भारत ग्रेटर निकोबार द्वीप समूह पर स्थित गलाथिया खाड़ी में ₹48,862 करोड़ की लागत से एक विशाल ट्रांसशिपमेंट बंदरगाह का निर्माण कर रहा है; यह बंदरगाह एक प्रमुख वैश्विक शिपिंग मार्ग, मलक्का जलडमरूमध्य से मात्र 40 समुद्री मील की दूरी पर स्थित है!
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जब पर्शियन सभ्यता के विनाश की धमकी दी गयी थी और जब इस धमकी से छुटकारा पाने के लिए आतंकी क्षेत्र को कहा गया कि तुम इस विनाश की डेडलाइन को दो सप्ताह आगे बढ़ाने की अपील करो, तब मंगलवार 7 अप्रैल था।
इस धमकी के बाद, ब्रहस्पतिवार 9 अप्रैल तक, तीन दिन निकल गए है।
इन तीन दिनों में भारत के कुछ वर्ग में आतंकी क्षेत्र के लिए प्रशंसा की फुहार निकल रही है। प्रधानमंत्री मोदी एवं उनकी टीम पर ताने मारे जा रहे है; भारत का उपहास उड़ाया जा रहा है।
फिर भी, प्रश्न उठता है कि इन तीन दिनों में भारत ने क्या किया?
प्रधानमंत्री मोदी ने श्री गुरु तेग बहादुर जी के प्रकाश पर्व के पावन अवसर पर भारतीय सभ्यता के एक महान आध्यात्मिक विभूति को अपनी सादर श्रद्धांजलि अर्पित की।
वियतनाम के नए राष्ट्रपति को बधाई दी।
मुद्रा योजना के योगदान के बारे में जानकारी दी कि इस योजना से अब तक 40 लाख करोड़ रूपये का लोन दिया दिए जा चुका है।
अरुणाचल प्रदेश में 1200 MW की कलाई-II जलविद्युत परियोजना के निर्माण के लिए 14,105 करोड़ रुपये के निवेश को स्वीकृति दी। इसी प्रदेश में कमला जलविद्युत परियोजना के निर्माण के लिए 26,069 करोड़ रुपये के निवेश को मंजूरी दी। अर्थात, 40,000 करोड़ रुपये से अधिक का निवेश।
₹13,037 करोड़ लागत वाली जयपुर मेट्रो के 41 किलोमीटर खंड के निर्माण को स्वीकृत किया।
वर्ष 2026 के खरीफ सीजन की फॉस्फेट और पोटेशियम खाद के लिए Rs.41,533 करोड़ सब्सिडी को स्वीकृत किया।
Hindustan Petroleum Corporation Limited (HPCL) की राजस्थान रिफाइनरी लिमिटेड परियोजना की लागत को 43,129 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 79,459 करोड़ रुपये करने को मंजूरी दी। यह रिफाइनरी प्रति वर्ष 10 लाख टन पेट्रोल और 40 लाख मीट्रिक टन डीजल का उत्पादन करेगी। और यह रिफाइनरी 1 जुलाई 2026 से काम शुरू कर देगी।
महिलाओं के लिए विधायी संस्थाओं में आरक्षण पर जोर दिया।
बंगाल के हल्दिया, आसनसोल, बीरभूम में चुनावी रैली की। कहा कि आपका वोट यहां से घुसपैठियों को बाहर निकालने के काम आएगा और भविष्य की सुरक्षा की गारंटी बनेगा।
असम, केरल एवं पुडुचेरी के चुनावो में अधिक से अधिक मतदान की अपील की।
और हाँ, विदेश मंत्री जयशंकर मारीशस एवं UAE की यात्रा पर है जहाँ वे ऊर्जा सप्लाई (एवं सम्भवः आतंकी क्षेत्र के दोगलेपन) के बारे में बात करेंगे।
पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी गैस की सप्लाई को चालू रखने के लिए कतर में है।
बांग्लादेश के नए विदेश मंत्री भारत आये थे और 200 ट्रेन कोच का आर्डर प्लेस कर गए। सुरक्षा की भी बात हुई है।
सरकार भारत के विकास, ऊर्जा सप्लाई, आतंरिक एवं वाह्य सुरक्षा के लिए निरंतर कार्य कर रही है।
इसके लिए चुनाव भी जीतना है, क्योकि लोकतंत्र है।
अतः अमित शाह बंगाल में डेरा डाले हुए है।
डोवाल साहेब क्या कर रहे है, इसके बारे में जानकारी नहीं है।
और कुछ लोगो को शिकायत है कि भारत को दलाली करने के लिए नहीं चुना गया?
