UdaipurBlog
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आम लोगों के सफर के सबसे भरोसेमंद राजस्थान राज्य पथ परिवहन निगम (रोडवेज) की बसों में यात्रियों की सुरक्षा भगवान भरोसे है। रोडवेज प्रबंधन हर यात्री से टिकट पर 2 रुपए बीमा मद के नाम पर वसूलता है, लेकिन हकीकत यह है कि उदयपुर डिपो की 82 सहित प्रदेशभर में 4 हजार से ज्यादा बसें बिना बीमा के ही सड़कों पर दौड़ रही हैं। रोडवेज के अपने आंकड़ों के अनुसार इन बसों में रोज करीब 7.31 लाख यात्री सफर करते हैं। इस लिहाज से निगम की झोली में यात्रियों से रोज लगभग 14.60 लाख रुपए सिर्फ बीमा मद के आते हैं। इसके बावजूद बसों का सामान्य बीमा नहीं कराया जा रहा। अधिकारियों का तर्क है कि सरकारी महकमा होने के कारण थर्ड पार्टी बीमा मॉडल (स्वयं का विशेष फंड) अपनाया गया है।बसों का टैक्स भी नहीं चुका रहा निगम : बिना बीमा दौड़ रही बसों के साथ-साथ निगम टैक्स चुकाने में भी लापरवाही बरत रहा है। आगार डिपो में खड़ी बस (आरजे 29 पीए 2385) का टैक्स पिछले साल जुलाई तक ही जमा है। इसी तरह एक अन्य बस (आरजे 27 पीबी 2445) का टैक्स इस साल 30 अप्रैल तक ही भरा गया है।
किसानों को पारंपरिक फसलों के बजाय मुनाफे वाली खेती से जोड़ने के लिए राष्ट्रीय बागवानी मिशन के तहत वर्ष 2026-27 में स्ट्रॉबेरी के नए बगीचे लगाने पर भारी अनुदान (सब्सिडी) दिया जाएगा। योजना के तहत स्ट्रॉबेरी बगीचे के लिए बूंद-बूंद (ड्रिप) सिंचाई प्रणाली लगाना अनिवार्य है। इसके लिए किसानों को पीएमडीएमसी योजना के तहत अलग से अनुदान मिलेगा। उद्यान विभाग के उपनिदेशक डॉ. कैलाश चंद्र शर्मा ने बताया कि नए बगीचे के आवेदन के साथ ही ड्रिप संयंत्र का आवेदन भी देना होगा। फल बगीचों के लिए किसानों का चयन व्यक्तिगत के बजाय यथासंभव क्लस्टर यानी समूहों में होगा। इसमें पंचायती राज संस्थाओं का सहयोग लिया जाएगा।
कॉरपोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (सीएसआर) राजस्थान में विकास का अहम माध्यम बनकर उभर रही है। कॉरपोरेट कार्य मंत्रालय की ओर से जारी वित्त वर्ष 2023-24 के आंकड़ों के अनुसार राज्य की 1,851 कंपनियों ने सामाजिक और विकास परियोजनाओं पर 1,145.67 करोड़ रुपए खर्च किए। यह राशि शिक्षा, स्वास्थ्य, ग्रामीण विकास, पर्यावरण संरक्षण, महिला सशक्तिकरण और खेल सहित 10 प्रमुख क्षेत्रों में निवेश की गई। राज्य के सभी 37 जिलों को सीएसआर गतिविधियों का लाभमिला, लेकिन सबसे अधिक निवेश जयपुर और उदयपुर को प्राप्त हुआ। 248.24 करोड़ रुपए के सीएसआर निवेश के साथ जयपुर राज्य का सबसे बड़ा लाभार्थी जिला रहा, जबकि उदयपुर 97.57 करोड़ रुपए के साथ दूसरे स्थान पर रहा। उदयपुर-जयपुर को 345.81 करोड़ रुपए का निवेश मिला। यानी कुल फंड का 30% हिस्सा इन दोनों जिलों में खर्च किया गया। अजमेर (87.26 करोड़), अलवर (68.54 करोड़) और भीलवाड़ा (49.71 करोड़) भी शीर्ष 5 जिलों में शामिल हैं। पिछले दो वर्षों में ही राज्य में 2,268 करोड़ खर्च हुए।
