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परीक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण 09 मई, 2019 के
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09 मई, 2019 अंग्रेजी भाषा के प्रमुख समाचार पत्रों में
प्रकाशित महत्वपूर्ण खबरों का हिन्दी भाषा में
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शब्द शिल्प शृंखला-73

"लकीर के इधर..."

एकाएक एक दिन अपने काम पर ईमानदारी से लग जाओ। एक लकीर खींच कर लकीर के इधर आ जाओ। लकीर के उधर की जिंदगी आपका सही ठौर-ठिकाना नहीं था। लकीर के इधर की जिंदगी आपके लिए अच्छी और अलग क्यों है?

इसलिए क्योंकि अब आप कोई मकसद को लेकर जी रहे है। अब आप रोंगटे खड़े कर देने वाली कल्पनाओं को साकार करने के लिए जी रहे है। अपने काम में मिलने वाली खुशी अब आपके लिए संजीवनी है। लकीर के इधर की जिन्दगी में मोहलत तो मिलती ही नहीं है। आप अपने पहरेदार खुद है 24 घण्टों के लिए। अपनी छोटी छोटी उपलब्धियों को छोटा मत मानो। ये छोटी छोटी उपलब्धियां हमारे पांवों के नीचे ठुकी-कुटी ठोस जमीन है। कुछ फितूर दबे पांव तो कुछ दबंग तरीके से आकर आपमें चिड़चिड़ाहट उत्पन्न करेंगे। ऐसे में किसी नकारात्मक झुँझलाहट से बचना है तो आज अपने काम में एक घंटा पसीना ज्यादा बहा देना। फ़ितूरों को हावी होने का मौका मिलेगा ही नहीं।आरामतलबी तभी अच्छी है जब जिंदगी खुद ही परिश्रम से क्लान्त होकर कलमलाती हुई बिस्तर पर गिरना चाहे। जुगाड़ से भी जिंदगी चल तो जाती है लेकिन जुगाड़ वाली जिन्दगी कुछ घंटों बाद ही मूल मार्ग से भटक जाती है।

लकीर के उधर वाली जिंदगी बिना बीमारी के पकड़ा हुआ बिस्तर है। ना कोई चाह, ना कोई राह। केवल आह ही आह दर्द भरी। हे जगन्नियंता! जिसमें मेरा स्वाभिमान, आत्मविश्वास और अनुभव समृद्ध हो, ऐसा कठोर परिश्रम देना। जिसमें ये तीनों तिल तिल कर मर जाये ऐसा आराम कभी मत देना।

शब्द शिल्प:

डॉ अर्जुन सिंह साँखला
प्राचार्य, लक्की इन्सटिट्यूट अॉफ प्रोफेशनल स्टडीज, जोधपुर।
परीक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण 10 मई, 2019 के
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10 मई, 2019 अंग्रेजी भाषा के प्रमुख समाचार पत्रों में
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परीक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण 11 मई, 2019 के
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11 मई, 2019 अंग्रेजी भाषा के प्रमुख समाचार पत्रों में
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May 12th, 2019
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परीक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण 12 मई, 2019 के
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शब्द शिल्प शृंखला-74

"एक मशविरा चाहता हूँ..."

क्या ऐसे आसमाँ में जाना ठीक है जहाँ से हमें हमारी धरती छोटी नज़र आये?

इंकलाब खून से जिंदाबाद रहेगा या स्याही से?

हज़ारों सितारों को देखने की प्यास के लिए रात तक का इंतजार करूं या एक ओजस्वी सूर्य से वो प्यास बुझा लूं?

चेहरे की संसारी आभा निखारने के लिए चेहरे पर पसीना लाऊँ या सुखाऊँ?

दुनिया को जीतने के लिए लोगों के दिलों में बस जाऊं या उन्हें मेरे दिल में बसाऊँ?

मैनें अपने आप को पूर्णतया जीत लिया है तो क्या और भी जीतना संसार में बचा है क्या?

रंजिशें दिलों में पनपती है या मस्तिष्क में?

आँखों में आंसुओं के आने से मन हल्का होता है या भारी?

क्या आप कोई सपने को जी रहे है या खून के आँसू पी रहे है?

अभी आप इस बात को पढ़ रहे है या यूं ही आगे बढ़ रहे है?

जीवन में गंभीरता से आगे बढ़ो। यूँ ही आगे बढ़ रहे हो तो आपकी बड़ी से बड़ी उपलब्धि आपकी वृद्धावस्था 'पेंशन' होगी। गंभीरता से आगे बढ़ोगे तो हर कदम पर आपको सम्मान देने वालों की 'अटेंशन' होगी।

शब्द शिल्प:

डॉ अर्जुन सिंह साँखला
प्राचार्य, लक्की इन्सटिट्यूट अॉफ प्रोफेशनल स्टडीज, जोधपुर।
परीक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण 13 मई, 2019 के
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13 मई, 2019 अंग्रेजी भाषा के प्रमुख समाचार पत्रों में
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प्रिय मित्रों‚
उत्कर्ष क्लासेज के एप e-utkarsh पर सभी प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए अतिमहत्वपूर्ण साप्ताहिक समसामयिकी (6 मई, से 12 मई 2019) के तथ्यों को अपलोड किया गया हैं जिसका लिंक हैं : https://eutkarsh.page.link/dcuimqJSZkA3a5Jh9 जरूर पढ़े व शेअर करें। आप पढ़ते हुए हाईलाईट कर सकते हैं,स्वयं के नोट्स बना सकते हैं,विडियो जोड़ सकते हैं एवं यदि आपने अभी तक e-utkarsh एप को Install नहीं किया हैं तो अपनी तैयारी को सुदृढ़ करने के लिए आज ही Install करें ।
परीक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण 14 मई, 2019 के
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परीक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण 15 मई, 2019 के
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शब्द शिल्प शृंखला-75

