नगर निगम के कचरा संग्रहण और स्वच्छता व्यवस्था के दावों की पोल सोमवार को कचरा ट्रांसफर स्टेशन पर खुल गई। शहर का कचरा लेकर पहुंचे बड़ी ऑटो टिपर कई घंटे तक ट्रांसफर स्टेशन के बाहर खड़े रहे, लेकिन कचरे को तबाने वाले चारों कैप्सूल भरे होने के कारण कचरा खाली नहीं हो सका। इसका असर शहर की डोर-टू-डोर कचरा संग्रहण व्यवस्था पर पड़ा और कई क्षेत्रों में संग्रहण प्रभावित रहा।कर्मचारियों के अनुसार यहां एकत्र कचरे को तीतरड़ी स्थित ट्रेंचिंग ग्राउंड भेजा जाता है। वहां कचरा निस्तारण की मशीन खराब है, इससे कचरे का निस्तारण नहीं हो पा रहा। नतीजतन ट्रेंचिंग ग्राउंड पर ढेर जमा हो गए है और अब इसकी मार ट्रांसफर स्टेशन तक पहुंच गई है। कैप्सूल समय पर खाली नहीं होने से नए वाहनों का कचरा उतारना मुश्किल हो गया। सुबह से पहुंचे ऑटो टिपर चालक अपनी बारी का इंतजार करते रहे। इससे तय समय पर अन्य वार्डों में कचरा संग्रहण भी प्रभावित हुआ और पूरे सिस्टम की रफ्तार थम गई।
जून में रिटेल महंगाई 17 महीने के उच्चतम स्तर 4.38% पर पहुंच गई। इससे पहले दिसंबर 24 में महंगाई दर 5.22% थी। इसके बाद से लगातार 16 माह तक महंगाई 4% से नीचे बनी रही। यह लगातार 7वां माह रहा, जब महंगाई दर में बढ़ोतरी हुई। जनवरी-26 के बाद से अब तक महंगाई दर 2.75% से 1.63% बढ़कर 4.38% हो गई। यानी छह माह में इंडेक्स 59.22% बढ़ा। आम आदमी के लिहाज से यह अहम पड़ाव इसलिए है कि आरबीआई महंगाई के इसी स्तर के आधार पर तय करता है कि ब्याज दरें घटाएं या बढ़ाएं। अगर महंगाई 4% से ज्यादा है तो आरबीआई अगली मौद्रिक नीति की समीक्षा (3-5 अगस्त) में उन नीतिगत दरों में कमी नहीं करेगा जिस आधार पर बैंक होम लोन और ऑटो लोन समेत सभी कर्ज की दरों में कमी का फैसला करती है।
राजस्थान में गिग इकोनॉमी और त्वरित कमाई का बढ़ता आकर्षण अब उच्च शिक्षा पर असर दिखाने लगा है। उच्च शिक्षा विभाग के वार्षिक प्रगति प्रतिवेदन (2025-26) के विश्लेषण में सामने आया है कि यूजी-पीजी में नामांकन इस सत्र में 4.23% घटकर 12.55 लाख रह गया। यह लगातार दूसरा साल है, जब उच्च शिक्षा में निगेटिव ग्रोथ दर्ज हुई है। महामारी के दौरान बढ़ा नामांकन भी अब सिकुड़ चुका है। सबसे ज्यादा असर लड़कों पर दिखा है, जिनके नामांकन में 5.60% की गिरावट आई है। विशेषज्ञ मान रहे हैं कि गिग सेक्टर में तेजी से बढ़ते अवसर युवाओं को सीधे वर्कफोर्स की ओर खींच रहे हैं।
कोर्ट की सख्ती के बीच खान एवं भूविज्ञान निदेशालय ने एक बड़ा और कड़ा आदेश जारी किया है। इसके तहत सुप्रीम कोर्ट के विभिन्न फैसलों के मद्देनजर अरावली क्षेत्र के लंबित पड़े माइनिंग प्रस्तावों को अब केवल सशर्त पर्यावरण स्वीकृति (कंडीशनल ईसी) मिलेगी। हालांकि, इस मंजूरी के बाद भी पट्टाधारक सीधे तौर पर जमीन की सफाई या खनन कार्य शुरू नहीं कर पाएंगे।सुप्रीम कोर्ट के तीन बड़े फैसलों का हवालाः खान विभाग के अतिरिक्त निदेशक (पर्यावरण एवं विकास) महेश माथुर द्वारा जारी सर्कुलर में सुप्रीम कोर्ट के तीन बड़े आदेशों (9 मई 2024, 29 दिसंबर 2025 और 26 फरवरी 2026) का हवाला दिया गया है। फॉरेस्ट सर्वे ऑफ इंडिया (एफएसआई) की 25 अगस्त, 2010 की रिपोर्ट में तय अरावली पॉलीगॉन के दायरे में आने वाले सभी प्रस्तावों पर यह नियम सख्ती से लागू होगा।
