पूरा वीडियो देखें और फिर बताएँ आप रंगमच के पात्र हैं या दर्शक मात्र हैं।
जय श्री कृष्ण!
जय श्री कृष्ण!
असिस्टेंट प्रोफेसर परीक्षा सभी विषयों में अनुमानित कट ऑफ हेतु आपके सही प्रश्नों की संख्या है?
Anonymous Poll
16%
57 से 59
15%
60 से 62
14%
63 से 65
19%
66 से 68
35%
69 से 71
मेरा कहना है कि चिंतन करिए लोगों को जाते हुए मत देखिए कहीं एकांत में बैठकर प्रकृति को निहारिए लोगों को केवल जाते हुए मत देखिए उन्हें लौटते हुए भी देखिए आप पाएंगे की चीज जहां से शुरू होती हैं वहीं पहुंच जाती हैं हम शोभा बिस्तर से उठते हैं किंतु कुछ घंटे के बाद हम पुनः इस बिस्तर पर सोने के लिए पहुंच जाते हैं जीवन जो बचपन से शुरू होता है वृद्धावस्था में पुनः बच्चे जैसे लक्षण उत्पन्न हो जाते हैं हमारा शरीर हमारे शरीर की संरचना स्वयं लौटने का प्रतीक है हमारे द्वारा ग्रहण किया गया भजन माल रूप में बाहर निकलता है और जब आप उसे फ्लैश करने के बाद उठाते हैं और फ्लैश करने का अर्थ होता है कि आपने उसे पूरी तरह से त्याग दिया किंतु आप देखते हैं की आप कुछ घंटे बाद पुनः इस क्रिया को कर रहे होते हैं चिंतन करने पर आप चीजों के वास्तविक स्वरूप से परिचित होते हैं जीवन शरीर से जुड़ी हुई प्रक्रिया नहीं है जीवन सृष्टि का एक अंग है और यह शरीर के माध्यम से दिखाई पड़ता है किंतु यह केवल मानव शरीर में नहीं है यह अनेक रूपों में देखने को मिलता है जीवन एक ऊर्जा है और यह सतत चलती है मानव शरीर में हमारे कुछ उद्देश्य होते हैं जिनके लिए हम साधनों की खोज करते हैं और उन साधनों के माध्यम से हम उद्देश्य प्राप्ति का प्रयास करते हैं चिंतन करने पर आप पाएंगे की साधनों के माध्यम से भी कभी उद्देश्य नहीं मिलते और कभी बिना साधन के भी उद्देश्य प्राप्ति होती है कभी-कभी तो साधनों को छोड़कर ही उद्देश्य प्राप्ति होती है तो चिंतन आवश्यक है वस्तुओं के मौलिक स्वरूप को जानने के लिए चिंतन ही एकमात्र साधन है स्वयं के बारे में चिंतन दूसरों के बारे में चिंतन उनसे अपने संबंधों के बारे में चिंतन
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