- अमित सिंघल
इस धमकी के बाद, ब्रहस्पतिवार 9 अप्रैल तक, तीन दिन निकल गए है।
इन तीन दिनों में भारत के कुछ वर्ग में आतंकी क्षेत्र के लिए प्रशंसा की फुहार निकल रही है। प्रधानमंत्री मोदी एवं उनकी टीम पर ताने मारे जा रहे है; भारत का उपहास उड़ाया जा रहा है।
फिर भी, प्रश्न उठता है कि इन तीन दिनों में भारत ने क्या किया?
प्रधानमंत्री मोदी ने श्री गुरु तेग बहादुर जी के प्रकाश पर्व के पावन अवसर पर भारतीय सभ्यता के एक महान आध्यात्मिक विभूति को अपनी सादर श्रद्धांजलि अर्पित की।
वियतनाम के नए राष्ट्रपति को बधाई दी।
मुद्रा योजना के योगदान के बारे में जानकारी दी कि इस योजना से अब तक 40 लाख करोड़ रूपये का लोन दिया दिए जा चुका है।
अरुणाचल प्रदेश में 1200 MW की कलाई-II जलविद्युत परियोजना के निर्माण के लिए 14,105 करोड़ रुपये के निवेश को स्वीकृति दी। इसी प्रदेश में कमला जलविद्युत परियोजना के निर्माण के लिए 26,069 करोड़ रुपये के निवेश को मंजूरी दी। अर्थात, 40,000 करोड़ रुपये से अधिक का निवेश।
₹13,037 करोड़ लागत वाली जयपुर मेट्रो के 41 किलोमीटर खंड के निर्माण को स्वीकृत किया।
वर्ष 2026 के खरीफ सीजन की फॉस्फेट और पोटेशियम खाद के लिए Rs.41,533 करोड़ सब्सिडी को स्वीकृत किया।
Hindustan Petroleum Corporation Limited (HPCL) की राजस्थान रिफाइनरी लिमिटेड परियोजना की लागत को 43,129 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 79,459 करोड़ रुपये करने को मंजूरी दी। यह रिफाइनरी प्रति वर्ष 10 लाख टन पेट्रोल और 40 लाख मीट्रिक टन डीजल का उत्पादन करेगी। और यह रिफाइनरी 1 जुलाई 2026 से काम शुरू कर देगी।
महिलाओं के लिए विधायी संस्थाओं में आरक्षण पर जोर दिया।
बंगाल के हल्दिया, आसनसोल, बीरभूम में चुनावी रैली की। कहा कि आपका वोट यहां से घुसपैठियों को बाहर निकालने के काम आएगा और भविष्य की सुरक्षा की गारंटी बनेगा।
असम, केरल एवं पुडुचेरी के चुनावो में अधिक से अधिक मतदान की अपील की।
और हाँ, विदेश मंत्री जयशंकर मारीशस एवं UAE की यात्रा पर है जहाँ वे ऊर्जा सप्लाई (एवं सम्भवः आतंकी क्षेत्र के दोगलेपन) के बारे में बात करेंगे।
पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी गैस की सप्लाई को चालू रखने के लिए कतर में है।
बांग्लादेश के नए विदेश मंत्री भारत आये थे और 200 ट्रेन कोच का आर्डर प्लेस कर गए। सुरक्षा की भी बात हुई है।
सरकार भारत के विकास, ऊर्जा सप्लाई, आतंरिक एवं वाह्य सुरक्षा के लिए निरंतर कार्य कर रही है।
इसके लिए चुनाव भी जीतना है, क्योकि लोकतंत्र है।
अतः अमित शाह बंगाल में डेरा डाले हुए है।
डोवाल साहेब क्या कर रहे है, इसके बारे में जानकारी नहीं है।
और कुछ लोगो को शिकायत है कि भारत को दलाली करने के लिए नहीं चुना गया?
