असिस्टेंट प्रोफेसर परीक्षार्थी ग्रुप
जल्दी परीक्षा केंद्र की सूचना आ जाएगी।
जैसा बताया था न्यूजपेपर में आ गया है जल्दी परीक्षा केंद्र की सूचना आ जाएगी।
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7-8 अप्रैल तक जनपद की सूचना आ जाएगी।
जैसा बताया था वैसा ही होगा।
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आयोग की नोटिस आ गई है।
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सभी परीक्षार्थी अपने परीक्षा केंद्र को देख सकते हैं।
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प्रारब्ध से सब कुछ पूर्व निश्चित है इसलिए चिंता करने की कोई आवश्यकता ही नहीं है। परिणाम भी पहले से तय है। हम तो केवल कर्म मात्र कर रहे हैं यद्यपि हमारे कर्मों का परिणाम पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता है। जय श्री कृष्ण!
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परीक्षा केंद्र जारी हो गए हैं
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हमसे जितना होता है दूसरों के लिए उतना कर देते हैं क्योंकि परोपकार करना सबसे उत्तम कार्य है बाकी सूचना देने के लिए हमें किसी ने नियुक्त नहीं किया है। हर कोई चाहता है कि परीक्षा स्थल की सूचना शीघ्र मिल जाए इसलिए हमने सूचना देना अपना कर्तव्य समझा।
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7-8 अप्रैल तक जनपद की सूचना आ जाएगी।
इस पोस्ट पर क्लिक करके उसकी डेट देख सकते हैं। यह हमने 29 मार्च को लिखा था। तो जैसा लिखा था 7-8 अप्रैल तो 7 अप्रैल को विषयवार सूचना आ गई और 8 अप्रैल को जनपद का पता चल गया। इसे इंटूशन कहते हैं। जन्मकुंडली में ग्रहों की स्थिति से व्यक्ति में इंटूशन क्षमता होती है। अब यह अलग बात है वह कितना बता रहा है अथवा नहीं बता रहा है किंतु उसे भविष्य का स्पष्ट पूर्वानुमान रहता है यह तय है।
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आयोग की साइट पर प्रवेश पत्र उपलब्ध हैं। परीक्षा समय ठीक वही दिया गया है जो 8 दिन पहले सूचित किया गया था। इस विषय में हमने थोड़ी देर पहले आयोग को एक ट्वीट भी किया था और समस्या समाधान होने पर उस ट्वीट को हटा दिया गया। जय श्री कृष्ण!
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आयोग ने ऊपर नोटिस में कहा है कि उन्हें अभी उच्च न्यायालय का आदेश नहीं मिला है। आदेश मिलने पर कार्यवाही होगी।
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क्या वायरल वीडियो झूठा है? आयोग ने कहा है कि उन्हें न्यायालय का आदेश प्राप्त नहीं हुआ है। वायरल वीडियो में स्पष्ट रूप से 5 विषय और 28 विषय की बात कही गई है। आयोग ने अपनी स्थिति स्पष्ट कर दी है कि जब तक उन्हें न्यायालय का आदेश प्राप्त नहीं होगा परीक्षा यथावत रहेगी।
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इलाहाबाद उच्च न्यायालय का निर्णय आ गया है। 28 विषयों की ओएमआर का मूल्यांकन नहीं होगा। ऐसी स्थिति में परीक्षा देने से क्या लाभ है? अतः आप सभी से निवेदन है कि आयोग के ट्विटर हैंडल पर जाकर आयोग से कहें कि 28 विषयों की परीक्षा को स्थगित करने की कृपा करे। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने आयोग को केवल दागी पाँच विषयों की ओएमआर का मूल्यांकन करने का आदेश दिया है। 28 विषयों के छात्रों को अनावश्यक परेशान किया जा रहा है। आयोग के ट्विटर हैंडल पर जाकर अपनी बात लिखिए कि जब हाईकोर्ट ने ही ओएमआर के मूल्यांकन से मना कर दिया है तो परीक्षा लेने का कोई औचित्य नहीं है।
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