुनियादी ढांचे के विकास को एक नई दिशा मिलेगी।
प्रदेश के शहरों में सफाई व्यवस्था बरसों से कर्मचारियों की भारी कमी से जूझ रही है। हालात ये हैं कि राज्य के 183 शहरी निकायों में सफाई कर्मचारियों के 24,752 पद खाली पड़े हैं। इस कमी को दूर करने के लिए राज्य सरकार ने पहली बार संविदा पर सीधी भर्ती करने का फैसला लिया है। इस बीच दैनिक भास्कर की पड़ताल में सामने आया कि कुल खाली पदों में से 42% (10,384 पद) सिर्फ राज्य के 10 बड़े नगर निगमों में ही हैं। इसके अलावा 248 नगर पालिकाओं में 9,577 (38.7%) और 51 नगर परिषदों में 4,791 (19.4%) पद खाली हैं। सबसे ज्यादा 4,811 पद जयपुर नगर निगम में खाली हैं। इसके बाद कोटा में 1,357, बीकानेर में 1,084 और जोधपुर में 890 पद रिक्त हैं। अन्य निगमों की बात करें तो भरतपुर में 450, सीकर में 480, अलवर में 426, उदयपुर में 300, भीलवाड़ा में 296 और सबसे कम अजमेर नगर निगम में 290 पद खाली हैं। खाली पदों के मामले में उदयपुर 10 निगमों में 8वें स्थान पर है।
शहर में इलेक्ट्रिक बसों का इंतजार अब खत्म होने जा रहा है। 15 अगस्त से पहले 20 इलेक्ट्रिक बसें उदयपुर पहुंच जाएंगी। ट्रायल के बाद शहर के विभिन्न रूटों पर उतारा जाएगा। इनके संचालन के लिए धोल की पाटी में 5 एकड़ में बना ई-बस डिपो भी तैयार है। इन बसों के लिए चालकों, टिकट वितरण के लिए परिचालकों और कार्यालयी कार्यों के लिए कार्मिकों की नियुक्ति का टेंडर भी निगम जारी कर चुका है।नए डिपो में ई-बसों की चार्जिंग के लिए आधुनिक चार्जिंग स्टेशन लगाए गए हैं। वहां एक बार में 10 बसों को एक साथ चार्ज किया जा सकता है। साथ ही बसों की मरम्मत व रखरखाव के लिए वर्कशॉप, वॉशिंग स्टेशन, पार्किंग यार्ड और कंट्रोल रूम तैयार किए गए हैं। कर्मचारियों के लिए दो मंजिला विश्राम कक्ष और लॉकर भी बनाए गए हैं। जल्द ही परिसर में सोलर पैनल भी लगाए जाएंगे, ताकि बिजली खर्च कम किया जा सके। बता दें, प्रधानमंत्री इलेक्ट्रिक बस योजना के तहत उदयपुर को कुल 50 ई-बसें मिलनी हैं। इनमें 45 बसें 9 मीटर और 5 बसें 12 मीटर लंबी होंगी। 9 मीटर बस में करीब 40 और 12 मीटर बस में करीब 60 यात्रियों के बैठने की क्षमता होगी।
उदयसागर झील, इसे कुछ वर्ष पहले प्रदूषित जलाशयों में गिना जाने लगा था, अब पानी की गुणवत्ता के मामले में सुधार की तस्वीर पेश कर रही है। राजस्थान प्रदूषण नियंत्रण मंडल के जुलाई 2024 से जून 2026 तक के परीक्षणों से स्पष्ट है कि झील के कई प्रमुख जल गुणवत्ता मानक पेयजल स्रोत के लिए निर्धारित सीमा के भीतर या उसके करीब बने हुए है। हालांकि कुछ मानकों पर अभी भी निगरानी की जरूरत है। कभी सीवरेज और प्रदूषण के कारण बुरे हाल में रहने वाली उदयसागर झील अब धीरे-धीरे अपनी सेहत सुधारती दिखाई दे रही है। उपलब्ध जल गुणवत्ता आंकड़ों के विश्लेषण से पता चलता है कि झील का पानी उपचार के बाद पेयजल स्रोत के रूप में उपयोग योग्य श्रेणी के अनुरूप बना हुआ है। जल गुणवत्ता में सुधार यह संकेत देता है कि झील संरक्षण, प्रदूषण नियंत्रण और नियमित मॉनिटरिंग के प्रयास असर दिखा रहे है। फिर भी इस स्थिति को बनाए रखने के लिए सीवरेज प्रवाह रोकना, कैचमेंट क्षेत्र का संरक्षण और नियमित वैज्ञानिक निगरानी जरूरी होगी। उदयसागर के ऐतिहासिक महत्व और पेयजल स्रोत के रूप में इसकी भूमिका को देखते हुए यह सुधार शहर के लिए सकारात्मक संकेत माना जा सकता है।
