बाक़ी, अभी तक जितना उनको पढ़ा है, उससे वे स्त्रियों को एक साथ आने की ताक़त के महत्त्व को समझाती नज़र आई हैं। समुदाय में बैठकर अपनी आवाज़ और अपनी कहानियाँ साझा करने की ताक़त—क्योंकि बदलाव असल में वहीं से शुरू होता है।
वे कहती हैं कि हम स्त्रियाँ ही एक-दूसरे की माँ हैं, बहनें हैं, दोस्त हैं। हमें एक-दूसरे की मदद करनी होगी, ताकि अपने-अपने हिस्से आए घावों को हम जल्दी ठीक करना शुरू कर सकें।
लड़ाई अभी ख़त्म नहीं हुई
हालाँकि, स्त्रीवाद की लड़ाई अभी बहुत लंबी है। इतनी लंबी कि स्त्रीवाद की चार लहरों के बावजूद भी हम पूर्णता से वह सब प्राप्त नहीं कर पाए हैं, जिसकी क़वायद हमने स्त्रीवाद की पहली, दूसरी और तीसरी लहरों में की थी।
इसलिए ग्लोरिया उम्र के 92वें वर्ष में भी, मरने से पहले तक, अपनी बात बोलती रहीं। क्योंकि वे जानती थीं कि अभी लड़ाई ख़त्म नहीं हुई है।
स्त्रियों के लिए एक बेहतर जगह बनाने की दिशा में आगे बढ़ने के लिए उनके नेतृत्व और वकालत की विरासत को हमेशा याद रखा जाएगा, आगे बढ़ाया जाएगा।
हर स्त्रीवादी व्यक्ति की तरह वे भी सबसे दुर्गम रास्तों पर कुछ दूर चलीं, ताकि हम दौड़ लगा सकें।
वे कहती हैं कि हम स्त्रियाँ ही एक-दूसरे की माँ हैं, बहनें हैं, दोस्त हैं। हमें एक-दूसरे की मदद करनी होगी, ताकि अपने-अपने हिस्से आए घावों को हम जल्दी ठीक करना शुरू कर सकें।
लड़ाई अभी ख़त्म नहीं हुई
हालाँकि, स्त्रीवाद की लड़ाई अभी बहुत लंबी है। इतनी लंबी कि स्त्रीवाद की चार लहरों के बावजूद भी हम पूर्णता से वह सब प्राप्त नहीं कर पाए हैं, जिसकी क़वायद हमने स्त्रीवाद की पहली, दूसरी और तीसरी लहरों में की थी।
इसलिए ग्लोरिया उम्र के 92वें वर्ष में भी, मरने से पहले तक, अपनी बात बोलती रहीं। क्योंकि वे जानती थीं कि अभी लड़ाई ख़त्म नहीं हुई है।
स्त्रियों के लिए एक बेहतर जगह बनाने की दिशा में आगे बढ़ने के लिए उनके नेतृत्व और वकालत की विरासत को हमेशा याद रखा जाएगा, आगे बढ़ाया जाएगा।
हर स्त्रीवादी व्यक्ति की तरह वे भी सबसे दुर्गम रास्तों पर कुछ दूर चलीं, ताकि हम दौड़ लगा सकें।
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विद्यार्थी जीवन एक तपोवन है, जिसमें संयम, कठोर परिश्रम, दृढ़ निश्चय एवं अनुशासन के साथ पूर्ण आत्मविश्वास मन में रखकर सफलता मिलने तक तपना पड़ता है l - स्वामी विवेकानंद
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भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता 2026 के प्रमुख स्तंभ 12-13 सितंबर, 2026
लचीलापन
वैश्विक अनिश्चितताओं, आपूर्ति श्रृंखला में व्यवधान, स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों और जलवायु जोखिमों से निपटने के लिए आर्थिक, सामाजिक और संस्थागत लचीलेपन को मजबूत करना।
नवाचार
समावेशी और भविष्य के लिए तैयार विकास को सक्षम बनाने के लिए डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना, उभरती प्रौद्योगिकियों, फिनटेक, एआई और ज्ञान साझाकरण को बढ़ावा देना।
सहयोग
नीतिगत समन्वय, विकास वित्तपोषण, व्यापार सुगमता, वैश्विक संस्थागत शासन में सुधार और जन-केंद्रित साझेदारियों के माध्यम से ब्रिक्स सदस्यों के बीच बहुपक्षीय जुड़ाव को गहरा करना।
वहनीयता
राष्ट्रीय और वैश्विक प्राथमिकताओं के अनुरूप जलवायु कार्रवाई, हरित वित्त, ऊर्जा परिवर्तन और सतत विकास की दिशा में सामूहिक प्रयासों को गति देना।
लचीलापन
वैश्विक अनिश्चितताओं, आपूर्ति श्रृंखला में व्यवधान, स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों और जलवायु जोखिमों से निपटने के लिए आर्थिक, सामाजिक और संस्थागत लचीलेपन को मजबूत करना।
नवाचार
समावेशी और भविष्य के लिए तैयार विकास को सक्षम बनाने के लिए डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना, उभरती प्रौद्योगिकियों, फिनटेक, एआई और ज्ञान साझाकरण को बढ़ावा देना।
सहयोग
नीतिगत समन्वय, विकास वित्तपोषण, व्यापार सुगमता, वैश्विक संस्थागत शासन में सुधार और जन-केंद्रित साझेदारियों के माध्यम से ब्रिक्स सदस्यों के बीच बहुपक्षीय जुड़ाव को गहरा करना।
वहनीयता
राष्ट्रीय और वैश्विक प्राथमिकताओं के अनुरूप जलवायु कार्रवाई, हरित वित्त, ऊर्जा परिवर्तन और सतत विकास की दिशा में सामूहिक प्रयासों को गति देना।
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दुनिया की सबसे ज्यादा बोली और समझी जाने वाली भाषा है हिंदी -
भाषा सिर्फ शब्दों का समूह नहीं होती, भाषा एक सभ्यता की आत्मा होती है और जब हम हिंदी की बात करते हैं तो हम सिर्फ एक भाषा की बात नहीं करते, हम एक जीवंत सभ्यता की बात करते हैं जो आज दुनिया के हर कोने में सांस ले रही है। अंग्रेजों को अपने साम्राज्य पर गर्व था कि उनके राज में सूर्य कभी अस्त नहीं होता, क्योंकि दुनिया के किसी न किसी हिस्से में उनका झंडा लहराता रहता था। आज वही गौरव हिंदी को प्राप्त है और वह भी बिना किसी तलवार और बिना किसी साम्राज्य के, सिर्फ प्रेम, फिल्म, संगीत, योग और अब इंटरनेट और एआई के दम पर। हिंदी का सूर्य कभी अस्त नहीं होता, क्योंकि जब भारत में रात के बारह बजते हैं, तो लंदन में शाम होती है और वहाँ कोई माँ अपने बच्चे को हिंदी में सुला रही होती है, जब लंदन में रात होती है तो टोरंटो में दोपहर होती है और वहाँ टैक्सी में हिंदी गाना बज रहा होता है और जब टोरंटो में रात होती है तो फिजी में सुबह होती है और वहाँ के स्कूल में बच्चे हाथ जोड़कर गा रहे होते हैं – इतनी शक्ति हमें देना दाता। यह चक्र चौबीस घंटे चलता है और कभी रुकता नहीं।
