UdaipurBlog
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प्रदेश में अवैध खनन और ओवरलोडिंग पर पूरी तरह लगाम लगाने के लिए खान एवं भूविज्ञान विभाग ने अपने ऑनलाइन सिस्टम को हाईटेक कर दिया है। निदेशालय ने पुराना सिस्टम बदलते हुए नया सॉफ्टवेयर संस्करण ई-रवन्ना 2.1 लागू किया है। निदेशक महावीर प्रसाद मीणा ने सभी अधीक्षण खनि अभियंताओं को आदेश जारी कर इसे तुरंत सभी तुलायंत्रों (वे-ब्रिज) पर इंस्टॉल करने के निर्देश दिए हैं। इसे सेवा प्रदाता फर्म सीएसएम टेक्नोलॉजी ने विकसित किया है।
जिले की कानून व्यवस्था को मजबूत करने और प्रशासनिक कार्यकुशलता को नई धार देने के लिए एसपी डॉ. अमृता दुहन ने शुक्रवार, 10 जुलाई को पुलिस महकमे में बहुत बड़ा फेरबदल किया है। उन्होंने जारी अलग अलग आदेशों के तहत जिले के 272 पुलिसकर्मियों के तबादले किए गए हैं। इस जंबो सूची में 24 सहायक उप निरीक्षक (एएसआई), 36 हेड कांस्टेबल और 214 पुलिस कांस्टेबल शामिल हैं। यह फेरबदल जिले में ही किया गया है। यानी किसी भी कर्मचारी को जिले से बाहर नहीं भेजा गया है, बल्कि आंतरिक थानों, चौकियों, पुलिस लाइन और यातायात शाखा के समीकरणों को सुधारा गया है। एसपी ने सभी अधिकारियों और कर्मचारियों को तुरंत प्रभाव से अपने नए पदस्थापन पर कार्यभार संभालने के निर्देश दिए हैं।
सज्जनगढ़ वन्यजीव अभयारण्य के ईको सेंसिटिव जोन में पर्यावरणीय मानकों की शत-प्रतिशत पालना सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। कलेक्ट्रेट सभागार में शुक्रवार को अतिरिक्त जिला कलक्टर (प्रशासन) दीपेंद्रसिंह राठौड़ की अध्यक्षता में आयोजित ईको सेंसिटिव जोन मॉनिटरिंग कमेटी की बैठक में यह निर्णय लिया गया। बैठक में पर्यावरण संरक्षण, जैव विविधता संवर्धन और विभिन्न विभागों के समन्वय पर विस्तार से चर्चा की गई। एडीएम दीपेंद्रसिंह राठौड़ ने अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए कि ईको सेंसिटिव जोन में निर्धारित पर्यावरणीय मानकों और नियमों की किसी भी स्तर पर अनदेखी नहीं होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि पर्यावरण व जैव विविधता को सुरक्षित रखने के लिए सभी विभाग बेहतर तालमेल के साथ कार्य करें और किसी भी प्रकार की अनियमितता मिलने पर प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित करें। बैठक में उप वन संरक्षक यादवेंद्रसिंह चुंडावत ने पिछले निर्णयों की पालना रिपोर्ट और वन विभाग द्वारा किए जा रहे संरक्षण कार्यों का प्रस्तुतीकरण दिया। साथ ही कमेटी में नए सदस्यों के मनोनयन की प्रक्रिया और संरक्षण को प्रभावी बनाने के सुझावों पर भी विचार-विमर्श किया गया।
