Forwarded from "जिंदगी सफल शायरी ✒️💖🗒" (𝀈𝐍𝐚ȥ𝐚꧊ꝛ 🧿°)
" सुंदरता आकर्षण का कारण हो सकती है परंतु ,
प्रेम व्यवहार से जन्म लेता है.!✨🦢
प्रेम व्यवहार से जन्म लेता है.!✨🦢
♥️
❤3👍1
𓂃
🌿 घर केवल दीवारों से नहीं, व्यवहारों से बसते हैं 🌿
कभी किसी घर के आँगन को ध्यान से देखिए— वहाँ टूटे हुए सपनों की आवाज़ें नहीं गूँजतीं, वहाँ तो बस कुछ अनकहे शब्द, कुछ अधूरी अपेक्षाएँ, और कुछ कठोर वाक्य धीरे-धीरे रिश्तों की जड़ों को खोखला करते रहते हैं।
बेटे-बेटियाँ घर इसलिए नहीं छोड़ते कि उन्हें वह छत छोटी लगती है, वे तब दूर हो जाते हैं जब उनके प्रयासों से अधिक उनकी असफलताओं की चर्चा होने लगती है।
🌾 मनुष्य रोटी की कमी से उतना नहीं टूटता, जितना सम्मान की कमी से टूट जाता है।
जिस घर में हर दिन तुलना हो, जहाँ प्रेम से अधिक ताने मिलें, जहाँ सुनने से पहले निर्णय सुना दिया जाए, वहाँ मौन भी धीरे-धीरे प्रवास पर निकल जाता है।
स्मरण रखिए—
कटु शब्दों की आयु बहुत लंबी होती है। वे बोले तो एक क्षण में जाते हैं, किन्तु सुनने वाले के हृदय में वर्षों तक प्रतिध्वनित होते रहते हैं।
घर का वातावरण ऐसा बनाइए कि लौटते समय किसी को भय न लगे, अपितु प्रतीक्षा हो।
ऐसा घर ही वास्तविक आश्रय कहलाता है, जहाँ व्यक्ति अपनी हार लेकर भी आए तो उसे उपहास नहीं, अपनापन मिले। 🌼
क्योंकि संसार की भीड़ में हर कोई सफल होने का अभिनय कर सकता है, पर अपने घर में वह केवल प्रेम चाहता है।
✨ ताने कभी किसी का भविष्य नहीं सँवारते, किन्तु विश्वास कई बार असम्भव को भी सम्भव बना देता है।
इसलिए शब्दों को थोड़ा कोमल रखिए, स्वर को थोड़ा मधुर, और संबंधों को थोड़ा अधिक मान दीजिए।
हो सकता है, आपकी एक स्नेहिल पंक्ति किसी अपने को बिखरने से बचा ले...! 🍂
✍️ @Komal_Rajput_95
शब्दों में संवेदना, विचारों में साहित्य 🌿📖
🌿 घर केवल दीवारों से नहीं, व्यवहारों से बसते हैं 🌿
कभी किसी घर के आँगन को ध्यान से देखिए— वहाँ टूटे हुए सपनों की आवाज़ें नहीं गूँजतीं, वहाँ तो बस कुछ अनकहे शब्द, कुछ अधूरी अपेक्षाएँ, और कुछ कठोर वाक्य धीरे-धीरे रिश्तों की जड़ों को खोखला करते रहते हैं।
