UdaipurBlog
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हाई सिक्योरिटी रजिस्ट्रेशन प्लेट (एचएसआरपी) अभियान उदयपुर जिले में अब भी अधूरा है। केंद्र सरकार के निर्देशों के तहत 1 अप्रेल 2019 से पहले पंजीकृत सभी वाहनों पर हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट (एचएसआरपी) लगाना अनिवार्य है, लेकिन जिले में अब भी बड़ी संख्या में वाहन पुराने नंबर प्लेट के साथ दौड़ रहे हैं। परिवहन विभाग ने कई बार वाहन मालिकों से समय रहते एचएसआरपी लगवाने की अपील की, लेकिन इसका असर नहीं दिखा। जिले में ऐसे लाखों वाहन है जिनका पंजीकरण 1 अप्रेल 2019 से पहले हुआ था। इनमें दोपहिया, कार, जीप, टैक्सी, ट्रैक्टर और व्यावसायिक वाहन शामिल है। सामान्य नंबर प्लेट को आसानी से हटाया या बदला जा सकता है, जबकि एचएसआरपी टेंपर-पूफ एल्युमिनियम प्लेट होती है। इसमें क्रोमियम आधारित होलोग्राम, यूनिक लेजर कोड, नॉन-रिमूवेबल स्नैप लॉक और वाहन का डिजिटल रिकॉर्ड जुड़ा होता है। इससे चोरी के वाहन, फर्जी नंबर प्लेट और अपराध में प्रयुक्त वाहनों की पहचान तेज और सटीक हो जाती है।
कभी स्वच्छता रैंकिंग में बेहतर प्रदर्शन करने वाले उदयपुर में अब कचरा प्रबंधन व्यवस्था पिछड़ती जा रही है। जिन व्यवस्थाओं के दम पर शहर ने स्वच्छता के क्षेत्र में पहचान बनाई थी, उन्हीं व्यवस्थाओं में अब खामियां सामने आ रही है। डोर-टू-डोर कचरा संग्रहण व्यवस्था के बावजूद शहर में गीले और सूखे कचरे का अलग-अलग संग्रहण अब तक प्रभावी रूप से लागू नहीं हो पाया है। दूसरी ओर, सड़कों और खुले स्थानों को डंपिंग पॉइंट की तरह इस्तेमाल किया जा रहा है। शहर के पॉश इलाकों में शामिल भुवाणा और नवरत्न कॉम्प्लेक्स के लोग कचरा प्रबंधन की अव्यवस्था से सबसे अधिक परेशान है। भुवाणा क्षेत्र में गुरुवार को सड़क किनारे कचरा खाली किया गया। शुक्रवार को हुई बारिश के बाद यही कचरा भीगकर सड़ने लगा और पूरे क्षेत्र में दुर्गध फैल गई। स्थानीय लोगों के अनुसार बारिश के बाद स्थिति और खराब हो गई और सड़क से गुजरना मुश्किल हो गया।
जिले में बारिश का दौर जारी है। शनिवार दोपहर शहर में करीब एक घंटे तक हुई तेज बारिश से कलेक्ट्रेट, अस्पताल रोड, शास्त्री सर्किल और 100 फीट रोड सहित निचले इलाकों में जलभराव हो गया। दूसरी तरफ जलस्रोतों में भी आवक का श्रीगणेश हुआ है। जिले में बीते 24 घंटों के दौरान औसतन 39 मिमी बारिश दर्ज की गई है। कैचमेंट के नाई क्षेत्र में तेज बारिश के बाद सीसारमा नदी में 1.4 फीट, जबकि नांदेश्वर चैनल पर 10 इंच (पौन फीट से ज्यादा) बहाव शुरू हो गया। इससे पिछोला झील में आवक होने लगी है। बीते 24 घंटे में शहर में 3, मदार कैचमेंट में 9, देवास 8, नाई 5 और स्वरूपसागर क्षेत्र में 3 मिमी पानी बरसा। इस बारिश से उमस धुल गई है।
