असिस्टेंट प्रोफेसर परीक्षार्थी ग्रुप
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★जब सरकार रुपया 2000 फीस ले रही है और बदले में कुछ नहीं दे रही है केवल फॉर्म भरना है और हम अपने अनुभव की कोई फीस न लें यह बहुत गलत होगा।
★फीस ₹500 रहेगी ताकि अधिकतम छात्र परामर्श ले सकें।
★फीस रखना एक मजबूरी भी है ताकि अनावश्यक लोगों से वार्ता में समय नष्ट न किया जाए और केवल गंभीर छात्र ही जुड़ें।
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फॉर्म भरने में अभी जल्दबाजी मत करिए।
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पहले अमावस को बीतने दीजिए।
उसके बाद ही कुछ अच्छा काम करिएगा।
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11 सितम्बर को अमावस्या है। यह चीजें बहुत महत्व रखती हैं।
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असिस्टेंट प्रोफेसर विज्ञापन संख्या 52 के संबंध में एक फेसबुक ग्रुप बनाया गया है। अनावश्यक लोगों को ग्रुप से दूर रखने के उद्देश्य से फीस रुपया 1000 निर्धारित की गई है जिससे केवल गंभीर छात्र ग्रुप से जुड़ सकें। रेल में कोई स्लीपर में सफर करता है तो कोई एसी सेकंड क्लास में करता है तो कोई एसी फर्स्ट क्लास में करता है। सेकंड क्लास और फर्स्ट क्लास में ज्यादा अंतर नहीं होता है। सेकंड क्लास में परदे लगे होते हैं और फर्स्ट क्लास में एक अलग कोच होता है जिसमें आप दरवाजा बंद कर सकते हैं। तो सभी की अपनी-अपनी सोच होती है। जिन्हें फीस अनावश्यक लगती है वह हमारे ग्रुप से दूर रहेंगे क्योंकि मुफ्त का तमाशा देखने के लिए भीड़ इकट्ठा हो जाती है जिससे गंभीर छात्रों का बहुत नुकसान होता है। फालतू लोग ग्रुप से दूर रहें इसलिए फीस लेना मजबूरी हो जाती है।
इच्छुक छात्र जो हमारे फेसबुक ग्रुप से जुड़ना चाहते हैं नीचे दिए गए क्यूआर कोड पर फीस भेजकर ग्रुप से जुड़ने के लिए रिक्वेस्ट भेज सकते हैं।
ग्रुप का लिंक नीचे दिया गया है।
जय श्री कृष्ण!
नोट - सरकार तो केवल फॉर्म भरवाने के लिए ₹2000 फीस ले रही है जबकि मैं तो डॉक्टरेट उपाधि धारक हूँ तो मैं अपनी बहुमूल्य सलाह की फीस क्यों नहीं लूँगा?
★मैंने उत्तर प्रदेश पीसीएस का पाँच बार मेंस लिखा है
★ मैंने उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग में वर्ष 2013 में राजकीय डिग्री कॉलेज में असिस्टेंट प्रोफेसर पद हेतु मात्र एक सीट के सापेक्ष हजारों छात्रों में लिखित परीक्षा उत्तीर्ण करके इंटरव्यू दिया था। मेरा इंटरव्यू बहुत अच्छा हुआ था। इंटरव्यू के लिए केवल तीन छात्र बुलाए गए थे उनमें से एक छात्र इंटरव्यू के बाद रोते हुए मुझसे बोला था कि वह इंटरव्यू में कुछ बता नहीं पाया इसलिए चयन आपका ही होगा। उसी शाम को घोषित रिजल्ट में उसी धूर्त का नाम था। जब मैंने लोक सेवा आयोग से अपने इंटरव्यू के मार्क्स की जानकारी आरटीआई के माध्यम से माँगी तो लोक सेवा आयोग ने नंबर दिखाने से मना कर दिया। मैंने फिर दूसरी आरटीआई भेजी किंतु आयोग ने तब भी मार्क्स नहीं दिखाया।
फिर एक दिन उस धूर्त का फोन आया और उसने मुझसे कहा कि आरटीआई लगाने से कुछ नहीं होता है चयन के लिए खर्चा करना पड़ता है और आज वह धूर्त उपसचिव बनकर बैठा हुआ है।
★मैंने विज्ञापन संख्या 46 में भी इंटरव्यू दिया था जिसमें लिखित परीक्षा में मेरे 84 प्रश्न ठीक थे और मुझे इंटरव्यू में अधिकतम 27/30 मार्क्स मिले थे किंतु भ्रष्टाचार के चलते कहानी कुछ और हो गई।
तो जो मूर्ख यह पूछते हैं क्या करते हो उन मूर्खों को बता दें कि हमारी योग्यता में कोई कमी नहीं है। हम तो भ्रष्टाचार के शिकार हुए हैं।
★हमारे पास ज्ञान है अनुभव है जो हम दूसरों को दे सकते हैं। जो भ्रष्टाचार से चयनित होते हैं वह उस बंजर जमीन की तरह होते हैं जिनके पास दूसरों को देने के लिए कुछ नहीं होता है।
हमारे पढ़ाए हुए छात्र आज उत्तर प्रदेश पुलिस में डीएसपी की वर्दी पहन कर घूम रहे हैं और यह हमारे लिए बड़े गौरव की बात है।
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फीस भेजने के बाद उसका स्क्रीनशॉट नीचे दिए गए मेल पर भेज दें जिससे आपको फेसबुक ग्रुप से जोड़ा जा सके।
advt52aspirant@gmail.com
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क्यू आर कोड को स्कैन करके फीस ₹1000/- भेजें और उसका स्क्रीनशॉट advt52aspirant@gmail.com पर भेज दें। उसके पश्चात् ही परामर्श देना संभव हो सकेगा।
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कृपया इस तथ्य को समझें कि मुफ्त का तमाशा देखने के लिए भीड़ इकट्ठा हो जाती है किंतु जैसे ही फीस ली जाती है तमाशबीन भागने लगते हैं।