कुछ लोग जो सिर्फ किताबी आंकड़ों पर भरोसा करते हैं, वे कहते हैं कि हिंदी बोलने वाले 60-70 करोड़ हैं, लेकिन यह आधी-अधूरी गिनती है जो सिर्फ मातृभाषा के कॉलम को देखती है। अगर हम भाषा को उसकी व्यावहारिक ताकत से देखें, यानी कौन बोलता है, कौन समझता है, कौन काम चलाता है, कौन गाना सुनता है, कौन फिल्म देखता है, तो तस्वीर पूरी तरह बदल जाती है। आइए इस प्रैक्टिकल गणना को जमीन पर उतर कर देखते हैं, बिना किसी कल्पना के, सिर्फ आंकड़ों और राज्यों की आबादी के आधार पर। सबसे पहले भारत के उन दस राज्यों को लेते हैं जहाँ हिंदी मातृभाषा है, घर की भाषा है। उत्तर प्रदेश की आबादी आज लगभग 25 करोड़ है, बिहार की 14 करोड़, मध्य प्रदेश की 9 करोड़, राजस्थान की 8.5 करोड़, हरियाणा की 3.2 करोड़, झारखंड की 4 करोड़, छत्तीसगढ़ की 3.2 करोड़, दिल्ली की 2.5 करोड़, उत्तराखंड की 1.2 करोड़ और हिमाचल प्रदेश की 80 लाख। इन सबको जोड़ दीजिए तो संख्या 70 करोड़ को पार कर जाती है। ये 70 करोड़ लोग वो हैं जिनके लिए हिंदी सीखने की भाषा नहीं, बल्कि रोज जीने की भाषा है। वे पैदा होते ही हिंदी सुनते हैं और हिंदी में ही सोचते हैं। IAMAI-KANTAR की 2025 की रिपोर्ट और TRAI की मार्च 2026 की रिपोर्ट इस बात की पुष्टि करती है कि भारत में 109.2 करोड़ इंटरनेट सब्सक्राइबर हैं जिनमें 57 प्रतिशत यानी 54.8 करोड़ ग्रामीण भारत से हैं और ये ग्रामीण यूजर इन्हीं दस राज्यों से सबसे ज्यादा आते हैं जो इंटरनेट पर हिंदी में ही सर्च करते हैं, हिंदी में ही वीडियो देखते हैं।
भाषा सिर्फ शब्दों का समूह नहीं होती, भाषा एक सभ्यता की आत्मा होती है और जब हम हिंदी की बात करते हैं तो हम सिर्फ एक भाषा की बात नहीं करते, हम एक जीवंत सभ्यता की बात करते हैं जो आज दुनिया के हर कोने में सांस ले रही है। अंग्रेजों को अपने साम्राज्य पर गर्व था कि उनके राज में सूर्य कभी अस्त नहीं होता, क्योंकि दुनिया के किसी न किसी हिस्से में उनका झंडा लहराता रहता था। आज वही गौरव हिंदी को प्राप्त है और वह भी बिना किसी तलवार और बिना किसी साम्राज्य के, सिर्फ प्रेम, फिल्म, संगीत, योग और अब इंटरनेट और एआई के दम पर। हिंदी का सूर्य कभी अस्त नहीं होता, क्योंकि जब भारत में रात के बारह बजते हैं, तो लंदन में शाम होती है और वहाँ कोई माँ अपने बच्चे को हिंदी में सुला रही होती है, जब लंदन में रात होती है तो टोरंटो में दोपहर होती है और वहाँ टैक्सी में हिंदी गाना बज रहा होता है और जब टोरंटो में रात होती है तो फिजी में सुबह होती है और वहाँ के स्कूल में बच्चे हाथ जोड़कर गा रहे होते हैं – इतनी शक्ति हमें देना दाता। यह चक्र चौबीस घंटे चलता है और कभी रुकता नहीं।
कुछ लोग जो सिर्फ किताबी आंकड़ों पर भरोसा करते हैं, वे कहते हैं कि हिंदी बोलने वाले 60-70 करोड़ हैं, लेकिन यह आधी-अधूरी गिनती है जो सिर्फ मातृभाषा के कॉलम को देखती है। अगर हम भाषा को उसकी व्यावहारिक ताकत से देखें, यानी कौन बोलता है, कौन समझता है, कौन काम चलाता है, कौन गाना सुनता है, कौन फिल्म देखता है, तो तस्वीर पूरी तरह बदल जाती है। आइए इस प्रैक्टिकल गणना को जमीन पर उतर कर देखते हैं, बिना किसी कल्पना के, सिर्फ आंकड़ों और राज्यों की आबादी के आधार पर। सबसे पहले भारत के उन दस राज्यों को लेते हैं जहाँ हिंदी मातृभाषा है, घर की भाषा है। उत्तर प्रदेश की आबादी आज लगभग 25 करोड़ है, बिहार की 14 करोड़, मध्य प्रदेश की 9 करोड़, राजस्थान की 8.5 करोड़, हरियाणा की 3.2 करोड़, झारखंड की 4 करोड़, छत्तीसगढ़ की 3.2 करोड़, दिल्ली की 2.5 करोड़, उत्तराखंड की 1.2 करोड़ और हिमाचल प्रदेश की 80 लाख। इन सबको जोड़ दीजिए तो संख्या 70 करोड़ को पार कर जाती है। ये 70 करोड़ लोग वो हैं जिनके लिए हिंदी सीखने की भाषा नहीं, बल्कि रोज जीने की भाषा है। वे पैदा होते ही हिंदी सुनते हैं और हिंदी में ही सोचते हैं। IAMAI-KANTAR की 2025 की रिपोर्ट और TRAI की मार्च 2026 की रिपोर्ट इस बात की पुष्टि करती है कि भारत में 109.2 करोड़ इंटरनेट सब्सक्राइबर हैं जिनमें 57 प्रतिशत यानी 54.8 करोड़ ग्रामीण भारत से हैं और ये ग्रामीण यूजर इन्हीं दस राज्यों से सबसे ज्यादा आते हैं जो इंटरनेट पर हिंदी में ही सर्च करते हैं, हिंदी में ही वीडियो देखते हैं।
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अब दूसरे हिस्से को देखिए जो अक्सर गिनती से छूट जाता है, यानी भारत में ही 40 करोड़ लोग जो हिंदी को दूसरी भाषा के रूप में समझते और बोलते हैं। महाराष्ट्र और गुजरात को लीजिए, जहाँ मराठी देवनागरी में ही लिखी जाती है और गुजराती की लिपि भी देवनागरी से मिलती-जुलती है, यहाँ का व्यापारी, मजदूर और छात्र रोज हिंदी में काम चलाता है। सिक्किम में नेपाली, जम्मू में डोगरी, असम में बोडो, बिहार में मैथिली जैसी भाषाएँ देवनागरी में लिखी जाती हैं और ये हिंदी की सगी बहनें हैं, इसलिए इन क्षेत्रों के लोग बिना पढ़ाए हिंदी समझ लेते हैं। दक्षिण भारत में केरल, तमिलनाडु, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में स्कूलों में हिंदी तीसरी भाषा के रूप में पढ़ाई जाती है और वहाँ रेलवे स्टेशन, बाजार, सिनेमा हॉल और अब तो हर मोबाइल में मौजूद ओटीटी, यूट्यूब और सोशल मीडिया रील्स एवं शॉर्ट्स ने हिंदी को घर-घर पहुँचा दिया है, आज करीब 60 करोड़ लोग शॉर्ट वीडियो देखते हैं और उनमें से अधिकतर कंटेंट हिंदी और उससे मिलती-जुलती भाषाओं में है, हैदराबाद में तो हिंदी आम बोलचाल की भाषा बन चुकी है। इस तरह महाराष्ट्र, गुजरात, सिक्किम, डोगरी-बोडो-मैथिली क्षेत्रों और दक्षिण के पाँच राज्यों में मिलाकर 40 करोड़ लोग ऐसे हैं जो हिंदी को अपनी रोजमर्रा की जरूरत के लिए इस्तेमाल करते हैं, वे हिंदी फिल्मों के डायलॉग जानते हैं, वे हिंदी गानों पर नाचते हैं और वे इंटरनेट पर हिंदी में कमेंट करते हैं। तो भारत के अंदर ही कुल संख्या हो जाती है 70 करोड़ जमा 40 करोड़, यानी 110 करोड़। इसका अर्थ है कि 145 करोड़ के भारत में 110 करोड़ लोग, यानी 75 प्रतिशत से ज्यादा आबादी, हिंदी से सीधे तौर पर जुड़ी हुई है। अब भारत की सीमा से बाहर निकल कर पूरे उपमहाद्वीप को देखिए। भाषा विज्ञान का एक सच्चा नियम है कि हिंदी और उर्दू दो