- अमित सिंघल
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ट्रंप के बूट पॉलिश करने के चक्कर में शाहबाज शरीफ़ ने पाकिस्तान की भद्द पिटवा ली । पहले सीज़फायर का गलत पोस्ट किया , ईरान की 10 शर्तें ट्रंप को बताए बगैर खुद मान ली और ट्रंप की ओर से ऐलान भी कर दिया । पता नहीं क्यूँ लेबनान में भी सीज़फायर का ट्वीट करते हुए शाहबाज ने पाकिस्तान को दुनिया का सबसे बड़ा फूल और खुद को डफर पीएम साबित कर दिया ।
जेडी वेंस ने कहा भी कि शाहबाज की अंग्रेजी कमजोर है । वे समझ ही नहीं पाए कि ट्रंप क्या ट्वीट कराना चाहते है । इजरायल ने लेबनान को सीजफायर से बाहर माना और सीजफायर की सवेरे ही जबरदस्त हमला कर हिजबुल्ला के कमांडर इन चीफ़ सहित 300 लोगों को मार डाला ।
गलत ट्वीट से वैश्विक मंच पर पाकिस्तान की किरकिरी हो गई है । कूटनीति में अक्सर कहा जाता है कि एक शब्द युद्ध भी करा सकता है और एक शब्द शांति भी ला सकता है। ऐसे में यदि कोई देश अपनी आधिकारिक कूटनीतिक भाषा में ही लापरवाही बरतने लगे तो उसका परिणाम केवल एक गलती नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय प्रतिष्ठा पर गहरा आघात बन जाता है। यही स्थिति पाकिस्तान के साथ देखने को मिली, जब एक गलत और जल्दबाजी में किया गया ट्वीट उसके लिए वैश्विक स्तर पर उपहास और आलोचना का कारण बन गया।
सोशल मीडिया के दौर में कूटनीति का चेहरा बदल चुका है। सरकारें अब केवल बंद कमरों की बैठकों या प्रेस विज्ञप्तियों के माध्यम से ही नहीं, बल्कि एक्स हैंडल के ट्वीट जैसे मंचों के जरिए भी अपने संदेश दुनिया तक पहुंचाती हैं। लेकिन यही तेज रफ्तार संवाद कई बार बड़ी भूलों का कारण बन जाता है। पाकिस्तान के आधिकारिक हैंडल से किया गया एक ऐसा ही ट्वीट अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजर में उसकी गंभीरता पर सवाल खड़ा कर गया।
इस ट्वीट में तथ्यों की स्पष्ट त्रुटि थी। जैसे ही यह संदेश सार्वजनिक हुआ, अंतरराष्ट्रीय मीडिया और राजनीतिक विश्लेषकों ने तुरंत इसकी ओर ध्यान दिलाया। कुछ ही घंटों में यह मामला सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गया और पाकिस्तान की कूटनीतिक क्षमता पर तंज कसे जाने लगे। यह केवल एक तकनीकी गलती नहीं थी, बल्कि उस अव्यवस्था का प्रतीक बन गई जो कई बार पाकिस्तान की नीतिगत कार्यप्रणाली में दिखाई देती है।
दरअसल, किसी भी देश के आधिकारिक सोशल मीडिया संदेश केवल सूचना नहीं होते, वे उसकी विदेश नीति की झलक भी होते हैं। ऐसे में यदि कोई ट्वीट तथ्यात्मक रूप से गलत साबित हो जाए तो उसका असर बहुत व्यापक होता है। यही वजह है कि दुनिया की बड़ी शक्तियां अपने डिजिटल संदेशों को जारी करने से पहले कई स्तरों पर जांच-पड़ताल करती हैं। लेकिन पाकिस्तान की इस चूक ने यह सवाल खड़ा कर दिया कि क्या उसकी कूटनीतिक व्यवस्था इतनी कमजोर हो चुकी है कि एक साधारण ट्वीट भी सही ढंग से जारी नहीं किया जा सकता ।
