भगवान श्री कृष्ण के धर्म रक्षा हेतु संघर्ष के संदेश का अनुसरण करते हुए, हिन्दू समाज ने, आज ही के दिन सन् 1992 की पावन गीता जयंती पर, श्रीराम जन्मभूमि पर बने बाबरी ढांचे नामक कलंक को सदा के लिए समाप्त कर दिया।
हिंदू समाज के शौर्य को नमन्...!!
#GeetaJayanti की हार्दिक शुभकामनाएँ!
#ShauryaDiwas
https://x.com/VHPDigital/status/1995351682805637132
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भारत के प्रथम राष्ट्रपति, महान स्वतंत्रता सेनानी एवं संविधान सभा के अध्यक्ष, ‘भारतरत्न’ डॉ. राजेंद्र प्रसाद जी की जयंती पर उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि।
डॉ. राजेंद्र प्रसाद जी का आदर्श जीवन, विनम्रता और राष्ट्रसेवा की भावना हर भारतीय के लिए प्रेरणा है।
https://x.com/VHPDigital/status/1996064580100129025
डॉ. राजेंद्र प्रसाद जी का आदर्श जीवन, विनम्रता और राष्ट्रसेवा की भावना हर भारतीय के लिए प्रेरणा है।
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लोककल्याण के अधिष्ठाता भगवान विष्णु के अवतार, त्रिदेव स्वरूप भगवान श्री दत्तात्रेय जी की जयंती की हार्दिक शुभकामनाएं!
https://x.com/vhpdigital/status/1996424389752189046?s=46
https://x.com/vhpdigital/status/1996424389752189046?s=46
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प्रेस वक्तव्य:
वन्देमातरम का विरोध देश द्रोही मानसिकता का परिचायक: विहिप
नई दिल्ली। दिसंबर 4, 2025। विश्व हिंदू परिषद के केंद्रीय संयुक्त महामंत्री डॉ सुरेंद्र जैन ने आज कहा है कि मजहब की आड़ में वन्देमातरम का विरोध करने वाले लोगों को अपनी इस देश द्रोही मानसिकता से बाहर आना चाहिए। इसी अलगाववादी मानसिकता ने भारत के सांप्रदायिक विभाजन की नींव रखी थी। अब इसे कदापि स्वीकार नहीं किया जा सकता है।
उन्होंने कहा कि राष्ट्रगीत वंदे मातरम् के रचयिता श्रद्धेय बंकिम चंद्र चटर्जी को संपूर्ण राष्ट्र कृतज्ञता ज्ञापित करता है। गत डेढ़ सौ वर्षों से यह गीत लगातार राष्ट्रीय चेतना का केंद्र रहा है। वंदे मातरम् का यह उद्घोष ही आबाल-वृद्ध सभी व्यक्तियों में प्रेरणा देने का काम आज तक निरंतर कर रहा है। बंग भंग आंदोलन में केवल बंगाल ही नहीं, संपूर्ण देश इस उदघोष के साथ एकजुट हो गया था। हिंदू - मुसलमान मिलकर लड़ रहे थे लेकिन इस आंदोलन का केंद्र बिंदु वंदे मातरम् ही था जिसे 1907 तक सब मिलकर गाते रहे।
डॉ जैन ने कहा कि अंग्रेज बंग भंग आंदोलन की सफलता से परेशान थे। उन्होंने हिंदू-मुस्लिम भेद पैदा करने के लिए मुस्लिम नेतृत्व में ऐसे व्यक्तियों को छांटा जो अंग्रेजों की आवाज में अपना स्वर मिला सकें। इसीलिए, जब 1907 में उन्होंने वन्दे मातरम् का प्रतिबंध लगाया तब 1908 में पहली बार कांग्रेस में कुछ मुस्लिम नेताओं ने, जो पहले वंदे मातरम् का गान करने में संकोच नहीं करते थे, विरोध करना शुरू कर दिया। मुस्लिम तुष्टिकरण के लिए तत्कालीन कांग्रेसी नेतृत्व झुक गया और उन्होंने मां भारती को समर्पित इस गीत का विभाजन कर दिया।
दुर्भाग्य से उस दिन के बाद से ही गुलामी की मानसिकता में जकड़े कुछ लोग उन्हीं के इशारे पर काम करते हुए वंदे मातरम् का विरोध करते रहे और कुछ लोग इस विरोध को स्वर देते रहे।
