RAJASTHAN ORGANIC AGRO KISAN SANSTHA
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इस चैनल के माध्यम से हम आपको जहर मुक्त,पोषण युक्त प्राकृतिक जैविक खेती,फलोद्यान, सब्जी उत्पादन, फूल उत्पादन, पशुपालन और फूड प्रोसेसिंग से संबंधित सभी प्रकार की नई व पुरानी जानकारियां समय-समय पर उपलब्ध करवाते रहेंगे।
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कपास की फसल में लगने वाली सुंडी, लट, लारवा
#कपास_की_गुलाबी_सुंडी (#Pink_ballworm/#Pectinophora_gossypealla ):-
यह एक प्रौढ़ गहरे स्लेटी चमकीले रंग का 8 से 9 मि.मी. आकार वाला फुर्तीला कीट है। अंडे हल्के गुलाबी व बैंगनी रंग लिए होते हैं, जो कि प्रायः नई विकसित पत्तियों व कलियों पर पाए जाते हैं। प्रारम्भिक अवस्था में लटों का रंग सफ़ेद होता है, जो कि बाद में गुलाबी हो जाते हैं।
अंडो से निकलने वाली सुंडी डोडियों में छेद कर घूस जाती है। जिसके कारण पुष्प पूर्ण विकास नहीं कर पाते है तथा प्रभावित पुष्प जल्दी ही झड़ जाते हैं। पूर्ण विकसित लटों की लम्बाई 10 से 12 मि.मी. होती है।
#गुलाबी_सुंडी के प्रकोप की निगरानी के लिए प्रतिदिन सुबह-शाम खेत का निरीक्षण करते रहें। गुलाबी सुंडी से प्रभावित नीचे गिरे टिंडों, फूल डोडी व फूल को एकत्रित कर नष्ट कर दें। इस कीट की अंतिम पीढ़ी की इल्लियाँ टिंडों के अंदर दो बीजों को जोड़कर उसके अंदर शीत निष्क्रियता में चली जाती हैं। जिस खेत में गुलाबी सुंडी का प्रकोप न हुआ हो उस कपास को अलग से चुगाई करें व अलग ही भंडारित करें।

#कपास_की_अमेरिकन_सुंडी (#Cotton_ballworm/#Helicovorpa_armigera):-
#हैलीकोवर्पाआर्मीजेरा को #अमेरिकन_सूंडी कहा जाता है। यह हरे रंग की होती है तथा रेंगकर चलती है। टिंडो को नष्ट कर देती है। छोटी अवस्था में यह पत्तों के हरे पदार्थ को खाती है। बड़ी होने पर यह पत्ते ही नहीं टहनी, कलियां, फूल और डोडी/टिंडो को भोजन बनाती है। टिंडो(डोडा) इसका प्रिय भोजन होता है। टिंडो में यह गोल छेद करके घुसती है और अंदर बन रहे बीज के सभी भागो को खाती है। एक सुंडी कई डोडियों को नुकसान पहुँचाती है।
किसान कपास की फसल के आसपास खड़ी फसल के ऊपर इस सुंडी के प्रकोप की निगरानी रखें, अगर अन्य फसल पर इसका प्रकोप, है तो सम्भवत: यह सूंडी अन्य फसल से कपास की फसल पर आकर आक्रमण कर सकती है।

