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हिमांता दा इस बार खेड़ा का पेड़ा बनाये बिना नहीं छोड़ेंगे 😂😂
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कल भारत ने कुछ असाधारण हासिल कर लिया है..... जिसके बारे में ज्यादा लोगों को पता नहीं.... इस उपलब्धि की अहमियत का पता नहीं.
कलपक्कम न्यूक्लियर कॉम्प्लेक्स में प्रोटोटाइप फास्ट ब्रीडर रिएक्टर (PFBR) ने “क्रिटिकलिटी” प्राप्त कर ली है।
परमाणु शब्दावली में “क्रिटिकलिटी” उस बिंदु को कहा जाता है जब रिएक्टर में परमाणु विखंडन (nuclear fission) की प्रक्रिया स्व-निर्वाह योग्य (self-sustaining) हो जाती है।
इसका अर्थ है कि उत्पन्न न्यूट्रॉनों की संख्या इतनी होती है जो बिना बाहरी हस्तक्षेप के प्रतिक्रिया को जारी रख सके।
भले ही इसका मतलब यह नहीं है कि रिएक्टर अभी पूर्ण शक्ति पर विद्युत उत्पादन कर रहा है, लेकिन यह किसी भी परमाणु संयंत्र के संचालन में सबसे महत्वपूर्ण चरणों में से एक है।
अधिकांश लोगों को यह विज्ञान या तकनीकी का concept लग सकता है, लेकिन वास्तव में यह दशकों की धैर्य, सटीकता और विश्वास की परिणति है... जो हमारी सरकारों, हमारे Nuclear Ecosystem, हमारे वैज्ञानिको ने दिखाया है.
भारत में ही डिज़ाइन और निर्मित — भारतीय नाभिकीय विद्युत निगम लिमिटेड (BHAVINI) और इंदिरा गाँधी परमाणु अनुसंधान केंद्र जैसी संस्थाओं के माध्यम से — यह रिएक्टर ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
स्वच्छ ऊर्जा की ओर एक कदम। और भारत की विशाल थोरियम क्षमता को उजागर करने की दिशा में — वह स्वप्न जिसे दशकों पहले होमी जहांगीर भाभा ने देखा था।
जब दुनिया ऊर्जा पर बहस कर रही है, भारत अपना भविष्य गढ़ रहा है। और इस उपलब्धि के पीछे वे लोग हैं जिन्हें हम शायद ही कभी देखते हैं — वैज्ञानिक जिन्होंने वर्षों तक बिना सुर्खियों के काम किया, इंजीनियर जिन्होंने ऐसी समस्याएं सुलझाईं जिन्हें पहले किसी ने नहीं सुलझाया था, और वे टीमें जो तब भी डटी रहीं जब हार मान लेना आसान होता।
यहाँ यह बताना जरूरी है कि डॉक्टर भाभा 50,60 के दशक में ही Thorium के इस्तेमाल से ऊर्जा उत्पादन करने के Concept पर जोर शोर से काम कर रहे थे... उन्हें ही भारत के 3 Stage Nuclear प्रोग्राम का पितामह कहा जाता है.
दुनिया में सबसे ज्यादा Thorium के ज्ञात भण्डार भारत के पास हैं... दुनिया का 25% भारत के पास है.... 10 लाख टन से भी ज्यादा.
Thorium को ऊर्जा का हैरतअंगेज स्त्रोत माना जाता है.
इसे ऐसे समझिये.
कि अगर आप 1 किलो कोयला जलाएं...तो उससे 8 kWH ऊर्जा उत्पन्न होगी.
अगर आप 1 किलो Uranium-235 को पूरी तरह से Fission करें... तो इससे 24,000,000 kWh ऊर्जा उत्पन्न होगी.
वहीं 1 किलो Thorium से इतनी ऊर्जा उत्पन्न होगी.. जितना 200 टन Uranium 3500 टन कोयले को Process करने से होगी.
