Secondary Memory (सेकेंडरी मैमोरी)
यह भी एक प्रकार की कंप्यूटर मेमोरी है जिसे सीधे (direct) प्रोसेसर के द्वारा एक्सेस नहीं किया जा सकता।
सेकेंडरी मेमोरी एक ऐसी मेमोरी है जिसकी स्टोरेज छमता अधिक होती है और यह बड़ी मात्रा में डेटा को स्टोर कर सकती है।
इस मेमोरी का उपयोग बड़े आकार वाले डेटा जैसे (वीडियो, इमेज, ऑडियो, फाइल) को स्टोर करने के लिए किया जाता है।
इस मेमोरी में यूजर डेटा को आसानी से स्टोर कर सकता है और उस डेटा को पुनर्प्राप्त (restore) कर सकता है।
इस मेमोरी का उपयोग स्थाई (permanent) रूप से डेटा को स्टोर करने के लिए किया जाता है। permanent डेटा का अर्थ यह है की बिजली चली जाने के बाद भी डेटा बरकार रहे या डिलीट ना हो।
प्राइमरी मेमोरी में बिजली चली जाने पर डेटा खो जाता है परन्तु सेकेंडरी मेमोरी में ऐसा नहीं होता। CPU डायरेक्ट सेकेंडरी मेमोरी को एक्सेस कर सकता।
इसे ऐसा करने के लिए सेकेंडरी मेमोरी के डेटा को प्राइमरी मेमोरी में ट्रांसफर करना होगा इसके बाद CPU सेकडरी मेमोरी को एक्सेस कर पायेगा।
इसे सेकेंडरी स्टोरेज के नाम से भी जाना जाता है जो प्राइमरी मेमोरी की तुलना में सस्ती होती है।
यह भी एक प्रकार की कंप्यूटर मेमोरी है जिसे सीधे (direct) प्रोसेसर के द्वारा एक्सेस नहीं किया जा सकता।
सेकेंडरी मेमोरी एक ऐसी मेमोरी है जिसकी स्टोरेज छमता अधिक होती है और यह बड़ी मात्रा में डेटा को स्टोर कर सकती है।
इस मेमोरी का उपयोग बड़े आकार वाले डेटा जैसे (वीडियो, इमेज, ऑडियो, फाइल) को स्टोर करने के लिए किया जाता है।
इस मेमोरी में यूजर डेटा को आसानी से स्टोर कर सकता है और उस डेटा को पुनर्प्राप्त (restore) कर सकता है।
इस मेमोरी का उपयोग स्थाई (permanent) रूप से डेटा को स्टोर करने के लिए किया जाता है। permanent डेटा का अर्थ यह है की बिजली चली जाने के बाद भी डेटा बरकार रहे या डिलीट ना हो।
प्राइमरी मेमोरी में बिजली चली जाने पर डेटा खो जाता है परन्तु सेकेंडरी मेमोरी में ऐसा नहीं होता। CPU डायरेक्ट सेकेंडरी मेमोरी को एक्सेस कर सकता।
इसे ऐसा करने के लिए सेकेंडरी मेमोरी के डेटा को प्राइमरी मेमोरी में ट्रांसफर करना होगा इसके बाद CPU सेकडरी मेमोरी को एक्सेस कर पायेगा।
इसे सेकेंडरी स्टोरेज के नाम से भी जाना जाता है जो प्राइमरी मेमोरी की तुलना में सस्ती होती है।
Generation of Computer in Hindi – कंप्यूटर की पीढियां
बहुत साल पहले भी कंप्यूटर का इस्तेमाल किया जाता था और आज भी किया जाता है। पहले के computers और आज के computers में बहुत अंतर है। कंप्यूटर में समय के साथ काफी परिवर्तन हुआ है।
आज के समय के कंप्यूटर काफी मॉडर्न और एडवांस देखने को मिलते है। लेकिन पुराने समय के कंप्यूटर इतने modern (आधुनिक) और advance नहीं हुआ करते थे। लेकिन बदलते समय के साथ कंप्यूटर के क्षेत्र में सुधार हुआ। जिसमें काफी समय लगा। पहले के कंप्यूटर आकार में बहुत बड़े हुआ करते थे। लेकिन आज के कंप्यूटर साइज़ में भी बहुत छोटे होते है और इनकी speed (गति) भी तेज होती है।