सुबह की चाय से बच्चों के दूध, मिठाइयों और रोजमर्रा के खान-पान तक हर घर की जरूरत चीनी अब महंगी होती जा रही है। खास यह कि न तो अभी शादी-विवाह का सीजन है और न ही बड़े त्योहारों की मांग शुरू हुई है, इसके बावजूद जुलाई में चीनी के दाम तीन बार बढ़ चुके हैं। एक महीने में खुदरा बाजार में चीनी 3 रुपए प्रति किलो महंगी हो गई है, जबकि थोक में भी 100 रुपए प्रति क्विटल का उछाल है। इससे हर परिवार के मासिक रसोई बजट पर अतिरिक्त बोझ पड़ने लगा है। शहर में प्रतिदिन 5 से 6 ट्रक चीनी सीधे महाराष्ट्र और गुजरात की शुगर मिलों से पहुंच रही है। इसके बावजूद मिलों से बढ़ी कीमतों का असर सीधे खुदरा बाजार तक पहुंच रहा है।
ऑनलाइन ट्रैवल पोर्टल मेक माय ट्रिप ने अगस्त में घूमने के लिए देश के टॉप-28 पर्यटन स्थलों की सूची जारी की है। इसमें राजस्थान के चार शहरों को जगह मिली है। उदयपुर के अलावा जोधपुर, माउंट आबू और जयपुर इस सूची में शामिल हैं। उदयपुर को देशभर में 7वां स्थान दिया गया है। पोर्टल के अनुसार, अगस्त में मानसून के दौरान प्रकृति के बीच सुकून के पल बिताने और भीड़ से दूर घूमने के लिए ये पर्यटन स्थल बेहतर विकल्प हैं। उदयपुर को लेकर पोर्टल ने कहा कि पिछोला झील के किनारे बसा यह शहर अरावली पर्वतमाला, शाही महलों, भव्य मंदिरों, ऐतिहासिक धरोहर और झीलों के कारण पर्यटकों को आकर्षित करता है। मानसून में हरियाली बढ़ने से शहर का प्राकृतिक सौंदर्य और निखर जाता है। विशेषज्ञों के अनुसार, राष्ट्रीय स्तर की इस सूची में उदयपुर को जगह मिलने से अगस्त और आगामी मानसून सीजन में पर्यटकों की संख्या बढ़ सकती है। इसका लाभ होटल, रिसॉर्ट, ट्रैवल एजेंसियों और स्थानीय पर्यटन कारोबार को मिलने की उम्मीद है।
बारिश की कमी से लगातार घट रहे फतहसागर झील के जलस्तर ने यूडीए के झील संरक्षण के दावों की पोल खोल दी। फतहसागर जलस्तर गिरते ही निरीक्षण के दौरान दो जगह सीवरेज और मलमूत्र का पानी सीधे झील में बहता मिला। वर्षों से से पानी के भीतर छिपे रिसाव खुलेतौर पर दिखने लगे है। झील प्रेमियों का कहना है कि समय रहते इन्हें नहीं रोका तो बारिश के बाद झील भरते ही यह अवैध डिस्चार्ज फिर पानी के नीचे छिप जाएंगे और प्रदूषण का सिलसिला जारी रहेगा। बुधवार को झीलप्रेमी तेजशंकर पालीवाल एवं अन्य झील प्रेमियों ने फतहसागर क्षेत्र का निरीक्षण किया। इस दौरान दो जगह सीवरेज का गंदा पानी झील में गिरता मिला। उन्होंने मौके के फोटो और वीडियो संबंधित अधिकारियों को भेज तत्काल कार्रवाई की मांग की। अधिकारियों ने शीघ्र समस्या दूर करने का आश्वासन दिया।
