Computer Courses | Computer Tutorial | Computer Classes | Computer Institute | Computer Tricks
754 subscribers
272 photos
126 videos
2 files
336 links
Download Telegram
Types of High level language in Hindi – हाई लेवल लैंग्वेज के प्रकार
अलग अलग जरूरतों को पूरा करने के लिए अलग अलग प्रकार के high level language होते है। चलिए उनको भी एक बार देख लेते है।
1:- Object-Oriented Programming Language – इस language में दुनिया की समस्याओ को observe किया जाता है। उसके बाद इन समस्याओ को solve किया जाता है। example के लिए C++ , Java.
2:- Visual Programming Language – इस language का इस्तेमाल window application को बनाने के लिए और design करने के लिए किया जाता है। example के लिए Visual Basic, Visual Java, Visual C.
Low Level Language in Hindi – लो लेवल लैंग्वेज क्या है?
• Low Level Language एक ऐसी भाषा होती है जिसे हम इंसान नही समझ सकते इसे केवल कंप्यूटर के द्वारा ही समझा जा सकता है।
• Computer इस language को बड़ी ही आसानी से समझ सकते है। ये language high level language के बिलकुल विपरीत है।
• यह भाषा machine dependent होती है इसका मतलब यह कि यह भाषा कुछ ही कंप्यूटर पर run होती है।
• इस लैंग्वेज में प्रोग्राम को run करने के लिए compiler और interpreter की जरूरत नही पड़ती है।
• इस language का program काफी तेज execute होता है। इसके अलावा output भी काफी जल्दी देता है।
• यह लैंग्वेज high level language के मुकाबले काफी ज्यादा मुश्किल होती है। अर्थात इसे सीखना मुश्किल होता है।
Types of Low level language in Hindi – लो लेवल लैंग्वेज के प्रकार
1. Machine Language
2. Assembly Language
Machine Language क्या है ?
Machine language वह भाषा होती है जिसमें केवल binary (0 और 1) अंको का ही प्रयोग होता है।
दूसरे शब्दों में कहें तो, “जिस भाषा को computer बिना किसी technology के समझ लेता है। उसे हम machine language कहते है।”
computer केवल Binary (0 और1) को ही समझ पाता है। Binary digit का use computer हर काम के लिए करता है। जो program 0 से लेकर 1 digit के होते है। उन्हें हम machine language program कहते है।
Advantages of Machine Language in Hindi – मशीन लैंग्वेज के फायदे
1:- इस भाषा में लिखे गये programs को computer आसानी से समझ लेता है।
2:- इस language को computer जल्दी execute कर लेते है। क्योंकि इसमें compiler और इंटरप्रेटर की जरूरत नही पड़ती।
3:- यह output जल्दी दे देता है।
Disadvantages of Machine Language in Hindi – मशीन लैंग्वेज के नुकसान
1:- मशीनी भाषा के लिखे गये program किसी इंसान को समझ नहीं आते।
2:- machine भाषा के लिखे गए program लम्बे होते है।
3:- program लिखते समय गलतियां ज्यादा होती है।
Assembly Language क्या है ?
Assembly language एक low-level प्रोग्रामिंग लैंग्वेज है. इसको मशीन लैंग्वेज में बदलने के लिए एक सॉफ्टवेर की आवश्यकता होती है जिसे assembler कहते है.
असेंबली लैंग्वेज का प्रयोग माइक्रोप्रोसेसर पर आधारित डिवाइस में, और real time systems में किया जाता है.
इस language में 0 और 1 digit के स्थान पर alphanumeric का use किया जाता है। जैसे कि- A-Z, 0-9 .
Assembly भाषा में लिखे गए program किसी दुसरे computer पर execute नहीं हो सकते है। इस भाषा को लिखने और समझने के लिए computer hardware की knowledge होनी चाहिए।
असेंबली भाषा के फायदे
1. assembly भाषा को समझना machine language की तुलना में काफी ज्यादा आसान है।
2. इस भाषा में गलती होने के chances काफी कम होते है।
3. इसमें program को modify करना आसान है।
असेंबली भाषा के नुकसान
1. assembly भाषा के प्रोग्राम machine पर depend होते है।
2. इस भाषा का use करने के लिए hardware की knowledge ज़रूरी है।
3. इस भाषा में काफी ज्यादा time waste होता है।
Advantages of Low Level Language in Hindi – लो लेवल लैंग्वेज के लाभ
1. इस language की speed काफी अच्छी होती है।
2. इस language में ज्यादा memory space की ज़रूरत नहीं पड़ती।
3. इस language को use करना काफी ज्यादा आसान है।
4. Low level language के लिखे हुए code को run करने के लिए किसी भी compiler तथा interpreter की ज़रूरत नहीं पड़ती।
5. इस programming language की मदद से हम बड़ी ही आसानी से hardware को access कर सकते है।
6. इस programming language की मदद से हम अपने कंप्यूटर की storage और Memory registers को आसानी से manipulate कर सकते हैं।
