UdaipurBlog
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गर्मी की छुट्टियां खत्म होने के बाद सोमवार से प्रदेशभर के सरकारी स्कूल खुल गए हैं। इसके साथ ही मानसून भी आने को तैयार है, जिसके लिए शिक्षा विभाग ने छात्र-छात्राओं और स्कूली स्टाफ की सुरक्षा को लेकर निर्देश जारी किए हैं। प्रारंभिक शिक्षा विभाग के निदेशक सीताराम जाट और मुख्य जिला शिक्षा अधिकारी द्वारा जारी आदेश के अनुसार, विद्यार्थियों की सुरक्षा से समझौता नहीं किया जाएगा। इसके लिए हिदायत दी गई है कि किसी भी हाल में बच्चों को जर्जर, असुरक्षित या छत टपकने वाले कमरों में नहीं बैठाया जाए। ऐसे जर्जर भवनों को तुरंत बांस, रस्सी या खतरे का निशान लगाकर बैरीकेड ताकि बच्चे वहां न जा सके।
मेवाड़ में मानसून की दस्तक कभी भी हो सकती है, पर उससे पहले विद्युत तंत्र को सुरक्षित बनाने के लिए होने वाला बिजली निगम का प्री-मानसून मेंटिनेंस तय समय पर पूरा नहीं हो पाया। पेड़ों की छंटाई, झुके खंभों को सीधा करना, जर्जर ट्रांसफॉर्मर स्ट्रक्चर की मरम्मत, ढीले कंडक्टर और क्षतिग्रस्त उपकरणों को बदलने जैसे अहम कार्य अभी तक 50 प्रतिशत ही हो सके है। ऐसे में मानसून पूरी तरह सक्रिय हो जाता है तो शहरवासियों को बिजली गुल होने और फॉल्ट की समस्या का सामना करना पड़ सकता है। हर साल मई और जून में बिजली निगम मानसून पूर्व विशेष अभियान चलाकर पूरे शहर के विद्युत नेटवर्क की जांच और मरम्मत की जाती है। इसका उद्देश्य तेज हवा, बारिश और पेड़ों की टहनियों से होने वाले फॉल्ट को पहले ही रोकना होता है। इस बार अभियान देर से शुरू हुआ, जिससे कार्य की गति शुरुआत से ही प्रभावित रही। परिणामस्वरूप शहर के कई इलाकों में अभी भी लाइनों से सटी पेड़ों की शाखाएं नहीं हटाई है। कई स्थानों पर झुके खंभे और कमजोर ट्रांसफॉर्मर स्ट्रक्चर भी मरम्मत की प्रतीक्षा में है।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल (क्रूड ऑयल) की कीमतों में नरमी के बावजूद उपभोक्ता की रसोई में इस्तेमाल होने वाले खाद्य तेल अब भी महंगे बने हुए है। व्यापारियों का कहना है कि खाद्य तेलों की कीमतें क्रूड ऑयल से ही तय नहीं होती, बल्कि पैकिंग सामग्री, परिवहन लागत, डॉलर की मजबूती, आयात शुल्क और अंतरराष्ट्रीय नीतियां भी इस पर प्रभाव डालती है। तेल कारोबारियों के अनुसार बोतल, ढक्कन, प्लास्टिक जार और पाउच जैसे पैकिंग मैटेरियल पेट्रोलियम आधारित प्लास्टिक से तैयार होते हैं। रूस-यूक्रेन और पश्चिम एशिया में तनाव के दौरान लागत 40 से 60 प्रतिशत तक बढ़ गई। अब क्रूड ऑयल में कुछ नरमी आई है, पर पैकिंग सामग्री की कीमतें पहले के स्तर पर नहीं लौटी है। उस समय बढ़े ट्रक और टैंकर किराए भी कम नहीं हुए।
केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया है कि पेट्रोल में 20% एथेनॉल (E20) मिलाने का काम अभी प्रयोग के तौर पर है। इस व्यवस्था का देश और वाहनों पर क्या असर हो रहा है, इसका मूल्यांकन किया जा रहा है। इसके नतीजे अगले साल तक साफ हो जाएंगे। यह तथ्य ऐसे समय आया है जब पुरानी गाड़ियों के मालिकों को चिंता है कि E20 पेट्रोल से वाहनों का परफॉर्मेंस खराब हो सकता है।अदालत में सरकार का पक्ष रखते हुए अटॉर्नी जनरल आर वेंकटरमणि ने कहा कि E20 पेट्रोल से इंजन या गाड़ी के पार्ट्स को नुकसान होने का कोई पक्का वैज्ञानिक सबूत नहीं है। इस योजना का मुख्य उद्देश्य कच्चे तेल का आयात घटाना, प्रदूषण कम करना और एथेनॉल बनाने वाले किसानों और कंपनियों को बढ़ावा देना है। अटॉर्नी जनरल की यह दलील कर्नाटक हाई कोर्ट के एक आदेश के खिलाफ दायर याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान आई। हाई कोर्ट ने सरकारी तेल कंपनियों को एक निजी एथेनॉल फैक्ट्री का कोटा बढ़ाने पर फिर से विचार करने को कहा था। इस आदेश के खिलाफ कंपनियां सुप्रीम कोर्ट गईं। कंपनियों की दलील थी कि एथेनॉल सप्लाई के सभी कॉन्ट्रैक्ट अक्टूबर 2025 में ही फाइनल हो चुके हैं।
पुलिस महानिदेशक विभाग ने मंगलवार रात को एक आदेश जारी कर प्रदेश के 100 पुलिस निरीक्षकों (सीआई) के तबादले कर दिये। 14 सीआई को उदयपुर रेंज में इधर-उधर किया है। इनमें से 8 सीआई को रेंज में लगाया है और 6 सीआई को रेंज से बाहर भेजा है। यह तबादले पुलिस निरीक्षकों के खुद के आग्रह पर किए गए हैं।

उदयपुर रेंज में ये आएः दीप सिंह को जोधपुर रेंज से, प्रवीण राजपुरोहित को एटीएस/एसओजी से, मिठूलाल मेघवाल एवं गेहरी लाल गुर्जर को पीटीएस खैरवाड़ा से, दलबीर सिंह एवं सुखवीर सिंह को आयुक्तालय जयपुर से, हिमांशु सिंह राजावत को सीआईडी सीबी से तथा भीम सेन कौशिक को सीआईडी सीबी (सतर्कता शाखा) से स्थानांतरित कर उदयपुर रेंज में पदस्थापित किया गया है।

इन्हें बाहर भेजाः उदयपुर रेंज से तुलसीराम और मोहन सिंह को अजमेर रेंज, हरीसिंह मीना को कोटा रेंज, चम्पाराम मेघवाल को आयुक्तालय जोधपुर, संगीता बंजारा का सीआईडी सीबी व उर्मिला कुमारी का एसओजी, जयपुर में लगाया गया है।
सहेली मार्ग को 'आदर्श यातायात जोन' बनाने की शुरुआत अब पूरे शहर के लिए मॉडल बनने जा रही है। सहेली मार्ग पर शुरू किए गए ट्रैफिक सुधार अभियान के बाद पुलिस ने अब शहर के प्रत्येक थाना क्षेत्र में एक-एक प्रमुख सड़क को आदर्श यातायात मार्ग के रूप में विकसित करने का निर्णय लिया है। इन मार्गों पर यातायात व्यवस्था, पार्किंग, अतिक्रमण, सड़क सुरक्षा और पर्यटकों की सुगम आवाजाही को प्राथमिकता देते हुए समन्वित अभियान चलाया जाएगा।