प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के लाभार्थियों तथा सामान्य घरेलू एलपीजी उपभोक्ताओं के लिए ई-केवाइसी (बायोमेट्रिक आधार प्रमाणीकरण) कराना अब अनिवार्य कर दिया है। इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (इंडेन गैस) ने सभी उपभोक्ताओं से 16 अगस्त से पहले ई-केवाइसी पूरी करने की अपील की है। निर्धारित समय तक प्रक्रिया पूरी नहीं करने वाले उपभोक्ताओं को घरेलू दरों पर एलपीजी सिलेंडर का लाभ नहीं मिल सकेगा। ऐसे उपभोक्ताओं को ई-केवाईसी पूर्ण होने तक घरेलू श्रेणी में गैस सिलेंडर जारी नहीं किया जाएगा।अरावली गैस एजेंसी के प्रबंधक मोहम्मद फारुख ने बताया कि जिन उपभोक्ताओं ने अभी तक ई-केवाइसी नहीं कराई है, उन्हें इंडियन ऑयल की ओर से मोबाइल एसएमएस भेजकर समय रहते प्रक्रिया पूरी करने के लिए लगातार सूचित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि उपभोक्ता अंतिम तिथि का इंतजार न करें और जल्द से जल्द आधार आधारित बायोमेट्रिक सत्यापन करवा लें, ताकि गैस वितरण में किसी प्रकार की परेशानी का सामना नहीं करना पड़े।
शहर में बुधवार देर रात नकबजनों ने बड़ी वारदात को अंजाम दिया, जिसने पुलिस की नाइट पेट्रोलिंग और सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए। पंचवटी स्थित नवीन ज्वेलर्स से चार नकबजन 79 मिनट में करीब एक करोड़ के सोने-चांदी, डायमंड के जेवर और नकद समेट ले गए। मामला हाथीपोल थाना क्षेत्र का है। बड़ा सवाल यह है कि पंचवटी इलाके में चार नकबजन 79 मिनट तक दुकान के अंदर रहे। शटर उखड़ा, कांच टूटा, सामान समेटा और आराम से निकल गए। लेकिन, किसी पुलिस दल को नकबजनी की भनक तक नहीं लगी। थानाधिकारी राजू देवी ने बताया कि पंचवटी में नवीन सरूपरिया की नवीन ज्वेलर्स शॉप है। गुरुवार सुबह 8 बजे कर्मचारी बंशीलाल दुकान पहुंचा तो शटर उखड़ा मिला। अंदर कांच का गेट टूटा था। सूचना पर नवीन भी दुकान पर पहुंचे। जांच में पता चला कि दुकान से 22 लाख के डायमंड, सोने की 55 ग्राम की 4 चेन, 35 ग्राम का ब्रासलेट, 30 ग्राम की 4 पोची, 95 ग्राम का रानी हार, 15 ग्राम का कड़ा, 47.8 ग्राम के कांटे व अंगूठियां, 15 ग्राम का मंगलसूत्र, 97.2 ग्राम गोल्ड, 12 चांदी के जेवर-बर्तन और 9.75 लाख रुपए चोरी हो गए।
प्रदेश में मानसून की धीमी रफ्तार का असर बांधों और नदियों के जलस्तर पर साफ दिखाई दे रहा है। मानसून के एक माह बीत जाने के बाद राजस्थान के 693 बांधों में कुल क्षमता 13,029.09 मिलियन क्यूबिक मीटर (एमसीएम) के मुकाबले 6,198.22 एमसीएम पानी ही संग्रहित है, जो कुल क्षमता का 47.57 प्रतिशत है। पिछले वर्ष इसी अवधि में बांध 75.20 प्रतिशत भरे हुए थे। उदयपुर संभाग की स्थिति भी संतोषजनक नहीं है। संभाग के 178 बांधों में कुल 1,850.69 एमसीएम क्षमता के मुकाबले 698.95 एमसीएम पानी है, यानी केवल 37.77 प्रतिशत भराव। पिछले साल इसी समय बांधों में 931.47 एमसीएम यानी 50.33 प्रतिशत पानी था। यानी हमारे बांध पिछले साल से अभी 12.5 प्रतिशत (23.25 करोड़ क्यूबिक मीटर) कम भरे हैं।
