UdaipurBlog
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सहेली मार्ग को 'आदर्श यातायात जोन' बनाने की शुरुआत अब पूरे शहर के लिए मॉडल बनने जा रही है। सहेली मार्ग पर शुरू किए गए ट्रैफिक सुधार अभियान के बाद पुलिस ने अब शहर के प्रत्येक थाना क्षेत्र में एक-एक प्रमुख सड़क को आदर्श यातायात मार्ग के रूप में विकसित करने का निर्णय लिया है। इन मार्गों पर यातायात व्यवस्था, पार्किंग, अतिक्रमण, सड़क सुरक्षा और पर्यटकों की सुगम आवाजाही को प्राथमिकता देते हुए समन्वित अभियान चलाया जाएगा।
लेकसिटी की ऐतिहासिक विरासत, पारंपरिक स्थापत्य और सदियों पुराने जायके को दुनिया के सामने लाने के लिए नगर निगम, स्मार्ट सिटी और पर्यटन विभाग के संयुक्त प्रयासों से हेरिटेज वॉक को नए सिरे से शुरू करने की तैयारी अंतिम चरण में है। दो बार के विफल टेंडर के बाद, तीसरे प्रयास में वेंडर का चयन कर लिया है। टेंडर की टेक्निकल और फाइनेंशियल प्रक्रियाएं पूरी हो चुकी है और अब सिर्फ अंतिम मंजूरी मिलना बाकी है। यह हेरिटेज वॉक अगस्त के पहले या दूसरे हफ्ते तक धरातल पर उतर जाएगी। योजना के अनुसार, हेरिटेज वॉक की शुरुआत जगदीश चौक स्थित लाइब्रेरी से होगी। इस पूरी वॉक में करीब 2 से 2.5 किमी की दूरी कवर होगी और इसे पूरा करने में 2 से 3 घंटे का समय लगेगा। इसके लिए अनुबंधित वेंडर ही पर्यटकों के लिए विशेष गाइड नियुक्त करेगा। यह रूट जगदीश चौक से शुरू होकर चांदपोल, गढ़ियादेवरा और अंदरुनी शहर के वॉल सिटी एरिया से होते हुए गुजरेगी।
जोधपुर हाईकोर्ट और प्रदेश सरकार के परिवहन विभाग के कड़े आदेशों के बाद उदयपुर के चारों मैनुअल वाहन फिटनेस सेंटर्स को बंद करने का जो खमियाजा एक महीने से स्थानीय वाहन मालिक भुगत रहे थे, वह संकट अब पूरी तरह खत्म होने जा रहा है। मादड़ी इंडस्ट्रियल एरिया स्थित एक पुराने फिटनेस सेंटर को अपग्रेड कर नया हाईटेक ऑटोमेटेड टेस्टिंग स्टेशन (एटीएस) पूरी तरह बनाकर तैयार कर दिया गया है। इस सेंटर पर प्रतिदिन औसत 90 वाहनों की फिटनेस जांच करने की क्षमता है। सेंटर शुरू करने की अनुमति के लिए प्रादेशिक परिवहन कार्यालय उदयपुर में आदेवन कर दिया गया है। अब विभागीय जांच पड़ताल के बाद मुख्यालय जयपुर से इस सेंटर को शुरू कराने की अनुमति मिलने की प्रक्रिया अगले सप्ताह तक पूरी होने की उम्मीद है।
लेकसिटी में इस बार जुलाई का मौसम बारिश और उमस, दोनों का मिश्रण रहेगा। मौसम विभाग के अनुसार, महीने के पहले दो सप्ताह में मानसून पूरी तरह सक्रिय रहेगा और पूरे मेवाड़ में अच्छी बारिश होगी। इसके बाद मानसून की रफ्तार धीमी पड़ सकती है। जुलाई में औसत अधिकतम तापमान 32.2 डिग्री, न्यूनतम 24.9 डिग्री और कुल औसत वर्षा 235.6 मिमी रहने का अनुमान है। बारिश के बावजूद दिन का तापमान 30 डिग्री से नीचे जाने की संभावना कम है। ऐसे में लोगों को गर्मी और उमस का सामना करना पड़ सकता है। बुधवार को भी दिनभर तेज धूप रही। कुछ समय बादल छाए, लेकिन बारिश नहीं हुई। अधिकतम तापमान 36.5 डिग्री और न्यूनतम 26.5 डिग्री दर्ज किया गया।
