असिस्टेंट प्रोफेसर परीक्षार्थी ग्रुप
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एक ऐसे वकील हैं जिनसे कुछ कहते हैं तो वह तुरंत कहते हैं आइए रिट किया जाए और दूसरे कुछ ऐसे वकील हैं जो कहते हैं अगर आपकी जगह कोई और आया होता तो हम केस कर देते लेकिन आपको सही बता रहे हैं इसमें कोई मामला नहीं बनता है।
तो दुनिया में हर प्रकार के लोग हैं। अच्छे लोग न होते तो प्रलय हो गई होती।
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परीक्षा रद्द होना निश्चित रूप से दुर्भाग्यपूर्ण है क्योंकि फिर से परीक्षा पास करने की कोई गारंटी नहीं होती है लेकिन एक बात मानकर चलिए जिनका भाग्य अच्छा चल रहा है यह परीक्षा उनके लिए ही बची है क्योंकि इस परीक्षा में पिछले विज्ञापनों की तरह महबूब अली गैंग कम कर गया है। अभी जो इंटरव्यू के लिए तड़प रहे हैं जब फाइनल रिजल्ट आता तब उन्हें पता चलता है यह क्या हो गया। यह तो अच्छी बात है कि सरकार ने स्वयं भ्रष्टाचार को स्वीकार किया, परीक्षा को रद्द किया और जब तक परीक्षा रद्द नहीं हुई थी हम इंटरव्यू का पुरजोर समर्थन कर रहे थे और परीक्षा रद्द होने के बाद भी कुछ दिनों तक हमने बहुत ट्वीट किए थे कि इंटरव्यू हर सूरत में लिए जाएँ।
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अब सोचते हैं तो अच्छा लगता है क्योंकि इंटरव्यू होने का सीधा अर्थ था महबूब अली गैंग का फायदा होना। हर किसी की समझ का अपना स्तर होता है तो जरूरी नहीं है कि आपको हमारी बातें समझ में आएँ।
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हमारी बात याद रखना, विज्ञापन संख्या 51 न भूतो न भविष्यति है
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और अब तो सुप्रीम कोर्ट का भी जजमेंट आ गया कि 4 महीने में भर्ती पूरी की जाए। अगर शिक्षा आयोग चार महीने में भर्ती पूरी नहीं करता है तो फिर सुप्रीम कोर्ट में देखा जाएगा। सुप्रीम कोर्ट में वकीलों की पूरी फौज हमारे साथ है।
ईमानदार मेहनती निष्कपट लोगों का सदैव स्वागत है।
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सुप्रीम कोर्ट में जो वकील आपसे केस का दस लाख लेंगे हम उन्हीं से मात्र दस हजार में केस करवा देंगें और यह दस हजार भी हम स्वयं देंगे।
किसी से माँगेंगे नहीं। दस हजार भी इसलिए दिया जाएगा क्योंकि मुफ्त में काम कराना अच्छा नहीं लगता है।
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बीते 4 महीने बहुत याद आते हैं😊
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भ्रष्टाचार एक रोग है। हम इस रोग से पीड़ित हुए हैं और इसने आपको भी अपनी चपेट में ले लिया। अच्छा हुआ कम से कम आप दूसरों का दर्द तो समझेंगे। जब कोई आपसे कहेगा कि भ्रष्टाचार के चलते नौकरी लगने में इतना समय हो गया। अगर बहुत जल्दी नौकरी लग जाती है तो व्यक्ति किसी की पीड़ा को नहीं समझता है। चोट जरूरी होती है। चोट व्यक्ति को वास्तविक अर्थ में मनुष्य बनाती है।
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वाह!
वोट देखकर लग रहा है कैसे लोग चैनल से जुड़े हुए हैं। इनके अनुसार अध्यक्ष को आयोग को समझने में साल भर लेना सामान्य बात है।
तो किसी समझदार व्यक्ति को अध्यक्ष बनाना चाहिए था जो आते ही फटाफट परीक्षा कैलेंडर जारी कर देता। इंटरव्यू करवा लेता या परीक्षा तिथि देकर फिर से परीक्षा को करा लेता।
इन लोगों के विचार में तमिल भाषा की पुस्तक खरीद लेनी चाहिए और उसके बाद तमिल भाषा सीखनी चाहिए वाह
जो भाषा आती है उसकी पुस्तक खरीदने में कोई ऐतराज है क्या?
तो जिस विभाग के काम आते नहीं है उस विभाग में आने की जरूरत क्या है?