अलग भाषाएँ नहीं हैं, वे एक ही बोली के दो लिखने के तरीके हैं। आम बोलचाल में पानी, रोटी, घर, दिल, प्यार, दोस्त, इज्जत जैसे शब्द हिंदी में भी वही हैं और उर्दू में भी वही हैं। पाकिस्तान की 24 करोड़ आबादी उर्दू बोलती है जो बोलने में 90 प्रतिशत हिंदी ही है, नेपाल की 3 करोड़ आबादी नेपाली बोलती है जो देवनागरी में लिखी जाती है और हर नेपाली हिंदी फिल्म देखकर हिंदी समझता है और बांग्लादेश की 17 करोड़ आबादी में से 8 करोड़ युवा वर्ग बॉर्डर के संपर्क और हिंदी फिल्मों व गानों के कारण हिंदी-उर्दू अच्छी तरह समझता है। इन तीनों देशों को मिलाकर 35 करोड़ लोग ऐसे हैं जो बिना हिंदी की किताब पढ़े ही हिंदी समझ लेते हैं। इस तरह उपमहाद्वीप में कुल संख्या हो जाती है 110 करोड़ जमा 35 करोड़, यानी 145 करोड़। यह संख्या किसी भी सरकारी जनगणना से बड़ी है क्योंकि यह प्रयोग के आधार पर गिनी गई संख्या है, कागज के आधार पर नहीं।
अब दुनिया के नक्शे को और बड़ा करिए। आज दुनिया का कोई देश ऐसा नहीं है जहाँ भारतीय, पाकिस्तानी, नेपाली और बांग्लादेशी न रहते हों। खाड़ी देशों दुबई, सऊदी अरब, कतर, ओमान, कुवैत में 1 करोड़ से ज्यादा भारतीय और पाकिस्तानी मजदूर और व्यापारी रहते हैं और वहाँ केरल का नर्स और यूपी का मिस्त्री आपस में हिंदी में ही बात करता है, क्योंकि हिंदी ही वहाँ की संपर्क भाषा बन गई है। अमेरिका में 50 लाख, कनाडा में 25 लाख, ब्रिटेन में 20 लाख, ऑस्ट्रेलिया में 10 लाख भारतीय बसे हैं, फिजी में हिंदी सरकारी भाषा है, मॉरीशस की संसद में हिंदी बोली जाती है, सूरीनाम, त्रिनिदाद और गुयाना में आज भी भोजपुरी और हिंदी गीत गाए जाते हैं। इन लोगों की दूसरी और तीसरी पीढ़ी भले ही स्कूल में अंग्रेजी पढ़ती हो, लेकिन घर में दादी से वीडियो कॉल पर वह हिंदी में ही कहती है – दादी, पैर छू रही हूँ। ऐसे 8 करोड़ लोग दुनिया भर में फैले हैं जो रोज हिंदी से जुड़े हैं और हिंदी को जिंदा रखे हैं।
अब दुनिया के नक्शे को और बड़ा करिए। आज दुनिया का कोई देश ऐसा नहीं है जहाँ भारतीय, पाकिस्तानी, नेपाली और बांग्लादेशी न रहते हों। खाड़ी देशों दुबई, सऊदी अरब, कतर, ओमान, कुवैत में 1 करोड़ से ज्यादा भारतीय और पाकिस्तानी मजदूर और व्यापारी रहते हैं और वहाँ केरल का नर्स और यूपी का मिस्त्री आपस में हिंदी में ही बात करता है, क्योंकि हिंदी ही वहाँ की संपर्क भाषा बन गई है। अमेरिका में 50 लाख, कनाडा में 25 लाख, ब्रिटेन में 20 लाख, ऑस्ट्रेलिया में 10 लाख भारतीय बसे हैं, फिजी में हिंदी सरकारी भाषा है, मॉरीशस की संसद में हिंदी बोली जाती है, सूरीनाम, त्रिनिदाद और गुयाना में आज भी भोजपुरी और हिंदी गीत गाए जाते हैं। इन लोगों की दूसरी और तीसरी पीढ़ी भले ही स्कूल में अंग्रेजी पढ़ती हो, लेकिन घर में दादी से वीडियो कॉल पर वह हिंदी में ही कहती है – दादी, पैर छू रही हूँ। ऐसे 8 करोड़ लोग दुनिया भर में फैले हैं जो रोज हिंदी से जुड़े हैं और हिंदी को जिंदा रखे हैं।
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और अंत में वह सबसे नया परिवार जो पिछले दो साल में सबसे तेजी से बढ़ा है, यानी 5 करोड़ विदेशी प्रशंसक जो न भारतीय हैं, न पाकिस्तानी, फिर भी हिंदी से जुड़े हैं। रूस, जर्मनी, तुर्की, मिस्र, नाइजीरिया में लोग बिना सबटाइटल के हिंदी फिल्म देखते हैं, YouTube पर हिंदी गानों के अरबों व्यूज इसी बात के गवाह हैं। दुनिया में 30 करोड़ से ज्यादा लोग योग करते हैं और योग के साथ वे नमस्ते, शांति, ध्यान, गुरु, कर्म जैसे हिंदी-संस्कृत शब्द सीखते हैं। सबसे बड़ी क्रांति तो AI ने की है, Digital 2026 की रिपोर्ट कहती है कि दुनिया में AI यूजर 1 बिलियन से ज्यादा हो गए हैं और ChatGPT ने मई 2026 में 1 बिलियन मंथली यूजर का आंकड़ा पार किया है जिसमें 20 करोड़ यूजर अकेले भारत से हैं जो AI से हिंदी में सवाल पूछ रहे हैं, हिंदी में कहानी लिखवा रहे हैं और हिंदी में ईमेल बनवा रहे हैं, अब जापान का आदमी भी AI की मदद से हिंदी सीख रहा है क्योंकि AI तुरंत अनुवाद कर देता है। ऐसे 5 करोड़ लोग हैं जो हिंदी फिल्म, योग और AI के कारण हिंदी परिवार के नए सदस्य बन गए हैं। अब अंतिम जोड़ देखिए – भारत में मातृभाषा के रूप में 70 करोड़, भारत में दूसरी भाषा के रूप में 40 करोड़, भारत के अंदर कुल 110 करोड़, पाकिस्तान-नेपाल-बांग्लादेश में 35 करोड़, उपमहाद्वीप में कुल 145 करोड़, दुनिया भर में बसे भारतीय-उपमहाद्वीपीय लोग 8 करोड़ और दुनिया भर के प्रशंसक 5 करोड़, कुल मिलाकर 158 करोड़ यानी लगभग 150 करोड़ से ज्यादा। यह गिनती किसी को खुश करने के लिए नहीं है, यह वही तरीका है जिससे अंग्रेजी को 150 करोड़ की भाषा माना जाता है, जबकि अंग्रेजी को मातृभाषा के रूप में बोलने वाले सिर्फ 40 करोड़ हैं, बाकी 110 करोड़ लोग दूसरी भाषा के रूप में गिने जाते हैं। अगर वही न्याय हिंदी के साथ किया जाए तो हिंदी भी 150 करोड़ से ज्यादा लोगों की बोली और समझी जाने वाली भाषा है और कई मायनों में तो अंग्रेजी से भी बड़ी है, क्योंकि अंग्रेजी समझने के लिए स्कूल जाना पड़ता है, लेकिन हिंदी-उर्दू समझने के लिए सिर्फ एक फिल्म देखनी पड़ती है।
इसलिए यह कहना कि हिंदी दुनिया की सर्वाधिक बोली और समझी जाने वाली भाषा है, कोई भावुक नारा नहीं है, यह आंकड़ों, भूगोल और टेक्नोलॉजी तीनों पर खरा उतरने वाला सच है। 109 करोड़ इंटरनेट सब्सक्राइबर, 58.8 करोड़ शॉर्ट वीडियो यूजर और 20 करोड़ AI यूजर इस बात के जीवित सबूत हैं कि हिंदी अब किताबों से निकलकर मोबाइल की स्क्रीन पर राज कर रही है। जब 150 करोड़ लोग अपनी ही भाषा में अपनी कहानी कहेंगे, जब लोकल लोग वोकल होंगे, तब दुनिया को एल्गोरिदम की बनाई हुई कहानी नहीं, इंसान की असली कहानी सुनाई देगी और तभी यह सिद्ध होगा कि हिंदी सिर्फ भारत की ही नहीं, दुनिया की आत्मा की भाषा है, जिसका सूर्य कभी अस्त नहीं होता। - शैलेश शुक्ला