जुलाई का महीना देश में राहत की सौगात लेकर आया है। पहले ही दिन एक साथ पांच अच्छी खबरों ने महंगाई से जूझ रहे आम आदमी को राहत दी है। अमरीका-ईरान संघर्ष थमने के बाद फारस की खाड़ी से कच्चे तेल की आपूर्ति बढ़ी है, जिससे वैश्विक बाजार में दबाव कम हुआ है। तेल कंपनियों ने 19 किलोग्राम वाले कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर के साथ 5 किलोग्राम के छोटे सिलेंडर के दाम घटा दिए। नायरा ने पेट्रोल-डीजल सस्ता कर दिया है, जबकि एयर टरबाइन फ्यूल (एटीएफ) की कीमतों में कटौती से हवाई यात्रा भी कुछ सस्ती होने की उम्मीद है। अब 14.2 किलो वाले घरेलू एलपीजी सिलेंडर व पेट्रोल-डीजल की कीमतों में राहत का इंतजार है। हालांकि, विशेषज्ञों के अनुसार इसमें समय लगेगा। विपणन कंपनियां वैश्विक कीमतों में गिरावट के स्थायी होने, पुराने महंगे स्टॉक की खपत और हाल के महीनों में हुए नुकसान की भरपाई के बाद ही उपभोक्ताओं को बड़ी राहत देने पर विचार करेंगी।
देहरादून के विश्वस्तरीय हिमाद्रि आइस रिंक में आयोजित 21वीं नेशनल आइस स्केटिंग चैंपियनशिप में उदयपुर की 10 वर्षीय प्रतिभाशाली स्केटर मायरा त्यागी ने शानदार प्रदर्शन करते हुए एक रजत और एक कांस्य पदक जीतकर राजस्थान और उदयपुर का नाम राष्ट्रीय स्तर पर रोशन किया। महज 10 वर्ष की उम्र में राष्ट्रीय प्रतियोगिता में यह दोहरी सफलता हासिल कर मायरा ने यह साबित कर दिया कि लगन, अनुशासन और निरंतर अभ्यास के बल पर किसी भी लक्ष्य को प्राप्त किया जा सकता है। उनकी उपलब्धि न केवल उनके परिवार और विद्यालय के लिए, बल्कि पूरे उदयपुर और राजस्थान के लिए गर्व का विषय बन गई है।
शहर के फतहपुरा चौराहे पर एक माह से बंद आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) ट्रैफिक सिग्नल फिर शुरू हो गया है। हालांकि यह अभी भी ट्रायल से आगे नहीं बढ़ पाया है। इसे स्थायी रूप से लागू करने पर अभी कोई निर्णय नहीं लिया गया है। ट्रायल को भी एक साल बीत चुका है। शहर के अन्य चौराहों पर भी एआई सिस्टम से ट्रैफिक सिग्नल चलाया जाना है। फतहपुरा चौराहे पर ही ट्रायल में एक साल बीत गया, तो दूसरे चौराहों पर एआई सिस्टम चालू करने में कितना समय लगेगा ? बता दें कि गत 30 मई को शहर में तेज आंधी-बारिश के कारण सिग्नल का एलईडी टाइमर और पोल टूट गया था। तब से इसे मैन्युअल तरीके से चलाया जा रहा था। ट्रायल कर रही एजेंसी ने इसकी मरम्मत करवा दी है।