सरल भाषा में इसे समझे तो “वह time period (समय अवधि) जिसमें कंप्यूटर की टेक्नोलॉजी का विकास हुआ है। इसी time period को हम generation of computer (कंप्यूटर की पीढ़ी) कहते है।“
कम्प्यूटर की तकनीक को विकसित होने में लगभग पांच पीढियों का वक़्त लग गया है। इसीलिए कंप्यूटर की पांच पीढियां होती है। जो कि नीचे दी गयी हैं-
1. पहली पीढ़ी के कंप्यूटर (1940 से 1956 तक)
2. दूसरी पीढ़ी के कंप्यूटर (1956 से 1963 तक)
3. तीसरी पीढ़ी के कंप्यूटर (1964 से 1971 तक)
4. चौथी पीढ़ी के कंप्यूटर (1971 से 1985 तक)
5. पांचवी पीढ़ी के कंप्यूटर (वर्तमान में मौजूद)
बहुत साल पहले भी कंप्यूटर का इस्तेमाल किया जाता था और आज भी किया जाता है। पहले के computers और आज के computers में बहुत अंतर है। कंप्यूटर में समय के साथ काफी परिवर्तन हुआ है।
आज के समय के कंप्यूटर काफी मॉडर्न और एडवांस देखने को मिलते है। लेकिन पुराने समय के कंप्यूटर इतने modern (आधुनिक) और advance नहीं हुआ करते थे। लेकिन बदलते समय के साथ कंप्यूटर के क्षेत्र में सुधार हुआ। जिसमें काफी समय लगा। पहले के कंप्यूटर आकार में बहुत बड़े हुआ करते थे। लेकिन आज के कंप्यूटर साइज़ में भी बहुत छोटे होते है और इनकी speed (गति) भी तेज होती है।
सरल भाषा में इसे समझे तो “वह time period (समय अवधि) जिसमें कंप्यूटर की टेक्नोलॉजी का विकास हुआ है। इसी time period को हम generation of computer (कंप्यूटर की पीढ़ी) कहते है।“
कम्प्यूटर की तकनीक को विकसित होने में लगभग पांच पीढियों का वक़्त लग गया है। इसीलिए कंप्यूटर की पांच पीढियां होती है। जो कि नीचे दी गयी हैं-
1. पहली पीढ़ी के कंप्यूटर (1940 से 1956 तक)
2. दूसरी पीढ़ी के कंप्यूटर (1956 से 1963 तक)
3. तीसरी पीढ़ी के कंप्यूटर (1964 से 1971 तक)
4. चौथी पीढ़ी के कंप्यूटर (1971 से 1985 तक)
5. पांचवी पीढ़ी के कंप्यूटर (वर्तमान में मौजूद)
First Generation computer in Hindi (पहली पीढ़ी के कंप्यूटर)
• पहली पीढ़ी के कंप्यूटर साइज़ में काफी बड़े हुआ करते थे। आप इनके size (आकार) का अन्दाज़ा इसी बात से लगा सकते है कि इन कंप्यूटर को रखने के लिए एक कमरे की ज़रूरत पड़ती थी।
• पहली पीढ़ी की शुरुआत 1940 में हुई और इसका अंत 1956 में हुआ।
• इस पीढ़ी के कंप्यूटरों में कांच के बने वैक्यूम ट्यूब का प्रयोग किया जाता था। इनमें हजारों की संख्या में वैक्यूम ट्यूब का इस्तेमाल किया जाता था इसलिए इन कंप्यूटरों का आकार बहुत बड़ा होता था।
• पहली पीढ़ी के कंप्यूटर इतने advance और modern नहीं हुआ करते थे। इनमे काफी कमियां थी। ये कंप्यूटर काम करते वक़्त जल्दी गर्म हो जाया करते थे और reliable (विस्वश्नीय) नहीं हुआ करते थे।
• पहली पीढ़ी के कंप्यूटर का उपयोग गणना करने, डेटा को स्टोर करने, और वैज्ञानिक कार्यों के लिए किया जाता था।
• इस पीढ़ी के कम्प्यूटरों में मुख्य रूप से batch processing ऑपरेटिंग सिस्टम का इस्तेमाल किया जाता था।
• इन कम्प्यूटरों में प्रोग्रामिंग करना बहुत ही ज्यादा मुश्किल काम था और ये बिजली भी बहुत खर्च करते थे।
पहली पीढ़ी के कंप्यूटर के उदाहरण
• ENIAC
• EDVAC
• UNIVAC