उदयपुर सहित देश-दुनिया के नागरिक इस वक्त एयरलाइंस कंपनियों की मनमानी का शिकार हो रहे हैं। डीजीसीए के सख्त निर्देशों के बावजूद हवाई टिकटों के दाम लगातार बढ़ रहे हैं। उदयपुर में आगामी पर्यटन सीजन सितंबर से शुरू होकर मार्च 2027 तक चलेगा। फिलहाल शहर में न बड़ा त्योहार है, न पर्यटकों की भारी आवक, इसके बावजूद घरेलू उड़ानों का किराया 100 फीसदी तक बढ़ चुका है।एयरलाइंस कंपनियों के डायनेमिक प्राइसिंग एल्गोरिदम के आगे रेगुलेटर बेअसर साबित हो रहा है। अभी सामान्य दिनों का किराया पिछले साल के दीपावली सेलिब्रेशन जैसे पीक सीजन वाली दरों को भी पीछे छोड़ चुका है। उदयपुर-जयपुर रूट पर आम दिनों में टिकट 5 से 8 हजार में मिल जाती थी, वह आज 7 से 15 हजार तक बिक रही है। इसी तरह दिल्ली और मुंबई जैसे मुख्य रूटों पर सामान्य दिनों की बुकिंग 20,500 से 21,500 रुपए के पार जा चुकी है।
प्रदेशभर की सड़कों पर नगर निगम ऐसी स्ट्रीट लाइटें लगा रहा है, जो दूर से चमकती दिखती हैं, लेकिन सड़क पर उनकी पूरी रोशनी भी नहीं पहुंच पाती है। यानी पोल के नीचे उजाला और आगे अंधेरा। भास्कर टीम ने एक्सपर्ट के साथ जयपुर के विद्याधर नगर और मानसरोवर सेक्टर-8 में मौके पर रियलिटी चेक किया। लाइटें खुलवाकर अंदर के पार्ट्स की जांच में सामने आया कि बाहर से एमआई और बजाज जैसी ब्रांडेड दिखने वाली लाइटों में अंदर सस्ती चाइनीज एलईडी प्लेट लगी है। 5000 हजार रुपए की ब्रांडेड बॉडी में 200 रुपए की लाइट मिली। कई लाइटों में न एलईडी ड्राइवर मिला और न ही सर्ज प्रोटेक्शन डिवाइस (एसपीडी) है। नगर निगम में स्ट्रीट लाइट मेंटेनेंस के नाम पर घटिया सामग्री लगाने का भी मामला सामने आया है। खराब हो रही लाइटों की जगह कम गुणवत्ता वाली लाइटें लगाई जा रही हैं, जो जलती तो हैं, लेकिन उनका फोकस सड़क पर नहीं पड़ता।
शहर और जिले को ट्रिपिंग और अघोषित बिजली कटौती से हमेशा के लिए मुक्ति दिलाने की दिशा में बड़ा प्रशासनिक फैसला हुआ है। कलेक्टर एवं जिला मजिस्ट्रेट गौरव अग्रवाल ने 900 से 1200 करोड़ रुपए की अनुमानित लागत वाले पावर ग्रिड मेवाड़ ट्रांसमिशन लिमिटेड की स्थापना के लिए मावली और भींडर तहसील के दो गांवों की 36.6096 हेक्टेयर निजी भूमि (135 खसरे) के अधिग्रहण की अंतिम अधिसूचना जारी कर दी है। इसमें भींडर के अणगोरिया में 19.9650 और मावली के ढूंढिया गांव की 16.6446 हेक्टेयर भूमि शामिल है। एडीएम (प्रशासन) दीपेंद्र सिंह की देखरेख में आगे की कागजी कार्यवाही पूरी होगी। 765/400/220 केवी क्षमता का यह विशाल ग्रिड सब-स्टेशन तैयार होने के बाद उदयपुर सहित पूरे मेवाड़ का पावर बैकअप सिस्टम पूरी तरह बदल जाएगा। यह बिना किसी रुकावट के बिजली की आपूर्ति तय करेगा। नतीजतन ट्रांसमिशन लॉस कम होगा और नए उद्योगों व सोलर पावर प्रोजेक्ट्स को सीधा बढ़ावा मिलेगा।
