*🔷🔶🔷🕌 ﴾ ﷽ ﴿ 🕋🔷🔶🔷*
*🖊️तबलीगी जमाअत का फरेब, पोस्ट ➪14*
*▬▬▭܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀▭▬▬*
*🌟 اَلصَّــلٰوةُوَالسَّلَامُ عَلَيْكَ يَارَسُوْلَ اللّٰهﷺ*
🔘 कादियानी भी दावा करते हैं कि दुनिया भर में सबसे ज्यादा तबलीग हम करते हैं , लेकिन उनके अकाइद के बिना पर उनको दुनिया के सारे मुसलमान काफिर करार देते हैं ।
🔘 तबलीगी जमाअत का हकीकी रूप बिल्कुल बेनकाब होकर आपके सामने आ चुका है । अब आप से हमारी दरख्वास्त है कि आप फैसला करें कि हक पर कौन है ? रोज़ महशर कोई किसी के काम न आयेगा । वहाँ तो हर उम्मती नफ्सी - नफ़्सी पुकारता हुआ , बारगाहे रिसालत मआब में पहुँचेगा ।
🔘 तबलीगी जमाअत वाले या सादगी से उनके दाम में फंसने वाले भोले - भाले सोच लें कि आज अगर उन्होंने इस जमाअत का साथ दिया जिसके अकाबेरीन हुजूरे अकरम सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम की शान में गुस्ताखियां की हैं , तो कल मैदाने महशर में कमली वाले आका सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम के सामने क्या मुँह लेकर जायेंगे ? लेकिन हां ! अभी तो तौबा का दरवाज़ा खुला हुआ है , बेहतरी इसी में है कि गुस्ताखाने रसूल के गिरोह से निकल कर गुलामाने रसूल की सफ़ में शामिल हो जाया जाये ।
◼️आज ले उनकी पनाह , आज मदद मांग उनसे !
◼️फिर ना मानेंगे क्यामत में , अगर मान गया ! !
⚠️ *नोट : -* यहाँ तक का मज़मून *मौलाना शाह तुराबुल हक साहब का है* . और उसके आगे का मज़मून इदारा - ए - शरईया , सुलतानगंज , पटना नम्बर - ६ ; से शाया करदा पोस्टर से माखूज़ हैं ।
*📙 (तबलीगी जमाअत का फरेब, सफा: 19/20)*
*📮पोस्ट जारी रहेगी इन्शा अल्लाह...✍🏻*
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_*☝हमारी दावत एक सच्चे दीन की तरफ*_
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*_✏ आओ इल्म -ए-दीन सीखें....✍🏻_*
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*🖊️तबलीगी जमाअत का फरेब, पोस्ट ➪14*
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*🖊️तबलीगी जमाअत का फरेब, पोस्ट ➪15*
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*🌟 اَلصَّــلٰوةُوَالسَّلَامُ عَلَيْكَ يَارَسُوْلَ اللّٰهﷺ*
*🟠 मुसलमानों को तबलीगी जमाअत से क्यों अलग रहना चाहिये ?*
*💭 एक बुनियादी सवाल*
💬 कोई भी गैरतमन्द इंसान किसी ऐसी तहरीक को हरगिज़ कुबूल नहीं कर सकता , जिससे ईमान व अक़ीदे के जज़्बे को ठेस पहुँचती हो । वे अमल रहना यकीनन बदनसीबी की बात है , लेकिन अमल के नाम पर बद - अकीदा बनकर आख़िरत का इतना बड़ा नुकसान है जिसकी तलाफ़ी ना मुम्किन है ।
💬 जैल में तबलीगी जमाअत के मोतबर किताबों के हवाले से यह साबित किया गया है कि वह दीन के नाम पर मुसलमानों को बेदीन बनाने वाली एक निहायत चालाक जमाअत है । कलिमा और नमाज़ के नाम पर मुसलमानों को अपने रसूल की तरफ से बद - अक़ीदा बनाना और औलिया अल्लाह की अज़मत घटाना और मज़हबे अहले सुन्नत को मिटा कर दुनिया में वहाबीयत फैलाना , तबलीगी जमाअत का बुनियादी नस्बुल ऐन है । चिल्ला , गश्त और चलत - फिरत का तरीका उन्होंने इसी लिये निकाला है कि हक़ परस्त मुसलमानों का ज़ेहन तब्दील करने के लिये , सफर की हालत में उन्हें तन्हाई और एतमाद के लम्हे मयस्सर आ सकें ।
💬 हम अपने दीनी भाईयों से ईमान की सलामती की ख्वाहिश की बुनियादों पर मुख्लेसाना इल्तेमास करते हैं कि वह तबलीगी जमाअत की आवाज़ पर कदम उठाने से पहले एक बार इंसाफ की नज़र से हमारी इस तहरीर का मुताअला फरमा लें , जिससे तबलीगी जमाअत से अलग रहने की माकूल वजूहात ब्यान की गईं हैं । हो सकता है कि हमारी बात आपके दिल में उतर जायें और मज़हबे अहले सुन्नत के ख़िलाफ़ आप वक़्त के सबसे बड़े फ़ितने से होशियार हो जायें । तबलीगी जमाअत की इस धोंस में हरगिज़ ना आईयेगा कि उसके साथ बड़े - बड़े इन्जीनियर डॉक्टर , प्रोफेसर और लखपती व करोड़पती ताजिर हैं ।
💬 हमारा दावा तो यह है कि तबलीगी जमाअत के साथ नज्द के बादशाह अमीर फैसल *(व उनके जानशीन वगैरह)* हैं । पूरी नजदी हुकूमत है , और नजद के रेयाल पर उनका सारा कारोबार चल रहा है । ताकि जिस तरह नदी कौम ने मक्के और मदीने में बड़े - बड़े सहाबा और अहले बैत के मज़ारात और रसूले पाक की यादगार में बनाई हुई मस्जिदों तोड़ कर खन्डहर बना दिया है ।
◽हिन्दुस्तान में भी ख़्वाजा और साबिर , महबूब और मख्दूम , शहीद और कुतुब के मज़ारों के साथ वहीं खेल खेला जाये , और इस तरह शैतान की वह साज़िश कामयाब हो जाये कि रूए ज़मीन पर खुदा के महबूब बन्दों की कोई निशानी बाकी न रहे ।
*📙 (तबलीगी जमाअत का फरेब, सफा: 20/21)*
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*🟠 मुसलमानों को तबलीगी जमाअत से क्यों अलग रहना चाहिये ?*
*💭 एक बुनियादी सवाल*
💬 कोई भी गैरतमन्द इंसान किसी ऐसी तहरीक को हरगिज़ कुबूल नहीं कर सकता , जिससे ईमान व अक़ीदे के जज़्बे को ठेस पहुँचती हो । वे अमल रहना यकीनन बदनसीबी की बात है , लेकिन अमल के नाम पर बद - अकीदा बनकर आख़िरत का इतना बड़ा नुकसान है जिसकी तलाफ़ी ना मुम्किन है ।
💬 जैल में तबलीगी जमाअत के मोतबर किताबों के हवाले से यह साबित किया गया है कि वह दीन के नाम पर मुसलमानों को बेदीन बनाने वाली एक निहायत चालाक जमाअत है । कलिमा और नमाज़ के नाम पर मुसलमानों को अपने रसूल की तरफ से बद - अक़ीदा बनाना और औलिया अल्लाह की अज़मत घटाना और मज़हबे अहले सुन्नत को मिटा कर दुनिया में वहाबीयत फैलाना , तबलीगी जमाअत का बुनियादी नस्बुल ऐन है । चिल्ला , गश्त और चलत - फिरत का तरीका उन्होंने इसी लिये निकाला है कि हक़ परस्त मुसलमानों का ज़ेहन तब्दील करने के लिये , सफर की हालत में उन्हें तन्हाई और एतमाद के लम्हे मयस्सर आ सकें ।
💬 हम अपने दीनी भाईयों से ईमान की सलामती की ख्वाहिश की बुनियादों पर मुख्लेसाना इल्तेमास करते हैं कि वह तबलीगी जमाअत की आवाज़ पर कदम उठाने से पहले एक बार इंसाफ की नज़र से हमारी इस तहरीर का मुताअला फरमा लें , जिससे तबलीगी जमाअत से अलग रहने की माकूल वजूहात ब्यान की गईं हैं । हो सकता है कि हमारी बात आपके दिल में उतर जायें और मज़हबे अहले सुन्नत के ख़िलाफ़ आप वक़्त के सबसे बड़े फ़ितने से होशियार हो जायें । तबलीगी जमाअत की इस धोंस में हरगिज़ ना आईयेगा कि उसके साथ बड़े - बड़े इन्जीनियर डॉक्टर , प्रोफेसर और लखपती व करोड़पती ताजिर हैं ।
💬 हमारा दावा तो यह है कि तबलीगी जमाअत के साथ नज्द के बादशाह अमीर फैसल *(व उनके जानशीन वगैरह)* हैं । पूरी नजदी हुकूमत है , और नजद के रेयाल पर उनका सारा कारोबार चल रहा है । ताकि जिस तरह नदी कौम ने मक्के और मदीने में बड़े - बड़े सहाबा और अहले बैत के मज़ारात और रसूले पाक की यादगार में बनाई हुई मस्जिदों तोड़ कर खन्डहर बना दिया है ।
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*⚫ तबलीगी जमाअत की तहरीक कुरआन व हदीस के खिलाफ है मौलाना इल्यास के खलीफा व मोतमद मौलाना एहतेशामुल हसन साहब का ऐलान*
⭕ तबलीगी जमाअत के सिलसिले में हमारी यह राय शायद किसी गलत जज्बे पर मबनी समझी जाये , लेकिन इसे क्या कहियेगा कि मौलाना ऐहतशामुल हसन जो मौलवी इल्यास के बरादरे निस्वती और उनके खलीफा - ए - अव्वल और उनके मोतमदे खुसूसी हैं , खुद उनका ब्यान है :
⭕ *“ निजामुद्दीन की मौजूदा तबलीग* मेरे इल्म व फ़हम के मुताबिक न कुरआन व हदीस के मुताबिक है और न हजरत मुजद्दिदे अलिफ़ सानी और हज़रत शाह वलीयुल्लाह मुहद्दिस देहलवी और उलमा - ए - हक के मसलक के मुताबिक़ है ।
*📘(उसूले दावत व तबलीग का आखिरी टाइटिल पेज)*
⭕ अब आप ही इंसाफ व ईमान को दरम्यान में रख कर फैसला कीजिये कि जब बस्ती निजामुद्दीन की मौजूदा तबलीग कुरआन व हदीस के भी खिलाफ है , उलमा - ए - हक़ के मसलक के भी खिलाफ है तो इतनी दिलेरी के साथ मुसलमानों को एक गुनाह की दावत क्यों दी जा रही है । आखिर एक गैर इस्लामी फेअल के लिये क्यों इनका कीमती वक्त उनके पसीने की कमाई और उनकी सलाहियतों का दिन दहाड़े खून किया जा रहा है ।
*⭕ मौसूफ का ऐतराफ़ कि मौजूदा तबलीगी तहरीक एक बिदअत व गुमराही है । इसके बाद लिखते हैं :-*
⭕ " मेरी अक्ल व फहम से बहुत बाला है कि जो काम हज़रत मौलाना इल्यास साहब की हयात में वसूलों की इन्तेहाई पाबन्दी के बावजूद सिर्फ बिदअते हसना की हैसियत रखता था । उसको अब इन्तेहाई बे वसूलियों के बाद दीन का एक अहम काम किस तरह करार दिया जा रहा है । अब तो मुनकरात की समूलियत के बाद बिदअते हसना भी नहीं कहा जा सकता । "
*📘 ( उसूले दावत व तबलीग का आखिरी टाइटिल पेज )*
⭕ इस ब्यान में तो मौसूफ ने तबलीगी जमाअत की बिसात ही उलट कर रख दी है । जब मौलाना इल्यास ही की जिन्दगी में यह बात तय पा गई है कि तबलीगी जमाअत की मौजूदा तहरीक सुन्नत नहीं बिदअत है , तो मुसलमानों को इतने अर्से तक क्यों धोखे में रखा गया कि यह अम्बिया का तरीका है , यह सहाबा की सुन्नत है , अब इसका हाल यह है कि यह बिदअते हसना भी नहीं रही , बल्कि बिदअते जलालत के खाने में चली गई , जिसके मुरतकिब को हदीस में जहन्नम की बशारत दी गई है । यह फैसला हमारे घर का नहीं है , बल्कि तबलीगी जमाअत के उन पुराने रहनुमाओं का है जो तबलीगी जमाअत के गुमराहियों से बेज़ार होकर अलग हो गये हैं ।
⭕ अब इंसाफ व दियानत का तकाज़ा यह है कि तबलीगी जमाअत के मौजूदा कायेदीन या तो मौलाना ऐहतशामुल हसन के इन इल्ज़ामात की सफाई पेश करें या फिर सादा लौह मुसलमानों को एक गुनाह की तरफ दावत देने का यह सिलसिला बन्द करें ।
*📙 (तबलीगी जमाअत का फरेब, सफा: 22/23)*
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*⚫ तबलीगी जमाअत की तहरीक कुरआन व हदीस के खिलाफ है मौलाना इल्यास के खलीफा व मोतमद मौलाना एहतेशामुल हसन साहब का ऐलान*
⭕ तबलीगी जमाअत के सिलसिले में हमारी यह राय शायद किसी गलत जज्बे पर मबनी समझी जाये , लेकिन इसे क्या कहियेगा कि मौलाना ऐहतशामुल हसन जो मौलवी इल्यास के बरादरे निस्वती और उनके खलीफा - ए - अव्वल और उनके मोतमदे खुसूसी हैं , खुद उनका ब्यान है :
⭕ *“ निजामुद्दीन की मौजूदा तबलीग* मेरे इल्म व फ़हम के मुताबिक न कुरआन व हदीस के मुताबिक है और न हजरत मुजद्दिदे अलिफ़ सानी और हज़रत शाह वलीयुल्लाह मुहद्दिस देहलवी और उलमा - ए - हक के मसलक के मुताबिक़ है ।
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⭕ अब आप ही इंसाफ व ईमान को दरम्यान में रख कर फैसला कीजिये कि जब बस्ती निजामुद्दीन की मौजूदा तबलीग कुरआन व हदीस के भी खिलाफ है , उलमा - ए - हक़ के मसलक के भी खिलाफ है तो इतनी दिलेरी के साथ मुसलमानों को एक गुनाह की दावत क्यों दी जा रही है । आखिर एक गैर इस्लामी फेअल के लिये क्यों इनका कीमती वक्त उनके पसीने की कमाई और उनकी सलाहियतों का दिन दहाड़े खून किया जा रहा है ।
*⭕ मौसूफ का ऐतराफ़ कि मौजूदा तबलीगी तहरीक एक बिदअत व गुमराही है । इसके बाद लिखते हैं :-*
⭕ " मेरी अक्ल व फहम से बहुत बाला है कि जो काम हज़रत मौलाना इल्यास साहब की हयात में वसूलों की इन्तेहाई पाबन्दी के बावजूद सिर्फ बिदअते हसना की हैसियत रखता था । उसको अब इन्तेहाई बे वसूलियों के बाद दीन का एक अहम काम किस तरह करार दिया जा रहा है । अब तो मुनकरात की समूलियत के बाद बिदअते हसना भी नहीं कहा जा सकता । "
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*🔴 मेवात में तबलीगी जमाअत का फरेब*
◼️मौलवी अब्दुर्रहीम शाह देवबन्दी जो तबलीगी जमाअत के पुराने कारकुन हैं , उन्होंने अपनी किताब *' उसूले दावत व तबलीग '* में इन्केशाफ़ किया है कि आजकल मेवात में तबलीगी जमाअत के लोग कलिमा व नमाज़ की तबलीग के बजाये मुसलमानों को काफ़िर व मुरतद बनाने की मुहिम में मस्रुफ हैं । जैसा कि मौसूफ के अल्फाज़ यह हैं :-
◼️"हमारे मेवात वाले माशा अल्लाह अरब व अजम में मुसलमान बनाते - बनाते उक्ता गये हैं , जी भर गया , इसलिये मेवात के बाज सरगरम मुबल्लेगीन व उलमा ने मुसलमानों को काफ़िर व मुरतद बनाना शुरू कर दिया है ।"
📘 *( उसूले दावत व तबलीग , सफा - ६१ , मतबूआ अलजमीयत प्रेस दिल्ली )*
*◼️इसी किताब में दूसरी जगह फरमाते हैं :* “ मैं हैरान हूँ क्या कहूँ , कुछ समझ में नहीं आता पता नहीं कब से तबलीगी जमाअत का मरकज़ भी ईमानीयत में दाखिल हो गया है और उसका मुखालिफ काफ़िर करार पाता है । *📘 ( सफा - ६१ )*
*🔶 इसी किताब के हाशिये पर एक दूसरे तबलीगी कारकुन मौलवी नूर मुहम्मद चन्दीनी लिखते हैं :-*
◼️अगर ज़रा भी ताक़त हासिल हो जाये और जो मरकज़ न आये , तो उसको बिल्कुल मुरतद के दर्जे में समझते हैं । *📘 ( सफा - ६० )*
◼️तबलीगी जमाअत के इन पुराने कारकुनों के यह बयानात सामने रख कर फैसला कीजिये कि अपने मफ्तूहा इलाके में तबलीगी जमाअत तफ़ीक़ बैनल - मुस्लेमीन की यह जो मुहिम चला रहे हैं , क्या एक लमहा के लिये भी आप यह बर्दाश्त कर सकेंगे कि आपके महफूज़ इलाके में भी तबलीगी जमाअत दाखिल हो कर इसी तरह का फित्ना बरपा करें । अगर आप इसके लिये तैयार नहीं हैं । तो ख़तरे का शिकार होने से पहले , खतरे का संदे . बाब कीजिये ।
*◼️अपने बारे में तबलीगी जमाअत वालों का खुद इकरार कि वह बड़े सख्त वहाबी हैं !*
◼️ ज़माना - ए - हाल के फ़िर्कों में फ़िरका - ए - वहाबिया ने इस्लाम की हुरमत और अम्बिया , औलिया की अज़मत पर जिस बेदर्दी से हमला किया है , वह तारीख का एक निहायत अलमनाक वाकया है । इसी फिरक - ए - वहाबिया नज्दीया के साथ तबलीगी जमाअत के सरबराह मौलाना जकरिया शैखुल हदीस , सहारनपुर और मौलाना मन्जूर नौमानी का वह तअल्लुक मुलाहिज़ा फरमाइये , जिसे सवानेह मौलाना युसुफ कांधेलवी के मुसन्निफ के बयान के मुताबिक़ , मौलाना इल्यास के इन्तेकाल के बाद उनकी जांनशीनी के मसले पर गुफ्तगू करते हुए मौलाना मन्जूर नौमानी ने ज़ाहिर किया था कि :-
*◼️" हम बड़े सख्त वहाबी हैं ।* हमारे लिये इस बात में कोई खास कशिश न होगी कि यहां हज़रत की कब्र मुबारक है , यह मस्जिद है जिसमें हज़रत नमाज़ पढ़ते थे । "
📘 *( सवानेह मौलाना यूसुफ , सफा - १६२ )*
*🔶 मौलाना जकरिया ने इसके जवाब में फ़रमाया :-*
◼️ “ मौलवी साहब मैं खुद तुम से बड़ा वहाबी हूँ । तुम्हें मशवरा दूंगा कि हज़रत चचा जान की कब्र और हज़रत के हुजरे और दरे व दीवार की वजह से यहाँ आने की ज़रूरत नहीं । *📘 ( सफ़ा - १६३ )*
◼️अपने वहाबी होने का खुद अपनी जुबान से यह खुला हुआ इकरार मुलाहिज़ा फरमाइये । कोई दूसरा उनके बारे में कहता तो इल्ज़ाम समझा जाता । लेकिन खुद अपने इक़रार का मतलब सिवा इसके और क्या हो सकता है कि यह हज़रात हकीक़तन वहाबी हैं और उनके पास एतकाद व अमल का जो कुछ भी सरमाया है , वह मदीना का नहीं नज्द का है , और ज़ाहिर है कि इब्ने अब्दुल वहाब नदी का मज़हब जब उन्हें खुद पसन्द है तो यह बताने की ज़रूरत नहीं है कि जिस तबलीगी काफ़िले की वह क्यादत कर रहे हैं , उसे वह किस तरफ़ ले जाना चाहेंगे ।
*📙 (तबलीगी जमाअत का फरेब, सफा: 23/24/25)*
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*🖊️तबलीगी जमाअत का फरेब, पोस्ट ➪17*
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*🔴 मेवात में तबलीगी जमाअत का फरेब*