उन्होंने कहा कि वंदे मातरम् आज भी संपूर्ण भारत की प्रेरणा का केंद्र है। आज भी वही लोग विरोध कर रहे हैं जो अंग्रेजों की औपनिवेशिक मानसिकता से ग्रसित हैं और वही लोग उनका साथ दे रहे हैं जो तुष्टीकरण की राजनीति के अंतर्गत ये सोचते हैं कि वंदे मातरम् का विरोध करके उनको मुस्लिम वोट बैंक प्राप्त होगा। आज जिस तरह का तीव्र विरोध मुस्लिम नेतृत्व के कुछ लोग कर रहे हैं, वह बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है।
विश्व हिंदू परिषद यह मानती है कि वंदेमातरम का विरोध देश विरोध से कम नहीं है। इसलिए, हम सब मिलकर ब्रिटिश औपनिवेशिक गुलामी से बाहर निकल कर राष्ट्र की चेतना व एकात्मकता के इस मंत्र 'वंदे मातरम्' के उदघोष और गीत का गायन कर एक नए सबल भारत के निर्माण में अपना अपना योगदान दें।
जारी कर्ता:
विनोद बंसल
राष्ट्रीय प्रवक्ता
विश्व हिंदू परिषद
https://x.com/VHPDigital/status/1996503756033417353
वन्देमातरम का विरोध देश द्रोही मानसिकता का परिचायक: विहिप
नई दिल्ली। दिसंबर 4, 2025। विश्व हिंदू परिषद के केंद्रीय संयुक्त महामंत्री डॉ सुरेंद्र जैन ने आज कहा है कि मजहब की आड़ में वन्देमातरम का विरोध करने वाले लोगों को अपनी इस देश द्रोही मानसिकता से बाहर आना चाहिए। इसी अलगाववादी मानसिकता ने भारत के सांप्रदायिक विभाजन की नींव रखी थी। अब इसे कदापि स्वीकार नहीं किया जा सकता है।
उन्होंने कहा कि राष्ट्रगीत वंदे मातरम् के रचयिता श्रद्धेय बंकिम चंद्र चटर्जी को संपूर्ण राष्ट्र कृतज्ञता ज्ञापित करता है। गत डेढ़ सौ वर्षों से यह गीत लगातार राष्ट्रीय चेतना का केंद्र रहा है। वंदे मातरम् का यह उद्घोष ही आबाल-वृद्ध सभी व्यक्तियों में प्रेरणा देने का काम आज तक निरंतर कर रहा है। बंग भंग आंदोलन में केवल बंगाल ही नहीं, संपूर्ण देश इस उदघोष के साथ एकजुट हो गया था। हिंदू - मुसलमान मिलकर लड़ रहे थे लेकिन इस आंदोलन का केंद्र बिंदु वंदे मातरम् ही था जिसे 1907 तक सब मिलकर गाते रहे।
डॉ जैन ने कहा कि अंग्रेज बंग भंग आंदोलन की सफलता से परेशान थे। उन्होंने हिंदू-मुस्लिम भेद पैदा करने के लिए मुस्लिम नेतृत्व में ऐसे व्यक्तियों को छांटा जो अंग्रेजों की आवाज में अपना स्वर मिला सकें। इसीलिए, जब 1907 में उन्होंने वन्दे मातरम् का प्रतिबंध लगाया तब 1908 में पहली बार कांग्रेस में कुछ मुस्लिम नेताओं ने, जो पहले वंदे मातरम् का गान करने में संकोच नहीं करते थे, विरोध करना शुरू कर दिया। मुस्लिम तुष्टिकरण के लिए तत्कालीन कांग्रेसी नेतृत्व झुक गया और उन्होंने मां भारती को समर्पित इस गीत का विभाजन कर दिया।
दुर्भाग्य से उस दिन के बाद से ही गुलामी की मानसिकता में जकड़े कुछ लोग उन्हीं के इशारे पर काम करते हुए वंदे मातरम् का विरोध करते रहे और कुछ लोग इस विरोध को स्वर देते रहे।
उन्होंने कहा कि वंदे मातरम् आज भी संपूर्ण भारत की प्रेरणा का केंद्र है। आज भी वही लोग विरोध कर रहे हैं जो अंग्रेजों की औपनिवेशिक मानसिकता से ग्रसित हैं और वही लोग उनका साथ दे रहे हैं जो तुष्टीकरण की राजनीति के अंतर्गत ये सोचते हैं कि वंदे मातरम् का विरोध करके उनको मुस्लिम वोट बैंक प्राप्त होगा। आज जिस तरह का तीव्र विरोध मुस्लिम नेतृत्व के कुछ लोग कर रहे हैं, वह बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है।
