सर्वहित - बूंदी रियासत की तरफ से पं. रामप्रताप शर्मा के संपादन में 20 फरवरी 1890 में पाक्षिक 'सर्वहित' निकलने लगा। यह छ राज्याश्रित होते हुए भी कई मायनों में विशिष्ट था। यह 1904 तह प्रकाशित हुआ था।
'सर्वहित' पहला ऐसा पत्र था जिसके प्रत्येक अंक में उसकी मुद्रण संख्या प्रकाशित होती थी।
एक बेहद शानदार सवाल ❤️👍🏼
'सर्वहित' पहला ऐसा पत्र था जिसके प्रत्येक अंक में उसकी मुद्रण संख्या प्रकाशित होती थी।
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धरमत का युद्ध : 16 अप्रैल 1658 को औरंगजेब व दाराशिकोह के मध्य उत्तराधिकारी का युद्ध हुआ था। इस युद्ध में दाराशिकोह की शाही सेना का नेतृत्व मारवाड़ शासक जसवंत सिंह प्रथम कर रहा था। औरंगजेब ने दाराशिकोह की शाही सेना को पराजित किया।
• सामूगढ़ का युद्ध : 29 मई 1658 औरंगजेब व मुराद की संयुक्त सेना व दाराशिकोह की शाही सेना के मध्य हुआ। इस युद्ध में दाराशिकोह की शाही सेना पराजित हुई।
• खजुआ का युद्ध : 5 जनवरी 1659 मुगल सम्राट औरंगजेब व शाह शुजा के बीच लड़ा गया। इस युद्ध में मारवाड़ शासक जसवंतसिंह-प्रथम ने औरंगजेब का साथ दिया।
• सामूगढ़ का युद्ध : 29 मई 1658 औरंगजेब व मुराद की संयुक्त सेना व दाराशिकोह की शाही सेना के मध्य हुआ। इस युद्ध में दाराशिकोह की शाही सेना पराजित हुई।
• खजुआ का युद्ध : 5 जनवरी 1659 मुगल सम्राट औरंगजेब व शाह शुजा के बीच लड़ा गया। इस युद्ध में मारवाड़ शासक जसवंतसिंह-प्रथम ने औरंगजेब का साथ दिया।
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जोधपुर में प्राचीन राजाओं की छतरियों व उद्यानों के लिए प्रसिद्ध स्थान का नाम है-मण्डोर💐
9 नवंबर 1570 ई. को अकबर ने राजपूताना में किस स्थान पर दरबार लगाया जिसमें कई राजपूत शासकों ने अकबर की अधीनता स्वीकार की- नागौर💐
जसवंत सिंह के वैध पुत्र अजीतसिंह को मारवाड़ का शासक बनाने हेतु मुगलों से 30 वर्षीय युद्ध लड़ने वाला राजपुत था- दुर्गादास राठौड़💐
किस मारवाड़ शासक के समय "आंवल-बांवल की संधि द्वारा मेवाड़ व मारवाड़ की सीमा का निर्धारण किया गया -राव जोधा💐
जोधपुर के किस शासक की मृत्यु आगरा में हुई तथा अंतिम संस्कार यमुना नदी के किनारे किया गया_: राव गजसिंह💐
वीर दुर्गादास की छतरी कहाँ स्थित है क्षिप्रा नदी तट (उज्जैन)💐