उदयपुर जिले में बिजली चोरी अब छिपकर नहीं, बल्कि खुलेआम हो रही है। बिजली विभाग ने एक माह में 25 बिजली चोरों को पकड़ा और उन पर 8 लाख रुपए से ज्यादा का जुर्माना भी लगाया। हालांकि एक भी आरोपी ने जुर्माना जमा नहीं कराया। अब विभाग ने सभी के खिलाफ बिजली चोरी निरोधक थाने में एफआईआर दर्ज करवाई है। चौंकाने वाली बात यह है कि 25 आरोपियों में 16 ऐसे हैं, जिन्होंने कनेक्शन तक नहीं लिया। ये सीधे लाइन से अवैध कनेक्शन जोड़कर बिजली का उपयोग करते रहे। सबसे ज्यादा 15 मामले अकेले वल्लभनगर क्षेत्र से सामने आए हैं। ऐसे में ग्रामीण इलाकों में बिजली चोरी का नेटवर्क विभाग के लिए बड़ी चुनौती बन चुका है।
उदयपुर मानसून के साथ लेकसिटी उदयपुर का प्राकृतिक सौंदर्य अपने पूरे शबाब पर है। शहर के आसपास की पहाड़ियां हरियाली से आच्छादित हो गई हैं और विभिन्न स्थानों पर झरने बहने शुरू हो गए हैं। बारिश के बाद बदले मौसम और प्राकृतिक नजारों का आनंद लेने के लिए पर्यटकों की आवाजाही बढ़ गई है। इसे देखते हुए पर्यटन उद्योग भी अगस्त के दो लंबे वीकेंड की तैयारियों में जुट गया है। दरअसल, अगस्त में स्वतंत्रता दिवस और रक्षाबंधन के अवसर पर लगातार छुट्टियां मिलने जा रही हैं। इसी को देखते हुए पर्यटन कारोबारियों को अच्छे व्यापार की उम्मीद है। होटल और रिसॉर्ट संचालकों ने इसके लिए विशेष पैकेज लॉन्च कर दिए हैं। पर्यटकों ने अभी से एडवांस बुकिंग कराना शुरू कर दिया है। पर्यटन व्यवसायियों का मानना है कि मानसून सीजन और लंबे वीकेंड का संयोजन उदयपुर में पर्यटकों की संख्या बढ़ाने में अहम भूमिका निभाएगा। पर्यटन इंडस्ट्री के अनुसार, वर्तमान में वीकेंड पर रिसॉर्ट और विला की ऑक्यूपेंसी 100 प्रतिशत तक पहुंच रही है। गौरतलब है कि जून महीने में रिकॉर्ड 1.43 लाख पर्यटक उदयपुर घूमने पहुंचे थे।
शहर की राह आसान करने के लिए बन रहे टू-लेन एलिवेटेड रोड का काम तय समय पर पूरा नहीं हो पाएगा। ऐसा इसलिए, क्योंकि 19 माह बीत जाने के बाद भी एलिवेटेड का महज 40 प्रतिशत काम ही पूरा हो पाया है, जबकि इसे जनवरी 2027 तक पूरा करना है। ऐसे में 6 माह में 60 फीसदी काम होना नामुमकिन है। इस बीच कई चुनौतियां भी आएंगी, जो काम में अड़ंगे पैदा करेंगी। मानसून का दौर जारी है। लगातार बारिश में काम की रफ्तार धीमी पड़ जाएगी। अगस्त के बाद से त्योहार शुरू हो जाएंगे। काम करने वाले सभी श्रमिक दूसरे राज्यों से हैं, जो अपने-अपने घर चले जाएंगे। दिसंबर तक यही हालात रहेंगे। फिर जनवरी में काम कैसे पूरा हो पाएगा?