राष्ट्रीय परमिट वाले ट्रकों, बसों और अन्य व्यावसायिक वाहनों के लिए व्हीकल लोकेशन ट्रैकिंग डिवाइस (वीएलटीडी) अनिवार्य होने के बाद प्रदेशभर में परमिट नवीनीकरण की प्रक्रिया ठप पड़ने लगी है। वाहन पोर्टल पर वीएलटीडी का विवरण उपलब्ध नहीं होने से हजारों वाहनों के परमिट अटक गए हैं। उदयपुर एक हजार से ज्यादा वाहन अब बिना परमिट के हो गए हैं। जबकि, प्रदेश में यह आंकड़ा 30 हजार से ऊपर निकल चुका है। इससे ट्रांसपोर्ट कारोबारियों को आर्थिक नुकसान और माल परिवहन व्यवस्था को झटका लग रहा है। परिवहन व्यवसायियों के अनुसार, परिवहन विभाग के वाहन पोर्टल पर परमिट नवीनीकरण के दौरान वाहन के लिए वीएलटीडी का विवरण उपलब्ध नहीं होने के कारण परमिट संबंधी प्रक्रिया के दौरान 'अनुमति नहीं है' का संदेश दिखाया जा रहा है। इससे परमिट जारी नहीं हो पा रहे हैं। व्यवसायियों का कहना है कि विभाग ने व्यावसायिक वाहनों में वीएलटीडी अनिवार्य तो कर दिया, लेकिन इसे लगाने की प्रक्रिया, अधिकृत एजेंसियों और तकनीकी मानकों को लेकर अब भी स्पष्टता नहीं है। इसी अनिश्चितता के कारण प्रदेशभर के आरटीओ कार्यालयों में परमिट नवीनीकरण के मामले लंबित पड़े हैं।
राज्य सरकार सरकारी विद्यालयों को 21वीं सदी की आधुनिक शिक्षा व्यवस्था से जोड़ने के लिए स्मार्ट क्लास, डिजिटल लर्निंग और तकनीक आधारित शिक्षण पर लगातार निवेश कर रही है। लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि प्रदेश में आज भी 9227 विद्यालय ऐसे हैं, जहां बिजली की सुविधा नहीं है। इनमें अकेले 7076 सरकारी विद्यालय शामिल है। बिजली के अभाव में इन स्कूलों में स्मार्ट बोर्ड, कंप्यूटर, प्रोजेक्टर, पंखे और शुद्ध पेयजल के लिए लगाए फिल्टर तक उपयोग में नहीं आ पा रहे हैं। ऐसे में डिजिटल शिक्षा का सपना अब भी अधूरा है। ग्रामीण, आदिवासी और दूरस्थ रेगिस्तानी क्षेत्रों के विद्यालयों में हालात ज्यादा गंभीर है। इन इलाकों में बिजली नहीं होने से बच्चे आज भी मूलभूत सुविधाओं से वंचित रहकर पढ़ाई करने को मजबूर हैं। राष्ट्रीय शिक्षा नीति और डिजिटल लर्निंग को बढ़ावा देने के लिए सरकार स्मार्ट क्लास और आइसीटी आधारित शिक्षा पर जोर दे रही है, लेकिन बिजली के अभाव में ग्रामीण विद्यालयों में यह व्यवस्था प्रभावी नहीं हो पा रही।
हिरण मगरी क्षेत्र के लोगों के लिए एक बड़ी स्वास्थ्य राहत की खबर सामने आई है। इस एरिया में अब अत्याधुनिक होम्योपैथिक औषधालय के निर्माण का रास्ता साफ हो गया है। राजस्थान राज्य कृषि विपणन बोर्ड ने इस प्रोजेक्ट के लिए ओपन टेंडर जारी कर दिए हैं। इस औषधालय के निर्माण की अनुमानित लागत 25 लाख 23 हजार रुपए तय की गई है। भवन तैयार करने के लिए 8 महीने का लक्ष्य रखा गया है।बोर्ड के अधिशाषी अभियंता एमएस कुमार के अनुसार इस जोन में पहली बार राजस्थान राज्य कृषि विपणन बोर्ड किसी डिस्पेंसरी (औषधालय) का निर्माण कार्य अपने हाथ में ले रहा है। निर्माण पूर्ण होने के बाद इस केंद्र को होम्योपैथिक विभाग को सुपुर्द कर दिया जाएगा, ताकि शहर के लोगों को प्राकृतिक चिकित्सा का सीधा लाभ मिल सके।