आदिवासी अंचल उदयपुर जिले में झाड़ोल-फलासिया क्षेत्र के किसान पारंपरिक फसलों से आगे बढ़ते हुए जर्मनी के प्रसिद्ध औषधीय पौधे कैमोमाइल की जैविक खेती कर रहे हैं। तीन वर्ष पहले शुरू हुई यह पहल आज न केवल किसानों की आय बढ़ा रही है, बल्कि आदिवासी क्षेत्र को औषधीय खेती की नई पहचान भी दिला रही है। झाड़ोल क्षेत्र के सड़ा सिगरी और तुरगढ़ गांव के करीब 15 किसानों ने इस खेती की शुरुआत की थी। देश में यूपी में पिछले 20 साल से कैमोमाइल की खेती की जा रही है। एक बीघा में 200 किलो सूखे फूलों का उत्पादन होता है, जिसे 500 रुपए प्रति किलो के हिसाब से खरीदा जाता है। फसल में फूल लगने के दौरान हर तीन दिन में फूलों को तोड़कर सूखा दिया जाता है। अक्टूबर में नर्सरी में बुवाई कर दी जाती है। फरवरी से अप्रैल तक फूल तोड़कर सुखाए जाते हैं। जून-जुलाई माह में फूलों की प्रोसेसिंग की जाती है। इसके बाद इन्हें हर्बल चाय बनाने वाली कंपनियों को भेजा जाता है।
परिवहन विभाग और ट्रांसपोर्टरों के बीच विवाद गहराता जा रहा है। व्यावसायिक व भारी मालवाहक वाहनों में व्हीकल लोकेशन ट्रैकिंग डिवाइस (वीएलटीडी) अनिवार्य किए जाने और ई-डिटेक्शन सिस्टम से जारी त्रुटिपूर्ण चालानों के विरोध में प्रदेशभर के ट्रांसपोर्टरों ने सोमवार से चक्का जाम का ऐलान किया है। ट्रांसपोर्टरों का कहना है कि 10 जून से वीएलटीडी अनिवार्य होने के बावजूद विभाग ने अभी तक इसकी एसओपी और अधिकृत कंपनियों की सूची जारी नहीं की है। इससे पुराने वाहनों के नेशनल परमिट और फिटनेस नवीनीकरण अटक हैं। कहा गए हैं तथा कई वाहन संचालन से बाहर हो गए रविवार को उदयपुर ट्रांसपोर्ट ऑर्गेनाइजेशन की बैठक में आंदोलन का समर्थन किया गया। पूर्व विधिक सलाहकार नरेंद्र सिंह शेखावत ने कि एसओपी जारी होने तक दंडात्मक कार्रवाई रोकी जाए। उन्होंने यह भी कहा कि उदयपुर में फिटनेस सेंटर बंद होने से वाहन मालिकों को जांच के लिए अजमेर और जयपुर जाना पड़ रहा है। चक्का जाम के तहत सोमवार से ट्रांसपोर्ट नगर गेट पर टेंट लगाकर धरना-प्रदर्शन किया जाएगा। लोडिंग पूरी तरह बंद रखी जाएगी।
नगर निगम के कचरा संग्रहण और स्वच्छता व्यवस्था के दावों की पोल सोमवार को कचरा ट्रांसफर स्टेशन पर खुल गई। शहर का कचरा लेकर पहुंचे बड़ी ऑटो टिपर कई घंटे तक ट्रांसफर स्टेशन के बाहर खड़े रहे, लेकिन कचरे को तबाने वाले चारों कैप्सूल भरे होने के कारण कचरा खाली नहीं हो सका। इसका असर शहर की डोर-टू-डोर कचरा संग्रहण व्यवस्था पर पड़ा और कई क्षेत्रों में संग्रहण प्रभावित रहा।कर्मचारियों के अनुसार यहां एकत्र कचरे को तीतरड़ी स्थित ट्रेंचिंग ग्राउंड भेजा जाता है। वहां कचरा निस्तारण की मशीन खराब है, इससे कचरे का निस्तारण नहीं हो पा रहा। नतीजतन ट्रेंचिंग ग्राउंड पर ढेर जमा हो गए है और अब इसकी मार ट्रांसफर स्टेशन तक पहुंच गई है। कैप्सूल समय पर खाली नहीं होने से नए वाहनों का कचरा उतारना मुश्किल हो गया। सुबह से पहुंचे ऑटो टिपर चालक अपनी बारी का इंतजार करते रहे। इससे तय समय पर अन्य वार्डों में कचरा संग्रहण भी प्रभावित हुआ और पूरे सिस्टम की रफ्तार थम गई।