#कपास_की_चित्तीदार_सुंडी (#Spotted_ballworm/
#Earias_vittella):-
इसके वयस्क शलभ हल्के रंग के होते हैं इसकी एक प्रजाति के आगे के पंख पर पंख पे एक सफेद धारी भी होती है। शुरू की इल्लियाँ शाखाओं के शीर्ष को भेदन करके खाती है। बाद में कलियों, फूलों और टिंडों को क्षतिग्रस्त करती है तथा क्षतिग्रस्त टिंडे में अंदर जाने के रास्ते को अपने त्यागित मल पदार्थ से बंद कर देती है।
चित्तीदार सूंडी कपास, भिंडी, गुड़हल के अलावा कुछ अन्य फसलों पर अपना जीवनचक्र पूरा करती है | इसकी दो प्रजातियों ज्यादा प्रभावी है। दोनों प्रजातियों के नुकसान का तरीका एक जैसा है। चित्तीदार सूंडी का प्रकोप फसल की बिजाई के 3 सप्ताह बाद ही शुरू हो जाता है | फल–फूल आने से पहले चित्तीदार सूंडी तने के उपरी भाग पर आक्रमण करके उसमें छिद्र कर देती है। पौधे के उपरी हिस्सों को नुकसान होने के कारण कई बार पौधा ऊपर से सूख जाता है | इसके द्वारा नुकसान की गई फूल डोंडियाँ दूर से ही पहचानी जा सकती हैं | फूल बनने से पहले ही उनकी पंखुड़िया फैली हुई नजर आ जाती हैं। कपास में चित्तीदार सूंडीया एक ही फूल ड़ोंडिया तक ही सीमीत नही रहती है। एक से ज्यादा टिंडे/फूल/कली को नुकसान पहुँचाती हैं। नुकसान किये गए टिंडे/कली पर इसका मलमूत्र साफ़ दिखाई पड़ता है। टिंडा दुसरे कीटाणुओं के आक्रमण का शिकार हो जाता है| देसी कपास में चित्तीदार सूंडी के प्रकोप से फूल डोंडियों से टिंडे पुरे बड़े आकार के नहीं बनते और टिंडे लगातार नीचे गिरते रहते हैं | इसके कारण फसल के उत्पादन पर विपरीत प्रभाव पड़ता है। कीट से प्रभावित टिंडे से प्राप्त रूई भी अच्छी गुणवत्ता की न होने से बाजार भाव भी प्रभावित होता है।
#तंबाकू_की_सुंडी (#Tobacco_catterpillar/#Spodoptera_litura):-
वयस्क पतंगे के अगले पंख गहरे भूरे रंग के सफेद लहरदार धारियों युक्त व पिछले पंख सफेद होते है।
कैटरपिलर शुरू में गहरे निशान के साथ हल्के हरे रंग के होते हैं जो बाद में 25-35 मिमी लंबे कई अनुप्रस्थ और अनुदैर्ध्य बैंड के साथ गहरे भूरे रंग के हो जाते हैं।
प्रारंभ में शिशु सुंडी तेजी से झुंड में मुख्य तौर पर पत्ते की ऊपरी सतह को अपना शिकार बनाती हैं हरे भाग को खाती है। और पत्ते खाकर इसकी नाड़ियां छोड़ देती हैं।
यह सुंडियां झुंड में हमला करती हैं
बाद में अकेली सुंडी (लट) पुष्प गुच्छों, कलियों व कच्चे टिंडों को खाकर काफी नुकसान करती है।
यह साल भर पाया जाता है।

इनके नियंत्रण से संबंधित।अधिक जानकारी के लिए संपर्क करें।
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#Biological_control
तरबुज, खरबुजा, खीरा, लोकी, करेला, तोरई, गिलकी, कद्दु, तरककडी, चप्पन टिण्डा, जुकीनी, पेठा, टिड्स, आदि मे लगने वाले सबसे हानिकारक कीट फल मक्खी का मात्र एक ही उपाय रॉक्स आल इन वन फल मक्खी ल्युर व ट्रैप।
फल मक्खी ल्युर व ट्रैप कम्पलीट सेट मात्र 45₹/सेट से शुरु।

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*_फल मक्खी ल्युर व ट्रैप कम्पलीट सेट 45₹/सेट से शुरु है_*

*बेल वर्गीय सब्जियों की फल मक्खी क्या है*
फल मक्खी एक उड़ने वाला कीट है जो प्राय: देश के अधिकांश भाग में पायी जाती है। यह मक्खी वयस्क एवं लार्वा अवस्था में बेल वर्गीय सब्जियों से ही भोजन ग्रहण करती है । यह सब्जीयो की महक से आकर्षित होती है और बेल वर्गीय सब्जियों में अंडे देकर अपना जीवन चक्र आगे बढ़ाती है।
फल मक्खी #बहुभक्षी होती है इसलिए कई प्रकार की सब्जियों पर इसकी निर्भरता रहती है।

*फल मक्खी का जीवन चक्र*
अण्डे – मादा मक्खी कच्ची व छोटी अवस्था मे बेल वर्गीय सब्जियां में अण्डे देती है जिनसे दो-तीन दिन में लार्वा बाहर आता है।
लार्वा – लार्वा अधिकांशतः सब्जियों के फल को क्षति पहुँचात है और कीट की यह स्थिति 10 से 12 दिन की होती है।
प्यूपा – जीवन चक्र का यह समय आमतौर पर मिट्टी में 10 से 12 दिन का होता है |
वयस्क – यह प्यूपा के बाद की स्थिति है , एक वयस्क फल मक्खी का जीवन काल 2 से 3 माह का होता है।

