PRAVEEN DAN CHARAN
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PRAVEEN DAN CHARAN pinned «🌾 राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा एवं पोषण मिशन (NFSNM) — राजस्थान 📌 फसलवार जिला कवरेज:- 🔹 गेहूँ (NFSM–Wheat) — 14 जिले बांसवाड़ा, भीलवाड़ा, बीकानेर, जयपुर, झुंझुनूं, जोधपुर, करौली, नागौर, पाली, प्रतापगढ़, सवाई माधोपुर, सीकर, टोंक एवं उदयपुर। 🔹 दलहन (NFSM–Pulses)…»
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मेरे लिए शिक्षक होना केवल पढ़ाना नहीं, बल्कि किसी विद्यार्थी के सपनों की यात्रा में एक छोटा-सा सहयात्री बनना है।

यदि मेरे पढ़ाए हुए किसी विद्यार्थी को कभी यह महसूस हो कि “मेरे शिक्षक ने मुझे केवल किताबें नहीं पढ़ाईं, बल्कि कठिन समय में आगे बढ़ना भी सिखाया”, तो इससे बड़ा सम्मान मेरे लिए कुछ नहीं होगा।

मेरी असली उपलब्धि कोई पद, पुरस्कार या प्रसिद्धि नहीं, बल्कि उन विद्यार्थियों की सफलता और विश्वास है, जो आज भी मुझे अपने शिक्षक के रूप में याद करते हैं।

अगर लोग मुझे एक अच्छे शिक्षक के रूप में याद रखें, तो यही मेरे जीवन का सबसे बड़ा सम्मान होगा।

आभार
प्रवीण दान चारण

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🇮🇳 BRICS India 2026 — Updated Facts

◼️ अध्यक्षता: भारत ने 1 जनवरी 2026 से BRICS की अध्यक्षता संभाली। यह भारत की चौथी BRICS Chairship है और 2026 में BRICS के 20 वर्ष पूरे हो रहे हैं।


◼️ लोगो: कमल (Lotus) से प्रेरित है और परंपरा एवं आधुनिकता का संयोजन दर्शाता है। इसकी पंखुड़ियों में BRICS सदस्य देशों के रंगों को शामिल किया गया है, जो विविधता में एकता एवं सामूहिक शक्ति का प्रतीक हैं।


◼️ ‘नमस्ते’ मुद्रा: लोगो के केंद्र में बनी नमस्ते मुद्रा सम्मान, संवाद, आत्मीयता और सहयोग को दर्शाती है।


◼️ मुख्य Theme:
“Building for Resilience, Innovation, Cooperation and Sustainability”
अर्थात् लचीलापन, नवाचार, सहयोग और सतत विकास के लिए निर्माण।


◼️ दृष्टिकोण: भारत की BRICS अध्यक्षता “Humanity First” और “People-centric” दृष्टिकोण पर आधारित है।


◼️ 2026 की प्रमुख प्राथमिकताएँ: Resilience + Innovation + Cooperation + Sustainability, साथ ही युवाओं, शिक्षा, संस्कृति, खेल और people-to-people exchanges पर जोर।
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RPSC और RSSB अब जिस स्तर और तरीके से प्रश्न पूछ रहे हैं, उसे ध्यान से समझिए।

इसीलिए मैं क्लास में बार-बार कहता हूँ—जो पढ़ाया जा रहा है, उसे सिर्फ सुनना नहीं है, पढ़ना और revise भी करना है।

आज के प्रश्न केवल सामान्य जानकारी से नहीं, बल्कि Concept + Fact + Current Update + सूक्ष्म जानकारी को जोड़कर पूछे जा रहे हैं। RPSC के नवीन सिलेबस में भी विश्लेषणात्मक/स्टेटमेंट आधारित प्रश्नों और समसामयिक मुद्दों पर स्पष्ट जोर दिखाई देता है।


इसलिए क्लास में कराए गए प्रत्येक Topic को हल्के में मत लीजिए।
आज का पढ़ा हुआ ही कल का प्रश्न बन सकता है। 📚

यही कारण है कि मैं बार-बार कहता हूँ—

“पढ़ लो… क्योंकि परीक्षा अब सिर्फ पढ़ने वालों की नहीं,
बल्कि गहराई से पढ़ने वालों की है।”
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📖 कॉलेज से शिक्षक बनने तक का सफर…


कभी एक कागज़ पर मेरा नाम एक नोटिस में था…


आज वही नाम एक शिक्षक के रूप में विद्यार्थियों के भविष्य से जुड़ा है।

वर्ष 2012 का यह नोटिस मेरे लिए सिर्फ एक पुराना कागज़ नहीं है, बल्कि मेरे संघर्ष, धैर्य और आगे बढ़ने की कहानी का एक अध्याय है।