थोरियम की ऊर्जा क्षमता कोयले से लाखों गुना अधिक है, लेकिन यह सीधे नहीं जलता; इसे रिएक्टर में U-233 में बदलकर इस्तेमाल करना पड़ता है..... और अब भारत ने यह क्षमता विकसित कार ली है.
भारत के पास जितना Thorium है.... उसमे भारत 3,58,000 Giga Watt Years Electricity generate कर सकता है.
आज भारत पूरे साल में 170-190 Giga Watt Years electricity Generate करता है.
मतलब... अगर भारत Thorium Based Reactor बना ले... तो कई सौ वर्षों तक हम Clean Energy द्वारा अपनी जरूरतें पूरी कर सकते हैं.
यह निश्चित ही भारत के लिए गर्व का क्षण है..... आज भारत के Nuclear प्रोग्राम की 3rd Stage activate हो गई है..... ऊर्जा के मामले में आत्मनिर्भरता की ओर यह बहुत बड़ा कदम है.
हर उस वैज्ञानिक और इंजीनियर को प्रणाम — जिन्होंने केवल रिएक्टरों को ही नहीं, बल्कि भविष्य को भी ऊर्जा दी है।
कलपक्कम न्यूक्लियर कॉम्प्लेक्स में प्रोटोटाइप फास्ट ब्रीडर रिएक्टर (PFBR) ने “क्रिटिकलिटी” प्राप्त कर ली है।
परमाणु शब्दावली में “क्रिटिकलिटी” उस बिंदु को कहा जाता है जब रिएक्टर में परमाणु विखंडन (nuclear fission) की प्रक्रिया स्व-निर्वाह योग्य (self-sustaining) हो जाती है।
इसका अर्थ है कि उत्पन्न न्यूट्रॉनों की संख्या इतनी होती है जो बिना बाहरी हस्तक्षेप के प्रतिक्रिया को जारी रख सके।
भले ही इसका मतलब यह नहीं है कि रिएक्टर अभी पूर्ण शक्ति पर विद्युत उत्पादन कर रहा है, लेकिन यह किसी भी परमाणु संयंत्र के संचालन में सबसे महत्वपूर्ण चरणों में से एक है।
अधिकांश लोगों को यह विज्ञान या तकनीकी का concept लग सकता है, लेकिन वास्तव में यह दशकों की धैर्य, सटीकता और विश्वास की परिणति है... जो हमारी सरकारों, हमारे Nuclear Ecosystem, हमारे वैज्ञानिको ने दिखाया है.
भारत में ही डिज़ाइन और निर्मित — भारतीय नाभिकीय विद्युत निगम लिमिटेड (BHAVINI) और इंदिरा गाँधी परमाणु अनुसंधान केंद्र जैसी संस्थाओं के माध्यम से — यह रिएक्टर ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
स्वच्छ ऊर्जा की ओर एक कदम। और भारत की विशाल थोरियम क्षमता को उजागर करने की दिशा में — वह स्वप्न जिसे दशकों पहले होमी जहांगीर भाभा ने देखा था।
जब दुनिया ऊर्जा पर बहस कर रही है, भारत अपना भविष्य गढ़ रहा है। और इस उपलब्धि के पीछे वे लोग हैं जिन्हें हम शायद ही कभी देखते हैं — वैज्ञानिक जिन्होंने वर्षों तक बिना सुर्खियों के काम किया, इंजीनियर जिन्होंने ऐसी समस्याएं सुलझाईं जिन्हें पहले किसी ने नहीं सुलझाया था, और वे टीमें जो तब भी डटी रहीं जब हार मान लेना आसान होता।
यहाँ यह बताना जरूरी है कि डॉक्टर भाभा 50,60 के दशक में ही Thorium के इस्तेमाल से ऊर्जा उत्पादन करने के Concept पर जोर शोर से काम कर रहे थे... उन्हें ही भारत के 3 Stage Nuclear प्रोग्राम का पितामह कहा जाता है.
दुनिया में सबसे ज्यादा Thorium के ज्ञात भण्डार भारत के पास हैं... दुनिया का 25% भारत के पास है.... 10 लाख टन से भी ज्यादा.