*फल मक्खी बेल वर्गीय सब्जियों को कैसे क्षति पहुंचाती है*
वयस्क फल मक्खी सब्जियो में छेद करके उसमें अण्डे देती है।
अण्डो से बहुत छोटे कीट / लार्वा निकलते है जो पूर्णत: फल/ सब्जियों पर आश्रित होते हैं।
लार्वा फलों को क्षति पहुंचाते हुए सब्जियां को खराब कर देते है व फल सड कर मिट्टी पर गिर जाते है
आम तौर पर यह फल मक्खी पुरे साल भर बेल वर्गीय सब्जियों को खराब करती रहते है।
फल सब्जिया नही मिलने पर यह मिट्टी में सुसुप्त अवस्था में रहती हैं।

जब यह फल मक्खी की लार्वा अवस्था भूमि में रहती हैं तब सब्जियों के पौधों की जड़ों को खराब करते हैं जिससे पौधे सूख जाते हैं और किसान साथी इस समय अनेक प्रकार के फंगीसाइड या इंसेंटिसाइड का सब्जियों के ऊपर में स्प्रे करते रहते हैं।

लक्षण –
सब्जियों में बहुत छोटे छोटे छिद्र एवं भूरे रंग का धब्बा स्पष्ट दिखाई देता है।
संक्रमण क्षेत्र से सब्जिया धीरे-धीरे सड़ने लगती है।
सड़ी हुई सब्जिया पौधो या बेल से अलग हो जाता है, अगर समय रहते इन फलो को खेत / जमीन से एकत्र करके नष्ट नहीं किया जाता है तो यह तरह तरह के कवको को आकर्षित करते हैं जिससे कई प्रकार के रोगों की सम्भावना रहती है।

*रॉक्स_फल_मक्खी ट्रैप का उपयोग कब करें*
सब्जियों के खेत मे फूल आने से 2-3 दिन पहले ट्रैप लगाएं। रॉक्स फल मक्खी ट्रैप का उपयोग फल मक्खियों के नए संक्रमण का पता लगाने के साथ-साथ मक्खी की आबादी की निगरानी के लिए भी किया जा सकता है।
अधिक जानकारी के लिए संपर्क करें।
राजस्थान ऑर्गेनिक एग्रो किसान संस्था
095292 50150
#Roakskisan @Roakskisan
https://wa.me/p/7088965451169634/919529250150
*करेला, लौकी, कद्दू, तरबूज, खरबूजा, पेठा, ककड़ी, टिण्डा, तरककडी, तोरई, गिल्की और खीरा जैसी कद्दूवर्गीय फसलों का उत्पादन भी आसान नहीं है।*

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*बेल वर्गीय सब्जियों की फल मक्खी क्या है*
फल मक्खी एक उड़ने वाला कीट है जो प्राय: देश के अधिकांश भाग में पायी जाती है। यह मक्खी वयस्क एवं लार्वा अवस्था में बेल वर्गीय सब्जियों से ही भोजन ग्रहण करती है । यह सब्जीयो के फुलो की महक से आकर्षित होती है और बेल वर्गीय सब्जियों में अंडे देकर अपना जीवन चक्र आगे बढ़ाती है।
फल मक्खी *बहुभक्षी* होती है इसलिए कई प्रकार की सब्जियों पर इसकी निर्भरता रहती है।

*फल मक्खी का जीवन चक्र*
अण्डे – मादा मक्खी कच्ची व छोटी अवस्था मे बेल वर्गीय सब्जियां में अण्डे देती है जिनसे दो-तीन दिन में लार्वा बाहर आता है।
लार्वा – लार्वा अधिकांशतः सब्जियों के फल को क्षति पहुँचात है और कीट की यह स्थिति 10 से 12 दिन की होती है।
प्यूपा – जीवन चक्र का यह समय आमतौर पर मिट्टी में 10 से 12 दिन का होता है |
वयस्क – यह प्यूपा के बाद की स्थिति है , एक वयस्क फल मक्खी का जीवन काल 2 से 3 माह का होता है।