विश्व हिंदू परिषद यह मानती है कि वंदेमातरम का विरोध देश विरोध से कम नहीं है। इसलिए, हम सब मिलकर ब्रिटिश औपनिवेशिक गुलामी से बाहर निकल कर राष्ट्र की चेतना व एकात्मकता के इस मंत्र 'वंदे मातरम्' के उदघोष और गीत का गायन कर एक नए सबल भारत के निर्माण में अपना अपना योगदान दें।
जारी कर्ता:
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वन्देमातरम का विरोध देश द्रोही मानसिकता का परिचायक: विहिप
नई दिल्ली। दिसंबर 4, 2025। विश्व हिंदू परिषद के केंद्रीय संयुक्त महामंत्री डॉ सुरेंद्र जैन ने आज कहा है कि मजहब की आड़ में वन्देमातरम का विरोध करने वाले लोगों को अपनी इस देश द्रोही…
वन्देमातरम का विरोध देश द्रोही मानसिकता का परिचायक: विहिप
नई दिल्ली। दिसंबर 4, 2025। विश्व हिंदू परिषद के केंद्रीय संयुक्त महामंत्री डॉ सुरेंद्र जैन ने आज कहा है कि मजहब की आड़ में वन्देमातरम का विरोध करने वाले लोगों को अपनी इस देश द्रोही…
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संविधान शिल्पी भारत रत्न बाबा साहेब डॉ. भीमराव रामजी अंबेडकर जी के महापरिनिर्वाण दिवस पर कोटि कोटि नमन।
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विश्व हिंदू परिषद के केंद्रीय मार्ग दर्शक मंडल के द्विदिवसीय बैठक आज सायंकाल ३ बजे देश की राजधानी इंद्रप्रस्थ नगरी (दिल्ली) के पंजाबी बाग में प्रारंभ हुई। बैठक के आरंभ में विहिप के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष श्री आलोक कुमार जी ने हिंदू समाज के समक्ष वर्तमान चुनौतियों के बारे में बताते हुए पूज्य संतों के मार्ग दर्शन का आग्रह किया।
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विश्व हिंदू परिषद के केंद्रीय मार्ग दर्शक मंडल के द्विदिवसीय बैठक आज सायंकाल ३ बजे देश की राजधानी इंद्रप्रस्थ नगरी (दिल्ली) के पंजाबी बाग में प्रारंभ हुई। बैठक के आरंभ में विहिप के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष श्री आलोक कुमार जी ने हिंदू समाज के समक्ष वर्तमान चुनौतियों…
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प्रेस विज्ञप्ति:
मंदिरों के सरकारी अधिग्रहण, धर्मांतरण और बढ़ती मजहबी कट्टरता पर चिंतन के साथ प्रारंभ हुई विहिप के केन्द्रीय मार्ग दर्शक मण्डल की द्विदिवसीय बैठक; देशभर से लगभग 300 संत जुटे
इंद्रप्रस्थ (नई दिल्ली)। दिसंबर 9, 2025। विश्व हिंदू परिषद के केंद्रीय मार्ग दर्शक मंडल के द्वि-दिवसीय बैठक आज (मंगलवार) सायंकाल 3 बजे इंद्रप्रस्थ नगरी (दिल्ली) के पंजाबी बाग में प्रारंभ हुई। ज्योतिष पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य पूज्य स्वामी वासुदेवानंद सरस्वती जी महाराज की अध्यक्षता में प्रारंभ हुए उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए विहिप के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष श्री आलोक कुमार जी ने हिंदू समाज के समक्ष चुनौतियों के बारे में बताते हुए पूज्य संतों से निम्नलिखित बिन्दुओ पर उनके द्वारा समाज के मार्गदर्शन का आग्रह किया:
•हिन्दू मंदिरों को सरकारी नियंत्रण से मुक्ति।
•देश भर में धर्मांतरण की बढ़ती घटनाओं पर विराम हेतु प्रभावी उपाय।
•धर्म स्वातंत्र्य कानून को संपूर्ण देश में एक समान रूप से लागू करना
• देश में बढ़ती जिहादी मानसिकता, कट्टरता और हिंसक घटनाएं।
•सीमांत क्षेत्रों में बढ़ती सामाजिक समस्याओं और नशामुक्ति अभियान।
•आगामी जनगणना में सभी हिन्दू अपना धर्म ‘हिन्दू’ ही लिखें।