Thorium को ऊर्जा का हैरतअंगेज स्त्रोत माना जाता है.
इसे ऐसे समझिये.
कि अगर आप 1 किलो कोयला जलाएं...तो उससे 8 kWH ऊर्जा उत्पन्न होगी.
अगर आप 1 किलो Uranium-235 को पूरी तरह से Fission करें... तो इससे 24,000,000 kWh ऊर्जा उत्पन्न होगी.
वहीं 1 किलो Thorium से इतनी ऊर्जा उत्पन्न होगी.. जितना 200 टन Uranium 3500 टन कोयले को Process करने से होगी.
थोरियम की ऊर्जा क्षमता कोयले से लाखों गुना अधिक है, लेकिन यह सीधे नहीं जलता; इसे रिएक्टर में U-233 में बदलकर इस्तेमाल करना पड़ता है..... और अब भारत ने यह क्षमता विकसित कार ली है.
भारत के पास जितना Thorium है.... उसमे भारत 3,58,000 Giga Watt Years Electricity generate कर सकता है.
आज भारत पूरे साल में 170-190 Giga Watt Years electricity Generate करता है.
मतलब... अगर भारत Thorium Based Reactor बना ले... तो कई सौ वर्षों तक हम Clean Energy द्वारा अपनी जरूरतें पूरी कर सकते हैं.
यह निश्चित ही भारत के लिए गर्व का क्षण है..... आज भारत के Nuclear प्रोग्राम की 3rd Stage activate हो गई है..... ऊर्जा के मामले में आत्मनिर्भरता की ओर यह बहुत बड़ा कदम है.
हर उस वैज्ञानिक और इंजीनियर को प्रणाम — जिन्होंने केवल रिएक्टरों को ही नहीं, बल्कि भविष्य को भी ऊर्जा दी है।
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India has asked all its citizens in Iran to stay where they are and maintain distance from military sites, electric/civil infrastructures for 48 hours.
In my opinion... similar Advisories are required for Indians living in all GCC Countries.
जब दोनों तरफ (इरान और अमेरिका) पागल लोग हैं... तो नुकसान सभी का होगा.
In my opinion... similar Advisories are required for Indians living in all GCC Countries.
जब दोनों तरफ (इरान और अमेरिका) पागल लोग हैं... तो नुकसान सभी का होगा.
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अगर अब भी यह युद्ध नहीं रुका.... तो भयंकर तबाही निश्चित है.
इरान बड़े स्तर पर नष्ट होगा.... लेकिन साथ ही GCC के अन्य देशों को भी ले डूबेगा.
अमेरिका का कुछ नहीं बिगड़ेगा... वो कुछ दिन आराम करेंगे.. और फिर नया शिकार करने के लिए आगे बढ़ जाएंगे...... क्यूबा, ग्रीनलैंड, अलाना फलाना लैंड... कहीं भी बांस कर देंगे.
इरान बड़े स्तर पर नष्ट होगा.... लेकिन साथ ही GCC के अन्य देशों को भी ले डूबेगा.
अमेरिका का कुछ नहीं बिगड़ेगा... वो कुछ दिन आराम करेंगे.. और फिर नया शिकार करने के लिए आगे बढ़ जाएंगे...... क्यूबा, ग्रीनलैंड, अलाना फलाना लैंड... कहीं भी बांस कर देंगे.
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Bangladesh Foreign Minister Hasan Mahmud arrives in Delhi, India.
सन्देश दिया जाएगा.....कायदे में रहोगे तो फायदे में रहोगे.
सन्देश दिया जाएगा.....कायदे में रहोगे तो फायदे में रहोगे.