कैचमेंट क्षेत्र में हुई बारिश के बाद जलस्रोतों में पानी की आवक शुरू होने से रविवार को पिकनिक स्पॉट आबाद रहे। शहर के नजदीक हरियाली और जलस्रोत वाले स्थलों पर इतनी भीड़ उमड़ी की मानो लेकसिटी प्रकृति की गोद में ही पहुंच गई। गाड़ियों की आवाजाही इस कद्र रही कि रास्ते जाम हो गए। रविवारीय अवकाश का लुत्फ लेने बड़ी संख्या में लोगों की पहुंच पिकनिक स्थलों पर रही। सुबह से मौसम खुशनुमा रहा। बीच-बीच में हल्की फुहारों और ठंडी हवा के बीच शहरवासियों ने बहते नदी-नालों, हरियाली से आच्छादित पहाड़ियों और प्राकृतिक वादियों का आनंद लिया। पिकनिक मनाने पहुंचे लोगों ने गर्म पकौड़ों, भुट्टों और चाय का स्वाद लेते हुए अवकाश का भरपूर लुत्फ उठाया। शहर के आसपास स्थित नांदेश्वरजी, उभेश्वरजी, कलेश्वरजी, रायता हिल्स, अलसीगढ़, बड़ी तालाब, बाहुबली हिल्स और सज्जनगढ़ सहित अन्य पिकनिक स्थलों पर दिनभर शहरवासियों और पर्यटकों की भीड़ रही। उभेश्वरजी, रायता हिल्स और सज्जनगढ़ मार्ग पर वाहनों की लंबी कतारें लगने से कई बार यातायात जाम हो गया। भीड़ अधिक होने पर कई लोग रास्ते में ही पहाडियों के किनारे उपयुक्त स्थान देखकर पिकनिक मनाते नजर आए।
राजस्थान के तीन बड़े संभागों में शिक्षा विभाग की व्यवस्था अब एक न अधिकारी, दो जिम्मेदारी के भरोसे चलेगी। पहले से ही जिले की शिक्षा व्यवस्था, स्कूलों के निरीक्षण, बजट और शिक्षकों से जुड़े कामों कका बोझ संभाल रहे अधिकारियों पर अब पूरे संभाग की जिम्मेदारी भी डाल दी गई है। संयुक्त निदेशक के पद रिक्त होने के कारण शिक्षा विभाग ने उदयपुर, जोधपुर और भरतपुर संभाग में जिले की शिक्षा व्यवस्था संभाल रहे अधिकारियों को ही संयुक्त निदेशक का अतिरिक्त कार्यभार सौंप दिया है। इससे अधिकारियों पर काम का बोझ और बढ़ेगा और जिले व संभाग दोनों स्तरों के काम प्रभावित होने की आशंका है। एक तरफ ये अधिकारी अपने जिले के स्कूलों, निरीक्षण, बजट और शिक्षकों से जुड़े काम देखेंगे, वहीं दूसरी तरफ पूरे संभाग की पदोन्नति, पेंशन, स्थानांतरण और विभागीय जांच जैसे महत्वपूर्ण मामलों की जिम्मेदारी भी संभालेंगे।शिक्षा विभाग (ग्रुप-2) के संयुक्त शासन सचिव महेंद्र कुमार खींची के अनुसार, उदयपुर के सीडीईओ वीरेन्द्र सिंह यादव को उदयपुर संभाग के संयुक्त निदेशक का अतिरिक्त कार्यभार दिया गया है।
झीलों की नगरी में देश-विदेश से आने वाले कलाकारों और शिल्पकारों के लिए बड़ी सौगात तैयार है। अंबामाता स्थित टखमण आर्ट कैंप में अब कलाकारों को सृजन के लिए स्टूडियो ही नहीं, बल्कि लंबे समय तक ठहरने की सुविधा भी मिलेगी। परिसर में करीब 45 लाख रुपए की लागत से तैयार दो कॉटेज का उद्घाटन 8 अगस्त को होगा। इसके साथ ही शिल्पग्राम के बाद उदयपुर में कलाकारों के लिए रेजिडेंसी सुविधा उपलब्ध कराने वाला यह दूसरा प्रमुख केंद्र बन जाएगा।टखमण संस्थान के सचिव संदीप पालीवाल ने बताया कि देशभर से कलाकार यहां पेंटिंग, ग्राफिक आर्ट, मूर्तिकला और सेरेमिक कला की बारीकियां सीखने और नई कलाकृतियां तैयार करने आते हैं। कई बार उन्हें सप्ताहभर या उससे अधिक समय तक उदयपुर में रुकना पड़ता है, लेकिन होटल का खर्च उनके लिए काफी अधिक होने के कारण समस्या उठानी पड़ती है। इसी को देखते हुए परिसर में कलाकारों के लिए रेजिडेंसी कॉटेज तैयार किए गए हैं, जहां वे किफायती दर पर ठहर सकेंगे और मेवाड़ की कला-संस्कृति को करीब से जान पाएंगे।
