BJP’s Hitendra Nath Goswami DEFEATS Congress’s Gaurav Gogoi from the Jorhat seat by nearly 20K votes.
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जय श्रीराम और जय माँ काली के नारों के साथ कई जगहों पर आम जनता ने किया तृणमूल कांग्रेस के कैम्प और दफ्तरों पर हमला।
तृणमूल कांग्रेस का तृण भी नहीं बचने वाला है इस परिणाम के कारण।
अभिषेक बनर्जी और उसके कैडर को आम जनता भूत बना देगी। बस आनंद लिजिये इस कर्म फल का।
तृणमूल कांग्रेस का तृण भी नहीं बचने वाला है इस परिणाम के कारण।
अभिषेक बनर्जी और उसके कैडर को आम जनता भूत बना देगी। बस आनंद लिजिये इस कर्म फल का।
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CRPF has takenover WB seceretriate's offices buildng and taking security control of files and systems.
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बंगाल के बाराबंनी में TMC ऑफिस में तोड़फोड़
20 मिनट पहले: भवानीपुर काउंटिंग सेंटर में ममता-सुवेंदु, बाहर भारी फोर्स तैनात
20 मिनट पहले: भवानीपुर काउंटिंग सेंटर में ममता-सुवेंदु, बाहर भारी फोर्स तैनात
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‘कष्ट, पीड़ा, दर्द, रंज, गम, संकट, अज़ा, खेद, तकलीफ़, रोग, बीमारी, विपत्ति, मर्ज़, निरानंद, उफ़, कष्ट, अलम, कष्ट, पीड़ा, रंज, मनमुटाव, कष्ट, शोक, कलक, घबराहट, तकलीफ़, अफ़सोस, तसदीह, पीड़ा, कष्ट, गम, मातम, रंज, फ़िक्र, मुसीबत, शोक, परवाह, क्लेश, क्षोभ, सहनशील, चिंता, अकुशलता, अनाड़ीपन, विपत्ति, अनिपुणता, दुखड़ा, संकट, विपत्ति, आफ़त, कष्ट, तकलीफ़, हरास, डर, विषाद, निराशा, आशंका, खटका, नाउम्मीदी, भय, ख़तरा, परिताप, कँपकँपी, संताप, डर, पछतावा, क्लेश, भय, आँच, उपताप, ताप, क्लेश, पीड़ा, कष्टमय, कृच्छ्र, कष्ट, कठिनाई, पीड़ा, प्रायश्चित, खेद, अफ़सोस, पछतावा, शोक, पश्चाताप, रंज, खेद, मलाल, रंज
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आज सभी भक्तों का यही हाल है...... यह जीत बहुत बड़ी है.... बेहद शानदार है.....क्यूंकि यह Personal है..... यह बहुप्रतीक्षित थी..... इसका सपना कई पीढ़ीयो ने देखा.. और आज फलिभूत हो गया.
सभी को ढेरों शुभकामनायें 🙏
सभी को ढेरों शुभकामनायें 🙏
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पश्चिम बंगाल की जीत के लिए हम पार्टी नेतृत्व को श्रेय दे सकते हैं.... प्रधानमंत्री मोदी और अमित शाह को श्रेय जाता है.... वहीं भूपेंद्र यादव, सुवेंदु अधिकारी, सुनील बंसल, दिलीप घोष और सुकांत मजूमदार का भी बड़ा सहयोग है.
लेकिन सबसे बड़ा योगदान किसी का है... तो वह है बंगाल में रहने वाले कार्यकर्ताओं का.... जो इतने दशको तक बंगाल में हिंदुत्व की ध्वजा थामे रहे.
पश्चिम बर्द्धमान जिले में बारबानी सीट पर बीजेपी की जीत के बाद बीजेपी का एक कार्यकर्ता भावुक हो गया और खुशी में फफक-फफक कर रोने लगा.