लेकसिटी की ऐतिहासिक विरासत, पारंपरिक स्थापत्य और सदियों पुराने जायके को दुनिया के सामने लाने के लिए नगर निगम, स्मार्ट सिटी और पर्यटन विभाग के संयुक्त प्रयासों से हेरिटेज वॉक को नए सिरे से शुरू करने की तैयारी अंतिम चरण में है। दो बार के विफल टेंडर के बाद, तीसरे प्रयास में वेंडर का चयन कर लिया है। टेंडर की टेक्निकल और फाइनेंशियल प्रक्रियाएं पूरी हो चुकी है और अब सिर्फ अंतिम मंजूरी मिलना बाकी है। यह हेरिटेज वॉक अगस्त के पहले या दूसरे हफ्ते तक धरातल पर उतर जाएगी। योजना के अनुसार, हेरिटेज वॉक की शुरुआत जगदीश चौक स्थित लाइब्रेरी से होगी। इस पूरी वॉक में करीब 2 से 2.5 किमी की दूरी कवर होगी और इसे पूरा करने में 2 से 3 घंटे का समय लगेगा। इसके लिए अनुबंधित वेंडर ही पर्यटकों के लिए विशेष गाइड नियुक्त करेगा। यह रूट जगदीश चौक से शुरू होकर चांदपोल, गढ़ियादेवरा और अंदरुनी शहर के वॉल सिटी एरिया से होते हुए गुजरेगी।
जोधपुर हाईकोर्ट और प्रदेश सरकार के परिवहन विभाग के कड़े आदेशों के बाद उदयपुर के चारों मैनुअल वाहन फिटनेस सेंटर्स को बंद करने का जो खमियाजा एक महीने से स्थानीय वाहन मालिक भुगत रहे थे, वह संकट अब पूरी तरह खत्म होने जा रहा है। मादड़ी इंडस्ट्रियल एरिया स्थित एक पुराने फिटनेस सेंटर को अपग्रेड कर नया हाईटेक ऑटोमेटेड टेस्टिंग स्टेशन (एटीएस) पूरी तरह बनाकर तैयार कर दिया गया है। इस सेंटर पर प्रतिदिन औसत 90 वाहनों की फिटनेस जांच करने की क्षमता है। सेंटर शुरू करने की अनुमति के लिए प्रादेशिक परिवहन कार्यालय उदयपुर में आदेवन कर दिया गया है। अब विभागीय जांच पड़ताल के बाद मुख्यालय जयपुर से इस सेंटर को शुरू कराने की अनुमति मिलने की प्रक्रिया अगले सप्ताह तक पूरी होने की उम्मीद है।
लेकसिटी में इस बार जुलाई का मौसम बारिश और उमस, दोनों का मिश्रण रहेगा। मौसम विभाग के अनुसार, महीने के पहले दो सप्ताह में मानसून पूरी तरह सक्रिय रहेगा और पूरे मेवाड़ में अच्छी बारिश होगी। इसके बाद मानसून की रफ्तार धीमी पड़ सकती है। जुलाई में औसत अधिकतम तापमान 32.2 डिग्री, न्यूनतम 24.9 डिग्री और कुल औसत वर्षा 235.6 मिमी रहने का अनुमान है। बारिश के बावजूद दिन का तापमान 30 डिग्री से नीचे जाने की संभावना कम है। ऐसे में लोगों को गर्मी और उमस का सामना करना पड़ सकता है। बुधवार को भी दिनभर तेज धूप रही। कुछ समय बादल छाए, लेकिन बारिश नहीं हुई। अधिकतम तापमान 36.5 डिग्री और न्यूनतम 26.5 डिग्री दर्ज किया गया।