*फल मक्खी बेल वर्गीय सब्जियों को कैसे क्षति पहुंचाती है*
वयस्क फल मक्खी सब्जियो में छेद करके उसमें अण्डे देती है।
अण्डो से बहुत छोटे कीट / लार्वा निकलते है जो पूर्णत: फल/ सब्जियों पर आश्रित होते हैं।
लार्वा फलों को क्षति पहुंचाते हुए सब्जियां को खराब कर देते है व फल सड कर मिट्टी पर गिर जाते है। आम तौर पर यह फल मक्खी पुरे साल भर बेल वर्गीय सब्जियों को खराब करती रहते है।
फल सब्जिया नही मिलने पर यह मिट्टी में सुसुप्त अवस्था में रहती हैं।
*(फल मक्खी ल्युर व ट्रैप कम्पलीट सेट)*
जब यह फल मक्खी की लार्वा अवस्था भूमि में रहती हैं तब सब्जियों के पौधों की जड़ों को खराब करते हैं जिससे पौधे सूख जाते हैं और किसान साथी इस समय अनेक प्रकार के फंगीसाइड या इंसेंटिसाइड का सब्जियों के ऊपर में स्प्रे करते रहते हैं।

लक्षण –
सब्जियों में बहुत छोटे छोटे छिद्र एवं भूरे रंग का धब्बा स्पष्ट दिखाई देता है।
संक्रमण क्षेत्र से सब्जिया धीरे-धीरे सड़ने लगती है।
सड़ी हुई सब्जिया पौधो या बेल से अलग हो जाता है, अगर समय रहते इन फलो को खेत / जमीन से एकत्र करके नष्ट नहीं किया जाता है तो यह तरह तरह के कवको को आकर्षित करते हैं जिससे कई प्रकार के रोगों की सम्भावना रहती है।

*रॉक्स_फल_मक्खी ट्रैप का उपयोग कब करें*
सब्जियों के खेत मे फूल आने से 2-3 दिन पहले ट्रैप लगाएं। रॉक्स फल मक्खी ट्रैप का उपयोग फल मक्खियों के द्वारा संक्रमण का पता लगाने के साथ-साथ फल मक्खी की आबादी की निगरानी के लिए भी किया जा सकता है।
अधिक जानकारी के लिए संपर्क करें।
राजस्थान ऑर्गेनिक एग्रो किसान संस्था
095292 50150
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फल मक्खी का एक मात्रसमाधान (तरबूज-खरबूजा, खीरा, लौकी, करेला, तोरई, गिलकी, तरककडी, पेठा, कद्दु, स्नेकगार्ड, टिंडस, चप्पनकद्दू, जुकिनी, ककोड, परमल, कुंदरु आदि में) अब करें बिना किसी स्प्रे के #बेल_वर्गीय #सब्जियों में लगने वाली #फल_मक्खियों का समाधान #Roaks_All_In_One_Combo #Lure के द्वारा। #फल_मक्खी_ल्युर #फल_मक्खी_ट्रैप #फेरोमोन_ट्रैप
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हेलीकॉवर्पा आर्मीजेरा ल्युर का रिजल्ट टमाटर कि फसल मे ऑल इन वन कोम्बो ट्रैप के साथ
> हम है आपके खेतों के रक्षक
*🐛🦋🪰🪲🪳🐝🦟🕷🐜🦗कीट-पतंगों को आकर्षित करने वाले पौधे, पेड़ और फसलें वे होती हैं जिनमें सुगंध, रंग, रस (nectar), या विशेष प्रकार के रस का स्राव होता है जो कीटों पतंगो को अपनी ओर खींचता है। ये पौधे या तो *प्राकृतिक रूप से कीटों को आकर्षित* करते हैं या *उनके लिए भोजन व अंडे देने का स्थान बन जाते हैं।*

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🌷🌹🥀🪷🌺🌸🌹🌷💐🪷 1. फूलदार पौधे (Flowering Plants)
फूलों की गंध, रंग और रस के कारण कई कीट-पतंगे आकर्षित होते हैं।
इनमें मुख्यतः ये पौधे शामिल हैं:

> * गेंदा (Marigold): इसकी तेज गंध मक्खियों, सफेद मक्खी (whitefly), और फल-छेदक पतंगों को आकर्षित करती है।
> * सूरजमुखी (Sunflower): पराग और रस की प्रचुरता के कारण मधुमक्खियाँ, तितलियाँ और भृंग आकर्षित होते हैं।
> * गुलाब, चमेली, रजनीगंधा, गुड़हल: सुगंधित फूल रात और दिन दोनों समय पतंगों व तितलियों को खींचते हैं।
> * कनेर और कासिया: इनकी गंध और चमकीले फूलों से कई पराग-कीट आते हैं।
+91 9529250150
🌾🌱🌿☘️🍀🍃🍂🍁🌱🌿☘️ 2. कृषि फसलें (Field Crops)
कुछ प्रमुख फसलें जिनसे कीट पतंगे अधिक आकर्षित होते हैं:

