Electrical engineering student
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ITI THEORY
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प्रेरण मोटरो का शक्ति गुणक होता है
A पश्चगमी
B अग्रगामी
C इकाई
D उपयुक्त सभी
Q-1. बिजली का करंट कब झटका देता है और कब चिपका देता है?
Ans.-
प्रश्न पूछने के लिए धन्‍यवाद| मैं इसका सीधी भाषा में उत्तर देना चाहूंगा क्यूँकि बहुत से महानुभाव तकनीकी के क्षेत्र से नहीं आते होंगे मेरा ऎसा मानना है| सामान्य रूप से आपने अक्सर घर या कार्य क्षेत्र में कभी न कभी किसी विद्युत यंत्र या फिर विद्युत आपूर्ति तार या किसी ऎसी वस्तु को छुआ होगा और तुरंत ही आपने पाया होगा कि आप उससे छूट गए हैं| उसके बाद आपने शायद भगवान का धन्यवाद दिया होगा, परंतु भगवान से जरूरी बात आप सिर्फ इसीलिये छूट गए क्यूँकि वह प्रत्यवर्ती धारा थी ना कि दिष्ट धारा|
अब आप सोच रहे होंगे कि प्रत्यवर्ती धारा तथा दिष्ट धारा क्या होती है| चलिये आपको आसान भाषा में समझाता हूँ|
प्रत्यवर्ती धारा (ए. सी, अल्टरनेटिंग करंट) : घरों में आने वाली आपूर्ति प्रत्यवर्ती धारा होती है| जिससे आप अपने पंखे, रेफ्रिजरेटर, कूलर, टेलीविजन इत्यादि चलाते हैं|अब जैसे कि नाम से ही ज्ञात हो रहा है, अल्टरनेटिंग मतलब कुछ बदलाव, जी हाँ घर में आने वाली प्रत्यवर्ती धारा एक चक्र के रूप में चलती है जिसे आप कुछ यूं समझ सकते हैं|



जैसा की आप ऊपर दिए गए चित्र में देख सकते हैं कि कुछ चक्र आपको दिखाई पड़ रहे होंगे, यह प्रत्यवर्ती धारा द्वारा बनाया गया ग्राफ़ है, इसका एक अर्ध चक्र अधिकतम धनात्मक जाने के पश्चात् शून्य की ओर बढ़ता है, बस यही वह समय है जब आप अपने शरीर को झटके के साथ हटा लेते हो|इसके बाद पुनः यह चक्र अपने ऋणात्मक मान को प्राप्त करने के लिए जाता है, फिर पुनः यह शून्य की ओर बढ़ जाता है| इस प्रकार निरंतर यह चक्र चलता रहता है|धनात्मक, फिर ऋणात्मक |इसीलिए इसे प्रत्यवर्ती धारा कहते हैं, क्यूँकि इसका चक्र इसी प्रकार चलता रहता है बदल बदल कर|
दूसरे प्रकार की धारा होती है दिष्ट धारा|
दिष्ट धारा(डी. सी, डाइरेक्ट करंट) : इस प्रकार की धारा के सम्पर्क में आने के बाद आप यकीन मानिए कभी छूट नहीं पाएंगे, क्यूँकि इस प्रकार की धारा में कोई चक्र नहीं होता जो किसी भी बिंदु पर शून्य हो जाए, बस एक निरंतर सीधी रेखा होती है, जिसमें यदि आप चिपक गए तो छूटना नामुमकिन है|
इसे कुछ इस प्रकार से समझा जा सकता है|



जैसा की आप ऊपर दिए गए चित्र में देख सकते हैं, चलने वाली धारा एकदम सीधी रेखा में चल रही है कोई भी बदलाव नहीं है, यही दिष्ट धारा (डी. सी) धारा है| इसका वास्तविक मान प्रत्यवर्ती धारा के अपेक्षा कम से कम ३०० गुना अधिक होता है, जबकि इसका वास्तविक दिखने वाला मान आपको ५०-८० भी दिख सकता है, यदि आपको अगली बार कोई रेटिंग्‍स ५०-१०० वोल्ट्‍स (डी. सी) देखने को मिले तो इसे डी. सी जानकर हल्के में ना लें, यह आपको अपने साथ चिपकाने के लिए पर्याप्त है|.......
Q.2.रेलवे इंजन एक ही तार से बिजली लेकर कैसे चलता है, जबकि घर के उपकरणों को चलाने के लिए बिजली के दो तार लगाए जाते हैं ?
Ans-