★मैं, डॉ. सुनील
लखनऊ विश्वविद्यालय (कैंपस) से

बी. ए. (प्रथम श्रेणी),

एम. ए. (प्रथम श्रेणी एवं टॉपर)

और डॉक्टरेट उपाधि धारक हूँ।

★ यूजीसी नेट परीक्षा उत्तीर्ण हूँ।

★पाँच बार पीसीएस मेंस लिखा हूँ।

★दो बार असिस्टेंट प्रोफेसर का इंटरव्यू दिया हूँ।

★विज्ञापन संख्या 51 में भी इंटरव्यू के लिए क्वालीफाई किया हूँ।


मैं कोई तमाशा नहीं दिखा रहा हूँ।
मेरे समय की बहुत कीमत है।
आपसे फीस लेकर मैं आपको भीड़ से अलग कर रहा हूँ और अगर इतनी छोटी सी बात आपकी समझ में नहीं आती है तो आप परामर्श के पात्र भी नहीं हैं।

ध्यान रहे एक सही सलाह पूरे जीवन को बदल देती है और फिर यह तो परीक्षा है जिसके ऊपर आपका पूरा जीवन टिका हुआ है।

जय श्री कृष्ण!
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बहुत संभव है हमारी तरह आपमें से कुछ पीएचडी के साथ नेट क्वालीफाई होंगे किंतु एक चीज जो हमारे भीतर है वह अद्भुत संयोग अत्यंत दुर्लभ है और वह है जहाँ एक ओर हम पीएचडी हैं तो दूसरी ओर धुरंधर बॉक्सर भी हैं जिसका प्रमाण हमने नीचे दिया हुआ है। और एक बात डिस्ट्रिक्ट लेवल पर हमने स्वर्ण पदक जीता था और यह हमने जूनियर वर्ग में होते हुए सीनियर लेवल पर खेलकर जीता था अर्थात अगर हमने जूनियर लेवल पर राज्य स्तरीय बॉक्सिंग खेली होती तो हमने उसमें भी गोल्ड मेडल जीता होता। बॉक्सिंग और पीएचडी नेट का एक साथ अद्भुत संयोग अत्यंत दुर्लभ है।
नोट - यह बात हमने उनके लिए लिखी है जो मेल पर हमारे बारे में जानना चाहते हैं।
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इस जाहिल आदमी के कमेंट पढ़िए। पता नहीं किस गंदी नाली की पैदाइश है। हमारे वीडियो से इसे पता नहीं क्या परेशानी हो रही है। ऐसे ही दुष्ट लोगों की वजह से फीस लेनी पड़ती है। ये जाहिल हमें बताएगा कि हमें क्या करना चाहिए और क्या नहीं करना चाहिए। स्क्रीनशॉट ले लिया है लेकिन ऐसे जाहिल बात करने लायक नहीं होते हैं। इनसे बात करना ही इन्हें महत्व देना है।
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जाहिल कभी फर्स्ट क्लास में यात्रा किया हो तब तो जानेगा फर्स्ट क्लास की जेंट्री कैसी होती है। ठीक है अन्य क्लास में भी अच्छे लोग यात्रा करते हैं लेकिन अनावश्यक गंदे कमेंट करना आदमी की नीचता की निशानी है। न कोई परिचय न पहचान फिर भी हमसे कुढ़ रहा है। न पढ़ाई का कोई मेल न स्तर का कोई मेल फिर भी अभद्रता कर रहा है। ऐसे ही लोग बलात्कार करते हैं और बाद में पुलिस इनकी टाँग में गोली मारकर इनके लंगड़ाते हुए वीडियो डालती है। नाम है अभिषेक। अभिषेक नहीं यह समाज के अभिशाप है।
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हमें आपकी फीस मिल चुकी है।