बादलों की आवाजाही के बीच शहर में गर्मी और उमस का ग्राफ लगातार बढ़ रहा है। बीते 24 घंटों में दिन के साथ-साथ रात के तापमान में बड़ा उछाल दर्ज किया गया है। शनिवार के मुकाबले रविवार को शहर का अधिकतम तापमान 36.7 डिग्री से बढ़कर 37.1 डिग्री सेल्सियस पर पहुंच गया। वहीं न्यूनतम तापमान में 4.2 डिग्री की भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई। शनिवार रात जो पारा 23.4 डिग्री था, वह रविवार को 27.6 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड हुआ, जिससे रात में भी लोग गर्मी से परेशान रहे। मौसम विशेषज्ञ डॉ. आर.एस. देवड़ा के अनुसार फिलहाल उदयपुर और आसपास के क्षेत्रों में मानसून के लिए इंतजार करना होगा। आने वाले दो से तीन दिनों तक मौसम मुख्य रूप से शुष्क रहने की संभावना है। हालांकि प्री-मानसून के असर से आसमान में हल्के बादल छाए रहेंगे, लेकिन तापमान में बड़ी गिरावट के आसार नहीं हैं। हवा में नमी बरकरार रहने के कारण स्थानीय निवासियों को अभी तीखी उमस वाली गर्मी का सामना करना पड़ेगा। उत्तर-पूर्वी राजस्थान में कुछ जगहों पर हल्की खंड वर्षा (बिखरी हुई बारिश) होने और पश्चिमी राजस्थान में तेज गति से हवाएं चलने की संभावना है।
भारत में दुनिया के कुल वाहनों का भले ही मात्र 1-2% हिस्सा हो, लेकिन वैश्विक सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली मौतों में देश की हिस्सेदारी 11% से अधिक है। वर्ष 2024 में देश में दर्ज 4.87 लाख सड़क हादसों में 1.77 लाख लोगों ने जान गंवाई, यानी रोजाना औसतन 487 मौतें हुई। परिवहन विभाग के रोड सेफ्टी डिप्टी कमिश्नर डॉ. वीरेंद्र सिंह राठौड़ का कहना है कि हादसों को रोकने के लिए सिंगावल (अजमेर) में स्थापित देश का पहला अंतरराष्ट्रीय मान्यता प्राप्त रीजनल ड्राइविंग ट्रेनिंग सेंटर (आरडीटीसी) अब उदयपुर में भी क्रांति का सूत्रधार बना है। यह संस्था 87% हादसों के लिए जिम्मेदार चालकों को स्मार्ट क्लासरूम में ड्राइविंग चालीसा, सुरक्षा उपकरण, लेटेस्ट टेक्नोलॉजी और रोड साइन सिखा रही है। अजमेर, सीकर-जयपुर, बालोतरा और जोधपुर के बाद अब उदयपुर में भी उप-केंद्र खोल दिया गया है। जहां रोजाना 27 भारी वाहन चालकों को निशुल्क प्रशिक्षण दिया जा रहा है। केंद्र प्रदेश सरकार और सड़क सुरक्षा सोसायटी का यह साझा उपक्रम 2 साल में 21,500 से अधिक वाहन चालकों को ट्रेंड कर चुका है। इसमें उदयपुर केंद्र के 8,964 चालक भी हैं।