महाराणा प्रताप कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (एमपीयूएटी) की ओर से विकसित सोलर सीड ड्रायर तकनीक अब व्यावसायिक स्तर पर देशभर के किसानों तक पहुंचेगी। कृषि अनुसंधान के व्यावसायीकरण की दिशा में कदम बढ़ाते हुए विश्वविद्यालय ने इस तकनीक का हस्तांतरण गुवाहाटी की मेसर्स एग्रो लाइन टेक्नोलॉजीस एंड इंडस्ट्रीज को कर दिया है। कुलपति डॉ. प्रताप सिंह ने बताया कि प्रयोगशालाओं में विकसित तकनीक का वास्तविक लाभ किसानों तक पहुंचाना ही अनुसंधान का मुख्य उद्देश्य है। इस समझौते पर कंपनी के प्रबंध भागीदार अमरज्योति साहू और एआईसीआरपी ऑन पीईएएसईएम के प्रतिनिधियों ने हस्ताक्षर किए। मात्र 35 हजार रुपए की लागत वाला यह ड्रायर घरेलू उपयोग के लिए तैयार किया गया है, जिसमें एक बार में 3 से 5 किलो सामग्री सुखाई जा सकती है। इससे फल, सब्जियां और बीज खराब नहीं होंगे, जिससे किसानों की आय में 20 से 30 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी होगी।
वैसे तो असम में ब्रह्मपुत्र हर साल बाढ़-तबाही लाती है, लेकिन इस बार हालात ज्यादा भयानक हैं। सबसे ज्यादा दर्दनाक स्थिति जोरहाट, शिवसागर और चराईदेव जिलों में है, जहां 500 से ज्यादा गांव 19 जुलाई से लगभग जलमग्न हैं। करीब 7 लाख घरों में न बिजली है, न पीने का पानी। सरकार राशन व राहत सामग्री भी बड़ी मुश्किल से पहुंचा पा रही है। जहां बाढ़ खत्म मिली, वहीं जिंदगी थमी हुई है। शिवसागर जिले में पहुंचकर हालात देखे। यहां 328 गांव आज भी 3.4 फीट तक डूबे नेपाली खुटी गांव के 78 साल सुभोमन ने बताया कि 50 साल में इतनी भयानक बाढ़ कभी नहीं देखी। आधी रात को धमाके की आवाज के साथ नदी आई और सब बहा ले गई। हम जैसे-तैसे बचे। 38 साल के मंगल साउरा की पत्नी, बेटा, छोटी बेटी उनकी आंखों के सामने बह गए। मंगल का घर दिखो नदी के पास था। उन्होंने बताया कि वो प्रलय जैसा था। हम 25 लोग एक पक्के मकान की दो मंजिला छत पर चढ़ गए थे। लेकिन, थोड़ी देर बाद छत तक पानी आ गया। जयपुर| दो दिन से सुस्त मानसून बुधवार से फिर एक्टिव होगा। मौसम विभाग के अनुसार उत्तर-पश्चिम बंगाल की खाड़ी, उत्तरी उड़ीसा तट पर डीप डिप्रेशन सिस्टम बना है।
शहर में अब अपना आशियाना बनाना या जमीन में निवेश करना और महंगा हो गया है। राज्य सरकार के ई-पंजीयन पोर्टल के तहत अब लागू संशोधित व्यवस्था के तहत जिलेभर में डीएलसी (डिस्ट्रिक्ट लेवल कमेटी) दरों में 2 से 40 प्रतिशत तक का आनुपातिक इजाफा दर्ज हुआ है। वित्तीय वर्ष की शुरुआत में अप्रैल में लागू हुई 10 फीसदी की फ्लैट बढ़ोतरी के बाद, जिला प्रशासन और पंजीयन विभाग के री-सर्वे के आधार पर यह दूसरी बड़ी वृद्धि है।