मारवाड़ राजकुमार अजीत सिंह के सुरक्षित पालन-पोषण हेतु वीर दुर्गादास राठौड़ को मेवाड़ के किस शासक ने अपने यहाँ शरण देकर केलवा की जागीर प्रदान की थी _:राजसिंह
दुर्गादास राठौड़ ने राजकुमार अजीतसिंह व रानियों को किस महिला की मदद से औरंगजेब के चंगुल से छुड़ाकर सुरक्षित निकाला - गौरांधाय व बाघेली💐
मारवाड़ (जोधपुर) का कौनसा शासक नाथ संप्रदाय का अनुयायी हो गया तथा उसने जोधपुर के मठ "महामंदिर" का निर्माण करवाया महाराजा मानसिंह💐
वीर दुर्गादास ने राठौड़ वंश के शिशु राजकुमार अजीतसिंह को सिरोही में किसके पास रखा-पुष्करणा ब्राह्मण जयदेव💐
राजपूताना के राठौड़ वंश की पहली राजधानी भी_: मण्डोर💐
मुगल सम्राट जहाँगीर ने "दलथम्भन" की उपा किसे प्रदान कीथी - महाराणा गजसिंह💐
#important #फैक्ट ❤️☘
9 नवंबर 1570 ई. को अकबर ने राजपूताना में किस स्थान पर दरबार लगाया जिसमें कई राजपूत शासकों ने अकबर की अधीनता स्वीकार की- नागौर💐
जसवंत सिंह के वैध पुत्र अजीतसिंह को मारवाड़ का शासक बनाने हेतु मुगलों से 30 वर्षीय युद्ध लड़ने वाला राजपुत था- दुर्गादास राठौड़💐
किस मारवाड़ शासक के समय "आंवल-बांवल की संधि द्वारा मेवाड़ व मारवाड़ की सीमा का निर्धारण किया गया -राव जोधा💐
जोधपुर के किस शासक की मृत्यु आगरा में हुई तथा अंतिम संस्कार यमुना नदी के किनारे किया गया_: राव गजसिंह💐
वीर दुर्गादास की छतरी कहाँ स्थित है क्षिप्रा नदी तट (उज्जैन)💐
मारवाड़ राजकुमार अजीत सिंह के सुरक्षित पालन-पोषण हेतु वीर दुर्गादास राठौड़ को मेवाड़ के किस शासक ने अपने यहाँ शरण देकर केलवा की जागीर प्रदान की थी _:राजसिंह
दुर्गादास राठौड़ ने राजकुमार अजीतसिंह व रानियों को किस महिला की मदद से औरंगजेब के चंगुल से छुड़ाकर सुरक्षित निकाला - गौरांधाय व बाघेली💐
मारवाड़ (जोधपुर) का कौनसा शासक नाथ संप्रदाय का अनुयायी हो गया तथा उसने जोधपुर के मठ "महामंदिर" का निर्माण करवाया महाराजा मानसिंह💐
वीर दुर्गादास ने राठौड़ वंश के शिशु राजकुमार अजीतसिंह को सिरोही में किसके पास रखा-पुष्करणा ब्राह्मण जयदेव💐
राजपूताना के राठौड़ वंश की पहली राजधानी भी_: मण्डोर💐
मुगल सम्राट जहाँगीर ने "दलथम्भन" की उपा किसे प्रदान कीथी - महाराणा गजसिंह💐
#important #फैक्ट ❤️☘
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CET Sr. Sec. level 2022 to 2024 PYQ & Key-1.pdf
31.3 MB
CET 12th पिछले वर्षों के पेपर...❤️👆
उत्तर कुंजी सहित
🧑💻 Share जरूर करें ‼️...