शादी-ब्याह, धार्मिक आयोजनों और बड़े सामाजिक समारोहों में परोसे जाने वाले भोजन की गुणवत्ता और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए खाद्य सुरक्षा विभाग ने बड़ा कदम उठाया है। अब जिले में किसी भी सार्वजनिक आयोजन में केवल एफएसएसएआई से पंजीकृत और लाइसेंस प्राप्त हलवाई व कैटरर्स ही भोजन बना और परोस सकेंगे। बिना वैध लाइसेंस के खाद्य व्यवसाय संचालित करने वालों के खिलाफ खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम 2006 के तहत कार्रवाई की जाएगी। यह व्यवस्था राज्य स्तर पर जारी नई मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) के तहत तत्काल लागू कर दी गई है। नई व्यवस्था के तहत आयोजनकर्ता या कैटरर को कार्यक्रम से पहले खाद्य सुरक्षा विभाग को पूरी जानकारी उपलब्ध करानी होगी। इसमें कार्यक्रम की तिथि, समय, आयोजन स्थल, आयोजक का नाम व मोबाइल नंबर, कैटरर्स का नाम, एफएसएसएआई लाइसेंस संख्या, संभावित मेहमानों की संख्या तथा भोजन तैयार करने और परोसने के स्थान का विवरण देना अनिवार्य होगा। खराब गुणवत्ता वाले भोजन, मिलावट और अस्वच्छ तरीके से तैयार किए जा रहे खाद्य पदार्थों पर अब आम लोग भी सीधे शिकायत कर सकेंगे।
एमबी हॉस्पिटल के सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल में ड्रग डिस्ट्रीब्यूशन सेंटर (डीडीसी) पर मरीजों की लंबी कतार और दवा वितरण में देरी को लेकर राजस्थान पत्रिका में प्रकाशित खबर के बाद अस्पताल प्रशासन ने व्यवस्था में सुधार की कवायद शुरू कर दी है। अब मरीजों को घंटों लाइन में खड़े रहने से राहत देने के लिए डिजिटल नंबर डिस्प्ले सिस्टम लागू करने की योजना बनाई जा रही है। इसके तहत मरीजों को टोकन नंबर मिलेगा और स्क्रीन पर अपनी बारी देखकर वे काउंटर पर दवा लेने पहुंच सकेंगे।
प्रदेश में वन विकास, पौधरोपण, जल संरक्षण और एनीकट निर्माण के नाम पर खर्च होने वाले करोड़ों रुपए की गुणवत्ता जांचने वाली वन विभाग की मूल्यांकन टीम खुद अस्थायी व्यवस्था के आईसीयू में है। उदयपुर संभाग में हालात ये हैं कि जिस टीम पर 6 जिलों की निगरानी का जिम्मा है, वहां डेढ़ साल से रेंजर-एसीएफ - जैसे महत्वपूर्ण तकनीकी पद खाली हैं। ऐसे में करोड़ों के विकास कार्यों के भौतिक सत्यापन और निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।चौंकाने वाला पहलू यह है कि टीम में रेंजर का अतिरिक्त चार्ज वनरक्षक संजय जोशी को दिया गया है, जो तकनीकी रूप से इतने बड़े स्तर के मूल्यांकन के लिए अधिकृत नहीं हो सकते। टीम में शामिल अधिकांश कर्मचारी उन्हीं वन मंडलों से प्रतिनियुक्ति पर आए वनरक्षक हैं, - जिनके काम की उन्हें जांच करनी है। - यानी जो काम कर रहे हैं, उन्हीं के साथी उस काम की कमियां ढूंढ रहे हैं।
नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए) द्वारा आयोजित नीट यूजी-2026 की रजिस्ट्रेशन फीस रिफंड प्रक्रिया में एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। परीक्षा में शामिल हुए 20 लाख विद्यार्थियों में से 8.54 लाख छात्रों ने 14 जुलाई की समय सीमा बीतने के बाद भी बैंक अकाउंट डिटेल्स को रिकन्फर्म या अपडेट नहीं किया है। इस लापरवाही के चलते इन लाखों छात्रों की फीस का रिफंड अटक गया है। दूसरी ओर, एनटीए ने सजगता दिखाते हुए 11.46 लाख विद्यार्थियों के लिए 161 करोड़ की रिफंड प्रक्रिया शुरू कर दी है। विभिन्न श्रेणियों के विद्यार्थियों की औसत रजिस्ट्रेशन फीस 1400 रुपए मानकर यह गणना की गई है। भारी संख्या में छात्रों द्वारा बैंक विवरण न दिए जाने को असामान्य माना जा रहा है। हालांकि राहत की बात यह है कि एनटीए ने छात्रहित में बैंक डिटेल्स अपडेट करने की अंतिम तारीख बढ़ाकर 31 जुलाई कर दी है।
वन विभाग इस मानसून में जिले के 4000 हेक्टेयर वन क्षेत्र में ट्रेंच (खाइयों) के जरिए 129 करोड़ लीटर वर्षा जल का संग्रहण करेगा। इसके लिए वनमंडल उदयपुर, उत्तर और वन्यजीव क्षेत्र में 80 साइटों पर काम पूरे किए गए हैं। वर्षा जल के संग्रहण से भूजल रिचार्ज बढ़ेगा, जमीन में नमी बनी रहेगी और पौधों की वृद्धि को भी मदद मिलेगी। डीएफओ मुकेश सैनी ने बताया कि प्रत्येक साइट पर ट्रेंच बनाकर मानसून में बहकर जाने वाले पानी को रोका जाएगा। इसके अलावा विभिन्न स्थानों पर पत्थरों के कच्चे एनीकट भी बनाए जा रहे हैं, ताकि पानी की रफ्तार कम हो, मिट्टी का कटाव रुके और अधिक से अधिक पानी जमीन में समा सके।
राजस्थान राज्य पथ परिवहन निगम (रोडवेज) ने यात्रियों, विशेषकर महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कमर कस ली है। निगम ने उदयपुर डिपो की 144 बसों में अत्याधुनिक एआईएस-140 प्रमाणित 'व्हीकल लोकेशन ट्रैकिंग डिवाइस' (वीएलटीडी) और 12-12 पैनिक बटन लगाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इस प्रोजेक्ट पर 9.90 लाख रुपए खर्च किए जाएंगे।रोडवेज की नई बसों में यह तकनीक पहले से मौजूद है, लेकिन पुरानी बसों को अपडेट किया जा रहा है। आगार प्रबंधक हेमंत शर्मा के अनुसार, उदयपुर डिपो की सभी बसों में यह डिवाइस सिस्टम लग चुका है। उन्होंने स्पष्ट किया कि अब तक जिले में कोई गंभीर शिकायत सामने नहीं आई है। अधिकांश पैनिक बटन यात्री जानकारी के अभाव में गलती से दबा देते हैं।
शहर में सड़कों और फुटपाथों पर जीवन बसर कर रहे घुमंतु और अर्द्ध-घुमंतु परिवारों (गाडोलिया लोहार और कालबेलिया समाज) के पुनर्वास के नाम पर एक बड़ी गड़बड़ी सामने आई है। नगर निगम और उदयपुर विकास प्राधिकरण (यूडीए) ने हाल ही में शहर के विभिन्न इलाकों में सर्वे करवाकर 120 बेघर परिवारों की सूची तैयार की है। अब इन्हें सरकार की ओर से पक्के आवास या जमीन देने की तैयारी है। वर्ष 2010 के तत्कालीन नगर विकास प्रन्यास (अब यूडीए) के भूखंड आवंटन रिकॉर्ड से मिलान किया तो चौंकाने वाली खामी सामने आई। नए सर्वे में शामिल 15 ऐसे लोगों के नाम मिले, जिन्हें 16 साल पहले ही सरकार पुनर्वास योजना के तहत भूखंड आवंटित कर चुकी थी। इसके बावजूद नए सर्वे में इन्हें फिर बेघर और भूमिहीन मान लिया गया। सबसे बड़ी बात यह रही कि सर्वे के दौरान घर-घर जाकर आधार कार्ड, आय और अन्य जानकारी तो जुटाई गई, लेकिन विभागों ने अपने ही पुराने भूखंड आवंटन रिकॉर्ड का मिलान नहीं किया। जबकि सरकारी नियम के अनुसार एक व्यक्ति को पुनर्वास योजना में एक बार ही भूखंड का लाभ दिया जा सकता है।