जुलाई का महीना देश में राहत की सौगात लेकर आया है। पहले ही दिन एक साथ पांच अच्छी खबरों ने महंगाई से जूझ रहे आम आदमी को राहत दी है। अमरीका-ईरान संघर्ष थमने के बाद फारस की खाड़ी से कच्चे तेल की आपूर्ति बढ़ी है, जिससे वैश्विक बाजार में दबाव कम हुआ है। तेल कंपनियों ने 19 किलोग्राम वाले कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर के साथ 5 किलोग्राम के छोटे सिलेंडर के दाम घटा दिए। नायरा ने पेट्रोल-डीजल सस्ता कर दिया है, जबकि एयर टरबाइन फ्यूल (एटीएफ) की कीमतों में कटौती से हवाई यात्रा भी कुछ सस्ती होने की उम्मीद है। अब 14.2 किलो वाले घरेलू एलपीजी सिलेंडर व पेट्रोल-डीजल की कीमतों में राहत का इंतजार है। हालांकि, विशेषज्ञों के अनुसार इसमें समय लगेगा। विपणन कंपनियां वैश्विक कीमतों में गिरावट के स्थायी होने, पुराने महंगे स्टॉक की खपत और हाल के महीनों में हुए नुकसान की भरपाई के बाद ही उपभोक्ताओं को बड़ी राहत देने पर विचार करेंगी।
देहरादून के विश्वस्तरीय हिमाद्रि आइस रिंक में आयोजित 21वीं नेशनल आइस स्केटिंग चैंपियनशिप में उदयपुर की 10 वर्षीय प्रतिभाशाली स्केटर मायरा त्यागी ने शानदार प्रदर्शन करते हुए एक रजत और एक कांस्य पदक जीतकर राजस्थान और उदयपुर का नाम राष्ट्रीय स्तर पर रोशन किया। महज 10 वर्ष की उम्र में राष्ट्रीय प्रतियोगिता में यह दोहरी सफलता हासिल कर मायरा ने यह साबित कर दिया कि लगन, अनुशासन और निरंतर अभ्यास के बल पर किसी भी लक्ष्य को प्राप्त किया जा सकता है। उनकी उपलब्धि न केवल उनके परिवार और विद्यालय के लिए, बल्कि पूरे उदयपुर और राजस्थान के लिए गर्व का विषय बन गई है।
शहर के फतहपुरा चौराहे पर एक माह से बंद आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) ट्रैफिक सिग्नल फिर शुरू हो गया है। हालांकि यह अभी भी ट्रायल से आगे नहीं बढ़ पाया है। इसे स्थायी रूप से लागू करने पर अभी कोई निर्णय नहीं लिया गया है। ट्रायल को भी एक साल बीत चुका है। शहर के अन्य चौराहों पर भी एआई सिस्टम से ट्रैफिक सिग्नल चलाया जाना है। फतहपुरा चौराहे पर ही ट्रायल में एक साल बीत गया, तो दूसरे चौराहों पर एआई सिस्टम चालू करने में कितना समय लगेगा ? बता दें कि गत 30 मई को शहर में तेज आंधी-बारिश के कारण सिग्नल का एलईडी टाइमर और पोल टूट गया था। तब से इसे मैन्युअल तरीके से चलाया जा रहा था। ट्रायल कर रही एजेंसी ने इसकी मरम्मत करवा दी है।
राष्ट्रीय परमिट वाले ट्रकों, बसों और अन्य व्यावसायिक वाहनों के लिए व्हीकल लोकेशन ट्रैकिंग डिवाइस (वीएलटीडी) अनिवार्य होने के बाद प्रदेशभर में परमिट नवीनीकरण की प्रक्रिया ठप पड़ने लगी है। वाहन पोर्टल पर वीएलटीडी का विवरण उपलब्ध नहीं होने से हजारों वाहनों के परमिट अटक गए हैं। उदयपुर एक हजार से ज्यादा वाहन अब बिना परमिट के हो गए हैं। जबकि, प्रदेश में यह आंकड़ा 30 हजार से ऊपर निकल चुका है। इससे ट्रांसपोर्ट कारोबारियों को आर्थिक नुकसान और माल परिवहन व्यवस्था को झटका लग रहा है। परिवहन व्यवसायियों