इसलिए यह कहना कि हिंदी दुनिया की सर्वाधिक बोली और समझी जाने वाली भाषा है, कोई भावुक नारा नहीं है, यह आंकड़ों, भूगोल और टेक्नोलॉजी तीनों पर खरा उतरने वाला सच है। 109 करोड़ इंटरनेट सब्सक्राइबर, 58.8 करोड़ शॉर्ट वीडियो यूजर और 20 करोड़ AI यूजर इस बात के जीवित सबूत हैं कि हिंदी अब किताबों से निकलकर मोबाइल की स्क्रीन पर राज कर रही है। जब 150 करोड़ लोग अपनी ही भाषा में अपनी कहानी कहेंगे, जब लोकल लोग वोकल होंगे, तब दुनिया को एल्गोरिदम की बनाई हुई कहानी नहीं, इंसान की असली कहानी सुनाई देगी और तभी यह सिद्ध होगा कि हिंदी सिर्फ भारत की ही नहीं, दुनिया की आत्मा की भाषा है, जिसका सूर्य कभी अस्त नहीं होता। - शैलेश शुक्ला
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हिंदी केवल हमारी अभिव्यक्ति की भाषा नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक चेतना, विविधता में एकता और जन-जन के संवाद का सशक्त माध्यम है। आज 2026 में हिंदी के सामने अवसर भी हैं और चुनौतियाँ भी। डिजिटल युग, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और वैश्वीकरण के दौर में हिंदी को केवल भावनाओं की भाषा नहीं, बल्कि ज्ञान-विज्ञान, तकनीक, रोजगार और नवाचार की भाषा बनाना हमारा दायित्व है।
हमें हिंदी को लेकर गौरव के साथ-साथ व्यावहारिक दृष्टि भी रखनी होगी। दूसरी भारतीय भाषाओं का सम्मान करते हुए हिंदी को व्यापक संपर्क और संवाद की भाषा के रूप में विकसित करना ही सच्ची भाषाई समरसता है।
आइए, हिंदी को केवल बोलने और पढ़ने तक सीमित न रखें; उसे ज्ञान, तकनीक और सृजन की भाषा बनाएँ।
“हिंदी का भविष्य केवल हिंदी के गौरव में नहीं, बल्कि उसकी आधुनिक उपयोगिता और वैश्विक स्वीकार्यता में निहित है।”
✍️ डॉ बी एल धनदे
हमें हिंदी को लेकर गौरव के साथ-साथ व्यावहारिक दृष्टि भी रखनी होगी। दूसरी भारतीय भाषाओं का सम्मान करते हुए हिंदी को व्यापक संपर्क और संवाद की भाषा के रूप में विकसित करना ही सच्ची भाषाई समरसता है।
आइए, हिंदी को केवल बोलने और पढ़ने तक सीमित न रखें; उसे ज्ञान, तकनीक और सृजन की भाषा बनाएँ।
“हिंदी का भविष्य केवल हिंदी के गौरव में नहीं, बल्कि उसकी आधुनिक उपयोगिता और वैश्विक स्वीकार्यता में निहित है।”
✍️ डॉ बी एल धनदे
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18वां ब्रिक्स शिखर सम्मेलन 12-13 सितंबर 2026 को नई दिल्ली के भारत मंडपम में सफलतापूर्वक संपन्न हो गया है, जिसकी अध्यक्षता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने की। मुख्य बातें और अपडेट
आयोजन स्थल: नई दिल्ली स्थित भारत मंडपम।
थीम/विषय: 'लचीलापन, नवाचार, सहयोग और स्थिरता के लिए निर्माण' (Building for Resilience, Innovation, Cooperation and Sustainability)।
नई दिल्ली घोषणापत्र: सम्मेलन के दौरान 12 सितंबर को सर्वसम्मति से नई दिल्ली घोषणा को अपनाया गया, जिसमें भू-राजनीति, वैश्विक व्यापार और मध्य पूर्व के हालातों पर चर्चा की गई।
इस शिखर सम्मेलन में रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, चीन के राष्ट्रपति शी जिनिपिंग और ईरान के राष्ट्रपति डॉक्टर मसूद पेज़ेश्कियान भी शामिल हुए. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के टैरिफ़ से जहां दुनिया भर के कारोबार में उथल-पुथल मची हुई है, वहीं ईरान पर इसराइल और अमेरिका के संयुक्त हमले के बाद से मध्य-पूर्व संघर्ष के दौर से गुज़र रहा है. इससे जहां वैश्विक सप्लाई प्रभावित हुई है, वहीं तेल और गैस की क़ीमतों में भी बढ़ोतरी हुई है. ऐसे समय में दुनिया की तक़रीबन आधी आबादी का प्रतिनिधित्व करने वाले नेताओं का एक मंच पर होना ही काफ़ी अहम है. लेकिन क्या यह मंच किसी ठोस नतीजे तक पहुंच पाया है, या इससे भविष्य के लिए मेज़बान भारत को कोई बड़ी उपलब्धि हासिल हो पाई है. साउथ एशियन यूनिवर्सिटी में एसोसिएट प्रोफ़ेसर धनंजय त्रिपाठी कहते हैं, "अगर आप नई दिल्ली घोषणापत्र पर गौर गरें तो इसका मुख्य संदेश यही है कि आप (दुनिया के अन्य देश) ग्लोबल साउथ को दरकिनार नहीं कर सकते." उनका कहना है कि ब्रिक्स देशों ने यह संदेश देने की कोशिश की है कि दुनियाभर की राजनीतिक और आर्थिक व्यवस्था में बदलाव आना चाहिए.
आयोजन स्थल: नई दिल्ली स्थित भारत मंडपम।
थीम/विषय: 'लचीलापन, नवाचार, सहयोग और स्थिरता के लिए निर्माण' (Building for Resilience, Innovation, Cooperation and Sustainability)।
नई दिल्ली घोषणापत्र: सम्मेलन के दौरान 12 सितंबर को सर्वसम्मति से नई दिल्ली घोषणा को अपनाया गया, जिसमें भू-राजनीति, वैश्विक व्यापार और मध्य पूर्व के हालातों पर चर्चा की गई।
इस शिखर सम्मेलन में रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, चीन के राष्ट्रपति शी जिनिपिंग और ईरान के राष्ट्रपति डॉक्टर मसूद पेज़ेश्कियान भी शामिल हुए. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के टैरिफ़ से जहां दुनिया भर के कारोबार में उथल-पुथल मची हुई है, वहीं ईरान पर इसराइल और अमेरिका के संयुक्त हमले के बाद से मध्य-पूर्व संघर्ष के दौर से गुज़र रहा है. इससे जहां वैश्विक सप्लाई प्रभावित हुई है, वहीं तेल और गैस की क़ीमतों में भी बढ़ोतरी हुई है. ऐसे समय में दुनिया की तक़रीबन आधी आबादी का प्रतिनिधित्व करने वाले नेताओं का एक मंच पर होना ही काफ़ी अहम है. लेकिन क्या यह मंच किसी ठोस नतीजे तक पहुंच पाया है, या इससे भविष्य के लिए मेज़बान भारत को कोई बड़ी उपलब्धि हासिल हो पाई है. साउथ एशियन यूनिवर्सिटी में एसोसिएट प्रोफ़ेसर धनंजय त्रिपाठी कहते हैं, "अगर आप नई दिल्ली घोषणापत्र पर गौर गरें तो इसका मुख्य संदेश यही है कि आप (दुनिया के अन्य देश) ग्लोबल साउथ को दरकिनार नहीं कर सकते." उनका कहना है कि ब्रिक्स देशों ने यह संदेश देने की कोशिश की है कि दुनियाभर की राजनीतिक और आर्थिक व्यवस्था में बदलाव आना चाहिए.