बारिश को तरस रही लेकसिटी का इंतजार आखिरकार को उदयपुर में दस्तक दे दी। इसी के साथ तेज गर्मी और उमस से बेहाल शहरवासियों को राहत मिली। बारिश की शुरुआत सुबह 8 बजे हुई। हिरण मगरी, सेक्टर-14, सवीना ओल्ड सिटी सहित कई इलाकों में सुबह 10 बजे तक कहीं रिमझिम तो कहीं मध्यम बारिश का दौर चला। इसके बाद रात साढ़े 8 बजे तेज बारिश शुरू हुई, जो करीब आधे घंटे चली। मौसम विभाग ने शनिवार को भारी बारिश का येलो अलर्ट जारी किया है। देरी के मामले में मानसून ने पिछले 10 साल का रिकॉर्ड तोड़ दिया है। एक दशक में मानसून ने दूसरी बार जुलाई में दस्तक दी है। साल 2022 में 1 जुलाई को आया था। इस बार इससे भी एक दिन लेट है। उधर, मौसम विशेषज्ञ नरपतसिंह राठौड़ ने बताया कि मेवाड़-वागड़ में बंगाल की खाड़ी और अरब सागर दोनों शाखाओं से मानसून आता है। गुरुवार और शुक्रवार को जो बारिश हुई है, वह बंगाल की खाड़ी की शाखा का मानसून है। अरब सागर की शाखा का मानसून अभी गुजरात के बनासकांठा तक पहुंचा है, जो अगले दो दिनों में दक्षिण राजस्थान में प्रवेश कर जाएगा। दोनों शाखाएं मिलते ही संभाग में भारी बारिश होगी।
ओडिशा के पुरी में निभाई जाने वाली भगवान जगन्नाथ की अनवसर परंपरा इस समय उदयपुर के प्रमुख मंदिरों में भी दिखाई दे रही है। सेक्टर-7 स्थित जगन्नाथ मंदिर, गंगू कुंड स्थित इस्कॉन मंदिर और जगदीश मंदिर में भगवान की विशेष सेवा की जा रही है। सेक्टर-7 स्थित जगन्नाथ मंदिर के संयोजक गजेंद्र शर्मा ने बताया कि अनवसर काल भगवान के विश्राम का समय होता है। सुबह जागरण और औषधीय सेवा के बाद भगवान दिनभर विश्राम करते हैं। इस दौरान श्रद्धालुओं के लिए दर्शन बंद रहते हैं और केवल सेवायत ही निर्धारित विधि से पूजा-अर्चना करते हैं। मंदिर के पुजारी सुनील चौबीसा ने बताया कि भगवान को ज्वर होने के कारण भारी व्यंजनों के बजाय अंकुरित मूंग, फल, ज्यूस और शाम को काढ़े का भोग लगाया जा रहा है। देवस्नान के बाद प्रतिदिन औषधीय जल से शुद्धि और जड़ी-बूटियों का लेप भी किया जाता है। गंगू कुंड स्थित इस्कॉन मंदिर के निरंजन शेष दास प्रभु ने बताया कि भगवान को सुबह काढ़ा और खिचड़ी का भोग लगाया जा रहा है। भगवान के शीघ्र स्वास्थ्य लाभ के लिए हरिनाम संकीर्तन और जप भी किए जा रहे हैं।