जून में रिटेल महंगाई 17 महीने के उच्चतम स्तर 4.38% पर पहुंच गई। इससे पहले दिसंबर 24 में महंगाई दर 5.22% थी। इसके बाद से लगातार 16 माह तक महंगाई 4% से नीचे बनी रही। यह लगातार 7वां माह रहा, जब महंगाई दर में बढ़ोतरी हुई। जनवरी-26 के बाद से अब तक महंगाई दर 2.75% से 1.63% बढ़कर 4.38% हो गई। यानी छह माह में इंडेक्स 59.22% बढ़ा। आम आदमी के लिहाज से यह अहम पड़ाव इसलिए है कि आरबीआई महंगाई के इसी स्तर के आधार पर तय करता है कि ब्याज दरें घटाएं या बढ़ाएं। अगर महंगाई 4% से ज्यादा है तो आरबीआई अगली मौद्रिक नीति की समीक्षा (3-5 अगस्त) में उन नीतिगत दरों में कमी नहीं करेगा जिस आधार पर बैंक होम लोन और ऑटो लोन समेत सभी कर्ज की दरों में कमी का फैसला करती है।
राजस्थान में गिग इकोनॉमी और त्वरित कमाई का बढ़ता आकर्षण अब उच्च शिक्षा पर असर दिखाने लगा है। उच्च शिक्षा विभाग के वार्षिक प्रगति प्रतिवेदन (2025-26) के विश्लेषण में सामने आया है कि यूजी-पीजी में नामांकन इस सत्र में 4.23% घटकर 12.55 लाख रह गया। यह लगातार दूसरा साल है, जब उच्च शिक्षा में निगेटिव ग्रोथ दर्ज हुई है। महामारी के दौरान बढ़ा नामांकन भी अब सिकुड़ चुका है। सबसे ज्यादा असर लड़कों पर दिखा है, जिनके नामांकन में 5.60% की गिरावट आई है। विशेषज्ञ मान रहे हैं कि गिग सेक्टर में तेजी से बढ़ते अवसर युवाओं को सीधे वर्कफोर्स की ओर खींच रहे हैं।
कोर्ट की सख्ती के बीच खान एवं भूविज्ञान निदेशालय ने एक बड़ा और कड़ा आदेश जारी किया है। इसके तहत सुप्रीम कोर्ट के विभिन्न फैसलों के मद्देनजर अरावली क्षेत्र के लंबित पड़े माइनिंग प्रस्तावों को अब केवल सशर्त पर्यावरण स्वीकृति (कंडीशनल ईसी) मिलेगी। हालांकि, इस मंजूरी के बाद भी पट्टाधारक सीधे तौर पर जमीन की सफाई या खनन कार्य शुरू नहीं कर पाएंगे।सुप्रीम कोर्ट के तीन बड़े फैसलों का हवालाः खान विभाग के अतिरिक्त निदेशक (पर्यावरण एवं विकास) महेश माथुर द्वारा जारी सर्कुलर में सुप्रीम कोर्ट के तीन बड़े आदेशों (9 मई 2024, 29 दिसंबर 2025 और 26 फरवरी 2026) का हवाला दिया गया है। फॉरेस्ट सर्वे ऑफ इंडिया (एफएसआई) की 25 अगस्त, 2010 की रिपोर्ट में तय अरावली पॉलीगॉन के दायरे में आने वाले सभी प्रस्तावों पर यह नियम सख्ती से लागू होगा।
उदयपुर सहित देश-दुनिया के नागरिक इस वक्त एयरलाइंस कंपनियों की मनमानी का शिकार हो रहे हैं। डीजीसीए के सख्त निर्देशों के बावजूद हवाई टिकटों के दाम लगातार बढ़ रहे हैं। उदयपुर में आगामी पर्यटन सीजन सितंबर से शुरू होकर मार्च 2027 तक चलेगा। फिलहाल शहर में न बड़ा त्योहार है, न पर्यटकों की भारी आवक, इसके बावजूद घरेलू उड़ानों का किराया 100 फीसदी तक बढ़ चुका है।एयरलाइंस कंपनियों के डायनेमिक प्राइसिंग एल्गोरिदम के आगे रेगुलेटर बेअसर साबित हो रहा है। अभी सामान्य दिनों का किराया पिछले साल के दीपावली सेलिब्रेशन जैसे पीक सीजन वाली दरों को भी पीछे छोड़ चुका है। उदयपुर-जयपुर रूट पर आम दिनों में टिकट 5 से 8 हजार में मिल जाती थी, वह आज 7 से 15 हजार तक बिक रही है। इसी तरह दिल्ली और मुंबई जैसे मुख्य रूटों पर सामान्य दिनों की बुकिंग 20,500 से 21,500 रुपए के पार जा चुकी है।