• IBM-701
• EDSAC
• IBM 650
• पहली पीढ़ी के कंप्यूटर साइज़ में काफी बड़े हुआ करते थे। आप इनके size (आकार) का अन्दाज़ा इसी बात से लगा सकते है कि इन कंप्यूटर को रखने के लिए एक कमरे की ज़रूरत पड़ती थी।
• पहली पीढ़ी की शुरुआत 1940 में हुई और इसका अंत 1956 में हुआ।
• इस पीढ़ी के कंप्यूटरों में कांच के बने वैक्यूम ट्यूब का प्रयोग किया जाता था। इनमें हजारों की संख्या में वैक्यूम ट्यूब का इस्तेमाल किया जाता था इसलिए इन कंप्यूटरों का आकार बहुत बड़ा होता था।
• पहली पीढ़ी के कंप्यूटर इतने advance और modern नहीं हुआ करते थे। इनमे काफी कमियां थी। ये कंप्यूटर काम करते वक़्त जल्दी गर्म हो जाया करते थे और reliable (विस्वश्नीय) नहीं हुआ करते थे।
• पहली पीढ़ी के कंप्यूटर का उपयोग गणना करने, डेटा को स्टोर करने, और वैज्ञानिक कार्यों के लिए किया जाता था।
• इस पीढ़ी के कम्प्यूटरों में मुख्य रूप से batch processing ऑपरेटिंग सिस्टम का इस्तेमाल किया जाता था।
• इन कम्प्यूटरों में प्रोग्रामिंग करना बहुत ही ज्यादा मुश्किल काम था और ये बिजली भी बहुत खर्च करते थे।
पहली पीढ़ी के कंप्यूटर के उदाहरण
• ENIAC
• EDVAC
• UNIVAC
• IBM-701
• EDSAC
• IBM 650
Advantages of First Generation Computer in Hindi (पहली पीढ़ी कंप्यूटर के फायदे)
1. इस पीढ़ी के कंप्यूटर डाटा की calculation (गणना) बहुत तेजी से करते थे। ये millisecond में गणना कर सकते थे।
2. उस समय वैक्यूम ट्यूब आसानी से मिल जाया करते थे।
3. वैक्यूम ट्यूब की technology ज्यादा महंगी नहीं थी।
4. इन कम्प्यूटरों में scientific (वैज्ञानिक) काम कर सकते थे।
5. इन कम्प्यूटरों में information और data को स्टोर करने की क्षमता थी।
1. इस पीढ़ी के कंप्यूटर डाटा की calculation (गणना) बहुत तेजी से करते थे। ये millisecond में गणना कर सकते थे।
2. उस समय वैक्यूम ट्यूब आसानी से मिल जाया करते थे।
3. वैक्यूम ट्यूब की technology ज्यादा महंगी नहीं थी।
4. इन कम्प्यूटरों में scientific (वैज्ञानिक) काम कर सकते थे।
5. इन कम्प्यूटरों में information और data को स्टोर करने की क्षमता थी।
Disadvantages of First Generation Computer in Hindi (पहली पीढ़ी कंप्यूटर के नुकसान)
1. पहली जनरेशन के कंप्यूटर का size काफी बड़ा होता था।
2. इस जनरेशन के computer काम करते समय काफी गर्म हो जाया करते थे।
3. कम्प्यूटर को ठंडा रखने के लिए Air-Condition (AC) की ज़रूरत पड़ती थी।
4. अपने बड़े आकर के कारण ये बहुत अधिक मात्रा में बिजली का इस्तेमाल करते थे।
5. इन कंप्यूटरों को मेन्टेन करके रखना काफी ज्यादा मुश्किल होता था।
6. ये केवल मशीन लैंग्वेज का इस्तेमाल करते थे और इसमें प्रोग्रामिंग करना भी एक कठिन कार्य था।
1. पहली जनरेशन के कंप्यूटर का size काफी बड़ा होता था।
2. इस जनरेशन के computer काम करते समय काफी गर्म हो जाया करते थे।
3. कम्प्यूटर को ठंडा रखने के लिए Air-Condition (AC) की ज़रूरत पड़ती थी।
4. अपने बड़े आकर के कारण ये बहुत अधिक मात्रा में बिजली का इस्तेमाल करते थे।
