aspirant.advt51@gmail.com
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असिस्टेंट प्रोफेसर परीक्षार्थी ग्रुप
https://youtu.be/JvgKRQ-Ys0o?si=xBh334P-Evkub8kJ
साक्षात्कार हेतु मार्गदर्शन प्राप्त करने के इच्छुक सभी छात्र इस वीडियो को अवश्य देखें। वीडियो देखने के पश्चात ही अपना एडमिट कार्ड भेजने के विषय में निर्णय करें।
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mail is not working properly so please wait for next message or not send any mail until i dont say to send you.
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एक CO नें मैसेज किया है
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परीक्षा रद्द होने का कोई आधार तो नहीं बनता है फिर सरकार किस आधार पर परीक्षा को रद्द कर सकती है?
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जब सरकार स्वयं निगरानी समिति के माध्यम से जाँच करा चुकी है तो फिर कौन सी जाँच समिति परीक्षा रद्द करने की सिफारिश कर सकती है?
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इलाहाबाद हाईकोर्ट में एक रिट होनी चाहिए क्योंकि इस परीक्षा को रद्द करने का यह कोई वैध आधार नहीं है कि सरकार जब चाहेगी परीक्षा रद्द कर देगी। जब शासन निगरानी समिति के माध्यम से पहले ही सारा कार्य कर चुका है फिर कौन सी निगरानी समिति बनी है जिसने परीक्षा को ही रद्द कर दिया जबकि पहले निगरानी समिति भी योगी जी द्वारा बनाई गई थी। इलाहाबाद हाईकोर्ट में रिट होनी चाहिए। आप लोग आपसी सहमति बनाइए।
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हाई कोर्ट में आकर सरकार कम से कम जवाब तो देगी कि उसने ऐसा क्यों किया? क्या पहले निगरानी समिति किसी विदेशी सरकार ने बनाई थी जो नई निगरानी समिति बनाकर परीक्षा को रद्द कर दिया गया? पहली निगरानी समिति ने क्या कार्य किया था?
अगर आप लोग इलाहाबाद हाईकोर्ट में याचिका करते हैं और वहाँ जो भी परिणाम निकलता है उसके बाद सुप्रीम कोर्ट की जिम्मेदारी हमारे ऊपर छोड़ सकते हैं। हम आपसे बिना कोई फीस लिए सुप्रीम कोर्ट में इस केस को हैंडल करेंगे बशर्ते आप लोग इलाहाबाद हाईकोर्ट में इस केस को करें।
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याद रखिए इस आयोग से याचना करके नौकरी नहीं मिलने वाली है। इन्होंने छात्रों के साढ़े साल निकाल दिए और फिर जो एक परीक्षा ली गई थी उसे भी रद्द कर दिया।
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सुप्रीम कोर्ट के सरकारी वकील से बात हुई है उन्होंने कुछ बातें बताई हैं जिसमें सबसे बड़ा आधार सरकार द्वारा निगरानी समिति गठित करना है जिसका प्रूफ न्यूज पेपर में छपा था और उसको हम अभी आपको दे रहे हैं। उसमें स्पष्ट लिखा गया है कि आयोग में अध्यक्ष सचिव परीक्षा नियंत्रक होने के बाद भी सरकार को क्यों सहयोग करना पड़ रहा है। जब पूरा मूल्यांकन कार्य निगरानी समिति की देखरेख में संपन्न हुआ है तो अब किस आधार पर परीक्षा को रद्द कर दिया गया। किंतु जो महत्वपूर्ण बात है वह दो या चार लड़कों के हाईकोर्ट जाने से काम नहीं बनेगा। इसमें सभी को आगे आना होगा। न्यूनतम 200 कैंडिडेट अगर याचिका नहीं करते हैं तो याचिका कमजोर पड़ जाएगी। भीड़ को सुना जाता है यह हमने अपने अनेक वीडियो में कहा है। जब तक भीड़ हाईकोर्ट नहीं जाएगी याचिका कमजोर रहेगी।
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जैसा हमने पहले कहा है कि आप लोग हाईकोर्ट में जाइए। सुप्रीम कोर्ट की जिम्मेदारी हमारे ऊपर छोड़ दीजिए। हम आपसे बिना एक पैसा दिए सुप्रीम कोर्ट में इस केस को कर देंगे। हाई कोर्ट में कोई मेहनत नहीं है इलाहाबाद में एक अच्छे वकील से मिलकर बात कर लीजिए। सरकार ने एक सेकंड में आपको फेल छात्रों के बराबर लाकर खड़ा कर दिया है। हमने एक वीडियो में कहा था कि अगर आयोग नहीं जाओगे तो परीक्षा देने इलाहाबाद तो जाना पड़ेगा। तब तो घर से बाहर निकलोगे। अब एकजुट होकर इलाहाबाद हाई कोर्ट का रास्ता पकड़िए क्योंकि यह सरकार की मनमर्जी है। जब सरकार ने निगरानी समिति की देखरेख में परीक्षा परिणाम को घोषित करवाया है तो वह उस परीक्षा परिणाम को कैसे रद्द कर सकती है। आप सभी एक दूसरे से संपर्क करिए और एक समूह में इलाहाबाद हाईकोर्ट में याचिका कर दीजिए इलाहाबाद हाईकोर्ट का जो भी परिणाम रहेगा उसके आगे सुप्रीम कोर्ट में इस मामले को हम देख लेंगे। लोग सुप्रीम कोर्ट के वकील की फीस से डरते हैं क्योंकि यहाँ वकीलों की फीस लाखों में होती है। उसकी आप चिंता मत करिए जो भी होगा सुप्रीम कोर्ट में हम करेंगे।
साक्षात्कार की कॉल बड़ी मुश्किल से मिलती है किंतु बड़े अफसोस की बात है कि परीक्षा में पास हुए छात्रों ने इसके महत्व को नहीं समझा और फेल छात्रों को ऊधम काटने की अनुमति दे दी। हमने अपने वीडियो में कहा है कि भीड़ की सुनी जाती है अकेले की कोई नहीं सुनता। फेल गैंग भीड़ लेकर आयोग जाता रहा और पास हुए छात्र चुपचाप बैठकर तमाशा देखते रहे।