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Here comes our own Stone Cold 'Himanta' Austin
WWF/WWE Fans Assemble 😁😁
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याद रहे कि ईरान जिस देश के पास एक अदद वायुसेना तक नहीं बची है से अपने एक पायलट को बचाने के लिए अमेरिका को पूरा लाव लश्कर लेकर जाना पड़ा उसमें भी अपने 2 C310 प्लेन को खुद ही बम से उड़ाने के लिए विवश होना पड़ा था।
वहीं हमारे पायलट को परमाणु शक्ति संपन्न हमारा दुश्मन खुद बार्डर तक बाइज्जत छोड़ने आया क्योंकि भारत के संभावित हमले के डर से पाकिस्तान के तत्कालीन प्रधानमंत्री इमरान खान के पैर कांप रहे थे।
विडियो में पाकिस्तानी सांसद अयाज शादिक खुद उस वक्त के हालात बता रहा है।
वहीं हमारे पायलट को परमाणु शक्ति संपन्न हमारा दुश्मन खुद बार्डर तक बाइज्जत छोड़ने आया क्योंकि भारत के संभावित हमले के डर से पाकिस्तान के तत्कालीन प्रधानमंत्री इमरान खान के पैर कांप रहे थे।
विडियो में पाकिस्तानी सांसद अयाज शादिक खुद उस वक्त के हालात बता रहा है।
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अल फलाह पर ED का बड़ा एक्शन!
39 करोड़ की संपत्ति कुर्क, यूनिवर्सिटी चेयरमैन जवाद पर कसा शिकंजा।
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने मनी लॉन्ड्रिंग जांच के तहत अल फलाह यूनिवर्सिटी के अध्यक्ष जवाद अहमद सिद्दीकी की 39.45 करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त की है।
इसमें दिल्ली का घर, फरीदाबाद की जमीन और बैंक खाते शामिल हैं।
39 करोड़ की संपत्ति कुर्क, यूनिवर्सिटी चेयरमैन जवाद पर कसा शिकंजा।
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने मनी लॉन्ड्रिंग जांच के तहत अल फलाह यूनिवर्सिटी के अध्यक्ष जवाद अहमद सिद्दीकी की 39.45 करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त की है।
इसमें दिल्ली का घर, फरीदाबाद की जमीन और बैंक खाते शामिल हैं।
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Middle East इस समय दुनिया का सबसे बड़ा Pressure Cooker बन चुका है.
भयानक तनाव है... बेहद डरावना माहौल है.
इरान में लोग Nuclear War की तैयारी कर रहे हैं... अमेरिका के Bombers उड़ान भर चुके हैं.
GCC के देशों में सरकारें लोगों से संयम रखने और घरों शेल्टर्स के अंदर रहने को कह रही है. बहरीन, दुबई, कुवैत और सऊदी अरब में साईरन बज रहे हैं.... बड़े हाईवे, इंफ्रास्ट्रक्चर और आयल Plants आदि बंद कर दिए गए हैं.
इरान पर हमले जारी हैं.. बदले में इरान का पलटवार भी जारी है.
आशा है.... कोई भी देश Nuclear अटैक करने की मूर्खता नहीं करेगा.... अन्यथा यह लड़ाई कहाँ जा कर थमेगी... किसी को नहीं पता.
देखते हैं... कौन इस Pressure Cooker का Safety वाल्व बनता है.
भयानक तनाव है... बेहद डरावना माहौल है.
इरान में लोग Nuclear War की तैयारी कर रहे हैं... अमेरिका के Bombers उड़ान भर चुके हैं.
GCC के देशों में सरकारें लोगों से संयम रखने और घरों शेल्टर्स के अंदर रहने को कह रही है. बहरीन, दुबई, कुवैत और सऊदी अरब में साईरन बज रहे हैं.... बड़े हाईवे, इंफ्रास्ट्रक्चर और आयल Plants आदि बंद कर दिए गए हैं.
इरान पर हमले जारी हैं.. बदले में इरान का पलटवार भी जारी है.
आशा है.... कोई भी देश Nuclear अटैक करने की मूर्खता नहीं करेगा.... अन्यथा यह लड़ाई कहाँ जा कर थमेगी... किसी को नहीं पता.
देखते हैं... कौन इस Pressure Cooker का Safety वाल्व बनता है.
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