◼️मौलवी अब्दुर्रहीम शाह देवबन्दी जो तबलीगी जमाअत के पुराने कारकुन हैं , उन्होंने अपनी किताब *' उसूले दावत व तबलीग '* में इन्केशाफ़ किया है कि आजकल मेवात में तबलीगी जमाअत के लोग कलिमा व नमाज़ की तबलीग के बजाये मुसलमानों को काफ़िर व मुरतद बनाने की मुहिम में मस्रुफ हैं । जैसा कि मौसूफ के अल्फाज़ यह हैं :-
◼️"हमारे मेवात वाले माशा अल्लाह अरब व अजम में मुसलमान बनाते - बनाते उक्ता गये हैं , जी भर गया , इसलिये मेवात के बाज सरगरम मुबल्लेगीन व उलमा ने मुसलमानों को काफ़िर व मुरतद बनाना शुरू कर दिया है ।"
📘 *( उसूले दावत व तबलीग , सफा - ६१ , मतबूआ अलजमीयत प्रेस दिल्ली )*
*◼️इसी किताब में दूसरी जगह फरमाते हैं :* “ मैं हैरान हूँ क्या कहूँ , कुछ समझ में नहीं आता पता नहीं कब से तबलीगी जमाअत का मरकज़ भी ईमानीयत में दाखिल हो गया है और उसका मुखालिफ काफ़िर करार पाता है । *📘 ( सफा - ६१ )*
*🔶 इसी किताब के हाशिये पर एक दूसरे तबलीगी कारकुन मौलवी नूर मुहम्मद चन्दीनी लिखते हैं :-*
◼️अगर ज़रा भी ताक़त हासिल हो जाये और जो मरकज़ न आये , तो उसको बिल्कुल मुरतद के दर्जे में समझते हैं । *📘 ( सफा - ६० )*
◼️तबलीगी जमाअत के इन पुराने कारकुनों के यह बयानात सामने रख कर फैसला कीजिये कि अपने मफ्तूहा इलाके में तबलीगी जमाअत तफ़ीक़ बैनल - मुस्लेमीन की यह जो मुहिम चला रहे हैं , क्या एक लमहा के लिये भी आप यह बर्दाश्त कर सकेंगे कि आपके महफूज़ इलाके में भी तबलीगी जमाअत दाखिल हो कर इसी तरह का फित्ना बरपा करें । अगर आप इसके लिये तैयार नहीं हैं । तो ख़तरे का शिकार होने से पहले , खतरे का संदे . बाब कीजिये ।
*◼️अपने बारे में तबलीगी जमाअत वालों का खुद इकरार कि वह बड़े सख्त वहाबी हैं !*
◼️ ज़माना - ए - हाल के फ़िर्कों में फ़िरका - ए - वहाबिया ने इस्लाम की हुरमत और अम्बिया , औलिया की अज़मत पर जिस बेदर्दी से हमला किया है , वह तारीख का एक निहायत अलमनाक वाकया है । इसी फिरक - ए - वहाबिया नज्दीया के साथ तबलीगी जमाअत के सरबराह मौलाना जकरिया शैखुल हदीस , सहारनपुर और मौलाना मन्जूर नौमानी का वह तअल्लुक मुलाहिज़ा फरमाइये , जिसे सवानेह मौलाना युसुफ कांधेलवी के मुसन्निफ के बयान के मुताबिक़ , मौलाना इल्यास के इन्तेकाल के बाद उनकी जांनशीनी के मसले पर गुफ्तगू करते हुए मौलाना मन्जूर नौमानी ने ज़ाहिर किया था कि :-
*◼️" हम बड़े सख्त वहाबी हैं ।* हमारे लिये इस बात में कोई खास कशिश न होगी कि यहां हज़रत की कब्र मुबारक है , यह मस्जिद है जिसमें हज़रत नमाज़ पढ़ते थे । "
📘 *( सवानेह मौलाना यूसुफ , सफा - १६२ )*
*🔶 मौलाना जकरिया ने इसके जवाब में फ़रमाया :-*
◼️ “ मौलवी साहब मैं खुद तुम से बड़ा वहाबी हूँ । तुम्हें मशवरा दूंगा कि हज़रत चचा जान की कब्र और हज़रत के हुजरे और दरे व दीवार की वजह से यहाँ आने की ज़रूरत नहीं । *📘 ( सफ़ा - १६३ )*
◼️अपने वहाबी होने का खुद अपनी जुबान से यह खुला हुआ इकरार मुलाहिज़ा फरमाइये । कोई दूसरा उनके बारे में कहता तो इल्ज़ाम समझा जाता । लेकिन खुद अपने इक़रार का मतलब सिवा इसके और क्या हो सकता है कि यह हज़रात हकीक़तन वहाबी हैं और उनके पास एतकाद व अमल का जो कुछ भी सरमाया है , वह मदीना का नहीं नज्द का है , और ज़ाहिर है कि इब्ने अब्दुल वहाब नदी का मज़हब जब उन्हें खुद पसन्द है तो यह बताने की ज़रूरत नहीं है कि जिस तबलीगी काफ़िले की वह क्यादत कर रहे हैं , उसे वह किस तरफ़ ले जाना चाहेंगे ।
*📙 (तबलीगी जमाअत का फरेब, सफा: 23/24/25)*
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*🟡 नजदी हुकूमत के साथ तबलीगी जमाअत का मुआहदा*
↪️ बात इतनी ही पर खत्म नहीं हो गयी है , बकि नज्द के वहाबी फिरके के साथ तबलीगी जमाअत का जेहनी और फिकी तअल्लुक अब एक मुआहदे के शक्ल में हमारे सामने आ गया है । जैसा कि तबलीगी जमाअत के सरबराह मौलाना अबुल हसन अली नजदी ने अपनी किताब *" मौलाना इल्यास और उनकी दीनी दावत ” में लिखा है कि १४ मार्च १६३८ ई० को बानिये तबलीग़ मौलाना इल्यास अपना एक वफ्द लेकर नज्द के दरबार में हाज़िर हुए ।* और उसके सामने तबलीगी जमाअत के अग़राज़ व मक़ासिद को पेश किया । जिस पर सुल्तान ने अपनी खुशनूदी का इजहार किया । अखीर में यह वफ्द नदी हुकूमत के शैखुल - इस्लाम के पास गया और उनके सामने मक़ासिदे तबलीग का कागज़ पेश किया । जिसकी बाबत मौलाना अबुल हसन अली नदवी ने लिखा है कि : " उन्होंने बहुत एजाज़ व इकराम के साथ और हर बात की खूब - खूब ताईद की और ज़बानी पूरी हमदर्दी व इआनत का वादा किया । "
📘 *( दीनी दावत , सफ़ा - १०१ )*
↪️ अब आप ने समझ लिया होगा कि तबलीगी जमाअत के मरकज़ में सोने और चाँदी की नहरें बह रही हैं , वह कहाँ से आती है ? यह वही नजदी हुकूमत का रेयाल है , जो मुआहदे के मुताबिक उन्हें दिया जा रहा है । ताकि हिन्दुस्तान के सादा लौह मुसलमानों का ईमान गारत करके उन्हें नजदी वहाबियों की तरह रसूले अरबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम और औलिया - ए - किराम की तरफ से बद - अकीदा और गुस्ताख़ बना दिया जाये । यह नजदी हुकूमत के एजेन्ट हैं , जो कलिमा और नमाज के नाम पर सादा लौह मुसलमानों को इकट्ठा करके उनके अकीदा व ईमान का शिकार करना चाहते हैं ।
*📙 (तबलीगी जमाअत का फरेब, सफा: 26/27)*
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*🟡 नजदी हुकूमत के साथ तबलीगी जमाअत का मुआहदा*
↪️ बात इतनी ही पर खत्म नहीं हो गयी है , बकि नज्द के वहाबी फिरके के साथ तबलीगी जमाअत का जेहनी और फिकी तअल्लुक अब एक मुआहदे के शक्ल में हमारे सामने आ गया है । जैसा कि तबलीगी जमाअत के सरबराह मौलाना अबुल हसन अली नजदी ने अपनी किताब *" मौलाना इल्यास और उनकी दीनी दावत ” में लिखा है कि १४ मार्च १६३८ ई० को बानिये तबलीग़ मौलाना इल्यास अपना एक वफ्द लेकर नज्द के दरबार में हाज़िर हुए ।* और उसके सामने तबलीगी जमाअत के अग़राज़ व मक़ासिद को पेश किया । जिस पर सुल्तान ने अपनी खुशनूदी का इजहार किया । अखीर में यह वफ्द नदी हुकूमत के शैखुल - इस्लाम के पास गया और उनके सामने मक़ासिदे तबलीग का कागज़ पेश किया । जिसकी बाबत मौलाना अबुल हसन अली नदवी ने लिखा है कि : " उन्होंने बहुत एजाज़ व इकराम के साथ और हर बात की खूब - खूब ताईद की और ज़बानी पूरी हमदर्दी व इआनत का वादा किया । "
📘 *( दीनी दावत , सफ़ा - १०१ )*
↪️ अब आप ने समझ लिया होगा कि तबलीगी जमाअत के मरकज़ में सोने और चाँदी की नहरें बह रही हैं , वह कहाँ से आती है ? यह वही नजदी हुकूमत का रेयाल है , जो मुआहदे के मुताबिक उन्हें दिया जा रहा है । ताकि हिन्दुस्तान के सादा लौह मुसलमानों का ईमान गारत करके उन्हें नजदी वहाबियों की तरह रसूले अरबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम और औलिया - ए - किराम की तरफ से बद - अकीदा और गुस्ताख़ बना दिया जाये । यह नजदी हुकूमत के एजेन्ट हैं , जो कलिमा और नमाज के नाम पर सादा लौह मुसलमानों को इकट्ठा करके उनके अकीदा व ईमान का शिकार करना चाहते हैं ।
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*🟤 तबलीगी जमाअत अहादीस की रौशनी में*
📍 नज्द के वहाबी मजहब को दुनिया में फैला कर मुसलमानों को बद - अकीदा बनाने वालो यही वह तबलीगी जमाअत हैं जिसके मुतअल्लिक *रसूले अरबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम* ने निहायत वाजेह निशानियों के साथ *चौदह सौ ( १४०० )* बरस पहले अपनी उम्मत को खबरदार किया है कि अब तुम उनका ज़माना पाओ तो उनसे दूर रहना और उनके खिलाफ जिहाद करना । इस मज़मून की हदीस जैल में मुलाहिजा फरमायें :
*↪️ ( १ )* “ हज़रत अली रज़ि अल्लाहु अन्हु फरमाते हैं कि मैंने हुजूरे अनवर सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम को यह फरमाते हुए सुना है कि अखीर ज़माने में नौ उम्र और कम समझ लोगों की एक जमाअत निकलेगी , बातें वह बज़ाहिर अच्छी कहेंगे , लेकिन ईमान उनके हलक से नीचे नहीं उतरेगा । वह दीन से ऐसे निकल जायेंगे जैसे तीर शिकार से निकल जाता है । पस तुम उन्हें जहां पाना कत्ल कर देना कि क्यामत के दिन उनके कातिल के लिये बड़ा अज़ व सवाब है।
*📗(बुखारी शरीफ जिल्द - २ ,सफा १०२४)*
*↪️ ( २ )* " हज़रते शरीक इब्ने शहाब रज़ि अल्लाहु अन्हु से मनकूल है कि हुजूर ने फरमाया कि एक गिरोह निकलेगा , वह कुरआन पढ़ेंगे , लेकिन कुरआन उनके हलक के नीचे नहीं उतरेगा । वह इस्लाम से ऐसे निकल जायेंगे जैसे तीर शिकार से उनकी खास पहचान ' सर मुढ़ाना है । वह हमेशा गिरोह दर गिरोह निकलते रहेंगे । यहां तक कि उनका आखिरी दस्ता मसीहुद् - दज्जाल के साथ निकलेगा । अब तुम उनसे मिलोगे तो तबीयत और सरिश्त के लिहाज से बद - तरीन पाओगे ।
📗 *( मिश्कात शरीफ़ , पेज - ३०६ )*
↪️ *( ३ )* हज़रत अबू सईद खुदरी और हज़रते अनस बिन मालिक रज़ि अल्लाहु अन्हुमा से मिश्कात शरीफ़ में यह हदीस नक़ल की गई है कि हुजूर सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने इरशाद फरमाया कि मेरी उम्मत में इख़्तिलाफ़ व तफ़ीक़ का वाके होना मुक़द्दर बन चुका है । पस इस सिलसिले में एक गिरोह निकलेगा जिसकी बातें बज़ाहिर दिल फरेब व खुशनुमा होगी , लेकिन किरदार गुमराह कुन और ख़राब होगा । वह कुरआन पढ़ेंगे , लेकिन कुरआन उनके हलक के नीचे नहीं उतरेगा , वह दीन से ऐसे निकल जायेंगे जैसे तीर से शिकार निकल जाता है । फिर दीन की तरफ वापस लौटना नहीं नसीब होगा । यहां तक कि तीर अपने कमान की तरफ लौट आये । वह अपनी तबीयत और सरिश्त के लिहाज़ से बदतरीन मखलूक होंगे । वह लोगों को कुरआन और दीन की तरफ बुलायेंगे , हालांकि दीन से उनका कुभी तअल्लुक न होगा । जो उनसे क़त्ताल करेगा , वह खुदा का मुकर्रब तरीन बन्दा होगा । सहाबा ने अर्ज किया कि उनको खास पहचान क्या होगी या रसूलुल्लाह ! फ़रमाया सर मुढ़ाना ।
*📗 ( मिश्कात, सफ़ा - ३०८ )*
*📙 (तबलीगी जमाअत का फरेब, सफा: 28,29)*
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📍 नज्द के वहाबी मजहब को दुनिया में फैला कर मुसलमानों को बद - अकीदा बनाने वालो यही वह तबलीगी जमाअत हैं जिसके मुतअल्लिक *रसूले अरबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम* ने निहायत वाजेह निशानियों के साथ *चौदह सौ ( १४०० )* बरस पहले अपनी उम्मत को खबरदार किया है कि अब तुम उनका ज़माना पाओ तो उनसे दूर रहना और उनके खिलाफ जिहाद करना । इस मज़मून की हदीस जैल में मुलाहिजा फरमायें :
*↪️ ( १ )* “ हज़रत अली रज़ि अल्लाहु अन्हु फरमाते हैं कि मैंने हुजूरे अनवर सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम को यह फरमाते हुए सुना है कि अखीर ज़माने में नौ उम्र और कम समझ लोगों की एक जमाअत निकलेगी , बातें वह बज़ाहिर अच्छी कहेंगे , लेकिन ईमान उनके हलक से नीचे नहीं उतरेगा । वह दीन से ऐसे निकल जायेंगे जैसे तीर शिकार से निकल जाता है । पस तुम उन्हें जहां पाना कत्ल कर देना कि क्यामत के दिन उनके कातिल के लिये बड़ा अज़ व सवाब है।
*📗(बुखारी शरीफ जिल्द - २ ,सफा १०२४)*
*↪️ ( २ )* " हज़रते शरीक इब्ने शहाब रज़ि अल्लाहु अन्हु से मनकूल है कि हुजूर ने फरमाया कि एक गिरोह निकलेगा , वह कुरआन पढ़ेंगे , लेकिन कुरआन उनके हलक के नीचे नहीं उतरेगा । वह इस्लाम से ऐसे निकल जायेंगे जैसे तीर शिकार से उनकी खास पहचान ' सर मुढ़ाना है । वह हमेशा गिरोह दर गिरोह निकलते रहेंगे । यहां तक कि उनका आखिरी दस्ता मसीहुद् - दज्जाल के साथ निकलेगा । अब तुम उनसे मिलोगे तो तबीयत और सरिश्त के लिहाज से बद - तरीन पाओगे ।
📗 *( मिश्कात शरीफ़ , पेज - ३०६ )*
↪️ *( ३ )* हज़रत अबू सईद खुदरी और हज़रते अनस बिन मालिक रज़ि अल्लाहु अन्हुमा से मिश्कात शरीफ़ में यह हदीस नक़ल की गई है कि हुजूर सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने इरशाद फरमाया कि मेरी उम्मत में इख़्तिलाफ़ व तफ़ीक़ का वाके होना मुक़द्दर बन चुका है । पस इस सिलसिले में एक गिरोह निकलेगा जिसकी बातें बज़ाहिर दिल फरेब व खुशनुमा होगी , लेकिन किरदार गुमराह कुन और ख़राब होगा । वह कुरआन पढ़ेंगे , लेकिन कुरआन उनके हलक के नीचे नहीं उतरेगा , वह दीन से ऐसे निकल जायेंगे जैसे तीर से शिकार निकल जाता है । फिर दीन की तरफ वापस लौटना नहीं नसीब होगा । यहां तक कि तीर अपने कमान की तरफ लौट आये । वह अपनी तबीयत और सरिश्त के लिहाज़ से बदतरीन मखलूक होंगे । वह लोगों को कुरआन और दीन की तरफ बुलायेंगे , हालांकि दीन से उनका कुभी तअल्लुक न होगा । जो उनसे क़त्ताल करेगा , वह खुदा का मुकर्रब तरीन बन्दा होगा । सहाबा ने अर्ज किया कि उनको खास पहचान क्या होगी या रसूलुल्लाह ! फ़रमाया सर मुढ़ाना ।
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↪️ *( ४ )* " मिश्कात शरीफ में हज़रते अबू सईद खुदरी रज़ि अल्लाहु तआला अन्हु से मनकूल है , वह कहते हैं कि हम लोग *हुजूर अनवर सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम* की ख़िदमत में हाज़िर थे और हुजूर माले गनीमत तक्सीम फरमा रहे थे कि जुलख़वेसरा का नाम एक ' शख्स जो क़बीलये बनी तमीम का रहने वाला था , आया और कहा , ऐ अल्लाह के रसूल इन्साफ़ से काम लो । *हुजूर ने फ़रमाया ,* अफ़सोस तेरी जसारत पर मैं ही इंसाफ नहीं करूंगा तो और कौन इंसाफ़ करने वाला है । अगर मैं इंसाफ नहीं करता तो खाइब व ख़ासिर हो चुका होता । हज़रत उमर से जब नहीं रहा गया तो उन्होंने अर्ज़ किया कि हुजूर मुझे इजाज़त दीजिये मैं उसकी गर्दन मार दूं । हुजूर ने फ़रमाया , इसे छोड़ दो । यह अकेला नहीं है । इसके बहुत से साथी हैं , जिनकी नमाज़ों और जिनके रोज़ों को देख कर तुम अपनी अपनी नमाज़ों और रोज़ों को हकीर समझोगे । वह कुरआन पढ़ेंगे , लेकिन कुरआन उनके हलक के नीचे नहीं उतरेगा । इन सारी ज़ाहिरी खूबियों के बावजूद , वह दीन से ऐसे निकल जायेंगे , जैसे तीर शिकार से निकल जाता है । '
*📗(बुखारी शरीफ़ , जिल्द - २ ,पेज - १०२४)*
*🔵 जमीर का फैसला*
↪️ इन हालात में अब मोमिन का ज़मीर ही उसका फैसला करेगा कि रसूले पाक को खुशनूदी तबलीगी जमाअत के साथ मुनसलिक होने में है या उससे एलाहदा रहने में । सवाल उन लोगों से है जिन्हें सिर्फ खुदा व रसूल की खुशनूदी का जज्बा तबलीग की तरफ खींच कर ले जाता है । बाकी रहे वह लोग जो किसी माद्दी मुनफअत की लालच या मज़हबी शकावत के जज्बे में साथ हो गये हैं , उनकी वापसी की तवक्का नहीं की जा सकती ।
*📙 (तबलीगी जमाअत का फरेब, सफा: 28/29/30)*
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↪️ इन हालात में अब मोमिन का ज़मीर ही उसका फैसला करेगा कि रसूले पाक को खुशनूदी तबलीगी जमाअत के साथ मुनसलिक होने में है या उससे एलाहदा रहने में । सवाल उन लोगों से है जिन्हें सिर्फ खुदा व रसूल की खुशनूदी का जज्बा तबलीग की तरफ खींच कर ले जाता है । बाकी रहे वह लोग जो किसी माद्दी मुनफअत की लालच या मज़हबी शकावत के जज्बे में साथ हो गये हैं , उनकी वापसी की तवक्का नहीं की जा सकती ।
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*📖 दीन की बुनियादी बातें, पोस्ट ➪01📖*
*▬▬▭܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀▭▬▬*
*🌟 اَلصَّــلٰوةُوَالسَّلَامُ عَلَيْكَ يَارَسُوْلَ اللّٰهﷺ*
*☝🏻अकाइद का बयान (1) ☝🏻*
*🌹👉🏻 सवाल नम्बर 1 -* ईमान किसे कहते हैं ?