5. इन कंप्यूटरों को मेन्टेन करके रखना काफी ज्यादा मुश्किल होता था।
6. ये केवल मशीन लैंग्वेज का इस्तेमाल करते थे और इसमें प्रोग्रामिंग करना भी एक कठिन कार्य था।
Second Generation Computer in Hindi (दूसरी पीढ़ी के कंप्यूटर)
• कंप्यूटर की दूसरी पीढ़ी की शुरुआत 1956 में हुई थी और इसका अंत 1963 में हुआ था।
• दूसरी पीढ़ी के कंप्यूटर में transistor (ट्रांजिस्टर) का इस्तेमाल किया जाता था। ट्रांजिस्टर वैक्यूम ट्यूब के मुकाबले काफी छोटे होते थे।
• ट्रांजिस्टर के कारण कंप्यूटर का साइज पहली पीढ़ी के मुकाबले छोटा हो गया। ट्रांजिस्टर के आने के बाद कंप्यूटर के क्षेत्र में काफी ज्यादा विकास हुआ।
• ट्रांजिस्टर, वैक्यूम ट्यूब की तुलना में काफी सस्ते थे , size में छोटे थे , ज्यादा reliable थे , और काफी तेज काम करते थे।
• इस पीढ़ी में असेंबली लैंग्वेज और हाई-लेवल लैंग्वेज का इस्तेमाल किया जाता था।
• इस पीढ़ी के कंप्यूटरों में batch processing और multi-programming ऑपरेटिंग सिस्टम का उपयोग किया जाता था।
• कंप्यूटर की दूसरी पीढ़ी की शुरुआत 1956 में हुई थी और इसका अंत 1963 में हुआ था।
• दूसरी पीढ़ी के कंप्यूटर में transistor (ट्रांजिस्टर) का इस्तेमाल किया जाता था। ट्रांजिस्टर वैक्यूम ट्यूब के मुकाबले काफी छोटे होते थे।
• ट्रांजिस्टर के कारण कंप्यूटर का साइज पहली पीढ़ी के मुकाबले छोटा हो गया। ट्रांजिस्टर के आने के बाद कंप्यूटर के क्षेत्र में काफी ज्यादा विकास हुआ।
• ट्रांजिस्टर, वैक्यूम ट्यूब की तुलना में काफी सस्ते थे , size में छोटे थे , ज्यादा reliable थे , और काफी तेज काम करते थे।
• इस पीढ़ी में असेंबली लैंग्वेज और हाई-लेवल लैंग्वेज का इस्तेमाल किया जाता था।
• इस पीढ़ी के कंप्यूटरों में batch processing और multi-programming ऑपरेटिंग सिस्टम का उपयोग किया जाता था।
दूसरी पीढ़ी के कंप्यूटर के उदाहरण –
• UNIVAC 1108
• CDC 1604
• Honeywell 400CDC 3600
• IBM 7094
• UNIVAC 1108
• CDC 1604
• Honeywell 400CDC 3600
• IBM 7094
Advantages of Second generation computer in Hindi (दूसरी पीढ़ी कंप्यूटर के फायदे)
1. पहली पीढ़ी की तुलना में इस पीढ़ी के कंप्यूटर का साइज़ काफी छोटा था।
2. दूसरी पीढ़ी के कंप्यूटर काम करते समय जल्दी गर्म नहीं होते थे।
3. ये अपने छोटे आकार के कारण कम बिजली ख़र्च करते थे।
4. दूसरी पीढ़ी वाले कंप्यूटर के काम करने की speed काफी अच्छी थी। ये डाटा को microseconds में कैलकुलेट कर लेते थे।
5. पहली पीढ़ी के मुकाबले दूसरी पीढ़ी के कंप्यूटरों को मेन्टेन करना आसान था।
6. पहली पीढ़ी की तुलना में दूसरी पीढ़ी के कंप्यूटर सस्ते थे।
7. इनकी accuracy अधिक थी और ये reliable (विश्वसनीय) होते थे।
1. पहली पीढ़ी की तुलना में इस पीढ़ी के कंप्यूटर का साइज़ काफी छोटा था।
2. दूसरी पीढ़ी के कंप्यूटर काम करते समय जल्दी गर्म नहीं होते थे।
3. ये अपने छोटे आकार के कारण कम बिजली ख़र्च करते थे।
4. दूसरी पीढ़ी वाले कंप्यूटर के काम करने की speed काफी अच्छी थी। ये डाटा को microseconds में कैलकुलेट कर लेते थे।