बेटे-बेटियाँ घर इसलिए नहीं छोड़ते कि उन्हें वह छत छोटी लगती है, वे तब दूर हो जाते हैं जब उनके प्रयासों से अधिक उनकी असफलताओं की चर्चा होने लगती है।
🌾 मनुष्य रोटी की कमी से उतना नहीं टूटता, जितना सम्मान की कमी से टूट जाता है।
जिस घर में हर दिन तुलना हो, जहाँ प्रेम से अधिक ताने मिलें, जहाँ सुनने से पहले निर्णय सुना दिया जाए, वहाँ मौन भी धीरे-धीरे प्रवास पर निकल जाता है।
स्मरण रखिए—
कटु शब्दों की आयु बहुत लंबी होती है। वे बोले तो एक क्षण में जाते हैं, किन्तु सुनने वाले के हृदय में वर्षों तक प्रतिध्वनित होते रहते हैं।
घर का वातावरण ऐसा बनाइए कि लौटते समय किसी को भय न लगे, अपितु प्रतीक्षा हो।
ऐसा घर ही वास्तविक आश्रय कहलाता है, जहाँ व्यक्ति अपनी हार लेकर भी आए तो उसे उपहास नहीं, अपनापन मिले। 🌼
क्योंकि संसार की भीड़ में हर कोई सफल होने का अभिनय कर सकता है, पर अपने घर में वह केवल प्रेम चाहता है।
✨ ताने कभी किसी का भविष्य नहीं सँवारते, किन्तु विश्वास कई बार असम्भव को भी सम्भव बना देता है।
इसलिए शब्दों को थोड़ा कोमल रखिए, स्वर को थोड़ा मधुर, और संबंधों को थोड़ा अधिक मान दीजिए।
हो सकता है, आपकी एक स्नेहिल पंक्ति किसी अपने को बिखरने से बचा ले...! 🍂
✍️ @Komal_Rajput_95
शब्दों में संवेदना, विचारों में साहित्य 🌿📖
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𓂃
"जैसी करनी वैसी भरनी, यह सृष्टि का सार,
कर्म लौट कर आएगा, बनकर तेरा हार।
मन में रख विश्वास तू, मत कर कोई त्रास,
अच्छे कर्मों से खिले, जीवन में मधुमास।" 🌸
@Komal_Rajput_95 ✍🏻
"जैसी करनी वैसी भरनी, यह सृष्टि का सार,
कर्म लौट कर आएगा, बनकर तेरा हार।
मन में रख विश्वास तू, मत कर कोई त्रास,
अच्छे कर्मों से खिले, जीवन में मधुमास।" 🌸
@Komal_Rajput_95 ✍🏻
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Forwarded from "जिंदगी सफल शायरी ✒️💖🗒" (⸺꯭⃛𓆩⃝⃨⃡🇰꯭᪳❍𝙼፝֟፝֟𝙰𝐋꯭𝆺꯭𝅥𝄄♥️꯭꯭𝄄 ༎꯭꯭꯭࿐)
चेहरा समय के साथ बदल जाता है,
पर चरित्र ही वह दर्पण है, जिसमें मनुष्य जीवन भर दिखाई देता है..!!
पर चरित्र ही वह दर्पण है, जिसमें मनुष्य जीवन भर दिखाई देता है..!!