*🍀👉🏻 जवाब :* अल्लाह तआला और उसके रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की बताई हुई तमाम बातों का यकीन करना । उन्हें दिल से हक जानना और ज़रूरियाते दीन में से किसी बात का इंकार न करना ईमान है।
*🌹👉🏻 सवाल नम्बर 2 -* कुफ्र किसे कहते हैं ?
*🍀👉🏻 जवाब :* ज़रूरियाते दीन में से किसी बात का इंकार कुफ्र है । ज़रूरियाते दीन बहुत है मसलन अल्लाह तआला को एक मानना उसे हर ऐब से पाक मानना उसके मलाइका और उसकी तमाम किताबों का मानना । कयामत , हिसाब व किताब और जन्नत व दौज़ख को हक मानना वगैराह।
*🌹👉🏻 सवाल नम्बर 3 -* शिर्क किसे कहते है ?
*🍀👉🏻 जवाब :* अल्लाह तआला की जात व सिफात में किसी को शरीक ठहराना शिर्क है । जात में शिर्क का मतलब ये है कि दो या दो से ज़्यादा खुदा माने जैसे ईसाई तीन और हिन्दू कई खुदा मानकर मुशरिक है । सिफात में शिर्क का मतलब ये है कि अल्लाह तआला की सिफत की तरह दूसरे के लिए कोई सिफत माने मसलन सुनना । यह सिफत अल्लाह तआला के लिए बगैर किसी के दिये जाती तौर पर साबित है । इस सिफ़त को किसी दूसरे के लिए जाती तौर पर मानना शिर्क है ।
*🌹👉🏻 सवाल नम्बर 4 -* तकदीर किसे कहते है ?
*🍀👉🏻 जवाब :* दुनिया में जो कुछ होता है और बन्दे जो कुछ भलाई बुराई करते हैं अल्लाह तआला ने उसे अपने इल्म के मुआकिफ पहले से लिख लिया है उसी को तकदीर कहते हैं ।
*🌹👉🏻 सवाल नम्बर 5 -* मीज़ान क्या है ?
*🍀👉🏻 जवाब :* मीज़ान हक है यह एक तराजू है जिस के दो पल्ले होंगे उस पर लोगों के अच्छे बुरे आमाल तोले जाएगें । नेकियों का पल्ला अगर भारी होगा तो ऊपर उठेगा और बुराई का पल्ला नीचे बैठेगा ।
*🌹👉🏻 सवाल नम्बर 6 -* सिरात क्या है ?
*🍀👉🏻 जवाब :* यह एक पुल है जो जहन्नम के ऊपर होगा । यह बाल से ज़्यादा बारीक और तलवार से ज़्यादा तेज़ है । जन्नत का यही रास्ता है सब को इस पर चलना होगा कुफ्फार नचल सकेंगे और जहन्नम में गिर जायेंगे जबकि मुसलमान पार हो जायेंगे।
*🌹👉🏻 सवाल नम्बर 7 -* मुअजजा और करामत किसे कहते हैं ?
*🍀👉🏻 जवाब :* वह अजीबो गरीब काम जो आदतन नामुमकिन हो और नबी अपनी नुबूवत के सबूत में पेश करें । वो मुअजज़ा है जैसे मुर्दे को ज़िन्दा करना वगैरह और ऐसी अजीबो गरीब बात अगर वली से जाहिर हो तो उसे करामत कहते हैं।
*🌹👉🏻 सवाल नम्बर 8 -* क्या तकदीर के मुताबिक काम करने पर आदमी मजबूर है ?
*🍀👉🏻 जवाब :* नहीं बन्दों को अल्लाह तआला ने नेकी व बदी करने पर इख्तियार दिया है वो अपने इख्तियार से जो कुछ करता है वो सब अल्लाह तआला के यहां लिखा होता।
*🌹👉🏻 सवाल नम्बर 9 -* कब्र में मुर्दो से कौन से सवालात होते हैं ?
*🍀👉🏻 जवाब :* मुनकर नकीर कब्र में मुर्दो से तीन सवाल
*☞1 )* तेरा रब कौन है ,
*☞2 )* तेरा दीन क्या है
*☞3 )* इनके बारे में तू क्या कहता था।
*🌹👉🏻 सवाल नम्बर 10 -* कब्र में किस किस से सवाल नहीं होता ?
*🍀👉🏻 जवाब -* हज़राते अम्बिया - ए - किराम अलैयहिमुस्सलाम से कब्र में सवाल नहीं होता । यूं ही कुछ उम्मतियों से भी न होगा । जैसे जुम्आ और रमज़ान में मरने वाले मुसलमान से सवाल नहीं होता।
*📙 (दीन की बुनियादी बातें, सफ्हा 2,3)*
*📮पोस्ट जारी रहेगी इन्शा अल्लाह...✍🏻*
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_*☝हमारी दावत एक सच्चे दीन की तरफ*_
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*🌹👉🏻 सवाल नम्बर 2 -* कुफ्र किसे कहते हैं ?
*🍀👉🏻 जवाब :* ज़रूरियाते दीन में से किसी बात का इंकार कुफ्र है । ज़रूरियाते दीन बहुत है मसलन अल्लाह तआला को एक मानना उसे हर ऐब से पाक मानना उसके मलाइका और उसकी तमाम किताबों का मानना । कयामत , हिसाब व किताब और जन्नत व दौज़ख को हक मानना वगैराह।
*🌹👉🏻 सवाल नम्बर 3 -* शिर्क किसे कहते है ?
*🍀👉🏻 जवाब :* अल्लाह तआला की जात व सिफात में किसी को शरीक ठहराना शिर्क है । जात में शिर्क का मतलब ये है कि दो या दो से ज़्यादा खुदा माने जैसे ईसाई तीन और हिन्दू कई खुदा मानकर मुशरिक है । सिफात में शिर्क का मतलब ये है कि अल्लाह तआला की सिफत की तरह दूसरे के लिए कोई सिफत माने मसलन सुनना । यह सिफत अल्लाह तआला के लिए बगैर किसी के दिये जाती तौर पर साबित है । इस सिफ़त को किसी दूसरे के लिए जाती तौर पर मानना शिर्क है ।
*🌹👉🏻 सवाल नम्बर 4 -* तकदीर किसे कहते है ?
*🍀👉🏻 जवाब :* दुनिया में जो कुछ होता है और बन्दे जो कुछ भलाई बुराई करते हैं अल्लाह तआला ने उसे अपने इल्म के मुआकिफ पहले से लिख लिया है उसी को तकदीर कहते हैं ।
*🌹👉🏻 सवाल नम्बर 5 -* मीज़ान क्या है ?
*🍀👉🏻 जवाब :* मीज़ान हक है यह एक तराजू है जिस के दो पल्ले होंगे उस पर लोगों के अच्छे बुरे आमाल तोले जाएगें । नेकियों का पल्ला अगर भारी होगा तो ऊपर उठेगा और बुराई का पल्ला नीचे बैठेगा ।
*🌹👉🏻 सवाल नम्बर 6 -* सिरात क्या है ?
*🍀👉🏻 जवाब :* यह एक पुल है जो जहन्नम के ऊपर होगा । यह बाल से ज़्यादा बारीक और तलवार से ज़्यादा तेज़ है । जन्नत का यही रास्ता है सब को इस पर चलना होगा कुफ्फार नचल सकेंगे और जहन्नम में गिर जायेंगे जबकि मुसलमान पार हो जायेंगे।
*🌹👉🏻 सवाल नम्बर 7 -* मुअजजा और करामत किसे कहते हैं ?
*🍀👉🏻 जवाब :* वह अजीबो गरीब काम जो आदतन नामुमकिन हो और नबी अपनी नुबूवत के सबूत में पेश करें । वो मुअजज़ा है जैसे मुर्दे को ज़िन्दा करना वगैरह और ऐसी अजीबो गरीब बात अगर वली से जाहिर हो तो उसे करामत कहते हैं।
*🌹👉🏻 सवाल नम्बर 8 -* क्या तकदीर के मुताबिक काम करने पर आदमी मजबूर है ?
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*🌹👉🏻 सवाल नम्बर 9 -* कब्र में मुर्दो से कौन से सवालात होते हैं ?
*🍀👉🏻 जवाब :* मुनकर नकीर कब्र में मुर्दो से तीन सवाल
*☞1 )* तेरा रब कौन है ,
*☞2 )* तेरा दीन क्या है
*☞3 )* इनके बारे में तू क्या कहता था।
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*🍀👉🏻 जवाब -* हज़राते अम्बिया - ए - किराम अलैयहिमुस्सलाम से कब्र में सवाल नहीं होता । यूं ही कुछ उम्मतियों से भी न होगा । जैसे जुम्आ और रमज़ान में मरने वाले मुसलमान से सवाल नहीं होता।
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*🌹👉🏻 सवाल नम्बर 11 -* मशहूर आसमानी किताबें कितनी हैं ?
*🍀👉🏻 जवाब :* चार हैं 1 . तौरेत , 2 . जबूर , 3 . इंजील , 4 . और कुरआन शरीफ।
*🌹👉🏻 सवाल नम्बर 12 -* क्या नबीए करीम सल्लल्लाहु तआला अलैह वसल्लम नूर है ?
*🍀👉🏻 जवाब :* जी हां अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम नूर हैं । अल्लाह तआला का इरशाद है قَدْ جَاءَکُمْ مِنَ اللہِ نُوْرٌوَّ کِتٰبٌ مُّبِیْنٌ हज़रत अब्दुल्लाह इब्ने अब्बास रदी अल्लाहु तआला अन्हु ने इस की तफसीर में फरमाया की नूर से मुराद हुजूर सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम हैं और کِتٰبٌ مُّبِیْنٌ से मुराद कुरआन है ।
*🌹👉🏻 सवाल नम्बर 13 -* क्या हमारे आका सल्लल्लाहु तआला अलैह वसल्लम गैब जानते हैं ?
*🍀👉🏻 जवाब :* बिला शुबहा अल्लाह तआला ने हमारे आका सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम को बेशुमार उलूमे गैबियाह अता फरमाए हैं । चुनान्चे अल्लाह तआला का इरशाद है وَمَا ھُوَ عَلَی الْغَیْبِ بِضَنِیْنْ
📖 *तरजुमा* ये नबी गैब की बातें बताने में बखील नहीं।
*🌹👉🏻 सवाल नम्बर 14 -* क्या अल्लाह तआला के अलावा किसी और से मदद मांगना जाइज़ है ?
*🍀👉🏻 जवाब :* अल्लाह तआला के नेक बन्दे भी अल्लाह तआला की अता से मदद करते हैं लिहाजा उन से मदद मांगना जाइज़ है । कुरआन पाक में रब तआला का इरशाद है । قُلْ بِفَضْلِ اللہِ وَبِرَحْمَتِہٖ فَبِذٰلِکَ فَلْیَفْرحُوْ
📖 *तरजुमा -* " बेशक अल्लाह तआला उनका मददगार है और जिब्रइल और नेक ईमान वाले और इसके बाद फरिशतें मदद करते हैं । "
*🌹👉🏻 सवाल नम्बर 15 -* क्या ईद मीलादुन्नबी सल्लल्लाहु तआला अलैह वसल्लम मनाना जाइज़ है ?
*🍀👉🏻 जवाब -* बिलाशुबा ईद मीलादुन्नबी सल्लल्लाहु तआला अलैह वसल्लम मनाना जाइज़ है क्योंकि रसूलल्लाह सल्लल्लाहु तआला अलैह वसल्लम रब तआला की रहमत है और अल्लाह तआला का इरशाद है وَلٰکِن رَّسُوْلَ اللہِ وَخَاتَم النَّبیِّیْنَ
📖 *तरजुमा-* फरमा दीजिये लोग अल्लाह के फज़ल और उस की रहमत पर खुशी मनाएँ ।
*🌹👉🏻 सवाल नम्बर 16 -* क्या नबी ए करीम सल्लल्लाहु तआला अलैह वसल्लम हाज़िर व नाज़िर हैं ?
*🍀👉🏻 जवाब -* बेशक रसूले अकरम सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम हाज़िर व नाज़िर है जैसा कि कुरआने मुकद्दस में अल्लाह तआला का इरशाद है
*📖 तरजुमा* बे शक हमने तुम्हें भेजा हाज़िर व नाज़िर और खुशी और डर सुनाता ।
*🌹👉🏻 सवाल नम्बर 17 -* क्या हमारे आका सल्लल्लाहु तआला अलैह वसल्लम के बाद कोई और नबी आ सकता है ?
*🍀👉🏻 जवाब :* हरगिज़ नहीं हमारे आका सल्लल्लाहु तआला अलैह वसल्लम पर नुबूवत का दरवाज़ा बन्द हो गया आप के बाद किसी नये नबी का आना नामुमकिन है । अल्लाह तआला फरमाता है قُلْ بِفَضْلِ اللہِ وَبِرَحْمَتِہٖ فَبِذٰلِکَ فَلْیَفْرحُوْ
*📖 तरजुमा* हां अल्लाह के रसूल हैं और सब नबियों के आखरी हैं । लिहाजा जो शख्स हुजूर सल्लल्लाहु तआला अलैह वसल्लम के ज़माने में या हुजूर के बाद किसी को नुबूवत मिलना माने वो काफिर है ।
*🌹👉🏻 सवाल नम्बर 18 -* क्या अम्बियाए किराम बाद विसाल जिन्दा हैं ?
*🍀👉🏻 जवाब :* अम्बियाए किराम अलैहिमुस्सलाम अपनी अपनी कब्रों में इसी तरह जिन्दा हैं जिस तरह दुनिया में थे वादा ए इलाही की तसदीक के लिए एक लम्हा को उन पर मौत तारी हुई फिर बदस्तूर जिन्दा हो गयें ।
*🌹👉🏻 सवाल नम्बर 19 -* क्या कयामत के दिन कोई किसी की शफाअत करेगा ?