5. पहली पीढ़ी के मुकाबले दूसरी पीढ़ी के कंप्यूटरों को मेन्टेन करना आसान था।
6. पहली पीढ़ी की तुलना में दूसरी पीढ़ी के कंप्यूटर सस्ते थे।
7. इनकी accuracy अधिक थी और ये reliable (विश्वसनीय) होते थे।
Disadvantages of Second generation computer in Hindi (दूसरी पीढ़ी कंप्यूटर के नुक़सान)
1. दूसरे जनरेशन के कंप्यूटर कम गर्मी पैदा करते थे फिर भी इन्हें ठंडा रखने के लिए AC की ज़रूरत पड़ती थी।
2. दूसरे जनरेशन के कंप्यूटर को लगातार maintain (रख-रखाव) की जरूरत पड़ती थी।
3. इसका इस्तेमाल केवल कुछ विशेष काम को पूरा करने के लिए ही किया जाता था।
4. पहली पीढ़ी की तरह इस पीढ़ी के कंप्यूटर भी इनपुट के लिए punch cards का प्रयोग करते थे।
1. दूसरे जनरेशन के कंप्यूटर कम गर्मी पैदा करते थे फिर भी इन्हें ठंडा रखने के लिए AC की ज़रूरत पड़ती थी।
2. दूसरे जनरेशन के कंप्यूटर को लगातार maintain (रख-रखाव) की जरूरत पड़ती थी।
3. इसका इस्तेमाल केवल कुछ विशेष काम को पूरा करने के लिए ही किया जाता था।
4. पहली पीढ़ी की तरह इस पीढ़ी के कंप्यूटर भी इनपुट के लिए punch cards का प्रयोग करते थे।
Third Generation Computer in Hindi (तीसरी पीढ़ी के कंप्यूटर)
• कंप्यूटर की तीसरी पीढ़ी की शुरुआत 1964 में हुई थी और इसका अंत 1971 में हुआ था।
• तीसरी पीढ़ी आने तक कंप्यूटर के छेत्र में काफी ज्यादा विकास हो चूका था। इस पीढ़ी में कंप्यूटर और भी ज्यादा advance और modern हो गए थे।
• तीसरी पीढ़ी में computer के अंदर ट्रांजिस्टर की जगह IC (इंटीग्रेटेड सर्किट)) का इस्तेमाल किया जाता था।
• IC एक तरह की चिप है जो कि सिलिकॉन से बनी हुई होती है। इसलिए इसको सिलिकॉन चिप भी कहा जाता है।
• तीसरी पीढ़ी के कंप्यूटर काफी ज्यादा reliable (विश्वसनीय) थे।
• तीसरी पीढ़ी के कंप्यूटर की काम करने की स्पीड पिछले दोनों पीढ़ियों के कंप्यूटर से बेहतर थी।
• Integrated Chip (IC) आने के कारण कंप्यूटर का साइज काफी छोटा हो गया था। इसके साथ साथ मैमोरी की क्षमता भी काफी ज्यादा बढ़ गई थी।
• इस पीढ़ी में time sharing और multiprogramming ऑपरेटिंग सिस्टम का उपयोग किया जाता था।
• इस पीढ़ी में हाई लेवल लैंग्वेज जैसे कि – Cobol, Pascal आदि का use किया जाता था।
तीसरी पीढ़ी के कंप्यूटर के उदाहरण
• IBM 370
• PDP-11
• UNIVAC 1108
• Honeywell-6000
• DEC series
• ICL 2900
• कंप्यूटर की तीसरी पीढ़ी की शुरुआत 1964 में हुई थी और इसका अंत 1971 में हुआ था।
• तीसरी पीढ़ी आने तक कंप्यूटर के छेत्र में काफी ज्यादा विकास हो चूका था। इस पीढ़ी में कंप्यूटर और भी ज्यादा advance और modern हो गए थे।
• तीसरी पीढ़ी में computer के अंदर ट्रांजिस्टर की जगह IC (इंटीग्रेटेड सर्किट)) का इस्तेमाल किया जाता था।
• IC एक तरह की चिप है जो कि सिलिकॉन से बनी हुई होती है। इसलिए इसको सिलिकॉन चिप भी कहा जाता है।
• तीसरी पीढ़ी के कंप्यूटर काफी ज्यादा reliable (विश्वसनीय) थे।
• तीसरी पीढ़ी के कंप्यूटर की काम करने की स्पीड पिछले दोनों पीढ़ियों के कंप्यूटर से बेहतर थी।
