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सीबीएसई 12th के रिज़ल्ट के संदर्भ में
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आज सीबीएसई का 12th का रिज़ल्ट आया है और 500 में से 499 अंक लाने वाली बेटियों के फ़ोटो भी आए हैं । जो बच्चे अभी 12th में हुए हैं उन्हें तो उनके माता-पिता ने इन बच्चियों के अख़बार में आए फ़ोटो दिखा ही दिए हैं, साथ ही साथ जो 11th में प्रवेश पाए हैं, उन बच्चों को भी आज पैरेंट्स से स्पष्ट या घूमा-फिराकर यही अंकीय प्रतिस्पर्द्धा में टॉप रहने का व्याख्यान या नसीहतें ज़रूर मिली हैं ।
मानकर चलिएगा कि बहुत सारे विद्यार्थियों को ये समझा दिया जाएगा कि केवल उच्च अंक लाना ही कामयाबी का प्रतीक सूत्र है ।
मेरी नज़र से कुछ चिंतनीय बिन्दू आपके सामने रखूँगा। मेरे इन व्यक्तिगत विचारों पर सहमति या असहमति आपकी सोच-समझ, रूचि और जानकारी पर निर्भर करती है और मैं आपके पक्ष का सम्मान करता हूँ ।

सबसे पहली बात तो यह है कि अगर सारे पेपर पूर्णतया वस्तुनिष्ठ हों तो भी किसी हद तक माना जा सकता है कि शत-प्रतिशत अंक भी प्राप्त किए जा सकते हैं मगर जहाँ पेपर में सभी प्रकार के प्रश्न आते हैं और जहाँ सबजेक्टिव एप्रोच से भी उत्तर दिया जाता है, वहाँ शत-प्रतिशत अंक आना मेरी व्यक्तिगत राय में ना तो मुमकिन है और ना ही उचित । सारे विषयों में इस हद तक त्रुटिविहीन प्रदर्शन कैसे हो सकता है ? कैसे मूल्याँकनकर्ताओं को ये लगा कि किसी निबंध/पत्र या ह्यूमेनिटी के प्रश्नों के उत्तर इस क़दर शब्द-दर-शब्द उत्कृष्ट हो सकते हैं कि शत-प्रतिशत नम्बर मिलें ? वैज्ञानिकी विषयों में फिर भी समझ आता है मगर हिंदी, अंग्रेज़ी या अन्य साहित्य और ह्यूमेनिटी के अन्य विषयों में कैसे संभव हो सकता है ?
इस क़दर की उत्कृष्टता अगर बच्चों में आ गई है तो फिर ये फ़ख़्र की नहीं चिंता की बात है - बच्चों के लिए, शिक्षा व्यवस्था, पेपर निर्माण और मूल्याँकन के लिहाज़ से ।

दूसरा बिन्दू यह है कि ये अंकों की दौड़ क्यों? अख़बार में ये फ़ोटो, फिर स्कूल के पोस्टर/पैम्फ़्लेट्स/फ़्लेक्सेज़ में बड़ी-बड़ी तस्वीरें और इस बात का दावा कि उनके स्कूल ने ऐसा कर दिया है । यक़ीन मानिए इससे विज्ञापनीय लाभ है, स्कूल का फ़ेस वेल्यू बढ़ना है, फ़ीस बढ़ना है मगर अफ़सोस कि इन सबके साथ-साथ बच्चों पर अपेक्षाओं का अनचाहा बोझ भी डल रहा है। अंकों की गलाकाट प्रतियोगिता के लिए ट्यूशन, कोचिंग का आर्थिक भार माता-पिता के बटुए पर बढ़ रहा है और बच्चों के लिए 12th आते ही एक क़िस्म से असामाजिक हो जाने की अनुचित अपेक्षा भी जन्म ले लेती है ।
किस बात के लिए है ये सारी जद्दोजहद ? सामान्य समझ और आसपास के परिवेश पर बात रख पाने की अभिव्यक्ति को जानना ऐसे सौ फ़ीसदी अंकों से बेहतर है ।
देश के सारे अच्छे और उच्च सेवाओं की परीक्षाओं में न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता माँगी जाती है और इम्तिहान एवं साक्षात्कार में सामान्य समझ, वैचारिक स्पष्टता और सभी विषयों में अच्छी सामान्य जानकारी का मूल्याँकन किया जाता है। कहीं भी शत-प्रतिशत अंक की ना तो दरकार है और ना ही ऐसा होना पर किसी प्रतियोगी परीक्षा से उन्मुक्ति । बल्कि सुखद हक़ीक़त तो यह है कि ऐसी परीक्षाओं में पिछले सालों के चयनित अभ्यर्थियों का शैक्षणिक रेकार्डस देखिए, अपवाद को छोड़ दें तो अधिकांशत ये चयनित अभ्यर्थी स्कूली और महाविद्यालयी शिक्षा में औसत से थोड़ा ऊपर वाले अंक भार वाले ही निकलेंगे ।
ये उच्च अंक लाने की अंधी दौड़ आर्थिक बोझ का दुश्चक्र तो है ही, साथ ही साथ बढ़ती संवादहीनता के दौर में बच्चों का एक या दो साल खा जाना है । किताबी कीड़ा हो जाने से लाख गुना बेहतर एक जागरूक शिक्षित बच्चा होना है ।