उस समय परिस्थितियाँ आसान नहीं थीं।


कभी सवाल उठे, कभी परेशानियाँ आईं, कभी खुद को साबित करना पड़ा…


लेकिन मैंने रुकना नहीं सीखा।
आज जब पीछे मुड़कर देखता हूँ तो समझ आता है—
मुश्किलें आपकी पहचान तय नहीं करतीं,


आप उन मुश्किलों के बाद क्या बनते हैं, वही आपकी असली पहचान है।

🎓 कॉलेज के एक विद्यार्थी से शिक्षक बनने तक…


यह सफर सिर्फ डिग्री और नौकरी का नहीं,


बल्कि संघर्ष → सीख → मेहनत → धैर्य → सफलता का सफर है।

आज मैं विद्यार्थियों को पढ़ाता हूँ, उनका मार्गदर्शन करता हूँ और उनके सपनों की तैयारी में साथ खड़ा रहता हूँ।

कभी मैं खुद एक विद्यार्थी था,


आज किसी और के सपने का शिक्षक हूँ। ❤️

“वक्त बदलता जरूर है, बस इंसान को अपने संघर्ष के समय खुद पर विश्वास बनाए रखना चाहिए।”

यह तस्वीर मेरे अतीत की है,


और मेरी आज की पहचान उस अतीत का जवाब है।

आभार
प्रवीण दान चारण
9413632604
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PRAVEEN DAN CHARAN pinned «📖 कॉलेज से शिक्षक बनने तक का सफर… कभी एक कागज़ पर मेरा नाम एक नोटिस में था… आज वही नाम एक शिक्षक के रूप में विद्यार्थियों के भविष्य से जुड़ा है। वर्ष 2012 का यह नोटिस मेरे लिए सिर्फ एक पुराना कागज़ नहीं है, बल्कि मेरे संघर्ष, धैर्य और आगे बढ़ने की कहानी…»
🇮🇳 गांधी के जीवन से विद्यार्थी क्या सीख सकते हैं?

एक ऐसी जिंदगी, जिसमें सफलता से ज्यादा संघर्ष और संघर्ष से ज्यादा सीख थी

महात्मा गांधी का जीवन केवल स्वतंत्रता आंदोलन की कहानी नहीं है। एक विद्यार्थी के लिए उनका जीवन असफलता, आत्म-सुधार, अनुशासन, सत्य, धैर्य और लगातार प्रयास की पूरी पाठशाला है।

1. शुरुआत से ही वे असाधारण नहीं थे:-

गांधीजी बचपन से ही महान नेता नहीं थे। उनका जन्म 2 अक्टूबर 1869 को पोरबंदर (गुजरात) में हुआ।
उनके विद्यार्थी जीवन में भी झिझक और संकोच था। वे बहुत अच्छे वक्ता नहीं थे और सार्वजनिक रूप से बोलने में हिचकते थे।

👉 विद्यार्थी के लिए सीख:

आज अगर आपको लगता है कि आप कमजोर हैं, कम बोलते हैं या आत्मविश्वास कम है, तो इसका अर्थ यह नहीं कि आप आगे चलकर सफल नहीं हो सकते।

2. असफलता से भागना नहीं, उससे सीखना:-

गांधीजी ने कानून की पढ़ाई के लिए इंग्लैंड का रुख किया और 1891 में बैरिस्टर बनकर भारत लौटे।
भारत में शुरुआती वकालत बहुत सफल नहीं रही। अदालत में बोलने में भी उन्हें कठिनाई महसूस होती थी।
यानी जिस व्यक्ति को आगे चलकर लाखों लोगों के सामने भाषण देना था, उसके जीवन में भी झिझक और असफलता का दौर था।
👉 सीख:

शुरुआत कमजोर होना कोई समस्या नहीं है। समस्या तब है जब व्यक्ति सुधार करने की कोशिश छोड़ दे।

3. दक्षिण अफ्रीका की घटना — जिसने जीवन बदल दिया:-

1893 में गांधीजी दक्षिण अफ्रीका गए। वहाँ उन्हें नस्लीय भेदभाव का सामना करना पड़ा।
सबसे प्रसिद्ध घटना पीटरमैरिट्जबर्ग रेलवे स्टेशन की है, जहाँ प्रथम श्रेणी का टिकट होने के बावजूद उन्हें ट्रेन से बाहर फेंक दिया गया।
उस रात उन्होंने अपने जीवन और अन्याय के विरुद्ध संघर्ष के बारे में गंभीरता से सोचा।
यही घटना उनके जीवन का एक महत्वपूर्ण Turning Point (निर्णायक मोड़) बनी।

