मैं हिन्दुओं के वोट से जीता हूं।
मुसलमानों ने बंगाल में हमें वोट नहीं किया है।
: सुवेन्दु अधिकारी, भाजपा नेता
मुसलमानों ने बंगाल में हमें वोट नहीं किया है।
: सुवेन्दु अधिकारी, भाजपा नेता
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अपने तीन ही सिद्धांत हैं.
ना जीत में ज्यादा उड़ो.
ना हार में ज्यादा गढ़ो.
आपिये, सापिये, चमचे, वामिये जहाँ मिलें, जब मिलें..... रगड़ दो.
ना जीत में ज्यादा उड़ो.
ना हार में ज्यादा गढ़ो.
आपिये, सापिये, चमचे, वामिये जहाँ मिलें, जब मिलें..... रगड़ दो.
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ये जो दो टके के Youtuber और Social Media Experts होते हैं.... यह बार बार एक बात बोलते हैं.... भाजपा ने हिन्दुओ के लिए किया क्या है.... कट्टर झट्टर भी इनके सुर में सुर मिलाते हैं.
कहने को बहुत सी बातें हैं.... लेकिन एक छोटा सा उदाहरण देता हूँ.
आसनसोल के बास्टिन बाजार का ये दुर्गा मंदिर पिछले 15 सालों से बंद था.... क्यूंकि यह मंदिर एक संवेदनशील इलाके में पड़ता है..... और अपने वोटबैंक को खुश करने के लिए लेफ्ट हो या ममता... सबने इस मंदिर को बंद रखा.
मामला हाई कोर्ट पहुँचा.... आदेश आये मंदिर को खोलने के... मंदिर नहीं खुला.....बंगाल जो कि दुर्गापूजन के लिए विश्व विख्यात है वहां 15 सालों से एक समुदाय को खुश करने के लिए मंदिर को बंद रखा गया....सोचिए कितना सहा होगा वहां के निवासियों ने.
कल भाजपा की जीत Final भी नहीं हुई थी..... उससे पहले ही आसनसोल की जनता ने दुर्गा मंदिर के द्वार धूमधाम से खोल दिए गए.
पिछले विधानसभा चुनाव में टीएमसी की जीत के बाद अकेले आसनसोल में टीएमसी के गुंडों ने 45 हत्या की थी....आज उनके परिवारों को न्याय मिल गया।
ये कथन सत्य साबित हुआ कि पाप का घड़ा कभी न कभी भरता ही है…... ममता बनर्जी के पाप का घड़ा उसकी हार के साथ भर गया है।
भाजपा ही लोगों को यह ताकत देती है..... जम्मू कश्मीर के कई मंदिर जो दशकों से बंद थे.... आज वहां पूजा अर्चना होती है..... मार्तण्ड मंदिर में तो 6 सौ सालों बाद पूजा अर्चना हुई थी... यह भाजपा का ही प्रभाव था.
पावागढ़ माता का मंदिर हो, जहाँ 500 साल बाद शिखर स्थापित हुआ था...... या श्री राम लल्ला मंदिर अयोध्या हो....जो 500 वर्षों के संघर्ष के बाद बना..... पिछले 500 सालों में भारत की भूमि पर अनेकों हिन्दू सम्राट हुए... बड़े बड़े बहादुर हुए.... लेकिन जो काम वह नहीं कर पाए, वह भाजपा ने कर के दिखाया.
लेकिन कुछ कूढमगज कहते हैं भाजपा ने किया ही क्या है.
कहने को बहुत सी बातें हैं.... लेकिन एक छोटा सा उदाहरण देता हूँ.
आसनसोल के बास्टिन बाजार का ये दुर्गा मंदिर पिछले 15 सालों से बंद था.... क्यूंकि यह मंदिर एक संवेदनशील इलाके में पड़ता है..... और अपने वोटबैंक को खुश करने के लिए लेफ्ट हो या ममता... सबने इस मंदिर को बंद रखा.
मामला हाई कोर्ट पहुँचा.... आदेश आये मंदिर को खोलने के... मंदिर नहीं खुला.....बंगाल जो कि दुर्गापूजन के लिए विश्व विख्यात है वहां 15 सालों से एक समुदाय को खुश करने के लिए मंदिर को बंद रखा गया....सोचिए कितना सहा होगा वहां के निवासियों ने.