तीसरी चिंता है इस महत्त्वाकांक्षा की लड़ाई में बच्चों की रचनात्मकता ख़त्म होने लग जाती है और अवसाद शुरू हो जाता है । ज़्यादा से ज़्यादा अंक लाने है, पड़ौसी से ज़्यादा लाने है, अपने रिश्तेदार के बच्चे से ज़्यादा अंक लाने है......उससे ज़्यादा लाने हैं, इससे ज़्यादा अंक लाने हैं ......!!! क्या है ये ? रटंत पद्धति से क्या दे देंगे हम बच्चों को ? कौनसी जिद्द है ये?

मेहरबानी करनी होगी बच्चों पर । हम उन्हें बोर्ड की कक्षा के लिहाज़ से अपेक्षाकृत गंभीर होने के लिए कहें, हम उन्हें अच्छे प्रदर्शन के लिए कहें मगर अंकों की दौड़ में मत उलझाएं । आप समझाइए कि 11th या 12th क्यों दसवीं तक की कक्षाओं से ज़्यादा गांभीर्य माँगती है मगर अंकों का प्रतिशत उनकी समझ का पैमाना ना बनाएँ ।
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मौलिक रहने दीजिए । अख़बार पढ़ने दें । अपनी रूचि को यथासमय पनपने दें । उन्हें वो होने दें, जो वे हैं और होना चाहते हैं । फिर जितने नम्बर लाएँ, वो सिर-माथे है। एक-दो प्रतिशत कम-ज़्यादा होंगे तो जिंदगियाँ ख़त्म नहीं होंगी मगर दिया गया अवसाद ख़त्म कर सकता है, और कुछ नहीं करेगा ये अवसाद, तनाव और अंकों की गलाकाट प्रतियोगिता तो इतना ज़रूर कर देगा कि स्वाभाविक और मौलिक व्यक्तित्व को नहीं पनपने देगा ।

सौ फ़ीसदी या इसके आसपास अंक प्रतिशत पाने वाले बच्चे काफ़ी कम होते हैं मगर इनको सनसनी बनाकर जो माहौल बनाया जाता है वह बच्चों के बहुत बड़े वर्ग के लिए कई प्रतिभाओं का गला घोंट देता है ।

बच्चों को आत्मविश्वास में शत-प्रतिशत अंक लाने को कहिए, रचनात्मकता और मौलिकता में भी । ये ज़्यादा ज़रूरी है । वे अपना सर्वश्रेष्ठ दे पाएँ, ऐसा माहौल देना है मगर वो शत-प्रतिशत लाएँ, ऐसी जिद्द का बोझ नहीं देना है ।

बच्चों का बच्चा बने रहना बचा रहे बस !