इस बढ़ोतरी का सबसे व्यापक असर यूडीए के नए पेरिफेरल एरिया और कमर्शियल कॉरिडोर पर पड़ा है। डबोक, बलीचा, तीतरडी, शोभागपुरा, भुवाणा और 100 फीट रोड जैसे तेजी से विकसित हो रहे इलाकों में पुरानी सरकारी दरों और बाजार मूल्य (मार्केट रेट) के बीच बड़ा अंतर था, जिसे पाटने के लिए दरों में 2 से 40 फीसदी तक का उछाल आया है। इसके साथ ही स्टाम्प ड्यूटी पर सरचार्ज में 3 फीसदी का इजाफा होने से अब हर तरह के प्रॉपर्टी रजिस्ट्रेशन (रजिस्ट्री) और यूडीए के भू-रूपांतरण (लैंड कन्वर्जन) शुल्क का बजट बढ़ गया है।
राजस्थान राज्य पथ परिवहन निगम (रोडवेज) ने उदयपुर जोन के 6 डिपो में चालकों की कमी दूर करने के लिए 155 हैवी व्हीकल ड्राइवरों की अनुबंधित भर्ती प्रक्रिया शुरू की है। कार्यकारी निदेशक (प्रशासन) की ओर से गत 1 जुलाई को जारी नोटिफिकेशन के तहत एक वर्ष की अवधि के लिए ई-बोली (ई-टेंडर) ई आमंत्रित की गई है। चयनित चालकों को हर महीने 15 हजार रुपए का पारिश्रमिक दिया जाएगा।यह भर्ती सरकार से मान्यता प्राप्त पंजीकृत संस्थाओं और पूर्व सैनिकों की सहकारी समितियों के माध्यम से की जाएगी। चयनित चालकों की तैनाती आवश्यकता के अनुसार उदयपुर, बांसवाड़ा, चित्तौड़गढ़, डूंगरपुर, राजसमंद और प्रतापगढ़ डिपो में की जाएगी। परिवहन निगम ने स्पष्ट किया है कि आवश्यकता के अनुसार चालकों की संख्या में कमी या बढ़ोतरी की जा सकती है। भर्ती में प्रक्रिया पूरी होने के बाद चयनित व चालकों को संबंधित डिपो में तैनात । किया जाएगा।
झीलों के संरक्षण, नौकायन और जेटी संचालन के लिए नई नीति बनाने की तैयारी शुरू हो गई है। जिला झील संरक्षण एवं विकास समिति और उदयपुर विकास प्राधिकरण (यूडीए) ने इसके लिए नियमों का ड्राफ्ट जारी किया है। अब इस पर आम लोगों, पर्यावरणविदों, पर्यटन क्षेत्र से जुड़े लोगों, नौका संचालकों और संस्थाओं से सुझाव और आपत्तियां मांगी गई हैं जो 15 दिन के भीतर राय दे सकेंगे। इन सुझावों के आधार पर अंतिम नियम तैयार किए जाएंगे। समिति के सदस्य सचिव व आयुक्त अभिषेक खन्ना ने बताया कि समिति अध्यक्ष व जिला कलेक्टर गौरव अग्रवाल की अध्यक्षता में हुई बैठक में झीलों के संरक्षण और भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए नई नीति पर चर्चा हुई। ड्राफ्ट नीति में झीलों की क्षमता के अनुसार नौकायन गतिविधियों को नियंत्रित करने, पैसेंजर कैपेसिटी तय करने, नौकाओं के संचालन की अनुमति, जेटी संचालन, सुरक्षा मानकों और पर्यावरण संरक्षण से जुड़े नियम शामिल किए गए हैं। साथ ही झीलों के संसाधनों का संतुलित और पारदर्शी उपयोग सुनिश्चित करने का भी प्रस्ताव है।
राजस्थान क्रिकेट संघ में करीब ढाई साल से चल रही ऊहापोह की स्थिति से बुधवार को पर्दा उठ जाएगा। हाईकोर्ट ने 27 दिन पहले राजस्थान सरकार के एसीएस (होम) भास्कर ए. सावत को आरसीए का प्रशासक लगाया था। उन्हें जिम्मेदारी दी गई थी कि 29 जुलाई तक आरसीए के चुनाव कार्यक्रम की रूपरेखा तैयार कर हाईकोर्ट में पेश करें। अब वो समय आ गया है। संभवतः आरसीए की पिक्चर का पर्दा बुधवार को उठ जाएगा और संभवतः अगस्त के अंतिम सप्ताह या सितंबर के पहले सप्ताह में राजस्थान क्रिकेट संघ के चुनाव का रास्ता साफ हो जाएगा।