शहर में सोमवार को भी सूरज के तेवर तीखे रहे और मौसम में तल्खी बनी रही। दिनभर रही तेज गर्मी के कारण मानसूनी असर नजर नहीं आया। मौसम विशेषज्ञ डॉ. आरएस देवड़ा के अनुसार, दक्षिण-पश्चिमी मानसून की दोनों शाखाओं की गति तेज हो गई है। इसके चलते दक्षिणी राजस्थान में जल्द ही प्री-मानसून की गतिविधियां शुरू होने वाली हैं। डॉ. देवड़ा ने बताया कि बंगाल की खाड़ी से आ रही मानसूनी हवाएं मध्य प्रदेश से होते हुए अगले एक-दो दिनों में हाड़ौती अंचल में बारिश की शुरुआत करेंगी। इसका असर मेवाड़ में भी दिखेगा, जहां अगले दो दिनों तक आसमान में बादल छाए रहेंगे और तेज गति से हवाएं चलने के साथ ही कहीं-कहीं बारिश होने की संभावना है।
जिले के 86 निजी स्कूलों पर शिक्षा का अधिकार कानून (आरटीई) के तहत गरीब बच्चों को मुफ्त दाखिला नहीं देने पर बड़ी कार्रवाई होने जा रही है। माध्यमिक शिक्षा निदेशालय, बीकानेर के अति-आवश्यक आदेश के बाद पूरे जिले के शिक्षा महकमे में हड़कंप मच गया है। दरअसल, इन स्कूलों ने चालाकी दिखाते हुए अपने यहां शुरुआती कक्षाओं में आरटीई के तहत होने वाले दाखिलों को शून्य (0) दिखाया था। इन्हें लगा था कि सरकार से फीस का पैसा (पुनर्भरण राशि) मिलने में देरी होती है। जांच में सामने आया कि इन्हीं स्कूलों ने उसी दौरान मोटी फीस लेकर दूसरे बच्चों को धड़ल्ले से एडमिशन दिए। यानी पैसे वाले बच्चों के लिए सीटें थीं, लेकिन गरीबों के लिए दाखिला बंद कर दिया गया। पूरा मामला हाईकोर्ट में दायर एक जनहित याचिका (उज्ज्वल शर्मा बनाम राजस्थान राज्य) के बाद सामने आया। कोर्ट ने गत 27 मई को आदेश दिया कि आरटीई पोर्टल पर शून्य सीटें दिखाने वाले स्कूलों के पिछले दो सालों के रिकॉर्ड की गहन जांच की जाए।
उदयपुर को जल संकट से स्थायी मुक्ति दिलाने वाली 1690.55 करोड़ रुपए लागत देवास तृतीय व चतुर्थ परियोजना अब धरातल पर उतरने के लिए तैयार है। केंद्रीय पर्यावरण व वन मंत्रालय से इस प्रोजेक्ट को आखिरी मंजूरी मिल गई है। जल संसाधन विभाग ने वन भूमि डायवर्जन के बदले 52 करोड़ रुपये की क्षतिपूर्ति राशि देने की सहमति सौंप दी है। अधिशाषी अभियंता बीरबल डूडी ने बताया कि दोनों बांधों और टनल का निर्माण इसी माह शुरू हो जाएगा। टेंडर पहले ही हो चुके हैं। प्रोजेक्ट को रफ्तार देने के लिए हाल ही मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने भी निर्माण क्षेत्रों का हवाई दौरा किया था। यह प्रोजेक्ट गोगुंदा के नाथियाथल व अम्बा गांव में बनने वाले दो बांधों और 14.65 किमी लंबी सुरंग प्रणाली के जरिए सालाना 1000 एमसीएफटी पानी बिना बिजली या पंपिंग के, सीधे उदयपुर की पिछोला-फतेहसागर झीलों में डायवर्ट करेगा। मई 2029 में काम पूरा होने के बाद ये झीलें सालभर लबालब रहेंगी।