Dr. JK Soni (IAS)

#cbseresult #cbsetoppers #marksarenoteverything #nomarksfightplease #talentversusmarks #nopressureformarks
परीक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण 04 मई, 2019 के
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04 मई, 2019 अंग्रेजी भाषा के प्रमुख समाचार पत्रों में
प्रकाशित महत्वपूर्ण खबरों का हिन्दी भाषा में
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आज 4 मई के करंट अफेयर्स के प्रश्नों का अंग्रेजी में वीडियों देखने के लिए क्लिक करें https://www.youtube.com/watch?v=FY5Bd2tx88M
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शब्द शिल्प शृंखला-71

"सफल जीवन के लिए क्या?"

सफल जीवन के लिए एक शरीर चाहिए, जो जैसा भी हो आप उस पर नाज़ करते हो और उसका उद्देश्यपूर्ण उपयोग करते हैं।

सफल जीवन के लिए कुछ ऐसी भावनाएं चाहिए जो जब भी नदी की तरह बहती है तो लोग कौतुहल से उसका बहाव देखते हैं और कुछ लोग उसमें से अपना घड़ा भरने के लिए बेताब रहते हैं।

सफल जीवन के लिए आपके आस-पास ऐसा समाज चाहिए जिसका हर घटक आपके व्यक्तित्व का निर्माण करने के लिए अपने घटकों का निर्माण भी करता रहता है।

सफल जीवन के लिए आपको एक ऐसा परिवार चाहिए जहाँ हर सदस्य एक दूसरे को सहारा देता है।

सफल जीवन के लिए कुछ ऐसी महत्वाकांक्षाएं चाहिए जो धरातलीय हो मगर जाती अनंत आसमान की तरफ हो।

सफल जीवन के लिए ऐसी शिक्षा चाहिए जो हमारी महत्वाकांक्षाओं को पाने के रास्ते को निष्कंटक और सरल कर दे।

सफल जीवन के लिए आपको मस्तिष्क में एक बटन चाहिए जो सिर्फ और सिर्फ आपके चाहने पर ही चालू और बंद होता है और वो बटन यह सुनिश्चित करता है कि आपको किसको 'देखा' और 'अनदेखा' करना है।

सफल जीवन के लिए आपको एक ऐसा हमदर्द दोस्त चाहिए जिसे आप वो बता सको जिसे आप खुद को भी नहीं बता पाते।

और हाँ! सफल जीवन के लिए असफल लम्हों में ना टूटने वाली ताकत सबसे पहली शर्त है।

शब्द शिल्प:

डॉ अर्जुन सिंह साँखला
प्राचार्य, लक्की इन्सटिट्यूट अॉफ प्रोफेशनल स्टडीज, जोधपुर।
परीक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण 05 मई, 2019 के
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05 मई, 2019 अंग्रेजी भाषा के प्रमुख समाचार पत्रों में
प्रकाशित महत्वपूर्ण खबरों का हिन्दी भाषा में
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परीक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण 06 मई, 2019 के
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06 मई, 2019 अंग्रेजी भाषा के प्रमुख समाचार पत्रों में
प्रकाशित महत्वपूर्ण खबरों का हिन्दी भाषा में
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शब्द शिल्प शृंखला-72

"कोई तो धुन सवार होगी...?"

दिमाग में कोई धुन सवार है तो खुद को आगे बढ़ने से रोको मत।

बस,आज का काम आज करो।
और खुद के काम पर नाज़ करो।

धुन के पक्के लोग वे होते है जो कैनवास पर एक चित्र के पूरा होते ही दूसरा उकेरने के लिए तुरन्त कलम थाम लेते हैं। वे सुस्ताने के लिए थोड़ा सा लेटते भी है तो पलकों में असीम कल्पनाओं को समेट कर उठते हैं। एक कलम और एक ब्रश को दोनों कानों पर टांग कर अपने काम में इतने अलमस्त हो जाते है कि आपके ताकते रहने का उनको एहसास ही नहीं होता।

आप में एक उच्च पद पर आसीन 'ब्यूरोरोक्रेट' बनने की धुन सवार थी और आप बन गए। यहाँ सफर खत्म नहीं, बल्कि वहाँ से तो सफर शुरू हुआ है। मतलब की 'धुनी' लोगों के लिए परीक्षाओं का ये दौर कभी खत्म होता ही नहीं हैं।