Disadvantages of Low Level Language in Hindi – लो लेवल लैंग्वेज के नुकसान
1. इंसानो के द्वारा इस language को नहीं समझा जा सकता।
2. इस लैंग्वेज में प्रोग्राम को लिखना बहुत कठिन होता है।
3. इस भाषा में गलतियों को ढूढ़ना मुश्किल होता है।
4. इस language में गलती होने की संभावना ज्यादा रहती है।
5. इस language के code लिखने के लिए programmer को काफी अच्छी knowledge होनी जरुरी है।
High level और low level language के मध्य अंतर
High level
ये भाषा user friendly होती है।
इसको setup करना काफी ज्यादा आसान होता है।
इसका use इस समय काफी ज्यादा किया जाता है।
इसको आसानी से execute किया जा सकता है।
High level language कम memory space इस्तेमाल करता है।
इसको आसानी से debug किया जा सकता है।
इसको maintain करके रखना काफी ज्यादा आसान है।
Low level
ये भाषा computer friendly है।
इसको setup करने में काफी ज्यादा समस्याओ का सामना करना पड़ता है।
इस समय इस language को बहुत कम जगह use किया जाता है।
Low level language को आसानी से execute नहीं किया जा सकता।
यह computer की काफी ज्यादा memory space का use करता है।
debug करने में मुश्किलों को सामना करना पड़ता है।
maintain करके रखना काफी ज्यादा मुश्किल हो।
Disadvantages of Low Level Language in Hindi – लो लेवल लैंग्वेज के नुकसान
1. इंसानो के द्वारा इस language को नहीं समझा जा सकता।
2. इस लैंग्वेज में प्रोग्राम को लिखना बहुत कठिन होता है।
3. इस भाषा में गलतियों को ढूढ़ना मुश्किल होता है।
4. इस language में गलती होने की संभावना ज्यादा रहती है।
5. इस language के code लिखने के लिए programmer को काफी अच्छी knowledge होनी जरुरी है।
High level और low level language के मध्य अंतर
C++ कैसी भाषा है?
यह ऑब्जेक्ट ओरिएंटेड भाषा है?
कंप्यूटर में कितनी भाषा होती है?
कंप्यूटर केवल एक ही भाषा समझता है वो है बाइनरी(Binary)। जो 0 और 1 से मिलकर बनी होती है।
कंप्यूटर मेमोरी क्या है? – Computer Memory in Hindi

हेल्लो दोस्तों! आज हम इस पोस्ट में What is Computer Memory in Hindi & Types (कंप्यूटर मेमोरी क्या है और इसके प्रकार) के बारें में पढेंगे. इसे बहुत ही आसान भाषा में लिखा गया है. इसे आप पूरा पढ़िए, यह आपको आसानी से समझ में आ जायेगा. तो चलिए शुरू करते हैं:-
Computer Memory in Hindi – कंप्यूटर मेमोरी क्या है?
• कंप्यूटर मेमोरी एक डिवाइस होती है जिसका इस्तेमाल डेटा और सूचना को स्टोर करने के लिए किया जाता है.
• दूसरे शब्दों में कहें तो, “Computer Memory कंप्यूटर का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है जिसमें data को स्टोर करके रखा जाता है, बिना मेमोरी के कंप्यूटर काम नहीं करता.”
• जिस प्रकार मनुष्य डेटा और सूचना को स्टोर करने के अपने दिमाग का इस्तेमाल करता है उसी प्रकार कंप्यूटर data (डेटा) और information (सूचना) को स्टोर करने के लिए memory का इस्तेमाल करता है.
• सरल शब्दो में कहे तो “कंप्यूटर मेमोरी एक इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस है जिसका इस्तेमाल प्रोग्राम और सूचनाओं को स्टोर करने के लिए किया जाता है। मेमोरी की मदद से कंप्यूटर अपने कार्यों को पूरा करता है. “
• कंप्यूटर की मेमोरी को छोटे छोटे हिस्सों में विभाजित (divide) किया जाता है जिन्हे हम cell कहते है। इन Cell में डेटा बाइनरी (0,1) के रूप में स्टोर होता है.
• कंप्यूटर मेमोरी इनपुट और आउटपुट दोनों प्रकार के डेटा को स्टोर करने में सक्षम होती है।
• कंप्यूटर मेमोरी बहुत प्रकार की होती है- प्राइमरी मेमोरी (Primary memory), सेकेंडरी मेमोरी (Secondary memory) , कैश मेमोरी (Cache Memory) और रजिस्टर मेमोरी (Register memory). इन सभी मेमोरी के बारे में हम नीचे विस्तार से पढ़ेंगे।
Types of Computer Memory in Hindi – कंप्यूटर मेमोरी के प्रकार
कंप्यूटर मेमोरी के निम्नलिखित प्रकार होते हैं:-

1. प्राइमरी मेमोरी (Primary memory)
2. सेकेंडरी मेमोरी (Secondary memory)
3. कैश मेमोरी (Cache Memory)
4. रजिस्टर (Register)
1- प्राइमरी मेमोरी (Primary Memory)
प्राइमरी मेमोरी कंप्यूटर की मुख्य मेमोरी (main memory) होती है जो कंप्यूटर में मौजूद डेटा और सूचना (information) को स्टोर करती है।
दूसरे शब्दों में कहें तो, “प्राइमरी मैमोरी एक प्रकार की कंप्यूटर मेमोरी है जिसे CPU के द्वारा सीधे एक्सेस (access) किया जा सकता है।“
प्राइमरी मेमोरी को प्राइमरी स्टोरेज के नाम से भी जाना जाता है जो कंप्यूटर के मदरबोर्ड पर स्थित होती है। प्राइमरी मेमोरी को Semiconductor (अर्धचालक) पदार्थ से बनाया जाता है।