सज्जनगढ़ वन्यजीव अभ्यारण्य की सुरक्षा के लिए खींची गई लाल और गुलाबी रेखाएं (ईको-सेंसिटिव जोन व एक किमी निर्माण निषेध क्षेत्र) अब सिर्फ कागजों पर हैं। यहां एक दशक में अधिकारियों की कथित मिलीभगत व अनदेखी से 100 से अधिक अवैध छोटे-बड़े होटल, रिसॉर्ट, कैफे और व्यावसायिक परिसर बन चुके हैं। एनजीटी और पर्यावरण मंत्रालय की सख्त हिदायतों को दरकिनार कर अरावली की पहाड़ियों खत्म किया जा रहा है। ताज्जुब की बात यह है कि कृषि और नो-कंस्ट्रक्शन लैंड पर बने इन रिसॉर्ट्स को कमर्शियल बिजली-पानी के कनेक्शन भी दे दिए गए। जब भी अदालती दबाव बढ़ता है, उदयपुर विकास प्राधिकरण (यूडीए) केवल सीलिंग या आंशिक तोड़फोड़ का दिखावा करता है। निर्माणकर्ता कानूनी लूपहोल्स और यूडीए की ढीली पैरवी का फायदा उठाकर आसानी से स्टे ऑर्डर ले आते हैं। ऐसे में प्रशासनिक निष्पक्षता और अरावली के ईको-सिस्टम की साख पर सवाल है।
सिटी रेलवे स्टेशन से कलक्टर बंगले तक एलीवेटेड रोड में आ रही सूरजपोल चौराहे की ऐतिहासिक छतरी को पीछे शिफ्ट किया जा रहा है। चौराहे के बीच बने पार्क का दायरा भी कम करने का कार्य चल रहा है। सूरजपोल चौराहे पर एलीवेटेड रोड के पिलर खड़े होने हैं। इसके लिए पार्क की छतरी के विभिन्न हिस्सों को हटाकर पीछे रखा है। वहीं गुरुवार को पार्क का भराव हटाने का कार्य किया। निर्माण एजेंसी पार्क की चौड़ाई कम कर पिलर खड़े करेगी। नगर निगम की ओर से बनाए जा रहे इस एलीवेटेड रोड प्रोजेक्ट के पूरा होने पर सिटी रेलवे स्टेशन आने-जाने वाले यात्रियों के साथ ही शहरवासियों और पर्यटकों को आवागमन में बड़ी सुविधा मिलेगी। 2.75 किमी लंबे इस प्रोजेक्ट में 116 फाउंडेशन (पिलर) बनाए जाने हैं। इनमें से 66 से अधिक फाउंडेशन का कार्य पूरा हो चुका है। सिटी रेलवे स्टेशन से उदियापोल तक एलीवेटेड रोड का ढांचा अब स्पष्ट दिखाई देने लगा है।
एक तरफ राज्य सरकार शहरों में शिविर लगाकर जनता को जमीनों के पट्टे बांटने का दावा कर रही है, वहीं दूसरी तरफ उदयपुर नगर निगम में पट्टों के नाम पर भारी लापरवाही सामने आई है। निगम के ऑनलाइन सिस्टम की पड़ताल में यह कड़वा सच सामने आया है कि साल 2021 से अब तक 3,673 पट्टों की फाइलें अटकी हुई हैं।इनमें से 947 फाइलें आवेदकों के अपूर्ण दस्तावेजों के कारण पेंडिंग हैं, जबकि 2,726 पट्टे खुद नगर निगम ने बिना किसी ठोस कारण के अपने स्तर पर रोक रखे हैं। इसके अलावा 441 आवेदन निरस्त किए जा चुके हैं। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि निगम के ऑनलाइन रिकॉर्ड के अनुसार, 2021 से अब तक मात्र 19 पट्टे ही जारी किए गए हैं। भास्कर की पड़ताल में सिस्टम पर दर्ज रिमार्क ने निगम अधिकारियों की कार्यप्रणाली की पोल खोल दी है।