👉 विद्यार्थी के लिए सबसे बड़ी सीख:

कभी-कभी जिंदगी की सबसे कठिन घटना ही आपकी जिंदगी की दिशा बदल देती है।
जो घटना आपको आज तोड़ रही है, वही कल आपको मजबूत बना सकती है।

4. विरोध करना सीखा, लेकिन हिंसा के बिना:-
दक्षिण अफ्रीका में गांधीजी ने भारतीयों के अधिकारों के लिए संघर्ष किया।
उन्होंने सत्याग्रह (Satyagraha) और अहिंसा (Non-violence) को संघर्ष के साधन के रूप में विकसित किया।
बाद में भारत में भी यही उनकी राजनीति की पहचान बनी।

👉 सीख: मुश्किल परिस्थिति में गुस्सा करना आसान है।
लेकिन धैर्य के साथ सही बात के लिए खड़े रहना कठिन है।
विद्यार्थी जीवन में भी असफलता, आलोचना या प्रतियोगिता के समय संयम बहुत जरूरी है।

5. भारत लौटकर संघर्ष का नया अध्याय:-

1915 में गांधीजी भारत लौटे।
उन्होंने भारत को समझने के लिए यात्राएँ कीं और आम लोगों से जुड़े।
फिर उनके जीवन में कई महत्वपूर्ण आंदोलन आए—
चंपारण सत्याग्रह — 1917
खेड़ा सत्याग्रह — 1918
अहमदाबाद मिल हड़ताल — 1918
असहयोग आंदोलन — 1920
दांडी मार्च/नमक सत्याग्रह — 1930
भारत छोड़ो आंदोलन — 1942
इन आंदोलनों में सफलता और असफलता दोनों आईं।

6. असहयोग आंदोलन वापस लेना — बड़ा निर्णय:-

1922 में चौरी-चौरा की हिंसक घटना के बाद गांधीजी ने असहयोग आंदोलन वापस ले लिया।
कई लोग उनके इस निर्णय से सहमत नहीं थे।
लेकिन गांधीजी के लिए साधन भी उतने ही महत्वपूर्ण थे जितना लक्ष्य।

👉 विद्यार्थी के लिए सीख: गलत तरीके से मिली सफलता भी सही सफलता नहीं होती।

परीक्षा में Selection जरूरी है, लेकिन ईमानदारी से Selection उससे भी ज्यादा जरूरी है।

7. जेल जाना भी पड़ा:-
गांधीजी कई बार जेल गए।
आंदोलन किए, गिरफ्तार हुए, आलोचना झेली और फिर वापस संघर्ष में आए।
उनके जीवन में लगातार उतार-चढ़ाव रहे।

👉 सीख: अगर किसी परीक्षा में एक बार असफल हो गए, तो उसे अपनी पहचान मत बनाइए।
Result एक घटना है, आपकी पूरी जिंदगी नहीं।

8. दांडी मार्च — असंभव लगने वाले काम की शुरुआत:-
1930 में गांधीजी ने साबरमती आश्रम से दांडी तक मार्च किया।
नमक जैसा साधारण विषय ब्रिटिश शासन के विरुद्ध एक बड़े जनआंदोलन का प्रतीक बन गया।

👉 विद्यार्थी के लिए सीख: बड़ा बदलाव हमेशा बड़ी शुरुआत से नहीं होता।
कभी-कभी एक छोटी शुरुआत—

एक घंटा पढ़ाई,

एक अध्याय,

एक टेस्ट,

एक सुधार—
आगे चलकर बड़ा परिणाम दे सकता है।

9. आलोचना से घबराना नहीं:-

गांधीजी की नीतियों और विचारों की आलोचना भी हुई।
उनसे सभी लोग सहमत नहीं थे।
फिर भी उन्होंने अपने विचारों और प्रयोगों को जारी रखा।
👉 सीख: हर आलोचना का जवाब देना जरूरी नहीं है।

कभी-कभी आपका काम ही आपका जवाब बन जाता है।
विद्यार्थी को भी Social Media, दोस्तों या समाज की बातों से ज्यादा अपने लक्ष्य पर ध्यान देना चाहिए।
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10. गांधीजी का सबसे बड़ा प्रयोग — स्वयं पर
गांधीजी दूसरों को बदलने से पहले खुद को बदलने पर जोर देते थे।
उनका जीवन आत्म-अनुशासन और आत्म-परीक्षण का उदाहरण था।
वे अपने जीवन को प्रयोगशाला की तरह देखते थे।
👉 विद्यार्थी के लिए:
हर रात खुद से तीन सवाल पूछिए—
आज मैंने क्या पढ़ा?