*🍀👉🏻 जवाब :* कयामत के दिन हुजूर - ए - अकरम हुजूर सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम बाबे शफाअत खोलेंगे बाद में दीगर महबूबान बारगाहे इलाही भी शफाअत करेंगे ।
*🌹👉🏻 सवाल नम्बर 20 -* सहाबी का रूतबा क्या है ?
*🍀👉🏻 जवाब :* कोई वली कितने ही बड़े मरतबे का हो किसी सहाबी के रूतबे को नहीं पहुँचता किसी सहाबी के साथ बद अकीदगी गुमराही है । हज़रत अली रदियल्लाहु तआला अन्हु से हज़रत अमीर मुआविया रदियल्लाहु अन्हु की जंग इजतिहादी खता है जो गुनाह नहीं । इसलिए हज़रत अमीर मुआविया रदी यल्लाहु अन्हु को ज़ालिम या कोई बुरा कलमा कहना हरामो ना जाइज बल्कि राफजियत है ।
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*🌹👉🏻 सवाल नम्बर 12 -* क्या नबीए करीम सल्लल्लाहु तआला अलैह वसल्लम नूर है ?
*🍀👉🏻 जवाब :* जी हां अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम नूर हैं । अल्लाह तआला का इरशाद है قَدْ جَاءَکُمْ مِنَ اللہِ نُوْرٌوَّ کِتٰبٌ مُّبِیْنٌ हज़रत अब्दुल्लाह इब्ने अब्बास रदी अल्लाहु तआला अन्हु ने इस की तफसीर में फरमाया की नूर से मुराद हुजूर सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम हैं और کِتٰبٌ مُّبِیْنٌ से मुराद कुरआन है ।
*🌹👉🏻 सवाल नम्बर 13 -* क्या हमारे आका सल्लल्लाहु तआला अलैह वसल्लम गैब जानते हैं ?
*🍀👉🏻 जवाब :* बिला शुबहा अल्लाह तआला ने हमारे आका सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम को बेशुमार उलूमे गैबियाह अता फरमाए हैं । चुनान्चे अल्लाह तआला का इरशाद है وَمَا ھُوَ عَلَی الْغَیْبِ بِضَنِیْنْ
📖 *तरजुमा* ये नबी गैब की बातें बताने में बखील नहीं।
*🌹👉🏻 सवाल नम्बर 14 -* क्या अल्लाह तआला के अलावा किसी और से मदद मांगना जाइज़ है ?
*🍀👉🏻 जवाब :* अल्लाह तआला के नेक बन्दे भी अल्लाह तआला की अता से मदद करते हैं लिहाजा उन से मदद मांगना जाइज़ है । कुरआन पाक में रब तआला का इरशाद है । قُلْ بِفَضْلِ اللہِ وَبِرَحْمَتِہٖ فَبِذٰلِکَ فَلْیَفْرحُوْ
📖 *तरजुमा -* " बेशक अल्लाह तआला उनका मददगार है और जिब्रइल और नेक ईमान वाले और इसके बाद फरिशतें मदद करते हैं । "
*🌹👉🏻 सवाल नम्बर 15 -* क्या ईद मीलादुन्नबी सल्लल्लाहु तआला अलैह वसल्लम मनाना जाइज़ है ?
*🍀👉🏻 जवाब -* बिलाशुबा ईद मीलादुन्नबी सल्लल्लाहु तआला अलैह वसल्लम मनाना जाइज़ है क्योंकि रसूलल्लाह सल्लल्लाहु तआला अलैह वसल्लम रब तआला की रहमत है और अल्लाह तआला का इरशाद है وَلٰکِن رَّسُوْلَ اللہِ وَخَاتَم النَّبیِّیْنَ
📖 *तरजुमा-* फरमा दीजिये लोग अल्लाह के फज़ल और उस की रहमत पर खुशी मनाएँ ।
*🌹👉🏻 सवाल नम्बर 16 -* क्या नबी ए करीम सल्लल्लाहु तआला अलैह वसल्लम हाज़िर व नाज़िर हैं ?
*🍀👉🏻 जवाब -* बेशक रसूले अकरम सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम हाज़िर व नाज़िर है जैसा कि कुरआने मुकद्दस में अल्लाह तआला का इरशाद है
*📖 तरजुमा* बे शक हमने तुम्हें भेजा हाज़िर व नाज़िर और खुशी और डर सुनाता ।
*🌹👉🏻 सवाल नम्बर 17 -* क्या हमारे आका सल्लल्लाहु तआला अलैह वसल्लम के बाद कोई और नबी आ सकता है ?
*🍀👉🏻 जवाब :* हरगिज़ नहीं हमारे आका सल्लल्लाहु तआला अलैह वसल्लम पर नुबूवत का दरवाज़ा बन्द हो गया आप के बाद किसी नये नबी का आना नामुमकिन है । अल्लाह तआला फरमाता है قُلْ بِفَضْلِ اللہِ وَبِرَحْمَتِہٖ فَبِذٰلِکَ فَلْیَفْرحُوْ
*📖 तरजुमा* हां अल्लाह के रसूल हैं और सब नबियों के आखरी हैं । लिहाजा जो शख्स हुजूर सल्लल्लाहु तआला अलैह वसल्लम के ज़माने में या हुजूर के बाद किसी को नुबूवत मिलना माने वो काफिर है ।
*🌹👉🏻 सवाल नम्बर 18 -* क्या अम्बियाए किराम बाद विसाल जिन्दा हैं ?
*🍀👉🏻 जवाब :* अम्बियाए किराम अलैहिमुस्सलाम अपनी अपनी कब्रों में इसी तरह जिन्दा हैं जिस तरह दुनिया में थे वादा ए इलाही की तसदीक के लिए एक लम्हा को उन पर मौत तारी हुई फिर बदस्तूर जिन्दा हो गयें ।
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*💧 वुजू के मसाइल 💧*
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*🌹👉🏻 सवाल नम्बर 1 -* वुजू की तारीफ क्या है ?
*🍀👉🏻 जवाब :* वुजू तीन आजा 1 . चेहरा , 2 . दोनों हाथ , 3 . दोनों पैर धोने और सर के मसह करने का नाम है ।
*🌹👉🏻 सवाल नम्बर 2 -* वुजू नमाज़ के लिए क्या है ?
*🍀👉🏻 जवाब :* शर्त है ।
*🌹👉🏻 सवाल नम्बर 3 -* अगर किसी ने सिर्फ दिल में वुजू की नियत कर ली तो वुजू का सवाब मिलेगा या नहीं ?
*🍀👉🏻 जवाब :* अगर किसी ने सिर्फ दिल में नियत की और ज़बान से अल्फाजे नियत अदा न की तो भी काफी है लिहाजा जरुर सवाब मिलने की उम्मीद है ।
*🌹👉🏻 सवाल नम्बर 4 -* वुजू में कितनी बातें फर्ज़ एअतकादी है ?
*🍀👉🏻 जवाब :* चार है
*☞1 .* मुंह धोना यानी तूल में शुरू सतह पेशानी से ( यानी जहां से बाल उगते हैं ) नीचे ठोडी तक और चौड़ाई में एक कान की लौ से दूसरे कान की लौ तक ।
*☞2 .* दोनों हाथ नाखुनों से कोहनियों तक धोना ,
*☞3 .* सर का मसह यानी उस के चौथाई हिस्से पर नमी का पुहंच जाना ,
*☞4 .* टखनों समेत पांव इस तरह धोना के कोई जगह सूखी न रह जाये ।
*🌹👉🏻 सवाल नम्बर 5 -* क्या आजाए वुजू को एक एक बार धोना जाइज है ?
*🍀👉🏻 जवाब :* पानी की किल्लत या ठण्ड के उन या ज़रूरत की वजह से आजाए वुजू का एक एक बार धो लेना जाइज है।
*🌹👉🏻 सवाल नम्बर 6 -* कब आज़ाए वुजू को एक एक बार धोना मकरुह तहरीमी और ऐसा करने वाला गुनहगार होगा ?
*🍀👉🏻जवाब -* जब किसी ने अपनी आदत बना ली की एक एक बार आज़ाए वुजू धोने पर एकतिफा ( यानी काफी है । ) करें तो मकरूह तहरीमी और गुनहगार होगा और बे उज़ कभी ऐसा करें तो मकरूह तंजीही है ।
*🌹👉🏻 सवाल नम्बर 7 -* बे वुजू को किन कामों के लिए वुजू करना फर्ज है ?
*🍀👉🏻 जवाब :* नमाज़ , सजदए तिलावत , नमाजे जनाज़ा , कुरआन अज़ीम छूने के लिए वुजू करना फर्ज है ।
*🌹👉🏻 सवाल नम्बर 8 -* किन कामों के लिए वुजू वाजिब है ?
*🍀👉🏻 जवाब :* तवाफ - ए - काबा के लिए वुजू वाजिब है ।
*🌹👉🏻 सवाल नम्बर 9 -* किन कामों के लिए वुजू करना सुन्नत है ?
*🍀🌹 जवाब :* गुस्ल जनाबत से पहले जुनुबी को खाने , पीने और अज़ान व इकामत और खुतबा जुमआ ईदैन और रोजा ए रसूल सल्लल्लाहु अलैह वसल्लम वुकूफ अरफा , सफा व मरवा के दरमियान सई के लिए वुजू कर लेना सुन्नत है ।
*🌹👉🏻 सवाल नम्बर 10 -* वुजू के शुरू में बिस्मिल्लाह कहना क्या है ?
*🍀👉🏻 जवाब :* वुजू के शुरू में बिस्मिल्लाह कहना सुन्नत है ।
*📙 (दीन की बुनियादी बातें, सफ्हा 5,6)*
*📮पोस्ट जारी रहेगी इन्शा अल्लाह...✍🏻*
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*📖 दीन की बुनियादी बातें, पोस्ट ➪03 📖*
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*🌟 اَلصَّــلٰوةُوَالسَّلَامُ عَلَيْكَ يَارَسُوْلَ اللّٰهﷺ*
*💧 वुजू के मसाइल 💧*
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*🌹👉🏻 सवाल नम्बर 1 -* वुजू की तारीफ क्या है ?
*🍀👉🏻 जवाब :* वुजू तीन आजा 1 . चेहरा , 2 . दोनों हाथ , 3 . दोनों पैर धोने और सर के मसह करने का नाम है ।
*🌹👉🏻 सवाल नम्बर 2 -* वुजू नमाज़ के लिए क्या है ?
*🍀👉🏻 जवाब :* शर्त है ।
*🌹👉🏻 सवाल नम्बर 3 -* अगर किसी ने सिर्फ दिल में वुजू की नियत कर ली तो वुजू का सवाब मिलेगा या नहीं ?
*🍀👉🏻 जवाब :* अगर किसी ने सिर्फ दिल में नियत की और ज़बान से अल्फाजे नियत अदा न की तो भी काफी है लिहाजा जरुर सवाब मिलने की उम्मीद है ।
*🌹👉🏻 सवाल नम्बर 4 -* वुजू में कितनी बातें फर्ज़ एअतकादी है ?
*🍀👉🏻 जवाब :* चार है
*☞1 .* मुंह धोना यानी तूल में शुरू सतह पेशानी से ( यानी जहां से बाल उगते हैं ) नीचे ठोडी तक और चौड़ाई में एक कान की लौ से दूसरे कान की लौ तक ।
*☞2 .* दोनों हाथ नाखुनों से कोहनियों तक धोना ,
*☞3 .* सर का मसह यानी उस के चौथाई हिस्से पर नमी का पुहंच जाना ,
*☞4 .* टखनों समेत पांव इस तरह धोना के कोई जगह सूखी न रह जाये ।
*🌹👉🏻 सवाल नम्बर 5 -* क्या आजाए वुजू को एक एक बार धोना जाइज है ?
*🍀👉🏻 जवाब :* पानी की किल्लत या ठण्ड के उन या ज़रूरत की वजह से आजाए वुजू का एक एक बार धो लेना जाइज है।
*🌹👉🏻 सवाल नम्बर 6 -* कब आज़ाए वुजू को एक एक बार धोना मकरुह तहरीमी और ऐसा करने वाला गुनहगार होगा ?
*🍀👉🏻जवाब -* जब किसी ने अपनी आदत बना ली की एक एक बार आज़ाए वुजू धोने पर एकतिफा ( यानी काफी है । ) करें तो मकरूह तहरीमी और गुनहगार होगा और बे उज़ कभी ऐसा करें तो मकरूह तंजीही है ।
*🌹👉🏻 सवाल नम्बर 7 -* बे वुजू को किन कामों के लिए वुजू करना फर्ज है ?
*🍀👉🏻 जवाब :* नमाज़ , सजदए तिलावत , नमाजे जनाज़ा , कुरआन अज़ीम छूने के लिए वुजू करना फर्ज है ।
*🌹👉🏻 सवाल नम्बर 8 -* किन कामों के लिए वुजू वाजिब है ?
*🍀👉🏻 जवाब :* तवाफ - ए - काबा के लिए वुजू वाजिब है ।
*🌹👉🏻 सवाल नम्बर 9 -* किन कामों के लिए वुजू करना सुन्नत है ?
*🍀🌹 जवाब :* गुस्ल जनाबत से पहले जुनुबी को खाने , पीने और अज़ान व इकामत और खुतबा जुमआ ईदैन और रोजा ए रसूल सल्लल्लाहु अलैह वसल्लम वुकूफ अरफा , सफा व मरवा के दरमियान सई के लिए वुजू कर लेना सुन्नत है ।
*🌹👉🏻 सवाल नम्बर 10 -* वुजू के शुरू में बिस्मिल्लाह कहना क्या है ?
*🍀👉🏻 जवाब :* वुजू के शुरू में बिस्मिल्लाह कहना सुन्नत है ।
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*💦 गुस्ल के मसाइल 💦*
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*🌹👉🏻 सवाल नम्बर 1 -* गुस्ल करने का तरीका क्या है ?
*🍀👉🏻 जवाब :* गुस्ल करने का तरीका यह है की दिल में नहाने का इरादा कर के पहले दोनों हाथों के गट्टों तक तीन मर्तबा धोये फिर इस्तंजा की जगह धोये चाहे निजासत लगी हो या न लगी हो फिर बदन पर अगर कहीं निजासत लगी हो तो उस को भी धोये । उस के बाद वुजू करे और कुल्ली खूब अच्छी तरह करें और नाक में पानी चढ़ायें फिर हाथ में पानी ले लेकर बदन पर हाथ फिरा - फिरा कर बदन को मलें खासकर सर्दियों में ताकी बदन का कोई हिस्सा पानी बहने से रहना जायें फिर दाहिने कन्धे पर तीन बार पानी बहायें फिर तीन बार बाये कन्धे पर बहाये फिर सर पर और पूरे बदन पर तीन मर्तबा पानी बहायें और अच्छी तरह ध्यान रखे की कहीं जर्रा बराबर खाल या रोंगटा और बाल पानी बहने से ना रह जाये ।
*🌹👉🏻 सवाल नम्बर 2 -* बाज़ लोग ना पाक तहबंद बांध कर इस ख्याल से गुस्ल करते है कि नहाने से नापाक तहबंद और बदन सब पाक हो जायेगा तो क्या इस तरह गुस्ल सही हो जायेगा?
*🍀👉🏻 जवाब :* इस तरह गुस्ल हरगिज़ नहीं होगा क्योंकि पानी डालकर तहबंद और बदन पर हाथ फिराने से तहबंद की निजासत और ज़्यादा फैलती है और सारे बदन बल्कि नहाने के बरतन तक को नापाक कर देती है इस लिए नहाने में लाज़िम है की वो पहले बदन को और उस कपड़े को जिसको पहनकर नहाए धोकर पाक करे वरना गुस्ल तो क्या होगा बल्कि उस हाथ से जिन जिन चीजो को छुएं वो भी नापाक हो जायेंगी और सारा बदन और तहबंद भी नापाक ही रह जायेगा और सारी नमाजें अकारत हो जायेंगी ।
*🌹👉🏻 सवाल नम्बर 3 -* गुस्ल में कितनी बातें फर्ज है ? *🍀👉🏻 जवाब :* गुस्ल में तीन बातें फर्ज हैं
*☞1 )* कुल्ली करना - हर पुर्ज गोशे होंठ से हलक की जड़ तक हर जगह पानी बह जायें ,
*☞2 )* नाक में पानी डालना यानी दोनों नथनों में जहां तक नर्म जगह है उस का धुलना की पानी को सूंघ कर ऊपर चढ़ायें बाल बराबर जगह भी धुलने से न रह जाये ,
*☞3 )* तमाम ज़ाहिर बदन पर पानी बह जाना यानी केसर के बालों से पांवके तलवों तक जिस्म के हर पुर्ज पर हर रोंगटे पर पानी बह जाना ।
*🌹👉🏻सवाल नम्बर 4 -* गुस्ल में कितनी और कौन - कौन सी जगह है जिनकी एहतियात मर्द व औरत हर एक पर लाज़िम हैं ?
*🍀👉🏻 जवाब :* वो बाइस जगह हैं और वो यह हैं
*☞1 )* सर के बाल जो गुथे हुए ना हो बाल पर जड़ से नोक तक पानी बहाना ,
*☞2 )* कान में बाली वगैराह जै का धोना ,
*☞3 )* भवों के नीचे की खाल कान का हर पुरज़ा उसके सुराख का मुंह कानों के पीछे के बाल हटा कर पानी बहाना ,
*☞4 )* मुंछों और दाढ़ी के बाल का जड़ से नोक तक और उनके नीचे की खाल तक धोना ,
*☞5 )* कान का हर पुरज़ा उसके सुराख का मुंह ,
*☞6 )* ठोड़ी और गले का जोड़ ,
*☞7 )* बगलें बाजू का हर पहलू
*☞8 )* पीठ का हर ज़र्रा ,
*☞9 )* पीठ वगैराह की बलटे उठा कर धोना ,
*☞10 )* नाफ को उंगली डाल कर धोना जबकि पानी बहने में शक हो ,
*☞11 )* जिस्म का हर रोंगटा जड़ से नोक तक ,
*☞12 )* रांग और पैरो के जोड़
*☞13 )* रान और पिंडली का जोड़ जबकि बैठ कर नहायें
*☞14 )* दोनों सुरीन मिलने की जगह खासकर खड़े होकर नहाते वक्त
*☞15 )* रानों की गोलाई
*☞16 )* पिंडली की करवटें
*☞17 )* ज़कर और उनसिय्यन ( दोनों खुसिये ) के मिलने की सतहें
*☞18 )* उनसिय्यन की सतहे जेरें
*☞19 )* उनसययेन के नीचे की जगह जड़ तक
*☞20 )* जिसका खतना न हुआ हो तो अगर खाल चड़ सकती है तो चड़ाकर धोना और खाल के अन्दर पानी चड़ाना ।
*📙 (दीन की बुनियादी बातें, सफ्हा 6,7)*
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*🌹👉🏻 सवाल नम्बर 1 -* गुस्ल करने का तरीका क्या है ?