सज्जनगढ़ ईको-सेंसिटिव जोन और एक किलोमीटर के नो-कंस्ट्रक्शन जोन में अरावली की पहाड़ियों को काटकर खड़े किए गए अवैध निर्माणों पर उदयपुर विकास प्राधिकरण (यूडीए) की कार्रवाई केवल कागजी आंकड़ों तक सिमट कर रह गई है। हाईकोर्ट में 94 अवैध निर्माण चिह्नित करने और 25 को सीज करने की जानकारी देने वाले यूडीए ने इस कड़वे सच पर पर्दा डाल दिया कि सीज किए गए 25 में से 20 अवैध निर्माण पिछले दरवाजे से कैसे सीज-मुक्त हो चुके हैं। यूडीए की ढीली पैरवी से कोर्ट से स्टे लाने और प्राधिकरण में महज पेनल्टी जमा कराकर कंपाउंडिंग कराने का यह पूरा खेल अरावली के ईको-सिस्टम को लील रहा है।
केंद्र सरकार ने उदयपुर को सौगात देते हुए सिटी इन्वेस्टमेंट्स टू इनोवेट, इंटीग्रेट एंड सस्टेन 2.0 मिशन के तहत ठोस कचरा प्रबंधन मॉडल के लिए ग्रांट मंजूर की है। इसके तहत उदयपुर को 73.30 करोड़ रुपए मिलेंगे। खास यह है कि मकसद केवल कचरा उठाने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि तकनीक के जरिए कचरे का वैज्ञानिक निस्तारण, दोबारा उपयोग, ग्रीन एनर्जी उत्पादन और सफाई व्यवस्था को मॉडल के रूप में बनाना है। मिशन के तहत शहर में कचरा संग्रहण से लेकर उसके निस्तारण तक पूरी व्यवस्था को आधुनिक बनाना होगा। इसके लिए ट्रांसफर स्टेशन, मटेरियल रिकवरी फैसिलिटी, रिफ्यूज डिराइव्ड फ्यूल प्लांट, कंपोस्टिंग, बायो-सीएनजी उत्पादन, आइओटी आधारित निगरानी और जनभागीदारी पर जोर रहेगा। फंडिंग तभी मिलेगी, जब काम पूरा होगा। अगले सप्ताह स्टेट लेवल टेक्नीकल कमेटी की बैठक होगी। पहले केवल घोषणा ही गई थी, लेकिन मामला अटका हुआ था। मंत्रालय ने जनजागरूकता अभियान, नगर निगम कर्मियों का प्रशिक्षण, स्वयं सहायता समूहों और आरडब्ल्यूए की भागीदारी, पर्यटन क्षेत्रों और झीलों के लिए विशेष स्वच्छता पर भी विशेष फोकस करने के लिए कहा है। इसके लिए अलग से फंड है।
बरसात को लेकर बैचेनी बढ़ती जा रही है। जहां पहले दो दौर कमजोर रहे, वहीं तीसरे दौर से बड़ी उम्मीदें है। लेकिन, हवाओं ने बादलों का रुख मोड़ दिया तो उदयपुर में बरसात नहीं हो पा रही है। ऐसे में मानसून का तीसरा दौर दमदार होने के पूर्वानुमान पर पानी फिर रहा है। अब अगस्त के पहले सप्ताह में बरसात होने की उम्मीद जताई जा रही है। मौसम विभाग ने संभाग के लिए लगातार चेतावनी जारी की जा रही है, जिसमें मेघ गर्जना के साथ तेज बरसात होना बताया जा रहा था, पर स्थिति ये रही कि मामूली बूंदाबांदी में ही दो-तीन दिन बीत गए। शुक्रवार को तो दिन की शुरुआत ही धूप से हुई थी। दिन में बादलों की मौजूदगी भी कम हो गई और तल्ख धूप आहत करने लगी। बिना बारिश के उमस ऐसी हो गई कि दिन में ही बेचैनी होने लगी। ऐसे में बारिश की आस बढ़ गई है। दिन का पारा में एक डिग्री गिरा, पर रात के पारे में 1.3 डिग्री की बढ़त हो गई। शुक्रवार को अधिकतम पारा 33.2 डिग्री और न्यूनतम 26.3 रहा। एक दिन पहले अधिकतम 34.2 और न्यूनतम 25 डिग्री रहा था।