ईरान और अमरीका के बीच युद्ध विराम की घोषणा के बाद भले ही वैश्विक स्तर पर राहत की सांस - ली जा रही हो, लेकिन राजस्थान के औद्योगिक गलियारों में अभी रौनक लौटने में लंबा वक्त लगेगा। आर्थिक विशेषज्ञों और उद्योगपतियों का मानना है कि युद्ध से उपजे संकट के कारण पटरी से उतरी राज्य की इंडस्ट्री को सामान्य स्थिति में आने में कम से कम 6 माह का समय लगेगा। युद्ध के कारण सबसे ज्यादा मार उदयपुर और आस-पास के क्षेत्रों की रीढ़ माने जाने वाले मार्बल, क्वार्ट्ज और ग्रेनाइट के साथ-साथ फार्मा, जिंक, फर्टिलाइजर और सोपस्टोन उद्योगों पर पड़ी है।
महाराणा भूपाल (एमबी) अस्पताल परिसर में संचालित टीबी क्लीनिक आज खुद संक्रमण का एक भयानक केंद्र बन चुका है। यहां रोजाना 40 से 50 नए टीबी मरीज ओपीडी में इलाज और दवा लेने पहुंचते हैं, लेकिन हवा के जरिए फैलने वाली इस बेहद घातक और संक्रामक बीमारी के केंद्र पर संक्रमण रोकने के बुनियादी सुरक्षा इंतजाम पूरी तरह नदारद हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि क्लीनिक में न तो हवा को शुद्ध करने वाले हेपा फिल्टर लगे हैं और न ही बैक्टीरिया को खत्म करने वाली यूवी-सी रेज मशीनें। ऐसे में यहां आने वाले मरीजों और उनके परिजनों के साथ-साथ हर वक्त ड्यूटी पर तैनात दो सीनियर डॉक्टर, जिला टीबी अधिकारी और पैरामेडिकल स्टाफ भी हाई रिस्क पर हैं।
सरकारें करोड़ों रुपए खर्च कर 'पेड़ लगाओ-पर्यावरण बचाओ' का संदेश दे रही हैं, लेकिन शहर के महाराणा प्रताप कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (एमपीयूएटी) परिसर में वर्षों पुराने हरे-भरे पेड़ों को काट दिया गया। सुंदरेश्वर मंदिर व सुंदरेश्वर बावड़ी के आसपास बड़े पेड़ काटे जाने से मॉर्निंग वॉकर्स, स्थानीय लोगों और पर्यावरण प्रेमियों में आक्रोश है।स्थानीय लोगों के अनुसार मंदिर और बावड़ी के आसपास 8 से 10 बड़े पेड़ काटे गए हैं। इनमें वर्षों पुराना बरगद, चंदन तथा औषधीय गुणों वाला अडूसा समेत अन्य पेड़ शामिल हैं। लोगों का कहना है कि मंदिर के पास स्थित विशाल बरगद की छांव में श्रद्धालु और मॉर्निंग वॉकर्स वर्षों से विश्राम करते थे, जो अब खत्म हो चुकी है। मामले में सबसे बड़ा सवाल यह है कि विश्वविद्यालय परिसर में इतनी बड़ी कार्रवाई के बावजूद जिम्मेदार अधिकारियों को इसकी भनक कैसे नहीं लगी। फार्म क्षेत्र में वर्षों पुराने पेड़ काट दिए गए, जबकि परिसर में अधिकारी, कर्मचारी और सुरक्षा गार्ड तैनात रहते हैं।