प्रदेशभर की सड़कों पर नगर निगम ऐसी स्ट्रीट लाइटें लगा रहा है, जो दूर से चमकती दिखती हैं, लेकिन सड़क पर उनकी पूरी रोशनी भी नहीं पहुंच पाती है। यानी पोल के नीचे उजाला और आगे अंधेरा। भास्कर टीम ने एक्सपर्ट के साथ जयपुर के विद्याधर नगर और मानसरोवर सेक्टर-8 में मौके पर रियलिटी चेक किया। लाइटें खुलवाकर अंदर के पार्ट्स की जांच में सामने आया कि बाहर से एमआई और बजाज जैसी ब्रांडेड दिखने वाली लाइटों में अंदर सस्ती चाइनीज एलईडी प्लेट लगी है। 5000 हजार रुपए की ब्रांडेड बॉडी में 200 रुपए की लाइट मिली। कई लाइटों में न एलईडी ड्राइवर मिला और न ही सर्ज प्रोटेक्शन डिवाइस (एसपीडी) है। नगर निगम में स्ट्रीट लाइट मेंटेनेंस के नाम पर घटिया सामग्री लगाने का भी मामला सामने आया है। खराब हो रही लाइटों की जगह कम गुणवत्ता वाली लाइटें लगाई जा रही हैं, जो जलती तो हैं, लेकिन उनका फोकस सड़क पर नहीं पड़ता।
शहर और जिले को ट्रिपिंग और अघोषित बिजली कटौती से हमेशा के लिए मुक्ति दिलाने की दिशा में बड़ा प्रशासनिक फैसला हुआ है। कलेक्टर एवं जिला मजिस्ट्रेट गौरव अग्रवाल ने 900 से 1200 करोड़ रुपए की अनुमानित लागत वाले पावर ग्रिड मेवाड़ ट्रांसमिशन लिमिटेड की स्थापना के लिए मावली और भींडर तहसील के दो गांवों की 36.6096 हेक्टेयर निजी भूमि (135 खसरे) के अधिग्रहण की अंतिम अधिसूचना जारी कर दी है। इसमें भींडर के अणगोरिया में 19.9650 और मावली के ढूंढिया गांव की 16.6446 हेक्टेयर भूमि शामिल है। एडीएम (प्रशासन) दीपेंद्र सिंह की देखरेख में आगे की कागजी कार्यवाही पूरी होगी। 765/400/220 केवी क्षमता का यह विशाल ग्रिड सब-स्टेशन तैयार होने के बाद उदयपुर सहित पूरे मेवाड़ का पावर बैकअप सिस्टम पूरी तरह बदल जाएगा। यह बिना किसी रुकावट के बिजली की आपूर्ति तय करेगा। नतीजतन ट्रांसमिशन लॉस कम होगा और नए उद्योगों व सोलर पावर प्रोजेक्ट्स को सीधा बढ़ावा मिलेगा।
शादी-ब्याह, धार्मिक आयोजनों और बड़े सामाजिक समारोहों में परोसे जाने वाले भोजन की गुणवत्ता और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए खाद्य सुरक्षा विभाग ने बड़ा कदम उठाया है। अब जिले में किसी भी सार्वजनिक आयोजन में केवल एफएसएसएआई से पंजीकृत और लाइसेंस प्राप्त हलवाई व कैटरर्स ही भोजन बना और परोस सकेंगे। बिना वैध लाइसेंस के खाद्य व्यवसाय संचालित करने वालों के खिलाफ खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम 2006 के तहत कार्रवाई की जाएगी। यह व्यवस्था राज्य स्तर पर जारी नई मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) के तहत तत्काल लागू कर दी गई है। नई व्यवस्था के तहत आयोजनकर्ता या कैटरर को कार्यक्रम से पहले खाद्य सुरक्षा विभाग को पूरी जानकारी उपलब्ध करानी होगी। इसमें कार्यक्रम की तिथि, समय, आयोजन स्थल, आयोजक का नाम व मोबाइल नंबर, कैटरर्स का नाम, एफएसएसएआई लाइसेंस संख्या, संभावित मेहमानों की संख्या तथा भोजन तैयार करने और परोसने के स्थान का विवरण देना अनिवार्य होगा। खराब गुणवत्ता वाले भोजन, मिलावट और अस्वच्छ तरीके से तैयार किए जा रहे खाद्य पदार्थों पर अब आम लोग भी सीधे शिकायत कर सकेंगे।