बीजेपी कार्यकर्ता ने कहा कि हर चुनाव के बाद टीएमसी कार्यकर्ता हमें पीटते थे. हम 15 वर्षों से मार खाते आए हैं.... हर चुनाव... चाहे वो लोकल हो या लोकसभा का हो... हमारे लिए एक परीक्षा होता था... हमें कई कई दिनों तक छुप कर रहना पड़ता था.... मार पीट होना, घर में तोड़ फोड़ होना तो बहुत ही आम था...हत्या तक कर दी जाती थी.... सैंकड़ो कार्यकर्ता TMC के गुंडों के हाथों मारे गए, अपाहिज हो गए, बेघर हो गए.
हर कार्यकर्ता ने यह खतरे झेले, लेकिन झुके नहीं.... उनका संकल्प दृढ़ होता गया..... और आज अंततः उन्होने भारतीय राजनीति का एक बेहद मजबूत और बेहद दुरूह किला ढहा दिया.... पश्चिम बंगाल का चुनाव भारतीय राजनीति के कुछ सबसे मुश्किल चुनावों में से एक था.
आज बीजेपी 200 सीटों से ज्यादा पर बढ़त बना कर ममता बनर्जी के 15 साल के शासन का अंत कर दिया.
यह जीत हर उस कार्यकर्ता की जीत है... जो इतने दशको तक विचारधारा का युद्ध लड़ता रहा.... उसे पता था..... यह बात उसके मन में अंकित थी.....कि एक दिन अंधेरा छटेगा, सूरज निकलेगा, कमल खिलेगा
आज कमल खिल गया ❤️
लेकिन सबसे बड़ा योगदान किसी का है... तो वह है बंगाल में रहने वाले कार्यकर्ताओं का.... जो इतने दशको तक बंगाल में हिंदुत्व की ध्वजा थामे रहे.
पश्चिम बर्द्धमान जिले में बारबानी सीट पर बीजेपी की जीत के बाद बीजेपी का एक कार्यकर्ता भावुक हो गया और खुशी में फफक-फफक कर रोने लगा.
बीजेपी कार्यकर्ता ने कहा कि हर चुनाव के बाद टीएमसी कार्यकर्ता हमें पीटते थे. हम 15 वर्षों से मार खाते आए हैं.... हर चुनाव... चाहे वो लोकल हो या लोकसभा का हो... हमारे लिए एक परीक्षा होता था... हमें कई कई दिनों तक छुप कर रहना पड़ता था.... मार पीट होना, घर में तोड़ फोड़ होना तो बहुत ही आम था...हत्या तक कर दी जाती थी.... सैंकड़ो कार्यकर्ता TMC के गुंडों के हाथों मारे गए, अपाहिज हो गए, बेघर हो गए.
हर कार्यकर्ता ने यह खतरे झेले, लेकिन झुके नहीं.... उनका संकल्प दृढ़ होता गया..... और आज अंततः उन्होने भारतीय राजनीति का एक बेहद मजबूत और बेहद दुरूह किला ढहा दिया.... पश्चिम बंगाल का चुनाव भारतीय राजनीति के कुछ सबसे मुश्किल चुनावों में से एक था.
आज बीजेपी 200 सीटों से ज्यादा पर बढ़त बना कर ममता बनर्जी के 15 साल के शासन का अंत कर दिया.
यह जीत हर उस कार्यकर्ता की जीत है... जो इतने दशको तक विचारधारा का युद्ध लड़ता रहा.... उसे पता था..... यह बात उसके मन में अंकित थी.....कि एक दिन अंधेरा छटेगा, सूरज निकलेगा, कमल खिलेगा
आज कमल खिल गया ❤️
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2021 में भाजपा की हार दरअसल जनमत का फैसला नहीं था, इलेक्शन मैनेजमेंट की कमजोरी थी. भाजपा ने उसे अन्य चुनावों की तरह लिया था. लेकिन आप मैदान में फुटबॉल नहीं खेल सकते जब दूसरी टीम रग्बी खेलने पर उतारू हो. खेल में खेल के नियम लागू होने चाहिए.