*🍀👉🏻 जवाब :* गुस्ल करने का तरीका यह है की दिल में नहाने का इरादा कर के पहले दोनों हाथों के गट्टों तक तीन मर्तबा धोये फिर इस्तंजा की जगह धोये चाहे निजासत लगी हो या न लगी हो फिर बदन पर अगर कहीं निजासत लगी हो तो उस को भी धोये । उस के बाद वुजू करे और कुल्ली खूब अच्छी तरह करें और नाक में पानी चढ़ायें फिर हाथ में पानी ले लेकर बदन पर हाथ फिरा - फिरा कर बदन को मलें खासकर सर्दियों में ताकी बदन का कोई हिस्सा पानी बहने से रहना जायें फिर दाहिने कन्धे पर तीन बार पानी बहायें फिर तीन बार बाये कन्धे पर बहाये फिर सर पर और पूरे बदन पर तीन मर्तबा पानी बहायें और अच्छी तरह ध्यान रखे की कहीं जर्रा बराबर खाल या रोंगटा और बाल पानी बहने से ना रह जाये ।
*🌹👉🏻 सवाल नम्बर 2 -* बाज़ लोग ना पाक तहबंद बांध कर इस ख्याल से गुस्ल करते है कि नहाने से नापाक तहबंद और बदन सब पाक हो जायेगा तो क्या इस तरह गुस्ल सही हो जायेगा?
*🍀👉🏻 जवाब :* इस तरह गुस्ल हरगिज़ नहीं होगा क्योंकि पानी डालकर तहबंद और बदन पर हाथ फिराने से तहबंद की निजासत और ज़्यादा फैलती है और सारे बदन बल्कि नहाने के बरतन तक को नापाक कर देती है इस लिए नहाने में लाज़िम है की वो पहले बदन को और उस कपड़े को जिसको पहनकर नहाए धोकर पाक करे वरना गुस्ल तो क्या होगा बल्कि उस हाथ से जिन जिन चीजो को छुएं वो भी नापाक हो जायेंगी और सारा बदन और तहबंद भी नापाक ही रह जायेगा और सारी नमाजें अकारत हो जायेंगी ।
*🌹👉🏻 सवाल नम्बर 3 -* गुस्ल में कितनी बातें फर्ज है ? *🍀👉🏻 जवाब :* गुस्ल में तीन बातें फर्ज हैं
*☞1 )* कुल्ली करना - हर पुर्ज गोशे होंठ से हलक की जड़ तक हर जगह पानी बह जायें ,
*☞2 )* नाक में पानी डालना यानी दोनों नथनों में जहां तक नर्म जगह है उस का धुलना की पानी को सूंघ कर ऊपर चढ़ायें बाल बराबर जगह भी धुलने से न रह जाये ,
*☞3 )* तमाम ज़ाहिर बदन पर पानी बह जाना यानी केसर के बालों से पांवके तलवों तक जिस्म के हर पुर्ज पर हर रोंगटे पर पानी बह जाना ।
*🌹👉🏻सवाल नम्बर 4 -* गुस्ल में कितनी और कौन - कौन सी जगह है जिनकी एहतियात मर्द व औरत हर एक पर लाज़िम हैं ?
*🍀👉🏻 जवाब :* वो बाइस जगह हैं और वो यह हैं
*☞1 )* सर के बाल जो गुथे हुए ना हो बाल पर जड़ से नोक तक पानी बहाना ,
*☞2 )* कान में बाली वगैराह जै का धोना ,
*☞3 )* भवों के नीचे की खाल कान का हर पुरज़ा उसके सुराख का मुंह कानों के पीछे के बाल हटा कर पानी बहाना ,
*☞4 )* मुंछों और दाढ़ी के बाल का जड़ से नोक तक और उनके नीचे की खाल तक धोना ,
*☞5 )* कान का हर पुरज़ा उसके सुराख का मुंह ,
*☞6 )* ठोड़ी और गले का जोड़ ,
*☞7 )* बगलें बाजू का हर पहलू
*☞8 )* पीठ का हर ज़र्रा ,
*☞9 )* पीठ वगैराह की बलटे उठा कर धोना ,
*☞10 )* नाफ को उंगली डाल कर धोना जबकि पानी बहने में शक हो ,
*☞11 )* जिस्म का हर रोंगटा जड़ से नोक तक ,
*☞12 )* रांग और पैरो के जोड़
*☞13 )* रान और पिंडली का जोड़ जबकि बैठ कर नहायें
*☞14 )* दोनों सुरीन मिलने की जगह खासकर खड़े होकर नहाते वक्त
*☞15 )* रानों की गोलाई
*☞16 )* पिंडली की करवटें
*☞17 )* ज़कर और उनसिय्यन ( दोनों खुसिये ) के मिलने की सतहें
*☞18 )* उनसिय्यन की सतहे जेरें
*☞19 )* उनसययेन के नीचे की जगह जड़ तक
*☞20 )* जिसका खतना न हुआ हो तो अगर खाल चड़ सकती है तो चड़ाकर धोना और खाल के अन्दर पानी चड़ाना ।
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*📖 दीन की बुनियादी बातें, पोस्ट ➪05 📖*
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*💦 गुस्ल के मसाइल (2) 💦*
*🌹👉🏻 सवाल नम्बर 5 -* वो कौन से आज़ा है जिन की एहतियात गुस्ल में खास मर्दो पर ज़रूरी है ?
*🍀👉🏻 जवाब :*
*☞1 )* पिंडलियों की करवटे
*☞2 )* गुंथे हुए बाल को खोल कर जड़ से नोक तक धोना
*☞3 )* मुंछों के नीचे की खाल अगरचे घने हो
*☞4 )* दाढ़ी का हर बाल जड़ से नोक तक
*☞5 )* ज़कर और खुसिये के मिलने की सतह
*☞6 )* खुसिये की निचली सतह जोड़ तक
*☞7 )* खुसिये के नीचे की जगह तक
*☞8 )* जिस का खतना न हुआ हो और खाल चड़ सकती हो तो सुपारी खोल कर धोना
*☞9 )* अगर बताई गई सूरत में खाल न चड़ सकती हो तो खाल में पानी डालना ।
*🌹👉🏻सवाल नम्बर 6 -* गुस्ल में वो कोन सी जगह है जिनकी खास औरतों को एहतियात लाज़िम है ?
*🍀👉🏻 जवाब :*
*☞1 )* गुथी चोटी में हर बाल की जड़ तर करना
*☞2 )* अगर इस तरह गुथी है की बे खुले जड़े तर न होगी तो चोटी खोल कर जड़ से नोक तक तर करना
*☞3 )* ढलकी हुई पिस्तान उठा कर धोना
*☞4 )* पिस्तान व शिकम के जोड़ की तहरीर
*☞5 )* फर्जे खारिज ( यानि औरत की शर्मगाह का बाहरी हिस्सा ) का हर हिस्सा हर टुकड़ा ऊपर से नीचे तक धाएं व फर्ज दाखिल ( यानि औरत के शर्मगाह का अन्दर का हिस्सा ) के अन्दर उंगली डालकर धोना वाजिब नहीं बेहतर है
*☞6 )* गोश्त पाराए बला का हर परत
*☞7 )* गोश्त पारा जेरे की सतह जेरें
*☞8 )* इस पारा के नीचें की खाली जगह गर्ज ये की फर्ज खारिज के हर गोशे पुरजे का ख्याल लाज़िम है ।
*🌹👉🏻सवाल नम्बर 7 -* औरतों को खड़े होकर या बैठकर किस तरह नहाना चाहिये ?
*🍀👉🏻 जवाब :* औरतों को बैठकर नहाना बेहतर है ।
*🌹👉🏻 सवाल नम्बर 8 -* गुस्ल किन पानियों से जाइज है ?
*🍀👉🏻 जवाब :* जिन पानियों से वजू जाइज है उन से गुस्ल भी जाइज है ।
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*🌹👉🏻 सवाल नम्बर 5 -* वो कौन से आज़ा है जिन की एहतियात गुस्ल में खास मर्दो पर ज़रूरी है ?
*🍀👉🏻 जवाब :*
*☞1 )* पिंडलियों की करवटे
*☞2 )* गुंथे हुए बाल को खोल कर जड़ से नोक तक धोना
*☞3 )* मुंछों के नीचे की खाल अगरचे घने हो
*☞4 )* दाढ़ी का हर बाल जड़ से नोक तक
*☞5 )* ज़कर और खुसिये के मिलने की सतह
*☞6 )* खुसिये की निचली सतह जोड़ तक
*☞7 )* खुसिये के नीचे की जगह तक
*☞8 )* जिस का खतना न हुआ हो और खाल चड़ सकती हो तो सुपारी खोल कर धोना
*☞9 )* अगर बताई गई सूरत में खाल न चड़ सकती हो तो खाल में पानी डालना ।
*🌹👉🏻सवाल नम्बर 6 -* गुस्ल में वो कोन सी जगह है जिनकी खास औरतों को एहतियात लाज़िम है ?
*🍀👉🏻 जवाब :*
*☞1 )* गुथी चोटी में हर बाल की जड़ तर करना
*☞2 )* अगर इस तरह गुथी है की बे खुले जड़े तर न होगी तो चोटी खोल कर जड़ से नोक तक तर करना
*☞3 )* ढलकी हुई पिस्तान उठा कर धोना
*☞4 )* पिस्तान व शिकम के जोड़ की तहरीर
*☞5 )* फर्जे खारिज ( यानि औरत की शर्मगाह का बाहरी हिस्सा ) का हर हिस्सा हर टुकड़ा ऊपर से नीचे तक धाएं व फर्ज दाखिल ( यानि औरत के शर्मगाह का अन्दर का हिस्सा ) के अन्दर उंगली डालकर धोना वाजिब नहीं बेहतर है
*☞6 )* गोश्त पाराए बला का हर परत
*☞7 )* गोश्त पारा जेरे की सतह जेरें
*☞8 )* इस पारा के नीचें की खाली जगह गर्ज ये की फर्ज खारिज के हर गोशे पुरजे का ख्याल लाज़िम है ।
*🌹👉🏻सवाल नम्बर 7 -* औरतों को खड़े होकर या बैठकर किस तरह नहाना चाहिये ?
*🍀👉🏻 जवाब :* औरतों को बैठकर नहाना बेहतर है ।
*🌹👉🏻 सवाल नम्बर 8 -* गुस्ल किन पानियों से जाइज है ?
*🍀👉🏻 जवाब :* जिन पानियों से वजू जाइज है उन से गुस्ल भी जाइज है ।
*📙 (दीन की बुनियादी बातें, सफ्हा 8)*
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*📖 दीन की बुनियादी बातें, पोस्ट ➪06 📖*
*▬▬▭܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀▭▬▬*
*🌟 اَلصَّــلٰوةُوَالسَّلَامُ عَلَيْكَ يَارَسُوْلَ اللّٰهﷺ*
*💦 नमाज़ के मसाइल व फज़ाइल (1) 💦*
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*🌹👉🏻 सवाल नम्बर 1 -* मज़हबे इस्लाम में नमाज़ की क्या एहमियत है ?
*🍀👉🏻 जवाब :* ईमान व सही अकाइद मुताबिक अहले सुन्नत व जमाअत के बाद नमाज़ तमाम फराइज मे अहम व अज़ीम फर्ज हैं ।
*🌹👉🏻 सवाल नम्बर 2 -* नमाज़ किन लोगों पर फर्ज़ है ?
*🍀👉🏻 जवाब :* नमाज़ हर आकिल व बालिग मर्द औरत मुसलमान पर उसके मुकर्ररा वक्त पर फर्ज है ।
*🌹👉🏻 सवाल नम्बर 3 -* दिन रात में कुल कितनी नमाजे फर्ज हैं ?
*🍀👉🏻 जवाब :* दिन और रात में कुल पांच वक्त की नमाजे फर्ज हैं ।
*🌹👉🏻 सवाल नम्बर 4 -* पांच वक्तों की नमाजों के नाम क्या हैं सुबह से रात तक ?
*🍀👉🏻 जवाब :* 1 ) फज्र, 2 ) जोहर, 3 ) असर, 4) मगरिब, 5 ) इशा ।
*🌹👉🏻 सवाल नम्बर 5 -* नमाज में कितनी चीजे फर्ज है और कौन कौनसी ?
*🍀👉🏻 जवाब :* नमाज में सात चीजे फर्ज़ हैं 1 ) तकबीरे तहरीमा, 2 ) कयाम, 3 ) किरअत, 4 ) रूकूअ, 5) सजदा, 6 ) कअदा आखीरा, 7 ) खुरुजे बिसुन इही ( यानी अपने इरादे से नमाज खत्म करना )
*🌹👉🏻 सवाल नम्बर 6 -* कयाम का क्या मतलब है ?
*🍀👉🏻 जवाब :* कयाम का मतलब खड़े होकर नमाज अदा करना ।
*🌹👉🏻 सवाल नम्बर 7 -* क्या हर रकअत में किरअत फर्ज़ है ?
*🍀👉🏻 जवाब :* फर्ज की दो रकअतों में और वित्र व सुन्नत और नफ्ल की हर रकअतों में कुरआन शरीफ पढ़ना फर्ज है ।
*🌹👉🏻 सवाल नम्बर 8 -* कुरआन शरीफ पढ़ने का अदना दर्जा क्या है ?
*🍀👉🏻 जवाब :* इतनी आवाज़ से पढ़े की खूद सुन लें ।
*🌹👉🏻सवाल नम्बर 9 -* रूकूअ किसे कहते हैं और उसका अदना दर्जा क्या है ?
*🍀👉🏻 जवाब :* रूकूअ का अदना दर्जा यह है कि हाथ घुटनों तक पहुँच जायें और पूरा रूकू यह है कि पीठ सीधी बिछा दें ।
*🌹👉🏻 सवाल नम्बर 10 -* सज्दे की हकीकत क्या है ?
*🍀👉🏻 जवाब :* पेशानी जमीन पर जमना सजदा की हकीकत है ।
*🌹👉🏻 सवाल नम्बर 11 -* सज्दे में कितनी हड्डियों का ज़मीन पर लगना फर्ज है ?
*🍀👉🏻 जवाब :* सात हैं 1 ) पेशानी, 2 ) दोनों घुटने, 3 ) दोनों हथेलियाँ और 4 ) दोनों पांव ज़मीन पर लगना फर्ज है ।
*🌹👉🏻 सवाल नम्बर 12* - शराईते नमाज किसे कहते हैं ?
*🍀👉🏻 जवाब :* जिनके बगैर नमाज़ शरू नहीं हो सकती उन्हें शराइते नमाज कहते है ।
*🌹👉🏻 सवाल नम्बर 13 -* शराईते नमाज़ कितने है ?
*🍀👉🏻 जवाब :* शराईते नमाज़ छः हैं 1 ) तहारत, 2 ) सतरे औरत, 3 ) वक्त, 4 ) इस्तकबाले किब्ला, 5 ) नीयत, 6 ) तकबीरे तहरीमा ।
*📙 (दीन की बुनियादी बातें, सफ्हा 10,11)*
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*📖 दीन की बुनियादी बातें, पोस्ट ➪06 📖*
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*💦 नमाज़ के मसाइल व फज़ाइल (1) 💦*
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*🌹👉🏻 सवाल नम्बर 1 -* मज़हबे इस्लाम में नमाज़ की क्या एहमियत है ?
*🍀👉🏻 जवाब :* ईमान व सही अकाइद मुताबिक अहले सुन्नत व जमाअत के बाद नमाज़ तमाम फराइज मे अहम व अज़ीम फर्ज हैं ।
*🌹👉🏻 सवाल नम्बर 2 -* नमाज़ किन लोगों पर फर्ज़ है ?
*🍀👉🏻 जवाब :* नमाज़ हर आकिल व बालिग मर्द औरत मुसलमान पर उसके मुकर्ररा वक्त पर फर्ज है ।
*🌹👉🏻 सवाल नम्बर 3 -* दिन रात में कुल कितनी नमाजे फर्ज हैं ?
*🍀👉🏻 जवाब :* दिन और रात में कुल पांच वक्त की नमाजे फर्ज हैं ।
*🌹👉🏻 सवाल नम्बर 4 -* पांच वक्तों की नमाजों के नाम क्या हैं सुबह से रात तक ?
*🍀👉🏻 जवाब :* 1 ) फज्र, 2 ) जोहर, 3 ) असर, 4) मगरिब, 5 ) इशा ।
*🌹👉🏻 सवाल नम्बर 5 -* नमाज में कितनी चीजे फर्ज है और कौन कौनसी ?
*🍀👉🏻 जवाब :* नमाज में सात चीजे फर्ज़ हैं 1 ) तकबीरे तहरीमा, 2 ) कयाम, 3 ) किरअत, 4 ) रूकूअ, 5) सजदा, 6 ) कअदा आखीरा, 7 ) खुरुजे बिसुन इही ( यानी अपने इरादे से नमाज खत्म करना )
*🌹👉🏻 सवाल नम्बर 6 -* कयाम का क्या मतलब है ?
*🍀👉🏻 जवाब :* कयाम का मतलब खड़े होकर नमाज अदा करना ।
*🌹👉🏻 सवाल नम्बर 7 -* क्या हर रकअत में किरअत फर्ज़ है ?
*🍀👉🏻 जवाब :* फर्ज की दो रकअतों में और वित्र व सुन्नत और नफ्ल की हर रकअतों में कुरआन शरीफ पढ़ना फर्ज है ।
*🌹👉🏻 सवाल नम्बर 8 -* कुरआन शरीफ पढ़ने का अदना दर्जा क्या है ?