> * कपास (Cotton): फलछेदक कीट, सफेद मक्खी, जासिड, माइट, हेलीकोवर्पा और गुलाबी बॉलवॉर्म को आकर्षित करती है।
> * अरहर, उड़द, मूंग: इनकी दाल-फसलें फूलने पर विभिन्न प्रकार के पतंगे (Helicoverpa, Spodoptera) और चूसक कीटों को खींचती हैं।
> * मक्का: मक्का तना छेदक, आर्मीवॉर्म, मोलवर्म जैसे पतंगे मक्का की ओर आकर्षित होते हैं।
> * चावल (धान): धान तना छेदक, पत्ती लपेटक और गंधी कीट जैसे अनेक प्रकार के कीटों को आकर्षित करता है।
> * गन्ना: गन्ना तना छेदक, पत्ताछेदक, और रस-चूसक कीटों के लिए पसंदीदा फसल है।
> * सब्ज़ियाँ (भिन्डी, टमाटर, बैंगन, पत्ता गोभी, फूलगोभी):
> इनसे फल छेदक, सफेद मक्खी, एफिड, थ्रिप्स और माइट जैसे कीट बहुत आकर्षित होते हैं।
रॉक्स किसान

🪻🪷🌻🌼🌸🌺🌷💐🌻🪻🌼 3. सुगंधित व औषधीय पौधे

> * तुलसी, लेमनग्रास, पुदीना: इनकी सुगंध विभिन्न प्रकार की मक्खियों और मधुमक्खियों को खींचती है।
> * गेंदा और तुलसी साथ में लगाने से खेत में लाभ होता है क्योंकि ये कीटों को मुख्य फसल से दूर आकर्षित कर लेते हैं (Trap Crop Effect)।
> * धतूरा, अरंडी, कासिया: इनके फूल व पत्तों पर कई पतंगे और मथ (moths) रात में आते हैं।
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🌳🌴🪾🌲🎄🌱🎋🌵🪾🪸🌳 4. पेड़-पौधे (Trees and Shrubs)

> * नीम, बबूल, कीकर: यद्यपि नीम कीटरोधी है, लेकिन इसके फूलों पर मधुमक्खियाँ और कुछ पराग-कीट आते हैं।
> * अमरूद, आम, जामुन, करंज, शीशम: इनके फूलों और रस से तितलियाँ, भृंग, और फलमक्खियाँ आकर्षित होती हैं।
> * महुआ और सिरिस: इनकी गंध रात में पतंगों को खींचती है।

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🌑🌘🌒🌗🌓🌖🌔🌕🌑🌙 5. रात्रिचर पतंगों को आकर्षित करने वाले पौधे

रात में खिलने वाले या सुगंध छोड़ने वाले पौधे विशेष रूप से पतंगों को खींचते हैं:

> * रजनीगंधा, रात-रानी, धतूरा, चमेली: इनकी तीव्र सुगंध और सफेद रंग रात्रिचर पतंगों को बहुत आकर्षित करता है।
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🌾🌱🌿🌾🌱🌿🌾🌱🌿🌾🌾 6. ट्रैप क्रॉप (Trap Crops)

कुछ पौधे जानबूझकर खेत के किनारे लगाए जाते हैं ताकि हानिकारक कीट पतंगे मुख्य फसल पर न जाएँ।

> * गेंदा (Marigold) → टमाटर, बैंगन की फसलों से पतंगों को खींचता है।
> * अरंडी (Castor) → कपास व दालों से Helicoverpa कीट को अपनी ओर आकर्षित करता है।
> * नपियर घास या बाजरा → तना छेदक को मक्का व धान से दूर रखती है।

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कीट पतंगे मुख्यतः उन पेड पौधों की ओर आकर्षित होते हैं जिनमें —

> * तेज़ गंध या सुगंध,
> * चमकीले रंगीन फूल,
> * रस (nectar) की उपलब्धता,
> * या नरम पत्तियाँ और रसदार फल/डंठल होते हैं।

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*हम है आपके खेतों के रक्षक*

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