बैठक में अखिल भारतीय संत समिति के महामंत्री पूज्य स्वामी जितेंद्रानंद सरस्वती जी ने कहा कि कुछ समूह आज जिहाद और आतंकी मानसिकता को उचित ठहराने का दुस्साहस कर रहे हैं। दिल्ली में हुए आतंकी हमले के आरोपी का समर्थन करने की प्रवृत्ति अत्यंत चिंताजनक है। उन्होंने मांग की कि देश की संसद कठोर और प्रभावी कानून लाए। उन्होंने देवालयों की सरकारी अधिग्रहण से मुक्ति तथा जनसंख्या नियंत्रण कानून की आवश्यकता पर भी बल दिया।
बंगाल से पधारे पूज्य संतों ने राज्य की गंभीर स्थिति पर चिंता व्यक्त की और कहा कि कट्टरपंथियों द्वारा सार्वजनिक रूप से दिए जा रहे जिहादी बयान, हिंदुओं को धमकी व अत्याचार न सिर्फ बंगाल बल्कि सम्पूर्ण देश के लिए चेतावनी है।
सुधांशु जी महाराज ने राममंदिर निर्माण की 500 वर्षों की तपस्या और संघर्ष का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत की असली ऊर्जा हमारे संतों और सांस्कृतिक परंपराओं में निहित है। आज समय की आवश्यकता है कि गुरुकुल, पुजारी परंपरा, आश्रम और संस्कार केंद्रों को सशक्त बनाया जाए तथा सनातन समाज अपनी सांस्कृतिक शक्ति के लिए संगठित हो।
बैठक में पूज्य जगद्गुरु स्वामी राम कमलचार्य जी, अटल पीठाधीश्वर पूज्य स्वामी विश्वात्मानंद सरस्वती जी महाराज, आचार्य महामंडलेश्वर पूज्य स्वामी विशोकानंद जी महाराज, पूज्य स्वामी विवेकानंद जी महाराज, गीता मनीषी ज्ञानानंद जी महाराज, अखिल भारतीय संत समिति के महामंत्री पूज्य स्वामी जितेंद्रानन्द सरस्वती जी महाराज, विहिप उपाध्यक्ष श्री ओमप्रकाश सिंघल, संरक्षक श्री दिनेश चंद्र, सह संगठन मंत्री श्री विनायक राव व केन्द्रीय मंत्री श्री अशोक तिवारी सहित देशभर से पधारे अनेक पूजनीय संत और विहिप पदाधिकारी उपस्थित रहे।
भवदीय
विनोद बंसल, राष्ट्रीय प्रवक्ता – विहिप
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मंदिरों के सरकारी अधिग्रहण, धर्मांतरण और बढ़ती मजहबी कट्टरता पर चिंतन के साथ प्रारंभ हुई विहिप के केन्द्रीय मार्ग दर्शक मण्डल की द्विदिवसीय बैठक; देशभर से लगभग 300 संत जुटे
इंद्रप्रस्थ (नई दिल्ली)। दिसंबर 9, 2025। विश्व हिंदू परिषद के केंद्रीय मार्ग दर्शक मंडल के द्वि-दिवसीय बैठक आज (मंगलवार) सायंकाल 3 बजे इंद्रप्रस्थ नगरी (दिल्ली) के पंजाबी बाग में प्रारंभ हुई। ज्योतिष पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य पूज्य स्वामी वासुदेवानंद सरस्वती जी महाराज की अध्यक्षता में प्रारंभ हुए उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए विहिप के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष श्री आलोक कुमार जी ने हिंदू समाज के समक्ष चुनौतियों के बारे में बताते हुए पूज्य संतों से निम्नलिखित बिन्दुओ पर उनके द्वारा समाज के मार्गदर्शन का आग्रह किया:
•हिन्दू मंदिरों को सरकारी नियंत्रण से मुक्ति।
•देश भर में धर्मांतरण की बढ़ती घटनाओं पर विराम हेतु प्रभावी उपाय।
•धर्म स्वातंत्र्य कानून को संपूर्ण देश में एक समान रूप से लागू करना
• देश में बढ़ती जिहादी मानसिकता, कट्टरता और हिंसक घटनाएं।
•सीमांत क्षेत्रों में बढ़ती सामाजिक समस्याओं और नशामुक्ति अभियान।
•आगामी जनगणना में सभी हिन्दू अपना धर्म ‘हिन्दू’ ही लिखें।