कल भाजपा की जीत Final भी नहीं हुई थी..... उससे पहले ही आसनसोल की जनता ने दुर्गा मंदिर के द्वार धूमधाम से खोल दिए गए.
पिछले विधानसभा चुनाव में टीएमसी की जीत के बाद अकेले आसनसोल में टीएमसी के गुंडों ने 45 हत्या की थी....आज उनके परिवारों को न्याय मिल गया।
ये कथन सत्य साबित हुआ कि पाप का घड़ा कभी न कभी भरता ही है…... ममता बनर्जी के पाप का घड़ा उसकी हार के साथ भर गया है।
भाजपा ही लोगों को यह ताकत देती है..... जम्मू कश्मीर के कई मंदिर जो दशकों से बंद थे.... आज वहां पूजा अर्चना होती है..... मार्तण्ड मंदिर में तो 6 सौ सालों बाद पूजा अर्चना हुई थी... यह भाजपा का ही प्रभाव था.
पावागढ़ माता का मंदिर हो, जहाँ 500 साल बाद शिखर स्थापित हुआ था...... या श्री राम लल्ला मंदिर अयोध्या हो....जो 500 वर्षों के संघर्ष के बाद बना..... पिछले 500 सालों में भारत की भूमि पर अनेकों हिन्दू सम्राट हुए... बड़े बड़े बहादुर हुए.... लेकिन जो काम वह नहीं कर पाए, वह भाजपा ने कर के दिखाया.
लेकिन कुछ कूढमगज कहते हैं भाजपा ने किया ही क्या है.
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अगर आपने किसी को आज से ठीक 10 साल पहले बोला होता -
1) जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हट जाएगा।
2) राम मंदिर 8-10 साल के बाद बन जाएगा।
3) पश्चिम बंगाल में भाजपा की सरकार बनेगी और NDA के 200 से ज़्यादा विधायक होंगे।
ज़रा आप उनकी प्रतिक्रिया की कल्पना कीजिए और आप को खुद जवाब मिल जाएगा कि भाजपा ने हिन्दू और हिंदुस्तान के लिए क्या किया l 🪷🚩🕉
1) जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हट जाएगा।
2) राम मंदिर 8-10 साल के बाद बन जाएगा।
3) पश्चिम बंगाल में भाजपा की सरकार बनेगी और NDA के 200 से ज़्यादा विधायक होंगे।
ज़रा आप उनकी प्रतिक्रिया की कल्पना कीजिए और आप को खुद जवाब मिल जाएगा कि भाजपा ने हिन्दू और हिंदुस्तान के लिए क्या किया l 🪷🚩🕉
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अब एक और चीज के लिए तैयार हो जाइए.. आपको ढेर से रील और पोस्ट मिलेंगे जिसमें आपको भगवा टीशर्ट पहने और भगवा गमछा डाले आफताब और अख़लाक़ दिखाई देंगे जो कहेंगे कि उन्होंने भाजपा को वोट दिया. न्यूज ऐंकर यह बताने आयेंगे कि #मुस्लिम जनसंख्या वाली सीटों पर भी भाजपा जीती है...
भाजपा #मुस्लिम_वॉट से जीती है. हर चुनाव के बाद यह #नैरेटिव खड़ा किया जाता है कि मुस्लिम का समर्थन सत्ता में आने की अनिवार्य शर्त है, जिससे देश की राजनीति पर #इस्लामिक वीटो बना रहे।
समस्या तब होगी जब भाजपा के जुबान और कान के कच्चे कुछ नेता इसमें अपनी तारीफ देखने लगेंगे और उसपर विश्वास करने लगेंगे।
अगर सोशल मीडिया पर कुछ सार्थक करना है तो यह करें कि इस नैरेटिव को जड़ न जमाने दें. जहां कहीं भी कोई इसकी बात करता दिखे उसकी वहीं पैंट उतारें. जी नहीं, भाजपा इसलिए जीती क्योंकि हिन्दू वोट इस्लामिक गुंडागर्दी के विरुद्ध शत प्रतिशत कंसोलिडेट हुए. यह पोलराइजेशन ही राष्ट्र की प्राणवायु बनेगा और भविष्य के आसन्न खतरों से निबटने की शक्ति स्पष्ट दृष्टि देगा!