एमबी हॉस्पिटल के सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल में ड्रग डिस्ट्रीब्यूशन सेंटर (डीडीसी) पर मरीजों की लंबी कतार और दवा वितरण में देरी को लेकर राजस्थान पत्रिका में प्रकाशित खबर के बाद अस्पताल प्रशासन ने व्यवस्था में सुधार की कवायद शुरू कर दी है। अब मरीजों को घंटों लाइन में खड़े रहने से राहत देने के लिए डिजिटल नंबर डिस्प्ले सिस्टम लागू करने की योजना बनाई जा रही है। इसके तहत मरीजों को टोकन नंबर मिलेगा और स्क्रीन पर अपनी बारी देखकर वे काउंटर पर दवा लेने पहुंच सकेंगे।
प्रदेश में वन विकास, पौधरोपण, जल संरक्षण और एनीकट निर्माण के नाम पर खर्च होने वाले करोड़ों रुपए की गुणवत्ता जांचने वाली वन विभाग की मूल्यांकन टीम खुद अस्थायी व्यवस्था के आईसीयू में है। उदयपुर संभाग में हालात ये हैं कि जिस टीम पर 6 जिलों की निगरानी का जिम्मा है, वहां डेढ़ साल से रेंजर-एसीएफ - जैसे महत्वपूर्ण तकनीकी पद खाली हैं। ऐसे में करोड़ों के विकास कार्यों के भौतिक सत्यापन और निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।चौंकाने वाला पहलू यह है कि टीम में रेंजर का अतिरिक्त चार्ज वनरक्षक संजय जोशी को दिया गया है, जो तकनीकी रूप से इतने बड़े स्तर के मूल्यांकन के लिए अधिकृत नहीं हो सकते। टीम में शामिल अधिकांश कर्मचारी उन्हीं वन मंडलों से प्रतिनियुक्ति पर आए वनरक्षक हैं, - जिनके काम की उन्हें जांच करनी है। - यानी जो काम कर रहे हैं, उन्हीं के साथी उस काम की कमियां ढूंढ रहे हैं।
नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए) द्वारा आयोजित नीट यूजी-2026 की रजिस्ट्रेशन फीस रिफंड प्रक्रिया में एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। परीक्षा में शामिल हुए 20 लाख विद्यार्थियों में से 8.54 लाख छात्रों ने 14 जुलाई की समय सीमा बीतने के बाद भी बैंक अकाउंट डिटेल्स को रिकन्फर्म या अपडेट नहीं किया है। इस लापरवाही के चलते इन लाखों छात्रों की फीस का रिफंड अटक गया है। दूसरी ओर, एनटीए ने सजगता दिखाते हुए 11.46 लाख विद्यार्थियों के लिए 161 करोड़ की रिफंड प्रक्रिया शुरू कर दी है। विभिन्न श्रेणियों के विद्यार्थियों की औसत रजिस्ट्रेशन फीस 1400 रुपए मानकर यह गणना की गई है। भारी संख्या में छात्रों द्वारा बैंक विवरण न दिए जाने को असामान्य माना जा रहा है। हालांकि राहत की बात यह है कि एनटीए ने छात्रहित में बैंक डिटेल्स अपडेट करने की अंतिम तारीख बढ़ाकर 31 जुलाई कर दी है।
वन विभाग इस मानसून में जिले के 4000 हेक्टेयर वन क्षेत्र में ट्रेंच (खाइयों) के जरिए 129 करोड़ लीटर वर्षा जल का संग्रहण करेगा। इसके लिए वनमंडल उदयपुर, उत्तर और वन्यजीव क्षेत्र में 80 साइटों पर काम पूरे किए गए हैं। वर्षा जल के संग्रहण से भूजल रिचार्ज बढ़ेगा, जमीन में नमी बनी रहेगी और पौधों की वृद्धि को भी मदद मिलेगी। डीएफओ मुकेश सैनी ने बताया कि प्रत्येक साइट पर ट्रेंच बनाकर मानसून में बहकर जाने वाले पानी को रोका जाएगा। इसके अलावा विभिन्न स्थानों पर पत्थरों के कच्चे एनीकट भी बनाए जा रहे हैं, ताकि पानी की रफ्तार कम हो, मिट्टी का कटाव रुके और अधिक से अधिक पानी जमीन में समा सके।
