कमीन आदमी की निशानी होती है कि वह आपके विचारों के स्तर को नीचे गिरा देता है। अब दीपाली यादव है या दीपक यादव है कुछ पता नहीं है। प्रोफाइल में कोई फोटो नहीं है और हमारी रियल आईडी से बात कर रही है। ऐसे लोगों से कुछ कहना अपना टाइम वेस्ट करना है।तो अब इसको ब्लॉक करना ही पड़ेगा अन्यथा ऐसे लोग ब्लॉक करने लायक भी नहीं होते हैं। अन्य जो लोग जिन्हें हमारे विचार पसंद नहीं है तो अपना कहीं अलग जाकर तंबू लगाए। हमें आपसे कोई लेना-देना नहीं है।
आयोग की आगामी बैठक में असिस्टेंट प्रोफेसर विज्ञापन संख्या 51 की परीक्षा तिथि देखने को मिल सकती है। जो भी ईमानदार मेहनती छात्र हैं केवल वही हमसे जुड़ें।
बाकी सब प्रस्थान करें। तत्काल
बाकी सब प्रस्थान करें। तत्काल
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शुचितापूर्ण परीक्षा में अभी जो कम कटऑफ गया है उसी के आसपास अंतिम चयन भी होगा
किंतु महबूब अली के करिंदों के रहते अगर इंटरव्यू हुआ रहता तो अंतिम परिणाम में आपको वही 85+ वाले सभी विषयों में दिखाई पड़ते।
इसलिए जो हुआ बहुत अच्छा हुआ है। 😊
किंतु महबूब अली के करिंदों के रहते अगर इंटरव्यू हुआ रहता तो अंतिम परिणाम में आपको वही 85+ वाले सभी विषयों में दिखाई पड़ते।
इसलिए जो हुआ बहुत अच्छा हुआ है। 😊
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दीपक यादव के समर्थक यहाँ से चले जाएँ। यहाँ उनका कोई काम नहीं है। कृपया इस चैनल को छोड़ दें।
जितने लोग चंदा करके हाईकोर्ट में इंटरव्यू कराने गए हैं वह सभी फटाफट सुप्रीम कोर्ट पहुँचें और इस भर्ती को 4 महीने में पूरा करा लें वही उचित है क्योंकि जब परीक्षा की शुचिता भंग हो चुकी है तो हमें नहीं पता कि आप में से कौन महबूब अली से पेपर पाया हुआ है। एक घर में रहकर पता नहीं चलता है व्यक्ति क्या कर रहा है और यहाँ सब एक दूसरे की ईमानदारी के ठेकेदार बन रहे हैं कि नहीं वह ईमानदार है उसने पेपर नहीं लिया है। अरे वही पेपर पाया हुआ है। वह तुम्हारी सीट और नौकरी भी खा जाएगा इसलिए इंटरव्यू का समर्थन छोड़िए और फटाफट सुप्रीम कोर्ट में जाकर 4 महीने में इस परीक्षा को पूरा करवाने की याचिका कर दीजिए।
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सुप्रीम कोर्ट का आदेश सरकार पर बाध्यकारी होता है। अब देखना शिक्षा आयोग कैसे घोड़े की तरह भागेगा।
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केवल ईमानदार और मेहनती छात्र हमारे चैनल से जुड़ें। महबूब अली गैंग के समर्थक फरार हो जाएँ।
हम मानते हैं परीक्षा रद्द करना सरकार का गलत निर्णय था किंतु जब परीक्षा में सेंधमारी हो चुकी है तो इसे एक दुर्घटना समझकर स्वीकार करना मजबूरी हो जाती है।
हम मानते हैं परीक्षा रद्द करना सरकार का गलत निर्णय था किंतु जब परीक्षा में सेंधमारी हो चुकी है तो इसे एक दुर्घटना समझकर स्वीकार करना मजबूरी हो जाती है।