के अनुसार, परिवहन विभाग के वाहन पोर्टल पर परमिट नवीनीकरण के दौरान वाहन के लिए वीएलटीडी का विवरण उपलब्ध नहीं होने के कारण परमिट संबंधी प्रक्रिया के दौरान 'अनुमति नहीं है' का संदेश दिखाया जा रहा है। इससे परमिट जारी नहीं हो पा रहे हैं। व्यवसायियों का कहना है कि विभाग ने व्यावसायिक वाहनों में वीएलटीडी अनिवार्य तो कर दिया, लेकिन इसे लगाने की प्रक्रिया, अधिकृत एजेंसियों और तकनीकी मानकों को लेकर अब भी स्पष्टता नहीं है। इसी अनिश्चितता के कारण प्रदेशभर के आरटीओ कार्यालयों में परमिट नवीनीकरण के मामले लंबित पड़े हैं।
राज्य सरकार सरकारी विद्यालयों को 21वीं सदी की आधुनिक शिक्षा व्यवस्था से जोड़ने के लिए स्मार्ट क्लास, डिजिटल लर्निंग और तकनीक आधारित शिक्षण पर लगातार निवेश कर रही है। लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि प्रदेश में आज भी 9227 विद्यालय ऐसे हैं, जहां बिजली की सुविधा नहीं है। इनमें अकेले 7076 सरकारी विद्यालय शामिल है। बिजली के अभाव में इन स्कूलों में स्मार्ट बोर्ड, कंप्यूटर, प्रोजेक्टर, पंखे और शुद्ध पेयजल के लिए लगाए फिल्टर तक उपयोग में नहीं आ पा रहे हैं। ऐसे में डिजिटल शिक्षा का सपना अब भी अधूरा है। ग्रामीण, आदिवासी और दूरस्थ रेगिस्तानी क्षेत्रों के विद्यालयों में हालात ज्यादा गंभीर है। इन इलाकों में बिजली नहीं होने से बच्चे आज भी मूलभूत सुविधाओं से वंचित रहकर पढ़ाई करने को मजबूर हैं। राष्ट्रीय शिक्षा नीति और डिजिटल लर्निंग को बढ़ावा देने के लिए सरकार स्मार्ट क्लास और आइसीटी आधारित शिक्षा पर जोर दे रही है, लेकिन बिजली के अभाव में ग्रामीण विद्यालयों में यह व्यवस्था प्रभावी नहीं हो पा रही।
हिरण मगरी क्षेत्र के लोगों के लिए एक बड़ी स्वास्थ्य राहत की खबर सामने आई है। इस एरिया में अब अत्याधुनिक होम्योपैथिक औषधालय के निर्माण का रास्ता साफ हो गया है। राजस्थान राज्य कृषि विपणन बोर्ड ने इस प्रोजेक्ट के लिए ओपन टेंडर जारी कर दिए हैं। इस औषधालय के निर्माण की अनुमानित लागत 25 लाख 23 हजार रुपए तय की गई है। भवन तैयार करने के लिए 8 महीने का लक्ष्य रखा गया है।बोर्ड के अधिशाषी अभियंता एमएस कुमार के अनुसार इस जोन में पहली बार राजस्थान राज्य कृषि विपणन बोर्ड किसी डिस्पेंसरी (औषधालय) का निर्माण कार्य अपने हाथ में ले रहा है। निर्माण पूर्ण होने के बाद इस केंद्र को होम्योपैथिक विभाग को सुपुर्द कर दिया जाएगा, ताकि शहर के लोगों को प्राकृतिक चिकित्सा का सीधा लाभ मिल सके।