उदयपुर जिले में आगामी 29 जून से सरकारी स्कूल खुलने जा रहे हैं। यह सरकार का उसी तरह का एक और प्रयोग है, जैसा इस बार शिक्षा सत्र को 1 जुलाई के बजाय 1 अप्रैल से शुरू करके किया गया था। हर साल नया शैक्षणिक सत्र 1 जुलाई से शुरू होता है, लेकिन इस बार निजी स्कूलों की तर्ज पर सत्र समय से पहले शुरू किया गया। अब गर्मियों की छुट्टियों के बाद स्कूलें दोबारा शुरू होने जा रही हैं। स्कूल खुलते ही इन पर समस्याओं का पहाड़ टूटना तय है। इसका सबसे बड़ा कारण यह है कि जिले में जर्जर हो चुके स्कूल भवनों को तो गिरा दिया गया है, लेकिन उनकी एवज में नए भवनों का निर्माण नहीं कराया गया। वर्तमान में ये स्कूलें किराए के भवनों में, खाली पड़े अन्य सरकारी भवनों में या फिर टेंट के नीचे संचालित हो रही हैं। सबसे बड़ी लापरवाही यह रही कि इस पूरे अवकाश के दौरान समग्र शिक्षा अभियान की ओर से निर्माण कार्य शुरू ही नहीं कराया जा सका। अब जब मानसून सिर पर है, ऐसे में टेंट और अस्थाई परिसरों में पढ़ रहे बच्चों की सुरक्षा और पढ़ाई भगवान भरोसे है।
साल की सबसे बड़ी और पवित्र मानी जाने वाली निर्जला एकादशी गुरुवार को विशेष व दुर्लभ शुभसंयोगों के बीच मनाई जाएगी। इस बार ज्येष्ठ शुक्ल एकादशी पर शिव, रवि और सिद्ध योग का एक साथ त्रिवेणी संगम बन रहा है, जिससे इस पर्व का धार्मिक महत्व कई गुना बढ़ गया है। बिना जल ग्रहण किए किए जाने वाले इस कठिन व्रत को लेकर शहर के तमाम नारायण मंदिरों में तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। शहर के ऐतिहासिक और आस्था के प्रमुख केंद्र जगदीश मंदिर में निर्जला एकादशी पर उमड़ने वाले श्रद्धालुओं के भारी सैलाब को देखते हुए मंदिर प्रशासन और देवस्थान विभाग ने विशेष क्राउड मैनेजमेंट प्लान तैयार किया है। भीड़ और गर्मी के मद्देनजर दर्शन व्यवस्था को पूरी तरह एकतरफा रखा जाएगा। सभी श्रद्धालु मुख्य सीढ़ियों (मुख्य द्वार) से प्रवेश करेंगे, जबकि दर्शन करने के बाद उनकी निकासी के लिए उत्तरी द्वार की व्यवस्था रहेगी।गर्भगृह के सामने श्रद्धालुओं का जमावड़ा न हो, इसके लिए इस बार अलग-अलग झांकियों की समय अवधि को बढ़ा दिया गया है, जिससे सभी को आसानी से दर्शन हो सकें।
शहर में आगजनी की घटनाओं को रोकने और लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए नगर निगम ने बड़े स्तर पर फायर सेफ्टी सर्वे शुरू किया हुआ है। पिछले 15 दिनों से सात टीमों ने शहर के अलग-अलग इलाकों में होटल, अस्पताल, कोचिंग सेंटर, मॉल, बहुमंजिला इमारतों और अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठानों की जांच की। अब तक 655 संस्थानों का सर्वे किया गया, जिनमें से 337 में फायर सेफ्टी से जुड़ी कमियां मिली हैं। नगर निगम आयुक्त अभिषेक खन्ना के निर्देश पर गठित टीमों ने शहरकोट क्षेत्र, बलीचा, प्रतापनगर सहित कई इलाकों में निरीक्षण किया। जांच के दौरान फायर एक्सटिंग्विशर, हाइड्रेट सिस्टम, इमरजेंसी एग्जिट, फायर अलार्म सिस्टम और बिजली सुरक्षा जैसी व्यवस्थाओं को परखा गया। जिन संस्थानों में कमियां मिलीं, उन्हें नोटिस जारी किए गए हैं।नगर निगम का कहना है कि शहर में संचालित सभी सार्वजनिक और व्यावसायिक भवनों की चरणबद्ध तरीके से जांच की जा रही है। मकसद यह सुनिश्चित करना है कि किसी भी आपात स्थिति में लोगों की जान जोखिम में न पड़े और फायर सेफ्टी के सभी जरूरी इंतजाम मौजूद रहें।