राजीव मिश्राजी द्वारा
भाजपा #मुस्लिम_वॉट से जीती है. हर चुनाव के बाद यह #नैरेटिव खड़ा किया जाता है कि मुस्लिम का समर्थन सत्ता में आने की अनिवार्य शर्त है, जिससे देश की राजनीति पर #इस्लामिक वीटो बना रहे।
समस्या तब होगी जब भाजपा के जुबान और कान के कच्चे कुछ नेता इसमें अपनी तारीफ देखने लगेंगे और उसपर विश्वास करने लगेंगे।
अगर सोशल मीडिया पर कुछ सार्थक करना है तो यह करें कि इस नैरेटिव को जड़ न जमाने दें. जहां कहीं भी कोई इसकी बात करता दिखे उसकी वहीं पैंट उतारें. जी नहीं, भाजपा इसलिए जीती क्योंकि हिन्दू वोट इस्लामिक गुंडागर्दी के विरुद्ध शत प्रतिशत कंसोलिडेट हुए. यह पोलराइजेशन ही राष्ट्र की प्राणवायु बनेगा और भविष्य के आसन्न खतरों से निबटने की शक्ति स्पष्ट दृष्टि देगा!
राजीव मिश्राजी द्वारा
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BJP wins Rajarhat–New Town seat by 309 votes after RECOUNTING.
BJP tally now rises to 207.
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ममता बोलीं- राज्यपाल को इस्तीफा देने नहीं जाऊंगी हारे नहीं, हराया गया, काउंटिंग के दौरान पेट पर लात मारी; SIR के बहाने 100 सीटें लूटीं
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इस समय की बहुत बड़ी खबर
सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल विधानसभा
के लिए दोबारा चुनाव का आदेश दिया है।
TMC ने EVM हैकिंग की शिकायत
करते हुए सुप्रीम कोर्ट का
दरवाज़ा खटखटाया था।
TMC ने इसे अपनी जीत बताया है
और सुप्रीम कोर्ट का शुक्रिया अदा किया है।
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सुप्रीम कोर्ट ने दोबारा चुनाव का आदेश दिया है।
ये चुनाव 2031 में होंगे।
😄😜 फ़ेकिंग न्यूज के सौजन्य से।
सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल विधानसभा
के लिए दोबारा चुनाव का आदेश दिया है।
TMC ने EVM हैकिंग की शिकायत
करते हुए सुप्रीम कोर्ट का
दरवाज़ा खटखटाया था।
TMC ने इसे अपनी जीत बताया है
और सुप्रीम कोर्ट का शुक्रिया अदा किया है।
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सुप्रीम कोर्ट ने दोबारा चुनाव का आदेश दिया है।
ये चुनाव 2031 में होंगे।
😄😜 फ़ेकिंग न्यूज के सौजन्य से।
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लोकतंत्र की सबसे बड़ी खासियत पता है क्या है..... यहाँ जनता बड़े से बड़ो की अकड़ अपनी ऊँगली से निकाल देती है.
अब इसी उधमी ममता के भतीजे को देखिये..... यह पूरी यूनियन ऑफ़ India को चुनौती दे रहा था... कि आओ और हमें हरा कर दिखाओ.
जनता ने ज़रा सी ऊँगली टेढ़ी की और यह और इसकी पार्टी ठिकाने लगा दी लोगों ने..... पूरे भारत को तो झेल भी नहीं पायेगा ये निकम्मा.
खैर... अभी इसकी जेल यात्रा शुरू होने को है.... चुन चुन के बदला लिया जाएगा..... बंगाल की राजनैतिक परंपराओं का पूरा पालन किया जाएगा
अब इसी उधमी ममता के भतीजे को देखिये..... यह पूरी यूनियन ऑफ़ India को चुनौती दे रहा था... कि आओ और हमें हरा कर दिखाओ.
जनता ने ज़रा सी ऊँगली टेढ़ी की और यह और इसकी पार्टी ठिकाने लगा दी लोगों ने..... पूरे भारत को तो झेल भी नहीं पायेगा ये निकम्मा.