• Integrated Chip (IC) आने के कारण कंप्यूटर का साइज काफी छोटा हो गया था। इसके साथ साथ मैमोरी की क्षमता भी काफी ज्यादा बढ़ गई थी।
• इस पीढ़ी में time sharing और multiprogramming ऑपरेटिंग सिस्टम का उपयोग किया जाता था।
• इस पीढ़ी में हाई लेवल लैंग्वेज जैसे कि – Cobol, Pascal आदि का use किया जाता था।
तीसरी पीढ़ी के कंप्यूटर के उदाहरण
• IBM 370
• PDP-11
• UNIVAC 1108
• Honeywell-6000
• DEC series
• ICL 2900
Computer Language in Hindi – कंप्यूटर लैंग्वेज क्या है?
• Computer language एक ऐसी लैंग्वेज होती है जिसके द्वारा कंप्यूटरों के साथ communicate किया जाता है।
• जिस तरह हम इंसान आपस में एक दुसरे से communicate (बात-चीत) करने के लिए किसी ना किसी language (भाषा) का इस्तेमाल करते है। ठीक उसी तरह computer भी communicate करने के लिए language का use करते है। जिसे हम computer language कहते है।
• कंप्यूटर लैंग्वेज instructions (निर्देशों) का एक समूह होता है जिसके द्वारा किसी विशेष कार्य को पूरा किया जाता है।
• Computer language एक ऐसी लैंग्वेज होती है जिसके द्वारा कंप्यूटरों के साथ communicate किया जाता है।
• जिस तरह हम इंसान आपस में एक दुसरे से communicate (बात-चीत) करने के लिए किसी ना किसी language (भाषा) का इस्तेमाल करते है। ठीक उसी तरह computer भी communicate करने के लिए language का use करते है। जिसे हम computer language कहते है।
• कंप्यूटर लैंग्वेज instructions (निर्देशों) का एक समूह होता है जिसके द्वारा किसी विशेष कार्य को पूरा किया जाता है।
• दूसरें शब्दों में कहें तो, “Computer language एक code होता है जिसके द्वारा programs को लिखा जाता है।”
• कंप्यूटर लैंग्वेज का प्रयोग desktop applications, mobile applications और websites को बनाने के लिए किया जाता है। जैसे कि- Java, C++ का प्रयोग करके app बनाई जाती है।
• Computer language को programming language भी कहा जाता है और इसका प्रयोग programmers के द्वारा कंप्यूटर प्रोग्राम को create करने के लिए किया जाता है।
• कुछ कंप्यूटर लैंग्वेज इंसान की समझ में नही आती हैं इन्हें केवल कंप्यूटर ही समझ सकता है।
• कंप्यूटर लैंग्वेज का प्रयोग desktop applications, mobile applications और websites को बनाने के लिए किया जाता है। जैसे कि- Java, C++ का प्रयोग करके app बनाई जाती है।
• Computer language को programming language भी कहा जाता है और इसका प्रयोग programmers के द्वारा कंप्यूटर प्रोग्राम को create करने के लिए किया जाता है।
• कुछ कंप्यूटर लैंग्वेज इंसान की समझ में नही आती हैं इन्हें केवल कंप्यूटर ही समझ सकता है।
Types of computer language in Hindi – कंप्यूटर लैंग्वेज के प्रकार
Computer language मुख्य रूप से दो प्रकार की होती हैं जो कि निम्नलिखित है।
1. High Level Language
2. Low Level Language
Computer language मुख्य रूप से दो प्रकार की होती हैं जो कि निम्नलिखित है।
1. High Level Language
2. Low Level Language
High Level Language in Hindi – हाई लेवल लैंग्वेज क्या है?