*🍀👉🏻 जवाब :* इतनी आवाज़ से पढ़े की खूद सुन लें ।
*🌹👉🏻सवाल नम्बर 9 -* रूकूअ किसे कहते हैं और उसका अदना दर्जा क्या है ?
*🍀👉🏻 जवाब :* रूकूअ का अदना दर्जा यह है कि हाथ घुटनों तक पहुँच जायें और पूरा रूकू यह है कि पीठ सीधी बिछा दें ।
*🌹👉🏻 सवाल नम्बर 10 -* सज्दे की हकीकत क्या है ?
*🍀👉🏻 जवाब :* पेशानी जमीन पर जमना सजदा की हकीकत है ।
*🌹👉🏻 सवाल नम्बर 11 -* सज्दे में कितनी हड्डियों का ज़मीन पर लगना फर्ज है ?
*🍀👉🏻 जवाब :* सात हैं 1 ) पेशानी, 2 ) दोनों घुटने, 3 ) दोनों हथेलियाँ और 4 ) दोनों पांव ज़मीन पर लगना फर्ज है ।
*🌹👉🏻 सवाल नम्बर 12* - शराईते नमाज किसे कहते हैं ?
*🍀👉🏻 जवाब :* जिनके बगैर नमाज़ शरू नहीं हो सकती उन्हें शराइते नमाज कहते है ।
*🌹👉🏻 सवाल नम्बर 13 -* शराईते नमाज़ कितने है ?
*🍀👉🏻 जवाब :* शराईते नमाज़ छः हैं 1 ) तहारत, 2 ) सतरे औरत, 3 ) वक्त, 4 ) इस्तकबाले किब्ला, 5 ) नीयत, 6 ) तकबीरे तहरीमा ।
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*🌹👉🏻 सवाल नम्बर 14 -* तहारत का क्या मतलब है ?
*🍀👉🏻 जवाब :* तहारत का मतलब यह है कि नमाज़ी का बदन , कपड़े और नमाज़ की जगह पर कोई नजासत जैसे - पखाना , पेशाब , खून वगैराह न लगी हो और नमाज़ी बेगुस्ल और बेवुजू भी न हो ।
*🌹👉🏻 सवाल नम्बर 15 -* सतरे औरत से क्या मुराद है ?
*🍀👉🏻 जवाब :* सतरे औरत से मुराद यह है कि मर्द का बदन नाफ से लेकर घुटनों तक ढका हो और औरत का तमाम बदन ढका हो , सिवाये मुंह और हथेलियों के और टखने भीढ के रहें ।
*🌹👉🏻 सवाल नम्बर 16 -* वक्त और इस्तकबाले किब्ला क्या है ?
*🍀👉🏻 जवाब :* वक्त का मतलब यह है कि जिस नमाज़ के लिए जो वक्त मुकर्रर हो वो नमाज़ उसी वक्त में पढ़ी जायें और इस्तकबाल किब्ला यानी काबा शरीफ की तरफ मुंह करना ।
*🌹👉🏻 सवाल नम्बर 17 -* निय्यत किसे कहते हैं ?
*🍀👉🏻 जवाब :* निय्यत यह है कि जिस वक्त की जो नमाज़ फर्ज या वाजिब या | सुन्नत या नफ्ल या कज़ा पढ़ना हो दिल में उस का पक्का इरादा करना की यह नमाज़ पढ़ रहा हूं ।
*🌹👉🏻 सवाल नम्बर 18 -* नमाज़ मे अत्तहिय्यात पढ़ना क्या है और अत्तहिय्यात न पढ़ने पर नमाज होगी या नहीं ?
*🍀👉🏻 जवाब :* नमाज़ में अत्तहिय्यात पढ़ना वाजिब है और न पढ़ने पर नमाज़ ना होगी ।
*🌹👉🏻 सवाल नम्बर 19 -* सजदए सहव किसे कहते हैं ?
*🍀👉🏻 जवाब :* सहव के मायने है भूलने के कभी नमाज़ में भूल से कोई खास खराबी पैदा हो जाती है उस खराबी को दूर करने के लिए कअदा - ए - आखीरा मैं दो सजदे किये जाते हैं उन को सजदए सहव कहते हैं ।
*🌹👉🏻 सवाल नम्बर 20 -* अदा और कजा किसे कहते हैं ?
*🍀👉🏻 जवाब :* किसी इबादत को उसके वक्त मुकर्ररा पर पढ़ने को अदा कहते हैं और वक्त गुज़र जाने के बाद अमल करने को कज़ा कहते हैं ।
*🌹👉🏻 सवाल नम्बर 21 -* किन नमाज़ो की कज़ा ज़रूरी है ?
*🍀👉🏻 जवाब :* फर्ज नमाज़ो की कज़ा ज़रूरी है वित्र की कज़ा वाजिब है और फज्र की सुन्नत उस के फर्ज़ के साथ कज़ा हो और ज़वाल से पहले पढ़े तो फर्ज़ के साथ सुन्नत भी पढ़े और ज़वाल के बाद पढ़े तो सुन्नत की कज़ा नही ।
*🌹👉🏻 सवाल नम्बर 22 -* नमाज मुसलमानों पर कब फर्ज होती है और न पढ़ने वालों पर क्या हुक्म है ?
*🍀👉🏻 जवाब :* हर मुसलमान मुकल्लफ यानी आकिल हो बालिग हो उस पर नमाज़ फर्ज ऐन है नमाज़ की फर्जीयत का इंकार करने वाला काफिर है और जो जान बूझकर नमाज़ छोडे अगरचे एक ही वक्त की क्यो ना छोड़े वो फासिक है बहुत से उलेमा के नज़दीक बे नमाज़ी को कत्ल कर देने का हुक्म है ।
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*🌹👉🏻 सवाल नम्बर 14 -* तहारत का क्या मतलब है ?
*🍀👉🏻 जवाब :* तहारत का मतलब यह है कि नमाज़ी का बदन , कपड़े और नमाज़ की जगह पर कोई नजासत जैसे - पखाना , पेशाब , खून वगैराह न लगी हो और नमाज़ी बेगुस्ल और बेवुजू भी न हो ।
*🌹👉🏻 सवाल नम्बर 15 -* सतरे औरत से क्या मुराद है ?
*🍀👉🏻 जवाब :* सतरे औरत से मुराद यह है कि मर्द का बदन नाफ से लेकर घुटनों तक ढका हो और औरत का तमाम बदन ढका हो , सिवाये मुंह और हथेलियों के और टखने भीढ के रहें ।
*🌹👉🏻 सवाल नम्बर 16 -* वक्त और इस्तकबाले किब्ला क्या है ?
*🍀👉🏻 जवाब :* वक्त का मतलब यह है कि जिस नमाज़ के लिए जो वक्त मुकर्रर हो वो नमाज़ उसी वक्त में पढ़ी जायें और इस्तकबाल किब्ला यानी काबा शरीफ की तरफ मुंह करना ।
*🌹👉🏻 सवाल नम्बर 17 -* निय्यत किसे कहते हैं ?
*🍀👉🏻 जवाब :* निय्यत यह है कि जिस वक्त की जो नमाज़ फर्ज या वाजिब या | सुन्नत या नफ्ल या कज़ा पढ़ना हो दिल में उस का पक्का इरादा करना की यह नमाज़ पढ़ रहा हूं ।
*🌹👉🏻 सवाल नम्बर 18 -* नमाज़ मे अत्तहिय्यात पढ़ना क्या है और अत्तहिय्यात न पढ़ने पर नमाज होगी या नहीं ?
*🍀👉🏻 जवाब :* नमाज़ में अत्तहिय्यात पढ़ना वाजिब है और न पढ़ने पर नमाज़ ना होगी ।
*🌹👉🏻 सवाल नम्बर 19 -* सजदए सहव किसे कहते हैं ?
*🍀👉🏻 जवाब :* सहव के मायने है भूलने के कभी नमाज़ में भूल से कोई खास खराबी पैदा हो जाती है उस खराबी को दूर करने के लिए कअदा - ए - आखीरा मैं दो सजदे किये जाते हैं उन को सजदए सहव कहते हैं ।
*🌹👉🏻 सवाल नम्बर 20 -* अदा और कजा किसे कहते हैं ?
*🍀👉🏻 जवाब :* किसी इबादत को उसके वक्त मुकर्ररा पर पढ़ने को अदा कहते हैं और वक्त गुज़र जाने के बाद अमल करने को कज़ा कहते हैं ।
*🌹👉🏻 सवाल नम्बर 21 -* किन नमाज़ो की कज़ा ज़रूरी है ?
*🍀👉🏻 जवाब :* फर्ज नमाज़ो की कज़ा ज़रूरी है वित्र की कज़ा वाजिब है और फज्र की सुन्नत उस के फर्ज़ के साथ कज़ा हो और ज़वाल से पहले पढ़े तो फर्ज़ के साथ सुन्नत भी पढ़े और ज़वाल के बाद पढ़े तो सुन्नत की कज़ा नही ।
*🌹👉🏻 सवाल नम्बर 22 -* नमाज मुसलमानों पर कब फर्ज होती है और न पढ़ने वालों पर क्या हुक्म है ?
*🍀👉🏻 जवाब :* हर मुसलमान मुकल्लफ यानी आकिल हो बालिग हो उस पर नमाज़ फर्ज ऐन है नमाज़ की फर्जीयत का इंकार करने वाला काफिर है और जो जान बूझकर नमाज़ छोडे अगरचे एक ही वक्त की क्यो ना छोड़े वो फासिक है बहुत से उलेमा के नज़दीक बे नमाज़ी को कत्ल कर देने का हुक्म है ।
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*🌟 रोजे के मसाइल 🌟*
*🌹👉🏻 सवाल नम्बर 1 -* रोज़ा किसे कहते हैं ?
*🍀👉🏻 जवाब :* मुसलमान का इबादत की नियत से सुबह सादिक के वक्त से लेकर गुरूब आफताब तक कस्दन खाने पीने और जिमाअ ( हमबिस्तरी ) से रूक जाने को रोज़ा कहा जाता है।
*🌹👉🏻 सवाल नम्बर 2 -* रोज़ा किस पर फर्ज है ?
*🍀👉🏻 जवाब :* जिस शख्स में भी पांच बाते पायी जाये उस पर रमजान के रोजे फर्ज हैं ।
*☞1 )* मुसलमान हो
*☞2 )* मुकल्लफ हो यानी आकिल और बालिग हो
*☞3 )* रोज़ा रखने पर कादिर हो
*☞4 )* मुकीम हो
*☞5 )* उसमें कोई माने न पाया जायें । यानि उसमें ऐसी कोई चीज़ न पाई जाये जिसकी वजह से वो रोज़ा न रख सके जैसे औरत का हेज़ व निफास वाली हालत ।
*🌹👉🏻 सवाल नम्बर 3 -* रोजे की नियत कब और किस तरह करनी चाहिए ?
*🍀👉🏻 जवाब :* नियत दिल के इरादे का नाम है अगर दिल में इरादा है तो नियत मान ली जायेगी अलबत्ता जुबान से कह लेना मुस्तहब है रात में नियत इस तरह करें
*نَوَيۡتُ اَنۡ اَصُوۡمَ غَدًا للّٰهِ تَعَا لٰي مِنۡ فَرْضِ رَمَضَانَ هٰزَا*
☞ और दिन में नियत करें तो इस तरह करें
*نَوَیْتُ اَنْ اَصُوْمَ مَعَ الْیَوْمِ لِلّٰہ ِ تَعَالٰی*
*🌹👉🏻 सवाल नम्बर 4 -* क्या फज्र की अज़ान तक सहरी कर सकते है ?
*🍀👉🏻 जवाब :* नहीं अज़ाने फज्र की नमाज का ऐलान है और सहरी का वक्त उस से पहले खत्म हो चुका होता है ।
*🌹👉🏻 सवाल नम्बर 5 -* रोज़ा किन चीजों से टूट जाता है ?
*🍀👉🏻 जवाब :* जान बूझकर खाने पीने से जिमाअ करने से , हुक्का सिगरेट और बीड़ी वगैरह पीने से , तम्बाकू या पान वगैराह खाने से कस्दन मुंह भर कर उल्टी करने से रोज़ा टूट जाता है ।
*🌹👉🏻 सवाल नम्बर 6 -* वो कौन सा रोजेदार है कि खाने पीने के बावजूद उस का रोज़ा नहीं टूटता ?
*🍀👉🏻 जवाब :* भूल कर खाने पीने वाले का रोज़ा नहीं टूटता ।
*🌹👉🏻 सवाल नम्बर 7 -* क्या रोजे की हालत में सुर्मा लगाने सर में तेल रखने नाखून तर्शवाने और इंजेक्शन वगैराह लगवाने से रोजा टूट जाता है ?
*🍀👉🏻 जवाब :* नहीं इन चीजो से रोज़ा नहीं टूटता ।
*🌹👉🏻 सवाल नम्बर 8 -* क्या आंख नाक में दवा डालने से या कान में तेल डालने से रोज़ा टूट जाता है ?
*🍀👉🏻 जवाब :* आंखों में दवा वगैराह डालने से रोज़ा नहीं टूटता है अलबत्ता दवा का असर अगर हलक में महसूस हो तो उसे फौरन थूक दे लेकिन कान में तेल या बहने वाली दवा वगैराह डालने से रोज़ा टूट जाता है ।
*🌹👉🏻 सवाल नम्बर 9 -* रोज़ा तोड़ने का कफ्फारा क्या है ?
*🍀👉🏻 जवाब :* रोज़ा तोड़ने का कफ्फारा यह है कि एक गुलाम आज़ाद करें अगर यह ना हो सके तो लगातार बगैर छोड़े साठ ( 60 ) रोजे रखें एक भी रोज़ा छूटा तो फिर से 60 रोजें रखना होगा यह भी न हो सके तो साठ मिस्कीनों को दोनों वक़्त पेट भर खाना खिलायें या एक मिस्कीन को साठ दिन तक दोनों वक्त का खाना खिलायें ।
*🌹👉🏻 सवाल नम्बर 10 -* क्या एहतलाम ( नाइट फॉल ) से रोज़ा टूट जाता है ?
*🍀👉🏻 जवाब :* नहीं नाइट फॉल से रोज़ा नहीं टूटता ।
*🌹👉🏻 सवाल नम्बर 11 -* क्या झूट , चुगली, बेहूदगी और गाली - गलौच से रोजा टूट जाता है ?
*🍀👉🏻 जवाब :* इन चीजों से रोजा नहीं टूटता अलबत्ता यह चीजे हराम है और रोजे की हालत में और सख्त हराम होती है और इन की वजह से रोज़ा मकरूह हो जाता है ।
*🌹👉🏻 सवाल नम्बर 12 -* वक़्त इफ्तार क्या अमल करना चाहिए और क्या पढ़ कर रोज़ा इफ्तार करना चाहिए ?
*🍀👉🏻 जवाब :* इफ्तार का वक्त दुआ की कुबूलियत का वक्त है रसूलल्लाह सल्लल्लाहु अलेह वसल्लम ने फरमाया तीन लोगों की दुआ रद्द नहीं होती माँ बाप की दुआ , मज़लूम की दुआ और इफ्तार के वक्त रोजेदार की दुआ बिस्मिल्लाह पढ़ कर कुछ खायें फिर यह दुआ पढ़े ।
*🌼اللَّهُمَّ اِنِّى لَكَ صُمْتُ وَبِكَ امنْتوَعَلَيْكَ تَوَكَّلْتُ وَعَلَى رِزْقِكَ اَفْطَرْت*
*↘️ हिदायत*
↪️ हर मुसलमान पर ज़रूरी है कि वो माहे रमज़ान का एहतराम करें नाच , गाने टी . वी . , वीडियो गेम और फहश कलाम से बचे । अपने बच्चों को रोज़ा रखने की आदत डलवायें ।
*📙 (दीन की बुनियादी बातें, सफ्हा 13,14,15)*
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*▬▬▭܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀▭▬▬*
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*🌟 रोजे के मसाइल 🌟*
*🌹👉🏻 सवाल नम्बर 1 -* रोज़ा किसे कहते हैं ?
*🍀👉🏻 जवाब :* मुसलमान का इबादत की नियत से सुबह सादिक के वक्त से लेकर गुरूब आफताब तक कस्दन खाने पीने और जिमाअ ( हमबिस्तरी ) से रूक जाने को रोज़ा कहा जाता है।
*🌹👉🏻 सवाल नम्बर 2 -* रोज़ा किस पर फर्ज है ?
*🍀👉🏻 जवाब :* जिस शख्स में भी पांच बाते पायी जाये उस पर रमजान के रोजे फर्ज हैं ।
*☞1 )* मुसलमान हो
*☞2 )* मुकल्लफ हो यानी आकिल और बालिग हो
*☞3 )* रोज़ा रखने पर कादिर हो
*☞4 )* मुकीम हो
*☞5 )* उसमें कोई माने न पाया जायें । यानि उसमें ऐसी कोई चीज़ न पाई जाये जिसकी वजह से वो रोज़ा न रख सके जैसे औरत का हेज़ व निफास वाली हालत ।
*🌹👉🏻 सवाल नम्बर 3 -* रोजे की नियत कब और किस तरह करनी चाहिए ?
*🍀👉🏻 जवाब :* नियत दिल के इरादे का नाम है अगर दिल में इरादा है तो नियत मान ली जायेगी अलबत्ता जुबान से कह लेना मुस्तहब है रात में नियत इस तरह करें
*نَوَيۡتُ اَنۡ اَصُوۡمَ غَدًا للّٰهِ تَعَا لٰي مِنۡ فَرْضِ رَمَضَانَ هٰزَا*
☞ और दिन में नियत करें तो इस तरह करें
*نَوَیْتُ اَنْ اَصُوْمَ مَعَ الْیَوْمِ لِلّٰہ ِ تَعَالٰی*
*🌹👉🏻 सवाल नम्बर 4 -* क्या फज्र की अज़ान तक सहरी कर सकते है ?
*🍀👉🏻 जवाब :* नहीं अज़ाने फज्र की नमाज का ऐलान है और सहरी का वक्त उस से पहले खत्म हो चुका होता है ।
*🌹👉🏻 सवाल नम्बर 5 -* रोज़ा किन चीजों से टूट जाता है ?
*🍀👉🏻 जवाब :* जान बूझकर खाने पीने से जिमाअ करने से , हुक्का सिगरेट और बीड़ी वगैरह पीने से , तम्बाकू या पान वगैराह खाने से कस्दन मुंह भर कर उल्टी करने से रोज़ा टूट जाता है ।
*🌹👉🏻 सवाल नम्बर 6 -* वो कौन सा रोजेदार है कि खाने पीने के बावजूद उस का रोज़ा नहीं टूटता ?
