असिस्टेंट प्रोफेसर परीक्षार्थी ग्रुप
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चोट बहुत जरूरी होती है... दिमाग जमीन पर रहता है और तेवर नरम पड़ते हैं।
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कोर्ट में याचिका पर देखिए कोर्ट सरकार को समयबद्ध इंटरव्यू कराने का आदेश पारित कर दे। जाँच एजेंसी सरकार की है तो बजाय दोषियों को दंडित करने के कैसे उसने 9 महीने बाद पूरी परीक्षा को रद्द कर दिया।
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फिर से तैयारी करना बड़ा मुश्किल है विशेषकर उनके लिए जिनका इंटरव्यू कॉल हुआ है। उनका मानसिक स्वास्थ्य बिगड़ चुका है। हाथ में आई हुई सफलता निकल जाए और कोई कहे फिर से परीक्षा दो। मुहबूब अली के कुकर्म की सजा मेहनती छात्र क्यों भुगते।
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योगी बाबा नें बहुत गलत किया है।
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बीजेपी छीनने वाली पार्टी है। ये कुछ देते नहीं हैं। बस धर्म का नशा चढ़ा हुआ है।
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शिक्षा आयोग होता तब न कोई भर्ती होती। यह तो योगी का सिक्सा आयोग है।
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वह जो नौकरी कर रहे थे उनसे टेट पास करने के लिए कह दिया गया तो आंदोलन छिड़ गया और यहाँ जो इंटरव्यू के लिए पास हुए हैं उनसे कह दिया गया है कि फिर से परीक्षा दो।
यह सरकार नौकरी नहीं देना चाहती और सरकार की इसी मंशा पर आयोग काम करता है इसलिए टीजीटी पीजीटी की तिथि घोषित होती रही किंतु परीक्षा नहीं हुई और छात्रों को परीक्षा तिथि देकर शांत कर दिया गया। असिस्टेंट प्रोफेसर की जो परीक्षा गलती से करा ली गई थी उसे भी रद्द कर दिया गया। सरकार रोजगार देना चाहती तो यह तीनों परीक्षाएं कब का हो चुकी होती।
रिटायर को अध्यक्ष बना दिया गया है उससे समझ लीजिए कि सरकार शिक्षा आयोग को लेकर कितनी गंभीर है। जब आपको अपने पसंद का व्यक्ति ही अध्यक्ष बनाना था तो विज्ञापन निकालकर समय निकालने की क्या आवश्यकता थी? 25 सितंबर को ही उनको आयोग में भेज दिया जाता और अगले दो महीना में पिछले साल ही असिस्टेंट प्रोफेसर की परीक्षा फिर से कर ली जाती। कहने का अर्थ है कि सरकार अपने हितों को तो देख रही है किंतु छात्रों के हितों से उसे कोई मतलब नहीं है। परीक्षा को रद्द भी किया गया है तो 9 महीने बाद और उसके बाद भी अध्यक्ष कहते हैं कि जादू की छड़ी नहीं है कि तुरंत परीक्षा कर लेंगे तो जिसके पास जादू की छड़ी है उसे अध्यक्ष बनने देते। अध्यक्ष की नियुक्ति ही सिफारिश से हो रही है तो संस्था ईमानदारी से कार्य करेगी या सरकार के इशारों पर चलेगी?
मेधावी छात्र किन परिस्थितियों में अपना जीवन जी रहा है इससे सरकार को और आयोग को कोई मतलब नहीं है।
सभी का यह कर्तव्य होना चाहिए कि परीक्षा यथाशीघ्र संपन्न हो जाए और नियुक्ति मिल जाए किंतु यहाँ छात्र आपस में ही एक दूसरे का खून पीने पर उतारू है