उत्तर कुंजी सहित
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पंच गौरव नई सूची 🔥
✓ एक जिला एक खेल
✓ एक जिला एक उपज
✓ एक जिला एक वनस्पति
✓ एक जिला एक उत्पाद
✓ एक जिला एक पर्यटन
यहां से आगामी सभी परीक्षाओं में प्रश्न पूछे जाएंगे इनका अच्छे से तैयार कर लीजिए।
✓ एक जिला एक खेल
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✓ एक जिला एक उत्पाद
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यहां से आगामी सभी परीक्षाओं में प्रश्न पूछे जाएंगे इनका अच्छे से तैयार कर लीजिए।
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मारवाड़ स्कूल :- जोधपुर शैली, बीकानेर शैली,जैसलमेर शैली:_ किशनगढ़ शैली, नागौर शैली, पाली (घाणेराव), अजमेर, सिरोही शैली व उपशैलियों से संबंधित है।
ढूँढाड़ स्कूल :- आमेर शैली, जयपुर शैली, शेखावाटी शैली, अलवर शैली, उनियारा, करौली, झिलाय शैलियों और उपशैलियों से सम्बन्धित है।
हाड़ौती स्कूल :- बूँदी, कोटा, झालावाड़ शैलियों व उपशैलियों से संबंधित ।
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ढूँढाड़ स्कूल :- आमेर शैली, जयपुर शैली, शेखावाटी शैली, अलवर शैली, उनियारा, करौली, झिलाय शैलियों और उपशैलियों से सम्बन्धित है।
हाड़ौती स्कूल :- बूँदी, कोटा, झालावाड़ शैलियों व उपशैलियों से संबंधित ।
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जसनाथी संप्रदाय की प्रमुख गद्दी कतरियासर (बीकानेर) में है।
जसनाथजी के समाधिस्थ होने के बाद उनके प्रमुख शिष्य जागोजी इस गद्दी पर बैठे। इसी तरह जसनाथजी के अन्य प्रमुख शिष्यों में से हारोजी ने बमलू में, हांसोजी ने लिखमादेसर में, पालोजी ने पुनरासर में, टोडरजी ने मालासर (सभी बीकानेर में स्थित हैं) में तथा बोयतजी ने पांचला सिद्धा (नागौर) में अपने स्थान (पीठ) स्थापित किये, जो इस संप्रदाय की उप-पीठें कहलाती हैं। जो इन स्थानों की गादी पर बैठते हैं वे सिद्ध कहलाते हैं ❤️👍🏼
जसनाथजी के समाधिस्थ होने के बाद उनके प्रमुख शिष्य जागोजी इस गद्दी पर बैठे। इसी तरह जसनाथजी के अन्य प्रमुख शिष्यों में से हारोजी ने बमलू में, हांसोजी ने लिखमादेसर में, पालोजी ने पुनरासर में, टोडरजी ने मालासर (सभी बीकानेर में स्थित हैं) में तथा बोयतजी ने पांचला सिद्धा (नागौर) में अपने स्थान (पीठ) स्थापित किये, जो इस संप्रदाय की उप-पीठें कहलाती हैं। जो इन स्थानों की गादी पर बैठते हैं वे सिद्ध कहलाते हैं ❤️👍🏼
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बागौर से चीतल, सांभर, चिंकारा आदि हिरणों, खरगोश, लोमड़ी, भेड़-बकरी, सुअर, गाय-बैल तथा भैंस आदि पशुओं की हड्डियाँ मिली है। इनमें से जंगली तथा पालतू दोनों ही प्रकार के पशुओं की हड्डियाँ मिली
नेवला, कछुआ तथा मछली की हड्डियों के अवशेष भी प्राप्त हुए हैं। इस प्रकार लोगों का आर्थिक जीवन जंगली पशुओं के शिकार तथा पशु-पालन पर आधारित प्रतीत होता है। लोग रहने के लिए जो झोपड़ियाँ बनाते थे उनके फर्श का निर्माण पत्थर के छोटे-छोटे टुकड़ों से करते थे। इस उपकाल से एक मानव-कंकाल प्राप्त हुआ है। जिसे पश्चिम-पूर्व दिशा में, सिर पश्चिम की ओर करके, तिच लिटा कर आवास-क्षेत्र के अन्दर ही दफनाया गया था। यह कंकाल 17-19 वर्ष की वयस्क आयु वाली महिला का है।❤️☘
नेवला, कछुआ तथा मछली की हड्डियों के अवशेष भी प्राप्त हुए हैं। इस प्रकार लोगों का आर्थिक जीवन जंगली पशुओं के शिकार तथा पशु-पालन पर आधारित प्रतीत होता है। लोग रहने के लिए जो झोपड़ियाँ बनाते थे उनके फर्श का निर्माण पत्थर के छोटे-छोटे टुकड़ों से करते थे। इस उपकाल से एक मानव-कंकाल प्राप्त हुआ है। जिसे पश्चिम-पूर्व दिशा में, सिर पश्चिम की ओर करके, तिच लिटा कर आवास-क्षेत्र के अन्दर ही दफनाया गया था। यह कंकाल 17-19 वर्ष की वयस्क आयु वाली महिला का है।❤️☘
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