शहर में मंगलवार को दिनभर भीषण गर्मी और उमस का असर बना रहा। एक तरफ आसमान से बरसती धूप और दूसरी तरफ बिजली निगम द्वारा शटडाउन के नाम पर की गई घंटों की अघोषित कटौती ने स्थानीय निवासियों को बेचैन कर दिया। पंखे-कूलर बंद रहने से लोग पसीने से तर-बतर नजर आए। राहत की बात यह रही कि सोमवार के (39.2 डिग्री) मुकाबले मंगलवार को अधिकतम तापमान 1.7 डिग्री गिरकर 37.5 डिग्री सेल्सियस पर आ गया। इसके उलट न्यूनतम तापमान सोमवार के 25.8 डिग्री से बढ़कर मंगलवार को 26.3 डिग्री सेल्सियस पर पहुंच गया, जिससे रात में भी उमस भरी गर्मी रही। इस बीच दिन भर बिजली ने खासा परेशान किया। निगम ने कहीं 3 तो कहीं 6 घंटे कटौती की घोषणा की थी, लेकिन यह समय बीतने के बाद भी कहीं एक तो कहीं डेढ़ घंटे बाद भी सप्लाई बहाल नहीं हुई। इधर मौसम विभाग और विशेषज्ञों का कहना है कि उदयपुर वासियों को इस चिपचिपी और पसीने वाली गर्मी से पूरी तरह निजात पाने के लिए अभी करीब एक हफ्ते का इंतजार और करना होगा।
शहर में बुधवार को मौसम गर्म रहा। कुछ देर के लिए शाम को जरूर बादल आते-जाते रहे, लेकिन गर्मी कम नहीं हुई। अधिकतम तापमान में बढ़ोतरी तो न्यूनतम पारे में गिरावट आई। मंगलवार को अधिकतम तापमान 37.5 डिग्री था, जो बुधवार को 38.0 डिग्री पर पहुंच गया। वहीं न्यूनतम पारा 26.0 डिग्री रहा। यह एक दिन पहले 26.3 डिग्री था। मौसम विशेषज्ञ डॉ. आरएस देवड़ा ने बताया कि फिलहाल उदयपुर में हल्के बादल छाए रहेंगे। आने वाले दिनों में अधिकतम तापमान तो यथावत रहेगा, लेकिन न्यूनतम तापमान में और बढ़ोतरी होने की संभावना है।
शहर में बुधवार को मौसम गर्म रहा। कुछ देर के लिए शाम को जरूर बादल आते-जाते रहे, लेकिन गर्मी कम नहीं हुई। अधिकतम तापमान में बढ़ोतरी तो न्यूनतम पारे में गिरावट आई। मंगलवार को अधिकतम तापमान 37.5 डिग्री था, जो बुधवार को 38.0 डिग्री पर पहुंच गया। वहीं न्यूनतम पारा 26.0 डिग्री रहा। यह एक दिन पहले 26.3 डिग्री था। मौसम विशेषज्ञ डॉ. आरएस देवड़ा ने बताया कि फिलहाल उदयपुर में हल्के बादल छाए रहेंगे। आने वाले दिनों में अधिकतम तापमान तो यथावत रहेगा, लेकिन न्यूनतम तापमान में और बढ़ोतरी होने की संभावना है।