खैर... अभी इसकी जेल यात्रा शुरू होने को है.... चुन चुन के बदला लिया जाएगा..... बंगाल की राजनैतिक परंपराओं का पूरा पालन किया जाएगा
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Media is too big
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बंगाल ने तो पहले दिन ही सफाई शुरू कर दी
आज कलकत्ता की अवैध बांग्लादेशी बस्ती को स्वाहा कर दिया।🔥
आज कलकत्ता की अवैध बांग्लादेशी बस्ती को स्वाहा कर दिया।🔥
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बंगाल का चुनाव केवल चुनाव नहीं था.... यह प्रश्न था जीवन मरण का.... यह सभ्यता संस्कृति को बचाने की लड़ाई थी.... यह हजारों मासूमों के बहते खून का बदला था.
यह उन हुक्मरानों के दम्भ को तोड़ने की ज़िद थी... जो जनता को मनुष्य समझते ही नहीं थे... जिन्होने माँ माटी मानुष का नारा दे कर इन्ही सभी को नष्ट किया, नोचा खाया.
आज इस युद्ध की जीत का जश्न भी भावुक हो कर मनाया जा रहा है.
Ground पर जो माहौल है... वह वही समझ सकता है... जिसने उस माहौल में जीवन जिया हो.
हम तो दूर बैठे भी भावुक हो रहे हैं.
बंगाल और बंगालियों ने बहुत झेला है........ यह बदलाव उनके बलिदान की परिणीति है.
यह उन हुक्मरानों के दम्भ को तोड़ने की ज़िद थी... जो जनता को मनुष्य समझते ही नहीं थे... जिन्होने माँ माटी मानुष का नारा दे कर इन्ही सभी को नष्ट किया, नोचा खाया.
आज इस युद्ध की जीत का जश्न भी भावुक हो कर मनाया जा रहा है.
Ground पर जो माहौल है... वह वही समझ सकता है... जिसने उस माहौल में जीवन जिया हो.
हम तो दूर बैठे भी भावुक हो रहे हैं.
बंगाल और बंगालियों ने बहुत झेला है........ यह बदलाव उनके बलिदान की परिणीति है.
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अगर अमित शाह के ही अंदाज़-ए-बयाँ में सुनाएँ तो भैया, अगले दस साल की तैयारी तुम्हारे पास न हो तो तुम अमित शाह के सामने इलेक्शन लड़ने मत जाया करो सिवाय फ्रस्ट्रेशन के कुछ हाथ नहीं लगेगा।
संतोष भारतीय के लेखों से मैंने समझना शुरू किया था कि भाजपा (संघ) अपनी राजनीति चुनावों के आधार पर नहीं बनाती। उनकी राजनीति समय रेखा में चलती है। अमित शाह ने उस समझ को आँखों के सामने फ़िल्म की तरह दिखाया है। वही निर्माता हैं, वही निर्देशक हैं, वही पटकथा लिखते हैं, वही अभिनेता चुनते हैं। वही बॉक्स ऑफिस पर भीड़ जुटाते हैं और सफलता के बाद, प्रधानमंत्री के बगल में खड़े बग़ैर किसी श्रेय की इच्छा जताए चुपचाप मुस्कुराते हैं।
कल्पना कीजिए आप 2013 में यूपी प्रभारी बनकर आए हैं, आपके सरदार केंद्र की चढ़ाई करने की तैयारी में हैं, यूपी सबसे महत्वपूर्ण गढ़ है। इसे फ़तह किए बग़ैर आप लाल क़िले पर भगवा लहराने की सोच भी नहीं सकते। मगर आप यहाँ तीसरे दर्जे की पार्टी हैं। आपका एक बेस वोट ठाकुरों का समाजवादी पार्टी के साथ राजनीति कर रहा है, एक वोट बेस ब्राह्मणों का बहुजन समाज पार्टी के साथ कर रहा है। संगठन में भयंकर गुटबाजी है। बेस्ट केस सिनेरियो में भी आपको कोई पचास से अधिक सीटें देने को तैयार नहीं है। और जब परिणाम आता है, तो आप 73/80 का परिणाम लेकर आते हैं। सपा और कांग्रेस दोनों अपनी चौखट तक सिमट चुके होते हैं। केंद्रीय राजनीति में यह अमित शाह की डेब्यू इनिंग थी। उसके बाद उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा।