बारिश को तरस रही लेकसिटी का इंतजार आखिरकार को उदयपुर में दस्तक दे दी। इसी के साथ तेज गर्मी और उमस से बेहाल शहरवासियों को राहत मिली। बारिश की शुरुआत सुबह 8 बजे हुई। हिरण मगरी, सेक्टर-14, सवीना ओल्ड सिटी सहित कई इलाकों में सुबह 10 बजे तक कहीं रिमझिम तो कहीं मध्यम बारिश का दौर चला। इसके बाद रात साढ़े 8 बजे तेज बारिश शुरू हुई, जो करीब आधे घंटे चली। मौसम विभाग ने शनिवार को भारी बारिश का येलो अलर्ट जारी किया है। देरी के मामले में मानसून ने पिछले 10 साल का रिकॉर्ड तोड़ दिया है। एक दशक में मानसून ने दूसरी बार जुलाई में दस्तक दी है। साल 2022 में 1 जुलाई को आया था। इस बार इससे भी एक दिन लेट है। उधर, मौसम विशेषज्ञ नरपतसिंह राठौड़ ने बताया कि मेवाड़-वागड़ में बंगाल की खाड़ी और अरब सागर दोनों शाखाओं से मानसून आता है। गुरुवार और शुक्रवार को जो बारिश हुई है, वह बंगाल की खाड़ी की शाखा का मानसून है। अरब सागर की शाखा का मानसून अभी गुजरात के बनासकांठा तक पहुंचा है, जो अगले दो दिनों में दक्षिण राजस्थान में प्रवेश कर जाएगा। दोनों शाखाएं मिलते ही संभाग में भारी बारिश होगी।
ओडिशा के पुरी में निभाई जाने वाली भगवान जगन्नाथ की अनवसर परंपरा इस समय उदयपुर के प्रमुख मंदिरों में भी दिखाई दे रही है। सेक्टर-7 स्थित जगन्नाथ मंदिर, गंगू कुंड स्थित इस्कॉन मंदिर और जगदीश मंदिर में भगवान की विशेष सेवा की जा रही है। सेक्टर-7 स्थित जगन्नाथ मंदिर के संयोजक गजेंद्र शर्मा ने बताया कि अनवसर काल भगवान के विश्राम का समय होता है। सुबह जागरण और औषधीय सेवा के बाद भगवान दिनभर विश्राम करते हैं। इस दौरान श्रद्धालुओं के लिए दर्शन बंद रहते हैं और केवल सेवायत ही निर्धारित विधि से पूजा-अर्चना करते हैं। मंदिर के पुजारी सुनील चौबीसा ने बताया कि भगवान को ज्वर होने के कारण भारी व्यंजनों के बजाय अंकुरित मूंग, फल, ज्यूस और शाम को काढ़े का भोग लगाया जा रहा है। देवस्नान के बाद प्रतिदिन औषधीय जल से शुद्धि और जड़ी-बूटियों का लेप भी किया जाता है। गंगू कुंड स्थित इस्कॉन मंदिर के निरंजन शेष दास प्रभु ने बताया कि भगवान को सुबह काढ़ा और खिचड़ी का भोग लगाया जा रहा है। भगवान के शीघ्र स्वास्थ्य लाभ के लिए हरिनाम संकीर्तन और जप भी किए जा रहे हैं।
ईरान और अमरीका के बीच युद्ध विराम की घोषणा के बाद भले ही वैश्विक स्तर पर राहत की सांस - ली जा रही हो, लेकिन राजस्थान के औद्योगिक गलियारों में अभी रौनक लौटने में लंबा वक्त लगेगा। आर्थिक विशेषज्ञों और उद्योगपतियों का मानना है कि युद्ध से उपजे संकट के कारण पटरी से उतरी राज्य की इंडस्ट्री को सामान्य स्थिति में आने में कम से कम 6 माह का समय लगेगा। युद्ध के कारण सबसे ज्यादा मार उदयपुर और आस-पास के क्षेत्रों की रीढ़ माने जाने वाले मार्बल, क्वार्ट्ज और ग्रेनाइट के साथ-साथ फार्मा, जिंक, फर्टिलाइजर और सोपस्टोन उद्योगों पर पड़ी है।