प्रदेश में मानसून की रफ्तार अब तक उम्मीद से धीमी रही है। जल संसाधन विभाग के 1 जून से 16 जुलाई तक के आंकड़ों के अनुसार प्रदेश में अब तक 112.75 मिमी बारिश हुई है, जबकि इस अवधि तक औसतन 123.13 मिमी बारिश होती है। यानी राज्य में सामान्य से 8.43 प्रतिशत कम वर्षा हुई है। हालांकि मौसम विभाग इसे अभी भी नॉर्मल मान रहा है, लेकिन पिछले साल के मुकाबले तस्वीर काफी कमजोर है। 16 जुलाई 2025 तक प्रदेश में 256.77 मिमी बारिश हुई थी, जबकि इस बार यह आंकड़ा आधे से भी कम है।
संभाग में शनिवार रात से हाईवे पर सफर करना महंगा होगा। भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) की परियोजना कार्यान्वयन इकाई (उदयपुर) ने 5 प्रमुख टोल प्लाजा पर टैक्स बढ़ा दिया है। इनमें एनएच-14, एनएच-76, एनएच-58 (विस्तार), एनएच-158 (विस्तार) व एनएच 48 (पुराना एनएच-8) शामिल हैं। नई दरें रात 12 बजे से लागू होंगी। टोल टैक्स में 5 से 20 रुपए तक की बढ़ोतरी हुई है। मासिक पास में 20 से 30 रु. का इजाफा किया गया है। इससे निजी व व्यावसायिक, दोनों तरह के वाहनों का खर्च बढ़ेगा। लोगों की जेब पर सीधा असर पड़ेगा।
राजस्थान स्कूल शिक्षा परिषद की ओर से जून 2026 की जिला रैंकिंग जारी कर दी गई है, जिसमें उदयपुर जिले की रैंकिंग सुधरी है। मई में 27वें स्थान पर रहने वाला उदयपुर जून में 5 अंकों के सुधार के साथ 22वें पायदान पर पहुंच गया है। उदयपुर का इस माह का कुल स्कोर 25 रहा। हालांकि, जिले के कुछ ब्लॉक अभी भी पिछड़े हुए हैं, जबकि झाड़ोल ब्लॉक ने टॉप-10 में जगह बनाकर प्रदेश स्तर पर पहचान बनाई है। उदयपुर जिले के भीतर ब्लॉकवार प्रदर्शन में बड़ा अंतर देखने को मिला है। जहां झाड़ोल ब्लॉक ने 42.78 अंकों के साथ प्रदेश में 7वां स्थान प्राप्त किया है, वहीं जिले के 4 ब्लॉक ऐसे भी हैं जिनका स्कोर शून्य रहा है।
झीलों की नगरी उदयपुर की प्रमुख झीलों को स्वच्छ, जीवंत और दीर्घकाल तक संरक्षित रखने की दिशा में यूडीए (उदयपुर विकास प्राधिकरण) ने बड़ी पहल की है। फतहसागर, उदयसागर और लखावली झील में फ्लोटिंग असेंबली सहित इंटीग्रेटेड लेक वाटर सर्कुलेशन सिस्टम स्थापित करने के लिए 3 करोड़ 57 लाख 91 हजार रुपए का ओपन टेंडर जारी किया गया है। परियोजना का उद्देश्य झीलों में जल प्रवाह को बेहतर बनाना, पानी की गुणवत्ता सुधारना और दीर्घकालीन जल संरक्षण को मजबूत करना है। परियोजना पूरी होने के बाद तीनों झीलों में जल परिसंचरण बेहतर होगा, जिससे पानी की गुणवत्ता बनाए रखने में मदद मिलेगी। शहर की झीलों में जल संरक्षण के लिहाज से यह पहल महत्वपूर्ण मानी जा रही है। क्योंकि, झीलों में पानी की गुणवत्ता बनाए रखना लगातार बड़ी चुनौती रहा है। वाटर सर्कुलेशन सिस्टम के जरिये पानी में घुलित ऑक्सीजन (डिसॉल्व्ड ऑक्सीजन) का स्तर बढ़ेगा, जिससे जल का प्राकृतिक संतुलन बनाए रखने में सहायता मिलेगी।