शहर की राह आसान करने के लिए बन रहे टू-लेन एलिवेटेड रोड के बीच नए-नए अवरोध सामने आ रहे हैं। यही प्रोजेक्ट में देरी का कारण भी बनेंगे। ताजा अवरोध टाउनहॉल रोड पर आया है, जहां पिलर के लिए खोदे गए दो फाउंडेशन में पानी भर गया है। ऐसे में 3-4 दिनों से मशीन लगाकर पानी को बाहर निकाला जा रहा है। टाउनहॉल रोड निचला क्षेत्र होने के कारण यहां सालभर पानी का रिसाव रहता है। पास ही में निगम की टाउन पार्किंग में भी यही हाल रहता है। ऐसे में पिलर का काम अटका हुआ है। पानी खत्म होने के बाद फाउंडेशन को कंक्रीट से मजबूत बनाया जाएगा, ताकि पानी नहीं आ सके। फिर पिलर लगाने का काम शुरू किया जाएगा। दूसरी ओर, अब तक सिर्फ 30 प्रतिशत काम ही पूरा हो पाया है, जबकि इसे जनवरी 2027 तक पूरा करना है। यानी 7 माह में 70 प्रतिशत काम करना चुनौती है। बता दें कि अब तक उदियापोल, सूरजपोल रोड, टाउनहॉल रोड, कलेक्ट्री रोड पर 60 पिलर लगाए जा चुके हैं। रेलवे स्टेशन रोड से बंशीपान भंडार तक बन रहे एलिवेटेड रोड का काम 14 दिसंबर, 2024 को शुरू हुआ था। 136.89 करोड़ में बनाई जा रही यह रोड 12 मीटर चौड़ी होगी। इसका एक हिस्सा एमबी हॉस्पिटल रोड पर भी उतरेगा।
भीषण गर्मी के बीच बार-बार ट्रिपिंग और अघोषित बिजली कटौती से परेशान उदयपुर के उपभोक्ताओं के लिए राहत की खबर है। अजमेर विद्युत वितरण निगम (एवीवीएनएल) के उदयपुर वृत्त में लंबे समय से बने स्टाफ संकट को दूर करने के लिए प्रदेश सरकार ने तैयारी शुरू कर दी है। विभागीय सूत्रों के अनुसार, डिस्कॉम में रिक्त तकनीकी पदों के आधे से अधिक पदों पर इसी वर्ष भर्ती प्रक्रिया शुरू की जाएगी। वर्तमान में शहर (नॉन-टीएसपी) और ग्रामीण (टीएसपी) क्षेत्रों को मिलाकर कुल 1,652 स्वीकृत तकनीकी पदों में से 539 पद रिक्त हैं, जो कुल पदों का 32.62 प्रतिशत है। लाइनमैन और तकनीकी सहायकों की कमी के कारण ट्रांसफार्मर जलने या लाइनों में फॉल्ट आने पर मरम्मत में औसतन 1 से 3 घंटे तक लग जाते हैं। वहीं, जेईएन के 18 रिक्त पदों को भरने की प्रक्रिया भी तेज कर दी गई है। नई भर्ती के बाद फील्ड में स्टाफ की उपलब्धता बढ़ने से फॉल्ट सुधार का समय घटकर आधे से एक घंटे तक रह जाने की उम्मीद है। इससे न केवल बिजली व्यवस्था मजबूत होगी, बल्कि अघोषित कटौती की समस्या में भी कमी आएगी।
स्वायत्त शासन विभाग (डीएलबी) ने प्रदेश के नगर निगम, नगर परिषद और पालिका क्षेत्र में व्यावसायिक गतिविधियों की वार्षिक लाइसेंस फीस से जुड़ा आदेश एक माह में ही बदल दिया है। निदेशक जुईकर प्रतीक चंद्रशेखर ने 24 जून, बुधवार को संशोधित आदेश जारी किया है। इसके तहत अब होटल, रेस्टोरेंट, कैफे और ब्यूटी पार्लर के लिए नई दरें तत्काल प्रभाव से लागू कर दी गई हैं। इसके साथ ही, नियमों का उल्लंघन करने पर कड़ी कार्रवाई और भारी जुर्माने का भी प्रावधान किया गया है।
श्रम विभाग के नए आदेश उदयपुर सहित प्रदेश में शुरू होने वाले नाइट बाजारों को लेकर पेंच फंसा दिया है। अब नाइट बाजार में पंजीकृत दुकानों और वाणिज्यिक संस्थानों को अनुमति तभी मिलेगी, जब वहां 10 कर्मचारियों का पंजीकरण हो। जबकि कई रेस्टोरेंट और दुकानों में केवल 4 से 5 कर्मचारी ही कार्यरत हैं। ऐसे में उन्हें अनुमति कैसे मिलेगी?