*🍀👉🏻 जवाब :* भूल कर खाने पीने वाले का रोज़ा नहीं टूटता ।
*🌹👉🏻 सवाल नम्बर 7 -* क्या रोजे की हालत में सुर्मा लगाने सर में तेल रखने नाखून तर्शवाने और इंजेक्शन वगैराह लगवाने से रोजा टूट जाता है ?
*🍀👉🏻 जवाब :* नहीं इन चीजो से रोज़ा नहीं टूटता ।
*🌹👉🏻 सवाल नम्बर 8 -* क्या आंख नाक में दवा डालने से या कान में तेल डालने से रोज़ा टूट जाता है ?
*🍀👉🏻 जवाब :* आंखों में दवा वगैराह डालने से रोज़ा नहीं टूटता है अलबत्ता दवा का असर अगर हलक में महसूस हो तो उसे फौरन थूक दे लेकिन कान में तेल या बहने वाली दवा वगैराह डालने से रोज़ा टूट जाता है ।
*🌹👉🏻 सवाल नम्बर 9 -* रोज़ा तोड़ने का कफ्फारा क्या है ?
*🍀👉🏻 जवाब :* रोज़ा तोड़ने का कफ्फारा यह है कि एक गुलाम आज़ाद करें अगर यह ना हो सके तो लगातार बगैर छोड़े साठ ( 60 ) रोजे रखें एक भी रोज़ा छूटा तो फिर से 60 रोजें रखना होगा यह भी न हो सके तो साठ मिस्कीनों को दोनों वक़्त पेट भर खाना खिलायें या एक मिस्कीन को साठ दिन तक दोनों वक्त का खाना खिलायें ।
*🌹👉🏻 सवाल नम्बर 10 -* क्या एहतलाम ( नाइट फॉल ) से रोज़ा टूट जाता है ?
*🍀👉🏻 जवाब :* नहीं नाइट फॉल से रोज़ा नहीं टूटता ।
*🌹👉🏻 सवाल नम्बर 11 -* क्या झूट , चुगली, बेहूदगी और गाली - गलौच से रोजा टूट जाता है ?
*🍀👉🏻 जवाब :* इन चीजों से रोजा नहीं टूटता अलबत्ता यह चीजे हराम है और रोजे की हालत में और सख्त हराम होती है और इन की वजह से रोज़ा मकरूह हो जाता है ।
*🌹👉🏻 सवाल नम्बर 12 -* वक़्त इफ्तार क्या अमल करना चाहिए और क्या पढ़ कर रोज़ा इफ्तार करना चाहिए ?
*🍀👉🏻 जवाब :* इफ्तार का वक्त दुआ की कुबूलियत का वक्त है रसूलल्लाह सल्लल्लाहु अलेह वसल्लम ने फरमाया तीन लोगों की दुआ रद्द नहीं होती माँ बाप की दुआ , मज़लूम की दुआ और इफ्तार के वक्त रोजेदार की दुआ बिस्मिल्लाह पढ़ कर कुछ खायें फिर यह दुआ पढ़े ।
*🌼اللَّهُمَّ اِنِّى لَكَ صُمْتُ وَبِكَ امنْتوَعَلَيْكَ تَوَكَّلْتُ وَعَلَى رِزْقِكَ اَفْطَرْت*
*↘️ हिदायत*
↪️ हर मुसलमान पर ज़रूरी है कि वो माहे रमज़ान का एहतराम करें नाच , गाने टी . वी . , वीडियो गेम और फहश कलाम से बचे । अपने बच्चों को रोज़ा रखने की आदत डलवायें ।
*📙 (दीन की बुनियादी बातें, सफ्हा 13,14,15)*
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_*☝हमारी दावत एक सच्चे दीन की तरफ*_
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*📖 दीन की बुनियादी बातें, पोस्ट ➪ 09 📖*
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*🌟 اَلصَّــلٰوةُوَالسَّلَامُ عَلَيْكَ يَارَسُوْلَ اللّٰهﷺ*
*🔵 सीरत तैबा (1) 🔵*
*🌹👉🏻 सवाल नम्बर 1 -* रसूलल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की विलादते बा सआदत ( पैदाइश ) कब हुई और कहां हुई ?
*🍀👉🏻 जवाब :* 12 रबीउल अव्वल शरीफ मुताबिक 20 अप्रैल 571 हिजरी पीर के दिन सुबह सादिक के वक्त मक्का शरीफ में हुई ।
*🌹👉🏻 सवाब नम्बर 2 -* हुजूर अकदस सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम के वालदैन ( माँ - बाप ) का नाम क्या है ?
*🍀👉🏻 जवाब :* हमारे हुजूर सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम के वालिद का नाम हज़रत अब्दुल्लाह रदियल्लाहु अन्हु और वालिदा माजिदा का नाम हज़रते आमना रदियल्लाहु अन्हा है ।
*🌹👉🏻 सवाल नम्बर 3 -* रसूलल्लाह सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम के दादा और दादी का नाम क्या है ?
*🍀👉🏻 जवाब :* हमारे हुजुर के दादा का नाम अब्दुल मुत्तलिब और दादी का नाम फातिमा बिन्ते उमर है ।
*🌹👉🏻 सवाल नम्बर 4 -* हुजूर नबी - ए - करीम सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम के नाना और नानी का क्या नाम है ?
*🍀👉🏻 जवाब :* रसूले पाक सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम के नाना का नाम वहब और नानी का नाम बर्राह है ।
*🌹👉🏻 सवाल नम्बर 5 -* हुजूर पुरनूर सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम के सीना ए अकदस को फरिश्तों ने चाक करके दिल मुबारक को आबे जमजम से गुस्ल दिया था उसे क्या कहते हैं ?
*🍀👉🏻 जवाब :* उसे शक्के सद्र कहते हैं ।
*🌹👉🏻 सवाल नम्बर 6 -* सरकारे दो आलम सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम का शक्के सद्र कितनी बार हुआ और किन मौके पर हुआ ?
*🍀👉🏻 जवाब :* शक्के सद्र चार बार हुआ
*☞1 )* पहली बार हुजूर सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम हज़रत हलीमा सादिया के यहाँ थे ,
*☞2 )* दूसरी बार दस बरस की उम्र में हुआ ,
*☞3 )* तीसरी बार गारे हिरा में हुआ ,
*☞4 )* चौथी बार शबे मेअराज में हुआ ।
*🌹👉🏻 सवाल नम्बर 7 -* हुजूर सरकारे दो आलम सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम कब नबी हुए ?
*🍀👉🏻 जवाब :* हमारे हुजूर हज़रत आदम अलैहस्सलाम से पहले ही नबी हो चुके थे जब दुनिया में तशरीफ लायें और आपकी उम्र शरीफ चालीस बरस की हुई तब आपने अपनी नुबूवत का एलान फरमाया ।
*🌹👉🏻 सवाल नम्बर 8 -* रसूलल्लाह सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम का पहला निकाह किस खातून के साथ हुआ ?
*🍀👉🏻 जवाब :* हज़रत खदीजतुल कुबरा रदीयल्लाहु अन्हा के साथ ।
*🌹👉🏻 सवाल नम्बर 9 -* पहले निकाह के वक्त हुजूर की उम्र शरीफ और हज़रत खदीजा रदीयल्लाहु अन्हुमा की उम्र कितनी थी ?
*🍀👉🏻 जवाब :* हमारे हुजूर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की उम्र शरीफ पच्चीस ( 25 ) बरस थी और हज़रत खदीजतुल कुबरा रदीयल्लाहु अन्हा की उम्र चालीस ( 40 ) बरस ।
*🌹👉🏻 सवाल नम्बर 10 -* हुजूर अकदस सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम जब मक्के शरीफ से हिजरत करके मदीना मुनव्वरा पहुंचे तो एहले मदीना कौन सी नअत पढ़ते हुए हुजूर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम का इस्तकबाल कर रहे थे ?
*🍀👉🏻जवाब :* तलअल बदरुअलयना मिनथनियातलवदा , वजबशुक्रुअलयना मदलिल्लाहीदाअ
*📙 (दीन की बुनियादी बातें, सफ्हा 15,16)*
*📮पोस्ट जारी रहेगी इन्शा अल्लाह...✍🏻*
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*🌹👉🏻 सवाब नम्बर 2 -* हुजूर अकदस सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम के वालदैन ( माँ - बाप ) का नाम क्या है ?
*🍀👉🏻 जवाब :* हमारे हुजूर सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम के वालिद का नाम हज़रत अब्दुल्लाह रदियल्लाहु अन्हु और वालिदा माजिदा का नाम हज़रते आमना रदियल्लाहु अन्हा है ।
*🌹👉🏻 सवाल नम्बर 3 -* रसूलल्लाह सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम के दादा और दादी का नाम क्या है ?
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*🌹👉🏻 सवाल नम्बर 4 -* हुजूर नबी - ए - करीम सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम के नाना और नानी का क्या नाम है ?
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*🌹👉🏻 सवाल नम्बर 5 -* हुजूर पुरनूर सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम के सीना ए अकदस को फरिश्तों ने चाक करके दिल मुबारक को आबे जमजम से गुस्ल दिया था उसे क्या कहते हैं ?
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*🌹👉🏻 सवाल नम्बर 6 -* सरकारे दो आलम सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम का शक्के सद्र कितनी बार हुआ और किन मौके पर हुआ ?
*🍀👉🏻 जवाब :* शक्के सद्र चार बार हुआ
*☞1 )* पहली बार हुजूर सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम हज़रत हलीमा सादिया के यहाँ थे ,
*☞2 )* दूसरी बार दस बरस की उम्र में हुआ ,
*☞3 )* तीसरी बार गारे हिरा में हुआ ,
*☞4 )* चौथी बार शबे मेअराज में हुआ ।
*🌹👉🏻 सवाल नम्बर 7 -* हुजूर सरकारे दो आलम सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम कब नबी हुए ?
*🍀👉🏻 जवाब :* हमारे हुजूर हज़रत आदम अलैहस्सलाम से पहले ही नबी हो चुके थे जब दुनिया में तशरीफ लायें और आपकी उम्र शरीफ चालीस बरस की हुई तब आपने अपनी नुबूवत का एलान फरमाया ।
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*🍀👉🏻जवाब :* तलअल बदरुअलयना मिनथनियातलवदा , वजबशुक्रुअलयना मदलिल्लाहीदाअ
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*🌹👉🏻 सवाल नम्बर 11 -* अज़ान की शुरूआत कब हुई और कहां हुई ?
*🍀👉🏻 जवाब :* 1 सन हिजरी में मदीना मुनव्वरा में हुई ।
*🌹👉🏻 सवाल नम्बर 12 -* फतेह मक्का कब और किस सन से हुई ?
*🍀👉🏻 जवाब :* 8 हिजरी में फतहे मक्का हुई दस हज़ार का लश्कर इस्लाम हुजूर के साथ मक्का शरीफ में दाखिल हुआ खाना ए काबा से सारे बुत निकाल कर फेंक दिये गये अल्लाह तआला का घर अल्लाह के हबीब के वसीले से साफ सुथरा हुआ ।
*🌹👉🏻 सवाल नम्बर 13 -* पंज वक्ता नमाज़ कब फर्ज़ हुई ? माहे रमजान के रोजे कब फर्ज़ हुऐ ? हज कब फर्ज हुआ ?
*🍀👉🏻 जवाब :* नमाज़ ऐलाने नुबूवत के बारह साल फर्ज हुई जब हमारे हुजूर मेअराज से नवाजे गये । माहे रमज़ान के रोजे 6 हिजरी में फर्ज हुए और हज 9 हिजरी में फर्ज हुआ ।
*🌹👉🏻 सवाल नम्बर 14 -* हुजूर सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम को मेअराज हकीकत में हुई थी या ख्वाब में हुई थी ?
*🍀👉🏻 जवाब :* हमारे हुजूर को मेअराज जिस्मानी हुई थी ख्वाब की बात नहीं थी ।
*🌹👉🏻 सवाल नम्बर 15 -* रसूलल्लाह सल्ललाहो तआला अलैह वसल्लम की मेराज कौन से महीने में किस तारीख में हुई थी ?
*🍀👉🏻 जवाब :* रजब के महीने में सताइस्वीं ( 27 ) शब को हुई थी ।
*🌹👉🏻 सवाल नम्बर 16 -* सरकारे दो आलम सल्लल्लाहु तआला अलैह वसल्लम ने आखरी हज कब अदा फरमाया ?
*🍀👉🏻 जवाब :* हमारे हुजूर ने आखरी हज 10 सन हिजरी में अदा फरमाया ।
*🌹👉🏻सवाल नम्बर 17 -* हुजूर नबी - ए - करीम सल्ललाहु तआला अलैह वसल्लम की वफात अकदस कब और कहां हुई ?
*🍀👉🏻 जवाब :* 12 रबीउल अव्वल सन 11 हिजरी पीर के दिन तीसरे पहर हजूर की वफात अकदस मदीने मुनव्वरा में हुई ।
*🌹👉🏻 सवाल नम्बर 18 -* हुजूर अनवर सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम के जिस्म अकदस को किसने गुस्ल दिया और कफनाया ?
*🍀👉🏻 जवाब :* हज़रत अली , हज़रत अब्बास रिदवानुल्लाही तआला अलैहीम अजमईन वगैराह एहले बैत ने गुस्ल दिया और कफन पहनाया ।
*🌹👉🏻 सवाल नम्बर 19 -* हुजूर सरवरे आलम सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम की नमाज़े जनाज़ा किस शान से पढ़ी गयी ?
*🍀👉🏻 जवाब :* पहले फरिशतों ने पढ़ा फिर मर्दो ने पढ़ा फिर औरतों ने पढ़ा फिर बच्चों ने पढ़ा जनाज़ा मुबारक हुजरे अनवर के अन्दर ही था बारी बारी थोड़े थोड़े लोग अन्दर जाते थे नमाज़ पढ़कर चले आते थे लेकिन कोई इमाम न था ।
*🌹👉🏻 सवाल नम्बर 20 -* हुजूरे अकरम सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम के जिस्म अतहर को कब्र अनवर में किन सहाबी ने उतारा ?
*🍀👉🏻 जवाब :* हज़रत अली , हज़रत अब्बास , हज़रत फज़ल व हज़रत कुसुम रदिअल्लाहु तआला अन्हुम ने उतारा ।
*🌹👉🏻 सवाल नम्बर 21 -* हुजूर सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम की कितनी औलाद है और उनके नाम क्या हैं ?
*🍀👉🏻 जवाब :* हुजूर सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम के कुल सात औलाद हैं चार साहबज़ादियां हज़रत ज़ैनब , हज़रत रूकय्या , हज़रत उम्मे कुलसूम और हज़रत फातिमा रदियल्लाहु तआला अन्हुमा और तीन साहबजादे हज़रत कासिम , हज़रत अब्दुल्लाह और हज़रत इब्राहीम रदिअल्लाहु तआला अन्हुमा अजमईन ।
*🌹👉🏻 सवाल नम्बर 22 -* नबीए अकरम सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम ने कितने साल की उम्र में ऐलान - ए - नुबूवत फरमाया ?
*🍀👉🏻जवाब :* हुजूर सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम ने चालीस साल की उम्र में ऐलाने नुबूवत फरमाया ।
*🌹👉🏻 सवाल नम्बर 23 -* गज़वा किसको कहते है ?
*🍀👉🏻 जवाब :* गज़वा उस जंग को कहते है जिस में हुजूर सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम ने बनफ्से नफीस शिरकत फरमायी ।
*🌹👉🏻 सवाल नम्बर 24 -* हुजूर सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम ने जिन्दगी में कितने गजवात फरमाये ? कुछ मशहूर गज़वात का नाम बतायें ?
*🍀👉🏻 जवाब :* हुजूर सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम ने अपनी जिन्दगी में कुल 23 गज़वात में शिरकत फरमायी जिन में से मशहूर गजवए बदर , गजवए उहुद , गजवए खन्दक , गजवए हुनैन व गजवए खैबर वगैराह हैं ।
*🌹👉🏻 सवाल नम्बर 25 -* हिजरत करते वक़्त आप किस गार में ठहरे हुए थे वो गार कहा वाकेअ है ?
*🍀👉🏻 जवाब :* हिजरत करते वक्त हुजूर सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम ने गारे सोर में तीन दिन तक कयाम फरमाया यह गार मक्का मुकर्रमा से तकरीबन 5 किलोमीटर के फासले पर वाकेअ है ।
*🌹👉🏻 सवाल नम्बर 26 -* पहले वही कहा नाज़िल हुई थी ?
*🍀👉🏻 जवाब :* पहली वही गार - ए - हिरा में नाज़िल हुई थी।
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*🌹👉🏻 सवाल नम्बर 11 -* अज़ान की शुरूआत कब हुई और कहां हुई ?
*🍀👉🏻 जवाब :* 1 सन हिजरी में मदीना मुनव्वरा में हुई ।
*🌹👉🏻 सवाल नम्बर 12 -* फतेह मक्का कब और किस सन से हुई ?
*🍀👉🏻 जवाब :* 8 हिजरी में फतहे मक्का हुई दस हज़ार का लश्कर इस्लाम हुजूर के साथ मक्का शरीफ में दाखिल हुआ खाना ए काबा से सारे बुत निकाल कर फेंक दिये गये अल्लाह तआला का घर अल्लाह के हबीब के वसीले से साफ सुथरा हुआ ।
*🌹👉🏻 सवाल नम्बर 13 -* पंज वक्ता नमाज़ कब फर्ज़ हुई ? माहे रमजान के रोजे कब फर्ज़ हुऐ ? हज कब फर्ज हुआ ?
*🍀👉🏻 जवाब :* नमाज़ ऐलाने नुबूवत के बारह साल फर्ज हुई जब हमारे हुजूर मेअराज से नवाजे गये । माहे रमज़ान के रोजे 6 हिजरी में फर्ज हुए और हज 9 हिजरी में फर्ज हुआ ।
*🌹👉🏻 सवाल नम्बर 14 -* हुजूर सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम को मेअराज हकीकत में हुई थी या ख्वाब में हुई थी ?