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“शिक्षा में किया गया निवेश हमेशा सर्वोत्तम लाभ देता है।”
— बेंजामिन फ्रैंकलिन
— बेंजामिन फ्रैंकलिन
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वीर गार्जियन-2026 भारत और जापान के बीच दूसरा द्विपक्षीय संयुक्त वायु अभ्यास है, जो 9 से 22 सितंबर 2026 तक राजस्थान के जोधपुर एयर फ़ोर्स स्टेशन पर आयोजित किया जा रहा है।
मुख्य विशेषताएँ
• स्थान: एयर फोर्स स्टेशन, जोधपुर (राजस्थान)।
• अवधि: 9 सितंबर से 22 सितंबर 2026 (14 दिवसीय अभ्यास)।
• संस्करण: यह दोनों देशों के बीच इस युद्धाभ्यास का दूसरा संस्करण है (पहला संस्करण 2023 में जापान में हुआ था)।
• भाग लेने वाली सेनाएं: भारतीय वायु सेना (IAF) और जापान वायु आत्मरक्षा बल (JASDF)।
शामिल लड़ाकू विमान
• भारतीय वायु सेना: स्वदेशी हल्का लड़ाकू विमान (LCA) तेजस, सुखोई-30 एमकेआई और राफेल।
• जापान वायु आत्मरक्षा बल: एफ-2ए (F-2) लड़ाकू विमान और सी-2 परिवहन विमान।
मुख्य आकर्षण
• अभ्यास के दौरान भारतीय वायु सेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल अमर प्रीत सिंह और जापान के चीफ ऑफ स्टाफ जनरल ताकेहिरो मोरीता ने जोधपुर में तेजस विमान में उड़ान भरकर हिस्सा लिया।
• इसका उद्देश्य दोनों देशों की वायु सेनाओं के बीच तालमेल (Interoperability), सामरिक दक्षता और रक्षा सहयोग को मजबूत करना है।
मुख्य विशेषताएँ
• स्थान: एयर फोर्स स्टेशन, जोधपुर (राजस्थान)।
• अवधि: 9 सितंबर से 22 सितंबर 2026 (14 दिवसीय अभ्यास)।
• संस्करण: यह दोनों देशों के बीच इस युद्धाभ्यास का दूसरा संस्करण है (पहला संस्करण 2023 में जापान में हुआ था)।
• भाग लेने वाली सेनाएं: भारतीय वायु सेना (IAF) और जापान वायु आत्मरक्षा बल (JASDF)।
शामिल लड़ाकू विमान
• भारतीय वायु सेना: स्वदेशी हल्का लड़ाकू विमान (LCA) तेजस, सुखोई-30 एमकेआई और राफेल।
• जापान वायु आत्मरक्षा बल: एफ-2ए (F-2) लड़ाकू विमान और सी-2 परिवहन विमान।
मुख्य आकर्षण
• अभ्यास के दौरान भारतीय वायु सेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल अमर प्रीत सिंह और जापान के चीफ ऑफ स्टाफ जनरल ताकेहिरो मोरीता ने जोधपुर में तेजस विमान में उड़ान भरकर हिस्सा लिया।
• इसका उद्देश्य दोनों देशों की वायु सेनाओं के बीच तालमेल (Interoperability), सामरिक दक्षता और रक्षा सहयोग को मजबूत करना है।
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सीखने की उम्र में सलाह देने की जल्दी मत करो।
पहले इतना सीखो कि तुम्हारी जिज्ञासा तुम्हारे अहंकार से बड़ी हो जाए।
क्योंकि सबसे कठिन स्थिति तब होती है,
जब अधूरा ज्ञान स्वयं को पूर्ण समझकर अनुभव को दिशा देने लगेl
✍️ डॉ बी एल धनदे
पहले इतना सीखो कि तुम्हारी जिज्ञासा तुम्हारे अहंकार से बड़ी हो जाए।
क्योंकि सबसे कठिन स्थिति तब होती है,
जब अधूरा ज्ञान स्वयं को पूर्ण समझकर अनुभव को दिशा देने लगेl
✍️ डॉ बी एल धनदे
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रामानुजन पुरस्कार 2026 की घोषणा 25 सितंबर 2026 को की गई थी।
मुख्य विवरण
• विजेता: स्टैनफोर्ड विश्वविद्यालय की गणित की एसोसिएट प्रोफेसर सारा पेलुसे।
• क्षेत्र: विश्लेषणात्मक संख्या सिद्धांत और योगात्मक संयोजन विज्ञान में उत्कृष्ट योगदान।
• पुरस्कार राशि: 10,000 अमेरिकी डॉलर और प्रशस्ति पत्र।
• प्रदान किए जाने की तिथि: यह पुरस्कार 22 दिसंबर 2026 को श्रीनिवास रामानुजन के जन्मदिवस पर तमिलनाडु के तंजावुर स्थित SASTRA परिसर में दिया जाएगा।
मुख्य विवरण
• विजेता: स्टैनफोर्ड विश्वविद्यालय की गणित की एसोसिएट प्रोफेसर सारा पेलुसे।
• क्षेत्र: विश्लेषणात्मक संख्या सिद्धांत और योगात्मक संयोजन विज्ञान में उत्कृष्ट योगदान।
• पुरस्कार राशि: 10,000 अमेरिकी डॉलर और प्रशस्ति पत्र।
• प्रदान किए जाने की तिथि: यह पुरस्कार 22 दिसंबर 2026 को श्रीनिवास रामानुजन के जन्मदिवस पर तमिलनाडु के तंजावुर स्थित SASTRA परिसर में दिया जाएगा।
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क्यूएस वर्ल्ड यूनिवर्सिटी रैंकिंग 2026 (QS World University Rankings 2026) में भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) दिल्ली वैश्विक स्तर पर 123वें स्थान के साथ भारत का सर्वोच्च शिक्षण संस्थान रहा है।
मुख्य विवरण
• शीर्ष भारतीय संस्थान (QS 2026):
• IIT दिल्ली: वैश्विक रैंक 123 (भारत में पहला स्थान)
• IIT बॉम्बे: वैश्विक रैंक 129
• IIT मद्रास: वैश्विक रैंक 180
• वैश्विक स्थिति: भारत के कुल 54 शिक्षण संस्थानों को इस रैंकिंग में जगह मिली है। वैश्विक स्तर पर प्रतिनिधित्व के मामले में भारत चौथा सबसे बड़ा देश है।
• टाइम्स हायर एजुकेशन (THE) रैंकिंग 2026: इसके अनुसार, भारतीय विज्ञान संस्थान (IISc बेंगलुरु) को 201-250 रैंक बैंड में रखा गया है, जो देश का शीर्ष प्रदर्शन करने वाला संस्थान है।
मुख्य विवरण
• शीर्ष भारतीय संस्थान (QS 2026):
• IIT दिल्ली: वैश्विक रैंक 123 (भारत में पहला स्थान)
• IIT बॉम्बे: वैश्विक रैंक 129
• IIT मद्रास: वैश्विक रैंक 180
• वैश्विक स्थिति: भारत के कुल 54 शिक्षण संस्थानों को इस रैंकिंग में जगह मिली है। वैश्विक स्तर पर प्रतिनिधित्व के मामले में भारत चौथा सबसे बड़ा देश है।
• टाइम्स हायर एजुकेशन (THE) रैंकिंग 2026: इसके अनुसार, भारतीय विज्ञान संस्थान (IISc बेंगलुरु) को 201-250 रैंक बैंड में रखा गया है, जो देश का शीर्ष प्रदर्शन करने वाला संस्थान है।
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जापान के आइची-नागोया में आयोजित 2026 एशियाई खेल आधिकारिक रूप से समाप्त हो गए हैं, जिसमें भारत ने कुल 85 पदक जीतकर पदक तालिका में चौथा स्थान हासिल किया है।