"कामयाबी"

कामयाबी के रास्ते टेढ़े मेढे और ढ़लान वाले होते हैं। कामयाबी ख़ैरात में भी नहीं मिलती है। कामयाबी के खाबड़-ख़ूबड़ रास्ते तक पूरा काफिला नहीं पहुँच पाता है। यहाँ इक्के-दुक्के वे लोग पहुँच पाते है जिनके पास औरों के लिए उलाहने है ही नहीं। उनकी सारी शिकायतें खुद के प्रति ही हैं। जो अपने अनुशासन के उसूलों से लेश मात्र भी भटकते नहीं हैं।

इस रास्ते पर चलने वाले पथवीर खुद की विजय के प्रति इतने आश्वस्त होते है कि वे धजीली विजय पताका को उच्च चोटी पर फहराने के लिए सफर में साथ लेकर जाते हैं। उनकी आँखों में भविष्य की आशा की एक किरण चमचमाती रहती है। वे अपने क्रोध का सदुपयोग करते हैं। छोटी छोटी उलझनों से वे हँसते खेलते पार पा लेते हैं। पल भर के लिए तन्द्रा उन पर हावी होती है तो उन्हें लगता है कि वे खुद से बिछड़ रहे हैं। मस्ताने चाँद से दिखने वाले कामयाब लोगों को मुसीबत के बादल बहुत देर तक नहीं ढक सकते हैं क्योंकि आप एक ऊँचाई पर पहुँच कर छुटकर समस्याओं को मुस्कुराकर नज़रंदाज़ कर कर सकते हैं। लोग आपके धैर्य की परीक्षा लेंगे। आप को एक कदम पीछे खींचेंगे। आपको कामयाबी की कोई और परिभाषा समझाएंगे। मगर आपने ठान रखा है कि गली के नुक्कड़ पर बैठे निठल्ले चार लोगों की राय आप के प्रति तभी बदलेगी जब आप की अपनी राय स्वयं के लिए कुछ सिद्धान्तों पर स्थिर हो चुकी होगी।

ये रास्ते कठिन अवश्य है लेकिन बाकी के सरल रास्तों पर चल कर फूटी कौड़ियों को हासिल कर करना भी क्या है। मेहनत के पके फलों को पेड़ पर चढ़ कर खाने और जमीन पर धूल झाड़ कर खाने में फर्क है।

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परीक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण 17 मई, 2019 के
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शब्द शिल्प शृंखला-76

"प्रेम"

दिलोदिमाग में पनपा तिलिस्म है। इसकी भूलभुलैयाँ में खोकर कुछ लोग जीवन भर के लिए रास्ता भटक गए और कुछ और ज्यादा मजबूत हो गए। प्रेम या तो पनपता नहीं और पनपता है तो मुद्दतों तक उसका असर रहता है। रसूखदार भी कई बार इसमें गच्चा खा जाते है और फकीरी में जीने वाले इसकी रस्म अदायगी अच्छे से कर लेते है।

लिपेपुते चेहरों की लिखावट ठीक से ना पढ़ पाने की सजा छाती छलनी होकर मिलती है। कभी कभी खुमार टूट जाने पर पता चलता है कि हमनें गलत जगह पर मकान किराये पर ले लिया है।

जीवन में कमान की प्रत्यंचा खींच कर लक्ष्य का संधान करने निकले हो तो दुनिया से ना रश्क करो ना इश्क। बेबसी में दुनिया की चाकचक्यता से इश्क हो भी जाये तो इधर की दुनिया को पूरा का पूरा उधर शिफ्ट मत कर देना। संवेदनाओं को कमजोर और लाचार करने के बजाय अपने प्रेम को भी अपने लक्ष्य की अविच्छिन्न धाराओं से सिञ्चित कर और अधिक पुष्पित और पल्लवित करना ठीक है।

प्रेमलोलुपता में कुछ भी बुरा नहीं है लेकिन बुरा तब लगता है जब अलमस्त हाथी मिमियाता मेमना बनकर दुनियां को अपना दुःख अलापता रहता है। प्रेम अन्योन्य संहारक नहीं बल्कि भाग्योदय का प्रतीक होना चाहिए। इसके लिए किसी की नसीहत काम नहीं आएगी। पहले खुद से नफ़रतें हटाओ। वक्त बेवक्त दिमाग में आने वाले ख्यालों की निगरानी रखो।

कड़वी बातों को दवाई की तरह निगल लो ताकि कल की ताजी सुबह आप उषा के समीर में निहित निगूढ़ ताकत लेकर अपने पार्यंतिक लक्ष्य की तरफ स्वाभाविक मुस्कान लेकर आगे बढ़ सको।


शब्द शिल्प:

डॉ अर्जुन सिंह साँखला
प्राचार्य, लक्की इन्सटिट्यूट अॉफ प्रोफेशनल स्टडीज, जोधपुर।
परीक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण 20 मई, 2019 के
Current Affairs के प्रश्नों को हमारे एप e-utkarsh
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