दिनभर दफ्तरी फाइलों में सिमटे रहने वाले शिक्षा विभाग के अधिकारियों की नींद उड़ने वाली है। खाली कक्षाओं, शांत पड़े खेल मैदानों और रात के सन्नाटे में अब शिक्षकों और अफसरों की गाड़ियां सरकारी स्कूलों के बाहर रुकेंगी। माध्यमिक शिक्षा निदेशक के नए फरमान के मुताबिक, उदयपुर जिले के शीर्ष अधिकारियों से लेकर ब्लॉक व पंचायत स्तर के अफसरों को हर महीने कम से कम 4-4 सरकारी स्कूलों में रात गुजारनी होगी। यह नाइट स्टे शाम 6 बजे से अगली सुबह 6 बजे तक पूरे 12 घंटे का रहेगा। अधिकारी रात को सिर्फ हाजिरी लगाकर न खिसक सकें, इसके लिए राज शाला संबलन एप में खास इंतजाम किया गया है। एप में नाइट विश्राम का विकल्प शाम 6 बजे खुलेगा और ठीक 12 घंटे पूरे होने के बाद ही सबमिट बटन एक्टिव होगा। यानी वक्त से पहले घर लौटने की सोच पर एप ने डिजिटल ताला लगा दिया है। लक्ष्य पूरा न करने या लापरवाही बरतने वाले अफसरों पर सीधी अनुशासनात्मक कार्रवाई होगी।
नगर निगम की महत्वाकांक्षी गोवर्धनसागर वाटर स्पोर्ट्स परियोजना दो महीने की देरी के बाद अब शुरू होने जा रही है। मई में संचालन शुरू करने का लक्ष्य तय किया था, पर उपकरणों की आपूर्ति में विलंब के कारण परियोजना समय पर शुरू नहीं हो सकी। अब फर्म ने 15 अगस्त से सभी गतिविधियां शुरू करने का दावा किया है। दूधतलाई में वाटर स्पोर्ट्स की सफलता के बाद गोवर्धनसागर उदयपुर का दूसरा वाटर एडवेंचर डेस्टिनेशन बनेगा, जहां पर्यटकों और शहरवासियों को गोवर्धन सागर में दूधतलाई की तरह ही होंगे वाटर स्पोर्ट्स व शिकारा। नौकायन के साथ कई रोमांचक वाटर स्पोर्ट्स का आनंद मिलेगा।
बारिश के मौसम में मच्छर से होने वाली बीमारियों का खतरा हर साल बढ़ता है। तीन वर्षों के आंकड़े संक्रमण के बदलते पैटर्न को दर्शा रहे है। डेंगू में उदयपुर शहर लगातार सबसे बड़ा प्रभावित क्षेत्र बना हुआ है। मलेरिया में संक्रमण का केंद्र हर साल बदल रहा है। कभी यह गिर्वा और कोटड़ा तो कभी गोगुंदा और खेरवाड़ा में ज्यादा असर नजर आया। डेंगू फैलाने वाला एडीज मच्छर साफ पानी में पनपता है। शहरी क्षेत्रों में इसकी रोकथाम चुनौती रहती है। शहर में निर्माण कार्य, छतों पर रखे कंटेनर, कूलर, टंकियां और बारिश के बाद जमा पानी मच्छरों के प्रजनन का कारण बन रहे हैं। 2024 में शहर में डेंगू के सर्वाधिक 682 मरीज सामने आए। फिर गिर्वा में 184 और बड़गांव में 143 मरीज दर्ज हुए। 2025 में डेंगू के मामलों में कमी जरूर आई, पर शहर 127 मरीजों के साथ सबसे आगे रहा। 2026 में भी अब तक शहर में सबसे ज्यादा मरीज दर्ज हुए।
मानसून के लिए सबसे अहम माने जाने वाले अगस्त की पहली तारीख को शहर में एक घंटा तेज बरसात हुई। संभवतया इस सीजन में शनिवार दोपहर में ही तेज बरसात हुई। अपराह्न करीब 3 बजे से एक घंटे तक तेज बौछारों से उदयपुर में 10 मिमी तक बरसात दर्ज की गई। शनिवार सुबह तक मदार और देवास में करीब 1-1 इंच बारिश हुई। पिछले दिनों में उमस और गर्मी की तुलना में ज्यादा शनिवार सुबह से आसमान बादलों से अटा रहा। सुबह से दोपहर तक बूंदाबांदी हुई और दोपहर बाद तेज बारिश। इसके बाद भी रुक रुककर करीब एक घंटे तक बारिश जारी रही। आर्द्रता 91 प्रतिशत से बढ़कर 98 प्रतिशत हो गई। मौसम विभाग के मुताबिक रविवार को तेज बरिश की संभावना जताई है, इसके बाद का अलर्ट जारी नहीं किया है।