पिछले चुनाव के बाद बंगाल में जब हिंदुओं के विरुद्ध भयावह हिंसा हुई तो मन बहुत दुखी हुआ. साथ ही जब भाजपा नेतृत्व और केंद्र सरकार कुछ करती नहीं दिखाई दी तो बहुत क्षोभ हुआ. वह मोदी के लिए भी अवश्य बेहद पीड़ादायक क्षण और कठिन निर्णय रहा होगा.
लेकिन मोदी को हिंदुओं की चिन्ता नहीं है, यह निष्कर्ष निकालना मुझे नहीं पचा. जब भी ऐसे अवसर आते हैं मै यह नहीं सोचता कि मैं मोदी से क्या अपेक्षा रखता हूँ. मैं यह सोचता हूँ कि इस अवसर पर यदि मैं होता तो उपलब्ध विकल्पों में से मैं क्या चुनता? और यह प्रश्न मैं भावना के स्तर पर नहीं पूछता, परिणामों के स्तर पर पूछता हूं.. किस निर्णय के क्या परिणाम होंगे?
मोदी ने बंगाल के विषय पर जिस धैर्य का परिचय दिया है वह किसी बेहद कुशल और अनुभवी सर्जन जैसा है. उन्होंने पहले मरीज को स्टेबलाइज किया, उसके सारे टेस्ट्स कराए, सारे पैरामीटर को स्टेबलाइज किया. एक इमर्जेंसी प्रोसिजर करने के बदले सर्जरी को प्लान किया. फिर कंट्रोल्ड वातावरण में अच्छे एनेस्थेटिस्ट की मौजूदगी में पेनलेस और ब्लडलेस सर्जरी की. क्योंकि उन्हें मालूम था कि अगर सर्जरी सक्सेसफुल नहीं हुई तो दूसरी बार चांस नहीं मिलने वाला था.
सोचें कि पांच साल पहले उन्होंने आवेग में आकर राष्ट्रपति शासन लगा दिया होता? शायद हम और आप तालियां बजाते, छप्पन इंच का गणित लगाते, मोदी वाहवाही लूटते. लेकिन बंगाल की हालत उतनी ही, बल्कि उससे भी अधिक खराब होती. राष्ट्रपति शासन एक न एक दिन तो खत्म होना था, लेकिन ममता की साख पहले से अधिक बढ़ जाती और यह बीमारी फिर कभी खत्म नहीं होती..
लेकिन मोदी ने आवेश और भावना से काम नहीं लिया, बल्कि जो उचित, प्रभावी और दीर्घकालिक परिणाम देने वाला निर्णय था वह लिया. उन्होंने दर्शक दीर्घा की तालियों का लालच नहीं किया. अपनी पूरी साख दांव पर लगा दी और पांच साल इंतजार किया.
जो दो दो कौड़ी के जूं ट्यूबर उस समय मोदी को गंदी गंदी गालियां निकाल रहे थे, क्या वे यह स्वीकार करेंगे कि मोदी का राजनीतिक गणित और प्रशासनिक एकयूमेन आपसे सुपीरियर है? क्या वे यह स्वीकार करेंगे कि मोदी ने समय लिया लेकिन इलाज किया तो पुख्ता किया.
छोड़िए, मोदी को उनसे फर्क नहीं पड़ता. वे अपना काम कर रहे थे, मोदी अपना! लेकिन जनता को समझना होगा कि हम मोदी से जो फटाफट परिणाम खोजते हैं... मोदी को ज्यादा पता है कि फटाफट परिणाम कैसे होंगे और पुख्ता इलाज के लिए क्या क्या पापड़ बेलने पड़ते हैं.
लंदन से राजीव मिश्रा जी की पोस्ट
पिछले चुनाव के बाद बंगाल में जब हिंदुओं के विरुद्ध भयावह हिंसा हुई तो मन बहुत दुखी हुआ. साथ ही जब भाजपा नेतृत्व और केंद्र सरकार कुछ करती नहीं दिखाई दी तो बहुत क्षोभ हुआ. वह मोदी के लिए भी अवश्य बेहद पीड़ादायक क्षण और कठिन निर्णय रहा होगा.