शीर्ष देशों की पदक तालिका - चीन: 169 स्वर्ण, 89 रजत, 83 कांस्य (कुल 341 पदक) - पहला स्थान जापान: 83 स्वर्ण, 95 रजत, 91 कांस्य (कुल 269 पदक) - दूसरा स्थान दक्षिण कोरिया: 39 स्वर्ण, 43 रजत, 68 कांस्य (कुल 150 पदक) - तीसरा स्थान भारत: 21 स्वर्ण, 27 रजत, 37 कांस्य (कुल 85 पदक) - चौथा स्थान उज्बेकिस्तान: 21 स्वर्ण, 25 रजत, 24 कांस्य (कुल 70 पदक) - पाँचवाँ स्थान
भारत का प्रदर्शन
स्वर्ण पदक: 21
रजत पदक: 27
कांस्य पदक: 37
कुल पदक: 85 स्वर्ण पदक विजेताओं की सूची -
तीरंदाजी (Archery) कुमकुम मोहोड (Kumkum Mohod): महिला व्यक्तिगत रिकर्व (स्वर्ण) — महाराष्ट्र (इन्होंने एशियाई खेलों के इतिहास में व्यक्तिगत रिकर्व में स्वर्ण जीतने वाली पहली भारतीय महिला बनकर इतिहास रचा)। महिला कंपाउंड टीम (ज्योति सुरेखा वेन्नम, प्रीथिका प्रदीप, चिकीथा तनिपार्थी): स्वर्ण पदक। ज्योति सुरेखा वेन्नम: आंध्र प्रदेश प्रीथिका प्रदीप / चिकीथा तनिपार्थी: महाराष्ट्र / तेलंगाना पुरुष कंपाउंड टीम (साहिल जाधव, गणेश मणि रत्नम थिरुमुडू, कुशल दलाल): स्वर्ण पदक।साहिल जाधव: महाराष्ट्र मिक्सड कंपाउंड टीम (चिकीथा तनिपार्थी और साहिल जाधव): स्वर्ण पदक।
निशानेबाजी (Shooting) नीरू धांडा (Neeru Dhanda): महिला ट्रैप व्यक्तिगत (स्वर्ण) — हरियाणा (इन्होंने कुल 2 स्वर्ण और 1 रजत पदक जीता)। कमलजीत और सुरुचि सिंह: मिक्स्ड टीम 10 मीटर एयर पिस्टल (स्वर्ण)।
कमलजीत: पंजाब
सुरुचि सिंह: उत्तर प्रदेश
काइनन चेनाई और नीरू धांडा: मिक्स्ड ट्रैप टीम (स्वर्ण)। काइनन चेनाई: तेलंगाना
कुश्ती (Wrestling) अमन सहरावत (Aman Sehrawat): पुरुष फ्रीस्टाइल (स्वर्ण) — हरियाणा सुजीत कलकल (Sujit Kalkal): पुरुष फ्रीस्टाइल (स्वर्ण) — Haryan
मुक्केबाजी (Boxing) लवलीना बोरगोहेन (Lovlina Borgohain): महिला मुक्केबाजी (स्वर्ण) — असम (मैरी कॉम के बाद यह उपलब्धि हासिल करने वाली दूसरी भारतीय महिला मुक्केबाज बनीं)। (नोट: बॉक्सिंग में भारत ने कुल 3 स्वर्ण पदक जीते हैं)
गोल्फ़ (Golf) प्रणवी उर्स (Pranavi Urs): महिला व्यक्तिगत स्पर्धा (स्वर्ण) — कर्नाटक (एशियन गेम्स गोल्फ़ में व्यक्तिगत स्वर्ण जीतने वाली पहली भारतीय महिला खिलाड़ी बनीं)।
एथलेटिक्स (Athletics)
महिला 4x400 मीटर रिले टीम (किरण पहल, एमआर पूवम्मा, प्राची चौधरी, विथ्या रामराज): स्वर्ण पदक।
किरण पहल: हरियाणा
एमआर पूवम्मा: कर्नाटक
प्राची चौधरी: उत्तर प्रदेश
विथ्या रामराज: तमिलनाडु
टीम खेल (Team Sports)
भारतीय महिला हॉकी टीम: स्वर्ण पदक (1982 के बाद पहली बार खिताब जीता और लॉस एंजिल्स 2028 ओलंपिक के लिए क्वालिफाई किया)।
भारतीय पुरुष हॉकी टीम: स्वर्ण पदक (खिताब का सफलतापूर्वक बचाव किया)।
भारतीय महिला क्रिकेट टीम: स्वर्ण पदक।
भारतीय पुरुष क्रिकेट टीम: स्वर्ण पदक।
भारतीय महिला कबड्डी टीम: स्वर्ण पदक।
भारतीय पुरुष कबड्डी टीम: स्वर्ण पदक।
रजत पदक विजेताओं की सूची -
एथलेटिक्स (Athletics) गुलवीर सिंह (Gulveer Singh): लंबी दूरी की दौड़ (पुरुषों की स्पर्धा में 2 रजत पदक जीते) — उत्तर प्रदेश विथ्या रामराज (Vithya Ramraj): मिक्स्ड 4x400 मीटर रिले टीम — तमिलनाडु प्रवीण कुमार (Praveen Kumar): हैमर थ्रो (Hammer Throw) — राजस्थान
निशानेबाजी (Shooting)
महिला 10 मीटर एयर राइफल टीम स्पर्धा (सोनम उत्तम मस्कर, एलावेनिल वलारिवन, विदरसा विनोद कोचलुमकल):भारत को प्रतियोगिता का पहला पदक दिलाया।
सोनम उत्तम मस्कर: महाराष्ट्र
एलावेनिल वलारिवन: गुजरात
विदरसा विनोद कोचलुमकल: केरल
रुद्राक्ष पाटिल (Rudrankksh Patil): पुरुषों की राइफल स्पर्धा (2 रजत पदक और 1 कांस्य जीता) — महाराष्ट्र
ईशा सिंह (Esha Singh): महिला 25 मीटर पिस्टल — तेलंगाना
नीरू धांडा (Neeru Dhanda): महिला शूटिंग स्पर्धा (2 स्वर्ण के साथ 1 रजत पदक भी जीता) — हरियाणा
पार्थ राकेश माने (Parth Rakesh Mane): पुरुषों की शूटिंग टीम स्पर्धा — महाराष्ट्र
स्क्वैश (Squash) अनाहत सिंह (Anahat Singh): महिला सिंगल्स स्क्वैश — दिल्ली (18 वर्षीय अनाहत एशियन गेम्स के इतिहास में महिला सिंगल्स स्क्वैश में रजत पदक जीतने वाली पहली भारतीय खिलाड़ी बनी हैं)
वुशु (Wushu) रोशिबिना देवी (Roshibina Devi): महिला वुशु (48 किग्रा वर्ग) — मणिपुर (रोशिबिना देवी लगातार तीन एशियन गेम्स में पदक जीतने वाली पहली भारतीय वुशु खिलाड़ी बनी हैं)
गोल्फ़ (Golf)
महिला गोल्फ़ टीम (प्रणवी उर्स, अदिति अशोक, दीक्षा डागर): महिला टीम स्पर्धा — संयुक्त टीम जीत
प्रणवी उर्स: कर्नाटक (इन्होंने इसी खेल की व्यक्तिगत स्पर्धा में ऐतिहासिक स्वर्ण भी जीता)
अदिति अशोक: कर्नाटक
नौकायन / सेलिंग (Sailing)
शीर्ष देशों की पदक तालिका - चीन: 169 स्वर्ण, 89 रजत, 83 कांस्य (कुल 341 पदक) - पहला स्थान जापान: 83 स्वर्ण, 95 रजत, 91 कांस्य (कुल 269 पदक) - दूसरा स्थान दक्षिण कोरिया: 39 स्वर्ण, 43 रजत, 68 कांस्य (कुल 150 पदक) - तीसरा स्थान भारत: 21 स्वर्ण, 27 रजत, 37 कांस्य (कुल 85 पदक) - चौथा स्थान उज्बेकिस्तान: 21 स्वर्ण, 25 रजत, 24 कांस्य (कुल 70 पदक) - पाँचवाँ स्थान
भारत का प्रदर्शन
स्वर्ण पदक: 21
रजत पदक: 27
कांस्य पदक: 37
कुल पदक: 85 स्वर्ण पदक विजेताओं की सूची -
तीरंदाजी (Archery) कुमकुम मोहोड (Kumkum Mohod): महिला व्यक्तिगत रिकर्व (स्वर्ण) — महाराष्ट्र (इन्होंने एशियाई खेलों के इतिहास में व्यक्तिगत रिकर्व में स्वर्ण जीतने वाली पहली भारतीय महिला बनकर इतिहास रचा)। महिला कंपाउंड टीम (ज्योति सुरेखा वेन्नम, प्रीथिका प्रदीप, चिकीथा तनिपार्थी): स्वर्ण पदक। ज्योति सुरेखा वेन्नम: आंध्र प्रदेश प्रीथिका प्रदीप / चिकीथा तनिपार्थी: महाराष्ट्र / तेलंगाना पुरुष कंपाउंड टीम (साहिल जाधव, गणेश मणि रत्नम थिरुमुडू, कुशल दलाल): स्वर्ण पदक।साहिल जाधव: महाराष्ट्र मिक्सड कंपाउंड टीम (चिकीथा तनिपार्थी और साहिल जाधव): स्वर्ण पदक।