*🍀👉🏻 जवाब :* हमारे हुजूर को मेअराज जिस्मानी हुई थी ख्वाब की बात नहीं थी ।
*🌹👉🏻 सवाल नम्बर 15 -* रसूलल्लाह सल्ललाहो तआला अलैह वसल्लम की मेराज कौन से महीने में किस तारीख में हुई थी ?
*🍀👉🏻 जवाब :* रजब के महीने में सताइस्वीं ( 27 ) शब को हुई थी ।
*🌹👉🏻 सवाल नम्बर 16 -* सरकारे दो आलम सल्लल्लाहु तआला अलैह वसल्लम ने आखरी हज कब अदा फरमाया ?
*🍀👉🏻 जवाब :* हमारे हुजूर ने आखरी हज 10 सन हिजरी में अदा फरमाया ।
*🌹👉🏻सवाल नम्बर 17 -* हुजूर नबी - ए - करीम सल्ललाहु तआला अलैह वसल्लम की वफात अकदस कब और कहां हुई ?
*🍀👉🏻 जवाब :* 12 रबीउल अव्वल सन 11 हिजरी पीर के दिन तीसरे पहर हजूर की वफात अकदस मदीने मुनव्वरा में हुई ।
*🌹👉🏻 सवाल नम्बर 18 -* हुजूर अनवर सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम के जिस्म अकदस को किसने गुस्ल दिया और कफनाया ?
*🍀👉🏻 जवाब :* हज़रत अली , हज़रत अब्बास रिदवानुल्लाही तआला अलैहीम अजमईन वगैराह एहले बैत ने गुस्ल दिया और कफन पहनाया ।
*🌹👉🏻 सवाल नम्बर 19 -* हुजूर सरवरे आलम सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम की नमाज़े जनाज़ा किस शान से पढ़ी गयी ?
*🍀👉🏻 जवाब :* पहले फरिशतों ने पढ़ा फिर मर्दो ने पढ़ा फिर औरतों ने पढ़ा फिर बच्चों ने पढ़ा जनाज़ा मुबारक हुजरे अनवर के अन्दर ही था बारी बारी थोड़े थोड़े लोग अन्दर जाते थे नमाज़ पढ़कर चले आते थे लेकिन कोई इमाम न था ।
*🌹👉🏻 सवाल नम्बर 20 -* हुजूरे अकरम सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम के जिस्म अतहर को कब्र अनवर में किन सहाबी ने उतारा ?
*🍀👉🏻 जवाब :* हज़रत अली , हज़रत अब्बास , हज़रत फज़ल व हज़रत कुसुम रदिअल्लाहु तआला अन्हुम ने उतारा ।
*🌹👉🏻 सवाल नम्बर 21 -* हुजूर सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम की कितनी औलाद है और उनके नाम क्या हैं ?
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*🌹👉🏻 सवाल नम्बर 22 -* नबीए अकरम सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम ने कितने साल की उम्र में ऐलान - ए - नुबूवत फरमाया ?
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*🌹👉🏻 सवाल नम्बर 23 -* गज़वा किसको कहते है ?
*🍀👉🏻 जवाब :* गज़वा उस जंग को कहते है जिस में हुजूर सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम ने बनफ्से नफीस शिरकत फरमायी ।
*🌹👉🏻 सवाल नम्बर 24 -* हुजूर सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम ने जिन्दगी में कितने गजवात फरमाये ? कुछ मशहूर गज़वात का नाम बतायें ?
*🍀👉🏻 जवाब :* हुजूर सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम ने अपनी जिन्दगी में कुल 23 गज़वात में शिरकत फरमायी जिन में से मशहूर गजवए बदर , गजवए उहुद , गजवए खन्दक , गजवए हुनैन व गजवए खैबर वगैराह हैं ।
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*🌟 اَلصَّــلٰوةُوَالسَّلَامُ عَلَيْكَ يَارَسُوْلَ اللّٰهﷺ*
*🌟पैगम्बरे इंसानियत ﷺ की जिन्दगी पर एक सरसरी नज़र*
📜 पैगम्बरे इन्सानियत हज़रत मोहम्मद मुस्तफा 12 , रबीउल अव्वल शरीफ मुताबिक 22, अप्रैल 571 ई० सोमवार के दिन ठीक सुब्हे सादिक के वक्त अरब देश के एक नगर मक्कतुल मुकर्रमा में पैदा हए । आस्मानी बशारत के मुताबिक आप का नाम मोहम्मद रखा गया ।
📜 आपके वालिद हज़रत अब्दुल्लाह इब्ने अब्दुल मुत्तलिब आपकी पैदाइश से कुछ माह पहले इन्तिकाल कर गए। वालिदा का इन्तिकाल भी उस वक्त हुआ जब आपकी उम्र शरीफ सिर्फ छ : साल थी । अब आपके सरपरस्त आपके दादा हज़रते अब्दुल मुत्तलिब इब्ने हाशिम थे । लेकिन दो साल बाद वह भी इस दुनिया से कूच कर गए । फिर आपकी सरपरस्ती आपके चचा अबू तालिब इब्ने अब्दुल मुत्तलिब के हिस्से में आई । मगर हिजरत से तीन साल पहले आप ﷺ के सख्त हालात में वह भी इस दुनिया से रुख्सत हो गये ।
📜 फितरत (प्रकृति) से आपने बड़ी शानदार और रोबदार शख्सियत पाई थी । बचपन में ही आपको देखने वाले पुकार उठे कि इस बच्चे का मुस्तकबिल (भविश्य) बड़ा अज़ीम (महान) है । जब बड़े हुए तो आपके जाहो जलाल और रोबो वकार के हाल को हजरते मौला अली कर्रमल्लाहो तआला वजहहुल करीम बयान करते हैं कि जो आपको पहली बार देखता मरऊब हो जाता, जो साथ बैठता वह आपसे महब्बत करने लगता।
📜 हुजूर ﷺ के चेहरये मुबारक, कद व कामत, खद्दो खाल, चाल ढाल, और वजाहत का जो अक्से जमील सदियों के परदों से छन कर हम तक पहुँचा है वह एक ऐसे इंसाने कामिल का तसव्वुर दिलाता है जो जिहानत व फतानत, सब्र व पायदारी, सच्चाई व ईमानदारी, आला ज़रफ़ी, सखावत, ज़िम्मेदारी, वकार व इन्किसारी और फसाहत व बलागत जैसी काबिले तारीफ खूबियों का संगम था । बल्कि यूँ कहा जाए कि आपके जिस्मानी नक्शे में रुहे नबव्वत का परतौ देखा जा सकता है और आपकी वजाहत खुद आपके मुकद्दस मकाम की एक दलील है । आप ﷺ को देखने वालों में अब्दुल्लाह इब्ने सलाम का बयान है कि *“मैंने जूं ही हुजूर को देखा फौरन समझ लिया कि यह चेहरा किसी झूटे का चेहरा नहीं हो सकता"*
*📜 अबू रमसा तैमी कहते हैं :*
"मैं अपने बेटे को साथ लेकर हाज़िरे ख़िदमत हुआ, लोगों ने दिखाया कि यह खुदा के रसूल हैं, देखते ही मैंने कहा वाकई यह अल्लाह के नबी हैं ।
*📙 (पैगामे इंसानियत, सफ्हा, 5/6)*
*📮पोस्ट जारी रहेगी इन्शा अल्लाह...✍🏻*
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_*☝हमारी दावत एक सच्चे दीन की तरफ*_
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*_✏ आओ इल्म -ए-दीन सीखें....✍🏻_*
🌟🌴🌟🌴🌟🌴🌟🌴🌟🌴🌟
*📖 पैगम्बरे इंसानियत ﷺ, पोस्ट ➪01📖*
*▬▬▭܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀܀▭▬▬*
*🌟 اَلصَّــلٰوةُوَالسَّلَامُ عَلَيْكَ يَارَسُوْلَ اللّٰهﷺ*
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📜 पैगम्बरे इन्सानियत हज़रत मोहम्मद मुस्तफा 12 , रबीउल अव्वल शरीफ मुताबिक 22, अप्रैल 571 ई० सोमवार के दिन ठीक सुब्हे सादिक के वक्त अरब देश के एक नगर मक्कतुल मुकर्रमा में पैदा हए । आस्मानी बशारत के मुताबिक आप का नाम मोहम्मद रखा गया ।
📜 आपके वालिद हज़रत अब्दुल्लाह इब्ने अब्दुल मुत्तलिब आपकी पैदाइश से कुछ माह पहले इन्तिकाल कर गए। वालिदा का इन्तिकाल भी उस वक्त हुआ जब आपकी उम्र शरीफ सिर्फ छ : साल थी । अब आपके सरपरस्त आपके दादा हज़रते अब्दुल मुत्तलिब इब्ने हाशिम थे । लेकिन दो साल बाद वह भी इस दुनिया से कूच कर गए । फिर आपकी सरपरस्ती आपके चचा अबू तालिब इब्ने अब्दुल मुत्तलिब के हिस्से में आई । मगर हिजरत से तीन साल पहले आप ﷺ के सख्त हालात में वह भी इस दुनिया से रुख्सत हो गये ।
📜 फितरत (प्रकृति) से आपने बड़ी शानदार और रोबदार शख्सियत पाई थी । बचपन में ही आपको देखने वाले पुकार उठे कि इस बच्चे का मुस्तकबिल (भविश्य) बड़ा अज़ीम (महान) है । जब बड़े हुए तो आपके जाहो जलाल और रोबो वकार के हाल को हजरते मौला अली कर्रमल्लाहो तआला वजहहुल करीम बयान करते हैं कि जो आपको पहली बार देखता मरऊब हो जाता, जो साथ बैठता वह आपसे महब्बत करने लगता।
📜 हुजूर ﷺ के चेहरये मुबारक, कद व कामत, खद्दो खाल, चाल ढाल, और वजाहत का जो अक्से जमील सदियों के परदों से छन कर हम तक पहुँचा है वह एक ऐसे इंसाने कामिल का तसव्वुर दिलाता है जो जिहानत व फतानत, सब्र व पायदारी, सच्चाई व ईमानदारी, आला ज़रफ़ी, सखावत, ज़िम्मेदारी, वकार व इन्किसारी और फसाहत व बलागत जैसी काबिले तारीफ खूबियों का संगम था । बल्कि यूँ कहा जाए कि आपके जिस्मानी नक्शे में रुहे नबव्वत का परतौ देखा जा सकता है और आपकी वजाहत खुद आपके मुकद्दस मकाम की एक दलील है । आप ﷺ को देखने वालों में अब्दुल्लाह इब्ने सलाम का बयान है कि *“मैंने जूं ही हुजूर को देखा फौरन समझ लिया कि यह चेहरा किसी झूटे का चेहरा नहीं हो सकता"*
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"मैं अपने बेटे को साथ लेकर हाज़िरे ख़िदमत हुआ, लोगों ने दिखाया कि यह खुदा के रसूल हैं, देखते ही मैंने कहा वाकई यह अल्लाह के नबी हैं ।
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*🌷☘️🌷🕌 ﴾ ﷽ ﴿ 🕋🌷☘️🌷*
*📘 क़ानूने शरीअ्त, पोस्ट नं. ➪09 📘*
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*🌟 اَلصَّــلٰوةُوَالسَّلَامُ عَلَيْكَ يَارَسُوْلَ اللّٰهﷺ*
_*👑हमारे नबी की खास खास फजीलतें और कमालात*_
•─━━━━━══════━━━━━
_*🕋अल्लाह तबारक व तआला ने हमारे हजूर को तमाम जहाँ से पहले अपने नूर की तजल्ली से पैदा किया । अंम्बिया फरिश्ते ज़मीन आसमान अर्श कुर्सी तमाम जहाँ को हुजूर के नूर की झलक से बनाया । अल्लाह या अल्लाह के बराबर होने के सिवा जितने कमाल जितनी खूबियां हैं सब अल्लाह तआला ने हमारे हुजूर को दे दिया । तमाम जहां में कोई किसी खूबी में हुजूर के बराबर नहीं हो सकता । हुजूर अफजलुल खल्क और अल्लाह तआला के नायबे मुत्लक हैं ।*_
_*👑हुजूर तमाम अम्बिया के नबी है और हर शख्स पर आपकी पैरवी लाज़िम है । अल्लाह तआला ने अपने तमाम खजानों की कुन्जियां हुजूर को बख्श दी । दुनिया और दीन की सब नेमतों का देने वाला खुदा है और बाँटने वाले हुजूर हैं । अल्लाह तआला ने आपको मेराज अता फरमाई यानी अर्श पर बुलाया । अपना दीदार आंखों से दिखाया अपना कलाम सुनाया जन्नत दोज़ख , अर्श कुर्सी वगैरह तमाम चीजों की सैर कराई यह सब कुछ रात के थोड़े से वक़्त में हुआ । कयामत के दिन आप ही सबसे पहले शफ़ाअत करेंगे यानी अल्लाह के यहाँ लोगों की सिफारिश करेंगे । गुनाह माफ करायेंगे , दर्जे बुलन्द करायेंगे , इसके अलावह और बहुत से खुसुसियत हैं जिनके ज़िक्र की इस मुख्तसर में गुन्जाइश नहीं ।*_
_*☝🏻अकीदा : - हुजूर के किसी कौल व फ़ेल व अमल व हालत को जो हिकारत की नजर से देखे वह काफ़िर है ।*_
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_*✍🏻 SAWAL NO. 405 -*_ _Wahabi kahta he mazar banana jaiz kaise hua Or Wahabi kahta he, Allah Ke Nabi ki hadees he ki jis kabar Ke nishan MIT Jaate he uski magfirat ho jaati he to mazaar banana to kaise jaiz huwa or ye fazilat kaise mil sakti hai, Plz mujhe javab do abhi wahabi ko javab dena he._
_*✍🏻 JAWAB NO. 405 -*_ _Gair e alim jo munazre ke fan se waqif naa ho or naa bahut ilm me maharat rakhta ho to use munazra behes me padhna gunah hai, or sail par ye wajib nahi ki wo har wahabi ke suwal ka jawab zarur de or naa mujh par wajib ki me is jawab ko bahut jald du, mere par masroofiyat kafi hoti hai, or group ke alawa bhi personal par suwal hota hai, or me us suwal ko pehle ahmiyat deta hu jo zyada zaruri hai, or gair zaruri suwal karne se bachna chahiye, agar aap sunni hai to ap mazar ko maano or wahabi naa mane to use uske hal par chor do, or ane wale nahi, jab ye khabees “ALAHAZRAT” ki baat nahi mante to aap or mujh jaise chote “Hazrat” ki baat kaise man jayenge._
*_Mazar urf e aam me nek shaks ya wali ki us qabar ko kaha jata hai jis par gumbad hoti hai, or ye jaiz hai,_*
*_Bahar E Shariat me Durre Mukhtar ke hawale se farmaya ulama aur aale rasool ka qabar par kubba (gumbad) banana jaiz hai, bas ye kafi hai, or dalil naqliya ka waqt nahi apke shok ke khatir dalil e aqliya de raha hu, jo apke aqeede or iman ki hifazat ke liye kafi hai, or wo ye hain,_*
*_Zamana kon sa behtar or achha tha ye wala jisme aap hai ya wo jo apke buzurgo ne kata, nek log samjhdar or deen shariat ke paband log ab zyada hai ya pehle ya ane wale waqt me honge ? zarur iska jawab hai ki jo log chale gaye wo behtar the wo isilye ki zamana nabi ke daur se jitna door hoga utne fitne zyada hoge or jo log Huzoor (السالم عليه (ke waqt ki jitne kareeb the wo hadis quran zyada achhe se jante the or hadis me farmaya‐ (khulasa) har guzra hua din maujuda din se behtar hai aur har maujda din behtar hai (kal) ane wale se,_*
*_Ab wahabi se ye puchha jaye ki gaus e azam ki mazar kab thi or kin logo ne banai, or ghareeb namaz ki kab se hai, kya ye mazar banane bareili se koi ahmad raza gaya ? agar nahi to kya sahaba taba’i ke dor me log alim nahi the unhe maloom nahi tha ki kya jaiz nahi ya fir ab ke wahabi zyada janta hai or ek baat, wahabi jis bukhari ki hadis par chilata firta hai use shayad maloom bhi nahi imam bukhari ki bhi mazar hai, ab ye kisne banai, kiya imam ke shagird nahi jante the ki mazar jaiz nahi, or imam e azam ki mazar par imam shafai jate the, or gaus e azam imam hambal ke mazar par jaate or imam abu hanifa Huzoor (السالم عليه (ke mazar par zahir hai, mazar koi nai chiiz nahi, naa gunah na bid’at, naa naya kam Balki mazar ko banane ka khas maqsad ye hota hai ki logo ko pata chale ki ye aam qabr nahi wali ki qabar hai or log uski tazim kare or barkate le, or duaye kare, or sahaba ke waqt me jab sukha padha to log Hazrat ayesha (radiallah anha) ke pas gaye apne farmaya Huzoor (السالم عليه (ki qabar ki chhat se khirki nikal do aisa karte hi barish ho gai, (or khirki jab hi mumkin hai jab chhat ya gumbad ho or chhat ya gumbad bhi jab hi mumkin hai jab charo deewar ho, (bas charo deewar or gumbad kaa nam ho to mazar hai). jo sahaba ke waqt me Huzoor (السالم عليه (ka bhi tha, or ahle bait ka bhi, magar nazadi hukumat ne kafi mazar tor diye, apne batil aqeede ko sacha sabit karne ke liye or aap bajaye apni islah or apne sunni bhaio ki islah ke inki islah me lag gaye, jabki inke liye hidayat ki dua bhi fizul hai_*
_*📚 [Masail-e-Shariyat, Jild:1, Page:172]*_
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_*✍🏻 JAWAB NO. 405 -*_ _Gair e alim jo munazre ke fan se waqif naa ho or naa bahut ilm me maharat rakhta ho to use munazra behes me padhna gunah hai, or sail par ye wajib nahi ki wo har wahabi ke suwal ka jawab zarur de or naa mujh par wajib ki me is jawab ko bahut jald du, mere par masroofiyat kafi hoti hai, or group ke alawa bhi personal par suwal hota hai, or me us suwal ko pehle ahmiyat deta hu jo zyada zaruri hai, or gair zaruri suwal karne se bachna chahiye, agar aap sunni hai to ap mazar ko maano or wahabi naa mane to use uske hal par chor do, or ane wale nahi, jab ye khabees “ALAHAZRAT” ki baat nahi mante to aap or mujh jaise chote “Hazrat” ki baat kaise man jayenge._
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