बैठक में अखिल भारतीय संत समिति के महामंत्री पूज्य स्वामी जितेंद्रानंद सरस्वती जी ने कहा कि कुछ समूह आज जिहाद और आतंकी मानसिकता को उचित ठहराने का दुस्साहस कर रहे हैं। दिल्ली में हुए आतंकी हमले के आरोपी का समर्थन करने की प्रवृत्ति अत्यंत चिंताजनक है। उन्होंने मांग की कि देश की संसद कठोर और प्रभावी कानून लाए। उन्होंने देवालयों की सरकारी अधिग्रहण से मुक्ति तथा जनसंख्या नियंत्रण कानून की आवश्यकता पर भी बल दिया।
बंगाल से पधारे पूज्य संतों ने राज्य की गंभीर स्थिति पर चिंता व्यक्त की और कहा कि कट्टरपंथियों द्वारा सार्वजनिक रूप से दिए जा रहे जिहादी बयान, हिंदुओं को धमकी व अत्याचार न सिर्फ बंगाल बल्कि सम्पूर्ण देश के लिए चेतावनी है।
सुधांशु जी महाराज ने राममंदिर निर्माण की 500 वर्षों की तपस्या और संघर्ष का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत की असली ऊर्जा हमारे संतों और सांस्कृतिक परंपराओं में निहित है। आज समय की आवश्यकता है कि गुरुकुल, पुजारी परंपरा, आश्रम और संस्कार केंद्रों को सशक्त बनाया जाए तथा सनातन समाज अपनी सांस्कृतिक शक्ति के लिए संगठित हो।
बैठक में पूज्य जगद्गुरु स्वामी राम कमलचार्य जी, अटल पीठाधीश्वर पूज्य स्वामी विश्वात्मानंद सरस्वती जी महाराज, आचार्य महामंडलेश्वर पूज्य स्वामी विशोकानंद जी महाराज, पूज्य स्वामी विवेकानंद जी महाराज, गीता मनीषी ज्ञानानंद जी महाराज, अखिल भारतीय संत समिति के महामंत्री पूज्य स्वामी जितेंद्रानन्द सरस्वती जी महाराज, विहिप उपाध्यक्ष श्री ओमप्रकाश सिंघल, संरक्षक श्री दिनेश चंद्र, सह संगठन मंत्री श्री विनायक राव व केन्द्रीय मंत्री श्री अशोक तिवारी सहित देशभर से पधारे अनेक पूजनीय संत और विहिप पदाधिकारी उपस्थित रहे।
भवदीय
विनोद बंसल, राष्ट्रीय प्रवक्ता – विहिप
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मंदिरों के सरकारी अधिग्रहण, धर्मांतरण और बढ़ती मजहबी कट्टरता पर चिंतन के साथ प्रारंभ हुई विहिप के केन्द्रीय मार्ग दर्शक मण्डल की द्विदिवसीय बैठक; देशभर से लगभग 300 संत जुटे
इंद्रप्रस्थ (नई दिल्ली)। दिसंबर 9, 2025। विश्व हिंदू परिषद के केंद्रीय…
मंदिरों के सरकारी अधिग्रहण, धर्मांतरण और बढ़ती मजहबी कट्टरता पर चिंतन के साथ प्रारंभ हुई विहिप के केन्द्रीय मार्ग दर्शक मण्डल की द्विदिवसीय बैठक; देशभर से लगभग 300 संत जुटे
इंद्रप्रस्थ (नई दिल्ली)। दिसंबर 9, 2025। विश्व हिंदू परिषद के केंद्रीय…
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A Sacred Lamp and a constitutional crisis: Resisting attempts to intimidate the judiciary...
A piece written by Hon. Shri Alok Kumar, International President Vishva Hindu Parishad
https://x.com/vhpdigital/status/1999435663280930928?s=46
A piece written by Hon. Shri Alok Kumar, International President Vishva Hindu Parishad
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16 दिसम्बर | विजय दिवस 🇮🇳
भारत की सैन्य शक्ति, रणनीतिक बुद्धिमत्ता और अदम्य साहस का गौरवशाली अध्याय।
1971 में देश के लिए सर्वोच्च बलिदान देने वाले वीरों को शत-शत नमन।
#VijayDiwas
https://x.com/i/status/2000881759945417003
भारत की सैन्य शक्ति, रणनीतिक बुद्धिमत्ता और अदम्य साहस का गौरवशाली अध्याय।
1971 में देश के लिए सर्वोच्च बलिदान देने वाले वीरों को शत-शत नमन।
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