महाराणा भूपाल (एमबी) अस्पताल परिसर में संचालित टीबी क्लीनिक आज खुद संक्रमण का एक भयानक केंद्र बन चुका है। यहां रोजाना 40 से 50 नए टीबी मरीज ओपीडी में इलाज और दवा लेने पहुंचते हैं, लेकिन हवा के जरिए फैलने वाली इस बेहद घातक और संक्रामक बीमारी के केंद्र पर संक्रमण रोकने के बुनियादी सुरक्षा इंतजाम पूरी तरह नदारद हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि क्लीनिक में न तो हवा को शुद्ध करने वाले हेपा फिल्टर लगे हैं और न ही बैक्टीरिया को खत्म करने वाली यूवी-सी रेज मशीनें। ऐसे में यहां आने वाले मरीजों और उनके परिजनों के साथ-साथ हर वक्त ड्यूटी पर तैनात दो सीनियर डॉक्टर, जिला टीबी अधिकारी और पैरामेडिकल स्टाफ भी हाई रिस्क पर हैं।
सरकारें करोड़ों रुपए खर्च कर 'पेड़ लगाओ-पर्यावरण बचाओ' का संदेश दे रही हैं, लेकिन शहर के महाराणा प्रताप कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (एमपीयूएटी) परिसर में वर्षों पुराने हरे-भरे पेड़ों को काट दिया गया। सुंदरेश्वर मंदिर व सुंदरेश्वर बावड़ी के आसपास बड़े पेड़ काटे जाने से मॉर्निंग वॉकर्स, स्थानीय लोगों और पर्यावरण प्रेमियों में आक्रोश है।स्थानीय लोगों के अनुसार मंदिर और बावड़ी के आसपास 8 से 10 बड़े पेड़ काटे गए हैं। इनमें वर्षों पुराना बरगद, चंदन तथा औषधीय गुणों वाला अडूसा समेत अन्य पेड़ शामिल हैं। लोगों का कहना है कि मंदिर के पास स्थित विशाल बरगद की छांव में श्रद्धालु और मॉर्निंग वॉकर्स वर्षों से विश्राम करते थे, जो अब खत्म हो चुकी है। मामले में सबसे बड़ा सवाल यह है कि विश्वविद्यालय परिसर में इतनी बड़ी कार्रवाई के बावजूद जिम्मेदार अधिकारियों को इसकी भनक कैसे नहीं लगी। फार्म क्षेत्र में वर्षों पुराने पेड़ काट दिए गए, जबकि परिसर में अधिकारी, कर्मचारी और सुरक्षा गार्ड तैनात रहते हैं।
दक्षिण राजस्थान में चंदन की खेती और संरक्षण को बढ़ावा देने की राज्य सरकार की पहल अब जमीन पर उतरने लगी है। कर्नाटक के चिक्कमगलुरू से 6 हजार चंदन के पौधे उदयपुर पहुंच चुके हैं। तीन दिन की यात्रा के बाद पहुंचे इन पौधों को स्थानीय वातावरण के अनुकूल बनाने के लिए नर्सरी में रखा गया है। इसके बाद सप्ताह के आखिर में पौधारोपण शुरू किया जाएगा। उप वन संरक्षक (डीएफओ) मुकेश सैनी ने बताया कि पौधों को तीन-चार दिन तक नर्सरी में सुरक्षित रखा जाएगा। कालका माता क्षेत्र में पहले से प्राकृतिक रूप से चंदन के पेड़ मौजूद हैं, इसलिए यहां 20 से 22 हेक्टेयर क्षेत्र में चंदन वन विकसित किया जाएगा। परियोजना के लिए 50 लाख का बजट प्रस्तावित है। इससे ईको-टूरिज्म को बढ़ावा देने के लिए ट्रैक, आकर्षक प्रवेश द्वार और अन्य बुनियादी सुविधाएं विकसित की जाएंगी। पौधों की बेहतर वृद्धि के लिए लैंटाना जैसी हानिकारक झाड़ियों को भी हटाया जा रहा है।