दस करोड़ सदस्यों की पार्टी बनाने का अभियान हो या भाजपा पर लगे ब्राह्मण-बनिया जनता पार्टी का टैग मिटाकर उसे बतौर बैकवर्ड जनता पार्टी स्थापित करना हो। अमित शाह 2014 से ही अगले दशक की राजनीतिक स्थितियों के हिसाब से भाजपा को तैयार कर रहे थे। आज भारत के राजनैतिक परिदृश्य में कोई पार्टी भाजपा से सांगठनिक और वैचारिक धरातल पर लड़ती हुई कहीं दिख भी नहीं रही है।
आज बंगाल की जीत महज़ एक चुनाव जीत नहीं है, यह भाजपा के लिए एक ऐसा जैकपॉट है जो उसे हिंदुत्व 2.0 प्रोजेक्ट के लिए तैयार करेगा।मगर 2016 में बंगाल में भाजपा के पास महज़ 3 सीटें थीं।
अमित शाह ने भाजपा के भविष्य लिए उसे तभी ही मज़बूत गढ़ के तौर पर पहचान लिया था और चैलेंज की तरह लिया था। I-PAC द्वारा कोविड के बीच में मोदी द्वारा इलेक्शन कैंपेन करने पे पूरे बीजेपी कैडर को गिल्ट ट्रैप करने और बंगाल इलेक्शन के हिंसक छापा कल्चर को न समझने की वजह से, भाजपा 3 से 77 सीटों तक पहुँचकर भी भले हारी हुई लग रही थी। लेकिन अमित शाह बंगाल की किलेबंदी को समझ चुके थे। अब उनकी योजना में छापा वोटरों को हटवाना और भयमुक्त चुनाव करवाना था। बस इतना मुकम्मल काम उन्हें जीत की दहलीज़ पर ला खड़ा करने वाला था। और यहीं दोनों काम ने भाजपा की जीत सुनिश्चित कर दी है ल।
भवानीपुर के काउंटिंग सेंटर में बैठी जिद्दी ममता बनर्जी और उनके बदतमीज भतीजे को आज समझ नहीं आ रहा होगा कि बंगाल में ऐसी भगवा बरसात इंद्र ने किसके कहने पर बरसाई है, मगर पूरा बंगाल और समूचा देश जानता है , उस शख़्स का नाम अमित अनिलचंद्र शाह है।
- मलाल
संतोष भारतीय के लेखों से मैंने समझना शुरू किया था कि भाजपा (संघ) अपनी राजनीति चुनावों के आधार पर नहीं बनाती। उनकी राजनीति समय रेखा में चलती है। अमित शाह ने उस समझ को आँखों के सामने फ़िल्म की तरह दिखाया है। वही निर्माता हैं, वही निर्देशक हैं, वही पटकथा लिखते हैं, वही अभिनेता चुनते हैं। वही बॉक्स ऑफिस पर भीड़ जुटाते हैं और सफलता के बाद, प्रधानमंत्री के बगल में खड़े बग़ैर किसी श्रेय की इच्छा जताए चुपचाप मुस्कुराते हैं।
कल्पना कीजिए आप 2013 में यूपी प्रभारी बनकर आए हैं, आपके सरदार केंद्र की चढ़ाई करने की तैयारी में हैं, यूपी सबसे महत्वपूर्ण गढ़ है। इसे फ़तह किए बग़ैर आप लाल क़िले पर भगवा लहराने की सोच भी नहीं सकते। मगर आप यहाँ तीसरे दर्जे की पार्टी हैं। आपका एक बेस वोट ठाकुरों का समाजवादी पार्टी के साथ राजनीति कर रहा है, एक वोट बेस ब्राह्मणों का बहुजन समाज पार्टी के साथ कर रहा है। संगठन में भयंकर गुटबाजी है। बेस्ट केस सिनेरियो में भी आपको कोई पचास से अधिक सीटें देने को तैयार नहीं है। और जब परिणाम आता है, तो आप 73/80 का परिणाम लेकर आते हैं। सपा और कांग्रेस दोनों अपनी चौखट तक सिमट चुके होते हैं। केंद्रीय राजनीति में यह अमित शाह की डेब्यू इनिंग थी। उसके बाद उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा।