🤍
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Forwarded from "जिंदगी सफल शायरी ✒️💖🗒" (✨😊Dëstîñy😊)
एक कांच का जंगल है शहर
शहर जिसमें बसा है जानवर
जो दिखता है इंसान जैसा
पर उसमें रहता है एक हैवान
ये जंगल है तिलिस्म से भरा
इसमें चांद से रौशन है स्ट्रीट लाइट
इसकी नसें हैं ये अनगिनत सड़कें
जिनकी धड़कनें हैं भागतीं मेट्रो
यहां नहीं रहती है कोई कोयल
यहां रहता है शोर, लोगों का
यहां नहीं बसता है आसमान
यहां बसती है धूंध, फैक्ट्रियों की
यहां उड़ती हुई रेत ही है समय
चार दीवारी ही है सारे मौसम
और सबसे जरूरी बात है कि,
यहां सिर्फ फोन ही है इंसान
यहां कृत्रिम पेड़ है हरियाली
व बदहवास सी है जिंदगानी
यहां शिकार हंस हंसकर
सौंपते हैं अपना मांस शिकारी को
ये कांच का जंगल सजा है
बड़ी बड़ी सुसज्जित इमारतों से
जिनमें उलझकर मरता है इंसान
जैसे मरती है अनगिनत मकड़ियां
#Bhagyashree
18 feb 2026
शहर जिसमें बसा है जानवर
जो दिखता है इंसान जैसा
पर उसमें रहता है एक हैवान
ये जंगल है तिलिस्म से भरा
इसमें चांद से रौशन है स्ट्रीट लाइट
इसकी नसें हैं ये अनगिनत सड़कें
जिनकी धड़कनें हैं भागतीं मेट्रो
यहां नहीं रहती है कोई कोयल
यहां रहता है शोर, लोगों का
यहां नहीं बसता है आसमान
यहां बसती है धूंध, फैक्ट्रियों की
यहां उड़ती हुई रेत ही है समय
चार दीवारी ही है सारे मौसम
और सबसे जरूरी बात है कि,
यहां सिर्फ फोन ही है इंसान
यहां कृत्रिम पेड़ है हरियाली
व बदहवास सी है जिंदगानी
यहां शिकार हंस हंसकर
सौंपते हैं अपना मांस शिकारी को
ये कांच का जंगल सजा है
बड़ी बड़ी सुसज्जित इमारतों से
जिनमें उलझकर मरता है इंसान
जैसे मरती है अनगिनत मकड़ियां
#Bhagyashree
18 feb 2026
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𓂃
🌺 हसरत का विषवृक्ष 🌺
हसरत सचमुच बड़ी विचित्र वस्तु है।
किसी की आँखों में अपना नाम खोजते-खोजते, मन यह भूल जाता है कि प्रेम अधिकार नहीं, स्वीकार का दूसरा नाम है।
कितना अद्भुत है यह संसार— कोई किसी को पाने की कामना में रातों की निद्रा खो देता है, और वही व्यक्ति किसी और की स्मृतियों का दीपक जलाए बैठा होता है।
हम जीवन भर यह सीखने में देर कर देते हैं कि हर प्रिय वस्तु हमारी नहीं होती, और हर अनुपलब्धता दुर्भाग्य नहीं होती।
कुछ लोग मिलते हैं सिर्फ यह सिखाने के लिए कि स्नेह का अर्थ बंधन नहीं, बल्कि किसी की प्रसन्नता में अपनी हार को भी स्वीकार कर लेना है।
जिसे पाने की अभिलाषा थी, यदि वह किसी और के सुख का कारण बन जाए, तो वहाँ ईर्ष्या नहीं, प्रार्थना जन्म लेनी चाहिए। 🌿
क्योंकि प्रेम का सबसे ऊँचा सोपान मिलन नहीं होता, बल्कि वह अवस्था होती है जहाँ हृदय टूटकर भी किसी के लिए मंगलकामना करता है।
और तब समझ आता है कि—
हसरतें अधूरी रहकर भी मनुष्य को पूर्ण बना देती हैं, क्योंकि वे सिखाती हैं कि हर चाहत का अंत प्राप्ति नहीं, कभी-कभी परिपक्वता भी होता है। ✨
🌺 हसरत का विषवृक्ष 🌺
हसरत सचमुच बड़ी विचित्र वस्तु है।