दक्षिण राजस्थान में चंदन की खेती और संरक्षण को बढ़ावा देने की राज्य सरकार की पहल अब जमीन पर उतरने लगी है। कर्नाटक के चिक्कमगलुरू से 6 हजार चंदन के पौधे उदयपुर पहुंच चुके हैं। तीन दिन की यात्रा के बाद पहुंचे इन पौधों को स्थानीय वातावरण के अनुकूल बनाने के लिए नर्सरी में रखा गया है। इसके बाद सप्ताह के आखिर में पौधारोपण शुरू किया जाएगा। उप वन संरक्षक (डीएफओ) मुकेश सैनी ने बताया कि पौधों को तीन-चार दिन तक नर्सरी में सुरक्षित रखा जाएगा। कालका माता क्षेत्र में पहले से प्राकृतिक रूप से चंदन के पेड़ मौजूद हैं, इसलिए यहां 20 से 22 हेक्टेयर क्षेत्र में चंदन वन विकसित किया जाएगा। परियोजना के लिए 50 लाख का बजट प्रस्तावित है। इससे ईको-टूरिज्म को बढ़ावा देने के लिए ट्रैक, आकर्षक प्रवेश द्वार और अन्य बुनियादी सुविधाएं विकसित की जाएंगी। पौधों की बेहतर वृद्धि के लिए लैंटाना जैसी हानिकारक झाड़ियों को भी हटाया जा रहा है।
शोभागपुरा (यूनिवर्सिटी-मेवाड़ सर्किल 100 फीट रोड के बीच) में 35 फीट ऊंचे आर्किटेक्ट्स टॉवर का निर्माण मंगलवार को शुरू होगा। दावा किया जा रहा है कि यह विश्व का पहला ऐसा सार्वजनिक स्मारक होगा, जो किसी नगरों और सभ्यताओं को बसाने वाले शिल्पियों के सम्मान में बन रहा है। यह पूरा प्रोजेक्ट मेवाड़ के महान आचार्य मंडन की स्मृति को समर्पित रहेगा। प्रोजेक्ट डायरेक्टर आर्किटेक्ट सुनील लड्डा के अनुसार इस समकालीन लैंडमार्क की आधिकारिक शुरुआत के बाद इसे जल्द ही आमजन और वैश्विक पर्यटकों के लिए उपलब्ध कराया जाएगा।
शहर के 50 से ज्यादा इलाकों में मंगलवार को अलग-अलग समय पर बिजली बंद रहेगी। बिजली विभाग ने इसका शेड्यूल जारी किया है। सुबह 9 से दोपहर 2 बजे तकः जी ब्लॉक, एफ ब्लॉक, इंद्रप्रस्थ ए, इंद्रप्रस्थ बी, करधर कॉम्प्लेक्स, नेला रोड, मिराज मॉर्निंग, होलिडे होम, एल-आई ब्लॉक, एफसीआई, आदिनाथ नगर आदि। सुबह 10 से शाम 4 बजे तक हर्ष नगर, राता खेत, न्यू गुलशन नगर, डूंगरपुर हाउस, पुर्बिया कॉलोनी, कालबेलिया कॉलोनी, सीसारमा गांव, बुझड़ा रोड, सीता माता मंदिर, अरिहंत नगर, सीसारमा मेन रोड, सज्जन नगर ए ब्लॉक, सज्जन नगर कच्ची बस्ती, गांधीनगर डी ब्लॉक, धोली मगरी, मस्तान पिया कॉलोनी, सज्जन नगर ओड बस्ती, रानी रोड, राजीव गांधी पार्क, सोलर वेधशाला, शिल्पग्राम, छोटा हवाला, आरजे 27 होटल, आजाद नगर, गुलशन नगर, रामपुरा, श्रीनगर कॉलोनी, अंबाबाड़ी, आदर्श रिसॉर्ट के पीछे, कर्मचारी कॉलोनी, होटल रमाडा के आसपास का एरिया, बड़ा हवाला, सज्जनगढ़ रोड, भीलू राणा कॉलोनी, पुलिस क्वार्टर, अहमद हुसैन कॉलोनी, लाल मगरी, सज्जनगढ़ मेन रोड, काली मगरी, गांधीनगर, रजा कॉलोनी, मल्ला तलाई आदि।सुबह 10 से शाम 5 बजे तक एलकेबी कॉम्प्लेक्स, गवरी चौक।