लेकिन मोदी को हिंदुओं की चिन्ता नहीं है, यह निष्कर्ष निकालना मुझे नहीं पचा. जब भी ऐसे अवसर आते हैं मै यह नहीं सोचता कि मैं मोदी से क्या अपेक्षा रखता हूँ. मैं यह सोचता हूँ कि इस अवसर पर यदि मैं होता तो उपलब्ध विकल्पों में से मैं क्या चुनता? और यह प्रश्न मैं भावना के स्तर पर नहीं पूछता, परिणामों के स्तर पर पूछता हूं.. किस निर्णय के क्या परिणाम होंगे?
मोदी ने बंगाल के विषय पर जिस धैर्य का परिचय दिया है वह किसी बेहद कुशल और अनुभवी सर्जन जैसा है. उन्होंने पहले मरीज को स्टेबलाइज किया, उसके सारे टेस्ट्स कराए, सारे पैरामीटर को स्टेबलाइज किया. एक इमर्जेंसी प्रोसिजर करने के बदले सर्जरी को प्लान किया. फिर कंट्रोल्ड वातावरण में अच्छे एनेस्थेटिस्ट की मौजूदगी में पेनलेस और ब्लडलेस सर्जरी की. क्योंकि उन्हें मालूम था कि अगर सर्जरी सक्सेसफुल नहीं हुई तो दूसरी बार चांस नहीं मिलने वाला था.
सोचें कि पांच साल पहले उन्होंने आवेग में आकर राष्ट्रपति शासन लगा दिया होता? शायद हम और आप तालियां बजाते, छप्पन इंच का गणित लगाते, मोदी वाहवाही लूटते. लेकिन बंगाल की हालत उतनी ही, बल्कि उससे भी अधिक खराब होती. राष्ट्रपति शासन एक न एक दिन तो खत्म होना था, लेकिन ममता की साख पहले से अधिक बढ़ जाती और यह बीमारी फिर कभी खत्म नहीं होती..
लेकिन मोदी ने आवेश और भावना से काम नहीं लिया, बल्कि जो उचित, प्रभावी और दीर्घकालिक परिणाम देने वाला निर्णय था वह लिया. उन्होंने दर्शक दीर्घा की तालियों का लालच नहीं किया. अपनी पूरी साख दांव पर लगा दी और पांच साल इंतजार किया.
जो दो दो कौड़ी के जूं ट्यूबर उस समय मोदी को गंदी गंदी गालियां निकाल रहे थे, क्या वे यह स्वीकार करेंगे कि मोदी का राजनीतिक गणित और प्रशासनिक एकयूमेन आपसे सुपीरियर है? क्या वे यह स्वीकार करेंगे कि मोदी ने समय लिया लेकिन इलाज किया तो पुख्ता किया.
छोड़िए, मोदी को उनसे फर्क नहीं पड़ता. वे अपना काम कर रहे थे, मोदी अपना! लेकिन जनता को समझना होगा कि हम मोदी से जो फटाफट परिणाम खोजते हैं... मोदी को ज्यादा पता है कि फटाफट परिणाम कैसे होंगे और पुख्ता इलाज के लिए क्या क्या पापड़ बेलने पड़ते हैं.
लंदन से राजीव मिश्रा जी की पोस्ट
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Ex CM Mamata Banerjee claims that she was beaten inside polling booth.
I hope she is not lying 😂
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मैं हिन्दुओं के वोट से जीता हूं।
मुसलमानों ने बंगाल में हमें वोट नहीं किया है।
: सुवेन्दु अधिकारी, भाजपा नेता
मुसलमानों ने बंगाल में हमें वोट नहीं किया है।
: सुवेन्दु अधिकारी, भाजपा नेता
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अपने तीन ही सिद्धांत हैं.
ना जीत में ज्यादा उड़ो.
ना हार में ज्यादा गढ़ो.
आपिये, सापिये, चमचे, वामिये जहाँ मिलें, जब मिलें..... रगड़ दो.
ना जीत में ज्यादा उड़ो.
ना हार में ज्यादा गढ़ो.
आपिये, सापिये, चमचे, वामिये जहाँ मिलें, जब मिलें..... रगड़ दो.
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