डिजिटल युग में गलत सूचना केवल कुछ मिनटों की समस्या नहीं होती। एक बार कोई गलत ट्वीट सामने आ जाए तो उसे हटाना समाधान नहीं बनता, क्योंकि तब तक उसका स्क्रीनशॉट पूरी दुनिया में फैल चुका होता है। यही इस मामले में भी हुआ। ट्वीट हटाए जाने के बाद भी उसका मजाक उड़ाया जाता रहा और पाकिस्तान को सफाई देने की नौबत आ गई ।
यह कहा जा सकता है कि पाकिस्तान का यह गलत ट्वीट केवल एक सोशल मीडिया पोस्ट नहीं था, बल्कि एक ऐसी चूक थी जिसने दुनिया के सामने उसकी कूटनीतिक तैयारी और गंभीरता पर सवाल खड़े कर दिए हैं । अंतरराष्ट्रीय राजनीति में प्रतिष्ठा धीरे-धीरे बनती है, लेकिन एक छोटी गलती उसे पल भर में धूमिल कर सकती है । पाकिस्तान के इस ट्वीट ने उसी कठोर सच्चाई को एक बार फिर उजागर कर दिया है ।
,,,,, कौशल सिखौला
जेडी वेंस ने कहा भी कि शाहबाज की अंग्रेजी कमजोर है । वे समझ ही नहीं पाए कि ट्रंप क्या ट्वीट कराना चाहते है । इजरायल ने लेबनान को सीजफायर से बाहर माना और सीजफायर की सवेरे ही जबरदस्त हमला कर हिजबुल्ला के कमांडर इन चीफ़ सहित 300 लोगों को मार डाला ।
गलत ट्वीट से वैश्विक मंच पर पाकिस्तान की किरकिरी हो गई है । कूटनीति में अक्सर कहा जाता है कि एक शब्द युद्ध भी करा सकता है और एक शब्द शांति भी ला सकता है। ऐसे में यदि कोई देश अपनी आधिकारिक कूटनीतिक भाषा में ही लापरवाही बरतने लगे तो उसका परिणाम केवल एक गलती नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय प्रतिष्ठा पर गहरा आघात बन जाता है। यही स्थिति पाकिस्तान के साथ देखने को मिली, जब एक गलत और जल्दबाजी में किया गया ट्वीट उसके लिए वैश्विक स्तर पर उपहास और आलोचना का कारण बन गया।
सोशल मीडिया के दौर में कूटनीति का चेहरा बदल चुका है। सरकारें अब केवल बंद कमरों की बैठकों या प्रेस विज्ञप्तियों के माध्यम से ही नहीं, बल्कि एक्स हैंडल के ट्वीट जैसे मंचों के जरिए भी अपने संदेश दुनिया तक पहुंचाती हैं। लेकिन यही तेज रफ्तार संवाद कई बार बड़ी भूलों का कारण बन जाता है। पाकिस्तान के आधिकारिक हैंडल से किया गया एक ऐसा ही ट्वीट अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजर में उसकी गंभीरता पर सवाल खड़ा कर गया।
इस ट्वीट में तथ्यों की स्पष्ट त्रुटि थी। जैसे ही यह संदेश सार्वजनिक हुआ, अंतरराष्ट्रीय मीडिया और राजनीतिक विश्लेषकों ने तुरंत इसकी ओर ध्यान दिलाया। कुछ ही घंटों में यह मामला सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गया और पाकिस्तान की कूटनीतिक क्षमता पर तंज कसे जाने लगे। यह केवल एक तकनीकी गलती नहीं थी, बल्कि उस अव्यवस्था का प्रतीक बन गई जो कई बार पाकिस्तान की नीतिगत कार्यप्रणाली में दिखाई देती है।
दरअसल, किसी भी देश के आधिकारिक सोशल मीडिया संदेश केवल सूचना नहीं होते, वे उसकी विदेश नीति की झलक भी होते हैं। ऐसे में यदि कोई ट्वीट तथ्यात्मक रूप से गलत साबित हो जाए तो उसका असर बहुत व्यापक होता है। यही वजह है कि दुनिया की बड़ी शक्तियां अपने डिजिटल संदेशों को जारी करने से पहले कई स्तरों पर जांच-पड़ताल करती हैं। लेकिन पाकिस्तान की इस चूक ने यह सवाल खड़ा कर दिया कि क्या उसकी कूटनीतिक व्यवस्था इतनी कमजोर हो चुकी है कि एक साधारण ट्वीट भी सही ढंग से जारी नहीं किया जा सकता ।