शहर में मंगलवार को बीते 24 घंटों के दौरान बादलों ने पूरी तरह से तरसाया। इस दौरान ० एमएम बारिश दर्ज की गई। सुबह के समय बूंदाबांदी से अच्छी बारिश की उम्मीद जरूर जगी थी, लेकिन बाद में दिनभर उमस और तपिश ने आमजन को परेशान किया। अधिकतम तापमान 0.2 डिग्री बढ़त के साथ 33 डिग्री हो गया। न्यूनतम तापमान 2.7 डिग्री उछलकर 24.9 डिग्री पर जा पहुंचा। वहीं बीते 24 घंटों में सेई बांध पर 13 एमएम बारिश दर्ज की गई। इसके अलावा केवल ओगणा में मामूली 2 एमएम वर्षा हुई, जबकि सेई, देवास, स्वरूपसागर, उदयसागर सहित अन्य सभी प्रमुख जलस्रोतों व वर्षा केंद्रों पर शाम 5 बजे तक बारिश का आंकड़ा पूरी तरह शून्य रहा।
आरएनटी मेडिकल कॉलेज के सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल (एसएसएच) में मुफ्त दवाइयों के लिए मरीज रोज भारी प्रशासनिक और तकनीकी लापरवाही का शिकार हो रहे हैं। अस्पताल के ग्राउंड फ्लोर पर स्थित दवा वितरण केंद्र (डीडीसी) के बाहर सुबह से दोपहर तक मरीजों की लंबी और अनियंत्रित कतारें लग रही हैं। इस अव्यवस्था का सबसे क्रूर चेहरा तब सामने आता है जब कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी से पीड़ित बेबस मरीज, जो कीमो और रेडियोथैरेपी के असहनीय दर्द के बाद ठीक से खड़े भी नहीं हो पाते, वे भी नाक में नली (राइल्स ट्यूब) लगे होने के बावजूद घंटों कतारों में धक्के खाने को मजबूर हैं।अस्पताल प्रशासन तीन दिन में नए काउंटर शुरू करने का दावा कर रहा है, लेकिन धरातल लचर सिस्टम ने मरीजों की पीड़ा को कई गुना बढ़ा दिया है। फर्स्ट फ्लोर पर कमरे खाली, डीडीसी बढ़ाने का आदेश भी हो चुका, फिर मरीजों को भीड़ में क्यों पिस रहे? जबकि सरकार की बजट घोषणा के तहत उदयपुर के संबद्ध अस्पतालों में 29 नए काउंटर (एमबी में 18, जनाना-सेटेलाइट में 3-3, एसएसबी-टीबी में 2-2) बढ़ने हैं।
अमेरिका-ईरान युद्ध के दौरान रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंचे कच्चे तेल (क्रूड ऑयल) के दाम अब 6 माह के निचले स्तर पर पहुंच चुके हैं। इंडियन बास्केट का कच्चा तेल 68.69 डॉलर/बैरल तक आ गया है। यह युद्ध के दौरान बने 157 डॉलर के शिखर से करीब 56% कम है। इसके बावजूद आम आदमी को पेट्रोल-डीजल के खुदरा दामों में कोई राहत नहीं मिली है। डीएएम कैपिटल के मुताबिक मौजूदा कीमत पर तेल कंपनियां पेट्रोल पर 10.5 और डीजल पर 11 रुपए प्रति लीटर तक मार्जिन कमा रही हैं। कच्चे तेल के दाम 1 जून के बाद से 87 डॉलर से नीचे हैं। इस रेट पर तेल कंपनियां ब्रेक ईवन (न नफा, न नुकसान) में रहती हैं। यानी कंपनियां पूरे 36 दिन से मुनाफे में ही हैं।ईरान-अमेरिका युद्ध 27 फरवरी से शुरू र हुआ था। पूरे मार्च सहित शुरुआती 40 दिन । ये चरम पर था। तेल के दाम भी इसी दौरान डीं सबसे ज्यादा बढ़े। 8 अप्रैल को पहला युद्ध र विराम लागू होने के बाद बेतहाशा बढ़ोतरी बो का दौर थम गया। इसके बाद कच्चे तेल के ' दाम 115 डॉलर से नीचे रहे। सबसे तेज बढ़ोतरी के दिनों में भी तेल कंपनियों के चौथी तिमाही (जनवरी से मार्च 2026) के नतीजे नकारात्मक नहीं आए।