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बाकी आपको पता नहीं है कि जब आप चंदा दे चुके हैं तो वहाँ आधा आधा बँट गया है और सब मजे करेंगे क्योंकि हमें पता है इस मैटर में कुछ नहीं हो सकता है और जबकि सुप्रीम कोर्ट का निर्णय आ चुका है सभी को एक याचिका सुप्रीम कोर्ट में कर देनी चाहिए जिससे सभी शिक्षक भर्ती असिस्टेंट प्रोफेसर टीजीटी पीजीटी 4 महीने में पूरी हो सके। यह सभी का हित है। आगे जैसा आपको उचित लगे करिए।
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व्यक्ति जैसा होता है उसकी संगति में वैसे ही लोग होते हैं। हम अच्छे हैं इसलिए बुरे लोगों से हमारा तालमेल नहीं बैठता है। जन्मकुंडली से हम
भद्रमहापुरुष हैं इसलिए धूर्त लोग हमें पसंद नहीं आते हैं।
एक अच्छा चिकित्सक रोग का ही इलाज करता है और रोग के सामान्य होने पर कह देता है कुछ दिनों में सही हो जाओगे। दूसरी ओर जो लालची होता है वह कोई बीमारी न होते हुए भी दवाई लिखेगा, जाँच लिखेगा और हजारों रुपए खर्च करवा देगा।
इसलिए हमने पहले कहा था कि सुप्रीम कोर्ट में हम बिना किसी से एक रुपया लिए केस करेंगे।
तो जैसा ऊपर कहा कि अच्छे लोगों की संगति में अच्छे लोग ही रहते हैं
तो उन वकीलों ने हमें बताया कि इस केस का कोई ग्राउंड नहीं है जबकि अन्य कोई ग्राउंड न होने पर भी दूसरे चिकित्सक की तरह व्यवहार करते हैं।
हाई कोर्ट से इस केस में कुछ नहीं होने वाला है क्योंकि सरकार ने ही भ्रष्टाचार को स्वीकार कर लिया है।
ऐसी स्थिति में इंटरव्यू का कोई अर्थ नहीं है क्योंकि आप नहीं जानते हैं पेपर कितने स्तर पर बेचा गया है।
जय श्री कृष्ण!
भद्रमहापुरुष हैं इसलिए धूर्त लोग हमें पसंद नहीं आते हैं।
एक अच्छा चिकित्सक रोग का ही इलाज करता है और रोग के सामान्य होने पर कह देता है कुछ दिनों में सही हो जाओगे। दूसरी ओर जो लालची होता है वह कोई बीमारी न होते हुए भी दवाई लिखेगा, जाँच लिखेगा और हजारों रुपए खर्च करवा देगा।
इसलिए हमने पहले कहा था कि सुप्रीम कोर्ट में हम बिना किसी से एक रुपया लिए केस करेंगे।
तो जैसा ऊपर कहा कि अच्छे लोगों की संगति में अच्छे लोग ही रहते हैं
तो उन वकीलों ने हमें बताया कि इस केस का कोई ग्राउंड नहीं है जबकि अन्य कोई ग्राउंड न होने पर भी दूसरे चिकित्सक की तरह व्यवहार करते हैं।
हाई कोर्ट से इस केस में कुछ नहीं होने वाला है क्योंकि सरकार ने ही भ्रष्टाचार को स्वीकार कर लिया है।
ऐसी स्थिति में इंटरव्यू का कोई अर्थ नहीं है क्योंकि आप नहीं जानते हैं पेपर कितने स्तर पर बेचा गया है।
जय श्री कृष्ण!
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एक ऐसे वकील हैं जिनसे कुछ कहते हैं तो वह तुरंत कहते हैं आइए रिट किया जाए और दूसरे कुछ ऐसे वकील हैं जो कहते हैं अगर आपकी जगह कोई और आया होता तो हम केस कर देते लेकिन आपको सही बता रहे हैं इसमें कोई मामला नहीं बनता है।
तो दुनिया में हर प्रकार के लोग हैं। अच्छे लोग न होते तो प्रलय हो गई होती।
तो दुनिया में हर प्रकार के लोग हैं। अच्छे लोग न होते तो प्रलय हो गई होती।
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