हाँ और एक बात, अगर फीस भेजने के बाद आपको ऐसा प्रतीत होता है कि फीस देकर आपने गलती कर दी है और आप अपनी फीस वापस चाहते हैं तो आप मेल कर सकते हैं। आपकी फीस तत्काल आपके अकाउंट में वापस कर दी जाएगी। यह लिखने का उद्देश्य मात्र इतना है कि सोशल मीडिया पर हम कोई ठगी करने नहीं बैठे हैं। ठगी तो सरकार कर रही है जिसने विज्ञापन संख्या 51 का निस्तारण किए बिना विज्ञापन संख्या 52 जारी कर दिया है जबकि सरकार को चाहिए था कि पहले विज्ञापन संख्या 51 का निस्तारण करती जिससे विज्ञापन संख्या 51 के सफल छात्र विज्ञापन संख्या 52 में आवेदन नहीं करते। इससे एक ओर छात्रों के रुपए की बचत होती तो दूसरी ओर विज्ञापन 52 में प्रतियोगिता का स्तर भी थोड़ा सरल हो जाता।
अब मूल बात पर आते हैं कि समय बहुत कीमती होता है और यूट्यूब पर वीडियो बनाना, टेलीग्राम पर परामर्श देना, व्हाट्सएप पर परामर्श देना या मोबाइल पर फोन करके बात करना इन सारी चीजों में बहुत समय बर्बाद होता है इसलिए हमने फेसबुक ग्रुप बनाया है। भले आप फेसबुक पर कम सक्रिय हैं फिर भी हमारा आपसे कहना है कि अपनी असली नाम से अपनी फेसबुक आईडी अवश्य बनाइए और ऊपर दिए गए फेसबुक ग्रुप के लिंक पर जाकर हमें फेसबुक ग्रुप पर रिक्वेस्ट भेज दीजिए। फेसबुक ग्रुप पर हम जो बातें लिखेंगे वह बहुत महत्वपूर्ण होंगी और जब लिखेंगे तब आपको हमारी एक-एक बात एक-एक लाख रुपए की प्रतीत होगी। उसके बाद भी अगर आपको लगता है कि फीस देकर गलती कर दी है तब भी आप मेल कर देना, आपकी फीस वापस कर दी जाएगी। फीस लेने का हमारा प्राथमिक उद्देश्य केवल भीड़ को रोकना है यानी आपको भीड़ से अलग करना है ताकि जो भी व्यक्ति संपर्क में आए वह गंभीर प्रकृति का हो। जाहिलपन से जिंदगी नहीं चलती है। हाँ! जिंदगी बर्बाद अवश्य होती है। जैसे अभिषेक राज ने यूट्यूब पर अभद्र कमेंट किया उनका कोई औचित्य नहीं था। असिस्टेंट प्रोफेसर के प्रतियोगी छात्र के पास इतना समय हो सकता है कि वह ऐसे अभद्र और गंदे कमेंट करेगा देखकर आश्चर्य होता है। जब कोई व्यक्ति अपने कुसंस्कार का परिचय देता है तो उससे उसके घर और गुरुजनों की स्थिति पता चल जाती है कि उस व्यक्ति को जीवन में अच्छे गुरुजन नहीं मिले और न उसने एक अच्छे घर में जन्म लिया है। ऐसे व्यक्ति दरिद्र होते हैं इनसे बात करना समय नष्ट करना है। हाँ, तो हमारा वीरेंद्र के साथ आप सभी से यही कहना है कि फेसबुक ग्रुप पर रिक्वेस्ट भेज दीजिए। फेसबुक से ही सारी बातें स्टार्ट होंगी। फीस भेजने के बाद उसका स्क्रीनशॉट हमें मेल पर अवश्य भेज दें जिससे हम आपको फेसबुक ग्रुप पर जोड़ सकें।
जय श्री कृष्ण!
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फीस भेजने हेतु QR कोड
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