किसी की आँखों में अपना नाम खोजते-खोजते, मन यह भूल जाता है कि प्रेम अधिकार नहीं, स्वीकार का दूसरा नाम है।
कितना अद्भुत है यह संसार— कोई किसी को पाने की कामना में रातों की निद्रा खो देता है, और वही व्यक्ति किसी और की स्मृतियों का दीपक जलाए बैठा होता है।
हम जीवन भर यह सीखने में देर कर देते हैं कि हर प्रिय वस्तु हमारी नहीं होती, और हर अनुपलब्धता दुर्भाग्य नहीं होती।
कुछ लोग मिलते हैं सिर्फ यह सिखाने के लिए कि स्नेह का अर्थ बंधन नहीं, बल्कि किसी की प्रसन्नता में अपनी हार को भी स्वीकार कर लेना है।
जिसे पाने की अभिलाषा थी, यदि वह किसी और के सुख का कारण बन जाए, तो वहाँ ईर्ष्या नहीं, प्रार्थना जन्म लेनी चाहिए। 🌿
क्योंकि प्रेम का सबसे ऊँचा सोपान मिलन नहीं होता, बल्कि वह अवस्था होती है जहाँ हृदय टूटकर भी किसी के लिए मंगलकामना करता है।
और तब समझ आता है कि—
हसरतें अधूरी रहकर भी मनुष्य को पूर्ण बना देती हैं, क्योंकि वे सिखाती हैं कि हर चाहत का अंत प्राप्ति नहीं, कभी-कभी परिपक्वता भी होता है। ✨
@Komal_Rajput_95 🌷
साहित्यिक लेखिका ✍🏻
❤2👍1
Forwarded from "जिंदगी सफल शायरी ✒️💖🗒"
✓®
रोटी पर घी और
नाम के साथ जी
लगाने से,
स्वाद और इज्जत
दोनों बढ. जाते हैं
इंसान जन्म के दो वर्ष बाद
बोलना सीख जाता है.
पर बोलना क्या है
ये सीखने में पूरा जन्म लग जाता..!!
~ yadavramonu
❤1
Forwarded from "जिंदगी सफल शायरी ✒️💖🗒" (𝁈𝚨𝛂𝛅݂ᖾ𝛊ᴋ𝛂 >! 🧿)
किसी के चरित्र पर ऊंगली उठाने से पहले याद रखे ,
सवाल आपके किरदार पर भी उठाया जाएगा !!♥️
सवाल आपके किरदार पर भी उठाया जाएगा !!♥️
❤️🩹🌙
Forwarded from "जिंदगी सफल शायरी ✒️💖🗒" (✨✨नमामि_देवी_मां_नर्मदे✨✨)
"जमाना बड़ा ख़राब है "
सावधान रहना..
किसी पर भरोसा मत करना!
कितना दर्दनाक है यह कहना
उन मासूम बच्चों से..
जिनकी कोमल दुनिया में
अब तक
सिर्फ अच्छाई और करिश्मा हैं
तथा हर चेहरा एक भरोसा है
#Bhagyashree
24 feb 2026
सावधान रहना..
किसी पर भरोसा मत करना!
कितना दर्दनाक है यह कहना
उन मासूम बच्चों से..
जिनकी कोमल दुनिया में
अब तक
सिर्फ अच्छाई और करिश्मा हैं
तथा हर चेहरा एक भरोसा है
#Bhagyashree
24 feb 2026
👍1
Forwarded from "जिंदगी सफल शायरी ✒️💖🗒" (✨✨नमामि_देवी_मां_नर्मदे✨✨)
अनन्त सागर किनारे
मर गई एक मछली।।
सागर चाहता तो बचा सकता था,
मछली को..पर बचा ना पाया।
मछली चाहती तो कूद सकती थी,
सागर में.. किंतु कूद ना सकी।।
अंत में,
मछली ने दोष दिया किस्मत को,
और सागर ने..... क्रूर ईश्वर को।।
किंतु,
किस्मत और ईश्वर के मध्य,
दोनों ने ध्यान ही नहीं दिया..
अपने कर्मों पर।।
#Bhagyashree
18 april 2026
मर गई एक मछली।।
सागर चाहता तो बचा सकता था,
मछली को..पर बचा ना पाया।
मछली चाहती तो कूद सकती थी,
सागर में.. किंतु कूद ना सकी।।
अंत में,
मछली ने दोष दिया किस्मत को,
और सागर ने..... क्रूर ईश्वर को।।
किंतु,
किस्मत और ईश्वर के मध्य,
दोनों ने ध्यान ही नहीं दिया..