डिजिटल युग में गलत सूचना केवल कुछ मिनटों की समस्या नहीं होती। एक बार कोई गलत ट्वीट सामने आ जाए तो उसे हटाना समाधान नहीं बनता, क्योंकि तब तक उसका स्क्रीनशॉट पूरी दुनिया में फैल चुका होता है। यही इस मामले में भी हुआ। ट्वीट हटाए जाने के बाद भी उसका मजाक उड़ाया जाता रहा और पाकिस्तान को सफाई देने की नौबत आ गई ।
यह कहा जा सकता है कि पाकिस्तान का यह गलत ट्वीट केवल एक सोशल मीडिया पोस्ट नहीं था, बल्कि एक ऐसी चूक थी जिसने दुनिया के सामने उसकी कूटनीतिक तैयारी और गंभीरता पर सवाल खड़े कर दिए हैं । अंतरराष्ट्रीय राजनीति में प्रतिष्ठा धीरे-धीरे बनती है, लेकिन एक छोटी गलती उसे पल भर में धूमिल कर सकती है । पाकिस्तान के इस ट्वीट ने उसी कठोर सच्चाई को एक बार फिर उजागर कर दिया है ।
,,,,, कौशल सिखौला
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पाकिस्तान का रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ बहुत उछल रहा था..... इजराइल के खिलाफ ज़हर उगल रहा था.
X वालों ने इसका account ही suspend कर दिया 😂😂
X वालों ने इसका account ही suspend कर दिया 😂😂
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इजराइली एयर फोर्स के हमले से दक्षिणी लेबनान के अल-शहाबिया शहर में भारी तबाही
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The Talks in Islamabad has been POSTPONED till Tomorrow Morning, Neither JD Vance nor the Iranian Delegations have landed so far.
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यह बोलने की क्या जरूरत है आर्मी चीफ को?
युद्ध में सामने वाला दुश्मन होता है.... और सौ बात की एक बात.... सबका मालिक एक नहीं होता.... आतंकियों का मालिक अलग होता है 🙏🙏
दुश्मन सेना का चीफ गजवा ऐ हिन्द की बात करे... ऐसे में इस तरह की बात करना शोभा नहीं देता
युद्ध में सामने वाला दुश्मन होता है.... और सौ बात की एक बात.... सबका मालिक एक नहीं होता.... आतंकियों का मालिक अलग होता है 🙏🙏
दुश्मन सेना का चीफ गजवा ऐ हिन्द की बात करे... ऐसे में इस तरह की बात करना शोभा नहीं देता
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𝗕𝗘𝗠𝗟 𝗨𝗻𝘃𝗲𝗶𝗹𝘀 𝗜𝗻𝗱𝗶𝗮’𝘀 𝗙𝗶𝗿𝘀𝘁 𝗜𝗻𝗱𝗶𝗴𝗲𝗻𝗼𝘂𝘀 𝟯𝟱-𝗧𝗼𝗻 𝗘𝗹𝗲𝗰𝘁𝗿𝗶𝗰 𝗗𝘂𝗺𝗽 𝗧𝗿𝘂𝗰𝗸, 𝗔𝗱𝘃𝗮𝗻𝗰𝗶𝗻𝗴 𝗚𝗿𝗲𝗲𝗻 𝗠𝗶𝗻𝗶𝗻𝗴 𝗦𝗼𝗹𝘂𝘁𝗶𝗼𝗻𝘀.
The 35-ton Electric Dump Truck is powered by a high-efficiency Permanent Magnet Synchronous Motor (PMSM) and is designed for operation in demanding mining environments. With a payload capacity of 35 tons and a gross vehicle weight of approximately 60 tons, the truck is optimised for heavy-duty, stop-start duty cycles typical of mining applications.
The electric drivetrain delivers an energy efficiency of 85–90%, significantly higher than conventional diesel-powered equipment.