निशानेबाजी (Shooting) नीरू धांडा (Neeru Dhanda): महिला ट्रैप व्यक्तिगत (स्वर्ण) — हरियाणा (इन्होंने कुल 2 स्वर्ण और 1 रजत पदक जीता)। कमलजीत और सुरुचि सिंह: मिक्स्ड टीम 10 मीटर एयर पिस्टल (स्वर्ण)।
कमलजीत: पंजाब
सुरुचि सिंह: उत्तर प्रदेश
काइनन चेनाई और नीरू धांडा: मिक्स्ड ट्रैप टीम (स्वर्ण)। काइनन चेनाई: तेलंगाना
कुश्ती (Wrestling) अमन सहरावत (Aman Sehrawat): पुरुष फ्रीस्टाइल (स्वर्ण) — हरियाणा सुजीत कलकल (Sujit Kalkal): पुरुष फ्रीस्टाइल (स्वर्ण) — Haryan
मुक्केबाजी (Boxing) लवलीना बोरगोहेन (Lovlina Borgohain): महिला मुक्केबाजी (स्वर्ण) — असम (मैरी कॉम के बाद यह उपलब्धि हासिल करने वाली दूसरी भारतीय महिला मुक्केबाज बनीं)। (नोट: बॉक्सिंग में भारत ने कुल 3 स्वर्ण पदक जीते हैं)
गोल्फ़ (Golf) प्रणवी उर्स (Pranavi Urs): महिला व्यक्तिगत स्पर्धा (स्वर्ण) — कर्नाटक (एशियन गेम्स गोल्फ़ में व्यक्तिगत स्वर्ण जीतने वाली पहली भारतीय महिला खिलाड़ी बनीं)।
एथलेटिक्स (Athletics)
महिला 4x400 मीटर रिले टीम (किरण पहल, एमआर पूवम्मा, प्राची चौधरी, विथ्या रामराज): स्वर्ण पदक।
किरण पहल: हरियाणा
एमआर पूवम्मा: कर्नाटक
प्राची चौधरी: उत्तर प्रदेश
विथ्या रामराज: तमिलनाडु
टीम खेल (Team Sports)
भारतीय महिला हॉकी टीम: स्वर्ण पदक (1982 के बाद पहली बार खिताब जीता और लॉस एंजिल्स 2028 ओलंपिक के लिए क्वालिफाई किया)।
भारतीय पुरुष हॉकी टीम: स्वर्ण पदक (खिताब का सफलतापूर्वक बचाव किया)।
भारतीय महिला क्रिकेट टीम: स्वर्ण पदक।
भारतीय पुरुष क्रिकेट टीम: स्वर्ण पदक।
भारतीय महिला कबड्डी टीम: स्वर्ण पदक।
भारतीय पुरुष कबड्डी टीम: स्वर्ण पदक।
रजत पदक विजेताओं की सूची -
एथलेटिक्स (Athletics) गुलवीर सिंह (Gulveer Singh): लंबी दूरी की दौड़ (पुरुषों की स्पर्धा में 2 रजत पदक जीते) — उत्तर प्रदेश विथ्या रामराज (Vithya Ramraj): मिक्स्ड 4x400 मीटर रिले टीम — तमिलनाडु प्रवीण कुमार (Praveen Kumar): हैमर थ्रो (Hammer Throw) — राजस्थान
निशानेबाजी (Shooting)
महिला 10 मीटर एयर राइफल टीम स्पर्धा (सोनम उत्तम मस्कर, एलावेनिल वलारिवन, विदरसा विनोद कोचलुमकल):भारत को प्रतियोगिता का पहला पदक दिलाया।
सोनम उत्तम मस्कर: महाराष्ट्र
एलावेनिल वलारिवन: गुजरात
विदरसा विनोद कोचलुमकल: केरल
रुद्राक्ष पाटिल (Rudrankksh Patil): पुरुषों की राइफल स्पर्धा (2 रजत पदक और 1 कांस्य जीता) — महाराष्ट्र
ईशा सिंह (Esha Singh): महिला 25 मीटर पिस्टल — तेलंगाना
नीरू धांडा (Neeru Dhanda): महिला शूटिंग स्पर्धा (2 स्वर्ण के साथ 1 रजत पदक भी जीता) — हरियाणा
पार्थ राकेश माने (Parth Rakesh Mane): पुरुषों की शूटिंग टीम स्पर्धा — महाराष्ट्र
स्क्वैश (Squash) अनाहत सिंह (Anahat Singh): महिला सिंगल्स स्क्वैश — दिल्ली (18 वर्षीय अनाहत एशियन गेम्स के इतिहास में महिला सिंगल्स स्क्वैश में रजत पदक जीतने वाली पहली भारतीय खिलाड़ी बनी हैं)
वुशु (Wushu) रोशिबिना देवी (Roshibina Devi): महिला वुशु (48 किग्रा वर्ग) — मणिपुर (रोशिबिना देवी लगातार तीन एशियन गेम्स में पदक जीतने वाली पहली भारतीय वुशु खिलाड़ी बनी हैं)
गोल्फ़ (Golf)
महिला गोल्फ़ टीम (प्रणवी उर्स, अदिति अशोक, दीक्षा डागर): महिला टीम स्पर्धा — संयुक्त टीम जीत
प्रणवी उर्स: कर्नाटक (इन्होंने इसी खेल की व्यक्तिगत स्पर्धा में ऐतिहासिक स्वर्ण भी जीता)
अदिति अशोक: कर्नाटक
नौकायन / सेलिंग (Sailing)
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प्रिंस नोबल कुरिसिंकल और मनु फ्रांसिस (Prince Noble Kurisinkal & Manu Francis): पुरुषों की स्किफ़ (Men's Skiff) स्पर्धा — केरल
कांस्य पदक विजेताओं की सूची --
एथलेटिक्स (Athletics)
गुलवीर सिंह (Gulveer Singh): पुरुष 5000 मीटर दौड़ — उत्तर प्रदेश (इन्होंने प्रतियोगिता में 2 रजत के साथ 1 कांस्य भी जीता)।
विथ्या रामराज (Vithya Ramraj): महिला 4000 मीटर बाधा दौड़ (Hurdles) — तमिलनाडु (कुल 3 पदक जीते)।
पारुल चौधरी (Parul Chaudhary): महिलाओं की 3000 मीटर स्टीपलचेज़ और 5000 मीटर दौड़ (2 कांस्य पदक) — उत्तर प्रदेश।
पूजा सिंह (Pooja Singh): महिला ऊंची कूद (High Jump) — हरियाणा।
रोहित यादव (Rohit Yadav): पुरुष भाला फेंक (Javelin Throw) — उत्तर प्रदेश।
तेजस्विन शंकर (Tejaswin Shankar): डेकाथलॉन (Decathlon) — दिल्ली।
सीमा कुमारी (Seema Kumari): महिला 10,000 मीटर दौड़ — हिमाचल प्रदेश / उत्तर प्रदेश।
मनप्रीत कौर (Manpreet Kaur): शॉट पुट (Shot Put) — पंजाब।
बरनिका इलांगोवन (Baranica Elangovan): महिला पोल वॉल्ट (Pole Vault) — तमिलनाडु।
पुरुष 4x400 मीटर रिले टीम (धर्मवीर चौधरी, मनु टीएस, जय कुमार, विशाल टीक): कांस्य पदक।
मिक्स्ड 4x100 मीटर रिले टीम (गुरिंदरवीर सिंह, स्नेहा एसएस, अनिमेष कुजूर, हारिता भद्रा): कांस्य पदक।
मुक्केबाजी (Boxing)
प्रिया घनघस (Priya Ghanghas): महिला 60 किग्रा वर्ग — हरियाणा
नरेंद्र बेरवाल (Narender Berwal): पुरुष हेवीवेट (+90 किग्रा) — हरियाणा
कपिल पोखरिया (Kapil Pokhariya): पुरुष 90 किग्रा वर्ग — उत्तराखंड
निशानेबाजी (Shooting)
रुद्राक्ष पाटिल (Rudrankksh Patil): पुरुष 10 मीटर एयर राइफल (व्यक्तिगत) — महाराष्ट्र
नीरज चौहान (Neeraj Chauhan): पुरुष व्यक्तिगत रिकर्व तीरंदाजी/निशानेबाजी स्पर्धा — उत्तर प्रदेश
महिला स्कीट टीम (परीनाज़ धालीवाल, रायज़ा ढिल्लों, महेश्वरी चौहान): कांस्य पदक।
पुरुष स्कीट टीम (अनंतजीत सिंह नरुका, भवतेंग सिंह गिल, मैराज अहमद खान): कांस्य पदक।
मिक्स्ड स्कीट टीम (अनंतजीत सिंह नरुका और परीनाज़ धालीवाल): कांस्य पदक।