अपने कर्मों पर।।
#Bhagyashree
18 april 2026
❤1👍1
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❤1
Forwarded from "जिंदगी सफल शायरी ✒️💖🗒" (NiTiN 🤍)
जिसपर आपका अधिकार ही न हो
उसका मोह करना मानसिक पीड़ा को न्योता देना हैं..
उसका मोह करना मानसिक पीड़ा को न्योता देना हैं..
💯🍂
👍2
🌿 पुस्तकों का यात्री 🌿
कुछ लोग जीवन को जीते हैं,
और कुछ लोग उसे पढ़ते हैं।
पर विरले ही ऐसे होते हैं
जो पढ़ते-पढ़ते स्वयं जीवन का एक अध्याय बन जाते हैं।
वे शब्दों को केवल देखते नहीं, उनमें निवास करते हैं। पंक्तियों के बीच छूटे मौन को सुनते हैं, और उन प्रश्नों का पीछा करते हैं जिनका उत्तर किसी पुस्तक के अंतिम पृष्ठ पर भी नहीं मिलता।
🍂
ज्ञान उनके लिए संग्रह नहीं होता, एक निरंतर यात्रा होता है।
वे जितना पढ़ते हैं, उतना ही अपनी अज्ञानता के विस्तार को पहचानते हैं।
इसी कारण उनके भीतर विनम्रता और बेचैनी साथ-साथ जन्म लेती हैं।
जिस मन ने हजारों ग्रंथ पढ़े हों, वह जानता है कि सत्य किसी एक पुस्तक का नहीं होता।
🌙
कभी-कभी ऐसे लोग संसार को विचित्र प्रतीत होते हैं।
वे भीड़ के उत्सवों में नहीं, एकांत की दीपशिखा में आनंद खोजते हैं।
उनकी सबसे प्रिय संगति अक्सर किसी कवि की पंक्तियाँ होती हैं, किसी दार्शनिक का प्रश्न, या किसी अनजान लेखक का वह विचार जो उनके अंतर्मन में वर्षों तक गूँजता रहता है।
✨
परंतु पढ़ना केवल ज्ञान अर्जित करना नहीं है।
पढ़ना स्वयं को विस्तृत करना है।
एक पुस्तक हमें अपने जीवन से बाहर निकालकर असंख्य जीवनों का अनुभव करा देती है।
और जो मनुष्य सचमुच पढ़ना सीख लेता है, वह धीरे-धीरे मनुष्यों को भी पढ़ना सीख जाता है।
🪷
इस संसार में सबसे समृद्ध व्यक्ति वह नहीं, जिसके पास सबसे अधिक धन हो;
समृद्ध तो वह है, जिसके भीतर अनुभवों, विचारों और संवेदनाओं का एक विराट लोक बसता हो।
क्योंकि अंततः पुस्तकें हमें उत्तर नहीं देतीं,
वे हमें इतना गहरा बना देती हैं कि हम अपने उत्तर स्वयं खोज सकें।
🤍
ग्रंथों का वास्तविक चमत्कार यह नहीं कि वे हमें ज्ञान देते हैं,
बल्कि यह है कि वे हमें अपने ही भीतर एक नया आकाश खोजने की दृष्टि देते हैं।
कुछ लोग जीवन को जीते हैं,
और कुछ लोग उसे पढ़ते हैं।
पर विरले ही ऐसे होते हैं
जो पढ़ते-पढ़ते स्वयं जीवन का एक अध्याय बन जाते हैं।
वे शब्दों को केवल देखते नहीं, उनमें निवास करते हैं। पंक्तियों के बीच छूटे मौन को सुनते हैं, और उन प्रश्नों का पीछा करते हैं जिनका उत्तर किसी पुस्तक के अंतिम पृष्ठ पर भी नहीं मिलता।