The 35-ton Electric Dump Truck is powered by a high-efficiency Permanent Magnet Synchronous Motor (PMSM) and is designed for operation in demanding mining environments. With a payload capacity of 35 tons and a gross vehicle weight of approximately 60 tons, the truck is optimised for heavy-duty, stop-start duty cycles typical of mining applications.
The electric drivetrain delivers an energy efficiency of 85–90%, significantly higher than conventional diesel-powered equipment.
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अपुन को येईच वाला रिचार्ज मांगता 😁😁
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आज की सबसे अच्छी खबर थी... सेना द्वारा कर्नल पुरोहित जी के Promotion को go ahead देना..... अब कर्नल पुरोहित ब्रिगेडियर बन कर रिटायर होंगे.
कर्नल पुरोहित एक ऐसे महामानव हैं..... जिन्हे अपने देशप्रेम और निस्वार्थ सेवा के बदले में यातना मिली, गद्दार और आतंकवादी का टैग मिला.... 17 साल का दाग़दार जीवन मिला... जिनकी personal और professional जिंदगी इसलिए बर्बाद कर दी गई.. क्यूंकि वह अपनी जान झोंक कर देश के दुश्मनो से लड़ रहे थे.
Saffron Terror का एक छद्म आवरण बनाया गया... और कर्नल पुरोहित को उसका केंद्र बना कर हिन्दुओ और भारतीय सेना पर लांछन लगाया गया. उन्हें 17 साल लगे इस दुश्चक्र से निकलने में.
और आज दिल को राहत मिलती है... जब सेना और सरकार पूरी मजबूती से उनके साथ खड़ी दिखती है.
कर्नल पुरोहित के साथ क्या हुआ.. किसने किया.. कैसे किया... यह तो शायद कभी बाहर नहीं आ पायेगा.... लेकिन उनकी जिंदगी से मिलती जुलती एक फ़िल्म बनाई गई थी..... Match Fixing - The Nation at Stake.
यह Hotstar पर मिलेगी.... और इसे जरूर देखिये. कर्नल पुरोहित पर क्या गुजरा है...उसकी एक छोटी सी अनुभूति आपको इस फ़िल्म में देखने को मिल सकती है.
बड़े ही दुःख और बेहद शर्म की बात है कि हमारे ही देश की सरकार ने हमारी ही सेना के इतने शानदार अफसर को आतंकवादी बनाने में ऐड़ी चोटी का जोर लगा दिया था.
कर्नल पुरोहित एक ऐसे महामानव हैं..... जिन्हे अपने देशप्रेम और निस्वार्थ सेवा के बदले में यातना मिली, गद्दार और आतंकवादी का टैग मिला.... 17 साल का दाग़दार जीवन मिला... जिनकी personal और professional जिंदगी इसलिए बर्बाद कर दी गई.. क्यूंकि वह अपनी जान झोंक कर देश के दुश्मनो से लड़ रहे थे.
Saffron Terror का एक छद्म आवरण बनाया गया... और कर्नल पुरोहित को उसका केंद्र बना कर हिन्दुओ और भारतीय सेना पर लांछन लगाया गया. उन्हें 17 साल लगे इस दुश्चक्र से निकलने में.
और आज दिल को राहत मिलती है... जब सेना और सरकार पूरी मजबूती से उनके साथ खड़ी दिखती है.
कर्नल पुरोहित के साथ क्या हुआ.. किसने किया.. कैसे किया... यह तो शायद कभी बाहर नहीं आ पायेगा.... लेकिन उनकी जिंदगी से मिलती जुलती एक फ़िल्म बनाई गई थी..... Match Fixing - The Nation at Stake.
यह Hotstar पर मिलेगी.... और इसे जरूर देखिये. कर्नल पुरोहित पर क्या गुजरा है...उसकी एक छोटी सी अनुभूति आपको इस फ़िल्म में देखने को मिल सकती है.
बड़े ही दुःख और बेहद शर्म की बात है कि हमारे ही देश की सरकार ने हमारी ही सेना के इतने शानदार अफसर को आतंकवादी बनाने में ऐड़ी चोटी का जोर लगा दिया था.
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