इलेक्ट्रिक वाहनों (ईवी) की बढ़ती संख्या के बीच दिलचस्प तथ्य यह है कि सबसे ज्यादा बिजली कार नहीं, बल्कि ई-रिक्शा और ई-ऑटो खर्च कर रहे हैं। प्रदेश में फिलहाल करीब 4.9 लाख ईवी हैं, जिन्हें चार्ज करने के लिए सालाना 82.23 करोड़ यूनिट बिजली की जरूरत पड़ रही है। यह प्रदेश की कुल बिजली खपत का करीब एक फीसदी है। इसमें तिपहिया वाहनों की हिस्सेदारी 44.63 करोड़ यूनिट यानी 54.3% है। दूसरी ओर, एक इलेक्ट्रिक बस या ट्रक को सालभर चलाने के लिए औसतन 1.32 लाख यूनिट बिजली चाहिए, जिस पर 8 रुपए प्रति यूनिट की दर से करीब 10.56 लाख रुपए खर्च आते हैं। केंद्र सरकार के EV30@30 (विजन-2030) के तहत अगले पांच वर्षों में ईवी की संख्या 5 से 32 गुना तक बढ़ने का अनुमान है। ऐसे में बिजली उत्पादन, वितरण और चार्जिंग नेटवर्क पर दबाव भी तेजी से बढेगा। केंद्र सरकार की ऊर्जा पर विशेषज्ञ समिति की हाल ही में जारी रिपोर्ट के अनुसार 2030 तक देश में इलेक्ट्रिक वाहनों की संख्या 1.7 करोड़ के पार पहुंच सकती है। इनके लिए बिजली की मांग 5 से 32 गुना तक बढ़ने का अनुमान है।
अब तक टैक्स बकाया होने के बावजूद बिना रोक-टोक चल रहे बीएच सीरीज के वाहनों पर परिवहन विभाग ने सख्ती शुरू कर दी है। विभाग ने बकाया टैक्स की वसूली के लिए अभियान चलाया है। नोटिस जारी होने के 15 दिन के भीतर टैक्स जमा नहीं कराने वालों के वाहन जब्त करने के साथ नियमानुसार पेनल्टी भी लगाई जाएगी। यह कार्रवाई केवल बीएच सीरीज ही नहीं, बल्कि सभी श्रेणी के बकायादार वाहनों पर लागू होगी। परिवहन विभाग के अनुसार कई वाहन मालिक समय पर मोटर वाहन टैक्स जमा नहीं करा रहे हैं। विशेष रूप से बीएच सीरीज के कुछ वाहनों में निर्धारित अवधि पूरी होने के बाद भी अगली किस्त का टैक्स जमा नहीं कराया गया है। इसे देखते हुए विभाग ने जिलेभर में बकायादार वाहनों की सूची तैयार कर नोटिस जारी करने की प्रक्रिया तेज कर दी है।
नीट पेपर लीक के विरोध में शुरू हुआ कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) का प्रदर्शन सोमवार को संसद तक पहुंच गया। पिछले 14 साल में पहली बार प्रदर्शनकारियों की भीड़ संसद के दरवाजे तक पहुंची है। इससे पहले, 2012 में निर्भया कांड के विरोध में इस इलाके में बड़े स्तर पर प्रदर्शन हुआ था। प्रदर्शनकारी केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर सड़कों पर उतरे हैं। दिल्ली पुलिस के मुताबिक, झड़पों में 5 आईपीएस समेत 118 पुलिसकर्मी और 60 से ज्यादा प्रदर्शनकारी घायल हुए। 70 लोग हिरासत में लिए गए। वहीं, सीजेपी के प्रवक्ता आशुतोष रांका ने दावा किया कि 100 से ज्यादा प्रदर्शनकारी अस्पताल में भर्ती हैं। एक हजार से ज्यादा को चोटें आईं। सुरक्षा बलों के 15-20 वाहनों में भी तोड़फोड़ की गई। सुबह 9 बजे से शाम 4 बजे तक नई दिल्ली जिले में इंटरनेट बंद रहा। सोमवार को संसद के रेलभवन के करीब वाले दरवाजे पर सैकड़ों प्रदर्शनकारी पहुंच गए। संसद के सभी दरवाजे लॉक कर दिए गए। करीब एक घंटे प्रवेश व निकासी बंद रही। वहीं, छत्तीसगढ़, हरियाणा, तेलंगाना, बंगाल, गुजरात, यूपी और केरल समेत कई राज्यों में सीजेपी के समर्थन में प्रदर्शन हुए।