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ज्ञान उनके लिए संग्रह नहीं होता, एक निरंतर यात्रा होता है।
वे जितना पढ़ते हैं, उतना ही अपनी अज्ञानता के विस्तार को पहचानते हैं।
इसी कारण उनके भीतर विनम्रता और बेचैनी साथ-साथ जन्म लेती हैं।
जिस मन ने हजारों ग्रंथ पढ़े हों, वह जानता है कि सत्य किसी एक पुस्तक का नहीं होता।
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कभी-कभी ऐसे लोग संसार को विचित्र प्रतीत होते हैं।
वे भीड़ के उत्सवों में नहीं, एकांत की दीपशिखा में आनंद खोजते हैं।
उनकी सबसे प्रिय संगति अक्सर किसी कवि की पंक्तियाँ होती हैं, किसी दार्शनिक का प्रश्न, या किसी अनजान लेखक का वह विचार जो उनके अंतर्मन में वर्षों तक गूँजता रहता है।
✨
परंतु पढ़ना केवल ज्ञान अर्जित करना नहीं है।
पढ़ना स्वयं को विस्तृत करना है।
एक पुस्तक हमें अपने जीवन से बाहर निकालकर असंख्य जीवनों का अनुभव करा देती है।
और जो मनुष्य सचमुच पढ़ना सीख लेता है, वह धीरे-धीरे मनुष्यों को भी पढ़ना सीख जाता है।
🪷
इस संसार में सबसे समृद्ध व्यक्ति वह नहीं, जिसके पास सबसे अधिक धन हो;
समृद्ध तो वह है, जिसके भीतर अनुभवों, विचारों और संवेदनाओं का एक विराट लोक बसता हो।
क्योंकि अंततः पुस्तकें हमें उत्तर नहीं देतीं,
वे हमें इतना गहरा बना देती हैं कि हम अपने उत्तर स्वयं खोज सकें।
🤍
ग्रंथों का वास्तविक चमत्कार यह नहीं कि वे हमें ज्ञान देते हैं,
बल्कि यह है कि वे हमें अपने ही भीतर एक नया आकाश खोजने की दृष्टि देते हैं।
🪶 𝐊𝐨𝐦𝐚𝐥 𝐑𝐚𝐣𝐩𝐮𝐭
साहित्यिक लेखिका ✨🌸
❤2
Forwarded from "जिंदगी सफल शायरी ✒️💖🗒" (✨😊Dëstîñy😊)
एक कलम,
एक किताब,
एक तिरंगा,
एक फूल लेकर निकले थे वो,
बस एक सवाल लेकर...
एक जवाब की आस में...
मगर,
सरकार, आपने
जवाब की जगह दिए
अनगिनत घाव,
लाठियों की मार,
अनगिनत आँसू,
और साथ में
'देशद्रोही' की उपाधि।
सरकार, अब आप ही बताइए,
क्या यही आज़ादी है?
क्या यही लोकतंत्र है?
अरे, सच तो यह है, सरकार,
आप खुद ही देशद्रोही है..
#Bhagyashree
21 July 2026
एक किताब,
एक तिरंगा,
एक फूल लेकर निकले थे वो,
बस एक सवाल लेकर...
एक जवाब की आस में...
मगर,
सरकार, आपने
जवाब की जगह दिए
अनगिनत घाव,
लाठियों की मार,
अनगिनत आँसू,
और साथ में
'देशद्रोही' की उपाधि।
सरकार, अब आप ही बताइए,
क्या यही आज़ादी है?
क्या यही लोकतंत्र है?
अरे, सच तो यह है, सरकार,
आप खुद ही देशद्रोही है..
#Bhagyashree
21 July 2026
👍4❤1
मेरे भीतर कोई युद्ध नहीं,
फिर भी प्रतिदिन एक संघर्ष चलता है..!!