आज मैंने कहाँ समय बर्बाद किया?

कल मुझे क्या सुधारना है?
अगर विद्यार्थी रोज खुद का मूल्यांकन करे तो सुधार निश्चित है।

11. 1942 — अंतिम बड़ा जनआंदोलन

8 अगस्त 1942 को भारत छोड़ो आंदोलन का आह्वान हुआ।
गांधीजी का प्रसिद्ध संदेश था—
“करो या मरो।”
यह ब्रिटिश शासन के विरुद्ध स्वतंत्रता संघर्ष के अंतिम बड़े चरणों में से एक बना।
👉 विद्यार्थी के लिए इसे इस रूप में समझें:
अपने लक्ष्य के प्रति ऐसी गंभीरता पैदा करो कि—
“करना ही है।”
लेकिन इसका अर्थ गलत साधनों का प्रयोग करना नहीं, बल्कि पूर्ण समर्पण और निरंतर प्रयास है।

12. जीवन के अंतिम वर्षों में भी संघर्ष
भारत स्वतंत्र हुआ 15 अगस्त 1947 को।
लेकिन गांधीजी उस समय सत्ता या उत्सव के केंद्र में नहीं थे। वे सांप्रदायिक हिंसा को रोकने और शांति स्थापित करने के प्रयासों में लगे रहे।
30 जनवरी 1948 को नई दिल्ली में उनकी हत्या कर दी गई।
उनका जीवन संघर्ष करते हुए समाप्त हुआ।

🎯 विद्यार्थी गांधीजी से सबसे बड़ी 10 सीख क्या लें?
1. असफलता से मत डरिए।

2. अपनी कमजोरी को पहचानकर सुधारिए।

3. अनुशासन को आदत बनाइए।

4. लक्ष्य के लिए धैर्य रखिए।

5. गलत साधनों से सफलता मत खोजिए।

6. आलोचना से विचलित मत होइए।

7. रोज खुद का मूल्यांकन कीजिए।

8. छोटी शुरुआत को छोटा मत समझिए।

9. कठिन परिस्थितियों को अवसर में बदलिए।

10. लक्ष्य केवल पाने का नहीं, योग्य बनने का भी रखिए।

🌱 अंत में विद्यार्थियों के लिए एक बात:-
गांधीजी की जिंदगी हमें यह नहीं सिखाती कि महान बनने के लिए कभी असफल नहीं होना चाहिए।
बल्कि उनकी जिंदगी हमें बताती है—

गिरना जीवन का हिस्सा है,

लेकिन गिरने के बाद खुद को फिर से खड़ा करना ही असली संघर्ष है।

एक विद्यार्थी के जीवन में भी कभी कम नंबर आएँगे, कभी Selection नहीं होगा, कभी मेहनत का परिणाम नहीं मिलेगा, कभी लोग मजाक उड़ाएँगे।
लेकिन याद रखिए—
आज की असफलता आपकी अंतिम पहचान नहीं है।
आपका असली परिचय यह होगा कि

आप असफलता के बाद क्या करते हैं।
पढ़ते रहिए।

सीखते रहिए।

खुद को सुधारते रहिए।

और अपने लक्ष्य की दिशा में चलते रहिए।
**क्योंकि जिंदगी में जीत हमेशा सबसे तेज दौड़ने वाले की नहीं होती—
कई बार जीत उस व्यक्ति की होती है जो सबसे लंबे समय तक रास्ते पर बना रहता है।** 🇮🇳


आभार
प्रवीण दान चारण
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बैंगनी आलू (Purple Potato) का मूल संबंध दक्षिण अमेरिका के एंडीज पर्वतीय क्षेत्र से माना जाता है। विशेष रूप से पेरू और बोलीविया आलू की आनुवंशिक विविधता तथा उत्पत्ति के प्रमुख केंद्र माने जाते हैं।


बैंगनी रंग मुख्यतः Anthocyanins (एंथोसाइनिन) नामक प्राकृतिक pigments के कारण होता है। ये antioxidant गुणों वाले यौगिक हैं।

Exam Facts:-

🥔 फसल → आलू
🌎 मूल क्षेत्र → Andes, South America
🇵🇪 प्रमुख केंद्र → Peru
🇧🇴 प्रमुख केंद्र → Bolivia
🟣 बैंगनी रंग → Anthocyanin
🇮🇳 भारत में बैंगनी आलू की किस्म → Kufri Jamunia
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