असिस्टेंट प्रोफेसर परीक्षार्थी ग्रुप
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परीक्षा तिथियाँ घोषित हो चुकी हैं किंतु आप देख सकते हैं उसके बाद भी हम ट्वीट कर रहे हैं। सतर्क व्यक्ति की यही पहचान होती है। आपकी तरह नहीं कि इंटरव्यू के लिए कोई प्रयास नहीं किया और जब परीक्षा रद्द हो गई तो अपने-अपने कमरे से निकलकर आयोग पहुँच गए। अगर सभी परीक्षा परिणाम घोषित होने के बाद ही सरकार पर इंटरव्यू के लिए दबाव बनाते तो स्थिति कुछ और होती किंतु सब चुपचाप पड़े रहे और फेल छात्रों ने जगह-जगह ज्ञापन देकर यह बताने का प्रयास किया कि परीक्षा में धांधली हुई है। हमें पता है यहाँ पर लोग हमारी तरह नहीं हैं। अधिकांश स्वार्थी और अवसरवादी हैं। सही बात को लेकर हम आगे भी ट्वीट करते रहेंगे। भले ही कोई समर्थन करे, न करे।
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असिस्टेंट प्रोफेसर विज्ञापन संख्या 51 की परीक्षा में साक्षात्कार हेतु सफल घोषित होने के बाद एकबार फिर से परीक्षा की तैयारी करने की जिम्मेदारी सिर पर आ पड़ी है। कोई नहीं कह सकता है कि प्रश्न पत्र में क्या पूछा जाएगा। फिर भी सब कुछ समेट कर जाना पड़ेगा। समय बहुत बीत चुका है और परिस्थितियाँ पहले से अधिक कठिन हो गई हैं।
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हे भद्रमहापुरुष! क्या विचार कर रहे हो। तुम यह भली भाँति जानते हो कि प्रारब्ध से सब कुछ तय होता है। प्राणी केवल प्रतीक्षा कर सकता है। प्रतीक्षा का जो भी परिणाम हो मनुष्य को उसे स्वीकार करना पड़ता है। अपने भद्रमहापुरुष योग के चलते तुम भविष्य की घटनाओं से परिचित हो किंतु मानवीय स्वभाव के चलते व्यथित हो जाते हो। जो हुआ अच्छा हुआ यह विचार करके आने वाले समय का आनंद लेने के लिए तैयार हो जाओ। बहुत लंबा समय बीत चुका है। अब उसकी परिधि मात्र शेष है। 😊
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हमने आप लोगों से क्या कहा था कि जब सरकार ने ही परीक्षा को रद्द कर दिया है तो कोर्ट कभी उस परीक्षा को सही नहीं ठहरा सकती है क्योंकि कोर्ट कोई जाँच एजेंसी नहीं है किंतु उस समय कुछ लोग हमारा विरोध कर रहे थे। हम पहले इंटरव्यू का समर्थन इस आधार पर कर रहे थे क्योंकि इंटरव्यू की तारीख सरकार द्वारा घोषित की गई थी और जब सरकार ने ही भ्रष्टाचार के आधार पर परीक्षा को रद्द कर दिया तो हम किस आधार पर परीक्षा का समर्थन कर सकते थे भले हम उस परीक्षा में उत्तीर्ण थे और साक्षात्कार हेतु सफल घोषित हुए थे। हमने यह भी कहा था यहाँ किसी के माथे पर नहीं लिखा हुआ है कि कौन ईमानदार है और कौन जाने इंटरव्यू के लिए ज्यादा जोर लगाने वाले लाभ पा चुके हों ऐसी स्थिति में जो सरकार ने किया हमें उसी को सही मानना चाहिए। इसी आधार पर हमने सरकार के खिलाफ कोर्ट जाने का समर्थन नहीं किया था जिस पर एक लड़की भड़क गई थी और अपशब्द बोलने लगी थी। हम औरों की तरह न यूट्यूब पर वीडियो बनाते हैं न अनावश्यक पोस्ट लिखते हैं। जो भी होता है हमेशा सही बात लिखते हैं किंतु जब हमारी बातें आपके स्वार्थ से मेल नहीं खाती हैं तो आप हमारा विरोध करते हैं। अंततः हमारी बात सही हुई। आप लोग अनावश्यक कोर्ट गए। हमने उस समय अपने बहुत सारे वीडियो में आपसे यह बार-बार कहा था कि हमें इस केस में कोई ग्राउंड नहीं दिखाई पड़ती है। पता नहीं आप लोग किस आधार पर कोर्ट जा रहे हो और अगर कोर्ट गए हो तो कम से कम अपने वकील साहब से पूछ कर हमें ग्राउंड अवश्य बता दो। हमने यह भी कहा था कि इस मामले में हमने सुप्रीम कोर्ट के अनेक वकीलों से बात की है और उन्होंने भी कहा है कि इस मामले में कोई ग्राउंड नहीं है। फिर भी आप लोगों ने हमारी बात को नहीं माना। चलिए अब सामने परीक्षा है।