एक मन कहता है— दुनिया को वैसे देखो जैसी वह है,
दूसरा मन कहता है— उसे वैसा देखने का साहस रखो जैसी वह हो सकती है।
🌿
कभी मैं अनुभवों की मनुष्य होती हूँ, कभी आकांक्षाओं की।
एक भाग बीते हुए समय की राख समेटता है,
और दूसरा उसी राख में नए स्वप्नों की चिनगारी खोजता है।
🍂
विचित्र है मनुष्य का अंतर्मन—
वह एक शरीर में निवास करता है, किन्तु उसके भीतर असंख्य दिशाएँ चलती रहती हैं।
एक दिशा उसे सुरक्षित रखती है, दूसरी उसे मुक्त करना चाहती है।
एक उसे सीमाओं का स्मरण कराती है, दूसरी आकाश का।
🪷
बहुत समय तक मुझे लगा कि इनमें से कोई एक ही सत्य होगा,
परंतु जीवन ने सिखाया—
सत्य अक्सर दो विरोधी ध्रुवों के बीच
मौन खड़ा रहता है।
न पूरी सहमति में, न पूर्ण असहमति में।
✨
जो केवल अपने पक्ष को सुनता है, वह विचारवान नहीं हो सकता।
और जो स्वयं के भीतर उठते विरोधी स्वरों को भी सुन सके,
वही धीरे-धीरे समझ की दहलीज़ तक पहुँचता है।
🌙
अब मैं स्वयं को एक व्यक्ति नहीं मानती।
मैं प्रश्न भी हूँ, उत्तर भी।
मैं पथिक भी हूँ, पथ भी।
मैं घाव भी हूँ, और उपचार की संभावना भी।
🤍
शायद परिपक्वता का अर्थ
हर विवाद में विजयी होना नहीं,
बल्कि अपने भीतर बैठे भिन्न-भिन्न मनुष्यों को
एक-दूसरे की बात सुनना सिखा देना है..!!
🕊️
मनुष्य की सबसे बड़ी साधना
स्वयं को सिद्ध करना नहीं,
स्वयं को समझना है।
फिर भी प्रतिदिन एक संघर्ष चलता है..!!
एक मन कहता है— दुनिया को वैसे देखो जैसी वह है,
दूसरा मन कहता है— उसे वैसा देखने का साहस रखो जैसी वह हो सकती है।
🌿
कभी मैं अनुभवों की मनुष्य होती हूँ, कभी आकांक्षाओं की।
एक भाग बीते हुए समय की राख समेटता है,
और दूसरा उसी राख में नए स्वप्नों की चिनगारी खोजता है।
🍂
विचित्र है मनुष्य का अंतर्मन—
वह एक शरीर में निवास करता है, किन्तु उसके भीतर असंख्य दिशाएँ चलती रहती हैं।
एक दिशा उसे सुरक्षित रखती है, दूसरी उसे मुक्त करना चाहती है।
एक उसे सीमाओं का स्मरण कराती है, दूसरी आकाश का।
🪷
बहुत समय तक मुझे लगा कि इनमें से कोई एक ही सत्य होगा,
परंतु जीवन ने सिखाया—
सत्य अक्सर दो विरोधी ध्रुवों के बीच
मौन खड़ा रहता है।
न पूरी सहमति में, न पूर्ण असहमति में।
✨
जो केवल अपने पक्ष को सुनता है, वह विचारवान नहीं हो सकता।
और जो स्वयं के भीतर उठते विरोधी स्वरों को भी सुन सके,
वही धीरे-धीरे समझ की दहलीज़ तक पहुँचता है।
🌙
अब मैं स्वयं को एक व्यक्ति नहीं मानती।
मैं प्रश्न भी हूँ, उत्तर भी।
मैं पथिक भी हूँ, पथ भी।
मैं घाव भी हूँ, और उपचार की संभावना भी।
🤍
शायद परिपक्वता का अर्थ
हर विवाद में विजयी होना नहीं,
बल्कि अपने भीतर बैठे भिन्न-भिन्न मनुष्यों को
एक-दूसरे की बात सुनना सिखा देना है..!!