राजस्थान राज्य पथ परिवहन निगम (रोडवेज) ने यात्रियों, विशेषकर महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कमर कस ली है। निगम ने उदयपुर डिपो की 144 बसों में अत्याधुनिक एआईएस-140 प्रमाणित 'व्हीकल लोकेशन ट्रैकिंग डिवाइस' (वीएलटीडी) और 12-12 पैनिक बटन लगाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इस प्रोजेक्ट पर 9.90 लाख रुपए खर्च किए जाएंगे।रोडवेज की नई बसों में यह तकनीक पहले से मौजूद है, लेकिन पुरानी बसों को अपडेट किया जा रहा है। आगार प्रबंधक हेमंत शर्मा के अनुसार, उदयपुर डिपो की सभी बसों में यह डिवाइस सिस्टम लग चुका है। उन्होंने स्पष्ट किया कि अब तक जिले में कोई गंभीर शिकायत सामने नहीं आई है। अधिकांश पैनिक बटन यात्री जानकारी के अभाव में गलती से दबा देते हैं।
शहर में सड़कों और फुटपाथों पर जीवन बसर कर रहे घुमंतु और अर्द्ध-घुमंतु परिवारों (गाडोलिया लोहार और कालबेलिया समाज) के पुनर्वास के नाम पर एक बड़ी गड़बड़ी सामने आई है। नगर निगम और उदयपुर विकास प्राधिकरण (यूडीए) ने हाल ही में शहर के विभिन्न इलाकों में सर्वे करवाकर 120 बेघर परिवारों की सूची तैयार की है। अब इन्हें सरकार की ओर से पक्के आवास या जमीन देने की तैयारी है। वर्ष 2010 के तत्कालीन नगर विकास प्रन्यास (अब यूडीए) के भूखंड आवंटन रिकॉर्ड से मिलान किया तो चौंकाने वाली खामी सामने आई। नए सर्वे में शामिल 15 ऐसे लोगों के नाम मिले, जिन्हें 16 साल पहले ही सरकार पुनर्वास योजना के तहत भूखंड आवंटित कर चुकी थी। इसके बावजूद नए सर्वे में इन्हें फिर बेघर और भूमिहीन मान लिया गया। सबसे बड़ी बात यह रही कि सर्वे के दौरान घर-घर जाकर आधार कार्ड, आय और अन्य जानकारी तो जुटाई गई, लेकिन विभागों ने अपने ही पुराने भूखंड आवंटन रिकॉर्ड का मिलान नहीं किया। जबकि सरकारी नियम के अनुसार एक व्यक्ति को पुनर्वास योजना में एक बार ही भूखंड का लाभ दिया जा सकता है।
प्रदेश में मानसून की रफ्तार अब तक उम्मीद से धीमी रही है। जल संसाधन विभाग के 1 जून से 16 जुलाई तक के आंकड़ों के अनुसार प्रदेश में अब तक 112.75 मिमी बारिश हुई है, जबकि इस अवधि तक औसतन 123.13 मिमी बारिश होती है। यानी राज्य में सामान्य से 8.43 प्रतिशत कम वर्षा हुई है। हालांकि मौसम विभाग इसे अभी भी नॉर्मल मान रहा है, लेकिन पिछले साल के मुकाबले तस्वीर काफी कमजोर है। 16 जुलाई 2025 तक प्रदेश में 256.77 मिमी बारिश हुई थी, जबकि इस बार यह आंकड़ा आधे से भी कम है।
संभाग में शनिवार रात से हाईवे पर सफर करना महंगा होगा। भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) की परियोजना कार्यान्वयन इकाई (उदयपुर) ने 5 प्रमुख टोल प्लाजा पर टैक्स बढ़ा दिया है। इनमें एनएच-14, एनएच-76, एनएच-58 (विस्तार), एनएच-158 (विस्तार) व एनएच 48 (पुराना एनएच-8) शामिल हैं। नई दरें रात 12 बजे से लागू होंगी। टोल टैक्स में 5 से 20 रुपए तक की बढ़ोतरी हुई है। मासिक पास में 20 से 30 रु. का इजाफा किया गया है। इससे निजी व व्यावसायिक, दोनों तरह के वाहनों का खर्च बढ़ेगा। लोगों की जेब पर सीधा असर पड़ेगा।