अंतरराष्ट्रीय बाघ दिवस बुधवार को है। एक तरफ पूरी दुनिया वन्यजीवों के संरक्षण पर मंथन कर रही है, वहीं मेवाड़ और मारवाड़ की सीमा पर कुंभलगढ़ वन्यजीव अभयारण्य अपना खोया गौरव पाने के मुहाने पर खड़ा है। करीब तीन दशक से जारी मुहिम अब निर्णायक दौर में है। नेशनल टाइगर कंजर्वेशन अथॉरिटी (एनटीसीए) की तकनीकी और वैधानिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद अब केवल राज्य सरकार के गजट नोटिफिकेशन का इंतजार है।अंतिम मुहर लगते ही कुंभलगढ़ देश का 59वां और राजस्थान का छठा टाइगर रिजर्व बन जाएगा। साथ ही, यह भारत के सबसे पश्चिमी छोर पर स्थित पहला टाइगर रिजर्व भी कहलाएगा। राजसमंद, उदयपुर और पाली जिलों की अरावली पर्वतमालाओं में फैले इस अभयारण्य को टाइगर रिजर्व का दर्जा मिलने से न केवल जैव-विविधता का संरक्षण होगा, बल्कि पूरे मेवाड़ क्षेत्र में इको-टूरिज्म, रोजगार और बुनियादी ढांचे के विकास को एक नई दिशा मिलेगी।
प्रदेश के शहरों में सफाई व्यवस्था बरसों से कर्मचारियों की भारी कमी से जूझ रही है। हालात ये हैं कि राज्य के 183 शहरी निकायों में सफाई कर्मचारियों के 24,752 पद खाली पड़े हैं। इस कमी को दूर करने के लिए राज्य सरकार ने पहली बार संविदा पर सीधी भर्ती करने का फैसला लिया है। इस बीच दैनिक भास्कर की पड़ताल में सामने आया कि कुल खाली पदों में से 42% (10,384 पद) सिर्फ राज्य के 10 बड़े नगर निगमों में ही हैं। इसके अलावा 248 नगर पालिकाओं में 9,577 (38.7%) और 51 नगर परिषदों में 4,791 (19.4%) पद खाली हैं। सबसे ज्यादा 4,811 पद जयपुर नगर निगम में खाली हैं। इसके बाद कोटा में 1,357, बीकानेर में 1,084 और जोधपुर में 890 पद रिक्त हैं। अन्य निगमों की बात करें तो भरतपुर में 450, सीकर में 480, अलवर में 426, उदयपुर में 300, भीलवाड़ा में 296 और सबसे कम अजमेर नगर निगम में 290 पद खाली हैं। खाली पदों के मामले में उदयपुर 10 निगमों में 8वें स्थान पर है।
शहर में इलेक्ट्रिक बसों का इंतजार अब खत्म होने जा रहा है। 15 अगस्त से पहले 20 इलेक्ट्रिक बसें उदयपुर पहुंच जाएंगी। ट्रायल के बाद शहर के विभिन्न रूटों पर उतारा जाएगा। इनके संचालन के लिए धोल की पाटी में 5 एकड़ में बना ई-बस डिपो भी तैयार है। इन बसों के लिए चालकों, टिकट वितरण के लिए परिचालकों और कार्यालयी कार्यों के लिए कार्मिकों की नियुक्ति का टेंडर भी निगम जारी कर चुका है।नए डिपो में ई-बसों की चार्जिंग के लिए आधुनिक चार्जिंग स्टेशन लगाए गए हैं। वहां एक बार में 10 बसों को एक साथ चार्ज किया जा सकता है। साथ ही बसों की मरम्मत व रखरखाव के लिए वर्कशॉप, वॉशिंग स्टेशन, पार्किंग यार्ड और कंट्रोल रूम तैयार किए गए हैं। कर्मचारियों के लिए दो मंजिला विश्राम कक्ष और लॉकर भी बनाए गए हैं। जल्द ही परिसर में सोलर पैनल भी लगाए जाएंगे, ताकि बिजली खर्च कम किया जा सके। बता दें, प्रधानमंत्री इलेक्ट्रिक बस योजना के तहत उदयपुर को कुल 50 ई-बसें मिलनी हैं। इनमें 45 बसें 9 मीटर और 5 बसें 12 मीटर लंबी होंगी। 9 मीटर बस में करीब 40 और 12 मीटर बस में करीब 60 यात्रियों के बैठने की क्षमता होगी।