🕊️
मनुष्य की सबसे बड़ी साधना
स्वयं को सिद्ध करना नहीं,
स्वयं को समझना है।
@Komal_Rajput_95 🌷
साहित्यिक लेखिका ✍️🌸
❤4👍1
Forwarded from "जिंदगी सफल शायरी ✒️💖🗒" (✨😊Dëstîñy😊)
तुम सत्ता के मद में बैठे हुए
हमको आँख दिखाते हो,
हमारे सामने शीश झुकाकर
हमको ही मरवाते हो।
तुम कहते हो हमको
हम देशद्रोही,
और आतंकवादी हैं...
हम वंदे मातरम् गाते हैं,
तुम बंदूक चलाते हो।
हम फूल तुम्हें पकड़ाते हैं,
तुम लाठियाँ बरसाते हो।
हम उठाते संविधान को,
तुम हमसे डरते जाते हो।
और तुम्हारी हकीकत इतनी-सी है...
अपराधियों को संसद में बैठाकर,
निर्दोषों पर आरोप लगाते हो।
मीडिया को खरीदकर,
दोस्तों को देश बेचते जाते हो।
इंकलाब को देशद्रोह बताते हो,
और शिक्षकों के सम्मान को
दो कौड़ी का बताते हो।
शर्म करो, अब तो सत्ताधारी,
क्यों सत्ता के मद में चूर बैठे हो?
लोकतंत्र के स्तंभों को तोड़कर,
हमको कॉकरोच बताते हो।
पर याद रखो,
सत्ता का लोभ धृतराष्ट्र बनाता है,
और हर युग में, कोई आए न आए,
एक कृष्ण ज़रूर आता है।
आज सड़कों पर लाखों कृष्ण हैं,
तुम कैसे इनसे बच पाओगे?
जिनके नाम से सत्ता में आए थे,
अब उनसे कैसे लड़ पाओगे?
#Bhagyashree
23 july 2026
हमको आँख दिखाते हो,
हमारे सामने शीश झुकाकर
हमको ही मरवाते हो।
तुम कहते हो हमको
हम देशद्रोही,
और आतंकवादी हैं...
हम वंदे मातरम् गाते हैं,
तुम बंदूक चलाते हो।
हम फूल तुम्हें पकड़ाते हैं,
तुम लाठियाँ बरसाते हो।
हम उठाते संविधान को,
तुम हमसे डरते जाते हो।
और तुम्हारी हकीकत इतनी-सी है...
अपराधियों को संसद में बैठाकर,
निर्दोषों पर आरोप लगाते हो।
मीडिया को खरीदकर,
दोस्तों को देश बेचते जाते हो।
इंकलाब को देशद्रोह बताते हो,
और शिक्षकों के सम्मान को
दो कौड़ी का बताते हो।
शर्म करो, अब तो सत्ताधारी,
क्यों सत्ता के मद में चूर बैठे हो?
लोकतंत्र के स्तंभों को तोड़कर,
हमको कॉकरोच बताते हो।
पर याद रखो,
सत्ता का लोभ धृतराष्ट्र बनाता है,
और हर युग में, कोई आए न आए,
एक कृष्ण ज़रूर आता है।
आज सड़कों पर लाखों कृष्ण हैं,
तुम कैसे इनसे बच पाओगे?
जिनके नाम से सत्ता में आए थे,
अब उनसे कैसे लड़ पाओगे?
#Bhagyashree
23 july 2026
❤3😁1
Forwarded from "जिंदगी सफल शायरी ✒️💖🗒" (✨😊Dëstîñy😊)
Women strength 🫡
प्रेम ने उन्हें सुंदर बनाया,
संघर्ष ने उन्हें अद्भुत बनाया,
और क्रांति ने उन्हें अमर बना दिया।
#Bhagyashree
24 July 2026
❤3
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