• High Level Language एक ऐसी भाषा है , जिसकी मदद से कंप्यूटर प्रोग्राम को आसानी से समझा और लिखा जा सकता है।
• High level language अंग्रेजी की तरह होती है इसलिए इस भाषा को इंसान आसानी से समझ सकते हैं।
• हाई लेवल लैंग्वेज का इस्तेमाल user-friendly सॉफ्टवेयर और वेबसाइट बनाने में किया जाता है।
• ये एक ऐसी भाषा है जिसका syntax पहले से ही निर्धारित होता है।
• हाई लेवल लैंग्वेज में compiler और interpreter की आवश्यकता होती है जिससे कि program को machine language में बदला जा सके।
• High-level language के उदाहरण हैं – Python, Java, JavaScript, PHP, C#, C++, Cobol, Perl, Pascal, और FORTRAN आदि।
• High Level Language एक ऐसी भाषा है , जिसकी मदद से कंप्यूटर प्रोग्राम को आसानी से समझा और लिखा जा सकता है।
• High level language अंग्रेजी की तरह होती है इसलिए इस भाषा को इंसान आसानी से समझ सकते हैं।
• हाई लेवल लैंग्वेज का इस्तेमाल user-friendly सॉफ्टवेयर और वेबसाइट बनाने में किया जाता है।
• ये एक ऐसी भाषा है जिसका syntax पहले से ही निर्धारित होता है।
• हाई लेवल लैंग्वेज में compiler और interpreter की आवश्यकता होती है जिससे कि program को machine language में बदला जा सके।
• High-level language के उदाहरण हैं – Python, Java, JavaScript, PHP, C#, C++, Cobol, Perl, Pascal, और FORTRAN आदि।
Advantages of high level language in Hindi – हाई लेवल लैंग्वेज के फायदे
इसके फायदे निम्नलिखित हैं-
1:- यह भाषा user friendly होती है। अर्थात इसे यूजर आसानी से इस्तेमाल कर सकते हैं।
2:- इस language को लिखना और समझना काफी ज्यादा आसान होता है।
3:- इस तरह की language को maintain करना काफी ज्यादा आसान होता है।
4:- यह भाषा machine independent होती है इनका मतलब यह है कि यह किसी भी कंप्यूटर में run हो जाती है।
5:- इस language के commercial software high level के होते है।
6:- यह user को बेहतर graphical interface प्रदान करवाता है।
7:- इस language में गलतियों को ठीक करना काफी ज्यादा आसान है।
इसके फायदे निम्नलिखित हैं-
1:- यह भाषा user friendly होती है। अर्थात इसे यूजर आसानी से इस्तेमाल कर सकते हैं।
2:- इस language को लिखना और समझना काफी ज्यादा आसान होता है।
3:- इस तरह की language को maintain करना काफी ज्यादा आसान होता है।
4:- यह भाषा machine independent होती है इनका मतलब यह है कि यह किसी भी कंप्यूटर में run हो जाती है।
5:- इस language के commercial software high level के होते है।
6:- यह user को बेहतर graphical interface प्रदान करवाता है।
7:- इस language में गलतियों को ठीक करना काफी ज्यादा आसान है।
Disadvantages of high level language in Hindi – हाई लेवल लैंग्वेज के नुकसान
इसके नुकसान नीचे दिए गए हैं-
1:- इस भाषा में source code को machine code में बदलना पड़ता है जिस वजह से काफी ज्यादा समय बर्बाद होता है।
2:- High Level Language में ज्यादा memory space की ज़रूरत पड़ती है।
3:- यह भाषा low level language की तुलना में slow (धीमी) है।
4:- यह भाषा हार्डवेयर से सीधे कम्यूनिकेट नही कर सकती।
इसके नुकसान नीचे दिए गए हैं-
1:- इस भाषा में source code को machine code में बदलना पड़ता है जिस वजह से काफी ज्यादा समय बर्बाद होता है।
2:- High Level Language में ज्यादा memory space की ज़रूरत पड़ती है।
3:- यह भाषा low level language की तुलना में slow (धीमी) है।
4:- यह भाषा हार्डवेयर से सीधे कम्यूनिकेट नही कर सकती।