'धुनी' लोग याद करने एवं भूलने दोनों में माहिर होते हैं। जैसे किताब पढ़ते वक्त उनको ये याद ही नहीं रहता कि उन्हें भोजन कब करना था। कभी कभी ये आज का काम कल या परसों पर भी डाल देते हैं लेकिन उनके शरीर का 'बायो-इंडिकेटर' मकसद पूरा होने तक उनको चैन से नहीं बैठने देता। इनमें काम करने की ऊर्जा आती कहाँ से है? ये अनुसंधान का विषय हो सकता है लेकिन इनकी ऊर्जा से काम अपने मुकाम पर पहुँच ही जाता है; ये बहु-प्रसिद्घ है। इनकी कार्यशैली में कुछ भी दिखावटी या बनावटी नहीं होता है। ये उल्टे, सीधे या सिकुड़ कर कैसे भी किताब को पढ़ लेंगे मगर इस धुन के चलते अपनी नींद को कहेंगे "तू सीधी खड़ी रह" "अभी वक्त नहीं है, बाद में आना"

भाई हम तो 'धुनी' लोगों की सनक के कायल है। बात एवरेस्ट पर चढ़ने की हो या प्रशांत महासागर में उतरने की, ये लोग आने वाले डर से जरा भी नहीं डरते। बस, ये इस बात से डरते हैं कि उनके भीतर की अद्भुत ऊर्जा अप्रयुक्त या नकारात्मक कामों में खर्च ना हो जाये।

ये अलमस्त और धुन पर सवार लोग जीवन में कुछ भी हल्का स्वीकार नहीं करते और कुछ भी हल्के में नहीं लेते।


शब्द शिल्प:

डॉ अर्जुन सिंह साँखला
प्राचार्य, लक्की इन्सटिट्यूट अॉफ प्रोफेशनल स्टडीज, जोधपुर।
‘उत्कर्ष’ RAS Mains की मुख्य
फैकल्टी भारत के विख्यात विशेषज्ञ श्री मनोज शर्मा सर विद्यार्थियों की विशेष मांग व हमारे आग्रह पर स्कूल व्याख्याता विशेष ‘इतिहास’ की पहली बार लाईव ऑनलाईन कक्षा लेते हुए।
https://youtu.be/KjCqsJ79NoE
#Trending_29
इतिहास के महान विशेषज्ञ #मनोज_शर्मा_सर का पहला ही विडियो ट्रेडिंग में आया।मनोज सर के नेतृत्व में ‘उत्कर्ष’ में 11 मई से व्याख्याता के नये बैच प्रारंभ हो रहे हैं।
आप भी विडियो जरूर देखें व अच्छा लगे तो Like & Share जरूर करें।
https://youtu.be/KjCqsJ79NoE
Utkarsh Classes pinned «#Trending_29 इतिहास के महान विशेषज्ञ #मनोज_शर्मा_सर का पहला ही विडियो ट्रेडिंग में आया।मनोज सर के नेतृत्व में ‘उत्कर्ष’ में 11 मई से व्याख्याता के नये बैच प्रारंभ हो रहे हैं। आप भी विडियो जरूर देखें व अच्छा लगे तो Like & Share जरूर करें। https://youtu.be/KjCqsJ79NoE»
वाह...मनोज सर (भारत के इतिहास के विख्यात विशेषज्ञ) का पहला ही विडियो #25Trending ...आप सभी का भरपूर स्नेह के लिए आभार।मनोज सर के नेतृत्व में 11 मई से व्याख्याता के नये ऑफलाईन बैच प्रारंभ होंगे । https://youtu.be/KjCqsJ79NoE
परीक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण 07 मई, 2019 के
Current Affairs के प्रश्नों को हमारे एप e-utkarsh
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क्लिक करें:- http://bit.ly/2vLKRIM

07 मई, 2019 अंग्रेजी भाषा के प्रमुख समाचार पत्रों में
प्रकाशित महत्वपूर्ण खबरों का हिन्दी भाषा में
वीडियों विश्लेषण देखने के लिए
क्लिक करें:-https://youtu.be/FhN_Jh4Lvvg
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Psycho ICT Notes (English Medium).pdf
English medium psychology & Pedagogy class.
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