उदयसागर झील, इसे कुछ वर्ष पहले प्रदूषित जलाशयों में गिना जाने लगा था, अब पानी की गुणवत्ता के मामले में सुधार की तस्वीर पेश कर रही है। राजस्थान प्रदूषण नियंत्रण मंडल के जुलाई 2024 से जून 2026 तक के परीक्षणों से स्पष्ट है कि झील के कई प्रमुख जल गुणवत्ता मानक पेयजल स्रोत के लिए निर्धारित सीमा के भीतर या उसके करीब बने हुए है। हालांकि कुछ मानकों पर अभी भी निगरानी की जरूरत है। कभी सीवरेज और प्रदूषण के कारण बुरे हाल में रहने वाली उदयसागर झील अब धीरे-धीरे अपनी सेहत सुधारती दिखाई दे रही है। उपलब्ध जल गुणवत्ता आंकड़ों के विश्लेषण से पता चलता है कि झील का पानी उपचार के बाद पेयजल स्रोत के रूप में उपयोग योग्य श्रेणी के अनुरूप बना हुआ है। जल गुणवत्ता में सुधार यह संकेत देता है कि झील संरक्षण, प्रदूषण नियंत्रण और नियमित मॉनिटरिंग के प्रयास असर दिखा रहे है। फिर भी इस स्थिति को बनाए रखने के लिए सीवरेज प्रवाह रोकना, कैचमेंट क्षेत्र का संरक्षण और नियमित वैज्ञानिक निगरानी जरूरी होगी। उदयसागर के ऐतिहासिक महत्व और पेयजल स्रोत के रूप में इसकी भूमिका को देखते हुए यह सुधार शहर के लिए सकारात्मक संकेत माना जा सकता है।
सुबह की चाय से बच्चों के दूध, मिठाइयों और रोजमर्रा के खान-पान तक हर घर की जरूरत चीनी अब महंगी होती जा रही है। खास यह कि न तो अभी शादी-विवाह का सीजन है और न ही बड़े त्योहारों की मांग शुरू हुई है, इसके बावजूद जुलाई में चीनी के दाम तीन बार बढ़ चुके हैं। एक महीने में खुदरा बाजार में चीनी 3 रुपए प्रति किलो महंगी हो गई है, जबकि थोक में भी 100 रुपए प्रति क्विटल का उछाल है। इससे हर परिवार के मासिक रसोई बजट पर अतिरिक्त बोझ पड़ने लगा है। शहर में प्रतिदिन 5 से 6 ट्रक चीनी सीधे महाराष्ट्र और गुजरात की शुगर मिलों से पहुंच रही है। इसके बावजूद मिलों से बढ़ी कीमतों का असर सीधे खुदरा बाजार तक पहुंच रहा है।
ऑनलाइन ट्रैवल पोर्टल मेक माय ट्रिप ने अगस्त में घूमने के लिए देश के टॉप-28 पर्यटन स्थलों की सूची जारी की है। इसमें राजस्थान के चार शहरों को जगह मिली है। उदयपुर के अलावा जोधपुर, माउंट आबू और जयपुर इस सूची में शामिल हैं। उदयपुर को देशभर में 7वां स्थान दिया गया है। पोर्टल के अनुसार, अगस्त में मानसून के दौरान प्रकृति के बीच सुकून के पल बिताने और भीड़ से दूर घूमने के लिए ये पर्यटन स्थल बेहतर विकल्प हैं। उदयपुर को लेकर पोर्टल ने कहा कि पिछोला झील के किनारे बसा यह शहर अरावली पर्वतमाला, शाही महलों, भव्य मंदिरों, ऐतिहासिक धरोहर और झीलों के कारण पर्यटकों को आकर्षित करता है। मानसून में हरियाली बढ़ने से शहर का प्राकृतिक सौंदर्य और निखर जाता है। विशेषज्ञों के अनुसार, राष्ट्रीय स्तर की इस सूची में उदयपुर को जगह मिलने से अगस्त और आगामी मानसून सीजन में पर्यटकों की संख्या बढ़ सकती है। इसका लाभ होटल, रिसॉर्ट, ट्रैवल एजेंसियों और स्थानीय पर्यटन कारोबार को मिलने की उम्मीद है।