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जब हम अपने छात्रों को सिविल सेवा की तैयारी करवा रहे थे तो उनसे एक बात कहते थे कि असली पढ़ाई प्रवेश पत्र आने के बाद ही शुरू होती है। परीक्षा से पहले 10 दिन में पूरी पढ़ाई हो जाती है बशर्ते आपको तैयारी का एक अनुभव हो। चूँकि हमें तैयारी का एक लंबा अनुभव रहा है इसलिए हमने अपने पहले बैच में वर्ष 2018 में जिन 10 छात्रों को मार्गदर्शन दिया था उसमें से पाँच छात्रों ने अपने जीवन में पहली बार पीसीएस मेंस को लिखा जिनमें एक सौरभ पुलिस उपाधीक्षक पद हेतु चयनित हुआ।
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असिस्टेंट प्रोफेसर परीक्षा के संबंध में भी हमारा यही विचार है कि अभी बहुत समय है। अभी विज्ञापन संख्या 51 को निपट जाने देते हैं। विज्ञापन संख्या 52 में 1200 से ऊपर पद आएंगे। विज्ञापन संख्या 52 के लिए हम पूरी तैयारी करवाएंगे जिससे नौकरी के रूप में हमारे शिष्यों को जीवन का एक आधार मिल सके। उसी समय सिविल सेवा के लिए पुनः मार्गदर्शन प्रारंभ करेंगे।
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असिस्टेंट प्रोफेसर विज्ञापन संख्या 51 के संबंध में परीक्षा रद्द होने के बाद जो छात्र कोर्ट गए थे उन्होंने हमसे वार्ता करने का प्रयास किया था और हमने उनसे कहा था इस मामले में कोई ग्राउंड नहीं है किंतु उन्होंने हमारी बात को नहीं माना और अनावश्यक कोर्ट चले गए। जब आप हमसे बात करते हैं तो आपको हमारे अनुभवों से सीखना चाहिए। हम कोई बात ऐसे ही नहीं कहते हैं। जब हमने आपसे कहा था कि इस मामले में कोई ग्राउंड नहीं है तो आपको हमारी बात को मानना चाहिए था किंतु आपने ऐसा नहीं किया और परिणाम जैसा हमने बताया था कि हाईकोर्ट ने भी सरकार द्वारा परीक्षा रद्द करने को सही ठहराया।
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या तो अनुभवी व्यक्ति की सलाह मान लो या अपने जीवन को अनुभव अर्जित करने में खर्च कर दो। मर्जी आपकी है क्योंकि जीवन आपका है
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हमें पूरा पेपर साफ-साफ दिखाई पड़ रहा है। यह हमारा अनुभव है जो सालों बाद बनता है। जैसा विज्ञापन संख्या 46 में हमको लिखित परीक्षा में168 अंक प्राप्त हुए थे और इंटरव्यू में 27 अंक प्राप्त हुए थे किंतु उसके बाद भी चयन नहीं होना यह बताता है कि आयोग में भ्रष्टाचार की जड़ें बहुत पुरानी हैं अन्यथा हम 2016 में ही असिस्टेंट प्रोफेसर पद हेतु चयनित हो चुके थे अथवा उससे पहले वर्ष 2013 में जब हमने लोक सेवा आयोग में जीडीसी के लिए इंटरव्यू दिया था और एक लड़का जो आज शिक्षा सेवा चयन आयोग में अधिकारी बनकर बैठा हुआ है उसने हमसे कहा था कि वह खर्च करके चयनित हुआ है। वह चयनित तो हो गया किंतु क्या हमारे सामने खड़ा होकर हमसे बात करने की हैसियत रखता है। कदापि नहीं क्योंकि भ्रष्टाचारी व्यक्ति के भीतर आत्म बल नहीं होता है। पैसा तो आदमी भीख माँग कर भी कमा लेता है। बात योग्यता की है। हम पहले भी योग्य थे, हम आज भी योग्य हैं।
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बस मुहर लगना बाकी है सो लग जाएगी।
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एक यूट्यूब चैनल को देखा जो असिस्टेंट प्रोफेसर विज्ञापन संख्या 51 की तैयारी करवा रहा है। उसे देखकर कुछ अच्छा नहीं लगा। पता नहीं क्या पढ़ा रहा है। उसका बोलने का उच्चारण शुद्ध नहीं है जिससे एक मिनट के भीतर ही उलझन होने लगती है। ग्यारह को एकग्यारह बोलता है। वन लाइनर बोलकर घंटा भर का वीडियो बना देता है। हमें क्या? देखने वाले तो देख रहे हैं।
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उच्चतर शिक्षा सेवा चयन आयोग से जितनी भी परीक्षा हुई हैं सभी भ्रष्टाचार में लिप्त थीं जिसका प्रमाण है असिस्टेंट प्रोफेसर विज्ञापन संख्या 51 का पेपर बेचने में विज्ञापन संख्या 50 से चयनित दो असिस्टेंट प्रोफेसर संलिप्त थे।
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90 प्रश्न पर चयनित होना ही बता देता है कि पेपर बिक चुका है अन्यथा किसी भी विषय में चयनित होने के लिए 80 ±4 स्कोर पर्याप्त होता है। यह स्कोर सीटों की संख्या से अधिक प्रश्न पत्र की कठिनता पर भी निर्भर करता है।
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