झीलों के शहर की एयर कनेक्टिविटी को मजबूत करते हुए अकासा एयर ने उदयपुर को अपने नेटवर्क घरेलू में शामिल करने की घोषणा की है।एयरलाइन 15 अक्टूबर से उदयपुर-मुंबई और उदयपुर-बेंगलुरु के बीच प्रतिदिन सीधी उड़ान शुरू करेगी। इन दोनों रूटों पर यात्रा के लिए टिकटों की बुकिंग भी शुरू कर दी गई है। उदयपुर को अपने नेटवर्क में शामिल करने का निर्णय यहां पर्यटन और डेस्टिनेशन वेडिंग की बढ़ती मांग को देखते हुए लिया गया है। अक्टूबर से टूरिस्ट सीजन की शुरुआत भी हो जाएगी। फिर नवंबर से वेडिंग सीजन चलेगा। दोनों फ्लाइट्स की शुरुआत से राजस्थान के इस प्रमुख पर्यटन शहर की देश के दो बड़े महानगरों से सीधी हवाई कनेक्टिविटी बेहतर होगी। पर्यटन और होटल उद्योग से जुड़े विशेषज्ञों का मानना है कि नई उड़ानों से पर्यटकों की संख्या में इजाफा होगा।
शहर में शुक्रवार को दिनभर तीखी गर्मी के बाद शाम होते-होते मौसम ने अचानक करवट ली। शाम करीब 4 बजे घने काले बादल उमड़ आए। कई इलाकों में तेज हवाओं के साथ बारिश शुरू हो गई। हालांकि यह कहीं 10 तो कहीं 15 मिनट ही रही। बारिश से गर्मी में थोड़ी राहत तो मिली, लेकिन इसके बाद उमस से बेचैन कर दिया। अधिकतम तापमान में 0.1 डिग्री की मामूली गिरावट दर्ज की गई। यह 37.1 डिग्री रह गया। इसके उलट न्यूनतम तापमान 0.9 डिग्री बढ़कर 26.4 तक पहुंच गया। कृषि विशेषज्ञ का कहना है कि इस बारिश खेतों में नमी आने से खरीफ की बुवाई का काम शुरू किया जा सकेगा। मौसम विशेषज्ञ डॉ. आरएस देवड़ा ने बताया कि उदयपुर में वास्तविक मानसून आने में 4 से 5 दिन और लग सकते हैं।
कमेटी के जरिए भर्ती की प्रक्रिया शुरू की है। राजस्थान मेडिकल कॉलेज टीचर्स एसोसिएशन (आरएमसीटीए) ने इसका कड़ा विरोध किया है। डॉक्टरों का आरोप है कि इससे मेडिकल शिक्षा की गुणवत्ता प्रभावित होगी। वे अब इस मामले को लेकर कोर्ट जाने की तैयारी कर रहे हैं। सरकार ने रिम्स की कार्यक्षमता बढ़ाने और एनएमसी के नियम पूरे करने के लिए एक स्क्रीनिंग कमेटी बनाई है। इस तीन सदस्यीय कमेटी में डॉ. दीपक माहेश्वरी, डॉ. अजीत सिंह शक्तावत और डॉ. मोहनीश ग्रोवर शामिल हैं। यह कमेटी चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग (ग्रुप-2) के चिकित्सा अधिकारियों (प्रिंसिपल व सीनियर स्पेशियलिस्ट) की स्क्रीनिंग करेगी। इन्हें लेटरल एंट्री के जरिये फैकल्टी के रूप में नियुक्त किया जाना है।
नए सत्र के लिए सरकारी स्कूल 29 जून से खुलने जा रहे हैं, लेकिन प्रदेश के लाखों नौनिहालों को मिलने वाले मिड-डे-मील (पोषाहार) पर इस बार बड़ा संकट मंडरा रहा है। सरकार ने पिछले साल दिसंबर 2025 से लेकर अब (जून 2026) तक स्कूलों को भोजन पकाने की (कन्वर्जन) राशि जारी नहीं की है। करीब 7 महीनों के इस लंबे बकाया के कारण अकेले उदयपुर जिले में ही 1 करोड़ रुपए से अधिक की उधारी चल रही है। उधार राशन के भरोसे बच्चों का पेट भर रहे शिक्षक अब अपनी जेब से खर्च कर परेशान हो चुके हैं, जिससे नए सत्र में बच्चों के ठहराव और नामांकन दोनों पर विपरीत असर पड़ना तय माना जा रहा है। उदयपुर जिले के 2977 सरकारी स्कूलों में मिड-डे-मील योजना के तहत करीब 2 लाख 64 हजार बच्चे और नए पुनर्गठित जिला सलुंबर के 945 विद्यालयों के करीब 1 लाख बच्चे इस योजना से जुड़े हैं। योजना का मुख्य उद्देश्य गरीब बच्चों को दोपहर में गर्म और पौष्टिक भोजन देकर उनका स्कूलों में ठहराव बढ़ाना है, लेकिन बजट के अभाव में पूरी व्यवस्था गड़बड़ा रही है।