दस करोड़ सदस्यों की पार्टी बनाने का अभियान हो या भाजपा पर लगे ब्राह्मण-बनिया जनता पार्टी का टैग मिटाकर उसे बतौर बैकवर्ड जनता पार्टी स्थापित करना हो। अमित शाह 2014 से ही अगले दशक की राजनीतिक स्थितियों के हिसाब से भाजपा को तैयार कर रहे थे। आज भारत के राजनैतिक परिदृश्य में कोई पार्टी भाजपा से सांगठनिक और वैचारिक धरातल पर लड़ती हुई कहीं दिख भी नहीं रही है।
आज बंगाल की जीत महज़ एक चुनाव जीत नहीं है, यह भाजपा के लिए एक ऐसा जैकपॉट है जो उसे हिंदुत्व 2.0 प्रोजेक्ट के लिए तैयार करेगा।मगर 2016 में बंगाल में भाजपा के पास महज़ 3 सीटें थीं।
अमित शाह ने भाजपा के भविष्य लिए उसे तभी ही मज़बूत गढ़ के तौर पर पहचान लिया था और चैलेंज की तरह लिया था। I-PAC द्वारा कोविड के बीच में मोदी द्वारा इलेक्शन कैंपेन करने पे पूरे बीजेपी कैडर को गिल्ट ट्रैप करने और बंगाल इलेक्शन के हिंसक छापा कल्चर को न समझने की वजह से, भाजपा 3 से 77 सीटों तक पहुँचकर भी भले हारी हुई लग रही थी। लेकिन अमित शाह बंगाल की किलेबंदी को समझ चुके थे। अब उनकी योजना में छापा वोटरों को हटवाना और भयमुक्त चुनाव करवाना था। बस इतना मुकम्मल काम उन्हें जीत की दहलीज़ पर ला खड़ा करने वाला था। और यहीं दोनों काम ने भाजपा की जीत सुनिश्चित कर दी है ल।
भवानीपुर के काउंटिंग सेंटर में बैठी जिद्दी ममता बनर्जी और उनके बदतमीज भतीजे को आज समझ नहीं आ रहा होगा कि बंगाल में ऐसी भगवा बरसात इंद्र ने किसके कहने पर बरसाई है, मगर पूरा बंगाल और समूचा देश जानता है , उस शख़्स का नाम अमित अनिलचंद्र शाह है।
- मलाल
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पश्चिम बंगाल के कई जिले इस हद तक TMC वालों के गुंडागर्दी से प्रभावित थे जो लोग सोच नहीं सकते ……
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Highway और expressway पर टोल देने वालों ध्यान से सुनी कि पश्चिम बंगाल के कई जिलों में राज्य, शहर और कस्बे के सड़कों पर TMC के गुंडों का अपना टोल वसूली का धंधा था …. धंधा था …… क्योंकि कल शाम होते होते इन सभी टोल से TMC के गुंडे भाग खड़े हुए हैं ….
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मेरे मित्र जो दिनाजपुर में रहते हैं और सड़क से निकलने पर अक्सर गुण्डा वाला टोल देते थे, आज उन्होंने कहा कि उनके इलाके के सारे गुंडई टोल समाप्त हो गए हैं और TMC के गुण्डे भाग चुके हैं …. मैंने कॉल किया तो इसी तरह का रिपोर्ट मिला कि फूलबाड़ी, राजगंज और बांकुड़ा के TMC वाले गुण्डई टोल बूथ समाप्त हो गए हैं
रंजय त्रिपाठी जी
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Highway और expressway पर टोल देने वालों ध्यान से सुनी कि पश्चिम बंगाल के कई जिलों में राज्य, शहर और कस्बे के सड़कों पर TMC के गुंडों का अपना टोल वसूली का धंधा था …. धंधा था …… क्योंकि कल शाम होते होते इन सभी टोल से TMC के गुंडे भाग खड़े हुए हैं ….
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मेरे मित्र जो दिनाजपुर में रहते हैं और सड़क से निकलने पर अक्सर गुण्डा वाला टोल देते थे, आज उन्होंने कहा कि उनके इलाके के सारे गुंडई टोल समाप्त हो गए हैं और TMC के गुण्डे भाग चुके हैं …. मैंने कॉल किया तो इसी तरह का रिपोर्ट मिला कि फूलबाड़ी, राजगंज और बांकुड़ा के TMC वाले गुण्डई टोल बूथ समाप्त हो गए हैं
रंजय त्रिपाठी जी
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