स्क्वैश (Squash)
मिक्स्ड डबल्स टीम (जोशना चिनप्पा और वेलावन सेंथिलकुमार): कांस्य पदक — तमिलनाडु
महिला स्क्वैश टीम (जोशना चिनप्पा, अनाहत सिंह, तन्वी खन्ना): कांस्य पदक
पुरुष स्क्वैश टीम (अभय सिंह, वीर चोटरानी, वेलावन सेंथिलकुमार): कांस्य पदक
कुश्ती (Wrestling) दीपक पूनिया (Deepak Punia): पुरुष फ्रीस्टाइल 97 किग्रा — हरियाणा सुनील कुमार (Sunil Kumar): ग्रीको-रोमन 87 किग्रा — हरियाणा
टेबल टेनिस (Table Tennis)
मिक्स्ड डबल्स (मानुष शाह और दिया चितले): कांस्य पदक (यह एशियन गेम्स इतिहास में भारत का टीटी में केवल चौथा पदक है)।
मानुष शाह: गुजरात
दिया चितले: महाराष्ट्र
अन्य ऐतिहासिक कांस्य पदक
बैडमिंटन (पुरुष टीम): लक्ष्य सेन, एचएस प्रणय, सात्विकसाईराज रंकीरेड्डी और चिराग शेट्टी की टीम ने कांस्य पदक जीता।
मिक्स्ड मार्शल आर्ट्स (MMA): सुचिका तरियाल (Suchika Tariyal) ने महिलाओं की ट्रेडिशनल -60 किग्रा स्पर्धा में भारत को इस खेल का पहला ऐतिहासिक पदक दिलाया — उत्तराखंड।
सॉफ्ट टेनिस: जय मीणा (Jay Meena) ने पुरुषों की सिंगल्स स्पर्धा में कांस्य पदक जीता — राजस्थान।
कुराश (Kurash): पिंकी बलहारा (Pincky Balhara) ने महिलाओं के 78 किग्रा वर्ग में कांस्य जीता — दिल्ली / हरियाणा।
नौकायन (Rowing): सतनाम सिंह और सलमान खान ने पुरुषों के डबल स्कल्स में कांस्य जीता — पंजाब।
सेलिंग (Sailing): शीतल वर्मा और हर्षिता तोमर (महिला स्किफ़) तथा नेत्रा कुमानन (महिला डिंगी) — मध्य प्रदेश / तमिलनाडु।
कांस्य पदक विजेताओं की सूची --
एथलेटिक्स (Athletics)
गुलवीर सिंह (Gulveer Singh): पुरुष 5000 मीटर दौड़ — उत्तर प्रदेश (इन्होंने प्रतियोगिता में 2 रजत के साथ 1 कांस्य भी जीता)।
विथ्या रामराज (Vithya Ramraj): महिला 4000 मीटर बाधा दौड़ (Hurdles) — तमिलनाडु (कुल 3 पदक जीते)।
पारुल चौधरी (Parul Chaudhary): महिलाओं की 3000 मीटर स्टीपलचेज़ और 5000 मीटर दौड़ (2 कांस्य पदक) — उत्तर प्रदेश।
पूजा सिंह (Pooja Singh): महिला ऊंची कूद (High Jump) — हरियाणा।
रोहित यादव (Rohit Yadav): पुरुष भाला फेंक (Javelin Throw) — उत्तर प्रदेश।
तेजस्विन शंकर (Tejaswin Shankar): डेकाथलॉन (Decathlon) — दिल्ली।
सीमा कुमारी (Seema Kumari): महिला 10,000 मीटर दौड़ — हिमाचल प्रदेश / उत्तर प्रदेश।
मनप्रीत कौर (Manpreet Kaur): शॉट पुट (Shot Put) — पंजाब।
बरनिका इलांगोवन (Baranica Elangovan): महिला पोल वॉल्ट (Pole Vault) — तमिलनाडु।
पुरुष 4x400 मीटर रिले टीम (धर्मवीर चौधरी, मनु टीएस, जय कुमार, विशाल टीक): कांस्य पदक।
मिक्स्ड 4x100 मीटर रिले टीम (गुरिंदरवीर सिंह, स्नेहा एसएस, अनिमेष कुजूर, हारिता भद्रा): कांस्य पदक।
मुक्केबाजी (Boxing)
प्रिया घनघस (Priya Ghanghas): महिला 60 किग्रा वर्ग — हरियाणा
नरेंद्र बेरवाल (Narender Berwal): पुरुष हेवीवेट (+90 किग्रा) — हरियाणा
कपिल पोखरिया (Kapil Pokhariya): पुरुष 90 किग्रा वर्ग — उत्तराखंड
निशानेबाजी (Shooting)
रुद्राक्ष पाटिल (Rudrankksh Patil): पुरुष 10 मीटर एयर राइफल (व्यक्तिगत) — महाराष्ट्र
नीरज चौहान (Neeraj Chauhan): पुरुष व्यक्तिगत रिकर्व तीरंदाजी/निशानेबाजी स्पर्धा — उत्तर प्रदेश
महिला स्कीट टीम (परीनाज़ धालीवाल, रायज़ा ढिल्लों, महेश्वरी चौहान): कांस्य पदक।
पुरुष स्कीट टीम (अनंतजीत सिंह नरुका, भवतेंग सिंह गिल, मैराज अहमद खान): कांस्य पदक।
मिक्स्ड स्कीट टीम (अनंतजीत सिंह नरुका और परीनाज़ धालीवाल): कांस्य पदक।
स्क्वैश (Squash)
मिक्स्ड डबल्स टीम (जोशना चिनप्पा और वेलावन सेंथिलकुमार): कांस्य पदक — तमिलनाडु
महिला स्क्वैश टीम (जोशना चिनप्पा, अनाहत सिंह, तन्वी खन्ना): कांस्य पदक
पुरुष स्क्वैश टीम (अभय सिंह, वीर चोटरानी, वेलावन सेंथिलकुमार): कांस्य पदक
कुश्ती (Wrestling) दीपक पूनिया (Deepak Punia): पुरुष फ्रीस्टाइल 97 किग्रा — हरियाणा सुनील कुमार (Sunil Kumar): ग्रीको-रोमन 87 किग्रा — हरियाणा
टेबल टेनिस (Table Tennis)
मिक्स्ड डबल्स (मानुष शाह और दिया चितले): कांस्य पदक (यह एशियन गेम्स इतिहास में भारत का टीटी में केवल चौथा पदक है)।
मानुष शाह: गुजरात
दिया चितले: महाराष्ट्र
अन्य ऐतिहासिक कांस्य पदक
बैडमिंटन (पुरुष टीम): लक्ष्य सेन, एचएस प्रणय, सात्विकसाईराज रंकीरेड्डी और चिराग शेट्टी की टीम ने कांस्य पदक जीता।
मिक्स्ड मार्शल आर्ट्स (MMA): सुचिका तरियाल (Suchika Tariyal) ने महिलाओं की ट्रेडिशनल -60 किग्रा स्पर्धा में भारत को इस खेल का पहला ऐतिहासिक पदक दिलाया — उत्तराखंड।
सॉफ्ट टेनिस: जय मीणा (Jay Meena) ने पुरुषों की सिंगल्स स्पर्धा में कांस्य पदक जीता — राजस्थान।
कुराश (Kurash): पिंकी बलहारा (Pincky Balhara) ने महिलाओं के 78 किग्रा वर्ग में कांस्य जीता — दिल्ली / हरियाणा।
नौकायन (Rowing): सतनाम सिंह और सलमान खान ने पुरुषों के डबल स्कल्स में कांस्य जीता — पंजाब।
सेलिंग (Sailing): शीतल वर्मा और हर्षिता तोमर (महिला स्किफ़) तथा नेत्रा कुमानन (महिला डिंगी) — मध्य प्रदेश / तमिलनाडु।
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जापान के आइची-नागोया में आयोजित 20वें एशियाई खेल 2026 (19 सितंबर से 4 अक्टूबर 2026) आधिकारिक समापन समारोह के साथ संपन्न हो गए हैं।
इन खेलों का आधिकारिक आदर्श वाक्य (Slogan)- "इमेजिन वन एशिया" (Imagine One Asia) यानी 'एक एशिया की कल्पना' रखा गया था। इसमें लगभग 46 देशों के 10,700 से अधिक एथलीटों ने 43 खेलों की 469 स्पर्धाओं में हिस्सा लिया l
इन खेलों का आधिकारिक आदर्श वाक्य (Slogan)- "इमेजिन वन एशिया" (Imagine One Asia) यानी 'एक एशिया की कल्पना' रखा गया था। इसमें लगभग 46 देशों के 10,700 से अधिक एथलीटों ने 43 खेलों की 469 स्पर्धाओं में हिस्सा लिया l